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ब्रेकिंग : राज्य के 500 अधिवक्ताओं को दिया गया ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस’, 90 फीसद अधिवक्ताओं के पास नहीं है प्रैक्टिस के लिए जरूरी यह सर्टिफिकेट

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नवीन समाचार, नैनीताल, 19 अक्टूबर 2020। उत्तराखंड बार कौंसिल ने राज्य के 500 अधिवक्ताओं का सत्यापन कर दिया है। उत्तराखंड बार कौंसिल के सचिव ने मंगलवार को बताया कि बार कौंसिल ऑफ इंडिया सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस वेरिफिकेशन नियम 2015 के अनुपालन में सोमवार को प्रशासनिक समिति की बैठक में 500 अधिवक्ताओं की सत्यापन प्राप्त पत्रावलियों की जांच के बाद ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस’ देने के आदेश दिए गए। समिति की बैठक समिति के सदस्य राकेश गुप्ता की अध्यक्षता एवं उत्तराखंड बार कौंसिल के उपाध्यक्ष राजवीर सिंह बिष्ट व सदस्य अर्जुन सिंह भंडारी की मौजूदगी में हुई। उन्होंने बताया कि इन्हें मिलाकर अब तक कुल 1895 अधिवक्ताओं को ही ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस’ दिया गया है। इधर बताया गया है कि राज्य में कुल मिलाकर 16 हजार से अधिक पंजीकृत अधिवक्ता हैं, जबकि इनमें से 13,500 अधिवक्ताओं के प्रपत्र सत्यापन के लिए भेजे गए हैं। सभी अधिवक्ताओं को राज्य में प्रैक्टिस करने के लिए ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस’ लेना अनिवार्य है। इस प्रकार राज्य के करीब 90 फीसद अधिवक्ताओं के पास प्रैक्टिस करने के लिए जरूरी यह सर्टिफिकेट अभी नहीं है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अक्टूबर 2020। उत्तराखंड हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव एक बार पुनः स्थगित हो गए हैं। मंगलवार को हाइकोर्ट बार एसोसिएशन की अध्यक्ष पूरन सिंह बिष्ट की अध्यक्षता में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आहूत हुई सामान्य बैठक में निर्णय लिया गया कि चुनाव की स्थिति सामान्य होने तक वर्तमान कार्यकारिणी ही अपने पूर्ण अधिकारों के साथ कर्तव्यों का निर्वहन करे। वर्तमान परिस्थितियों में चुनाव कराना संभव नहीं होगा। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व दो सितंबर को हुई आम सभा में भी चुनाव स्थगित करने का निर्णय लिया गया था।
आज की बैठक में कोरम पूरा न हो पाने के कारण आगे कोरोना महामारीकी स्थिति सामान्य होने पर एक सामान्य बैठक आहूत की जाएगी, और उसमें चुनाव कराने पर निर्णय लिया जाएगा। बताया गया कि आज की बैठक में 28 अधिवक्ता ही उपस्थित रहे और इनमें से कुछ ने चुनाव करवाने, जबकि अन्य ने कोरोना की महामारी अभी जारी रहने एवं केंद्र व राज्य सरकार के 200 व्यक्तियों की संख्या से अधिक एकत्र न होने के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए चुनाव कराने से इंकार किया। बैठक में वरिष्ठ अधिवक्ता वीपी नौटियाल, सैयद नदीम खुर्शीद, केएस रौतेला, ललित बेलवाल, बिंदेश कुमार गुप्ता, अनुराग बिसारिया, विनोद तिवारी, संदीप तिवारी, कैलाश तिवारी, पूरन रावत, विकास बहुगुणा, मानव शर्मा, डीसीएस रावत, डीके जोशी, शशांक उपाध्याय, शिवांगी गंगवार, शुभांगिनी द्विवेदी व वीर कुंवर सिंह आदि अधिवक्ता उपस्थित रहे।

यह भी पढ़ें : उच्च न्यायालय में राज्य सरकार के स्थायी अधिवक्ता पद से दिया इस्तीफा, PM-BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष को भी भेजी शिकायत

नवीन समाचार, नैनीताल, 08 सितंबर 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय में राज्य सरकार के स्थायी अधिवक्ता पद पर कार्यरत अनुराग बिसारिया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रदेश के महाधिवक्ता को भेजे गए इस्तीफे में श्री बिसारिया का कहना है कि कुछ दिनों के घटनाक्रम के बाद उन्हें प्रदेश के मुख्य स्थायी अधिवक्ता के साथ प्रतिबद्ध होकर कार्य करना सम्मानजनक एवं व्यवहारिक नहीं रह गया है। साथ ही कोविड-19 के कारण 17 अधिवक्ताओं की आबद्धता समाप्त करने को अमानवीय बताते हुए उन्होंन 15 अधिवक्ताओं की आबद्धता का उच्चीकरण व 14 नये अधिवक्ताओं की आबद्धता को राज्य पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला तथा अधिवक्ताओं की वरिष्ठता, कनिष्ठता, कार्य के प्रति प्रतिबद्धता व निष्क्रियता से इतर निजी पसंद-नापसंद से जुड़ा होना एवं येन-केन प्रकारेण अपने पांव पसारने वाले अधिवक्ताओं का अनावश्यक पोषण बताया है। साथ ही कहा है इससे बेहतर अनियमित स्टेनोग्राफरों को नियमित करना एवं 10-15 नये कुशल नियमित अथवा संविदा स्टेनोग्राफरों की नियुक्ति करना रहता। पत्र की प्रतियां प्रधानमंत्री, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश की राज्यपाल, मुख्यमंत्री, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं प्रदेश के न्याय एवं विधि परामर्श सचिव को भी भेजी गई हैं।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड के 51 अधिवक्ताओं के खिलाफ शिकायतें, जांच करने को बनी समितियां

नवीन समाचार, नैनीताल, 07 सितंबर 2020। उत्तराखंड बार काउंसिल को राज्य के उच्च न्यायालय एवं जिला अदालतों में प्रैक्टिस कर रहे 51 अधिवक्ताओं के खिलाफ प्रमाण पत्रों के फर्जी होने तथा विपक्षी अधिवक्ताओं से मिलीभगत कर मामले निपटाने जैसी शिकायतें मिली हैं। बार काउंसिल के चेयरमैन सुरेंद्र पुंडीर ने इस संबंध में हुई बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि 51 शिकायतों में से 6 शिकायतें अन्य न्यायालयों में विचाराधीन हैं। 8 शिकायतें सुनवाई में एक वर्ष से अधिक का अधिक का समय बीत जाने के कारण नियमानुसार बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भेजी जाएंगी। जबकि शेष में से तीन शिकायतें अगली बैठक के लिए संदर्भित की गई हैं, और शेष शिकायतें कमेटियों को कार्रवाई के लिए संदर्भित की गई है। इनके अलावा अधिवक्ताओं के सत्यापन की करीब 4500 फाइलों के लिए दो समितियों व अपीलीय ट्रिब्यूनल का गठन किया गया है। साथ ही बार काउंसिल का सर्टिफिकेट अब अंग्रेजी के साथ हिंदी में देना भी तय किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ताओं में उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार तथा आरोपी अधिवक्ताओं में नैनीताल, चमोली, हरिद्वार, काशीपुर, हल्द्वानी, ऋषिकेश, कोटद्वार के अधिवक्ता शामिल बताए हैं, जबकि शिकायतों में फर्जी डिग्री से वकालत करने के साथ ही अधिवक्ता अधिनियम की धारा-36 बी के तहत मामलों को विपक्षी से मिलीभगत कर निपटाने के आरोप भी शामिल है। आरोपित अधिवक्ताओं में सरकार की ओर से उच्च न्यायालय में महत्वपूर्ण पदों पर नामित दो अधिवक्ता भी शामिल बताए गए हैं। समितियों में उत्तराखंड बार काउंसिल के चेयरमैन सुरेंद्र पुंडीर, उपाध्यक्ष राजवीर सिंह बिष्ट, बार काउंसिल सदस्य नंदन सिंह कन्याल, अर्जुन पंडित, अर्जुन भंडारी, कुलदीप सिंह, मेहरबान सिंह कोरंगा, राकेश गुप्ता, प्रभात चौधरी भी हैं। असल में बार काउंसिल को अधिवक्ता के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार है। बताया गया है कि उत्तराखंड बार काउंसिल चार हजार अधिवक्ताओं की पत्रावलियांे का सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रेक्टिस के नियम-2015 के तहत निरीक्षण कर चुका है। इन सभी को जल्द बार काउंसिल का सदस्यता प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा।

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-कोरोना का हवाला देते हुए निर्णय लिया कि जब तक कोरोना की महामारी की स्थिति सामान्य होने तक वर्तमान कार्यकारिणी ही बार के समस्त कार्यों का निर्वहन करेगी
नवीन समाचार, नैनीताल, 02 सितंबर 2020। उत्तराखंड हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव स्थगित हो गए हैं। बुधवार को हाइकोर्ट बार एसोसिएशन की वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आहूत हुई आम सभा के बाद बार के महासचिव जयवर्धन कांडपाल के हवाले से यह जानकारी दी गई। बताया गया कि बैठक में मुख्य रूप से शारीरिक रूप से उपस्थित होकर मामलों की सुनवाई एवं हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के चुनावों पर चर्चा की गई। बैठक में अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से कोरोना संक्रमितों की संख्या के लगातार बढ़ने को देखते हुए निर्णय लिया कि जब तक कोरोना की महामारी की स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, वर्तमान कार्यकारिणी ही बार के समस्त कार्यों का निर्वहन करेगी।
यह भी कहा गया कि वर्तमान में उच्च न्यायालय मे ंजैसी स्थिति में कार्य चल रहा है, उसे उसी प्रकार से चलते रहने दिया जाय, तथा कुछ समय पश्चात यदि स्थिति सामान्य होती है तो आम सभा पुनः बुलाकर उस पर सदस्यों द्वारा विचार कर लिया जाएगा। बैठक बार के अध्यक्ष पूरन सिंह बिष्ट की अध्यक्षता एवं जयवर्धन कांडपाल के संचालन में हुई। बैठक में उपाध्यक्ष श्रुति जोशी, बीपी नौटियाल, एसके जैन, पूर्व अध्यक्ष सैयद नदीम मून व ललित बेलवाल, बिंदेश कुमार गुप्ता, राजेश जोशी, कमलेश तिवारी, संदीप तिवारी, विकास बहुगुणा, पूरन रावत, एमके गोयल, डीके जोशी, डीसीएस रावत, एमके पपनोई, वीर कुंवर सिंह, प्रतिरूप पांडे, कार्तिकेय हरि गुप्ता, चंद्रशेखर जोशी व शशि कांत शांडिल्य आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : यह क्या ? 4 दिन पहले 17 अधिवक्ता हटाए, अब 29 नये बना दिये

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 अगस्त 2020। गत 17 अगस्त को उत्तराखंड शासन ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में पैरवी के लिए वर्ष 2014 में आबद्ध किए दो उपमहाधिवक्ता, एक-एक सहायक महाधिवक्ता एवं स्थायी अधिवक्ता तथा 13 वादधारकों सहित 17 अधिवक्ताओं को हटा दिया था। अब आज चार उप महाधिवक्ता, 10 अपर महाधिवक्ता, चार-चार स्थायी अधिवक्ता व सहायक शासकी अधिवक्ता एवं 7 वादधारकों की नियुक्ति कर दी है। पहले 17 अधिवक्ताओं को हटाने व अब 29 को बनाने पर अधिवक्ता जगत में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। लोग इसे ‘सेटिंग-गेटिंग’ और अधिवक्ताओं की प्रतिभा से भी जोड़ कर देख रहे हैं। वहीं इस बात पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि हटाते समय कोरोना काल में सरकार की खराब आर्थिक दशा को इसका कारण बताया जा रहा था। यदि ऐसा है तो पहले से अधिक अधिवक्ताओं की नियुक्ति कर सरकार क्या संदेश देना चाहती है।

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यह भी पढ़ें : सरकार ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय से हटाये दो उपमहाधिवक्ता, एक-एक सहायक महाधिवक्ता व स्थायी अधिवक्ता तथा 13 वादधारक, लग रहे कयास

नवीन समाचार, नैनीताल, 17 अगस्त 2020। उत्तराखंड शासन ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में पैरवी के लिए वर्ष 2014 में आबद्ध किए 17 अधिवक्ताओं को हटा दिया है। इनमें दो उपमहाधिवक्ता, एक-एक सहायक महाधिवक्ता एवं स्थायी अधिवक्ता तथा 13 वादधारक शामिल हैं। जिन अधिवक्ताओं की आबद्धता समाप्त की गई है उसमें, उपमहाधिवक्ता संदीप टंडन, उपमहाधिवक्ता सुधीर कुमार चौधरी, सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रेम सिंह बोहरा, स्थायी अधिवक्ता सुहास रतन जोशी तथा वाद धारक सीमा साह, गीता परिहार, कल्याण सिंह मेहता, अनिरुद्ध भट्ट, फरीदा सिद्दकी, अतुल बहुगुणा, शिवाली जोशी, सौरभ कुमार पांडेय, दर्शन सिंह बिष्ट, प्रीता भट्ट, उमेश बेलवाल, संगीता भारद्वाज, अक्षय लटवाल शामिल हैं।

बताया गया है कि आबद्धता समाप्त किये गए अधिवक्ताओं में से छह पिछली सरकार में भी सरकारी अधिवक्ता एवं भाजपा व संघ के पदाधिकारियों के निकट के लोग भी शामिल हैं। आबद्धता समाप्त किये जाने का कारण कोरोना काल में सरकार की कमजोर आर्थिक स्थिति को बताया जा रहा है, जबकि अन्य निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं। क्योंकि 17 अधिवक्ताओं को हटाये जाने से सरकार की आर्थिक सेहत पर पड़ने वाला प्रभाव मामूली ही हो सकता है।

यह भी पढ़ें : नैनीताल सहित देश की दो हजार से अधिक महिला अधिवक्ताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र भेजकर लगाई गुहार

नवीन समाचार, नैनीताल, 27 जुलाई 2020। दो हजार से अधिक महिला अधिवक्ताओं ने केंद्रीय गृहमंत्री को प्रत्यावेदन भेजकर कोरोना के कारण आर्थिक तंगी झेल रहे अधिवक्ता समाज के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2015 के अंतर्गत सहायता एवं अप्रत्यक्ष (वर्चुअल) न्यायालयों के ढांचे को सुधारने की गुहार लगाई है। प्रत्यावेदन में महिला अधिवक्ताओं ने लॉकडाउन के कारण मार्च 2020 से न्यायिक प्रणाली के सुचारू रूप से पूर्णतः कार्य न करने से आर्थिक तंगी झेल रहे समस्त अधिवक्ता समाज के लिए उचित नियम एवं शर्तों पर आसान किश्तों पर ऋण दिए जाने की पीड़ा को समझते हुए की गुहार भारत के गृहमंत्री के समक्ष उठाई है। 21 जुलाई 2020 को प्रारम्भ किए गए इस हस्ताक्षर अभियान में 2000 से अधिक महिला अधिवक्ताओं ने इस पहल के लिए अपनी सहमति जताई है। प्रत्यावेदन की प्रतियां प्रधानमंत्री, विधि एवं न्याय मंत्री तथा वित्त मंत्री कार्यालय भी भेजी गई हैं।
प्रत्यावेदन में महिला अधिवक्ताओं ने कहा है कि अनलॉक की प्रक्रिया के दौरान न्यायालय बहुत ही कम कार्य कर पा रहे हैं। ऐसे में अप्रत्यक्ष (वर्चुअल) न्यायालयों की आवश्यकता एवं प्रासंगिकता बढ़ गयी है। अधिकतर अधिवक्ताओं के पास लैपटॉप, स्कैनर, अच्छे सिग्नल हेतु उचित मानक वाले वाईफाई जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आदि जैसा उचित ढांचा नहीं है। विभिन्न बार एसोसिएशन भी इस सबके लिये सक्षम नहीं दिखायी पड़ती हैं। इस कारण अधिवक्ता न्याय निष्पादन प्रणाली को उचित प्रकार से सहायता नहीं कर पा रहे हैं। यदि मंत्रालय इस प्रत्यावेदन की सुनवाई करता है तो उनका यह कदम समस्त अधिवक्ता समाज को कोरोना के कारण झेल रहे आर्थिक तंगी से उबारने में एवं भविष्य के अप्रत्यक्ष (वर्चुअल) न्यायालयों के ढांचे को सुधारने व न्याय की सुलभ पहुंच में आम आदमी के हितों को भी सुनिश्चित करने में सहायक होगा। प्रत्यावेदन भेजने वालों में उत्तराखंड से जानकी सूर्या, ममता जोशी, दीपशिखा पंत जोशी, शैलबाला नेगी, अल्का चोपड़ा, गौरा देवी, पुष्पा भट्ट, सीमा चौधरी, नेहा शर्मा, दीपा आर्या, आदि महिला अधिवक्ता शामिल हैं।

बिग ब्रेकिंग: एक कर्मी के कोरोना पॉजिटिव निकलने के बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट बंद

यह भी पढ़ें : बार कौंसिल ऑफ उत्तराखंड ने अधिवक्ताओं के खिले खोली तिजोरी

-आर्थिक रूप से कमजोर 2807 अधिवक्ताओं को पांच-पांच हजार, 65 अधिवक्ताओं के नॉमिनीज को 44.37 लाख एवं 26 दिवंगत अधिवक्ताओं के नॉमिनीज को 26 लाख की धनराशि अवमुक्त
नवीन समाचार, नैनीताल, 30 जून 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेशों पर बार कौंसिल ऑफ उत्तराखंड 2460 अधिवक्ताओं के बैंक खातों में पांच हजार रुपए की धनराशि स्थानांतरित करने जा रहा है। बार कौंसिल ऑफ उत्तराखंड के सचिव विजय सिंह ने बताया कि कौंसिल को आर्थिक मदद के लिए कुल 2807 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 199 आवेदन निर्धारित मापदंडों को पूरा नहीं करने के कारण निरस्त कर दिये गये, साथ ही 148 ओवदन प्रिंट साफ नहीं होने के कारण सूची में शामिल नहीं किये गये। इनके अलावा एडवोकेट वेलफेयर कमेटी के जरिये वर्ष 2017 से लंबित 65 क्लेम के वादों का निपटारा किया गया और 44 लाख 37 हजार 905 रुपए का भुगतान संबंधित अधिवक्ताओं के नॉमिनीज को किया गया। साथ ही उत्तराखंड इस्टेब्लिसमेंट फंड कमेटी के द्वारा 28 वादों का निस्तारण कर 26 दिवंगत अधिवक्ताओं के नॉमिनीज को 26 लाख रुपए की धनराशि दी गई है।

यह भी पढ़ें : अधिवक्ता कल्याण कोष से सहायता प्राप्त करने को जारी हुआ स्पष्टीकरण

नवीन समाचार, नैनीताल, 3 मई 2020। उत्तराखंड बार कौंसिल की अधिवक्ता कल्याण न्यास से उत्तराखंड के उन सभी अधिवक्ताओ को लाभ मिल सकेगा, जिनके द्वारा आल इंडिया बार एग्जाम पास की हुई है। इसमे रजिस्ट्रेशन के वर्ष की कोई बाध्यता नही है। बार कौंिसल के अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर ने बताया कि 2 मई 2020 को उच्च न्यायालय उत्तराखंड के आदेश के पालन में अधिवक्ताओ को आर्थिक सहायता प्रदान करने के संबंध मे यह तय किया गया है। 

इसके अलावा सदस्यों के सुझाव पर बिंदु संख्या सात व आठ पर भी पुर्नविचार किया गया है। अधिवक्ता का आवास न होने संबंधी बिंदु पर यह छूट दे दी गई है कि यह नियम पैतृक आवास के लिये लागू नहीं होगा। यानी उन अधिवक्ताओं को भी छूट मिल सकेगी जिनके प्रैक्टिस करने वाले शहर में पैतृक आवास होंगे। उल्लेखनीय है कि बिंदु संख्या सात में अधिवक्ता एवं उसकी पत्नी, पिता, मां, बेटा व अविवाहित पुत्री के नाम उसके द्वारा प्रेक्टिस किये जाने वाले शहर में आवास नहीं होने पर ही पात्र होने का प्राविधान किया गया था। वहीं बिंदु संख्या आठ के लिए कहा गया है कि अब बिंदु संख्या आठ का प्राविधान आवेदन पत्र भरते समय लागू नहीं होंगे। यानी क्रम संख्या नौ को निष्प्रभावी माना जायेगा। उल्लेखनीय है कि बिंदु संख्या आठ में अधिवक्ता एवं उसकी पत्नी, पिता, मां, बेटा व अविवाहित पुत्री के नाम कृषि भूमि नहीं होने पर ही पात्र होने का प्राविधान किया गया था। यह भी तय किया गया है कि आवेदन पत्रों की जांच करते हुए किसी भी आवेदन पत्र की गंभीरता को देखते हुए दिशा-निर्देशों में दिये गये नियमों में कमेटी द्वारा शिथिलता भी दी जा सकती है। 

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में अधिवक्ताओं को बार काउंसिल से मदद देने के लिए तय हुए दिशा-निर्देश

-12 जून 2010 से पहले बार काउंसिल में पंजीकरण, प्रेक्टिस वाले शहर में घर, वाहन व अन्य नौकरी न होने की लगाई शर्त
नवीन समाचार, नैनीताल, 2 मई 2020। उत्तराखंड अधिवक्ता कल्याण कोष कमेटी ने देशव्यापी लॉक डाउन के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रहे अधिवक्ताओं को पांच हजार रुपये की मदद देने के लिए दिशा-निर्देश तय कर दिये हैं। शनिवार को विडियो कांफ्रेंसिंग से हुई बैठक में तय हुआ कि इस आर्थिक मदद के लिये वे अधिवक्ता ही पात्र होंगे जो 12 जून 2010 से पहले बार काउंसिल में पंजीकृत होंगे और उनका उस शहर में अपना घर न हो जहां वे प्रेक्टिस करते हैं। ऐसे अधिवक्ता के पास वाहन भी नहीं होना चाहिये और वे किसी संस्था से वेतन या पेंशन न लेते हों। इसके अलावा कई अन्य शर्तें भी आर्थिक सहायता प्राप्त करने के लिये लगाई गई हैं।
बैठक में यह भी तय हुआ कि उत्तराखंड बार काउंसिल से आर्थिक सहायता हेतु आवेदन पत्र हेतु फार्म का प्रारूप बनाकर उसे समस्त बार एसोसिएशनों को भेज जाएगा। यह फार्म बार काउंसिल की वेबसाइट से भी डाउनलोड किया जा सकता है। जरूरतमंद अधिवक्ताओं को फार्म अपने बार के अध्यक्ष व सचिव से सत्यापित कराकर 18 मई से पूर्व ऑन लाइन बार काउंसिल कार्यालय में जमा करना होगा। इन आवेदन पत्रों की जांच हेतु एक कमेटी का भी गठन किया गया है, जिसमें प्रदेश के महाधिवक्ता, उत्तराखंड बार काउंसिल के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, राज्य के विधि सचिव व अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति के अध्यक्ष को शामिल किया गया है। इस कमेटी की जांच के बाद आर्थिक मदद आवेदक के बैंक खाते में जमा की जाएगी। बैठक में बार कौंसिल उत्तराखंड के सचिव सुरेंद्र पुंडीर, बार कौंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य डीके शर्मा एवं उत्तराखंड सरकार के महाधिवक्ता व उत्तराखंड अधिवक्ता कल्याण कोष कमेटी के अध्यक्ष एसएन बाबुलकर मौजूद रहे।

जरूरतमंद अधिवक्ताओं को मदद मिलना मुश्किल
नैनीताल। जरूरतमंद अधिवक्ताओं को मदद देने के लिए जो शर्तें रखी गयी हैं, उनसे वास्तविक जरूरतमंदों को मदद मिलनी मुश्किल लगती है। पहला कारण यह कि पात्रता के लिए 12 जून 2010 से पूर्व का यानी करीब 10 वर्ष पुराना पंजीकरण होना चाहिए। जबकि पुराने नहीं नये अधिवक्ता अधिक जरूरतमंद हो सकते हैं। यह भी कम ही संभव है कि 10 वर्ष से प्रेक्टिस कर रहे अधिवक्ताओं के पास अपना घर, वाहन नहीं होगा। यह भी कहा जा रहा है कि खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में अधिकांश स्थानीय अधिवक्ताओं के अपने घर होते हैं। केवल बाहरी अधिवक्ताओं के ही घर नहीं होते हैं। ऐसे में स्थानीय जरूरतमंद अधिवक्ताओं को भी इसका लाभ नहीं मिलेगा। केवल बाहरी अधिवक्ताओं को ही लाभ मिल पायेगा।

यह भी पढ़ें : खुशखबरी: सभी जरूरतमंद अधिवक्ताओं को मिल सकेगी बार काउंसिल से मदद

नवीन समाचार, नैनीताल, 1 मई 2020। उत्तराखंड बार काउंसिल के उपाध्यक्ष राजबीर सिंह बिष्ट ने कहा कि राज्य के सभी जरूरतमंद अधिवक्ताओं को काउंसिल की ओर से मदद दी जाएगी। उन्होंने सभी जरूरतमंद अधिवक्ताओं को बार काउंसिल से सहायता राशि दिए जाने बाबत शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर, बार काउंसिल के अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर एवं सदस्यों तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य डीके शर्मा से बैठक के बाद यह बात कही। बताया कि बैठक में अधिवक्ताओं की भावना व आवश्यकताओं को देखते हुए यह मांग स्वीकार कर ली गई है। .अब सभी जरूरतमंद अधिवक्ताओं को आर्थिक सहायता दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि पहले पांच वर्ष से कम प्रेक्टिस वाले अधिवक्ताओं को ही पांच हजार रुपए की आर्थिक मदद दिये जाने की बात कही गयी थी। लेकिन अब सभी जरूरतमंद अधिवक्ताओं को यह मदद मिल सकेगी। अलबत्ता, जरूरतमंद होने की पात्रता के लिये बार काउंसिल में एक प्रारूप तैयार किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें : पांच वर्ष से कम वकालत वाले अधिवक्ताओं के लिए मिले दो करोड़ रुपए..

नवीन समाचार, नैनीताल, 28 अप्रैल 2020। देशव्यापी लॉक डाउन से राज्य के युवा अधिवक्ताओं के समक्ष उत्पन्न आर्थिक संकट में उनकी आर्थिक मदद किये जाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका की आज विडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि अधिवक्ता कल्याण कोष में दो करोड़ रुपये की व्यवस्था हो गई है। आगे इसे एक योजना बनाकर युवा अधिवक्ताओं को बांटा जाएगा ।

कहना गलत न होगा कि अधिवक्ता अपनी समस्याओं को उठाने के लिए समर्थ हैं। उन्होंने आवाज उठाई और बड़ी धनराशि प्राप्त भी कर ली। लेकिन ऐसे बहुत से पेशेवर, गैर नौकरीपेशा मध्यमवर्गीय लोग हैं जो ऐसे आवाज नहीं उठा सकते। स्वयं सबकी खबर लिखने वाले पत्रकार। वे कोरोना के खतरे के बावजूद लड़ रहे हैं लेकिन उनकी आय भी इस दौरान बुरी तरह से प्रभावित हुई है। कई समाचार पत्र संस्थान तो उनका वेतन भी काट चुके हैं। लेकिन उनके बारे में न सरकार के स्तर से ही चिंता हुई है और न किसी अन्य वर्ग से। अलबत्ता अन्य वर्गों की समस्याएं उठाने का अपना धर्म जरूर निभा रहे हैं।

न्यायमूर्ति मनोज तिवारी व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खण्डपीठ के समक्ष हुई सुनवाई में राज्य के महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने 78.50 लाख रुपये अधिवक्ता कल्याण कोष कमेटी के खाते में अवमुक्त कर दिये हैं और लगभग इतनी ही राशि उत्तराखंड बार कौंसिल के पास व कुछ राशि अन्य खातों में है। इस राशि को अब राज्य के उन युवा अधिवक्ताओं को बांटा जाएगा जिनकी प्रैक्टिस पांच साल से कम है। उन्होंने बताया कि अधिवक्ता कल्याण कोष कमेटी जरूरतमंद अधिवक्ताओं से आवेदन पत्र मंगाएं जाएंगे। इस हेतु एक आवेदन पत्र सभी बार एसोसिएशननों को भेजा जाएगा। जिसके बाद आर्थिक मदद दी जाएगी।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कार्तिकेय गुप्ता ने हाईकोर्ट व राज्य सरकार के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि युवा अधिवक्ताओं को इस मदद से कुछ हद तक राहत मिलेगी। उल्लेखनीय है कि देहरादून के अधिवक्ता मनमोहन कंडवाल व अन्य ने जनहित याचिका दायर कर कोरोना वायरस से बचाव के लिये हुये देशव्यापी लॉक डाउन से अधिवक्ताओं का काम ठप होने व उनकी आर्थिक स्थिति खराब होने को ध्यान में रखते हुए उनकी आर्थिक मदद की मांग की थी। सरकार व बार कौंसिल के इस वक्तव्य के बाद याचिका निस्तारित कर दी गई है।

यह भी पढ़ें : मुराद पूरी, अधिवक्ता कल्याण कोष में मिले 78 लाख से अधिक, जरूरतमंद अधिवक्ताओं को मिल सकेगी मदद

नवीन समाचार, नैनीताल, 27 अप्रैल 2020। उत्तराखंड बार काउंसिल की अधिवक्ता कल्याण निधि न्यासी समिति को शासन से अधिवक्ताओं के पंजीकरण के साथ ली जाने वाली 500 रूपए के स्टांप की धनराशि के सापेक्ष 78 लाख 50 हजा रुपए की धनराशि मिल गयी है। इस संबंध में उत्तराखंड कार काउंसिल के अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर ने बताया कि गत 20 अप्रैल को बार कौंसिल ऑफ उत्तराखंड की कार्यकारिणी की बैठक में पारित प्रस्ताव के अनुसार वर्ष 2004 से अधिवक्ताओं के पंजीकरण के साथ ली जाने वाली 500 रूपए के स्टाम्प की धनराशि के सापेक्ष कुल 78.5 लाख रुपए की धनराशि को प्रमुख सचिव न्याय एवं विधि परामर्शी उत्तराखंड शासन से अधिवक्ता वेलफेयर फण्ड न्यासी समिति के खाते में हस्तांतरित किये जाने के सम्बन्ध में एक पत्र प्रमुख सचिव न्याय एवं विधि परामर्शी, उत्तराखंड शासन को बार कौंसिल ऑफ उत्तराखंड की ओर से भेजा गया था। जिसका संज्ञान लेते हुए अधिवक्ता वेलफेयर फंड न्यासी समिति के अध्यक्ष-प्रदेश के महाधिवक्ता के द्वारा 20 अप्रैल को ही एक बैठक वीडियो कॉॅफ्रेंसिंग के माध्यम से की गयी थी, जिसमें बार कौंसिल ऑफ उत्तराखंड के चेयरमैन, प्रमुख सचिव न्याय एवं विधि परामर्शी, तथा हाईकोर्ट के अधिवक्ता पीयूष गर्ग ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की थी। उस बैठक में सर्व सम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए उत्तराखंड सरकार से उत्तराखंड के अधिवक्तागण की लंबित धनराशि 78.5 लाख रूपए शीघ्रातिशीघ्र अधिवक्ता वेलफेयर फण्ड अकाउंट में हस्तांतरित करने हेतु आग्रह किया गया था। आज बार कौंसिल ऑफ उत्तराखंड की मांग को मानते हुए उत्तराखंड सरकार ने 78.5 लाख रूपए की धनराशि अधिवक्ता वेलफेयर फण्ड के खाते में हस्तांतरित करने की प्रदेश के राज्यपाल ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। श्री पुंडीर ने आशा जताई है कि इस धनराशि से कोविद-19 की वैश्विक महामारी में अपने जरूरतमंद अधिवक्ताओं की आर्थिक सहायता कर सकेंगे। इस कार्य के लिए उन्होंने प्रदेश के महाधिवक्ता तथा बार कौंसिल के सभी सदस्यों व अधिवक्ताओं का आभार भी जताया है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 24 अप्रैल 2020। उत्तराखंड बार कौंसिल के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह पुंडीर ने बार कौंसिल ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर देशव्यापी लॉक डाउन के बीच उत्तराखंड के युवा अधिवक्ताओं की आर्थिक मदद हेतु उत्तराखंड बार कौंसिल को फंड जारी करने की मांग की है। पत्र में कहा गया गया है कि उत्तराखंड एडवोकेट वेल्फेयर फंड ट्रस्टी कमेटी ने एडवोकेट वेलफेयर फंड एक्ट 1974 के तहत राज्य सरकार से फंड की मांग की है। इस कमेटी के पदेन अध्यक्ष एडवोकेट जनरल हैं जबकि बार कौंसिल अध्यक्ष व राज्य के न्याय सचिव इसके सदस्य हैं। कमेटी के आग्रह पर राज्य सरकार से मिलने वाले फंड से बार कौंसिल उत्तराखंड में पंजीकृत सभी युवा अधिवक्ताओं की मदद नहीं की जा सकती। इसलिये बार कौंसिल ऑफ इंडिया के नियम संख्या 40 व 41 के तहत पंजीकरण के समय अधिवक्ताओं द्वारा दिये जाने वाले शुल्क में से फंड उत्तराखंड बार कौंसिल को अवमुक्त किया जाये। इसके अलावा बार कौंसिल ऑफ इंडिया से 1 करोड़ का फंड अलग से जारी किया जाये। उल्लेखनीय है कि राज्य के युवा अधिवक्ताओं की आर्थिक मदद हेतु उत्तराखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका विचाराधीन है। जिसकी सुनवाई के दौरान विगत दिवस हाईकोर्ट ने उत्तराखंड बार कौंसिल को निर्देश दिया था कि वह बार कौंसिल ऑफ इंडिया से पत्राचार कर फंड हेतु निवेदन करे, साथ ही बार कौंसिल ऑफ इंडिया को इस मांग पर 27 अप्रैल तक निर्णय लेने को कहा है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 23 अप्रैल 2020। उत्तराखंड हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति मनोज तिवारी व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने देशव्यापी लॉक डाउन के कारण युवा अधिवक्ताओं के समक्ष उत्पन्न आर्थिक संकट को देखते हुए उन्हें आर्थिक राहत देने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य के वित्त सचिव, उत्तराखंड बार कौंसिल व बार कौंसिल ऑफ इंडिया से अधिवक्ता कल्याण निधि में धनराशि जमा करने के संदर्भ में 27 अप्रैल तक निर्णय लेने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई अब 28 अप्रैल को होगी।
बृहस्पतिवार को मामले की सुनवाई के दौरान बार कौंसिल ऑफ उत्तराखंड द्वारा कोर्ट को बताया गया है कि राज्य के न्याय सचिव ने वित्त सचिव को पत्र लिखकर अधिवक्ता कल्याण निधि हेतु फंड जारी करने की संस्तुति की है जो राज्य के वित्त सचिव के स्तर पर लंबित है। खंडपीठ ने प्रमुख सचिव वित्त से इस मामले में 27 अप्रैल तक निर्णय लेने को कहा है। कोर्ट ने उत्तराखंड बार कौंसिल से बार काउंसिल ऑफ इंडिया से भी फंड की मांग करने को कहा है। साथ ही बार कौंसिल ऑफ इंडिया से भी इस संदर्भ में 27 अप्रैल तक निर्णय लेने को कहा है।
मामले के अनुसार हाइकोर्ट के अधिवक्ता मुकेश रावत, देहरादून बार एसोसिएशन के अधिवक्ता अनिल कुमार शर्मा व अधिवक्ता मनमोहन कंडवाल की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि करीब एक माह से न्यायिक कार्य बंद होने से कई अधिवक्ताओं के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। इसलिये ऐसे अधिवक्ताओं को सरकार मार्च व बार काउंसिल ऑफ उत्तराखण्ड मार्च, अप्रैल व मई माह में दस-दस हजार व पंजीकृत अधिवक्ता क्लर्कों को पांच-पांच हजार प्रति माह राहत राशि दे।

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-अधिवक्ताओं को लॉक डाउन से राहत के लिए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से 48 घंटे में मांगा जवाब
नवीन समाचार, नैनीताल, 20 अप्रैल 2020। देशव्यापी लॉक डाउन के कारण अधिवक्ताओं को आर्थिक राहत पैकेज देने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार को 48 घण्टे में जवाब दाखिल कर यह बताने को कहा है कि सरकार इस बारे में क्या कर सकती है। मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी।
उल्लेखनीय है कि देहरादून जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल, आधिवक्ता मुकेश रावत, अधिवक्ता अनिल कुमार शर्मा व अधिवक्ता मनमोहन कंडवाल की ओर से दायर इस जनहित याचिका में कहा गया है कि करीब एक माह से न्यायिक कार्य बंद होने से तमाम अधिवक्ताओं के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। इसलिये ऐसे अधिवक्ताओं को सरकार मार्च व बार काउंसिल ऑफ उत्तराखण्ड मार्च, अप्रैल व मई माह में दस-दस हजार व पंजीकृत अधिवक्ता क्लर्कों को पांच-पाँच हजार प्रति माह राहत राशि दे। साथ ही मकान मालिकों से किराया माफ कराया जाये और निजी स्कूलों से अधिवक्ताओं के बच्चों से तीन माह की फीस न लेने के आदेश दिए जाएं। याचिका में अधिवक्ताओं को लॉक डाउन के दौरान कोर्ट आने-जाने हेतु वाहन पास की सुविधा देने की भी अपील की गई है। याचिकाकर्ताओ का कहना है कि बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड में उनका पर्याप्त फंड भी जमा है। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता कार्तिकेय हरि गुप्त ने पीठ के समक्ष अधिवक्ता एक्ट के हवाला देते हुए राहत देने का आदेश पारित करने की मांग की।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 17 अप्रैल 2020। शुक्रवार को हाईकोर्ट बार काउंसिल की कार्यकारिणी की अध्यक्ष पूरन सिंह बिष्ट की अध्यक्षता में पहली बार वीडियो काफ्रेंस से आयोजित हुई बैठक में बताया गया कि कोरोना से बचाव के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में एक लाख रुपए की धनराशि दे दी गई है। साथ ही अवतार सिंह रावत, यूके उनियाल, बीसी पांडे, डीके शर्मा, विजय भट्ट, परेश त्रिपाठी, बीएस अधिकारी, केपी उपाध्याय, विकास बहुगुणा, पुष्पा जोशी, अध्यक्ष पूरन बिष्ट, महासचिव जयवर्धन कांडपाल व राजेश जोशी आदि अधिवक्ताओं के सहयोग से 143 जूनियर अधिवक्ताओं की मदद के लिए पांच-पांच हजार रुपए जमा करवाए गये हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 13 अप्रैल 2020। उत्तराखंड हाईकोर्ट में 15 अप्रैल से विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये आवश्यक मामलों की सुनवाई होने को देखते हुए राज्य के महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने प्रदेश के स्टैंडिंग काउंसिल व स्टेट लॉ ऑफिसर्स व महाधिवक्ता कार्यालय के कर्मचारियों को आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए हैं। श्री बाबुलकर द्वारा जारी निर्देशों में स्टैंडिंग काउंसिलिंग व स्टेट लॉ ऑफिसर्स से हाईकोर्ट में जरूरी मुकदमों की सुनवाई विडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होने पर लगातार महाधिवक्ता कार्यालय के सम्पर्क में रहने को कहा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी सरकारी अधिवक्ता को बुलाया जा सके। साथ ही उन्होंने महाधिवक्ता कार्यालय के प्रमुख वाद अधीक्षक व एक अन्य कार्मिक से रोस्टरवार कार्यालय आने को कहा है। उन्होंने इन कार्मिकों से कार्यालय आने-जाने में कोरोना विषाणु से बचाव के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करने को भी कहा है।

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-उत्तराखंड शासन से गजट नोटिफिकेशन होने के बाद अध्यक्ष पद पर सुरेंद्र पुंडीर एवं उपाध्यक्ष पद पर राजबीर सिंह बिष्ट के निर्वाचन

त्तराखंड बार काउंसिल के अध्यक्ष सुरेंद्र पुंडीर एवं उपाध्यक्ष राजबीर सिंह बिष्ट।

नवीन समाचार, नैनीताल, 19 फरवरी 2020। उत्तराखंड बार काउंसिल के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद के लिए गत वर्ष 25 जून को आयोजित हुए चंुनाव में अध्यक्ष पद पर सुरेंद्र पुंडीर एवं उपाध्यक्ष पद पर राजबीर सिंह बिष्ट के निर्वाचन का गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद बुधवार को 5 वर्षों के बाद उत्तराखंड बार काउंसिल का विधिवत गठन हो गया है। आगे शीघ्र ही आम सभा आहूत करने की बात कही गयी है। 9 मई 2015 से उत्तराखंड बार काउंसिल उत्तराखंड उच्च न्यायालय के महाधिवक्ता की पदेन अध्यक्षता में चल रहा था।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2009 के बाद यानी 10 वर्ष के बाद 6 मई 2019 को बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पद के चुनाव हुए थे। चुनाव में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य पद पर डीके शर्मा ने बड़े अंतर से एक तरफा जीत हासिल की थी, जबकि अध्यक्ष पद पर सुरेंद्र पुंडीर को 11 एवं दूसरे प्रत्याशी सुखपाल सिंह को 10 वोट मिलने की घोषणा हुई थी। इनके अलावा एक मत निरस्त एवं एक विवादित घोषित किया गया था। विवादित मत को अपने पक्ष में बताकर और दोनों प्रत्याशियों के बीच चुनाव को ‘टाई’ बताकर परिणामों को सुखपाल सिंह के द्वारा चुनौती दी गयी थी। इस प्रकार चुनाव के विवाद में आने पर मामला विवाद के निपटारे के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया में भेजा गया था। इस पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ‘इलेक्शन ट्रिब्यूनल नंबर-3’ के निर्देशों पर 25 जून 2019 को हुए चुनाव में अध्यक्ष पद पर पुंडीर को बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड की 21 सदस्यीय कार्यकारिणी सदस्यों के 12 मत प्राप्त हुए हैं जबकि दूसरे प्रत्याशी सुखपाल सिंह को 9 मतों से संतोष करना पड़ा था। इसके बाद पुनः परिणामों को अनुमोदन के लिए निर्वाचन अधिकारी -उत्तराखंड उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बीसी कांडपाल ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को अपनी रिपोर्ट के साथ भेजा था। बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ‘इलेक्शन ट्रिब्यूनल नंबर-3’ के चेयरमैन-कर्नाटक उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश एसके मुखर्जी, गुजरात उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश आरडी ब्यास व पटना उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश मृदुला शर्मा ने गत 17 जनवरी 2020 को इस पर निर्णय लेकर उत्तराखंड बार काउंसिल को गजट नोटिफिकेशन जारी करने के निर्देश दिये थे। इस पर न्याय विभाग द्वारा 13 फरवरी को जारी नोटिफिकेशन बुधवार को उत्तराखंड बार काउंसिल पहुंचने के बाद उत्तराखंड बार काउंसिल का गठन हो गया है।

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सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एस रवींद्र भाट से सम्मान प्राप्त करते हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पूरन बिष्ट।

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 दिसंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पूरन सिंह बिष्ट को देश में न्यायिक पेशे के विकास एवं बार में उच्च स्तर बनाने, उत्कृष्ट न्यायिक कार्यों, तथा देश के उच्च न्यायालयों के बार संघों के सबसे युवा अध्यक्ष के रूप में देश के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एस रवींद्र भाट के हाथों सम्मानित किया गया है। श्री बिष्ट को यह सम्मान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती तथा बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया के 60 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अधिवक्ता दिवस 3 दिसंबर को नई दिल्ली में आयोजित वृहद संगोष्ठी में प्रदान किया गया।

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हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में बार के अध्यक्ष श्री बिष्ट को यह सम्मान मिलने पर हर्ष का माहोल है। उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता डीके शर्मा, बार के महासचिव जयवर्धन कांडपाल, भुवनेश जोशी, चेतन जोशी, चंद्रमौलि साह, भुवन रावत, विपिन मोहन पिंगल, राजेश जोशी, उमेश बेलवाल, जगदीश बिष्ट, जानकी सूर्या, गीता परिहार, आलोक मेहरा, एसएस चौधरी, आलोक मेहरा, डीके बनकोटी, हिरेंद्र रावल, दिनेश बिष्ट व विकास पांडे सहित अनेक अधिवक्ताओं ने उन्हें इस इस उपलब्धि पर बधाई दी है।

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अब अपनी बार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सकते हैं सदस्य,
नवीन समाचार, नैनीताल, 7 दिसंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने काशीपुर बार एशोसिएशन को आदेश दिए हैं कि वह बार के सदस्य अमरीश कुमार अग्रवाल की सदस्यता को तत्काल प्रभाव से बहाल करें। साथ मे न्यायालय ने यह भी आदेश पारित किया है कि कोई भी सदस्य अपनी बार के खिलाफ मामला दायर कर सकता है। उल्लेखनीय है कि पहले बार के सदस्य अपने बार के खिलाफ मामला दायर करने का अधिकार नही था।

मामले के अनुसार काशीपुर बार एशोसिएशन के निष्काशित सदस्य अमरीश कुमार अग्रवाल ने मुख्य न्यायधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में विशेष अपील दायर कर कहा है कि वे काशीपुर बार एशोसिएशन के सदस्य थे परंतु बार ने बिना किसी कारण के उनकी सदस्यता निरस्त कर दी है। बार की ओर से उन पर बार एशोसिएशन की मयादाओं से बाहर जाकर कार्य करने का आरोप लगाकर उनकी सदस्यता निरस्त कर दी। याची ने अपनी सदस्यता को निरस्त करने सम्बन्धी आदेश को पहले एकलपीठ मे चुनौती दी थी। एकलपीठ ने यह आदेश देकर उनकी याचिका को निरस्त कर दिया था कि वे अपनी बार के खिलाफ मुकदमा दायर नही कर सकते हैं। कोर्ट ने उनकी सदस्यता को बहाल करते हुए यह भी आदेश पारित किया कि कोई भी सदस्य अपनी बार के खिलाफ मामला दायर कर सकता है।

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‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
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