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अब केवल 9 दिनों में कीजिए कैलाश मानसरोवर यात्रा

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-2012 से की जा रही है यात्रा, हेलीकॉप्टर व हवाई जहाज से नेपाल के रास्ते सुगम तरीके से होगी यात्रा
नैनीताल।  पृथ्वी पर शिव के सबसे बड़े धाम कहे जाने वाले 18 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित कैलाश मानसरोवर की लंबी अवधि की यात्रा के हालांकि कई विकल्प हैं, लेकिन यदि आप के पास समय की कमी है तो नैनीताल से केवल नौ दिन में कैलाश मानसरोवर की यात्रा का विकल्प आजमाया जा सकता है। 

सरोवरनगरी ही नहीं प्रदेश की अग्रणी व देश-दुनिया की सैर कराने वाली अपनी तरह की अनूठी पर्यटन संस्था-यूथ टूरिज्म डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन यानी वाईटीडीओ टूर एंड ट्रेवल्स एक बार फिर केवल 9 दिनों में कैलाश मानसरोवर की यात्रा का कार्यक्रम लेकर आयी है। हवाई जहाज व हेलीकॉप्टर तथा अत्याधुनिक वाहनों के जरिये नेपाल के रास्ते बेहद सुगम, कम पैदल मार्ग के जरिये होने जा रही यह यात्रा आगामी 5 जून से शुरू होगी और 13 जून को वापस लौट जाएगी। यात्रा के लिए बुकिंग प्रारंभ हो गयी हैं। यात्रा में कैलाश मानसरोवर के साथ कई अन्य धार्मिक व दर्शनीय स्थलों का भी आकर्षण निहित है। 

9 दिन में कैलाश यात्रा के बारे में यहाँ क्लिक करके विस्तार से जानें  : कैलाश मानसरोवर यात्रा 2018

वाईटीडीओ के प्रमुख एवं अपने आप में विश्व पर्यटन के इन्साइक्लोपीडिया विजय मोहन सिंह खाती ने बताया कि 2012 से कराई जा रही इस यात्रा का इस वर्ष 7वां संस्करण होगा। 5 जून को यात्रा हल्द्वानी से महेंद्र नगर होते हुए नेपालगंज पहुंचेगी। आगे 6 जून को यात्री हवाई जहाज से 45 मिनट की उड़ान भरकर सिमीकोट पहुचेंगे और वहां दोपहर में शिव मंदिर के दर्शन करेंगे। 7 जून को सिमीकोट से हेलीकॉप्टर से 30 मिनट की हवाई उड़ान हिल्सा पहुंचाएगी, जहां से यात्री पश्चिमी तिब्बत के एक ऐतिहासिक स्थल पुरांग पहुंचेंगे। 8 को बस से यात्री मानसरोवर झील पहुंचकर झील की परिक्रमा करेंगे तथा वहीं रात्रि विश्राम करेंगे। 9 को यात्री मानसरोवर झील में स्नान एवं पूजा करेंगे और शाम तक कैलाश के आधार शिविर दारचेन पहुंचेंगे। इसी तरह 10 को यमद्वार तक बस से जाकर कैलाश पर्वत की डेराफुक तक परिक्रमा कर वहीं रात्रि विश्राम करेंगे। 11 को यात्रा डेराफुक से डोल्मा पास होते हुए गौरी कुंड होते हुए झुथुलपूक और 12 को पुरांग होते हुए हिल्सा और 13 को हेलीकॉप्टर से सिमीकोट व हवाई जहाज से नेपालगंज आकर शाम तक हल्द्वानी लौट आएंगे। यात्रा का किराया 1.65 लाख रुपए प्रति व्यक्ति रखा गया है।

यह भी पढ़ें : देश ही नहीं दुनिया के पर्यटन के इनसाइक्लोपीडिया हैं विजय मोहन सिंह खाती

विजय मोहन सिंह खाती

नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, पर्यटन नगरी सरोवरनगरी नैनीताल की पर्यटन संस्था वाईटीडीओ (यूथ टूरिज्म डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन) के स्वामी श्री विजय मोहन सिंह खाती को यदि देश ही नहीं दुनिया के पर्यटन का इनसाइक्लोपीडिया या जीता जागता ज्ञानकोष कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगा। देश-दुनिया के किस शहर में क्या-क्या दर्शनीय है, के साथ ही वहां के दर्शनीय स्थल सप्ताह में किस दिन बंद रहते हैं, और वहां प्रवेश का क्या शुल्क है, यह उन्हें मुंह जुबानी याद रहता है। साथ ही वह बस, टैक्सी या हवाई जहाज से उस स्थान की भौगोलिक परिस्थिति के अनुसार किसी दूरी को तय करने में लगने वाले समय की भी सटीक जानकारी दे सकते हैं।

श्री खाती का ऐसा जीवंत इनसाइक्लोपीडिया बनना किसी दैवीय शक्ति से नहीं वरन उनकी मेहनत से संभव हुआ है। अपने जमाने की राजकपूर अभिनीत सुपर हिट फिल्म ‘अराउंड द वल्र्ड इन एट डॉलर्स” की तर्ज पर ही 1976 में एक 23 वर्षीय नौजवान विजय अपनी घुमक्कड़ी के जुनूनी शौक की तर्ज पर कुछ सौ रुपए लेकर दुनिया की सैर पर निकल गया था, और विभिन्न देशों में कहीं लिफ्ट लेते हुए तो कहीं, वहीं नौकरी कर जुटाए पैंसों से वह करीब आठ-नौ माह में अफगानिस्तान, ईरान, तुर्की, सीरिया, जॉर्डन, रोम, इटली, यूगोस्लाविया व बुल्गारिया आदि 10 देशों की यात्रा कर लौट आए थे। उन दिनों को याद करते हुए श्री खाती बताते हैं कि इस यात्रा से पहले उन्होंने नगर के स्नोभ्यू में सैलानियों की फोटोग्राफी कर खुद पैंसे जुटाए थे। अप्रैल 1976 में वह दिल्ली से 1,200 रुपए में अफगानिस्तान का आने-जाने का हवाई जहाज का टिकट व वीजा लेकर विश्व यात्रा पर निकले थे। इस दौरान तेहरान व जॉर्डन में उन्होंने कुछ दिन के लिए छोटी-बड़ी नौकरियां भी करनी पडीं।
वापस लौटे तो पिता ने वकालत करने के लिए दबाव बनाया, और अहमदाबाद भेजकर एलएलबी करवा दी, और नैनीताल के जिला न्यायालय में वकालत भी शुरू करवा दी। लेकिन घुमक्कड़ी के जुनूनी विजय के कदम यहां एक-डेढ़ वर्ष ही थम पाए। 1982 में उन्होंने कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर नैनीताल से पर्यटन में डिप्लोमा कर लिया, और इसके तत्काल बाद नगर में ट्रेवल एजेंसी खोल दी। तब नगर में केवल चार-पांच ही ट्रेवल एजेंसी थीं और उनकी भूमिका केवल रानीखेत और कौसानी के टूर कराने तक सीमित थी। विजय ने अपनी ट्रेवल एजेंसी में पहली बार गाइड रखने की शुरुआत की, जो सैलानियों को घुमाने के साथ ही आसपास के अन्य पर्यटक स्थलों की जानकारी भी देते थे। विजय को ही नगर की आसपास की सुंदर भीमताल, सातताल, नौकुचियाताल व खुर्पाताल आदि झीलों के लिए ‘लेक टूर’ शुरू करने का श्रेय भी जाता है। नैनीताल के लिए दिल्ली से सैलानियों को अधिक लाने के लिए बसें लगवाने की शुरुआत भी उनके दौर में ही हुई। इस प्रकार वह पर्यटन व्यवसाय में हमेशा तत्कालीन परिस्थितियों के अनुरूप नए-नए प्रयोग करते हुए स्वयं को दौड़ में हमेशा अलग एवं आगे बनाए रहे और नए प्रतिमान स्थापित करते रहे।
इधर हालिया वर्षों में ट्रेवल एजेंसियों का नगर में काम चौपट होने के दौर में उन्होंने स्वयं को देश-दुनिया के टूर आयोजित करने की ओर मोड़ा है। हालांकि इसकी शुरुआत वह 1983 में ही 25 दिन का ‘भारत भ्रमण” टूर से कर चुके थे। अब वह कमोबेश हर माह कोई बड़ा टूर आयोजित करते हैं। बीते वर्ष उन्होंने हिंदुओं के पवित्र और सबसे बड़े तीर्थ कैलाश-मानसरोवर के लिए भारत के कठिन व लंबी पैदल यात्रा की जगह नेपाल की ओर से बेहद सरल यात्रा की शुरुआत की है, साथ ही हर वर्ष कम से कम एक विदेशी टूर भी आयोजित कर रहे हैं। और आगे उनकी योजना विदेशी यात्राओं को बढ़ावा देने की है।
श्री खाती बताते हैं अनुभव के जरिए प्राप्त इस सफलता का लाभ वह अपने साथी यात्रियों को सस्ती यात्रा के रूप में दे पाते हैं। उनकी यात्राओं की खाशियत यह भी है कि यह केवल एक बस, टैक्सी, ट्रेन या हवाई जहाज से नहीं वरन इन सभी के समन्वय से होती हैं। वह यात्रा की परिस्थितियों को देखते हुए पहले से तय यात्रा माध्यम वाहन का प्रयोग करते हैं, और साथ ही यात्रियों को कम खर्च के बावजूद अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। शायद इसी लिए उनकी पूरी तरह नियोजित यात्राएं अपने मूल खर्च से आधी धनराशि में ही संपन्न हो जाती हैं, और यात्रियों को बेहद सस्ती पड़ती हैं।

यह भी पढ़ें : इन सर्दियों में कीजिए पूर्व, मध्य, दक्षिण व पूर्वाेत्तर भारत तथा नेपाल व यूरोप के दर्शन

-नगर में इस तरह की यात्राएं कराने वाली इकलौती संस्था है वाईटीडीओ
नैनीताल। सरोवरनगरी की अग्रणी पर्यटन संस्था यूथ टूरिज्म डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन यानी वाईटीडीओ आगामी सर्दियों के महीनों में भारत दर्शन श्रृंखला की यात्राएं कराने जा रही है। उल्लेखनीय है कि वाईटीडीओ नगर से इस तरह की यात्राएं कराने वाली इकलौती संस्था है। वाईटीडीओ संस्था के प्रमुख देश-दुनिया के पर्यटन के इनसाइक्लोपीडिया कहे जाने वाले विजय मोहन सिंह खाती ने बुधवार को बताया कि आगामी नवंबर माह से कई यात्राएं आयोजित की जाएंगी। इनमें 12 से 23 नवंबर के बीच 12 दिवसीय दार्जिलिंग, गंगटोक, मां कामाख्या देवी मंदिर गुवाहाटी तथा शिलांग आदि पूर्वाेत्तर भारत की यात्रा, 26 दिसंबर से 10 जनवरी और 16 जनवरी से 31 जनवरी के बीच 16 दिवसीय कोचीन, समुद्री सैरगाज कोवलम, केरला की राजधानी तिरुअनंतपुरम, देश के आखिरी छोर कन्याकुमारी, रामेश्वरमधाम, मीनाक्षी मंदिर, मदुरई, मैसूर, तिरुपति बालाजी, मद्रास व महाबलीपुरम की दक्षिण भारत की यात्राएं, 30 दिसंबर से नौ जनवरी 2018 के बीच शिव ज्योर्तिलिंग काशी विश्वनाथ, वाराणसी, श्री जगन्नाथ धाम, गया, गंगासागर, कोलकाता व भुवनेश्वर की 12 दिवसीय पूर्वी भारत की यात्रा और 17 जनवरी 2018 से दो फरवरी के बीच हैदराबाद, शिव ज्योतिर्लिंग घृष्णेश्वर, त्रयम्बकेश्वर एवं भीमाशंकर, ऐलोरा, शिरडी, नासिक, मुंबई व गावा की मध्य भारत की यात्राएं आयोजित की जा रही हैं। इसके लावा आगे आठ से 16 फरवरी 2018 के बीच नौ दिवसीय नेपाल यात्रा और अपै्रल 2018 में यूरोप के फ्रांस, स्विटजरलेंड, लाइटेंटेन, आस्ट्रिया व इटली की 10 दिवसीय यात्राएं भी कराई जाएंगी।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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