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वन विभाग ने पथरीले पहाड़ पर उगाया ‘हिमालयन बॉटनिकल गार्डन’

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तत्कालीन वन वर्धनिक उत्तराखंड मनोज चंद्रन ने 350 हेक्टेयर क्षेत्रफल को केवल 90.5 लाख रुपए से किया सबसे बड़े जीवंत जैव संग्रहालय के रूप में
नवीन जोशी, नैनीताल। पर्यटन नगरी नैनीताल में बीते एक दशक में एक ऐसा नया पर्यटन स्थल विकसित हो गया है, जो कभी पथरीला पहाड़ हुआ करता है, और यहां के मजबूत पत्थरों से नगर में अंग्रेजी दौर में घरों-बंगलों का निर्माण किया जाता था। इस पथरीले पहाड़ पर वन विभाग ने बीते करीब 12-13 वर्षों में प्रदेश का अपनी तरह का इकलौता व अनूठा जीवंत जैव विविधता से समृद्ध संग्रहालय-हरबेरियम ‘उगा’ दिया है, जिसमें इतनी अधिक खाशियतें हैं कि नगर के दूर होने के बावजूद इन्हें देखने के लिए हर वर्ष लाखों सैलानी भी यहां आ रहे हैं।
हम बात कर रहे हैं ‘हिमालयन बॉटनिकल गार्डन’ की। वर्ष 2015 के इसी अप्रैल माह में इस अनूठे जीवंत संग्रहालय की नींव रख रहे नैनीताल में तैनात तत्कालीन वन वर्धनिक-उत्तराखंड मनोज चंद्रन ने इस संवाददाता को बताया था कि वह 350 हेक्टेयर क्षेत्रफल में केवल 90.5 लाख रुपए से यह असंभव सा कारनामा करने का ख्वाब बुन रहे हैं। उन्होंने ही इसके अलावा भी एक नयी पहल करते हुए सरिताताल (तब सड़ने वाला सड़ियाताल) का कायाकल्प करते हुए इसके नीचे झरने का सौंदर्यीकरण करके इसे वन विभाग के साथ ही स्थानीय लोगों के लिए आय का एक नया स्रोत तैयार किया था। इधर नगर से करीब 5 किमी दूर कालाढुंगी रोड पर नारायण नगर के निकल, निर्जल, नीरव बबूलिया डांडा क्षेत्र में उनकी योजना हिमालयन बॉटनिकल गार्डन स्थापित कर यहां पहले से मौजूद 280 प्रजातियों के पेड़-पौधों के संरक्षण के साथ इसके लिए मार्गों का सुदृढ़ीकरण, सड़ियाताल झील के जलागम क्षेत्र में 147 चेकडैमों का निर्माण कर जल संरक्षण, जलीय पौधों के संरक्षण के लिए शीशे के एक्वेरियम, गुंबद के आकार के शीशमहलों में यूफोबिया, ओपनशिया, कलैन्चो व कैक्टस जैसे शुष्क जलवायु के पौधे लगाने, साथ ही प्रदेश के किलमोड़ा, बेडू, बुरंाश, बनहल्दी, घिंघारू, वनक्सा, समेवा, कपूर, कचरी, थुनेर, हिसालू, रतपतिया, जंगली प्याज, सालम मिश्री, पाषाण भेद, बज्रदंती, कालाजीरा, काफल व तिमूर के साथ रेशे युक्त रामबांश, भीमल, भांग व बिच्छू घास, तैलीय प्रजाति के चटौर, जटालू, च्यूरा, चुलू, चीड़ व देवदान, सुगंधित प्रजाति के पाती, पुदीना, मेंथा, नीबू घास, नीलगिरि तेज व जिरेनियम, घाम प्रजाति के बाबीलाख् कुश, किकुयू, भूकटाव रोकने वाली बिमलासिया, गोल्डिया के साथ ही फर्न हाउस में आर्द्र जलवायु के मौंस, फर्न व आर्किढड आदि पौधे लगाने की थी। इसके लिए करीब ढाई किमी दूर गैरीखेत क्षेत्र से बबुलिया डांडा में पानी लाया गया।
ऐसी नींव के फलस्वरूप हिमालयन संग्रहालय का स्वप्न वर्तमान में साकार होता नजर आ रहा है। इधर यहां तीन दिन से पहले ‘नैनीताल बर्ड फेस्टिवल’ का आयोजन किया गया। गार्डन में बारिश के पानी को संग्रहीत कर उनका सिंकलिंग विधि से पौधों को देने के लिए प्रयोग किया जा रहा है। नैनीताल वन प्रभाग की पूर्व डीएफओ व वर्तमान में वन संरक्षक-दक्षिणी कुमाऊं डा. तेजस्विनी अरविंद पाटिल ने बताया कि इस पथरीले पहाड़ में शुरू में बड़े क्षेत्रफल पर पौधे तो दूर, मिट्टी तक नहीं थी। ऐसे में सड़ियाताल झील की सड़ी गाद-मिट्टी हटाकर उसे यहां लाकर डाला गया। इससे सड़ियाताल भी नये साफ-सुथरे सरिताताल की स्थिति में आई तो पथरीला पहाड़ भी जीवंत हरबेरियम में तब्दील हो गया है। बॉटनिकल गार्डन में वर्तमान में 50-60 प्रजातियों के ऑर्किड, 100 से 150 प्रजातियों के औषधीय पौधे, 100 से अधिक प्रजातियों से सजावटी पौधे, तितलियां, कीड़े-मकोड़े तथा 150 प्रजातियों की चिड़ियां व इन्हें देखने केे लिए ‘बर्ड वॉचिंग ट्रेल’ भी स्थापित किये गये हैं। आगे भी यहां नित नये प्रयोग और कार्य चलते जा रहे हैं।

यह भी पढ़ें : पूरा देश हुआ नैनीताल जू का कार्यक्षेत्र, इस कदम के बाद कई छलांगें लगाने की है तैयारी

  • आगे कई बड़े ऐसे कार्यों के लिए  छलांगें लगाने की है तैयारी, जिनमें से कई देश और कई दुनिया के किसी भी चिड़ियाघर में कहीं नहीं हुए हैं

नवीन जोशी, नैनीताल। नैनीताल चिड़ियाघर का कार्यक्षेत्र अब केवल नैनीताल चिड़ियाघर तक ही सीमित नहीं रहा। 2012 से चल रहे प्रयासों के फलीभूत होते हुए इसकी प्रबंधकारिणी समिति का नाम गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान एवं जैव विविधता संरक्षण प्रबंधन समिति नैनीताल एवं इसका कार्यक्षेत्र पूरा देश हो गया है। इसके साथ यह चिड़ियाघर पूरे देश में कहीं भी जरूरत पड़ने पर वन्य जीवों के साथ जैव विविधता के संरक्षण के कार्य कर सकेगा, साथ ही बड़ी कंपनियों के ‘कॉरपोरेट सोशियल रिस्पॉसिबिलिटी’ सीएसआर फंड आदि भी ले पाएगा। यह सब कुछ जू की देहरादून में आयोजित हुई सामान्य सभा की वार्षिक बैठक में मिली स्वीकृतियों से संभव हुआ है। इस कदम के बाद नैनीताल चिड़ियाघर की आगे कई बड़े ऐसे कार्यों के लिए छलांगें लगाने की तैयारी है, जिनमें से कई देश और कई दुनिया के किसी भी चिड़ियाघर में कहीं नहीं हुए हैं।

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यह भी होंगे नये कार्य:
1. ‘बिग-फाइव’ कहे जाने वाले बाघ, गैंडा, हाथी, ध्रुवीय भालू आदि वन्य जीवों की कहानी सुनाएगी पृथ्वी
2. वी शांताराम लाइव टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित फिल्मकार माइक पांडे के करेंगे यह कार्य
3. जू के ‘इंटरप्रिटेशन सेंटर’ के पीछे के क्षेत्र में बनेगा असली जंगल व हिंसक वन्य जीवों के बीच से गुजरने का अनुभव देने वाला ‘वॉक वे’
4. 7-डी इंटरप्रिटेशन सेंटर में सैलानियों के सामने ‘विषय केंद्रित’ तरीके से आ जाएंगे दहाड़ते हुए बाघ, भालू और देंगे संरक्षण का संदेश, दुनिया के किसी भी चिड़ियाघर में अपनी तरह का पहला प्रयोग
5. कस्तूरी मृग, स्नो लेपर्ड, मारखोर, ब्लू शीप व मोनाल भी आएंगे
6. रात्रि 10 बजे तक खुलकर नैनीताल में ‘नाइट सफारी’ भी होगी उपलब्ध
7. सोमवार की जगह बृहस्पतिवार को होगी जू की साप्ताहिक बंदी
8. नये बने वाटर फॉल पर आयोजित किया जाएगा‘लाइट एंड साउंड शो’
9. हनुमानगढ़ी में बनेगा कुमाऊं व नैनीताल का संग्रहालय
10. सातताल में होगा परिंदों को सुरक्षित तरीके से देखने का प्रबंध, टिकट भी लगेगा
11. महेश खान में स्कूल-कॉलेजों बच्चों को प्रकृति व पर्यावरण संरक्षण की जानकारी देने के लिए विकसित होगा ‘नेचर कैंप’,
12. किराया 4 गुना तक बढ़ा, बच्चों का किराया अब 30 की जगह 50, बड़ों का 50 की जगह 100 तथा विदेशी सैलानियों के लिए 200 रुपए
13. जू के निचले से ऊपरी गेट तक चलेगी ई-टैक्सी, पहले चरण में पेट्रोल टैक्सी व आगे मॉडीफाइ कर सोलर टैक्सी चलाने की भी तैयारी
14. चिड़ियाघर के ‘जू कीपर्स’ के वेतन में 25 फीसद की बढ़ोत्तरी को भी मिली स्वीकृति

राष्ट्रीय सहारा, 15 फरवरी 2018

इस बैठक में मिली स्वीकृतियों की जानकारी देते हुए नैनीताल जू के निदेशक, प्रभागीय वनाधिकारी डा. धर्म सिंह मीणा ने बताया कि चिड़ियाघर के देश का चिड़ियाघर बनने के साथ देश के किसी भी चिड़ियाघर में पहली बार होने जा रहे कई कार्य किये जाने की योजना है। खास बात यह है कि इन सभी कार्यों के बहुत अधिक धन व ढांचागत निर्माण कार्यों की जरूरत नहीं है, बल्कि अधिकांश कार्य तकनीकी व डिजिटल स्वरूप मंे किये जाने हैं, और इनका योजनागत कार्य पूरा भी हो चुका है। आगे सभी नयी योजनाएं आगामी मार्च से शुरू होनी शुरू हो जाएंगी, और पूरी तरह छह माह से एक वर्ष के भीतर मिलने लगेंगी। इसके साथ नैनीताल जू संतृप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इन सभी योजनाओं का मूल उद्देश्य वन्य जीवों के संरक्षण के साथ खासकर बच्चों को प्रकृति तथा इसके जीव-जंतुओं से अवगत कराना है, ताकि वे इनका महत्व समझ सकें। मीणा ने बताया कि सभी कार्य ‘पायलट प्रोजेक्ट’ के रूप में होंगे, तथा यहां इनकी सफलता के बाद आगे हिमालय बॉटनिक गार्डन में ऐसे प्रोजेक्ट लाने की कोशिश होगी, जो देश में अभी नहीं हैं। साथ ही प्रदेश एवं देश में भी ये शुरू किये जा सकेंगे।

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विलुप्त प्रजातियों की कहानी सुनाएगी पृथ्वी
नैनीताल। नैनीताल जू में रात्रि में आयोजित होने वाले ‘स्पेशीज एक्सटिंक्शन’ शो में पृथ्वी ‘बिग-फाइव’ कहे जाने वाले बाघ, गैंडा, हाथी, ध्रुवीय भालू आदि वन्य जीवों की कहानी बताते इस तथ्य व खतरे को रेखांकित करेगा कि इन वन्य जीवों का अस्तित्व मानव के अस्तित्व के लिए कितना और किस तरह जरूरी है। साथ ही पृथ्वी बताएगी कि उसकी गोद से 84 लाख जीव-जंतुओं की प्रजातियो में से कितनी और क्यों गायब हो चुकी हैं। यह कार्य ऑस्कर पुरस्कार के लिए नामित हो चुके ‘अर्थ मैटर्स फाउंडेशन’ के चेयरमैन व जाने माने पर्यावरणविद् तथा वी शांताराम लाइव टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित फिल्मकार माइक पांडे के द्वारा किये जाने पर बात चल रही है। इसके अलावा जू के ‘इंटरप्रिटेशन सेंटर’ के पीछे के क्षेत्र में ‘वॉक वे’ बनाया जाएगा, जिसमें जू आने वाले सैलानी पूरी तरह झरने युक्त जंगल और उसमें रहने वाले हिंसक वन्य जीवों के बीच से गुजरने का अनुभव कर सकेंगे। चार से छह माह में यह वॉक-वे भी शुरू हो जाएगा।

सैलानियों के सामने आ जाएंगे बाघ
7 D के लिए इमेज परिणाम

नैनीताल। नैनीताल जू में ‘थीम बेस्ड 7-डी’ (डायमेंनशियल) यानी सात-ज्यामितीय विषय केंद्रित शो भी आयोजित किया जाएगा। इस शो के जरिये देश के किसी भी चिड़ियाघर में पहली बार दर्शकों के सामने दहाड़ता हुआ बाघ, डायनासोर, हाथी, भालू आदि वन्य जीव आकर रोमांचित करने के साथ ही प्रकृति व जैवविविधता के संरक्षण का जरूरी संदेश भी देंगे। बताया कि भारत में अभी तक वन्य जीवों व प्रकृति संरक्षण का ऐसा कोई शो नहीं होता है, लिहाजा यह पहला होगा। बताया गया है कि इस तरह का प्रयोग दुनिया में संभवतया सिंगापुर के इकलौते चिड़ियाघर में ही किया गया है। इसके बाद 9-डी में भी जाने की योजना है।

रात्रिचरों व सांप जैसे सरीसृपों व मछलियों के लिए भी बनेंगे खंड
नैनीताल। नैनीताल जू में रात्रिचर वन्य जीवों के लिए गुफा की तरह का वन्य जीवों के पिंजड़ों युक्त ‘नॉक्ट्रनल हाउस’ (NOCTURNAL HOUSE) भी बनाया जा रहा है। इसके अलावा सांप, छिपकली आदि सरक कर चलने वाले सरीसृप वर्ग के जीव-जंतुओं के लिए भी ‘रेप्टाइल हाउस’ (Reptile House) बनाया जाएगा। साथ ही 1000 प्रजाति की मछलियों का बड़ा एक्वेरियम भी जू में बनाया जाना है। इस तरह नैनीताल जू पूर्ण चिड़ियाघर बन जाएगा। इसके बाद गुणवत्ता पर ध्यान देंगे। अलावा चिड़ियाघर की अपने यहां शहद तैयार कर इसकी ब्रांडिंग करने की भी योजना है।

रॉयल बंगाल टाइगर सहित कई के घर से आने वाली है ‘खुशखबरी’
नैनीताल। नैनीताल चिड़ियाघर में दार्जिलिंग से आने के तत्काल बाद रेड पांडा की तथा पिछले वर्ष जर्मनी से आये नये उपकरणों के साथ परिंदों की नई संतति की रोमांचित करने वाली ‘खुशखबरी’ के बाद ऐसी ही खुशखबरी अब रॉयल बंगाल टाइगर, तिब्बती भेड़िये और कई परिंदों व रेड पांडा सहित करीब आधा दर्जन बाड़ों से भी आने वाली है।

कस्तूरी मृग, स्नो लेपर्ड, मारखोर, ब्लू शीप व मोनाल भी आएंगे
नैनीताल। नैनीताल चिड़ियाघर में लंबे समय से मारखोर के टूटे जोड़े को फिर से बनाने के लिए एक मादा मारखोर, स्नो लेपर्ड व ब्लू शीप तथा कुछ अन्य वन्य जीवों को दार्जिलिंग चिड़ियाघर से, मोनाल के एक जोड़े को को हिमाचल प्रदेश के कुल्लू मनाली स्थित नेहरू फीजेंड्री से तथा कोटमन्या धरमघर से चरणबद्ध तरीके से कस्तूरी मृग को लाने व पहले चरण में अगले 2-3 माह में दो जोड़े लाने की भी तैयारी है। इसमें सफलता मिलने पर आगे एक वर्ष के भीतर जंगल से भी कस्तूरी मृगों को लाकर उनके बीच प्रजनन कराने की भी योजना है।

रात्रि 10 बजे तक खुलकर नैनीताल में ‘नाइट सफारी’ कराएगा उपलब्ध
नैनीताल। अब तक सुबह 10 से शाम पांच यानी सरकारी कार्यालयों के समय में खुलने वाला और सप्ताह में सोमवार को बंद होने वाला नैनीताल चिड़ियाघर अब देर रात्रि 10 बजे तक खुलकर नगर में सैलानियों को ‘नाइट सफारी’ के साथ रात्रि में मनोरंजन के साधनों की कमी दूर करेगा, तथा यहां बृहस्पतिवार को साप्ताहिक बंदी होगी, जिससे सप्ताहांत पर नगर में आने वाले सैलानी सोमवार को लौटते हुए भी जू का भ्रमण कर सकेंगे। जू में नये बने वाटर फॉल पर ‘लाइट एंड साउंड शो’ आयोजित किया जाएगा। बाहर शोर न हो, इस हेतु सैलानियों को सुनने के लिए इयरफोन उपलब्ध कराए जाएंगे।

रानीबाग में तैयार हुआ बंदरों का बंध्याकरण केंद्र, सीएम करेंगे शुभारंभ
नैनीताल। डीएफओ डीएस मीणा ने बताया कि रानीबाग में प्रदेश का दूसरा बंदरों का बंध्याकरण सुविधा व चिकित्सालय युक्त केंद्र भी तैयार हो गया है। पहले इसका शुभारंभ 14 फरवरी को मुख्यमंत्री टीएस रावत के हाथों किये जाने की योजना थी, लेकिन अब 22-23 फरवरी को मुख्यमंत्री के द्वारा इसका शुभारंभ किये जाने की योजना है। इसके लिये टीम को सीखने को पोंटा साहिब भेजा गया है। इसके शुरू होने से शहरों-कस्बों में बंदर-लंगूरों के आतंक से मुक्ति मिलने की उम्मीद की जा सकती है।

हनुमानगढ़ी में बनेगा कुमाऊं व नैनीताल का संग्रहालय, सातताल में स्टूडियो पॉइंट
नैनीताल। मुख्यालय से करीब 20 किमी दूर सातताल नैनीताल जू प्रबंधन समिति के नियंत्रण में आ गया है, जो यहां स्टूडियो पॉइंट बनाएगी तथा वहां पक्षियों की सुरक्षा के मद्देनजर सैलानियों के आवागमन को टिकट लगाकर ‘रेगुलेट’ करेगी। इसके अलावा दुनिया के नैनीताल के हनुमानगढ़ी में कुमाऊं के सांस्कृतिक संग्रहालय के साथ दूसरे एतिहासिक शहरों की तर्ज पर सरोवरनगरी नैनीताल का बसासत शुरू होने से लेकर इतिहास चित्रों के जरिये प्रदर्शित किए जाने के लिए संग्रहालय भी तैयार किये जाने की भी योजना है। इस प्रोजेक्ट में एक वर्ष लग सकता है। इसके अलावा महेश खान को शामिल करते हुए स्कूल-कॉलेजों बच्चों को प्रकृति व पर्यावरण संरक्षण की जानकारी देने के लिए ‘नेचर कैंप’ विकसित करने की भी योजना है। यहां बच्चों को बताया जाएगा कि प्रकृति में रहकर बताया जाएगा कि सृष्टि कैसे चल रही है। उन्हें आनंददायक तरीके से जानकारियों को सीखने का भी मौका दिया जाएगा।

किराया दोगुना हुआ, ई-टैक्सी चलाने को भी मंजूरी
नैनीताल। वार्षिक बैठक में नैनीताल जू आने वाले सैलानियों का किराया दो गुना तक बढ़ाने को भी हरी झंडी मिल गयी है। बच्चों का किराया अब 30 की जगह 50 व बड़ों का 50 की जगह 100 होगी। वहीं जू के निचले से ऊपरी गेट तक ई-टैक्सी, पहले चरण में पेट्रोल टैक्सी व आगे मॉडीफाइ कर सोलर टैक्सी चलाने की भी तैयारी है। चिड़ियाघर के ‘जू कीपर्स’ के वेतन में 25 फीसद की बढ़ोत्तरी को भी स्वीकृति मिल गयी है।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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