अनूठा है नैनीताल, शशि कपूर और अमिताभ का त्रिकोण

दिल्ली सहित देश के सभी संस्करणों में प्रकाशित आलेख : अनूठा है शशि, अमिताभ व नैनीताल का त्रिकोण
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जी हां, नैनीताल सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और शशि कपूर के बीच प्रेम का अनूठा त्रिकोण है, और इस त्रिकोण का अमिताभ और शशि कपूर के अलावा शायद ही किसी को भी पता हो। नैनीताल, अमिताभ और शशि कपूर के इस त्रिकोण की कहानी अमिताभ के एक छात्र के रूप में नैनीताल के शेरवुड कॉलेज से पढ़ाई के दौरान अभिनय की दुनिया में उतरकर जीवन का पहला पुरस्कार ग्रहण करने से शुरू होती है, और इसी कहानी के अगले भाग में अपने शुरुआती दिनों में एक फिल्म में ‘एक्स्ट्रा’ के रूप में कार्य कर रहे अमिताभ को शशि कपूर का साथ मिलता है, और फिर वे जल्दी ही शशि के साथ ‘दीवार’ फिल्म में ‘मेरे पास मां है…’ वाला सीन करते हैं। यह दोस्ती रोटी कपड़ा और मकान, कभी कभी, त्रिशूल, नमक हलाल और सिलसिला सहित अनेक फिल्मों से आगे बढ़ती हुई इतनी गहराती जाती है कि शशि जब अपने प्रोडक्शन में पहली फिल्म ‘अजूबा’ बनाते हैं तो उसमें अमिताभ ही प्रमुख भूमिका में होते हैं। यही नहीं अमिताभ की बेटी श्वेता की शादी शशि के ही परिवार में, उनके बड़े भाई राज कपूर के पोते से होती है। इस बीच नैनीताल जरूर इस कहानी से दूर होता है, किंतु इन दोनों की पहली फिल्म ‘दीवार‘ का वही ‘मेरे पास मां है…’ वाला सीन नैनीताल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की जागरूकता के लिए लगाया जाता है, और प्रधानमंत्री मोदी के ट्विटर हैंडल तक पहुंचता हुआ नैनीताल पूरी दुनिया में छा जाता है।

नैनीताल में लगा फिल्म दीवार पर आधारित पोस्टर, जिसकी प्रधानमंत्री मोदी ने भी प्रशंशा की थी।

इस त्रिकोण को समझने के लिए फिर शुरू में वापस लौटते हैं। अमिताभ ने नैनीताल के शेरवुड कॉलेज में पढ़ने के दौरान ही अभिनय की दुनिया में पहला कदम ‘ज्योफ्री कैंडल’ के थियेटर ग्रुप ‘शेक्सपियराना’ के जरिए रखा था। उन्होंने शेरवुड में अभिनय के लिए ‘केंडल कप’ रखा था। इस ग्रुप में ज्योफ्री की बड़ी बेटी जेनिफर केंडल भी शामिल थीं, जिनके साथ काम करते हुए बाद में शशि कपूर ने विवाह कर लिया था। यानी ज्योफ्री कैंडल बाद में शशि कपूर के श्वसुर बने। ज्योफ्री कैंडल के साथ काम करते हुए ही अमिताभ को शेरवुड कॉलेज में अपने दूसरे वर्ष में महान रूसी नाटककार निकोलाई गोगोल के नाटक ‘इंस्पेक्टर जनरल’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का ‘केंडल कप’ मिला था।

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नैनीताल-कुमाऊं में फिल्माई गई फिल्में

आगे जब अमिताभ मुंबई में संघर्ष रहे थे, उन्होंने केवल 500 रुपयों के लिए ‘सात हिंदुस्तानी’ फिल्म में ‘एक्स्ट्रा’ कलाकार के रूप में ऐसा सीन किया था, जिसे फिल्म में दिखाया ही नहीं गया। उस वक्त मोबाइल फोन होते नहीं थे और अमिताभ को ये पता था कि शशि रविवार को शूतिंह नहीं करते हैं, और अपने बच्चों के साथ उस दिन नए बने ‘सन एंड सेंड’ होटल में स्विमिंग करने जाया करते हैं। ऐसे में अमिताभ होटल के करीब जाकर खड़े हो जाते थे, ताकि शशि का ध्यान खींचने की कोशिश कर सकें।उस वक्त शशि को इस्माइल मर्चेंट ने किसी अंग्रेजी फिल्म के लिए साइन किया था, उस फिल्म में किसी छोटे से रोल के लिए बच्चन ने शशि से एप्रोच लगाई। एक दिन प्रोडयूसर इस्माइल ने उन्हें बुलाया और एक छोटे से सीन के लिए पांच सौ रुपए में अमिताभ को साइन कर लिया। बाद में वो सीन भी फिल्म से काटना पड़ गया, लेकिन अमिताभ अपने पांच सौ के मेहनताने से खुश थे। उन्हें बाद में फिर से बुलाया गया। वह शशि कपूर के जनाजे का दृश्य था। बच्चन को शवयात्रा में उनकी अर्थी को कांधा देना था और उस भीड़ में शामिल रहना था। सीन शूट भी हो गया, लेकिन जब बाद में शशि कपूर ने देखा तो उसे प्रोडयूसर से हटाने को कहा, और बच्चन से कहा, ‘यू आर मेड फॉर बैटर थिंग्स’ यानी वे ‘एक्स्ट्रा’ कलाकार नहीं कुछ बड़ा करने के लिए बने हैं। और एक दिन वो आया जब दोनों एक साथ ‘दीवार’ में काम कर रहे थे और शशि कपूर डायलॉग बोल रहे थे, ‘मेरे पास मां है’। 

स्वयं अमिताभ ने अपने एक ब्लॉग में इन घटनाओं के सिलसिले को शशि कपूर के साथ फिल्म दीवार के एक पुल के नीचे फिल्माए गए ‘मेरे पास मां है..’ वाले बहुचर्चित सीन के साथ जोड़ते हुए बताया कि इस दौरान शशि ने उन्हें अहसास नहीं होने दिया कि उनकी फिल्म का एक ‘एक्स्ट्रा’ कलाकार आज उनके साथ मुख्य भूमिका में है।

अमिताभ, शशि और नैनीताल स शुरू हुई यह कहानी वापस नैनीताल पिछले वर्ष ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत नैनीताल नगर पालिका द्वारा लगाए गए पोस्टर से पहुंची, जिसमें फिल्म के संवादों को बदलते हुए अमिताभ व शशि की मां बनी निरूपा रॉय कहती हैं, वह उस बेटे के घर जाएंगी जिसके घर शौचालय होगा। यह पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो मुंबई में रहने वाले एक लेखक, गायक व संगीतकार आशुतोष साहू ने इस पोस्टर को ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए डाल दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे देखा तो प्रसन्न हुए और इस प्रयोग की प्रशंशा की।

बहरहाल, शशि कपूर और नैनीताल का संबंध एक अन्य कोण पर उनके द्वारा यहां फिल्माई गई कालजयी फिल्म ‘वक्त’ (1965) से भी रहा, जिसकी शूटिंग के लिए वे लंबे समय तक यहां रहे।

इस फिल्म में शशि एवं शर्मिला टैगोर पर नैनी झील में रंग-बिरंगी पाल नौकाओं पर ‘दिन हैं बहार के, तेरे मेरे इकरार के…’ गीत बेहद खूबसूरती से फिल्माया गया था। इसके अलावा पत्रकारिता के विषय पर बनी फिल्म द दिल्ली टाइम्स’ की शूटिंग भी 1985 में नैनीताल में बोट हॉउस क्लब और रोप-वे ट्रोली में हुई थी। इस फिल्म में रोप-वे ट्रोली में एक हत्या होने का दृश्य फिल्माया गया था। शशि भी इस फिल्म में मुख्य भूमिका में थे, और शूटिंग के लिए नैनीताल आये थे, और यहाँ मेट्रोपोल होटल में रुके थे। शशि को इस फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। आज उनके निधन पर कला की नगरी कही जाने वाली सरोवरनगरी में भी गहरे दुःख के भाव हैं,और मानो शशि जी के साथ बहार भी कहीं खो गयी है।

💐💐😢😢💐💐(दिवंगत दादा साहेब फाल्के पुरस्कार प्राप्त महान अभिनेता शशि कपूर जी को हार्दिक-विनम्र श्रद्धांजलि के साथ)💐💐😢😢💐💐

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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