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महाभारत की अन्जानी कहानी : दुर्योधन की पत्नी भानुमती ने किया था अर्जुन से विवाह !

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डॉ. नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 2 मई 2022। जी, हां, दुर्योधन की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी भानुमती ने अर्जुन से विवाह किया था। ऐसा कई कथाओं में कहा जाता है। इसके पीछे कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध में कौरव कुल का नाश हो जाने के बाद नवसृजन के लिए भानुमती ने अर्जुन से विवाह किया था। यह पहली बार नहीं था, जब किसी महिला ने अपने देवर से विवाह किया हो। इससे पूर्व त्रेता युग में रावण की पत्नी मंदोदरी ने भी रावण की मृत्यु हो जाने के बाद रावण के भाई विभीषण से विवाह किया था। कहा जाता है कि राम-रावण के युद्ध में भी रावण के सभी 100 पुत्रों की मृत्यु हो गई थी।

वहीं द्वापर युग में भी महर्षि वेद व्यास ने भीष्म द्वारा विवाह न करने की प्रतिज्ञा लेने एवं अपने अन्य भाइयों चित्रांगद की युद्ध में एवं विचित्रवीर्य की पुत्र उत्पन्न होने से पूर्व ही मृत्यु हो जाने के कारण उनकी पत्नियां-अंबिका व अंबालिका से ‘नियोग’ कर धृतराष्ट्र एवं पांडु को उत्पन्न किया था। बाद में वेदव्यास ने ही धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी का गर्भ 101 हिस्सों में चूर-चूर हो जाने के कारण उससे 100 कौरव पुत्र व एक पुत्री दुःशला को जन्म दिया था।

अलबत्ता यह साफ नहीं है कि अर्जुन ने भानुमती से विवाह किया था, या नियोग। क्योंकि तब नियोग की एक व्यवस्था थी जिसके तहत कोई स्त्री अपने पति से पुत्र न होने या उसकी मृत्यु हो जाने की स्थिति में पवित्र मन से किसी पुरुष से नियोग यानी केवल पुत्र उत्पन्न करने के लिए केवल एक बार संभोग करती थी। ‘नियोग’ के बारे में और अधिक पढ़ सकते हैं। इसलिए हो सकता है कि भानुमती का एकमात्र पुत्र लक्ष्मण चूंकि महाभारत के युद्ध में अभिमन्यु के हाथों मारा जा चुका था, इसलिए उसने दुर्योधन का वंश आगे बढ़ाने को अर्जुन से नियोग किया हो।

नाटक ‘उरुभंगम’ में दुर्योधन की मृत्यु के समक्ष उसका पुत्र दुर्जय

गौरतलब है कि दुर्योधन की पत्नी भानुमती के नाम से ही ‘कहां का ईट-कहां को रोड़ा, भानुमती ने कुनबा जोड़ा’ नाम की एक कहावत कही जाती है। शायद इसलिए कि उसने अर्जुन से विवाह किया था। और शायद इसलिए भी दुर्योधन से स्वयंवर में उसका वरण, जबर्दस्ती उसके हाथों से अपने गले में वरमाला डलवाकर की थी। महाभारत युद्ध के बाद में उसकी एकमात्र बची लक्ष्मणा का विवाह भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र शाम्ब ने जबर्दस्ती उसका अपहरण किया था।

हालांकि महाकवि भास द्वारा महाभारत पर आधारित लिखित नाटक ‘उरुभंगम’ के अनुसार दुर्योधन की दो और पत्नियां मालवी व पौरवी भी थीं। इनमें से मालवी का दुर्जय नाम का एक पुत्र भी था। नाटक के एक महत्वपूर्ण दृश्य में दुर्योधन अपनी टूटी हुई उरु यानी जंघा पर दुर्जय को न बैठा पाने पर दुःख जताता है, और उसे दुर्योधन की मृत्यु के बाद हस्तिनापुर का अगला राजा बनाने की बात होती है। इसका अर्थ यह है कि दुर्योधन का एक पुत्र दुर्जय महाभारत के युद्ध के बाद भी जीवित रहा था। आज के अन्य ताजा ‘नवीन समाचार’ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

नवीन समाचार
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