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एक्सक्लूसिवः कुमाऊं विवि दीक्षांत समारोह में 55 छात्र-छात्राओं को देगा पदक

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नैनीताल, 19 नवंबर 2018। कुमाऊं विवि आगामी 28 नवंबर को आयोजित होने वाले अपने 15वे दीक्षांत समारोह में अपने 55 छात्र-छात्राओं को विभिन्न पदक देने जा रहा है। खास बात यह है कि इनमें छात्राओं की संख्या सर्वाधिक है। खासकर 44 स्वर्ण पदक प्राप्त करने वालों में 34 छात्राएं एवं केवल 10 छात्र शामिल हैं। विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल ने बताया कि स्नातकोत्तर कक्षाओं में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने के लिए प्रीति ढेक, निकिता गुप्ता, कुसुम पांडे, मुक्ता कनवाल, सपना बिष्ट, काजल श्रीवास्तव, गुलफशा अंसारी, नीतू, आस्था नेगी, मीनाक्षी पाठक, हेमलता, पूनम शाही, प्रदीप कुमार, निखलेश सिंह मेहता, अरविंद सिंह, पूजा, ज्योति शर्मा, दीक्षा अग्रवाल, सपना पंत, किरनदीप कौर, अंबिका अग्निहोत्री, अनुभव मेहरा, कृष्ण सिंह बिष्ट, ललित मोहन जोशी, आशीष शर्मा, चित्राक्षी पंत, प्रीति फुलेरा व शिखा तिवारी तथा स्नातक स्तर पर कला संकाय से नीतू कौर, अनुष्ठा शाही व गीतांजलि गिरि गोस्वामी, विज्ञान संकाय के लिये मनीषा जोशी, वसुंधरा लोधियाल व निधि बिष्ट, वाणिज्य एवं प्रबंधन संस्थान के लिए मनीष भाकुनी, कविता मनराल व मनीश यादव, विधि संकाय के लिए स्वाति सिंह, संदीप मणि व दिव्यांश उज्जवल को कुलपति स्वर्ण पदक प्रदान किये जाएंगे। इनके अलावा स्नातक स्तर पर सर्वाधिक अंक प्राप्त करने लिए नीतू कौर, मनीषा जोशी, कविता मनराल व स्वाति सिंह को गौरा देवी स्वर्ण पदक दिये जाएंगे। इनके अतिरिक्त 11 छात्र-छात्राओं को स्पांसर्ड स्वर्ण पदक भी प्रदान किये जाएंगे।

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प्रीतम भरतवाण।

नैनीताल, 16 नवंबर 2018 । उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय इस वर्ष पहली बार मानद उपाधि देने की शुरुआत करने जा रहा है। विवि के द्वारा पहली बार प्रदेश के लोक गायक व ‘जागर सम्राट’ के नाम से प्रसिद्ध प्रीतम भरतवाण को डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी जाएगी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के साथ ही कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल ने यह जानकारी दी। बताया कि उमुवि का दीक्षांत 27 नवंबर को हल्द्वानी स्थित परिसर एवं कुमाऊं विवि का दीक्षांत समारोह 28 नवंबर को नैनीताल स्थित डीएसबी परिसर के एएन सिंह सभागार में आयोजित किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि कुमाऊं विवि के द्वारा प्रख्यात लेखक एवं कवि तथा केंद्रीय फिल्म प्रमाणन (सेंसर) बोर्ड के निदेशक प्रसून जोशी को मानद उपाधि देना पहले तय हो गया था, जबकि अब उमुवि द्वारा प्रीतम भरतवाण को मानद उपाधि देना तय हुआ है। यह पहला मौका होगा जब 31 अक्तूबर 2005 को स्थापित उत्तराखंड मुक्त विवि किसी शख्शियत को मानद उपाधि देगा। इसके अलावा आगामी 30 नवंबर को अपना पहला दीक्षांत समारोह मना रहा राज्य का दून विवि पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी एवं राज्य के चर्चित लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी को मानद उपाधि देगा।

कुलपति प्रो. नौड़ियाल ने बताया कि दोनों विवि के दीक्षांत समारोह में प्रदेश की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य मुख्य अतिथि एवं प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत विशिष्ट अतिथि होंगे।

प्रीतम भरतवाण के बारे में :

लोकगायक और जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण को उत्तराखंड के साथ साथ देश विदेशों में उत्तराखंडी संस्कृति और ढोल को पहुंचाने का श्रेय दिया जाता है। प्रीतम का जन्म देहरादून के रायपुर ब्लॉक के सिला गांव में एक औजी परिवार में हुआ था। जिस कारण लोक संगीत उन्हे विरासत में मिली है। उनके घर पर ढोल, डौर, थाली जैसे कई उत्तराखंडी वाद्य यंत्र हुआ करते थे, और घर में संगीत का मौहाल था। उनके पिता और दादा पहाड़ में होने वाले खास त्यौहारों में जागर लगाते थे। प्रीतम की शुरूवाती शिक्षा गांव के पास ही एक विद्यालय में हुई। बताया जाता है कि प्रीतम भरतवाण ने मात्र 6 साल से ही थाली बजाकर पहाडी संगीत को सीखना शुरू कर दिया था, आगे उन्होने संगीत की ट्रेनिंग भी ली। । संगीत के प्रति रूझान और उनकी कला की पहचान सबसे पहले स्कूल में रामी बारौणी के नाटक में बाल आवाज़ देने से हुई। उन्होने मसूरी के एक नृत्य नाटक में डांस किया जिसके बाद स्कूल के शिक्षकों पर उनकी नजर पड़ी। इसके स्कूल के बच्चों के साथ प्रीतम ने प्रिसिंपल के ऑफिस जाकर गाने का ऑडिशन दिया। जिसमें वो पास भी हो गये थे। इसके बाद तो उन्हे स्कूल के हर कार्यक्रमों में गाने का मौका मिलने लगा। सबसे खास बात यह रही कि मात्र 12 साल की उम्र में ही उन्होने लोगों के सामने जागर गाना शुरू कर दिया था. इस जागर को गाने के लिए उनके परिवार के जीजाजी और चाचा ने उन्हे कहा था।बताया जाता है कि वे जब अपने परिवार के लोगों के साथ शादी बारात में जाया करते थे, वहां उनके पिता और चाचा जागर लगाया करते थे। एक दिन जब आधी रात को जागर लगाते समय उनके पिता थक गए तो पिता ने प्रीतम से जागर लगाने को कहा। प्रीतम ने ऐसा जागर प्रस्तुत किया सभी मन्त्रमुग्ध हो गए। यही संगीत के क्षेत्र में उनकी पहली प्रस्तुति थी। वे ना सिर्फ जागर, बल्कि लोकगीत, पवांडा, और लोकगीत भी गाते हैं, और कई लोक वाद्य यंत्र भी बजाते हैं। प्रीतम को पहली सफलता 1995 में रामा कैसेंट से रिलीज हुई कैसेंट ‘तौंसा बौं’ से और आगे प्रसिद्धि ‘सरूली मेरू जिया लगीगे’ गाने से मिली। 1988 में प्रीतम ने ऑल इंडिया रेडियों के जरिए लोगो को अपनी प्रतिभा दिखाई। प्रीतम भरतवाण को उनकी आवाज और प्रतिभा के लिए देश विदेशों में कई अवॉर्ड मिल चुके हैं। अमेरिका की सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी में वे विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर बच्चों को ढोल सागर सिखाने भी जाते हैं। वे उत्तराखंड की संस्कृति का विदेशों में प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। इसके साथ ही प्रीतम का जन्मदिन अब उत्तराखंड में जागर संरक्षण दिवस के रूप में मनाया जाने लगा है।

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-दीक्षांत समारोह में अल्मोड़ा निवासी प्रख्यात लेखक-कवि एवं केंद्रीय फिल्म प्रमाणन (सेंसर) बोर्ड के निदेशक प्रसून जोशी को मानद उपाधि दी जाएगी
-150 से अधिक शोधार्थियों को पीएचडी, 4 को डी लिट, 2 को डीएससी एवं करीब 50 छात्र-छात्राओं को पदक किये जाएंगे भेंट, अभी बढ़ भी सकती है संख्या
-एक वर्ष के भीतर ही केवल 7 माह के अंतराल में आयोजित होगा कुविवि का दूसरा दीक्षांत समारोह
नैनीताल, 12 नवंबर 2018। पहले 14 व 15 को प्रस्तावित एवं निकाय चुनाव के कारण टला उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय एवं कुमाऊं विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह अब 27 व 28 नवंबर को हल्द्वानी व नैनीताल में होंगे। इस बारे में सोमवार को स्थिति साफ हो गयी है। कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल ने बताया कि कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर के एएन सिंह सभागार में प्रस्तावित दीक्षांत समारोह में अल्मोड़ा निवासी प्रख्यात लेखक-कवि एवं केंद्रीय फिल्म प्रमाणन (सेंसर) बोर्ड के निदेशक प्रसून जोशी को मानद उपाधि दी जाएगी। साथ ही अब तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 150 से अधिक शोधार्थियों को पीएचडी, 4 को डी लिट, 2 को डीएससी एवं करीब 50 छात्र-छात्राओं को पदक भेंट किये जाएंगे। हालांकि पीएचडी, डीएससी व डी लिट की संख्या दीक्षांत समारोह तक होने वाले साक्षात्कारों के आधार पर बढ़ भी सकती है।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में उमुवि का दीक्षांत समारोह 14 नवंबर व कुविवि का दीक्षांत समारोह 15 नवंबर को होना प्रस्तावित था। लेकिन इस बीच निकाय चुनावों की घोषणा हो जाने के बाद दीक्षांत समारोह को स्थगित करना पड़ा। इसके साथ ही मुख्य अतिथि के रूप में पधारने के लिए देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद एवं उप राष्ट्रपति बेंकया नायडू को आमंत्रण भेजे गये थे, किंतु दोनों के कार्यालयों से इंकार कर दिया गया है। इससे पूर्व 13वां दीक्षांत समारोह 24 अक्तूबर 2016 को व 14वां दीक्षांत समारोह 18 मई 2018 को आयोजित हुआ था, और इस मौके पर देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को मानद उपाधि दी जाएगी। इस प्रकार यह पहला मौका होगा जब एक वर्ष के भीतर ही और केवल 7 माह के अंतराल में भी विवि का दूसरा दीक्षांत समारोह आयोजित होने जा रहा है। उल्लेखनीय है कि 14वां दीक्षांत समारोह भी एनएसए अजीत डोभाल के पास समय की उपलब्धता न होने के कारण दो बार टालना पड़ा था।

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  • 25 विषयों में 200 के करीब डीलिट, डीएससी व पीएचडी की उपाधियां देने का भी हुआ अनुमोदन

नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय देश के ‘जेम्स बॉन्ड’ कहे जाने वाले उत्तराखंड मूल के, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को इस वर्ष आयोजित होने वाले विवि के दीक्षांत समारोह में मानद उपाधि से नवाजेगा। दीक्षांत समारोह के लिए आगामी 18 मार्च की तिथि रखी गयी है, किंतु राजभवन की ओर से बताया गया है कि इस तिथि के लिए अभी श्री डोभाल की ओर से समय नहीं मिल पाया है। कोशिश है कि उनकी सुविधा पर ही तिथि तय की जाएगी।

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शनिवार 23 फ़रवरी 2018 को कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल की अध्यक्षता में विवि प्रशासनिक भवन में आयोजित कुमाऊं विवि की कार्य परिषद एवं वित्त समिति ने गत 15 फरवरी 2018 को आयोजित विवि कोर्ट एवं विद्या परिषद द्वारा इस संबंध में पारित प्रस्तावों का अनुमोदन कर दिया। इसके साथ ही बैठक में दीक्षांत समारोह में वर्ष 2017 के करीब 200 शोधार्थियों को डीलिट, डीएससी व पीएचडी की उपाधियां देने का भी अनुमोदन कर दिया गया। साथ ही वित्त समिति ने शासन से विवि को वेतन के अतिरिक्त प्राप्त दो करोड़ रुपए के बजट का अनुमोदन भी कर दिया। बैठक में प्रभारी कुलसचिव बहादुर सिंह बिष्ट, वित्त अधिकारी अनिता आर्य, कार्य परिषद सदस्य डा. महेंद्र पाल, अरविंद पडियार, जेएस बुधानी, डा. सुरेश डालाकोटी व रसपाल मल्होत्रा के साथ डा. आराधना शुक्ल, डा. शेखर जोशी व डा. बीना पांडे आदि संकायाध्यक्ष तथा विधान चौधरी व अन्य सदस्य मौजूद रहे।

इससे पूर्व बृहस्पतिवार 15 फ़रवरी 2018 को कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल की अध्यक्षता में हुई कुमाऊं विश्वविद्यालय की कोर्ट सभा की बैठक में कार्य परिषद के सदस्य सुरेश डालाकोटी ने श्री डोभाल को मानद उपाधि देने का प्रस्ताव रखा, और अन्य सदस्य अधिवक्ता बहादुर सिंह पाल ने इसका अनुमोदन तथा सभी उपस्थित सभी कार्य परिषद सदस्यों से सर्वसम्मति से इसका समर्थन किया। इसके अलावा 2016-17 में व्यक्तिगत छात्रों की परीक्षा को उत्तराखंड मुक्त विवि को हस्तांतरित किए जाने से विवि को करीब 22 करोड़ का आर्थिक नुकसान होने का आरोप लगाते हुए इसके दृष्टिगत राज्य सरकार से विवि के बजट में सुधार किए जाने अतिरिक्त अनुदान देने की मांग की गई। 

यह पूर्व आलेख भी पढ़ें : जब कुमाऊँ विवि के दीक्षांत समारोह में आये थे कलाम 

  • नैनीताल के बच्चों ने एपीजे से बनाया था ‘काका कलाम’ का रिश्ता
  • ‘काका कलाम’ ने बच्चों से यहां कहा था- सपने देखो और उन्हें कार्यान्वित करो
  •  यहां 9-10 अगस्त 2011 नैनीताल के बच्चों से भी एक गुरु की भांति मिले थे दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति को
  • कहा था-‘असंभव कल्पनाएें करो और उन्हें पूरा कर अद्वितीय बनो’ , ‘मुझे कुछ लेना है’ के बजाय’ मुझे देश को कुछ देना है’ का भाव रखो

नैनीताल के सेंट मेरीज कान्वेंट हाई स्कूल में बोलते डा. कलाम।

नवीन जोशी, नैनीताल। ‘ड्रीम…. ड्रीम…. ड्रीम, ट्रांसफर देम इन टु थाट्स एंड रिजल्ट्स, एंड मेक एक्शन’ यानी खूब-खूब सपने देखो, उन्हें विचारों और परिणामों में बदलों और फिर कार्यान्वित करो। यह वे अनुकरणीय और प्रेरणादायी शब्द थे, जो दुनिया से ‘रातों को सोने न देने वाले सपने’ देखने का आह्वान करने वाले स्वप्नदृष्टा युगपुरुष दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने नैनीताल के बच्चों से कहे थे। देश के शीर्ष पद व सम्मान प्राप्त करने और दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिक होने के बावजूद बच्चों को पढ़ाने, देश के ‘विजन-2020’ के लिए प्रेरणा देने के लिए उनके बीच ही बालसुलभ तरीके से अधिक समय लगाने वाले, वास्तविक अर्थों में सच्चे भारतीय, मां भारती के सच्चे सपूत, चमत्कारिक प्रतिभा के धनी, ज्ञान-विज्ञान व प्रौद्योगिकी के साथ ही कला, साहित्य, संस्कृति के साथ ही संगीत के प्रेमी, मानवता के पोषक, देश को स्वदेशी सैन्य ताकत से युक्त करने वाले ‘मिशाइल मैन’, ‘रामेश्वरम के कलाम’ को कदाचित पहली बार नैनीताल के बच्चों ने ही ‘काका कलाम’ नाम से पुकारा था। यहां डा. कलाम से सेंट मेरीज कान्वेंट हाई स्कूल में नौ अगस्त 2011 को बच्चों ने घंटे के वार्तालाप में उनसे ढेरों प्रश्न पूछकर अपने बालमन की अनेक जिज्ञासाएं भी शांत की थीं।

27 अगस्त 2015 को शिलांग में बच्चों को पढ़ाते हुए दिवंगत हुए बच्चों के प्यारे ‘काका कलाम’ 9-10 अगस्त 2011 को नैनीताल में भी बच्चों के बीच थे। यहां उन्होंने नगर के सेंट मेरी कांन्वेंट स्कूल में बच्चों को संबोधित किया व उनकी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। यहां कलाम आये तो निर्धारित समय से एक घंटे बाद, लेकिन बच्चों के बीच ऐसे रमे कि पता ही नहीं चला कि कब निर्धारित से आधा घंटा अधिक समय बीत गया। यहां उन्होंने बच्चों के न केवल सवालों के जवाब दिये, वरन एक शिक्षक या बुजुर्ग से अधिक उन्हें जीवन की दीक्षाएें भी दीं। अपने वक्तव्य की शुरुआत उन्होंने बच्चों में यह विश्वास भरते हुऐ कि बच्चों में बड़ी महानता छुपी है, बच्चों को बताया कि कैसे बड़े लक्ष्यों को, कड़ी मेहनत से अच्छी पुस्तकों का लगातार अध्ययन करके ज्ञान को स्वयं में समाहित कर, उसका प्रयोग देश-समाज की समस्याओं को दूर करके महानता हासिल की जा सकती है। उन्होंने बच्चों से कहा, हमेशा ‘मुझे कुछ लेना है’ के बजाय’ मुझे देश को कुछ देना है’ का भाव रखें। भ्रष्टाचार की खिलाफत अपने घर से अपने पिता को प्रेरित करके करें तो यह समस्या स्वत: समाप्त हो जाऐगी। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा को सर्वाधिक महत्वपूर्ण बताते हुऐ कहा कि प्राथमिक शिक्षा का रचनात्मक होना जरूरी है। शिक्षकों व पाठ्य सामग्री को भी रचनात्मक बनाना होगा, कक्षाओं लिये इसके।

नैनीताल के सेंट मेरीज कान्वेंट हाई स्कूल में नौ अगस्त 2011 को बच्चियों का अभिवादन करते दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम।

नैनीताल के सेंट मेरीज कान्वेंट हाई स्कूल में नौ अगस्त 2011 को बच्चियों का अभिवादन करते दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम।

अपनी पुस्तक ‘विंग्स ऑफ फायर’ का उद्धृत करते हुए उन्होंने बच्चों में यह विश्वास जगाया कि वह क्षमता, अच्छाई, विश्वास और सपनों सरीखे विचारों के पंखों के साथ पैदा हुऐ हैं, न कि रोने के लिये, क्योंकि उनमें पंख हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञान व्यक्ति को रचनात्मक बनाता है। लेकिन इसके लिये विचारों में रचनात्मकता और चरित्र की सुंदरता, घर का अच्छा माहौल होने चाहिऐ, तभी ज्ञान दुनिया में शांति ला सकता है। देश के ‘विजन-2020’ पर उन्होंने कहा कि जहां 70 फीसद ग्रामीणों का उत्थान हो, उन्हें ऊर्जा व साफ पानी मिले तथा सामाजिक व आर्थिक कारणों से किसी को शिक्षा लेने से न रोका जाऐ, भ्रष्टाचार, गरीबी और खासकर महिलाओं व बच्चों के साथ होने वाले अपराध न हों, वह ऐसे भारत की कल्पना करते हैं। उन्होंने खासकर बालिकाओं से निडर, ज्ञानवान, संस्कृतिनिष्ठ व सशक्त बनने का आह्वान किया और विश्वास दिलाया कि महिलाएें सशक्त होंगी तो देश स्वत: विकसित राष्ट्र बन जाऐगा। इससे पूर्व उन्होंने विद्यालय पहुंचने पर सबसे पहले बच्चों से ही हाथ मिलाऐ और फूल ग्रहण किये। बच्चों के शिर पर हाथ रखकर भी उन्होंने आशीर्वाद दिये। ऐसा लगा नहीं कि देश के सर्वाेच्च पद पर बैठा और मिसाइल मैन कहा जाने वाला एक सामने हो युगदृष्टा बच्चों के। तभी तो विद्यालय के भीतर न आ पाऐ स्थानीय बच्चे घरों और सड़क के पार से भी उनके स्वागत में नारेबाजी कर रहे थे।
With APJ Abdul KalamWith APJ Abdul Kalaamवहीं अगले दिन कुमाऊं विवि के 11 वें दीक्षांत समारोह में बच्चों को दीक्षोपदेश देते हुऐ कलाम ने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वह ग्राहम बेल, सर सीवी रमन, रामानुजम, राइट भाईयों, एडीशन, हार्डी व प्रो. चंद्रशेखर की भांति असंभव कल्पनाएें को पूरा करने की हिम्मत दिखाकर अद्वितीय (यूनीक) बनें, तभी वह मानवीय सीमाओं को तोड़ सकते हैं। कहा कि अद्वितीय बनने के लिये उन्हें जीवन में ऊंचे लक्ष्य रखने होंगे, लगातार ज्ञानार्जन करना होगा, कठिन परिश्रम करना होगा तथा महान उपलब्धि का अहसास करने के लिये दृढ़ रहना होगा, यदि ऐसा करेंगे तो स्वत: ही आप अद्वितीय बन जाएेंगे। इस दौरान कुमाऊं विवि के 36,711 विद्यार्थियों को उपाधियां तथा स्नातकोत्तर के 26 व स्नातकोत्तर स्तर पर सर्वोच्च अंक प्रदान करने वाले विद्यार्थियों को कुलपति स्वर्ण, रजत व कांश्य तथा चार छात्राओं को गौरा देवी स्वर्ण पदक व दो अन्य पदक प्रदान किये। उन्होंने उपाधि धारकों व पदक विजेताओं से बातचीत भी की।

बताया था आज और कल का अंतर

नैनीताल। दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति डा. कलाम ने कहा था कि आज नये तरीके से सोचने की जरूरत है। कल के तरीके से आगे काम नहीं चल सकता। उन्होंने आज और कल में अंतर बताते हुऐ कहा कि कल प्राकृतिक संसाधनों का अर्थ शक्ति, ताकत से होता था, जबकि आज ज्ञान ताकत है। कल पदानुक्रम से सत्ता चलती थी, और तालमेल से काम चलाने का समय है। कल शेयरहोल्डर पहले गिने जाते थे, आज उपभोक्ता पहले गिने जाते हैं। कल नियोक्ता आदेश देते थे आज टीम या समूह निर्णय लेते हैं। कल वरिष्ठता से आपकी स्थिति बतलाई जाती थी, आज आपकी रचनात्मक आपको आगे बढ़ाती है। कल उत्पादक उपलब्धता पर आधारित था, आज प्रतिस्पर्धा महत्वपूर्ण है। कल कीमत अतिरिक्त कारक थी आज कीमत ही सब कुछ है। कल हर कोई प्रतिस्पर्धी था, आज हर कोई उपभोक्ता है तथा कल अवसरवादिता के आधार पर लाभ प्राप्त किये जा सकते थे, जबकि आज कार्य और सफलता मेहनत से ही प्राप्त किये जा सकते हैं।

‘विजन 2020’ में उत्तराखंड को बताई थी उसकी हिस्सेदारी

नैनीताल। डा. कलाम ने देश के विजन-2020 में उत्तराखंड को भी दायित्व सोंपा था। कहा था-इसके लिये उत्तराखंड को अगले नौ वर्षों में प्रति व्यक्ति आय को तीन गुना करना होगा। साक्षरता दर को 9 0 फीसद करना होगा। शिशु मृत्यु दर जो 10 प्रति हजार है, उसे कम करना होगा। पर्यटक राज्य के रूप में देशी पर्यटन को दो एवं विदेशी पर्यटन को तीन गुना करना होगा। राज्य वासियों में अधिक धनार्जन की क्षमता विकसित करनी होगी। ग्रामीण क्षेत्रों को शहरी सुविधाएें देनी होंगी तथा राज्य की जैव विविधता खासकर जैव ईधन एवं प्राकृतिक औषधियों को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने राज्य से अपने कार्बन उत्सर्जन के बराबर कार्बन सोखकर को ‘कार्बन न्यूट्रल स्टेट’ बनने को भी कहा।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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