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महानायक अमिताभ ने ‘कला की नगरी’ से सीखा था अभिनय का ककहरा

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-यहीं जीता था जीवन का पहला अभिनय के लिए  कैंडिल कप
-अभिनय के साथ ही बॉक्सिंग और फुटबॉल के भी अच्छे खिलाड़ी रहे, यहां श्रमदान भी किया
-पिता से सीखा, ‘मन का हो तो अच्छा, ना हो तो और भी अच्छा’
नवीन जोशी, नैनीताल। सदी के महानायक कहे जाने वाले बिग बी यानी अमिताभ बच्चन मंगलवार को अपना 75वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस दिन की खुशी उनके दिल के हमेशा करीब रही कला व थियेटर की नगरी भी कहे जाने वाले नैनीताल और यहां के शेरवुड कॉलेज में एक दिन पहले हर ओर नजर आ रही है। यही वह नगर है जहां से अमिताभ ने अभिनय का ककहरा सीखा, और अभिनय के लिये प्रतिष्ठित कैंडिल कप जीतकर भविष्य के संकेत भी दिये। यही नहीं अमिताभ यहां अभिनय के साथ ही बॉक्सिंग और फुटबाल के भी अच्छे खिलाड़ी रहे। खास बात यह भी थी कि खेल व अभिनय के दौरान भी साथ-साथ उन्हांने यहां जीवन के कुछ ऐसे फलसफे भी सीखे, जिन्हें आज भी वे कई मौकों पर इस नगर के शेरवुड कॉलेज का नाम लेकर उल्लेख करते हैं।

इस तरह नैनीताल से सीखा अभिनय का ककहरा

बताते हैं कि 1956 में अमिताभ जब शेरवुड कॉलेज में आए थे, तब उनका सपना अभिनय की दुनिया में जाने का नहीं, बल्कि अच्छी नौकरी करने भर का था। उनकी अभिनय के प्रति रुचि शेरवुड कॉलेज में आकर ही बढ़ी। इस दौरान इंग्लैंड में पैदा हुई अदाकारा ‘जेनीफर केंडल’ (Jennifer Kendall) का थिएटर ग्रुप ‘पृथ्वी’ हर वर्ष गर्मियों में शेरवुड कॉलेज आकर कॉलेज के ‘मिलमैन हॉल’ में नाटक करना सिखाता था। इसी थिएटर ग्रुप से प्रेरित होकर बालक अमिताभ ने अभिनय सीखना प्रारंभ किया। यहीं से अमिताभ की अभिनय कला इस तरह उभर कर आई कि शेरवुड में 1958 तक बिताए तीन सालों के दौरान हुए तीन वार्षिकोत्सवों में से दो बार उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ अभिनेता’ का ‘केंडल कप’ (Kendall Cup) पुरस्कार में मिला, और तीसरे वर्ष ‘मीजल्स’ यानी ‘छोटी माता’ होने के कारण उन्हें प्रधानाचार्य लू ने अभिनय करने से रोक दिया था। इसकी अलग कहानी है। 2008 में कॉलेज में बातचीत में खुद अमिताभ ने इस बात को माना कि केंडल के थिएटर ग्रुप से प्रेरित होकर ही वे अभिनय की दुनिया में आए थे, और यहीं से उन्होंने अभिनय का ककहरा सीखा था।

उनके जन्मदिन की पूर्व संध्या पर शेरवुड कॉलेज के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू ने उनके बारे में कई शेरवुड कॉलेज के दौर के अनेक उल्लेखनीय व अनुकरणीय वाकये सुनाये, और अमिताभ को शेरवुड कॉलेज के ताज का अनमोल कोहिनूर हीरा बताया। बताया कि अमिताभ शेरवुड के रोबिनहुड होस्टल में रहे। उन्होंने यहां 1956 में निकोलोई गोगोल के नाटक द गर्वर्नमेंट इंस्पेक्टर नाटक में मुख्य भूमिका निभाकर कॉलेज का प्रतिष्ठित ‘कैंडल कप’ जीता था। अगले वर्ष भी वह इस पुरस्कार के प्रमुख दावेदार थे। किंतु ठीक नाटक के मंचन के दौरान उन्हें ‘छोटी माता’ की बीमारी हो गयी, और वे कॉलेज के अस्पताल में भर्ती थे। यहीं उनके पिता प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन उनसे मिलने पहुंचे। वे रो रहे थे। पिता ने उन्हें ढांढस बधाते हुए कहा, ‘जो मन का हो तो अच्छा, और जो न हो तो और भी अच्छा’। पिता के इस संदेश को अमिताभ हमेशा जीवन मंत्र की तरह साथ लिये रहे। वे कॉलेज के बॉक्सिंग रिंग में बॉक्सिंग भी किया करते थे। अपने एक साक्षात्कार में अमिताभ ने खुलासा किया कि शेरवुड की बॉक्सिंग रिंग में उन्होंने सीखा कि बाहर चाहे आपके जितने मित्र व चाहने वाले हों, पर रिंग के भीतर आप हमेशा अकेले होते हैं, और वहां आपकों अपनी ताकत से ही लड़ना होता है।उनके जन्म दिन की पूर्व संध्या पर कॉलेज के 11वीं कक्षा के छात्र अपूर्व गौरव बिक्रम शाह ने अमिताभ के लिये स्वरचित अंग्रेजी कविता भी पेश की।

डंडे खाए और बनवाया स्विमिंग पूल…

नैनीताल। श्री संधू ने बताया कि अमिताभ शेरवुड कॉलेज में आम बच्चों की तरह अक्सर बाल सुलभ शैतानियां भी किया करते थे। उन्हें तैराकी का भी शौक था, पर शेरवुड में तब स्विमिंग पूल नहीं था। इसलिए एक दिन वे तीन अन्य साथियों के साथ भागकर तैराकी करने के लिये नैनीताल राजभवन के स्विमिंग पूल चले गए। लौटने पर चारों को बेंत खाने के लिये अलग से बने कमरे-‘केनिंग रूम’ में चार-चार बेंतों की सजा मिली। अलबत्ता कॉलेज के प्रधानाचार्य ने इसी घटना के बाद कॉलेज में स्विमिंग पूल बनाने का भी निर्णय लिया। चट्टानों को डायनामाइट से ब्लास्ट करके स्विमिंग पूल का निर्माण शुरू किया गया। तब 11वीं कक्षा के छात्र रहे अमिताभ ने भी साथियों के साथ श्रमदान करके यहां से पत्थरों को उठाकर दूर खाई में फेंका था। 2008 में 50 वर्ष बाद शेरवुड कॉलेज आने पर भी शेरवुड कॉलेज को केनिंग रूम की यादें ताजा थीं। उन्होंने खास तौर पर इस रूप में जाने की इच्छा जताई और वहां गए भी।

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अमिताभ को भागकर फिल्म देखने से रोका, और सीख भी दी थी दुर्गा दत्त ने

नैनीताल। 70 के दशक में फिल्में देखने के शौकीन बालक अमिताभ को शेरवुड कालेज के एक कर्मचारी ने रात्रि नौ से 12 का शो देखने के लिये भागने के दौरान रंगे हाथों पकड़ लिया था, तब अमिताभ उस शख्स को देखकर साथियों से फुसफुसाये थे, ‘लू’ज चैप’ यानी विद्यालय के प्रधानाचार्य रैवरन लेवलिन का चपरासी! और मुंह को दुशाले से ढक लिया। सहसा दुर्गा दत्त पांडे नाम का वह शख्स उन पर झपटा और चीखा, ‘गो अप’। अमिताभ मिन्नतें करने लगे, आज जाने दो। उसने कहा, अभी साहब को बताता हूं। अमिताभ डर गये, वह जानते थे, प्रिंसिपल रैवरन लेवलिन जिन्हें बच्चे शैतानी में ‘लू’ कहा करते थे, खुद कालेज के गेट पर पहरेदारी करते हैं। वह जरूर पूछेंगे और पकड़े जाएंगे। दुर्गा दत्त ने तसल्ली दी, साहब से नहीं कहूंगा, जब जाना हो पूछ के जाया करो। अमिताभ साथियों सहित वापस लौट आये। स्कूल गेट पर पहुंचे तो सचमुच प्रिंसिपल लेवलिन गेट पर मौजूद थे। दुर्गा ने उन्हें अम्तुल्स की ओर से भीतर प्रवेश करा दिया। सदी के महानायक अमिताभ के लिए वह दिन हमेशा अविस्मरणीय रहा, जब एक शक्श ने उन्हें न केवल फिल्म देखने से रोका था, वरन अनुशाशन का पाठ भी पढ़ाया था। तभी तो विगत वर्ष 2008 में जब अमिताभ अपना स्कूल शेरवुड छोड़ने के 50 वर्ष पूर्ण होने के मौके पर नैनीताल आये तो जीवन के नौवें दशक में पहुंचे बूढ़े ‘लू’ज चैप’ को न केवल आसानी से पहचान लिया वरन गले भी लगा लिया। उन्होंने अपने ब्लॉग पर भी एक बार लिखा था, शेरवुड में मिली अनुशासन की सीख ने ही उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

शेरवुड में पढ़ी नामचीन हस्तियां

फील्ड मार्शल एसएचएफजे मानेकशॉ, परमवीरचक्र शहीद मेजर सोमनाथ शर्मा, पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल वीएन शर्मा, एनके किदवई पर्व राज्यपाल विहार, न्यायमूर्ति रवि धवन पूर्व मुख्य न्यायाधीश हाईकोर्ट पटना, पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर, राजस्थान के मुख्य सचिव इंद्रजीत खन्ना। सिने कलाकार अमिताभ बच्चन, कबीर वेदी, दिलीप ताहिल, राम कपूर व विवेक मुशरान।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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