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नैनीताल में भाजपाइयों को स्थापना दिवस से पहले करना पड़ा ‘यह’ काम, और इसके बाद न कर पाए माल्यार्पण-न खा पाए मिठाई

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स्थापना दिवस पर पं. दीन दयाल उपाध्याय पार्क की मूर्ति पर माल्यार्पण करते भाजपा कार्यकर्ता।

-खुद लगानी पड़ी दीन दयाल पार्क में झाड़ू
नैनीताल। शुक्रवार को सत्तारूढ़ दल भाजपा के कार्यकर्ता पार्टी के स्थापना दिवस पर पार्टी संस्थापक पं. दीन दयाल उपाध्याय की मूर्ति युक्त पार्क में आये तो संस्थापक की मूर्ति पर माल्यार्पण करने और मिठाई खाने-खिलाने आए थे, लेकिन करना कुछ ऐसा पड़ा कि यह कार्य भी नहीं कर पाए। उन्हें पार्क में गंदगी के अंबार को देखते हुए खुद झाड़ू लगानी पड़ी। यह स्थिति तब आई जबकि देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में चल रहे ‘स्वच्छ भारत अभियान’ और इस अभियान के तहत चल रहे ‘स्वच्छ भारत सर्वेक्षण’ में नैनीताल नगर पालिका द्वारा न केवल प्रतिभाग किया गया है, वरन सर्वेक्षण के तहत ‘ऐप’ के जरिये सफाई की शिकायतों के निस्तारण में 76वें स्थान पर रही भी है। पार्क में पानी का कोई प्रबंध भी न होने के कारण कई ने गंदे हाथों से पं. उपाध्याय को माल्यार्पण करना भी उचित नहीं समझा और गंदे हाथों से मिठाई भी नहीं खा पाए।

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यह स्थिति इसलिये भी चिंताजनक कही जाएगी कि नगर पालिका कार्यालय के बिल्कुल करीब स्थित इस पार्क में झाड़ू लगाने के लिए पालिका के अधिकारियों को भाजपा नगर अध्यक्ष द्वारा कहा भी गया था, बावजूद अपराह्न ढाई बजे तक झाड़ू नहीं लगी। ऐसे में स्थापना दिवस कार्यक्रम मनाने पहुंचे जिला उपाध्यक्ष विवेक साह कहीं से झाड़ू लेकर आये और पार्क की सफाई में जुटे। देखा-देखी भूपेंद्र बिष्ट और फिर पूर्व दायित्वधारी शांति मेहरा, उमेश गड़िया व पूर्व महिला जिलाध्यक्ष अमिता साह आदि भी पार्क की सफाई में जुटे। इस बीच फिर से पालिका के अधिकारियों को फोन किये गए, जिसके बाद एसआई कुलदीप सिंह पर्यावरण मित्रों को लेकर मौके पर पहुंचे, और भाजपाइयों द्वारा एकत्र की गयी गंदगी को उठाया। इस पर भाजपाइयों में कड़ी नाराजगी भी देखी गयी, और इसके बाद भी भाजपाइयों ने पं. उपाध्याय की मूर्ति पर माल्यार्पण किया और मिष्ठान्न वितरण किया। इस मौके पर नगर अध्यक्ष मनोज जोशी, विमल चौधरी, कुंदन बिष्ट, मीनू बुधलाकोटी, वंदना चौधरी व पान सिंह रौतेला सहित अन्य अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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सोशल मीडिया पर जल्दबाजी में कुछ भी कॉपी-पेस्ट करना किसी के लिए भी खतरनाक हो सकता है, और कमोबेश हर सोशल मीडिया का प्रयोक्ता इस जल्दबाजी का शिकार कभी भी हो सकता है। मंगलवार को अन्य ग्रुपों के साथ ही भाजपा से जुड़े कुछ वाट्सएप ग्रुपों में भी आई एक खबर राज्य सरकार के लिए जवाब देने के स्तर तक भारी पड़ गई है। सरकार को इस पर स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा है। स्पष्टीकरण में सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबर को झूठा बताया गया है। साथ ही आदेश की प्रति प्रदेश के डीजीपी को भी भेजकर मामले में संज्ञान लेने को कहा गया है

मंगलवार (27 मार्च 2018) को सोशल मीडिया पर यह खबर आई थी:

आति आवश्यक सूचना – उत्तराखण्ड सरकार ने सर्कुलर जारी कर दिया है कि जिस भी ग्राम सभा वासियों ने अपनी कृषि भूमि दस साल से जादा बंजर छोड़े हो गये वह जमीन भूमि हीनो को देने के लिये कवायत शुरू हो गयी है चाहे वह सिचाई की जमीन हो या कोई अन्य सरकार का मानना है कि बंजर भूमि की आवश्यकता अब लोगो को नही है इसलिये यह जमीन उन बेघर भूमिहीनो को दिया जाय जिनके पास जमीन नही है
और यह जल्दी होने वाला है
यह संदेश सबतक पहुँचाये ताकी इसपे विचार किया जाय

सरकार का स्पष्टीकरण

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सत्तारूढ़ दल से जुड़े व्यक्तियों द्वारा यह खबर डाले जाने से लोगों को इस खबर के साथ इसके द्वारा भूमिहीनों को सरकार द्वारा लाभान्वित किये जाने की योजना पर सहज ही विश्वास भी हो गया था। इसके बाद राजस्व विभाग में सचिव प्रभारी हरबंस सिंह चुघ द्वारा जारी खण्डन में कहा गया है कि यह सिर्फ अफवाहें हैं, अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। चुघ ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा इस तरह का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। न ही इस तरह के किसी मामले पर विचार किया जा रहा है। शरारती तत्व इस तरह के संदेश फैला रहे हैं। इस तरह के समाचारों का खण्डन किया जाता है और अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

यहाँ अपनी ओर हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि “यह अभी स्पष्ट नहीं है और जांच के अधीन है कि यह खबर कहाँ से शुरू हुई, और कौन इसके लिए जिम्मेदार है। अलबत्ता, हमारे संज्ञान में यह खबर भाजपा से जुड़े एक ग्रुप से आई। संभव है, वहां भी यह किसी अन्य ग्रुप से आई हो। इस खबर को प्रकाशित करने का हमारा उद्देश्य सिर्फ इतना है कि सोशल मीडिया पर ख़बरें डालने से पहले गंभीरता, तथ्यों की जाँच की  जरूरत है। अन्यथा गलती किसी से भी, हम से भी हो सकती है। इसीलिए ग्रुप में यह खबर डालने वाले व्यक्ति का नाम छुपा दिया गया है।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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