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कुमाऊं विश्वविद्यालय में प्रवेशार्थियों के लिए महत्वपूर्ण समाचार: प्रवेश लेना हो तो जरूर पढ़ें यह समाचार…

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-कुविवि का नये सत्र हेतु प्रवेश एवं शैक्षणिक कलेंडर घोषित
-15 मई से शुरू होंगे पहले सेमेस्टर में प्रवेश हेतु पंजीकरण, बाद में नहीं बदल सकेंगे विषय, ना ही बदल सकेंगे परिसर-महाविद्यालय, प्रवेश के समय नहीं लिया जाएगा कोई शुल्क
– दूसरे सेमेस्टर में बाह्य विवि से आगे छात्रों को प्रवेश 75 फीसद पाठ्यक्रम समान होने पर ही दिया जाएगा
नवीन समाचार, नैनीताल, 16 अप्रैल 2019। मंगलवार को कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल की अध्यक्षता में परीक्षा समिति की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। विवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. संजय पंत के संचालन में आयोजित हुई बैठक में विवि की स्नातक व स्नातकोत्तर प्रथम सेमेस्टर की कक्षाओं में 2019-20 के शैक्षणिक सत्र में प्रवेश के लिए पंजीकरण की तिथियां 15 से 29 जून तक निर्धारित की गयीं। साथ ही आगामी सत्र के लिए प्रवेश की पूरी प्रक्रिया हेतु समय सारणी एवं आगे पूरे शैक्षणिक सत्र के कलेंडर को अनुमोदित कर दिया गया।
पंजीकृत छात्रों की योग्यतांक सूची परिसरों व महाविद्यालयों के स्तर पर तैयार करने के लिए ऑनलाइन एडमिन एवं पासवर्ड 2 जुलाई को जारी किये जाएंगे और पंजीकरण कराने वाले विद्यार्थियों के मूल प्रमाण पत्रों की जांच के उपरांत योग्यांक सूची 10 जुलाई को घोषित की जाएगी, तथा चयनित विद्यार्थियों को 11 से 18 जुलाई के बीच प्रवेश लेना होगा और 23 जुलाई से उनकी पढ़ाई शुरू हो जाएगी। आगे विद्यार्थियों के अभिलेखों की जांच 24 जुलाई से 24 अगस्त तक कर 25 अगस्त तक प्रवेशार्थियों की सत्यापित सूची विश्वविद्यालय को उपलब्ध करा दी जाएगी। यह भी तय हुआ कि विद्यार्थियों को उनके चयनित विषयों एवं परिसर या महाविद्यालयों को बदलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। विशेष परिस्थितियों में 24 अगस्त तक ही विषय बदले जा सकेंगे। महाविद्यालय बदलने के लिए दोनों महाविद्यालयों के प्राचार्यों की अनापत्ति व परीक्षा नियंत्रक की अनुमति जरूरी होगी। यह भी तय हुआ कि विद्यार्थियों से प्रवेश के समय शुल्क शुरू में नहीं बल्कि आगे परीक्षा के लिए आवेदन पत्र भरते समय ऑनलाइन जमा कराया जाएगा। शुल्क जमा करने के बाद ही छात्रों का परीक्षाफल घोषित किया जाएगा। पहले सेमेस्टर के प्रवेशार्थियों की नामांकन संख्या वर्ष 2018 के अनुरूप ही रहेगी, केवल बाह्य विवि से आये छात्रों को ही नई नामांकन संख्या दी जाएगी। वहीं दूसरे सेमेस्टर में बाह्य विवि से आगे छात्रों को उनकी कक्षाओं का पाठ्यक्रम 75 फीसद मिलान करने पर ही दिया जाएगा। यह भी तय हुआ कि स्नातक व स्नातकोत्तर दोनों स्तरों पर विषम सेमेस्टर की कक्षाएं उनकी परीक्षाओं के तुरंत पश्चात बिना परीक्षाफल का इंतजार किये ही शुरू कर दी जाएंगी। 2018-19 के सत्र से स्नातक-स्नातकोत्तर कक्षाओं के आंतरित व प्रयोगात्मक परीक्षाओं के अंक महाविद्यालयों को 30 नवंबर से पहले देने होंगे। किसी कारण परीक्षा से छूटे छात्रों की परीक्षाएं एक माह के भीतर अतिरिक्त शुल्क देकर कराई जाएंगी। बैठक में विवि से संबद्ध मंडल के सभी सरकारी और निजी कॉलेजों के प्राचार्य मौजूद रहे।

सरकारी-निजी कॉलेजों को मान्यता के लिए 30 अप्रैल तक की समय सीमा

नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय से विभिन्न विषयों के लिए संबद्धता हासिल करना चाह रहे सरकारी एवं निजी महाविद्यालयों को आगामी 30 अप्रैल की समय सीमा के भीतर अपनी औपचारिकताएं पूरी करके देनी हांेगी। यह बात मंगलवार को कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल की अध्यक्षता में आयोजित हुई मान्यता समीक्षा की बैठक में तय हुई। कुलसचिव डा. महेश कुमार ने बैठक के बाद बताया कि महाविद्यालयों के अब तक प्राप्त प्रस्ताव विवि की ईसी यानी कार्यपरिषद की बैठक में स्वीकृति के बाद राजभवन को भेज दिये गये हैं। आगे भी 30 अप्रैल तक प्राप्त होने वाले प्रस्तावों को कार्य परिषद की बैठक में स्वीकृति लेकर राजभवन को अंतिम स्वीकृति के लिए भेज दिया जाएगा। बैठक में कुविवि से संबद्ध कॉलेजों में संचालित हो रहे अस्थायी संबद्धता वाले विषयों की संबद्धता के विस्तार एवं लंबित संबद्धता सहित मान्यता से जुड़े अन्य विषयों पर भी चर्चा की गई।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं विश्वविद्यालय ने किया कमाल, इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में रही उपविजेता

फगवाड़ा में मिनी गोल्फ प्रतियोगिता के उपविजेता के रूप में पुरस्कार ग्रहण करते कुविवि के क्रीड़ाधिकारी एवं मैनेजर।

नवीन समाचार, नैनीताल, 10 अप्रैल 2019। कुमाऊं विवि ने अखिल भारतीय मिनी गोल्फ प्रतियोगिता के पुरुष वर्ग में राष्ट्रीय स्तर पर उपविजेता रहने का गौरव प्राप्त किया है। प्रतियोगिता में विवि के पुरुषों की टीम ने एक स्वर्ण, एक रजत व 2 कांश्य तथा महिला खिलाड़ियों ने महिला वर्ग में फेयर प्ले ईवेंट में एक रजत एवं दो कांश्य पदक प्राप्त किये हैं। साथ ही प्रतियोगिता के स्ट्रोक ईवेंट में महिलाओं ने तीन रजत व दो कांश्य एवं पुरुषों ने एक-एक स्वर्ण, रजत व कांश्य पदक भी प्राप्त किये। इस प्रकार कुविवि की टीम ने कुल दो स्वर्ण, 6 रजत एवं 7 कांश्य पदक प्राप्त किये।
कुविवि के क्रीड़ाधिकारी एवं इस प्रतियोगिता में पर्यवेक्षक के रूप में अपनी भागेदारी देने वाले डा. नागेंद्र शर्मा ने बताया कि बीती 3 से 6 अप्रैल के बीच फगवाड़ा जालंधर स्थित लवली प्रोफेसनल विवि में आयोजित इस प्रतियोगिता में देश भर की भारतीय विवि संघ से मान्यता प्राप्त 13 विश्वविद्यालयों की टीमों ने प्रतिभाग किया। विवि की 8 सदस्यीय महिला टीम में रानीखेत की सुषमा, पिथौरागढ़ की पूजा पालीवाल, रुद्रपुर की प्रिया बिष्ट, बीना रानी व प्रगति दुम्का, अल्मोड़ा रीतिका टम्टा, नैनीताल की पूजा एवं रामनगर की गीता तथा पुरुष टीम में रामनगर के रोहित, खटीमा के मनीष बोरा, पिथौरागढ़ के विनय किशोर, नैनीताल के विवेक बिष्ट, रानीखेत के अर्जुन बिष्ट तथा रुद्रपुर के हिमांशु जोशी, अरुण कुमार व राणा सिंह राणा शामिल थे। मैनेजर की जिम्मेदारी नितीश कुमार व ममता गोस्वामी के पास थी। खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल ने विजेता खिलाड़ियों को सम्मान समारोह आयोजित कर नगद ईनाम तथा ट्रेक सूट देने की घोषणा की है। विवि के कुलपति डा. महेश कुमार, वित्त अधिकारी दिनेश राणा, उप कुलसचिव केआर भट्ट, दुर्गेश डिमरी सहित अनेक वरिष्ठ प्राध्यापकों एवं अधिकारियों ने विजेता खिलाड़ियों को बधाइयां देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं विवि की डिग्रियों के फर्जीवाड़े में पुलिस को मिला अहम सुराग, मुम्बई की एक छात्रा हुई ट्रेस..

नवीन समाचार, नैनीताल, 2 मार्च 2019। कुमाऊं विश्वविद्यालय में हुए डिग्रियों के फर्जीवाड़े में पुलिस को जांच मंे एक अहम सफलता मिल गयी है। मालूम हो कि मामले में विवि के कुलसचिव की ओर से मल्लीताल कोतवाली में 18 ऐसे छात्र-छात्राओं के खिलाफ नामजद तहरीर दी गयी है, जिनकी डिग्रियां कुमाऊं विवि को जांच के लिए कनाडा, आस्ट्रेलिया व अमेरिका के दूतावासों सहित देश के विभिन्न संस्थानों से प्राप्त हुई थीं और जांच में फर्जी पाई गयी हैं। इनमें से मुंबई के एक शिक्षण संस्थान से जांच के लिए प्राप्त डिग्री धारक महिला के बारे में कोतवाली पुलिस को उसके नाम, पते व फोन नंबर आदि की जानकारी प्राप्त हो गयी है। साथ ही यह भी पता चला है कि महिला को भी इस बात की भनक लग गयी है, जिसके बाद उसने संबंधित शिक्षण संस्थान से अपनी फर्जी डिग्री वापस लेने का प्रयास किया है। इधर कोतवाली पुलिस का मानना है कि इस महिला के जरिये वह कुविवि की फर्जी डिग्रियां बनाने वाले गिरोह तक पहुंच सकती है।
मामले की जांच कर रही मल्लीताल कोतवाली की एसएसआई आशा बिष्ट ने बताया कि आरोपित महिला मुंबई की रहने वाली है और शादीशुदा है। उसने कुमाऊं विवि की फर्जी बीकॉम की डिग्री लगाकर मुंबई के एक शिक्षण संस्थान में बीएड में प्रवेश लिया है। यही नहीं, पुलिस में उसका नाम आने की भनक लगने पर उसने संस्थान से अपनी फर्जी डिग्री वापस लेने की गुहार भी लगाई है, जबकि इधर विवेचना अधिकारी ने संबंधित संस्थान को ऐसा न करने को कह दिया है।

यह है पूरा मामला

नैनीताल। जब भी कोई बाहरी छात्र अपने शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के जरिये दूसरे संस्थान से आगे की पढ़ाई करने के लिए प्रवेश लेता है अथवा नौकरी प्राप्त करता है तो संबंधित संस्थान उसकी डिग्रियों की जांच करने के लिए संबंधित विवि या संस्थान को भेजते हैं। कुमाऊं विवि में भी ऐसे प्रमाण पत्र जांच के लिए आते रहते हैं। किंतु इधर दिसंबर 2018 में कुमाऊं विवि को अपने करीब चार दर्जन प्रमाण पत्र जांच में फर्जी मिले। इनमें कई मामले कुविवि की डिग्रियों के जरिये विदेश जाने के भी प्रकाश में आये। इस पर मामले की जांच कर रही एसआई आशा बिष्ट ने कुविवि को यह डिग्रियां जांच के लिए भेजने वाले संस्थानों से नामजद लोगों के बारे में जानकारी मांगी जो मुंबई के एक शिक्षण संस्थान ने एक शादीशुदा महिला के बारे में पूर्ण जानकारी जांच अधिकारी को उपलब्ध करा दी है। एसआई आशा बिष्ट ने कहा कि आगे महिला के माध्यम से फर्जी डिग्री बनाने वाले गिरोह तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।

इनके नाम पर दी गयी है तहरीर

नैनीताल। 7 जनवरी 2019 को कुविवि के कुलसचिव डा. महेश कुमार की तहरीर पर अनुज मित्तल, गुरविंदर सिंह, हरप्रीत कौर, अशनीन बजाज, सौरभ गुप्ता, मनप्रीत कौर, अमृतप्रेम, रीटा अमित प्रेमजी, साहिब इकबाल सिंह, अमनिंदर सिंह, अवतार सिंह, संदीप सिंह, जिबनू राठौर, वरुण खुराना करमजीत कौर, करण मेहरा, जोध्रवीर सिंह, नर्मदा पनीर सेलवम व सिमरनजीत कौर के नाम खोलते हुए नामजद तहरीर मल्लीताल कोतवाली में दी गयी है।

यह भी पढ़ें : डिग्रियों के फर्जीवाड़े में कुमाऊं विवि की तहरीर पर ‘केवल इनके’ खिलाफ मुकदमा दर्ज, ‘उन्हें’ छोड़ दिया…

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 जनवरी 2019। कुमाऊं विश्वविद्यालय के फर्जी प्रमाणपत्र मामले में मंगलवार को विवि के कुलसचिव डा. महेश कुमार की ओर से मल्लीताल कोतवाली पुलिस में तहरीर पर मल्लीताल कोतवाली पुलिस ने मुक़दमा दर्ज कर लिया है। खास बात यह है कि मुकदमा केवल फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने वाले 19 नामजदों के खिलाफ दर्ज किया गया है, उन लोगों या गिरोह के खिलाफ नहीं जिन्होंने फर्जी प्रमाण पत्र बनाये हैं। जबकि तहरीर में ‘इसे अज्ञात व्यक्ति जिनके द्वारा यह कृत्य किया गया है, उनके विरुद्ध’ भी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने’ की मांग की गयी थी। मुकदमा अनुज मित्तल, गुरविंदर सिंह, हरप्रीत कौर, अशनीन बजाज, सौरभ गुप्ता, मनप्रीत कौर, अमृतप्रेम, रीटा अमित प्रेमजी, साहिब इकबाल सिंह, अमनिंदर सिंह, अवतार सिंह, संदीप सिंह, जिबनू राठौर, वरुण खुराना करमजीत कौर, करण मेहरा, जोध्रवीर सिंह, नर्मदा पनीर सेलवम व सिमरनजीत कौर के नाम शामिल हैं। इन लोगों के नाम पर कुमाऊं विवि की बीए,  बीटेक  मैकेनिकल,  डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग, बीएससी कंप्यूटर साइंस, एमबीए फाइनेंस,  फाइनेंस एंड मार्केटिंग,  एमबीए  आईटी,  बीसीए, एमसीए, एमबीए प्रोडक्शन मैनेजमेंट, बीकॉम, एमए व बीएससी हेल्थकेयर मैनेजमेंट आदि की फर्जी डिग्रियां बनायी गयी हैं। उल्लेखनीय है कि इनमेंं से कई कोर्स एवं डिग्रियां कुमाऊंं विश्वविद्यालय के द्वारा कराई ही नहीं जाती हैं। तहरीर में फर्जी डिग्रियां बनवाने वाले इन तथा तथा फर्जी डिग्रियां तैयार करने वाले गिरोह के सदस्यों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गयी है। कोतवाल विपिन चंद्र पंत ने बताया कि अज्ञात पते वाले 19 नामजद लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467 व 468 के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है।
उल्लेखनीय है कि विदेश जाने अथवा महत्वपूर्ण नौकरियों के लिए कुछ एजेंसियां निर्धारित शुल्क लेकर डिग्रियों की जांच करवाती हैं। ऐसी भी 2-3 भारतीय के साथ ही कनाडा की वर्ल्ड एजुकेशन सर्विस और आस्ट्रेलिया की ऐसी ही एजेंसियों से हालिया दौर में कुमाऊं विवि के परीक्षा विभाग को मिली डिग्रियों में से 19 लोगों की 21 डिग्रियां जांच में पूरी तरह से फर्जी पायी गयी हैं। बड़े स्तर पर आई फर्जी डिग्रियों पर गंभीर हुए कुमाऊं विवि प्रशासन की कोशिश इन फर्जी डिग्रियों के जरिये उन्हें बनाने वाले गिरोह तक पहुंचने की है। सामान्य देखने में ऐसा लग रहा है कि यह डिग्रियां एक ही गिरोह के द्वारा बनायी गयी हैं। इस कोशिश में कुमाऊं विवि ने संबंधित एजेंसियों को ईमेल के जरिये उन लोगों के पते, संपर्क सूत्र, फोन नंबर आदि की जानकारी पूछी, किंतु करीब 10 दिनों का समय बीतने के बावजूद विवि को किसी भी एजेंसी से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद विवि की ओर से कुलसचिव डा.महेश कुमार मंगलवार को उन 19 लोगों के खिलाफ पुलिस में नामजद तहरीर दी, जिनके नाम फर्जी पायी गयी डिग्रियों में हैं।

पूर्व समाचार : कुमाऊं विवि के फर्जी प्रमाणपत्रों से 45 भारतीयों के विदेश जाने का बड़ा खुलासा…

-विदेश मंत्रालय से जांच को आए 45 प्रमाणपत्र फर्जी निकले, कुविवि के फर्जी लेटरहेड और मुहर से बनाए गए हैं प्रमाणपत्र, विवि इन डिग्रीधारकों के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी में

कुमाऊं विवि की फर्जी अंकतालिका।

नवीन पालीवाल @ नवीन समाचार, नैनीताल, 28 दिसंबर 2018। कुमाऊं विश्वविद्यालय के फर्जी प्रमाणपत्र बनाकर कम से कम 45 लोगों के विदेश जाने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। विदेश मंत्रालय की ओर से सत्यापन के लिए कुमाऊं विश्वविद्यालय को भेजे गए प्रमाण पत्रों में से 45 प्रमाणपत्र जांच में फर्जी पाए गए हैं। सूत्रों के अनुसार विदेश मंत्रालय की ओर से आए संदिग्ध प्रमाणपत्रों में से ज्यादातर प्रमाणपत्र कनाडा तथा अमेरिका जाने के लिए इस्तेमाल किए गए हैं, और अधिकांश बीएड और एमबीए की डिग्री के हैं। अब कुमाऊं विवि प्रशासन इन फर्जी डिग्रीधारकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।
बताया गया है कि वर्ल्ड एजुकेशन सर्विस (डब्ल्यूईएस) कनाडा, अमेरिका सहित अन्य विदेशी संस्थाओं ने विदेश मंत्रालय के माध्यम से 45 संदिग्ध अंकतालिकाएं और प्रमाण पत्र कुमाऊं विश्वविद्यालय को सत्यापन के लिए भेजे हैं। इनमें बीएड तथा एमबीए के ज्यादातर प्रमाणपत्र हैं। इनमें हरप्रीत कौर, असमीन बजाज, सौरभ गुप्ता, मनप्रीत कौर, अमृतप्रेम आदि के नाम प्रकाश में आये हैं। जांच में पता चला कि ये सभी प्रमाण पत्र कुविवि के फर्जी लेटरहेड और फर्जी मुहर से बनाए गए हैं। इनमें पूर्व कुलपति प्रो. एचएस धामी के फर्जी हस्ताक्षर कुलसचिव के स्थान पर किए गए हैं। जबकि नियमानुसार प्रमाणपत्रों पर कुलसचिव के हस्ताक्षर होते ही नहीं हैं, बल्कि कुलपति तथा परीक्षा नियंत्रक के हस्ताक्षर होते हैं। दावा है कि प्रमाणपत्र पर लगे मुहर तथा हस्ताक्षरों की नकल विवि की वेबसाइट से की गई है। कुविवि के नाम पर फर्जी प्रमाणपत्र बनाने का खुलासा होने के बाद अब विवि प्रशासन कर्रवाई करने की तैयारी में है। बताया गया है कि राज्य गठन से पूर्व भी ऐसे मामले सामने आए थे। जिसमें कुविवि के फर्जी दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे। विवि प्रशासन की ओर से कार्रवाई करते हुए मामले में केस दर्ज किया गया था। जांच शुरू होने के बाद विवि के नाम पर फर्जी प्रमाणपत्रों का यह गोरखधंधा बंद हो गया था। लेकिन एक बार फिर फर्जी डिग्रियों का धंधा सामने आया है। कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल ने कहा है कि इस मामले में फर्जी डिग्री धारकों तथा उन्हें बनाने वालों के नाम, पता समेत अन्य जानकारी एकत्रित की जा रही है। तथा आगे संबंधितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।

यह भी पढ़ें : अब शोध थीसिस में साहित्यिक चोरी की जांच करेगा यह साफ्टवेयर, यहाँ खुद करें अपनी थीसिस की जांच..

नवीन समाचार, नैनीताल, 24 फरवरी 2019। शोध में साहित्यिक चोरी को रोकने के लिए कुमाऊं विश्वविद्यालय ने ‘उरकुंड’ नाम का साफ्टवेयर लागू कर दिया है। शोधार्थियों को अब अपने थीसिस की इस साफ्टवेयर से जांच करानी होगी, और जांच से मिले प्रमाण पत्र को थीसिस के साथ जमा करना होगा। बताया गया है कि यूजीसी ने स्वीडन की एक कंपनी के साथ अनुबंध करके यह सॉफ्टवेयर बनाया है। इस साफ्टवेयर में जैसे ही किसी शोधग्रंथ को जांच के लिए अपलोड किया जाता है तो वह शोधग्रंथ के शीर्षक, अन्य सामग्रियों का अपने पास उपलब्ध पूर्व में हो चुके शोध, साहित्यों के संग्रह से मिलान करता है, और संदर्भित नहीं किए गए कथनों के विषय में बताता है। उसे साहित्य की चोरी मान कर उसके प्रतिशत को बता देता है। साथ ही किसी व्यक्ति द्वारा कहे कथन और अन्य माध्यम से ली गई सामग्री को शोधग्रंथ में माध्यम सहित पूर्ण रूप से वर्णित, संदर्भित करने पर उरकुंड उसे नियमों के अनुसार साहित्य चोरी नहीं मानता है। बताया गया है कि शोधग्रंथ में 20 फीसदी तक अवर्णित सामग्री के प्रयोग की अनुमति देने पर भी विचार हो रहा है। विश्वविद्यालय के वरिष्ठ सूचना वैज्ञानिक डॉ. युगल जोशी ने बताया कि वेबसाइट से मिली जानकारियों के साथ संबंधित वेबसाइट के लिंक का विवरण देने पर प्रयोग की गई सामग्री मान्य होती है।

अपनी थीसिस की जाँच करने के लिए यहाँ क्लिक करें ⇒ उरकुंड 

यह भी पढ़ें : एलएलबी-एलएलएम व बीएड-एमएड की प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू

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नवीन समाचार, नैनीताल, 21 फरवरी 2019। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने वर्ष 2019 के लिए एलएलबी, एलएलएमए बीएड व एमएड की प्रवेश परीक्षाओं के लिए आवेदन अपनी वेबसाइट http://www.kunainital.ac.in पर ऑनलाइन आमंत्रित कर दिये हैं। विवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. संजय पंत की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार इच्छुक अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए पहले वेबसाइट पर पंजीकरण कराना होगा और इसके बाद बैंक चार्ज सहित विवि की फीस रुपये 1250 ऑनलाइन अथवा एचडीएफसी बैंक की शाखा में जमा करनी होगी। बीएड-एमएड के लिए फीस 20 फरवरी से 16 मार्च के बीच जमा करनी होगी, तथा फीस जमा होने की पुष्टि होने के बाद आवेदन पत्र भरना होगा। आवेदन पत्र की प्रक्रिया पूरी करने की आखिरी तिथि 18 मार्च रखी गयी है। वहीं एलएलबी-एलएलएमए के लिए फीस 21 फरवरी से 18 मार्च के बीच और आवेदन पत्र की प्रक्रिया पूरी करने की आखिरी तिथि 20 मार्च रखी गयी है।

यह भी पढ़ें : फर्जी संस्थान के छात्रों को कुमाऊं विश्वविद्यालय ने दी राहत

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p style=”text-align: justify;”>-विवि ने 2015 से 2018 के बीच विवि में प्रवेश लेने वाले छात्रों के मामले में फिलहाल ‘यथास्थिति’ बरकरार रखने और आगे इस संस्थान के छात्रों को प्रवेश न देने का लिया निर्णय
नवीन समाचार, नैनीताल, 11 फरवरी 2019। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने पूरी तरह से अवैध तरीके से चल रहे दिल्ली के मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान से वर्ष 2015 से वर्ष 2018 के बीच शिक्षा ग्रहण कर विवि में प्रवेश लेने वाले छात्रों को बड़ी राहत दे दी है। सोमवार को विवि प्रशासनिक भवन में कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल की अध्यक्षता में हुई सभी संकायाध्यों की बैठक में इस अवधि के छात्रों के मामले में ‘यथास्थिति’ रखने की बात तय हुई है। उल्लेखनीय है कि इस संबंध में कुछ मामले उच्च न्यायालय में भी चल रहे हैं। विवि के आज के यथास्थिति संबंधी निर्णय का का अर्थ यह हुआ कि न्यायालय का निर्णय आने तक संबंधित छात्रों के मुक्त विद्यालयी संस्थान के प्रमाण पत्रों को वैध माना जाएगा। कुविवि के कुलसचिव डा. महेश कुमार ने बताया कि उक्त संस्थान को ना ही उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद और ना ही दिल्ली सरकार से मान्यता प्राप्त है। ऐसे में पूर्व में ही इसे अवैध घोषित कर दिया गया है। आज की बैठक में भी यह बात साफ तौर पर कही गयी कि 2018 के बाद इस संस्थान को अवैध माना जाएगा। यानी अब इस संस्थान के किसी छात्र को कुविवि में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

हल्द्वानी महाविद्यालय के छात्र संघ सचिव पर भी लटकी थी तलवार

नैनीताल। बताया गया है कि कुमाऊं मंडल के सबसे अधिक छात्र संख्या वाले हल्द्वानी के एमबी महाविद्यालय के निर्वाचित छात्र संघ उपसचिव रवि कुमार के चुनाव लड़ने के दौरान प्रतिद्वंद्वी दावेदार ने शिकायत की थी कि रवि ने एक गैर मान्यता प्राप्त संस्थान से इंटर की डिग्री हासिल की है, इसलिए उन्हें चुनाव न लड़ने दिया जाए। कुमाऊं विवि द्वारा शिकायत आने के बाद बनाई गयी समिति ने तभी संस्थान को अवैध ठहराते हुए उनके प्रवेश को गलत ठहरा दिया था, जिस पर रवि उच्च न्यायालय पहुंच गये, और उच्च न्यायालय ने उन्हें चुनाव लड़ने की इजाजत दे दी, अलबत्ता मामला उच्च न्यायालय में अभी भी चल रहा है। इसके बाद चुनाव लड़े रवि चुनाव जीत भी गये थे।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं विवि में मनमाने तरीके से हुई नियुक्तियों पर राजभवन के निर्देशों पर जांच कमेटी नियुक्त

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 6 फरवरी 2019। उत्तराखंड राजभवन ने कुमाऊं विवि में शिक्षणेतर कर्मचारियों की नियुक्तियों में तय प्रक्रिया का पालन नहीं की शिकायतों पर के मामले में जांच रिपोर्ट मांगी है। राजभवन के जांच के आदेश के बाद भाई-भतीजावाद व मनमाने तरीके से नियुक्त कर्मियों में खलबली मची है।
आरोप है कि मंजूर पदों के इतर मनमाने तरीके से करीब डेढ़ सौ से अधिक नियुक्तियां की गई हैं। सूत्रों के अनुसार पिछले दस सालों में डीएसबी परिसर, भीमताल परिसर, विवि प्रशासनिक भवन व परीक्षा विभाग आदि में बिना वित्त विभाग की मंजूरी लिये नियमों को ताक पर रखकर मनमाने तरीके से शिक्षणेतर कर्मचारियों की नियुक्तियां हुई हैं। पूर्व में विवि ने अपने स्रोतों से प्राप्त आय से इन कार्मिकों को मानदेय दिया, मगर अब प्राइवेट परीक्षा का जिम्मा मुक्त विवि को जाने के बाद विवि को सालाना करीब 20 करोड़ की रकम से हाथ धोना पड़ा है। ऐसे में इन कर्मचारियों के मानदेय को लेकर विवि के समक्ष संकट खड़ा हो गया है। कुलसचिव डा. महेश कुमार ने बताया कि इन नियुक्तियों की जांच के लिए कुलपति प्रो. डीके नौडियाल ने उन्हें व वित्त अधिकारी सहित अन्य को शामिल कर जांच कमेटी बनाई है। जल्द ही जांच आरंभ की जाएगी।

यह भी पढ़ें : जया गणित व सती बॉटनी के विभागाध्यक्ष बनेंगे

नवीन समाचार, नैनीताल, 6 फरवरी 2019। कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल ने प्रतिस्थापित व्यवस्था के तहत गणित व वनस्पति विज्ञान विभागों में नये विभागाध्यक्ष एवं परिसर अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी है। गणित विभाग में अल्मोड़ा परिसर की प्रो. जया उप्रेती विभागाध्यक्ष व प्रो. रत्ना यू जोशी डीएसबी परिसर नैनीताल की विभागाध्यक्ष होंगी, जबकि वनस्पति विज्ञान विभाग में प्रो. एससी सती विभागाध्यक्ष एवं प्रो. हेमा जोशी अल्मोड़ा परिसर की विभागाध्यक्ष होगी।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं विवि से पूरे वर्ष कोई परीक्षा देनी है तो जरूर देख लें आज घोषित हुआ नये वर्ष का परीक्षा कलेंडर

नवीन समाचार, नैनीताल, 15 जनवरी 2019। कुमाऊं विवि ने वर्ष 2019 में होने वाली अपनी विभिन्न परीक्षाओ के कार्यक्रम जारी कर दिये हैं। परीक्षा नियंत्रक प्रो. संजय पंत की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार विवि की वार्षिक पद्धति पर होने वाली स्नातक द्वितीय व तृतीय वर्ष की बीए, बी कॉम, बीएससी, एमए व एमकॉम द्वितीय वर्ष की परीक्षाएं 15 अप्रैल से, स्नातक व स्नातकोत्तर एवं व्यवसायिक पाठ्यक्रमों के सम सेमेस्टरों की परीक्षाएं 15 मई से, पीएचडी की प्रवेश परीक्षा 17 मार्च रविवार को, बीएड व एमएड की प्रवेश परीक्षा 31 मार्च को एवं एलएलबी व एलएलएम की प्रवेश परीक्षा 7 अप्रैल 2019 को होंगी। प्रो. पंत ने बताया कि इन परीक्षाओं के लिए आवेदन पत्र विवि की वेबसाइट से ऑनलाइन माध्यम से भरे जाएंगे। परीक्षाओं के लिए आवेदन करने की तिथियां बाद में पृथक से घोषित की जाएंगी। यह भी बताया है कि वर्ष 2019 में आयोजित होने वाली वार्षिक पद्धति की परीक्षाओं में वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को सम्मिलित नहीं किया जाएगा।

यह भी पढ़ें : हद है, कानून तोड़कर कानून की पढ़ाई कर रहे हैं केंद्रीय संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी

-एसएसजे परिसर अल्मोड़ा का मामला, पांचवे सेमेस्टर में हैं वर्तमान में, विधि संकाय एवं केंद्रीय संस्थान की ओर से नियमों में भारी हीलाहवाली

प्रशासनिक अधिकारी अनिल कुमार यादव का शपथ पत्र।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जनवरी 2019। कुमाऊं विश्वविद्यालय के एसएसजे परिसर के विधि संकाय में नियम विरूद्ध तरीके से प्रवेश करने का मामला आया है। निकटवर्ती कोसी कटारमल स्थित गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी अनिल कुमार यादव ने पद पर रहते हुए नियम कानूनों को ताक में रखकर विधि संकाय में नियमित छात्र के रूप में विधि की शिक्षा ले रहे हैं। खास बात यह भी है कि यादव ने प्रवेश के समय अपने स्वघोषित पत्र में लिखा है कि वह किसी संस्थान में कार्यरत नहीं है। उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय मंे किसी भी नियमित पाठ्यक्रम में छात्रों को विश्व विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के अनुसार वर्ष में 75 फीसद उपस्थिति होनी अनिवार्य होती है, जो कि किसी राजकीय कर्मचारी के लिए कार्य पर रहते हुए संभव नहीं हो सकता।
सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी से यह खुलासा हुआ है। खास बात यह भी है कि कुमार ने किसी भी संस्थान में कार्य नहीं करने के कॉलम को तो नहीं काटा है, किंतु प्रवेश के साथ नीचे छोटे अक्षरों में ‘एनओसी अटैच्ड’ यानी अनापत्ति संलग्न होने की बात भी लिखी है। लिहाजा दोनों बातें विरोधाभासी हैं। इस विरोधाभास पर एसएसजे परिसर की प्रवेश समिति का गौर नहीं करना भी सवाल खड़े कर रहा है।
खास बात यह भी है कि एक केंद्रीय संस्थान में नौकरी कर रहे प्रशासनिक अधिकारी अनिल कुमार चार सैमेस्टरों की परीक्षा पास कर चुके हैं, और वे वर्तमान में पांचवे सेमेस्टर के छात्र हैं। यह भी बताया जा रहा है कि पांचवे सेमेस्टर में केवल 12 दिन उपस्थित होने के बावजूद उन्हें यूजीसी के 75 फीसद उपस्थिति के नियमों को ताक पर रखकर परीक्षा देने की अनुमति दे दी गई। जबकि कई विद्यार्थियों को पूर्व में 75 फीसद उपस्थिति न होने पर परीक्षा देने से रोका जा चुका है। यह भी बताया जा रहा है इसी संस्थान की एक महिला कार्मिक भी इसी तरह से विधि की विद्यार्थी के रूप में अध्ययनरत हैं। इस बावत सूचना मांगने वालों की ओर से बार काउंसिल आफ इंडिया में भी शिकायत की गई है। इस संबंध में कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। मामले की पूरी सत्यता के साथ जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
घोषणा पत्र भी हास्यास्पद
नैनीताल। कोसी कटारमल स्थित गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान के निदेशक की ओर से अपने प्रशासनिक अधिकारी अनिल कुमार यादव को जो अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया गया है उसमें लिखा गया है कि कुमार को नियमित विधि की पढ़ाई करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अलबत्ता वह अवकाश से इसे ‘मैनेज’ कर पढ़ाई कर सकते है। लेकिन वे कैसे ‘मैनेज’ कर सकते हैं, यह नहंी बताया गया है। यानी अनापत्ति न दी जा सकने वाली परिस्थिति में भी दी गयी है

प्रो. तिवारी कुमाऊं विवि के ओएसडी नियुक्त

प्रो. ललित तिवाड़ी

नैनीताल। डीएसबी परिसर के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्राध्यापक प्रो. ललित तिवारी को कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार नौड़ियाल ने शासन स्तर पर विवि से संबंधित कार्यों एवं राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान-रूसा से संबंधित कार्यों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष कार्याधिकारी नियुक्त किया है। प्रो. तिवारी अपनै शैक्षणिक कार्यों के साथ ही इन दायित्वों का निष्पादन भी करेंगे। उल्लेखनीय है कि प्रो. तिवारी कुविवि शिक्षक संघ यानी कूटा के अध्यक्ष तथा एनएसएस के समन्वयक भी हैं।

रवांडा के सेकेंड हाई कमिश्नर नेे डीएसबी के प्रो. बिष्ट को भेंट किया पुरस्कार

नई दिल्ली में रवांडा के सेकेंड हाई कमिश्नर के हाथों पुरस्कार प्राप्त करते प्रो. पीएस बिष्ट।

नैनीताल, 1 दिसंबर 2018। कुमाऊं विश्वविद्यालय के सर्वप्रुमुख डीएसबी परिसर के अधिष्ठाता छात्र कल्याण एवं अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. पद्म सिंह बिष्ट को अर्थशास्त्र के क्षेत्र में राष्ट्रीय विकास हेतु विशिटट व्यक्तिगत उपलब्धियों के लिए ‘ग्लोबल सोसायटी फॉर हेल्थ एंड एजुकेशनल ग्रोथ’ के द्वारा ‘भारत शिक्षा रत्न पुरस्कार’ प्राप्त हुआ है। उन्हें यह पुरस्कार शुक्रवार 30 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत में रवांडा के सेकेंड हाई कमिश्नर मुक्यो रूटिशिशा के हाथों प्रदान किया गया। यह पुरस्कार लेकर लौटे प्रो. बिष्ट को उनकी इस उपलब्धि पर कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल, डीएसबी के परिसर निदेशक प्रो. एलएम जोशी सहित सभी साथी प्राध्यापकों एवं सहयोगियों ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

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कुमाऊं विवि को प्राप्त प्रमाण पत्र।

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल, 15 अक्तूबर 2018। उत्तराखंड के कुमाऊं विश्वविद्यालय और जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर ने ब्रिक्स देशों के नौ हजार से अधिक विश्वविद्यालयों में शीर्ष 350 सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों की सूची में अपना स्थान बना लिया है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व इंडिया टुडे ग्रुप की ओर से कराए गए सर्वे में कुमाऊं विवि को देश के विश्वविद्यालयों में 32वां स्थान दिया गया था।
बताया गया है कि क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग की ओर से हर साल ब्राजील, रूस, भारत, चीन व दक्षिण अफ्रीका देशों के संगठन ब्रिक्स के नौ हजार से अधिक विश्वविद्यालयों के बीच सर्वे कराया जाता है। इसके तहत ही क्यूएस यूनिवर्सिटी रैंकिंग ब्रिक्स 2019 के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों की सूची कुमाऊं विवि नैनीताल को ब्रिक्स देशों की सूची में 301-350 की जबकि भारतीय विश्वविद्यालयों में 66-70 की सूची में स्थान मिला है। साथ ही उत्तराखंड के राजकीय विश्वविद्यालयों में जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर को भी इसमें स्थान मिला है। कुमाऊं विवि का प्रतिनिधित्व कर विवि के शोध निदेशक प्रो. राजीव उपाध्याय इस सम्मान समारोह में शामिल हुए। इस उपलब्धि पर कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल ने कहा कि विवि से पढ़ कर निकले विद्यार्थी आज विभिन्न स्थानों में प्रतिष्ठित पदों में कार्यरत हैं। इन्हीं विद्यार्थियों के बल पर विवि दिनों दिन मुकाम हासिल कर रहा है। विवि के प्राध्यापकों, कर्मचारियों की लगन, मेहनत के बल आज हम इस स्थान पर हैं, आगे चुनौतियां कई हैं लेकिन उनको पार कर और भी आगे जाना है।
चित्र परिचयः 16एनटीएल-4ः नैनीताल। कुमाऊं विवि को प्राप्त प्रमाण पत्र।

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देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों की सूची, क्लिक करके बड़ा करके देखें.

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल। केंद्रीय नीति आयोग ने कुमाऊं विश्वविद्यालय को देश के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में 32वां स्थान दिया है। इस उपलब्धि पर कुविवि शिक्षक संघ-कूटा ने खुशी व्यक्त करते हुए विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल तथा नीति आयोग को कुविवि की रिपोर्ट भेजने वाले विवि के शोध निदेशक प्रो. राजीव उपाध्याय सहित विवि परिवार को बधाई दी है। बताया गया है कि नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा. अमिताभ कांत ने देश के 800 से अधिक विश्वविद्यालयों से उनके आंकड़े मांगे थे। इनमें से करीब 700 केंद्रीय व राज्य तथा डीम्ड विश्वविद्यालयों ने अपने आंकड़े नीति आयोग को भेजे। इनमें से ही उनके कामकाज के आधार पर सभी विवि को रैंकिंग दी गयी है। नीति आयोग की सूची में जेएनयू दिल्ली को पहला, दिल्ली यूनिवर्सिटी को दूसरा और यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद को तीसरा स्थान मिला है। 38 स्थानों की पहली सूची में उत्तराखंड के अन्य किसी विवि का स्थान नहीं है।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व कुविवि को नैक से ए-ग्रेड मिल चुका है। कूटा के अध्यक्ष प्रो. ललित तिवाड़ी, सुचेतन साह, डा. विजय कुमार, डा. दीपक कुमार, डा. शिवांगी, डा. सुहेल जावेद, डा. एचएन पनेरू, डा. मनोज धुनी, डा. गगन होती, डा. ललित मोहन व डा. दीपिका पंत ने इसे बड़ी उपलब्धि करार दिया है।

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कुविवि की प्रतिष्ठित विवि सभा में पडियार, पाल, पांडे, जोशी, सती सहित 15 जीते

-राजनीतिक दलों से समर्थित प्रत्याशियों को अधिक मिली जीत

सबसे पहले और भाजपा से जीते एकमात्र (व मौजूदा भी) सदस्य अरविन्द पडियार

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल, 20 जुलाई 2018। कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय सभा के 15 सदस्य पदों के लिए शुक्रवार को हुए चुनावों में राजनीतिक दलों से सीधे या परोक्ष तौर पर जुड़े प्रत्याशियों को जीत हासिल हुई है, जबकि गैर राजनीतिक प्रत्याशियों को मुंह की खानी पड़ी। परिणाम तीन राउंड तक चली मतगणना के बाद साफ हो गए। चुनाव में कुल 20 प्रत्याशी मैदान में थे।
पहले राउंड की यानी पहली प्राथमिकता के मतों से ही मतगणना में ही भाजपा से जुड़े अरविंद पडियार, बहादुर पाल, उत्तराखंड क्रांति दल से जुड़े प्रकाश पांडे, कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े कैलाश जोशी व कांग्रेस से जुड़े केवलानंद सती की जीत घोषित हो गयी। वहीं दूसरे राउंड में उक्रांद से जुड़े डा. सुरेश डालाकोटी, अंजू मेहता, गीता बिष्ट, अर्जुन सिंह व शैलेंद्र पंत को जीत हासिल हुई। इसके बाद तीसरे एलीमिनेशन राउंड में सबसे कम वोट प्राप्त करने वाले पांच सदस्यों के एक-एक कर बाहर होने के साथ वर्षों से विवि सभा में बने रहे अचिंत्यवीर सिंह, वीके सांगुड़ी, कांग्रेस के हुकुम सिंह कुंवर, जीतेंद्र भट्ट व मोहन बिष्ट की जीत की घोषणा हुई, जबकि अनिल कुमार, कीमती लाल राणा, पान सिंह रौतेला, रवि रौतेला व नीमा पुजारी को हार का मुंह देखना पड़ा।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व कुल 24 नामांकन किये गये थे, जिनमें से नरेंद्र रजवार, राजेंद्र खनवाल व पृथ्वीपाल सिंह रावत ने नामांकन वापस ले लिये थे, जबकि पवन सिंह खरियाल का नामांकन यूपी विवि अधिनियम 1974 के संबंधित परिनियमों के अनुसार निरस्त किया गया था। इसके बाद 7 जून से मत पत्र विवि के 662 पंजीकृत स्नातक मतदाताओं को उनके घर भेजे गए थे, जिन्होंने घर से ही वरीयता के आधार पर सभी उम्मीदवारों को वरीयता के मत दिये। इसके बाद मतदाताओं से प्राप्त मतपत्रों की आज गढ़वाल विवि के प्रो. अरुण सेनन के नेतृत्व में हुई। आगे अगले वर्ष 2019 में इन्हीं 15 सदस्यों में से 4 सदस्यों का विवि की सर्वोच्च अकादमिक सभा के लिए चुनाव होगा, जिसमें विवि सभा के सदस्यों के साथ ही विवि के परिसरों के संकायाध्यक्ष व विभागाध्यक्ष तथा संबद्ध महाविद्यालयों के 4-4 प्रतिनिधि भी मतदान करेंगे। इधर अरविंद पडियार सहित भाजपा से जुड़े सदस्यों की जीत पर विधायक संजीव आर्य, जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट व नगर अध्यक्ष मनोज जोशी सहित पार्टी जनों से हर्ष जताया है।

ग्रामीण प्रबंधन एवं स्वरोजगार पर एमबीए पाठ्यक्रम शुरू कर कुमाऊं विवि ने रचा इतिहास

प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान पर एनसीआरआई ने देश के सभी राज्यों के एक-एक विवि से ऐसे पाठय़क्रम शुरू करने को कहा था, कुमाऊं विवि से सबसे पहले पाठय़क्रम तैयार कर ऑनलाइन प्रवेश की प्रक्रिया शुरू की, 30 तक हो सकेंगे प्रवेश, एनसीआरआई सभी को रोजगार भी उपलब्ध कराएगा

राष्ट्रीय सहारा, 20 जून 2018, पेज 2 पर सभी संस्करणों में

नवीन जोशी, नैनीताल, 19 जून 2018। इतिहास केवल चोटियां छू कर ही नहीं रचे जाते, वरन देश-काल की जरूरतों के अनुरूप ठोस पहल शुरू करके भी ऐसा किया जा सकता है। कुमाऊं विश्वविद्यालय ने भी ऐसे ही एक नया इतिहास रच डाला है। दरअसल पलायन रोकने, गांवों की ओर लौटने की जुबानी बातें तो बहुत की जाती हैं, परंतु धरातल पर होता कुछ नहीं है। वास्तव में यह तभी संभव है जब देश की युवा पीढ़ी को जमीनी हकीकतों से रूबरू कराने के साथ लाभप्रद कॅरियर के अवसर भी दिये जाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा ही आह्वान एनसीआरआई यानी नेशनल काउंसिल ऑफ रूरल इंस्टीट्यूट्स हैदराबाद के माध्यम से देश के सभी राज्यों से किया था कि वे अपने एक-एक विवि में ग्रामीण प्रबंधन एवं स्वरोजगार पर पाठ्यक्रम शुरू करें, ताकि युवा गांवों की समस्याओं को जानते हुए जुड़ें और उन्हें स्वरोजगार भी प्राप्त हो।

इस आह्वान पर कुमाऊं विवि ने लीड लेते हुए इसी सत्र से दो वर्षीय पाठ्यक्रम तैयार कर इसके लिए ऑनलाइन प्रवेश की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। इस पाठ्यक्रम हेतु आगामी 30 जून तक न्यूनतम 20 व अधिकतम 40 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। खास बात यह भी है यह पाठ्यक्रम पूरा करने वाले सभी प्रतिभागियों को एनसीआरआई के द्वारा रोजगार-स्वरोजगार के अवसर-प्लेसमेंट भी उपलब्ध कराया जाएगा।

मंगलवार को यह पाठ्यक्रम शुरू कर रहे कुमाऊं विवि के आईपीएसडीआर यानी रोजगारपरक अध्ययन एवं विकासोन्मुख शोध संस्थान में विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल एवं संस्थान के निदेशक प्रो. अतुल जोशी ने पत्रकार वार्ता में यह खुलासा करते हुए बताया कि दो वर्ष का यह पाठ्यक्रम केवल 30 हजार रपए प्रति सेमेस्टर के शुल्क पर कराया जाएगा। एनसीआरआई के निर्देशन में तैयार पाठ्यक्रम में खास तौर पर उत्तराखंड एवं इसके कुमाऊं मंडल के गांवों के परिवेश व यहां की समस्याओं एवं यहां संभव फल-सब्जी की बागवानी व मोटे अनाजों के उत्पादन, जैविक खेती बकरी व मत्स्य पालन एवं इनके संरक्षण, साहसिक पर्यटन, ट्रेकिंग, होम स्टे, स्थानीय हस्तकला जैसे स्वरोजगार के क्षेत्रों को शामिल किया गया है। कुलपति प्रो. नौड़ियाल ने इस ऐतिहासिक पहल के लिए प्रो. जोशी की जमकर प्रशंसा की। इस मौके पर कुलपति के वैयक्तिक अधिकारी विधान चौधरी भी मौजूद रहे।

स्नातकोत्तर के सभी छात्रों को भी आवश्यक रूप से जाना होगा गांवों में

नैनीताल। कुविवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल ने इस अवसर पर एक और बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि विवि के सभी स्नातकोत्तर स्तर के छात्रों को भी गांवों से जोड़े जाने व ग्रामीण प्रबंधन को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाये जाने की योजना है। शीघ्र ही इस बाबत विवि की सर्वोच्च संस्था कार्य परिषद के समक्ष प्रस्ताव लाया जाएगा। प्रस्ताव के तहत सभी विद्यार्थियों को कम से कम 15 दिन के लिए अलग-अलग गांवों में जाना होगा, और वहां की समस्याओं व समाधान पर रिपोर्ट तैयार करनी होगी। इसके अलावा भूगोल विभाग के माध्यम से अल्मोड़ा व रानीखेत तथा गढ़वाल मंडल के बिन्सर नामक स्थानों तथा कसारदेवी व जागेश्वर आदि स्थानों को जोड़कर बिन्सर सर्किट तैयार किया जा रहा है, जिसे राज्य सरकार को सौंपा जाएगा। साथ ही जैव प्रौद्योगिकी, वनस्पति विज्ञान व वन विज्ञान विभागों के सहयोग से वनों में पौधों के बजाय बांज व देवदार जैसी उपयोगी प्रजातियों के बीजों को जंगलों में बरसात से पूर्व छिड़कने का भी एक प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने आईपीएसडीआर में पहले से चल रहे तीन वर्षीय पार्टटाइम एमबीए-एक्जीक्यूटिव पाठ्यक्रम को दो वर्ष का किये जाने की भी जानकारी दी। इसके बाद यह पाठ्यक्रम अन्य कार्य करते हुए भी पहले के डेढ़ लाख की जगह केवल 1 लाख रपए में ही किया जा सकेगा।

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    • विवि में प्रवेश के लिये करना होगा ऑनलाइन पंजीकरण, देने होंगे तीन कॉलेजों के विकल्प
    • पूरी तरह ऑनलाइन होगी प्रवेश की प्रक्रिया, ऑनलाइन प्रवेश के बाद नहीं भरने पड़ेंगे विभिन्न कक्षाओं में परीक्षाओं के फार्म
  • 23 जुलाई से शुरू हो जाएगी पहले सेमेस्टर की पढ़ाई, सेमेस्टर में 90 दिन पढ़ाई होगी अनिवार्य और 15 नवंबर से परीक्षाएं हो जाएंगी शुरू
नैनीताल। कुमाऊं विवि में शैक्षणिक सत्र 2018-19 के लिए स्नातक एवं स्नातकोत्तर दोनों स्तरों पर नये यानी प्रथम सेमेस्टर में होने वाले प्रवेश पूरी तरह से ऑनलाइन होंगे। इसके लिए प्रवेशार्थियों को 50 रुपए का पंजीकरण शुल्क भारतीय स्टेट बैंक में जमा करके कम से कम तीन परिसरों-कॉलेजों के विकल्प देते हुए ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण की प्रक्रिया 4 जून से 30 जून तक चलेगी, जिसके बाद विवि मैरिट के आधार पर प्रवेशार्थियों को उनकी प्राथमिकता एवं सीटों की उपलब्धता के आधार पर कॉलेज आवंटित करेगा। विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल एवं परीक्षा नियंत्रक प्रो. संजय पंत ने बृहस्पतिवार को प्रवेश प्रक्रिया की पूरी जानकारी देने के साथ उम्मीद जताई कि इस प्रक्रिया के बाद विवि में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को आगे परीक्षा फार्म भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
विवि प्रशासनिक भवन में बृहस्पतिवार अपराह्न आयोजित पत्रकार वार्ता में कुलपति व परीक्षा नियंत्रक ने बताया कि विवि ने प्रवेश और पढ़ाई के साथ परीक्षाओं का भी पूरा खाका पहले ही खींच लिया है। 11 से 18 जुलाई तक प्रवेश दे दिये जाएंगे, जिसके बाद अगले 4 दिन यानी 23 तक वेटिंग लिस्ट में रहे विद्यार्थियों पर विचार किया जाएगा, और 23 जुलाई से पहले सेमेस्टर की पढ़ाई प्रारंभ कर दी जाएगी। इसके बाद सेमेस्टर में कम से कम 90 दिन की पढ़ाई अनिवार्य रूप से कराई जाएगी और 15 नवंबर से पहले सेमेस्टर की परीक्षाएं भी करा ली जाएंगी।

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1973 में स्थापित उत्तराखंड का कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल आईआईटी रुड़की से आए कुलपति प्रो. दिनेश कुमार नौड़ियाल के नेतृत्व में निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। इधर यूजीसी के ‘नैक’ यानी राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यानन परिषद से वर्ष 2016 में वर्ष 2021 तक के लिए ‘ए’ ग्रेड प्राप्त विश्वविद्यालय की उपलब्धियों, प्रगति व भावी योजनाओं पर प्रस्तुत है प्रो. नौड़ियाल के साथ हुई बातचीत के प्रमुख अंश:

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p style=”text-align: justify;”>प्रश्न: कुमाऊं विश्वविद्यालय की उपलब्धियों के बारे में कुछ बताएं।
प्रो. नौड़ियाल: कुमाऊं विश्वविद्यालय की जैव प्रौद्योगिकी विभाग की अध्यक्ष प्रो. बीना पांडे ने इसी माह उत्तराखंड की एक जड़ी-बूटी किल्मोड़ा (दारुहरिद्रा) से मधुमेह के उपचार के लिए प्राकृतिक व रसायन रहित आर्युवेदिक औषधि बनाने का फॉर्मूला अमेरिकी संस्था ‘इंटरनेशनल पेटेंट सेंटर’ से पेटेंट प्रमाण पत्र प्राप्त किया है, जबकि विश्वविद्यालय के नैनो साइंस एवं नैनो तकनीकी केंद्र नैनीताल ने प्लास्टिक के कूड़े व खाली बोतलों से बहुमूल्य नैनो कार्बन पदार्थ ‘ग्रेफीन’ के साथ ही पेट्रोलियम ईधन और सीमेंट-कंक्रीट के साथ उपयोग होने वाले पदार्थ बनाने की मशीन ‘स्वयंभू’ तथा कालीतीत यानी ‘एक्सपायर’ हो चुकी दवाइयों को फिर से उपयोग करने की ‘बायो मेडिकल ड्रग डिलीवरी सिस्टम’ के दो पेटेंट फाइल करवा कर साढ़े चार दशक की उम्र में इतिहास रच डाला है। इधर विश्वविद्यालय के अल्मोड़ा परिसर के भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. जेएस रावत को बीते 5 वर्षों में वैश्विक रूप से उभरती हुई ‘हाई-टेक जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी’-जीआईएस का शासन में नियोजन और प्रशासनिक कार्यों में त्वरित, पारदर्शी संपादन और प्राकृतिक संसाधनों के विकास व प्रबंधन में प्रयोग के लिए किये गए उत्कृष्ट कार्यो के लिए भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित ‘नेशनल जियोस्पेशियल चेयर प्रोफेसरशिप अवार्ड’ से नवाजा गया है। इस अवार्ड के तहत प्रो. रावत को सेवानिवृत्त होने तक प्रति माह 25 हजार रुपए एवं सेवानिवृत्ति के उपरांत 3 वर्ष तक प्रति माह एक लाख रुपए प्राप्त होंगे। प्रो. रावत के प्रयासों से अभी हाल ही में अल्मोड़ा जिले में कोसी नदी के पुर्नजीवीकरण के कार्य भी प्रशासनिक स्तर से प्रारंभ हुए हैं।

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p style=”text-align: justify;”>प्रश्न: कुमाऊं विश्वविद्यालय में आपदा विजन क्या है ?
प्रो. नौड़ियाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की तरह ही हमारा मानना है कि ‘ऑटोमेशन’ यानी स्वचालन के जरिये विश्वविद्यालय की अनेकों समस्याओं का हल किया जा सकता है। स्वचालन में हमने ‘ग्रीन इनीशिएटिव्स’ यानी हरित पहलों को भी जोड़ा गया है। इसके तहत विश्वविद्यालय में करीब सवा लाख से अधिक विद्यार्थियों के प्रवेश ऑनलाइन कराये गए हैं, और परीक्षा की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया है। इस तरह हम अपनी ओर से लाखों कागज और हजारों पेड़ों को बचाने में योगदान दे रहे हैं। इसी कड़ी में हम आगे ‘एनएसडीएल’ यानी ‘नेशनल सिक्योरिटीज डिपोजिटरी लिमिटेड’ व ‘एनएडी’ यानी ‘नेशनल एकेडमिक डिपोजिटरी’ के माध्यम से विश्वविद्यालय की सभी पीएच.डी. डिग्रियों और अंकपत्रों को इंटरनेट पर अपलोड करने की पहल करने जा रहे हैं, जिसके बाद इन डिग्रियों को कहीं से भी ऑनलाइन डाउनलोड करने के साथ ऑनलाइन ही सत्यापन भी किया जा सकेगा। इसके अलावा हम विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन तथा नैनीताल और अल्मोड़ा परिसरों को एक बड़ी कंपनी के माध्यम में बिना किसी खर्च के सौर ऊर्जा से जगमगाने और तीनों को गर्म रखने के लिए ‘सेंट्रल हीटिंग सिस्टम’ लगाने जा रहे हैं। यह कंपनी अपने खर्च पर सौर ऊर्जा के उपकरण लगाकर विवि को केवल 2 रुपए प्रति यूनिट की दर से सस्ती बिजली उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा विवि के नैनीताल व अल्मोड़ा परिसरों में 1-1 ‘स्मार्ट क्लास रूम’ तथा प्रशासनिक भवन को ‘हाई-टेक मॉडर्नाइज्ड स्मार्ट ऑफिस’ में तब्दील करने तथा विश्वविद्यालय के लेखा विभाग का भी स्वचालन करने की योजना है। विश्वविद्यालय के नैनीताल व अल्मोड़ा परिसरों में इंटरनेट कनेक्टिविटी व फ्री वाई-फाई देने की शुरुआत भी जल्द होने जा रही है।

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p style=”text-align: justify;”>प्रश्न: शोध कार्य किसी भी विश्वविद्यालय की प्रगति के मुख्य मानक होते हैं। इस दिशा में क्या कर रहे हैं ?
प्रो. नौड़ियाल: इस हेतु विश्वविद्यालय में पहली बार ‘स्पॉसर्ड रिसर्च एंउ इंडस्ट्रियल सेल’ यानी प्रायोजित शोध एवं औद्योगिक परामर्श केंद्र की स्थापना की गयी है। इस केंद्र के जरिये विश्वविद्यालय के शोध विद्यार्थी देश के शीर्ष संस्थानों से शोध परियोजनाएं प्राप्त कर सकते हैं, तथा विश्वविद्यालय के प्राध्यापक देश के अन्य संस्थानों में सलाहकार के रूप में सेवाएं दे सकते हैं। पीएच.डी. विद्याथियों की थीसिस के मूल्यांकन की प्रक्रिया को तेज करने, अधिकतम 5-6 माह में यह प्रक्रिया पूरी करने की प्रक्रिया भी बनायी गयी है। इसके अलावा अन्य छात्रों की सुविधा के लिए विश्वविद्यालय के परीक्षा प्रभाग का भी स्वचालन किया जा रहा है, जिसके बाद विवि में किसी भी छात्र को अपने छात्र जीवन में केवल प्रवेश के समय एक बार फॉर्म भरने की जरूरत होगी। इस दौरान उसे एक ‘यूनीक आईडी’ दी जाएगी। इसके बाद उसे अगली कक्षाओं में कोई फार्म नहीं भरने पड़ेंगे। (नवीन जोशी)

प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट

प्रो. सतपाल बिष्ट को मिला ‘उत्तराखंड रत्न’ सम्मान

कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर के प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट को रविवार को देहरादून स्थित श्री देव सुमन सुभारती मेडिकल कॉलेज मे ‘उत्तराखंड रत्न’ सम्मान से सम्मानित किया गया। तीन दशक पुरानी ‘ऑल इंडिया कांफ्रेंस ऑफ इंटलेक्चुअल्स’ के द्वारा उनके कार्योें को देखते हुए उन्हें यह पुरस्कार प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत के हाथों प्रदान किया गया। प्रोफेसर सतपाल बिष्ट कुविवि के अलावा मिजोरम की आइजॉल यूनिवर्सिटी, उड़ीसा की बरहामपुर यूनिवर्सिटी में भी सेवाएं दे चुके हैं, तथा फिलीपींस के सेंट लुकास मेडिकल सेंटर व बरहामपुर यूनिवर्सिटी के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के विजिटिंग प्रोफेसर भी हैं।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….।मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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