Oops! It appears that you have disabled your Javascript. In order for you to see this page as it is meant to appear, we ask that you please re-enable your Javascript!

बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पद के लिए 23 को दुबारा से होगा मतदान

यहाँ से दोस्तों को भी शेयर करके पढ़ाइये

-नये सिरे से नामांकन की प्रक्रिया नहीं होगी, पूर्व के दोनों प्रत्याशियों के लिए ही बार काउंसिल के निर्वाचित सदस्य करेंगे मतदान

-6 मई को हुए चुनाव में डीके शर्मा बने थे बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया के सदस्य, पर उत्तराखंड बार काउंसिल के अध्यक्ष पद के निर्वाचन पर हुआ था विवाद में

अधिक मत प्राप्त करने वाले प्रत्याशी समर्थकों के साथ विजय चिन्ह बनाते हुए।

नवीन समाचार, नैनीताल, 29 मई 2019। उत्तराखंड बार कांउसिल के अध्यक्ष पद के लिए एक बार फिर 23 जून को मतदान होगा। अलबत्ता नये सिरे से नामांकन की प्रक्रिया नहीं होगी, बल्कि पूर्व में हो चुके चुनाव के दौरान अध्यक्ष पद के लिए नामांकन कराने वाले सुरेंद्र पुंडीर एवं सुखपाल सिंह के बीच ही चुनाव होगा। बार काउंसिल के 20 निर्वाचित एवं पदेन सदस्य महाधिवक्ता यानी कुल 21 सदस्य मतदान करेंगे।
उल्लेखनीय है कि 2009 के बाद यानी 10 वर्ष के बाद गत 6 मई को हुए चुनाव मतों की घोषणा के बाद विवाद में आ गये थे, और विवाद निपटारे के लिए मामला बार काउंसिल ऑफ इंडिया में भेजा गया था। इधर बीते रविवार को मामले की बार काउंसिल ऑफ इंडिया में हुई सुनवाई के बाद बुधवार को इस संबंध में फैसला आ गया है। मालूम हो कि 6 मई को हुए चुनाव में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य पद पर डीके शर्मा ने बड़े अंतर से एक तरफा जीत हासिल की थी, जबकि अध्यक्ष पद पर सुरेंद्र पुंडीर को 11 एवं दूसरे प्रत्याशी सुखपाल सिंह को 10 वोट मिलने की घोषणा हुई थी। इनके अलावा एक मत निरस्त एवं एक विवादित घोषित किया गया था।
पूर्व समाचार :
सोमवार 6 मई को बार काउंसिल के अध्यक्ष एवं बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य पद के लिए हुए मतदान के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी उत्तराखंड उच्च न्यायालय के पूर्व कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बीसी कांडपाल ने सदस्य पद पर डीके शर्मा को कुल 21 मतों में से एकतरफा 11 मत तथा अन्य प्रत्याशी-निवर्तमान सदस्य विजय भट्ट को 4, कुलदीप कुमार को 3, मनमोहन लांबा को 2 तथा योगेंद्र तोमर को एकमात्र वोट जबकि अध्यक्ष पर पर सुरेंद्र पुंडीर को 10 एवं सुखपाल सिंह को 9 वोट मिलने तथा एक वोट निरस्त होने व एक वोट के विवादित होने की घोषणा की। वहीं पीछे रहे प्रत्याशी सुखपाल सिंह ने यह दावा करते हुए कि उन्हें निरस्त किया गया एवं विवादित वोट सहित कुल 11 वोट मिले हैं, आपत्ति जता दी। बताया गया कि निरस्त किये गये मत में सुखपाल सिंह के नाम के आगे 1 अंक के साथ अंग्रेजी के ‘एक्स’ शब्द की तरह का निशान भी बना था, जिसे मतदाता का पहचान चिन्ह मानते हुए एवं ऐसा कोई भी निशान नियमानुसार प्रतिबंधित होने के चलते निरस्त किया गया। वहीं दूसरे मत में सुखपाल सिंह के नाम के आगे रोमन भाषा में अंग्रेजी के ‘आई’ की तरह एक लिखा गया था। इस पर आगे रहे प्रत्याशी सुरेंद्र पंुडीर की ओर से बताया गया कि निर्वाचन अधिकारी ने मतदान से पूर्व लिखित में बताया था कि सदस्य पद के लिए अपने पसंदीदा प्रत्याशी के नाम के आगे ‘एक्स’ का निशान जबकि अध्यक्ष पद के लिए मत ‘1,2 के क्रम में हिंदी या अंग्रेजी में अपने इच्छित प्रत्याशी के नाम के आगे अंकित करके’ थे। ऐसे में सुखपाल सिंह के नाम के आगे ‘आई’ अथवा रोमन में एक लिखा मत मतदाता द्वारा अपनी पहचान बताने के लिए दिया गया है, जो कि निरस्त होना चाहिए। ऐसे में मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री कांडपाल ने घोषणा की कि वे बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य पद पर डीके शर्मा को सर्वाधिक मत मिलने एवं अध्यक्ष पद पर सुरेंद्र पुंडीर को 10 तथा सुखपाल सिंह को 9 मत मिलने तथा एक-एक मत निरस्त एवं विवादित घोषित करने की रिपोर्ट बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भेजेंगे व अंतिम निर्णय बार काउंसिल ऑफ इंडिया ही लेगी। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व बार काउंसिल के उपाध्यक्ष पद पर राजबीर सिंह का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया था। सभी पदों पर विजयी उम्मीदवारों की घोषणा बार काउंसिल ऑफ इंडिया से ही होगी।

मुख्य न्यायाधीश के दरबार पहुंचा जिला बार की हड़ताल का मामला

-अधिवक्ता पर जानलेवा हमले की आरोपित महिला के भाई ने मुख्य न्यायाधीश से लगाई गुहार, न्याय के लिए जिला बार की हड़ताल को रोकें
नवीन समाचार, नैनीताल, 14 मई 2019। अधिवक्ता रवि कनवाल पर हुए जानलेवा हमले की आरोपित महिला उद्यमी सरिता नेगी की गिरफ्तारी की मांग पर जिला बार एसोसिएशन अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली गयी है। इस पर सरिता नेगी के भाई गोविंद सिंह ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखकर स्वतंत्र न्याय के लिए बार एसोसिएशन की हड़ताल पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

यह भी पढ़ें: महिला उद्यमी की गिरफ्तारी की मांग पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गये अधिवक्ता

घटना का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए गोविंद ने पत्र में लिख है कि पूर्व सैनिक की विधवा सरिता नेगी सड़ियाताल में अपने जेठ की सहायता से उत्तरांचल रेस्टोरेंट चलाती है। उसका अधिवक्ता रवि कन्याल व बगल के रेस्टोरेंट मालिक रवि के पिता से तारबाड़ एवं जमीन के एक टुकड़े को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप लगाया कि रवि कनवाल ने अधिवक्ता होने के नाते जिला बार एसोसिएशन के माध्यम से पुलिस पर दबाव बनाकर उनके आरोपों पर धाराओं को कमजोर कर दिया और जिला बार एसोसिएशन हड़ताल करके उन्हें जिला न्यायालय में न्याय के लिए जाने से रोक रही है। अधिवक्ताओं से उनका (सरिता) का मामला न लड़ने को हस्ताक्षर भी कराये गये हैं।

नैनीताल जिला बार में रिकार्ड 19वीं बार हरिशंकर कंसल बने अध्यक्ष, जानें किसे मिले कितने मत…

-अरुण सचिव, परगाई व रवि उपाध्यक्ष, मेघा लेखाकार, हरेश कोषाध्यक्ष एवं मुकेश व प्रमोद बने संयुक्त सचिव

जिला बार के चुनाव में विजयी रहे प्रत्याशी।7

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 मई 2019। नैनीताल जिला बार चुनाव के लिए अध्यक्ष पद पर रिकार्ड 19वीं बार हरिशंकर कंसल बन गये हैं। जबकि वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर प्रदीप परगाई, सचिव पद पर अरुण बिष्ट, कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर रविशंकर आर्या, संयुक्त सचिव पद पर मुकेश चंद्र व प्रमोद कुमार तिवारी तथा लेखाकार पद पर मेघा उप्रेती ने विजयश्री हासिल की है। वहीं कोषाध्यक्ष पद पर हरेंद्र सिंह निर्विरोध निर्वाचित हो गये हैं।
मुख्य चुनाव अधिकारी राजेश चंदोला ने बताया कि बृहस्पतिवार को हुए मतदान में कुल 298 में से 240 यानी 80.53 फीसद अधिवक्ता सदस्यों ने मतदान किया। इनमें से 4 मत अवैध घोषित हुए। शेष 236 मतों में से अध्यक्ष पर हरिशंकर कंसल को 130 व आंेकार सिंह को 105, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर प्रदीप परगाई को 106, स्वाति परिहार को 65 व अशोक मौलेखी को 61, सचिव पद के लिए अरुण बिष्ट को 123 व दीपक रुबाली को 109, कनिष्ठ उपाध्यक्ष के पद पर रविशंकर आर्या को 120, कमल चिलवाल को 68 व हितेश पाठक को 39, लेखाकार के पद के लिए मेघा उप्रेती को इस चुनाव में सर्वाधिक 149 व अब्दुल समीर को 76 तथा संयुक्त सचिव के दो पदों पर मुकेश चंद्र व प्रमोद कुमार तिवारी को 119-119 तथा सुनील कुमार को 76 मत मिले। चुनाव की प्रक्रिया में श्री चंदोला के साथ ही बीके सांगुड़ी, डा. रमेश जोशी, संजय सुयाल व नीरज साह आदि जुटे रहे।

पूर्व में इन पदों पर भी रहे हैं बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य पर निर्वाचित डीके शर्मा

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य पर निर्वाचित डीके शर्मा

नैनीताल। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य पर निर्वाचित डीके शर्मा उत्तराखंड उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता हैं, तथा उत्तराखंड उच्च न्यायालय की फुट कोर्ट से वरिष्ठ अधिवक्ता नामित हो चुके हैं, साथ ही वर्ष 2004 से 2009 तक बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, बोट हाउस क्लब के सचिव एवं ऊधमसिंह नगर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

इससे पूर्व उत्तराखंड बार काउंसिल के चुनावों के लिए रविवार को नाम वापसी के मौके का लाभ उठाते हुए वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन कराने वाले दो में से एक प्रत्याशी मुनफैत अली ने अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद दूसरे नामांकन कर्ता राजबीर बिष्ट का उपाध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया।
मुख्य चुनाव अधिकारी उत्तराखंड उच्च न्यायालय के पूर्व कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बीसी कांडपाल ने बताया कि इसके बाद अध्यक्ष पद के लिए सुरेंद्र पुंडीर एवं सुखपाल सिंह तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि के एक पद पर पांच प्रत्याशी-निवर्तमान सदस्य विजय भट्ट, डीके शर्मा, कुलदीप कुमार सिंह, मनमोहन लांबा व योगेंद्र सिंह तोमर के बीच मुकाबला तय हो गया है। अब सोमवार को उपरोक्त सहित डीके शर्मा, कुलदीप कुमार सिंह, चंद्रशेखर तिवारी, एएस भंडारी, केआर गुप्ता, हरी सिंह नेगी, एनएस कन्याल, डा. महेंद्र सिंह पाल, वाईएस तोमर, एमएम लांबा, आर सोलंकी, ए पंडित, आरएस बिष्ट, आरके चौहान, एमएस कन्याल, प्रभात कुमार चौधरी सहित कुल 20 सदस्य मतदान करेंगे। और मतदान के उपरांत मतगणना कर चुनाव परिणामों की घोषणा कर दी जाएगी।

इससे पूर्व शनिवार को हुई नामांकन की प्रक्रिया के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी उत्तराखंड उच्च न्यायालय के पूर्व कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बीसी कांडपाल ने बताया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के लिए प्रतिनिधि के एक पद के लिए पांच अधिवक्ताओं ने नामांकन किये तथा जांच में सभी नामांकन पत्र सही भी पाये गये। अध्यक्ष पद के लिए सुरेंद्र पुंडीर ने दो प्रस्तावकों अनिल पंडित व राकेश गुप्ता के साथ दो सेटों में तथा सुखपाल सिंह ने प्रस्तावक राजकुमार के साथ एक सेट में नामांकन कराया। इस प्रकार अध्यक्ष पद पर सुरेंद्र पुंडीर व सुखपाल सिंह प्रत्याशी हैं। इसी तरह उपाध्यक्ष पद पर राजबीर सिंह बिष्ट ने दो प्रस्तावकों रंजन सोलंकी व मेहरमान सिंह कोरंगा के साथ दो सेटों में तथा मुनफैत अली ने प्रस्तावक मनमोहन लांबा के साथ नामांकन कराया। इस प्रकार उपाध्यक्ष पद पर राजबीर सिंह बिष्ट व मुनफैत अली दो प्रत्याशी आमने-सामने होंगे।

वहीं बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि के पद पर सर्वाधिक कड़ा-पंचकोणीय मुकाबला होना तय है। इस पद पर निवर्तमान सदस्य विजय भट्ट, डीके शर्मा, कुलदीप कुमार सिंह, मनमोहन लांबा व योगेंद्र सिंह तोमर प्रत्याशी होंगे। विजय भट्ट के प्रस्तावक पूर्व अध्यक्ष हरी सिंह नेगी व अनुमोदक चंद्रशेखर तिवारी, डीके शर्मा के प्रस्तावक नंदन सिंह कन्याल व अनुमोदक प्रभात कुमार चौधरी, कुलदीप कुमार सिंह के प्रस्तावक राजकुमार व अनुमोदक पूर्व सांसद डा. महेंद्र सिंह पाल तथा योगेंद्र सिंह तोमर के प्रस्तावक राकेश गुप्ता व अनुमोदक अनिल पंडित हैं। आगे रविवार पांच मई को नाम वापसी के बाद छह मई को चुनाव होगा। चुनाव के बाद परिणामों की घोषणा की जाएगी। उल्लेखनीय है कि बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड के 2009 से औपचारिक चुनाव नहीं हो सके थे। इस बीच महाधिवक्ता काउंसिल के कार्यकारी अध्यक्ष का दायित्व निभा रहे थे। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष बार काउंसिल के सदस्यों के लिए चुनाव हुआ था जिसमें 90 प्रत्याशियों में से 20 सदस्य चुने गए थे, इन 20 सदस्यों में से ही इस चुनाव में प्रत्याशी खड़े उठे हैं और केवल ये ही मतदान कर सकेंगे।

पुराने सम्बंधित समाचार : बार काउंसिल चुनाव के परिणाम घोषित : रहेगा अनुभव व युवा जोश का समन्वय

-शुक्रवार सुबह तड़के साढ़े चार बजे तक चली मतगणना के बाद घोषित हुए परिणाम
-नयी 20 सदस्यीय कार्यकारिणी के लिए निर्वाचित 13 सदस्य ही प्राप्त कर पाए निर्धारित 337 मतों का कोटा

नीले- रंग के प्रत्याशी जीते, लाल रंग के मुकाबले से बाहर

नैनीताल। उत्तराखंड बार काउंसिल के 20 सदस्य पदों के लिए हुए चुनावों की मतगणना के परिणाम शुक्रवार सुबह तड़के साढ़े चार बजे तक चली मतगणना के बाद घोषित हो गये। दिन में मुख्य चुनाव अधिकारी पूर्व कार्यकारी न्यायाधीश बीडी कांडपाल ने चुनाव परिणामों की घोषणा की। घोषित परिणामों के अनुसार बार काउंसिल की 20 सदस्यीय नयी कार्यकारिणी में 5 पहली बार चुने गये तथा दो पूर्व में भी निर्वाचित सदस्यों को छोड़कर शेष 13 मौजूदा कार्यकारिणी के सदस्य ही हैं। वहीं करीब आधा दर्जन सदस्य उम्र में भी युवा हैं। इस प्रकार उम्मीद की जा रही है कि नई कार्यकारिणी युवा जोश एवं अनुभव के साथ आगे बढ़ेगी। वहीं कार्यकारिणी में देहरादून व हरिद्वार जिलों का बोलबाला साफ तौर पर नजर आ रहा है, जबकि कुमाऊं मंडल के छह जिलों से सात सदस्य ही चुने गये हैं, अलबत्ता पिछली बार के मुकाबले यह संख्या एक अधिक बताई गयी है। चुनाव परिणामों में यह भी उल्लेखनीय रहा कि कुल 90 प्रत्याशियों और निर्वाचित 20 सदस्यों में से 13 सदस्य ही निर्धारित 337 मतों का कोटा प्राप्त कर पाए, और सात सदस्य कोटा प्राप्त न कर पाने के बावजूद शीर्ष 20 में रहने के कारण निर्वाचित घोषित किये गये।
शुक्रवार को घोषित परिणामों के अनुसार सबसे पहले ऊधमसिंह नगर के डीके शर्मा, उनके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया के मैनेजिंग ट्रस्टी हल्द्वानी के विजय भट्ट, तीसरे नंबर पर देहरादून के सुरेंद्र पुंडीर, चौथे नंबर पर हरिद्वार के कुलदीप कुमार सिंह, पांचवे नंबर पर दून के चंद्रशेखर तिवारी, छठे नंबर पर पौड़ी गढ़वाल के एएस भंडारी, सातवें नंबर पर दून के आर गुप्ता, आठवें नंबर पर पूर्व बार अध्यक्ष काशीपुर के हरी सिंह नेगी, नौवें नंबर पर पिथौरागढ़ के युवा एनएस कन्याल, 10वें नंबर पर नैनीताल के डा. महेंद्र सिंह पाल, 11वें नंबर पर रुड़की के मुन्फैद अली खान, 12वें पर रुड़की के सुखपाल सिंह एवं 13वें स्थान पर रहे दून के वाईएस तोमर ने 337 मतों का कोटा प्राप्त कर स्पष्ट जीत दर्ज की। वहीं दून के एमएम लांबा 327, टिहरी गढ़वाल के आर सोलंकी 316, देहरादून के ए पंडित 311, दून के ही आरएस बिष्ट 306, हरिद्वार के आरके चौहान 306, हल्द्वानी के एमएस कन्याल 301 और अल्मोड़ा के प्रभात कुमार चौधरी 283 मत प्राप्त करने के बाद भी निर्वाचित घोषित किये गये। रात्रि में ही जैसे-जैसे चुनाव परिणाम आते गए, मुकाबले से बाहर हो रहे और जीत रहे प्रत्याशी लौटते रहे। मिठाइयों और एक-दूसरे को बधाई देने का सिलसिला भी देर तक चला।

जिला बार एसोसिएशन चुनाव: अध्यक्ष पद के लिए कंसल व गोस्वामी सहित कुल 16 ने किये नामांकन

नवीन समाचार, नैनीताल, 3 मई 2019। नैनीताल जिला बार चुनाव के लिए शुक्रवार को भी नामांकन प्रक्रिया जारी रही। दूसरे दिन अध्यक्ष पद के लिए हरिशंकर कंसल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए प्रदीप परगाई व स्वाति परिहार, लेखाकार पद के लिए मेघा उप्रेती तथा संयुक्त सचिव पद के लिए मुकेश चंद्र व प्रमोद कुमार तिवारी ने नामांकन पत्र भरकर जमा किये। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व पहले दिन बृहस्पतिवार को अध्यक्ष पद के लिए ओंकार गोस्वामी, सचिव पद के लिए अरुण बिष्ट व दीपक रुबाली, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए अशोक मौलेखी, कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद के लिए कमल चिलवाल, रविशंकर आर्या व रितेश पाठक, कोषाध्यक्ष पद के लिए हरेंद्र सिंह, संयुक्त सचिव पद के लिए सुनील कुमार तथा लेखाकार के पद के लिए अब्दुल समीर सहित कुल 10 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किये थे। मुख्य चुनाव अधिकारी राजेश चंदोला ने बताया कि इस प्रकार नामांकन पत्र लेने वाले सभी 16 उम्मीदवारों ने नामांकन करा दिये हैं। आगे 6 मई को नाम वापसी व नामांकन पत्रों की जांच, सात को प्रत्याशियों द्वारा मतदाताओं को संबोधन एवं नौ मई को मतदान होगा, जिसमें बार के 298 सदस्यों में से ‘एक बार-एक वोट’ के नियम के तहत किसी अन्य बार में इस वर्ष वोट नहीं देने वाले सदस्य मतदान कर सकेंगे। चुनाव की प्रक्रिया में श्री चंदोला के साथ ही बीके सांगुड़ी, डा. रमेश जोशी, संजय सुयाल व नीरज साह भी जुटे हुए हैं।  

यह भी पढ़ें : हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के नये अध्यक्ष ने कहा-इतना सशक्त बनेंगे कि ‘वे’ करेंगे समन्वय की पहल

-हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की नव निर्वाचित कार्यकारिणी ने ग्रहण किया कार्यभार
-सबके सहयोग से बार को मजबूत बनाने का लिया संकल्प

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन सभागार में कार्यभार ग्रहण करने के अवसर पर नवनिर्वाचित पदाधिकारी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 26 अप्रैल 2019। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के बृहस्पतिवार को हुए चुनाव एवं घोषित चुनाव परिणामों के बाद निर्वाचित पदाधिकारियों ने शुक्रवार को बार सभागार में हुए एक सादे कार्यक्रम में कार्यभार ग्रहण कर लिया। निवर्तमान बार अध्यक्ष ललित बेलवाल ने औपचारिक तौर पर नये अध्यक्ष पूरन सिंह बिष्ट को अपनी कुर्सी सोंपी। बार चुनाव के मुख्य चुनाव अधिकारी नंदन सिंह कन्याल ने संचालन करते हुए नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को उनके पदों पर आसीन कराया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में नवनिर्वाचित अध्यक्ष बिष्ट ने जूनियर अधिवक्ताओं को चैंबर दिलाने के अपने वादे को हर हाल में पूरा करने की बात दोहराई साथ ही संकल्प जताया कि बार को इतना मजबूत किया जाएगा कि बैंच स्वयं की ओर से बैंच से समन्वय स्थापित करने की पहल करे। कहा कि इस हेतु सभी का साथ व सहयोग तथा वरिष्ठों का मार्गदर्शन लिया जाएगा। वहीं नये महासचिव जयवर्धन कांडपाल ने अधिवक्ताओं के लिये संगोष्ठियां आदि आयोजित करने की भी बात कही। इस मौके पर कनिष्ठ उपाध्यक्ष भूपेंद्र कोरंगा, महिला उपाध्यक्ष श्रुति जोशी, संयुक्त सचिव मनोज भट्ट, वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य पद पर भुवनेश जोशी, राजेश कुमार जोशी, निरंजन कुमार भट्ट, भूपेंद्र भंडारी व आसिफ अली, कनिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य-महिला शीतल सेलवाल, संयुक्त सचिव प्रेस मुकेश सिंह रावत, कोषाध्यक्ष चेतन जोशी, पुस्तकालयाध्यक्ष हेम जोशी व कनिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य के चार पदों हेतु गिरीश जोशी, मनोज कुमार शर्मा, नवीन चंद्र तिवारी व शिवांगी गंगवार के साथ ही चुनाव प्रक्रिया से जुड़े राम सिंह सम्मल, त्रिलोचन पांडे, रवींद्र बिष्ट, राजेश नगरकोटी, विशाल महरा, पंकज कपिल, किशोर कुमार, एमके चंद, विरेंद्र कपरुवाण, एनके पपनोई, डा. दीप जोशी, दीप जोशी, आलोक मेहरा, डीके बनकोटी, हिरेंद्र रावल, मनोज टिटगई, सैयद कासिफ जाफरी व अमित कापरी आदि भी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव में बजा संघ का डंका, बिष्ट अध्यक्ष व कांडपाल बने महासचिव…

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 अप्रैल 2019। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के बृहस्पतिवार को शांतिपूर्ण तरीके से हुए चुनाव में अध्यक्ष पद पर पूरन सिंह बिष्ट, महासचिव पद पर जयवर्धन कांडपाल को 300 व पूर्व महासचिव कमलेश तिवारी को 253, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर विपुल पैन्यूली, कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर भूपेंद्र कोरंगा, महिला उपाध्यक्ष पद पर श्रुति जोशी, महासचिव पद पर जयवर्धन कांडपाल व संयुक्त सचिव पद पर मनोज भट्ट ने जीत दर्ज की। अध्यक्ष पद पर पूरन बिष्ट को सर्वाधिक 163, वरिष्ठ अधिवक्ता बीसी पांडे को 135, डीके त्यागी को 113, सुरेश भट्ट को 77 एवं सैयद नदीम मून को 74, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर विपुल पैन्यूली को 308 व प्रेम कौशल को 234, कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर भूपेंद्र कोरंगा को 351 व कौशल साह जगाती को 189, महिला उपाध्यक्ष पद पर श्रुति जोशी को 342 व ममता जोशी को 202 एवं संयुक्त सचिव प्रशासन के पद पर मनोज भट्ट को 286 मत मिले। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य पद पर भुवनेश जोशी, राजेश कुमार जोशी, निरंजन कुमार भट्ट, भूपेंद्र भंडारी व आसिफ अली, कनिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य-महिला पद हेतु एकमात्र प्रत्याशी शीतल सेलवाल, संयुक्त सचिव प्रेस पद हेतु मुकेश सिंह रावत, कोषाध्यक्ष पद हेतु चेतन जोशी, पुस्तकालयाध्यक्ष पद हेतु हेम जोशी के साथ ही कनिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य के चार पदों हेतु गिरीश जोशी, मनोज कुमार शर्मा, नवीन चंद्र तिवारी व शिवांगी गंगवार का निर्विरोध चुना जाना पहले ही तय हो गया था।
इससे पूर्व कुल 801 मतदाता अधिवक्ताओं में से 558 यानी 69.66 फीसद मतदान हुआ। चुनाव प्रक्रिया को संपन्न कराने में मुख्य चुनाव अधिकारी एनएस कन्याल के साथ ही रवींद्र बिष्ट, राजेश नगरकोटी, विशाल महरा, पंकज कपिल, किशोर कुमार, एमके चंद, विरेंद्र कपरुवाण, एनके पपनोई, डा. दीप जोशी, दीप जोशी, आलोक मेहरा, डीके बनकोटी, हिरेंद्र रावल, मनोज टिटगई, सैयद कासिफ जाफरी व अमित कापरी ने चुनाव अधिकारी एवं राम सिंह सम्मल, त्रिलोचन पांडे एवं एसआरएस ने पर्यवेक्षक के रूप में योगदान दिया।

धनबल को अधिवक्ताओं ने नकारा

बार एसोसिएशन के चुनाव धन-बल की हार व अधिवक्ताओं के दिलों के करीब रहने वाले प्रत्याशियों की जीत के रूप में देखे जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिन प्रत्याशियों ने इस चुनाव में काफी धन बहाया। यहां तक कि शहर के बड़े होटलों व रेस्टॉरेंटों में लाखों रुपए की पार्टियां दी गईं, उन्हें भी इस चुनाव में अधिवक्ताओं ने नकार दिया है।

चैम्बर निर्माण कराने का भरोसा

आगे विजयी रहे पदाधिकारियों ने चुनाव पूर्व किए वादों पर पूरी ताकत से कार्य करने का भरोसा जताया है नवनिर्वाचित अध्यक्ष पूरन बिष्ट ने कहा है की इस चुनाव में चेंबर निर्माण का जो मुद्दा रहा उसे हमेशा के लिए चेंबरों का निर्माण करके समाप्त कर देंगे

इस तरह चला अध्यक्ष पद पर कांटे का संघर्ष

नैनीताल। बृहस्पतिवार को मतगणना के उपरांत शुरू हुई मतगणना में सबसे प्रतिष्ठित अध्यक्ष पद पर पहले राउंड से ही पांच प्रत्याशियों में से मुकाबला संघ से जुड़े पूरन बिष्ट एवं वरिष्ठ अधिवक्ता बीसी पांडे के बीच सिमटता एवं कांटे के संघर्ष में तब्दील होता दिखा। पहले राउंड में यह दोनों प्रत्याशी 14-14 वोटों की बराबरी पर रहे, जबकि डीके त्यागी को 11, सुरेश भट्ट को 9 एवं एक बार अध्यक्ष रहने के बाद तीसरी बार चुनाव लड़ रहे सैयद नदीम मून 6 वोटों के साथ सबसे पीछे रहे। आगे दूसरे राउंड में भी ये ही दो प्रत्याशी 26-26 मतों के साथ बराबरी पर, जबकि तीसरे राउंड में बीसी पांडे 39 मतों के साथ सबसे आगे व पूरन बिष्ट 38 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर, चौथे राउंड में बिष्ट 53 मतों के साथ सबसे आगे व पांडे 47 मतों के साथ दूसरे स्थान पर आ गये। छठे राउंड में बिष्ट कड़े संघर्ष में 6 वोटों से पांडे से आगे रहे।

यह भी पढ़े : वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य सहित 7 पदों पर निर्विरोध नामांकन तय, अब केवल इन पदों के लिए होगा मतदान…

नवीन समाचार, नैनीताल, 22 अप्रैल, 2019। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के प्रतिष्ठित चुनावों के लिए वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य पद पर 5 प्रत्याशियों- भुवनेश जोशी, राजेश कुमार जोशी, निरंजन कुमार भट्ट, भूपेंद्र भंडारी व आसिफ अली का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है। सोमवार को नाम वापसी के मौके का लाभ उठाते हुए वरिष्ठ कार्यकारिणी पद के प्रत्याशी अतुल बहुगुणा व सौरभ पांडे ने नाम वापस ले लिये।

इस प्रकार अब केवल अध्यक्ष पद पर पांच प्रत्याशियों-दिनेश त्यागी, वरिष्ठ अधिवक्ता भुवन पांडे, सैयद नदीम, सुरेश भट्ट व पूरन बिष्ट तथा महासचिव पद पर जयवर्धन कांडपाल व कमलेश तिवारी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद हेतु विपुल पैन्यूली व प्रेम कौशल, कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद हेतु भूपेंद्र कोरंगा व कौशल साह जगाती, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महिला पद हेतु ममता जोशी व श्रुति जोशी तथा संयुक्त सचिव पद हेतु मनोज भट्ट व अकरम परवेज के बीच सीधा मुकाबला ही शेष रह गया है।

उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के लिए संयुक्त सचिव प्रेस पद हेतु एकमात्र नामांकन कर्ता मुकेश सिंह रावत कोषाध्यक्ष पद हेतु एकमात्र प्रत्याशी चेतन जोशी एवं पुस्तकालयाध्यक्ष पद हेतु हेम जोशी के साथ ही वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य-महिला पद हेतु मीना बिष्ट तथा कनिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य के चार पदों हेतु नामांकन करने वाले चार प्रत्याशी गिरीश जोशी, मनोज कुमार शर्मा, नवीन चंद्र तिवारी व शिवांगी गंगवार व कनिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य-महिला पद हेतु एकमात्र प्रत्याशी शीतल सेलवाल का निर्विरोध चुना जाना पहले ही तय हो गया है।

यह भी पढ़ें : इन्होने किये नामांकन

नवीन समाचार, नैनीताल, 16 अप्रैल, 2019। हाई कोर्ट बार एशोसिएशन के चुनाव के लिए मंगलवार को नामांकन प्रक्रिया के तहत नामांकन पत्रों के भरने, नामांकन पत्रों की वापसी एवं नामांकन पत्रों की जांच की प्रक्रिया हुई। इसके उपरांत अध्यक्ष पद हेतु नामांकन पत्र लेने वाले सीके शर्मा को छोड़कर शेष पांच अधिवक्ताओं भुवन चंद्र पांडे, दिनेश त्यागी, सुरेश चंद्र भट्ट, सैय्यद नदीम मून और पूरन सिंह बिष्ट ने तथा महासचिव पद हेतु कमलेश कुमार तिवारी व जयवर्धन कांडपाल ने नामांकन पत्र भरे। इसी तरह वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद हेतु विपुल पैन्यूली व प्रेम कौशल, कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद हेतु कौशल साह जगाती और भूपेंद्र सिंह कोरंगा, उपाध्यक्ष महिला हेतु श्रुति जोशी व ममता जोशी, संयुक्त सचिव प्रशासन पद हेतु मनोज चंद्र भट्ट व अकरम परवेज तथा वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य के पांच पदो के लिए हेतु सात प्रत्याशियों‘ निरंजन भट्ट, अतुल बहुगुणा, भूपेंद्र भंडारी, सौरभ पांडे, आसिफ अली, भुवनेश जोशी व राजेश जोशी प्रत्याशी के रूप में रह गये हैं।

सोशल मीडिया में प्रचार कर सकेंगे हाईकोर्ट बार चुनाव के प्रत्याशी

नैनीताल। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की इन दिनों चल रही चुनाव प्रक्रिया के दौरान विभिन्न पदों के प्रत्याशी अब सोशल मीडिया के फेसबुक, ह्वाट्सएप, ग्रुप एवं प्रिंट मीडिया जैसे विभिन्न प्लेटफार्म्स पर अपना चुनाव प्रचार कर सकेंगे। इस बाबत सोमवार को मुख्य चुनाव अधिकारी एनएस कन्याल की ओर से संशोधन आदेश जारी हो गये हैं। आदेश में कहा गया है कि प्रस्ताव संख्या दो के बिंदु सख्या 2 पर पुर्नविचार किया गया, एवं सर्वसम्मति से इसे संशोधित कर प्रत्याशियों को प्रचार की अनुमति दी जा रही है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व सोशल मीडिया व प्रिंट मीडिया आदि में चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी गयी थी।

यह भी पढ़ें : हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव 25 अप्रैल को

नवीन समाचार, नैनीताल, 10 अप्रैल 2019। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के वर्ष 2019-20 के चुनाव के लिए बृहस्पतिवार को चुनाव कार्यक्रम एवं 800 सदस्यों की अंतिम मतदाता सूची घोषित कर दी गयी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी एनएस कन्यालय द्वारा बुधवार को घोषित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 12 अप्रैल से 15 अप्रैल तक नामांकन पत्रों की बिक्री की जाएगी। 16 अप्रैल को सुबह 10 से शाम 4 बजे तक नामांकन दाखिल किये जाएंगे और इसी दिन शाम चार से पांच बजे तक नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। 22 अप्रैल को अपराह्न डेढ़ बजे तक नाम वापस लिये जा सकेंगे, एवं इसी दिन प्रत्याशियों की अंतिम सूची का प्रकाशन किया जाएगी। 23 अप्रैल को अध्यक्ष एवं सचिव पद के प्रत्याशियों की आम सभा दोपहर सवा बजे से होगी। 25 अप्रैल को मतदान होगा तथा इसी दिन शाम पांच बजे से मतगणना कर इसके उपरांत चुनाव परिणामों की घोषणा कर दी जाएगी।

नामांकन शुल्क 1500 से 30 हजार रुपये तक

नैनीताल। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव के लिए बुधवार को चुनाव समिति की बैठक के बाद नामांकन शुल्क की नई दरें भी घोषित कर दी गयी हैं। नामांकन शुल्क अध्यक्ष पद हेतु 30 हजार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष व सचिव पद हेतु 20 हजार, कनिष्ठ उपाध्यक्ष के एक सामान्य व एक महिला हेतु आरक्षित पद के लिए 12 हजार, उपसचिव प्रशासन, उपसचिव प्रेस, कोषाध्यक्ष व पुस्तकालयाध्यक्ष के पद के लिए पांच हजार, वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य सामान्य के पांच एवं एक महिला हेतु आरक्षित पद के लिए तीन हजार तथा कनिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य के चार व एक महिला हेतु आरक्षित पद के लिए 1500 रुपये होगा। वहीं नामांकन प्रपत्र का शुल्क 200 रुपये रखा गया है।

यह भी पढ़ें : हाईकोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं के बीच चले घूंसे, एक की तहरीर पर मुकदमा दर्ज, दूसरे ने एसएसपी को दिया शिकायती पत्र

नवीन समाचार, नैनीताल, 17 अप्रैल 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय परिसर में मंगलवार दोपहर दो अधिवक्ताओं में मारपीट हो गयी। बुधवार को यह मामला पुलिस तक पहुंच गया। वहीं एक अधिवक्ता हनुमान मंदिर मल्लीताल निवासी अधिवक्ता बृजभूषण शर्मा पुत्र एआर शर्मा की ओर से कोतवाली में दी गयी तहरीर में पुलिस ने चिड़ियाघर रोड तल्लीताल निवासी दूसरे अधिवक्ता पुनीत टंडन पुत्र ध्रुव टंडन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। वहीं अधिवक्ता पुनीत टंडन की ओर से भी अधिवक्ता ब्रजभूषण शर्मा के खिलाफ एसएसपी को शिकायती पत्र दिया गया है। बताया गया कि दोनों के बीच मंगलवार को एक केस के मामले में मारपीट हो गयी। अधिवक्ता शर्मा का कहना है कि कि पुनीत ने एक मामले का निपटारा समय से नहीं करने की बात कहकर कोर्ट परिसर स्थित उनके चेंबर में उनसे मारपीट की और जान से मारने की धमकी भी दी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर अधिवक्ता पुनीत टंडन के खिलाफ आईपीसी की धारा 223, 504 और 506 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले की जांच एसआई दीपक बिष्ट को सोंपी जांच कर गई है। वहीं अधिवक्ता पुनीत टंडन की ओर से भी एसएसपी को सोंपे गये शिकायती पत्र में शर्मा पर मारपीट करने का आरोप लगाया गया है।

यह भी पढ़ें : हाईकोर्ट के चैंबर वाले अधिवक्ताओं से हटेंगे लॉकर, इन्हें मिलेंगे…

नवीन समाचार, नैनीताल, 22 फरवरी 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं के लिए चैम्बर निर्माण से सम्बंधित याचिका पर न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से चैम्बर निर्माण में हो रही देरी के सम्बन्ध में दो सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने को कहा है। इस हेतु न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल, हाई कोर्ट बार एशोसिएशन के अध्यक्ष व सेक्शन ऑफिसर की एक कमेटी गठित कर 27 फरवरी को चैंबरों के सम्बन्ध में एक बैठक करने को भी कहा है। साथ ही न्यायालय ने यह भी कहा है कि जिन अधिवक्ताओ के पास ओएस चैम्बर व लॉकर दोनों है, उनसे लॉकर की चाबी वापस लेकर जूनियर अधिवक्ताओ को दी जाए।
मामले के अनुसार उच्च न्यायालय में नियमित वकालत कर रहे प्रदीप कुमार चौहान व डीके जोशी सहित 104 अधिवक्ताओं के द्वारा चैम्बर निर्माण हेतु याचिका दाखिल की गयी है जिसमे कहा गया है कि उच्च न्यायालय में अधिवक्ताओं के चैम्बर निर्माण हेतु सितंबर 2015 में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा 1 करोड़ रुपये की राशि देने की घोषणा की गई थी, जिसमे से 50 लाख रुपये की राशि कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग नैनीताल को 2016 में आवंटित भी हो गयी थी। लेकिन आज तक चैम्बर निर्माण में कोई भी कार्यवाही अमल में नही लायी गयी जिस कारण चैम्बर समय पर नही बनने से नियमित वकालत करने वाले अधिवक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

यह भी पढ़ें : विश्वास करेंगे ? 34 बर्षों से चल रही है एक हड़ताल, हाईकोर्ट हुआ सख्त, मांगा जवाब

देहरादून, हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर जिलों के अधिवक्ता 34 वर्षों से हर सप्ताह शनिवार को परंपरा की तरह रहते हैं कार्य से विरत, हाईकोर्ट से संबंधित जिला बार एसोसिएशनों से छह सप्ताह में मांगा जवाब

-2016 में दायर जनहित याचिका पर शुक्रवार को हुई सुनवाई

नैनीताल 16 नवंबर 2018। क्या कोई विश्वास करेगा कि कहीं 34 बर्षों से एक हड़ताल चल रही है। जी हां, उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर जिलों के अधिवक्ता 34 वर्षों से हर सप्ताह शनिवार को परंपरा की तरह कार्य से विरत रहते हैं। अब उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर अधिवक्ताओं के इस रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित जिला बार एसोसिएशनों से वर्ष 2018 में अधिवक्ताओं द्वारा की गयी हड़तालों पर छह सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई की तिथि 2 जनवरी की नियत की है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ में हुई। मामले के अनुसार देहरादून निवासी ईश्वर शांडिल्य ने वर्ष 2016 में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि देहरादून बार एसोसिएशन द्वारा विगत 34 सालों से हर शनिवार को हड़ताल की जा रही है जिससे न्यायिक कार्यों में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है, और वादकारियों को उचित समय पर न्याय नही मिल पा रहा है। वकीलो ने शनिवार को हड़ताल करते हुए इस दिन को अवकाश का दिन मान लिया है। याची ने राज्य के सभी जिला बार एसोसिएशनों, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, उत्तराखंड बार काउंसिल व बार काउंसिल ऑफ इंिडया को भी इस जनहित याचिका में पक्षकार बनाया है।

यह भी पढ़ें: जूनियर अधिवक्ताओं को मिल सकता है बड़ा तोहफा

-हाईकोर्ट बार के पूर्व महासचिव तिवारी की याचिका पर पांच वर्ष से कम प्रेक्टिस वाले नये अधिवक्ताओं को ‘स्टाइपंड’ देने के लिए हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकारों तथा बार काउंसिलों से जवाब मांगा

नैनीताल, 12 अक्तूबर 2018। उत्तराखण्ड हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति वीके बिष्ट व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने वकालत के पेशे में जूनियर अधिवक्ताओ को प्रतिमाह 5000 रुपए वजीफा (स्टाइपंड) देने से संबंधित जनहित याचिका में सुनवाई करते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया, केंद्र सरकार, उत्तराखंड बार काउंसिल और उत्तराखंड सरकार से छः सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है।
मामले के अनुसार हाई कोर्ट बार एशोसिएशन के पूर्व महासचिव कमलेश कुमार तिवारी ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि वकालत के पेशे में पांच वर्ष से कम वकालत किये नए अधिवक्ताओं को बार काउंसिल ऑफ इंडिया, केंद्र सरकार, उत्तराखंड बार काउंसिल और उत्तराखंड सरकार से प्रतिमाह वजीफा दिलाया जाये। याची का यह भी कहना है कि यह व्यवस्था केरल में केरला वेलफेयर एडवोकेट एक्ट 1980 के तहत लागू है। एडवोकेट एक्ट 1961 में भी अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए भी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओ का उल्लेख है, और उत्तर प्रदेश अधिवक्ता वेलफेयर फंड 1971 में भी अधिवक्ताओं के कल्याण के लिये कई व्यवस्थाएं की गयी हैं। मामले को सुनने के बाद खंडपीठ ने सभी विपक्षियो से छः सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है।

यह भी पढ़ें : दूसरों के ‘राइट’ के लिए ‘फाइट’ करने वाले आज अपने लिये करेंगे ‘फाइट4राइट’

नैनीताल, 5 अक्टूबर 2018। जी हां दूसरों को ‘राइट’ यानी न्याय दिलाने के लिए उच्च न्यायालय में लडने वाले अधिवक्ता आज स्वयं के लिये न्याय अर्जित करने के लिए लड़ने का एलान करने वाले हैं। इस संबंध में उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं ने बकायदा ‘फाइट4राइट’ नाम का एक अनौपचारिक तौर पर संगठन बना लिया है। दिन में मध्यांतर के बीच एक बजकर 20 मिनट पर ऐसे अधिवक्ताओं को आमंत्रित किया गया है, जिन्हें उच्च न्यायालय में चैंबर नहीं मिले हैं, और चैंबर की आवश्यकता है।
‘फाइट4राइट’ के संयोजक अधिवक्ता डीके जोशी ने कहा है कि सभी ’चैम्बर की मांग’ कर रहे अधिवक्ता साथियों का ’धैर्य’ अब जबाब देने लगा है। कहा कि वर्तमान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन उनकी इस महत्वपूर्ण मांग पर ‘जिस तरह का उदासीन रवैया अपनाए हुए है वह बहुत ही अफसोसजनक ही नही दुर्भाग्यपूर्ण भी है’। इस लिए अधिवक्ता आज ‘लंच ऑवर’ में एक बैठक कर ’कोर्ट ऑवर’ के उपरांत कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करेंगे।’
अधिवक्ताओं का आरोप है कि उच्च न्यायालय में अधिवक्ताओं के कुल 64 चैंबर हैं। इनमें से करीब 2 दर्जन चैंबर ऐसे अधिवक्ताओं को आवंटित हैं जो उच्च न्यायालय में प्रेक्टिस नहीं करते हैं। वहीं पिछली सरकार के मुख्यमंत्री हरीश रावत अधिवक्ताओं के लिए चैंबर निर्माण का शिलान्यास कर गये थे, किंतु धनराशि आवंटित नहीं की गयी। मौजूदा मुख्यमंत्री भी धन देने में लाचारी जता रहे हैं।

यह भी पढ़ें : जिला बार के पूर्व बार उपाध्यक्ष ने दी आत्मदाह की धमकी

-हल्द्वानी जिला बार के सचिव ने जिला मुख्यालय नैनीताल को हल्द्वानी न्यायालय में स्थापित करने के लिए 9 अक्टूबर को बुलाई है हल्द्वानी बार की आम सभा
-विरोध में प्रदीप परगाई ने विरोध में दी है धमकी, हल्द्वानी की अदालतों को नैनीताल में स्थापित करने की उठाई है मांग
नैनीताल, 3 सितंबर 2018। हल्द्वानी बार एसोसिएशन के द्वारा अधिवक्ताओं के ह्वाट्सएप ग्रुप में जिला मुख्यालय नैनीताल को हल्द्वानी न्यायालय में स्थापित करने के लिए 9 अक्टूबर को हल्द्वानी बार की आम सभा बुलाने की बात कही गयी है। इस संदेश के मुख्यालय पहुंचने पर जिला बार के अधिवक्ता खासे आक्रोशित हो गये। वहीं जिला बार एसोसिएशन के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप परगाई ने ऐसी किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध करने और आगामी 9 अक्टूबर को ऐसी कोई बैठक या कोशिश होने पर आत्मदाह करने की घोषणा कर दी है। उनकी आत्मदाह करने की घोषणा का बकायदा वीडियो भी वायरल हो गया है।
वायरल वीडियो : 

परगाई ने अपनी घोषणा की पुष्टि करते हुए जोड़ा कि वह हल्द्वानी स्थित न्यायालयों को नैनीताल मुख्यालय में स्थानांतरित करने की भी मांग कर रहे हैं। इसके पीछे उनका तर्क है कि नैनीताल जिला व मंडल मुख्यालय है, साथ ही यहां राज्य का उच्च न्यायालय भी स्थित है। ऐसे में यहां न्यायालय स्थापित होने से वादकारियों एवं अधिवक्ताओं का सुविधा होगी व लाभ मिलेगा।

यह भी पढ़ें : हेलमेट न पहनने पर डराने को रह गया कानून ! जेल से अपराधी वकीलों को दे रहे जान से मारने की धमकी

-अब जिला बार के पूर्व पदाधिकारी को जेल में उम्र कैद की सजा भोग रहे अपराधी ने दी जान से मारने की धमकी, पहले हाईकोर्ट के अधिवक्ता को भी दे चुका है ऐसी ही धमकी

नैनीताल, 29 सितंबर 2018। लगता है कानून जेल में बंद सजा पाये अपराधियों में भी खौफ पैदा नहीं कर पा रहा है, जबकि बाहर आम लोग कानून से हेलमेट न पहनने पर चालान हो जाने जैसे भय से व्याप्त रहते हैं। लखनऊ में तो कार न रोकने पर पुलिस कर्मियों ने एपल कंपनी के मैनेजर का ‘फर्जी  इनकाउंटर’ ही कर दिया। वहीं इधर नैनीताल में जिला बार एसोसिएशन के पूर्व कोषाध्यक्ष युवा अधिवक्ता अनिल हर्नवाल को सितारगंज कारगारा में बंद एक सिद्ध दोष अभियुक्त के द्वारा जान से मारने की धमकी देने का मामला प्रकाश में आया है। अधिवक्ता के द्वारा इस मामले में तल्लीताल थाने में तहरीर दी गयी है। तल्लीताल थाना प्रभारी राहुल राठी ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है।

यह भी पढ़ें: दोपहिया वाहनों में दूसरी सवारी के लिए भी हेलमेट अनिवार्य: इन सवालों के जवाब भी जरूरी

प्राप्त जानकारी के अनुसार अधिवक्ता अनिल हर्नवाल को ऊधमसिंह नगर जिले के थाना बाजपुर के अंतर्गत बन्नाखेड़ा निवासी दिलबाग सिंह की ओर से 20 सितंबर 2018 को लिखा चार पंक्ति का पत्र रजिस्टर्ड डाक से प्राप्त हुआ है। पत्र में कहा गया है कि अधिवक्ता हर्नवाल ने फीस लेने के बावजूद उसका केस लड़ने से मना कर दिया था। अब वह जेल से छूटने वाला है। और अब अधिवक्ता को नहीं छोड़ेगा। अधिवक्ता सोच ले कि वह (कैदी) उसका क्या हाल करेगा। अगर पुलिस को बताया तो और भी बुरी तरह से मारेगा। बेहतर हो कि अपनी फीस वापस कर दे।
अधिवक्ता हर्नवाल का कहना हैै कि कैदी दिलबाग सिंह पर हत्या के एक मामले में दोष सिद्ध हो चुका है, और वह आपराधिक प्रवृत्ति का है। लिहाजा कुछ भी कर सकता है। इसलिए पुलिस मामले की जांच कर अधिवक्ता की जान-माल की सुरक्षा एवं प्राथमिकी दर्ज करे। इधर यह भी बताया जा रहा है कि यही अभियुक्त पूर्व में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के एक वरिष्ठ अधिवक्ता को भी इसी तरह जान से मारने की धमकी दे चुका है। इसके अलावा यह भी माना जा रहा है कि उम्र कैद की सजा भोग रहे इस तरह के अपराधी इस तरह खासकर अधिवक्ताओं को धमकी देकर इन मामलों की सुनवायी का उपयोग अदालतों के बहाने जेल से बाहर निकलने के मौके के रूप में करते हैं। तल्लीताल थाना प्रभारी राहुल राठी ने कहा कि जेल में बंद कैदी कैसे पत्र लिख सकता है, सहित सभी बिंदुओं से मामले की जांच की जायेगी।

यह भी पढ़ें: बार कौंसिल उत्तराखंड के सचिव और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष में ठनी !

-उत्तराखंड बार कौंसिल सचिव ने लगाया हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष पर अभद्रता-मारपीट का आरोप
नैनीताल, 20 सितंबर 2018। बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड के सचिव विजय सिंह ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ललित बेलवाल पर अभद्रता और थप्पड़ मारने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि 18 सितंबर की शाम उनके साथ मारपीट की गयी, जिसकी तहरीर उन्होंने 19 सितंबर को मल्लीताल कोतवाली में तहरीर दी थी। इस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी है। इस घटना से बार काउंसिल के कर्मचारी मानसिक आघात की स्थिति में हैं तथा स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, तथा विरोध स्वरूप बाह्य कार्यों से विरत हैं। केवल लंबित कार्य ही कर रहे हैं। इस कारण प्रदेश भर में काउंसिल से संबंधित कार्यों हेतु आने वाले व नये विधि स्नातक आवेदनकर्ताओं के पंजीकरण से संबंधित कार्य नहीं हो पा रहे हैं। साथ ही शीघ्र होने जा रही ऑल इंडिया बार की परीक्षा के लिए राज्य के विधि स्नातक उत्तीर्ण अधिवक्ता पंजीकरण आवेदन भी जमा नहीं कर पा रहे हैं। सिंह ने संभावना जतायी है कि इस घटना के प्रमुख साक्ष्य-सीसीटीवी फुटेज को मिटाया जा सकता है। मल्लीताल कोतवाल विपिन चंद्र पंत ने तहरीर मिलने की बात स्वीकारते हुए जानकारी दी कि उपनिरीक्षक पूरन सिंह मर्तोलिया मामले की जांच कर रहे हैं।

बार काउंसिल में गैर पंजीकृत एक अधिवक्ता से जुड़े हैं घटना के तार
नैनीताल। बीती 14 सितंबर को बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड के सचिव विजय सिंह ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष से पत्र भेजकर मुनीर खान नाम के कथित अधिवक्ता के बारे में जानकारी मांगी थी। पत्र में कहा गया है कि मुनीर स्वयं को अधिवक्ता दर्शा कर हाईकोर्ट में विधि व्यवसाय कर रहा है, और हाईकोर्ट बार की सदस्यता ग्रहण करते हुए उसके द्वारा अधिवक्ता प्रमाण पत्र हाईकोर्ट बार में जमा नहीं किये हैं। यदि वह किसी अन्य बार कौंसिल से पंजीकृत है, तब भी उसे उत्तराखंड में विधि व्यवसाय करने के लिए 6 माह के भीतर अपना पंजीकरण उत्तराखंड में हस्तांतरित करना आवश्यक है। अन्यथा ऐसे अधिवक्ताओं के खिलाफ अधिवक्ता अधिनियम की धारा 35 के तहत वाद योजित किया जा सकता है। यह भी संज्ञान में आया है कि हाईकोर्ट बार के द्वारा उसके आईकार्ड एवं कार पास जारी किया गया है। लिहाजा उसके शैक्षिक दस्तावेज एवं अन्य कार कौंसिलों से पंजीकृत अधिवक्ताओं की सदस्यता तत्काल निलंबित कर उनके नाम व पंजीकरण संख्या एक सप्ताह में उनके कार्यालय को उपलब्ध कराने को कहा गया था।

हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष ने झूठी बतायी मारपीट की कहानी
नैनीताल। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ललिल बेलवाल ने मारपीट की घटना को झूठा करार दिया है। उन्होंने कहा कि बार कौंसिल के सचिव के खिलाफ सूचना के अधिकार के तहत 10 जानकारियां मांगी गयी हैं। साथ ही बार काउंसिल के सचिव के खिलाफ यह झूठा मामला दर्ज किये जाने को लेकर कार्रवाई करने पर विचार किया जा रहा है। वहीं विवादित अधिवक्ता मुनीर खान के बारे में उन्होंने कहा कि किसी अधिवक्ता के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार हाईकोर्ट बार को नहीं वरन बार काउंसिल को है। काउंसिल के सचिव ने जो जानकारियां मांगी थीं, उनका जवाब दे दिया गया है। पत्र में कहा गया है कि मुनीर आलम नाम का कोई अधिवक्ता हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से संबद्ध नहीं है। पत्र में सचिव द्वारा मांगी गयी जानकारियों पर सवाल उठाये गये हैं कि वह बिना जानकारी के कैसे बार पर आरोप लगा सकते हैं।

यह भी पढ़ें: जस्टिस गोगोई के ‘न्यायपालिका में क्रांति’ संबंधित बयान पर पूर्व सांसद ने कहा संसद करे ‘क्रांति’

-देश के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा था न्यायपालिका में क्रांति की जरूरत (यहाँ क्लिक करके पढ़ें जस्टिस गोगोई ने क्या कहा था )

बृहस्पतिवार को पत्रकार वार्ता करते पूर्व सांसद डा. पाल।

नैनीताल, 19 जुलाई 2018। जनता दल एवं कांग्रेस पार्टी से दो बार सांसद तथा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन एवं बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष रहे डा. महेंद्र सिंह पाल ने सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के बाद देश के दूसरे नंबर के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई के ताजा बयान पर बड़ी टिप्पणी की है। डा. पाल ने कहा कि जब देश के भावी मुख्य न्यायाधीश न्यायपालिका में ‘क्रांति’ की जरूरत बता रहे हैं तो देश के अधिवक्ता भी इस बारे में बोलने की हिम्मत कर रहे हैं। कहा कि न्यायपालिका में क्रांति की जरूरत पर बात और बढ़े, इससे बेहतर है कि केंद्र सरकार और संसद न्यायपालिका की व्यवस्थाओं में आमूलचूल बदलाव की पहल करे। इस हेतु संसद व केंद्र सरकार को पूर्व में सर्वोच्च न्यायालय की सात सदस्यीय पीठ से खारिज कर दिये गये ‘लॉ कमीशन अधिनियम’ को पुनः संशोधनों के साथ नौ सदस्यीय या संविधान पीठ में लेकर जाये।
उल्लेखनीय है कि जस्टिस गोगोई ने गत दिवस रामनाथ गोयनका व्याख्यान में न्यायपालिका में क्रांति की जरूरत बताई है। वहीं इधर पूर्व सेवानिवृत्त न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को ‘एडहॉक जज’ बनाये जाने की बात कही है। इन दो बयानों पर ही डा. पाल बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में बोले। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के कार्यकाल के दौरान स्वयं के सांसद रहने के अनुभवों को बताया कि 1994-95 तक हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति सरकार ही करती थी। प्रधानमंत्री सिंह ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि सरकार नहीं न्यायाधीशों को ही न्यायाधीशों की नियुक्ति का अधिकार होना चाहिए। बाद में इस हेतु कोलेजियम सिस्टम आया। इधर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के दौर तक कोलेजियम सिस्टम से भी जजों की नियुक्ति में दिक्कतें आने लगी। इस पर मौजूदा केंद्र सरकार ‘लॉ कमीशन एक्ट’ लायी। इसे सर्वाेच्च न्यायालय की सात सदस्यीय पीठ ने खारिज कर दिया, और जजों की नियुक्ति कोलेजियम सिस्टम से ही करने को कहा, अलबत्ता इस हेतु सरकार से ‘प्रक्रिया’ तय करने को कहा। लेकिन तब से जजों की नियुक्ति प्रक्रिया पर न्यायपालिका व सरकार के बीच ‘रस्सी खींच’ प्रतियोगिता जैसी स्थिति बनी हुई है, और इधर इंदु मल्होत्रा के अलावा जजों की नियुक्ति नहीं हुई हैं। बताया कि नियुक्तियां न होने से जज बनने की बाट जोह रहे अधिवक्ताओं में भी आक्रेाश है। देश के सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट में बड़ी संख्या में जजों के पद खाली हैं, तथा 15-20 वर्ष पुराने वाद भी लंबित हैं। इसी कारण गत दिनों सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने और अब इन चार जजों में शामिल जस्टिस रंजन गोगोई ने फिर से अपना आक्रोश सार्वजनिक किया है। अधिवक्ता जस्टिस ठाकुर के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की पुर्ननियुक्ति के सुझाव के भी खिलाफ हैं। उन्होंने उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को कोलेजियम की संस्तुति के बाद भी सुप्रीम कोर्ट का जज न बनाने पर भी नाराजगी जताई। इस मौके पर हाईकोर्ट बार के पूर्व अध्यक्ष सैयद नदीम मून, एमसी पंत, भुवनेश जोशी, जेसी कर्नाटक, डीके त्यागी व कमलेश तिवाड़ी सहित अनेक अधिवक्ता मौजूद रहे। वहीं हाईकोर्ट बार के कुछ पदाधिकारी भी इस दौरान मौजू रहे, पर उन्होंने बार को इससे अलग बताया।

यह भी पढ़ें : इस चुनाव में ईवीएम नहीं मतपत्रों से हुए मतदान पर उठे सवाल

इन दिनों ईवीएम से हुए चुनावों पर सवाल उठाने का देश भर में चलन नज़र आ रहा है, परन्तु उत्तराखंड बार काउंसिल के आज 28 मार्च को 20 सदस्य पदों के लिए मतपत्रों से हुए चुनावों पर भी एक नहीं अनेकों आरोप लगने से मतपत्रों के जरिये होने वाली चुनाव प्रक्रिया पर पूर्व में उठने वाले सवाल एक बार फिर हरे हो गए लगते हैं। ‘एडवोकेट फोरम फॉर जस्टिस’ की ओर से फोरम के संयोजक व हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एमसी पंत व सैय्यद नदीम मून, पूर्व सचिव डीएस मेहता, योगेश पचौलिया तथा नलिन सोन सहित 50 से अधिक अधिवक्ताओं ने चुनाव प्रक्रिया पर प्रश्न चिह्न लगाते हुए बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड के पीठासीन अधिकारी, मुख्य चुनाव अधिकारी, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सचिव व केंद्रीय बार काउंसिल ऑफ ट्रिब्यूनल को शिकायत पत्र भेजकर चुनाव के समय मतदाताओ के लिए काउंटर टेबल न होने, मतपत्र पर पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर न होने, मतपत्र डालने के लिए बैलेट बॉक्स के न होने व इसकी जगह प्लास्टिक की बोरी में मतपत्र डालनो एवं वोटिंग के दिन अतिरिक्त मतदाता सूची निकालकर कई अधिववताओ के नाम इस लिस्ट में जोड़कर प्रभावशाली उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए। साथ ही पीठासीन अधिकारी व निर्वाचन अधिकारी द्वारा शिकायती पत्र को लेने से मना करने को लेकर उन पर नकरात्मक रवैय्या अपनाने के आरोप भी लगाए। इसके अतिरिक्त अपनी पूर्व में उठाई गई चुनाव प्रक्रिया में सीसी टीवी कैमरे न लगाने को लेकर भी सवाल उठाए, और इस सब कुछ को सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन बताया, और पूरी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्ष जाँच कराने की मांग की।
अलबत्ता, दूसरी ओर उत्तराखंड बार काउंसिल के 20 सदस्य पदों के लिए चुनाव में उठे 90 प्रत्याशियों में से चुनाव के लिए बुधवार को प्रदेश भर में मतदान व चुनाव प्रक्रिया को बार काउंसिल की ओर से पूरी तरह शांतिपूर्वक संपन्न होना बताया गया। अलबत्ता, एक प्रत्याशी शिव चरण सिंह रावत के नाम में कुछ गलती की बात काउंसिल ने स्वीकारी। काउंसिल की ओर से बताया गया कि प्रत्याशी के नाम में शिवचरण साथ आ गया है। इस पर प्रत्याशी की ओर से मतदान पत्र प्रकाशित होने के लिए जाने के बाद आपत्ति आई थी, जिस कारण सुधार नहीं किया जा सका। इसके अलावा मतदान पत्रों को रखने के लिए बक्शों की व्यवस्था न होने और मतपत्रों को कपड़े की थैलियों के एकत्र किये जाने के प्रश्न पर बार काउंसिल की ओर से बताया गया कि यूपी के दौर से ही यही व्यवस्था है। बताया गया कि 15 सितंबर 2017 तक अपने प्रपत्रों को सत्यापन के लिए बार काउंसिल को उपलब्ध कराने वाले अधिवक्ताओं को ही मताधिकार तथा चुनाव में खड़े होने की अनुमति दी गयी।
इधर प्राप्त जानकारी के अनुसार उच्च न्यायालय परिसर में नैनीताल मुख्यालय के 804 पंजीकृत अधिवक्ताओं में से 652 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इसी तरह पिथौरागढ़ में 94 फीसद मतदान होने की जानकारी दी गयी है। वहीं देहरादून में 2645 मतदाताओं में से 2278 ने मतदान किया। हल्द्वानी में शाम चार बजे तक 350 अधिवक्तााओं द्वारा मतदान करने और इसके बाद भी लंबी लाइन लगी होने की जानकारी दी गयी है। उच्च न्यायालय में चुनाव प्रक्रिया में अनुराग श्रीवास्तव, सुरेंद्र कुमार शर्मा, महेश उपाध्याय, श्रीकांत, विनोद जोशी, ललित मोहन जोशी, हिमानी जोशी व जितेंद्र कुमार आदि लोग जुटे रहे।

यह भी पढ़ें : बार काउंसिल ने चुनाव प्रक्रिया में आरोपों को बताया पूरी तरह निराधार

-सात अप्रैल से शुरू होने वाली मतगणना प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की नजर व पूरी सशस्त्र सुरक्षा व्यवस्था के बीच बाहर से आने वाले गणनाकारों के द्वारा की जाएगी
-मतगणना की बेहद जटिल प्रक्रिया में 15-20 दिन भी लग सकते हैं
नैनीताल। उत्तराखंड बार काउंसिल के 20 सदस्य पदों के लिए बुधवार को हुए चुनाव हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एमसी पंत की अगुवाई वाले ‘एडवोकेट फोरम फॉर जस्टिस’ की ओर से लगाए गए आरोपों को बार काउंसिल ने पूरी तरह से निराधार करार दिया है। उत्तराखंड बार काउंसिल चुनाव के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया से मुख्य चुनाव अधिकारी नियुक्त उत्तराखंड उच्च न्यायालय के पूर्व कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश भी रहे न्यायमूर्ति बीसी कांडपाल ने कहा कि यूपी के दौर से हो रहे इन चुनावों में कभी भी मतपत्रों के लिए बॉक्सों और सीसीटीवी आदि का प्रयोग नहीं किया गया है। चुनाव में हमेशा की तरह ही मतदाताओ को मतपत्रों के साथ लिफाफे दिये गए, जिसमें मतपत्रों को डालकर चिपकाकर मारकीन के बने थैलों में डालना था। वहीं चुनाव के दौरान नयी अतिरिक्त मतदाता सूची जारी करने के सवालों को भी उन्होंने पूरी तरह निराधार बताया। कहा कि 15 सितंबर 2017 तक अपने प्रपत्रों को सत्यापन के लिए बार काउंसिल को उपलब्ध व 24 जनवरी 2018 तक एआईबी से घोषित होने वाले अधिवक्ताओं को ही मताधिकार तथा चुनाव में खड़े होने की अनुमति दी गयी। बताया कि 32 में से 17 मतदान केंद्रों से मतपत्र मुख्यालय पहुंच गए हैं। इन्हें सशस्त्र सुरक्षा के साथ स्ट्रांग रूम में सीसीटीवी की नजर पर रखा गया है। आगे 7 अप्रैल से शुरू होने वाली मतगणना बाहर से आने वाले गणनाकारों के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों पर सीसीटीवी की निगरानी में पूरी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कराई जाएगी। मतगणना केंद्र में केवल प्रत्याशी व उनके एजेंटों को ही गेट पास के साथ आने की अनुमति होगी। बताया कि मतगणना की प्रक्रिया बेहद जटिल होती है, इसमें एक मत पत्र को 20 बार भी देखना पड़ता है, इसलिए इसमें 15-20 दिन भी लग सकते हैं। इस मौके पर बार काउंसिल के सदस्य बीसी पांडे व हिमानी जोशी भी मौजूद रहे।

बार काउंसिल चुनाव में दिया गया त्रिपुरा वाला ‘चलो पल्टाई’ का नारा

-उच्च न्यायालय से लेकर सर्वाेच्च न्यायालय तक संसद की तरह सीसीटीवी की निगरानी में सुनवाई, और सुनवाई की लाइव रिकार्डिंग किये जाने की मांग भी उठाई
नैनीताल। उत्तराखंड बार काउंसिल के बुधवार को होने वाले चुनावों में राजनीति हावी होती नजर आ रही है। चुनाव में त्रिपुरा के विस चुनावों की तर्ज पर प्रत्याशी अधिवक्ताओं के एक वर्ग के द्वारा ‘चलो पल्टाई’ का नारा दिया गया है। मंगलवार को चुनाव में सदस्य पद के प्रत्याशी हाईकोर्ट बार के पूर्व अध्यक्ष एमसी पंत ने पत्रकार वार्ता आयोजित कर कहा कि अधिवक्ताओं पर नियंत्रणकारी संस्था बार काउंसिल का नेतृत्व अधिवक्ताओं की गरिमा व सम्मान की रक्षा कर सकने योग्य वास्तविक अधिवक्ताओं के हाथों में होना चाहिए। कहा कि पिछले वर्ष 4 वर्ष से चुनावों में हो रहे विलंब को देखते हुए ‘चलो पल्टाई’ के आह्वान से इसका जवाब दें। बताया कि ‘जस्टिस फॉर एडवोकेट्स एंड डेमोक्रेसी’ नाम से एक संगठन बनाया गया है, इसकी पहली बैठक आगामी 25 अप्रैल को नैनीताल में होगी। उन्होंने उच्च न्यायालय से लेकर सर्वाेच्च न्यायालय तक संसद की तरह सीसीटीवी की निगरानी में सुनवाई, और सुनवाई की लाइव रिकार्डिंग किये जाने की मांग भी उठाई। साथ ही ज्यूरी सिस्टव को भी समय की मांग बताया। उन्होंने अधिवक्ताओं का सत्यापन न होने के कारण चुनाव में देरी करने और चुनाव में संस्थागत आरक्षण न होने की ओर भी इशारा किया। पत्रकार वार्ता में हाईकोर्ट बार के पूर्व अध्यक्ष सैयद नदीम मून, भूपेंद्र बिष्ट सहित कई अन्य सदस्य मौजूद रहे।

हाईकोर्ट बार चुनाव-2018 : ललित बेलवाल बने अध्यक्ष, नरेंद्र बाली महासचिव

राष्ट्रीय सहारा, देहरादून संस्करण, 16 मार्च 2018

-अध्यक्ष-सचिव दोनों पदों पर पहली बार लड़े प्रत्याशी जीते, निवर्तमान अध्यक्ष व सचिव को झेलनी पड़ी हार
नैनीताल। हाईकोर्ट बार एशोसिएशन के बृहस्पतिवार को हुए चुनावों में पहली बार चुनाव लड़े अध्यक्ष व सचिव पद के प्रत्याशी ललित बेलवाल व नरेंद्र बाली चुनाव जीत गये, जबकि निवर्तमान अध्यक्ष सैयद नदीम मून व सचिव संदीप तिवाड़ी को हार झेलनी पड़ी। चुनाव में कुल 553 मतदाताओं में से 495 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इनमें से अध्यक्ष निर्वाचित हुए ललित बेलवाल को सर्वाधिक 191 जबकि पूर्व अध्यक्ष एमसी पंत को 164 एवं निवर्तमान अध्यक्ष सैयद नदीम मून को 135 मत ही मिले। वहीं सचिव पद पर निर्वाचित हुए नरेंद्र बाली को 265 व निवर्तमान सचिव संदीप तिवाड़ी को 215 वोट मिले। अलबत्ता, दोनों महत्वपूर्ण पदों के लिए आखिर तक कांटे का संघर्ष देखा गया, तथा हार-जीत का अंतर भी कम ही रहा।

हाईकोर्ट बार में विजयी रहे प्रत्याशी।

उल्लेखनीय है कि चुनाव में विभिन्न पदों के लिए कुल 27 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। वहीं वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर चंद्रशेखर जोशी, महिला उपाध्यक्ष पद पर गौरा देवी देव, उप सचिव प्रशाशन पद पर वीरेंद्र रावत तथा कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर दर्शन सिंह बिष्ट ने जीत दर्ज की। जबकि उपसचिव प्रेस पद के लिए राजेंद्र सिंह नेगी, कोषाध्यक्ष पद के लिए रमेश चन्द्र जोशी व पुस्तकालय सचिव पद के लिए भुवनेश जोशी, वरिष्ठ कार्यकारिणी महिला हेतु गीता परिहार तथा कनिष्ठ कार्यकारिणी के पांच पदों हेतु एमएस भंडारी, अनिल अन्थ्वाल, शक्ति सिंह, राकेश नेगी व सीतल सेलवाल का निर्विरोध निर्वाचन पहले ही तय था। वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर चंद्रशेखर जोशी को 245 व विपुल पैन्यूली को 236, कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर दर्शन सिंह बिष्ट को 253 व सैयद कासिफ जाफरी को 199, महिला कनिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर गौरा देवी देव को 308 व अंजलि नौलियाल को 179 तथा उप सचिव प्रशासन पद पर वीरेंद्र रावत को 339 व किशन कुमार वर्मा को 147 मत मिले। चुनाव की प्रक्रिया में चुनाव अधिकारी एमएस त्यागी, अंजलि भार्गव, आलोक मेहरा, रवींद्र बिष्ट, वीपी बहुगुणा, राज कुमार वर्मा, विशाल मेहरा, नवीन तिवारी, पीएस बिष्ट, पंकज कपिल, जगदीश बिष्ट, लता नेगी व जयवर्धन कांडपाल आदि अधिवक्ताओं ने सहयोग किया।

यह भी पढ़ें : अधिवक्ता के बाद अब वरिष्ठ अधिवक्ता बनना भी हुआ मुश्किल

वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा हासिल करने को सुप्रीम कोर्ट के नए निर्देशों पर हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं की बंटी राय
-कुछ ने बताया पारदर्शिता बढ़ाने वाला तो कुछ ने प्रक्रिया को कठिन करने वाला

राष्ट्रीय सहारा, देहरादून संस्करण 14 अक्टूबर 2017

नवीन जोशी, नैनीताल। देश में अधिवक्ता बनने की प्रक्रिया तो पहले ही कड़ी कर दी गयी थी, जिसके तहत अधिवक्ताओं के लिये लगातार प्रेक्टिस करना अनिवार्य कर दिया गया था। वहीं सर्वोच्च न्यायालय के एक जनहित याचिका पर दिए गए नये निर्देशों के बाद अब अधिवक्ताओं के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता बनना, खासकर किसी तरह की पहुंच या जुगाड़ से बनना आसान नहीं रह जाएगा। वरिष्ठ अधिवक्ता पद का चयन सर्वोच्च न्यायालय अथवा संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक समिति करेगी, जिसमें दो अन्य न्यायाधीशों के साथ महाधिवक्ता एवं उच्च न्यायाधीश द्वारा उच्च न्यायालय बार से नामित एक सदस्य अधिवक्ता शामिल होंगे। देश  की सर्वोच्च न्यायालय के सर्वोच्च एवं उच्च न्यायालयो में अधिवक्ताओं को वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा देने की व्यवस्था के बाबत 12 अक्टूबर 2017 को दिये गए निर्देशों पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं की राय बंटी हुई नजर आ रही है। इस संबंध में शुक्रवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं की राय जानने का प्रयास किया गया तो यहां युवाओं सहित अधिकांश अधिवक्ताओं ने इसे अच्छा एवं वरिष्ठ अधिवक्ता पद हेतु चयन में पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम बताया, साथ ही चयन में बार को पहली बार चयन में भागेदारी मिलने का स्वागत किया, वहीं कुछ का मानना है कि इससे चयन की प्रक्रिया जटिल हो जाएगी।

हाईकोर्ट के अधिवक्ता सैयद खुर्शीद, विनोद तिवाड़ी, केएस बोहरा, पीएस सौन, त्रिभुवन फर्त्याल व भुवनेश जोशी।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सैयद नदीम खुर्शीद ने कहा कि नयी व्यवस्था में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सहित तीन न्यायाधीश और महाधिवक्ता बार में से एक अधिवक्ता को कमेटी में चयन कर रखेंगे। इन पांच लोगों की समिति ही आगे अधिवक्ताओं के आवेदनों की जांच और साक्षात्कार आदि की प्रक्रिया करेगी। किंतु इन पांचों के लिये अपनी व्यस्तताओं के चलते एक साथ बैठना मुश्किल होगा। उन्होंने इस समिति में महाधिवक्ता को भी मिलाकर बार की ओर से दो सदस्यों की भागेदारी को सुखद बताते हुए कहा कि वे बेंच के मुकाबले अधिवक्ताओं की अच्छी परख के साथ सही व्यक्ति का चयन करेंगे। इससे चयन में पारदर्शिता भी आएगी। वहीं त्रिभुवन फर्त्याल ने कहा कि नयी व्यवस्था से अधिक, खासकर गुणात्मक बदलाव की उम्मीद नहीं है। अलबत्ता अधिवक्ताओं की भागेदारी चयन में जरूर बढ़ेगी। बार के पूर्व अध्यक्ष केएस बोहरा ने कहा कि यह बेहतरी और पारदर्शिता की ओर पहला कदम है, पर यह ही अंतिम कदम नहीं हो सकता है। पूर्व सचिव विनोद तिवाड़ी ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे योग्य अधिवक्ताओं का चयन हो सकेगा। कमेटी को भी चयन करने में आसानी होगी। वहीं बार के युवा अधिवक्ता भुवनेश जोशी ने कहा कि बार को पहली बार चयन की प्रक्रिया में प्रतिनिधित्व मिला है। इससे बेंच की चयन में अब तक होने वाली मनमानी पर भी अंकुश लगेगा। इसके साथ ही कई अधिवक्ताओं ने वरिष्ठ अधिवक्ता के पद को सम्मानजनक बताने के साथ ही पूर्व में उत्तराखंड उच्च न्यायालय में हुए चयनों पर सवाल भी उठाए। बताया कि वरिष्ठ अधिवक्ता को उच्च न्यायालय की ‘फुल कोर्ट रिफरेंस’ के जरिये अन्य अधिवक्ताओं से अलग ‘रिवर्स गाउन’ प्राप्त होता है। वे किसी भी मामले में बिना अपना वकालत नामा लगाए अपनी राय दे सकते हैं। 20 वर्ष की प्रेक्टिस के बाद ही वरिष्ठ अधिवक्ता बनने की मौजूदा शर्त के कारण कुल 17 वर्ष की उम्र वाले उत्तराखंड उच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ताओं के चयन पर स्थानीय अधिवक्ताओं को कई बार मन मसोस कर भी रहना पड़ता है।

पुरानी खबर : अधिवक्ताओं के लिए लगातार वकालत करना हुआ अनिवार्य

-हर पांच वर्ष में संबंधित बार से लगातार वकालत करने का प्रमाण पत्र ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस’ लेना होगा, तभी मिलेगा बार काउंसिल से वकालत करने का लाइसेंस
-छह माह के भीतर हासिल करना होगा वकालत करने का लाइसेंस
नवीन जोशी, नैनीताल। देश-प्रदेश के ऐसे अधिवक्ताओं के लिए बुरी खबर है जो पार्ट टाइम वकालत करते हैं। अब लगातार वकालत न करने वाले अधिवक्ता आगे वकालत नहीं कर पाएंगे। बार काउंसिल आफ इंडिया के ताजा राजपत्र से ऐसे अधिवक्ताओं में हड़कंप मचना तय है। गत 30 अक्टूबर को जारी ताजा राजपत्र-सर्टिफिकेट आफ प्रेक्टिस तथा नवीनीकरण नियम 2014 को उत्तराखंड बार काउंसिल ने भी बीती 22 नवंबर को सर्वसम्मति से स्वीकृति दे दी है, जिसके अनुसार 12 जून 2010 के बाद विधि स्नातक की डिग्री हासिल करने वाले या इसके बाद के पंजीकृत अधिवक्ताओं को अभी छह माह के भीतर और आगे हर पांच वर्ष में बार काउंसिल से ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” हासिल करना होगा। गौरतलब है कि ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” हासिल करने के लिए उन्हें संबंधित बार एसोसिएशन से प्राप्त इस बात का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा, जिसमें उनके लगातार प्रेक्टिस यानी वकालत करने की पुष्टि की गई हो। साफ है कि लगातार वकालत न करने वाले अधिवक्ताओं का लाइसेंस आगे नवीनीकृत नहीं हो पाएगा, और वह किसी मामले में अपने नाम का वकालतनामा नहीं लगा पाएंगे।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010 के बाद के पंजीकृत अधिवक्ताओं के लिए पहले ही ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” लेना अनिवार्य हैं। यानी सभी नए-पुराने अधिवक्ताओं के लिए ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” लेना अनिवार्य हो गया है। यह भी गौरतलब है कि उन्हीं अधिवक्ताओं को ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” मिलेगा, जिनकी बार एसोसिएशन की राज्य की बार काउंसिल से संबद्धता होगी। साथ ही राज्य की बार काउंसिल से पंजीकृत सभी बार एसोसिएशनों के अधिवक्ताओं को ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” लेना अनिवार्य है। फिलवक्त सभी अधिवक्ताओं को गजट जारी होने की तिथि 30 अक्टूबर के छह माह के भीतर यानी अधिकतम 30 अप्रैल से पूर्व ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” हासिल करना जरूरी है। कहने की जरूरत नहीं कि जिन अधिवक्ताओं के पास भले विधि स्नातक यानी एलएलबी की डिग्री हो, बिना ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” किए वकालत करने की अनुमति नहीं होगी। ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” हासिल करने के लिए अधिवक्ताओं को उत्तराखंड बार काउंसिल के सचिव के नाम 400 एवं बार काउंसिल आफ इंडिया के सचिव के नाम 100 रुपए के बैंक ड्राफ्ट एवं अपनी बार एसोसिएशन के प्रमाण पत्र के साथ उत्तराखंड बार काउंसिल के सचिव के पास आवेदन करना होगा।
गौरतलब है कि पूर्व में भी सभी अधिवक्ताओं के लिए अधिवक्ता अधिनियम-1961 की धारा 62 के तहत वकालत करने का प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य है, लेकिन अब तक यह प्रमाण पत्र पूरे अधिवक्ता जीवन में एक बार ही लेने का नियम है। यानी एक बार यह प्रमाण पत्र लेकर अधिवक्ता चाहे वकालत करें या नहीं उनका लाइसेंस जारी रहता था, लेकिन अब हर पांच वर्ष में दुबारा प्रमाण पत्र लेने की अनिवार्यता हो गई है। हाईकोर्ट बार काउंसिल के सचिव विजय सिंह ने बताया कि इस बाबत राज्य के सभी बार संघों को निर्देश दिए जा रहे हैं। उनसे 30 अक्टूबर को जारी भारत का राजपत्र भी पढ़ने को कहा जा रहा है।

हाईकोर्ट के लिए तीन और सुप्रीम कोर्ट के लिए पांच वर्ष की वकालत होगी अनिवार्य

नैनीताल। ताजा राजपत्र के अनुसार नए अधिवक्ता सीधे हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में वकालत नहीं कर पाएंगे। राजपत्र की अनुच्छेद सात के अनुसार ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रेक्टिस” प्राप्त अधिवक्ता शुरू में केवल सेशन या जिला न्यायाधीश के समकक्ष तथा उनके क्षेत्राधिकार के निचले न्यायालयों में ही वकालत कर पाएंगे। हाईकोर्ट तथा उसके अधिकार के न्यायालयों में वकालत करने के लिए निचले न्यायालयों में कम से कम दो वर्ष की प्रेक्टिस करने तथा सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने के लिए उच्च न्यायालय व उसके क्षेत्राधिकार के न्यायालयों में कम से कम तीन वर्ष की प्रेक्टिस करनी अनिवार्य होगी।

Loading...

नवीन समाचार

मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….।मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड