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मलेशिया में जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनना सीखेगा नैनीताल

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शुक्रवार 5 फ़रवरी को मल्लीताल बोट स्टैंड पर नैनी झील का जलस्तर गिरने से उभरा मलबे का पहाड़ सरीखा डेल्टा।
मलयेशिया में यहाँ होगी संगोष्ठी

-दो से चार मार्च तक मलयेशिया के मेलाका प्रांत में होने जा रही है एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शहरों को जलवायु अनुकूल बनाने की अंतरमहाद्वीपीय संगोष्ठी में नैनीताल नगर पालिका के अध्यक्ष एवं अधिशासी अधिकारी किये गए हैं आमंत्रित

नवीन जोशी, नैनीताल। नैनीताल नगर मलयेशिया में जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनना सीखेगा। इसके लिये स्थानीय नगर पालिका के अध्यक्ष एवं अधिशासी अधिकारी को दो से चार मार्च तक मलयेशिया के मेलाका प्रांत में आयोजित होने जा रही एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शहरों को जलवायु अनुकूल बनाने की ‘रेजीलियेंट सिटीज एशिया-पैसिफिक 2016 कांग्रेस’ विषयक अंतरमहाद्वीपीय कार्यशाला में प्रतिभाग करने के लिये आमंत्रित किया गया है। उल्लेखनीय है कि कार्यशाला में देश के कुछ ही ऐसे चुनिंदा शहरों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है, जिन्हें आयोजक संस्था आईसीएलईआई ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के ‘रेजीलियेंट’ यानी जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति लचीले शहरों की सूची में शामिल किया है।बताया गया है कि आईसीएलईआई दक्षिण एशिया के स्थानीय निकायों यानी शहरों में स्थायित्व के लिये कार्य करने वाली एक नियंत्रण संस्था है। इसका सूत्र वाक्य है-लोकल गवर्नमेंट फॉर सस्टेनेबिलिटी।

इस संस्था द्वारा पूर्व में फरवरी 2015 में बैंकाक में इस तरह की पहली-‘रेजीलेंट सिटीज एशिया-पैसिफिक-2015’ का आयोजन किया गया था, जिसमें 30 देशों के 60 स्थानीय निकायों के 300 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। मार्च में मलयेशिया के ‘ग्रीन सिटी स्टेट’ कहे जाने वाले प्रांत मेलाका के इक्वीटोरियल होटल में आयोजित होने जा रही दूसरी संगोष्ठी में 500 प्रतिभागियों को आमंत्रित किया गया है। संगोष्ठी के आयोजन में आईसीएलईआई के साथ ही मेलाका हिस्टोरिक सिटी काउंसिल एवं इंडोनेशिया मलयेशिया थाइलैंड ग्रोथ ट्राइएंगल-आईएमटी-जीटी के द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। संगोष्ठी का उद्देश्य स्थानीय निकायों के साथ ही क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय सरकारों, शोधकर्ताओं, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय संस्थाओं एवं स्वयं सेवी संस्थाओं को अपने शहरों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने के लिये एक साथ लाना एवं आपस में एक साथ एवं अलग-अलग समूहों में र्चचा के माध्यम से इस दिशा में आगे बढ़ने के लिये राह तैयार करना है। नगर पालिका अध्यक्ष श्याम नारायण ने इस अंतरमहाद्वीपीय कार्यशाला में आमंत्रित किये जाने पर खुशी जताई है। वहीं व्यक्तिगत समस्याओं के मद्देनजर स्वयं के जाने में असमर्थता जताते हुये सभासद अजय भट्ट एवं सुमित कुमार को भेजने की इच्छा व्यक्त की है। वहीं सूत्रों के अनुसार अन्य सभासद भी इस हेतु जाने के लिये जोर लगा रहे हैं।

दुनिया के मुकाबले तीन से चार गुना अधिक दर से बढ़ रहा है हिमालय में तापमान

नैनीताल। आईसीएलईआई के सीनियर प्रोजेक्ट ऑफीसर राहुल सिंह व केशव झा ने भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों का आधार बताते हुये दावा किया कि हिमालयी क्षेत्रों में तापमान में वृद्धि विश्व में बढ़ रहे तापमान में वृद्धि के मुकाबले तीन से चार गुना अधिक है। इसलिये यहां जलवायु परिवर्तन के प्रभाव भी अधिक पड़ने तय है। मलेशिया में होने जा रही एशिया-प्रशांत क्षेत्र की संगोष्ठी में विश्व भर के 500 और दक्षिण एशिया के भारत सहित आस-पड़ोस के आठ देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। उत्तराखंड के नैनीताल और देहरादून शहरों को इसमें आमंत्रित किया गया है। बताया कि संस्था के पास शहरों को जलवायु अनुकूल बनाने के लिये 2.5 लाख डॉलर की धनराशि उपलब्ध है, इसमें से हर शहर को 50 हजार डॉलर यानी करीब 35 लाख रुपये तक दिये जा सकते हैं। इस धनराशि से शहरों में जलवायु परिवर्तन आधारित भूस्खलन, बाढ़ सरीखी आपदाओं से बचने के लिये ‘अर्ली वार्निग सिस्टम” भी लगाये जा सकते हैं।

नवीन समाचार

मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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