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इटली के ‘ऑर्डर ऑफ स्टार अवार्ड’ से सम्मानित होंगे नैनीताल के अनुपम

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-भारत में कला एवं संस्कृति के संरक्षण के साथ ही देश-विदेश में तकनीक के आदान-प्रदान के लिये कला संरक्षकों को मिलेगी अमेरिकी भारतीय फेलोशिप

नवीन जोशी, नैनीताल। नैनीताल की कला एवं संस्कृति तथा प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए समर्पित संस्था हिमालयन सोसायटी फॉर हेरिटेज एंड आर्ट कंजरवेशन (हिमसा) के प्रमुख अनुपम साह को अगले माह इटली में वहां के राष्ट्रपति सर्जियो मटरेल्ला के हाथों प्रतिष्ठित ‘ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ इटली’ अवार्ड प्रदान किया जाएगा।जानकारी के अनुसार 2011 तक ‘ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ इटेलियन सोलिडेरिटी’ अवार्ड कहा जाने वाला यह पुरस्कार इससे पूर्व केवल एक भारतीय, मशहूर शेफ एवं रेस्टोरेंटों की श्रृंखला की मालिक रितु डालमिया को वर्ष 2011 में प्राप्त हुआ था। इस प्रकार अनुपम यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले दूसरे भारतीय होंगे।  

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आर्डर ऑफ़ स्टार ऑफ़ इटली अवार्ड

अनुपम साह
अनुपम साह

एक भेंट में साह ने बताया कि उन्हें यह सम्मान कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में वर्षो कार्य करने एवं उत्कृष्टता हासिल करने के साथ ही देश-विदेश में इस तकनीक के आदान-प्रदान तथा कला व संस्कृतियों के संरक्षण के साथ ही सामाजिक-आर्थिक व नगरीय विकास जैसे अन्य क्षेत्रों में भी कार्य करने के लिए घोषित किया गया है। उल्लेखनीय है कि जनपद के रानीबाग निवासी साह ने कला एवं संस्कृतियों के संरक्षण की विकास यात्रा रानीबाग के ही शीतला माता मंदिर से की। उन्होंने यहां सीमेंट-कंक्रीट से नये आधुनिक स्वरूप में बदले गये मंदिर को चूने एवं उड़द की दाल के परंपरागत लेप से दीवारों को चिनकर तथा मूर्तियों को भी उनके प्राचीन स्वरूप में लौटाने से शुरुआत की। वहीं 2002 में एनडीए सरकार के दौरान तत्कालीन केंद्रीय पर्यटन मंत्री जगमोहन के दौर में उन्होंने उड़ीसा के पुरी जिले के लोककला शिल्पियों के अपनी कला को खो रहे एक गांव-रघुराजपुर को ऐसे अपने पुराने स्वरूप में लौटाया कि इसे ‘‘हेरिटेज विलेज’ घोषित किया गया और केंद्र सरकार ने इसकी तरह ही देश के सभी राज्यों में दो-दो मिलाकर कुल 60 गांवों को विकसित करने की ‘रूरल टूरिज्म’ योजना शुरू की।इसके अलावा वह उड़ीसा के भुवनेश्वर व अरुणाचल प्रदेश के चीन के सीमावर्ती 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित तवांग स्थित बौद्ध मंदिर-गोम्फा के परंपरागत पूजा संबंधी हस्तशिल्प को संरक्षित करने के कायरे में तथा यहां नैनीताल की ठंडी सड़क एवं अग्निकांड से बर्बाद हुए ऐतिहासिक जिला कलक्ट्रेट भवन को उसके प्राचीन परंपरागत स्वरूप में लौटाने में भी अपना योगदान दे चुके हैं। इसके अलावा वे विश्व धरोहर स्थल एलोरा एवं हंफी की दो हजार वर्ष पुरानी मूर्तियों व भित्ति चित्रों के संरक्षण के लिए भी प्रस्ताव तैयार कर चुके हैं।

40 कला संरक्षकों को मिलेगी अमेरिकी भारतीय फेलोशिप

नैनीताल। भारत सरकार तथा अमेरिका की एंडूमैलन फाउंडेशन के द्वारा अगले पांच वर्षो तक हर वर्ष कला एवं संस्कृति संरक्षण में कार्यरत आठ भारतीयों को फेलोशिप प्रदान करेगी। फाउंडेशन से जुड़े अनुपम साह ने बताया कि फेलोशिप के तहत चयनित कला प्रेमियों को अमेरिका, बेल्जियम एवं नीदरलैंड में कला के संरक्षण का अनुभव प्रदान करने का अवसर मिलेगा।

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नवीन समाचार

मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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