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उत्तराखंड चमोली आपदा : अब तक 51 शव मिले, अभी भी 153 लापता..

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नवीन समाचार, चमोली, 15 फरवरी 2021। चमोली त्रासदी में खोज एवं बचाव कार्य 9वें दिन भी जारी रहा। सोमवार की सुबह भी 8 शव टनल से बरामद हुए हैं। वहीं पिछले 24 घंटों में 13 शव बरामद हो चुके हैं। आज टनल से 2 शव मिले, अब तक कुल 53 शव बरामद हुए हैंं। बीती रात्रि को लगभग 1.30 एक शव तथा आज सुबह 6.55 पर 1 अन्य शव तपोवन टनल से बरामद हुआ। अब तक टनल से 8 शव बरामद किए गए है। 151 लोग अभी लापता हैl

इससे पहले रविवार दोपहर तक रेस्क्यू टीम ने तपोवन टनल से पांच,  रैणी से छह और रुद्रप्रयाग नदी के तट से एक यानि कुल 20 शव  बरामद किया है। उल्लेखनीय है कि तपोवन आपदा में कुल 206 लोग लापता हुए है। जिसमें से 2 लोग घर मे सुरक्षित मिले। अब तक 51 शव बरामद किए गए। इनमें से 25 लोगों की शिनाख्त हो चुकी है। रविवार को 13 शव मिले, जबकि 153 लोग अभी भी लापता है। बचाव दल आपदा क्षेत्र में लगातार रेस्क्यू चला रहा है।

इससे पहले रविवार सुबह तड़के मुख्य सुरंग के किनारे से एक के बाद एक तीन शव बरामद किए गए। इसके साथ लगने लगा कि अब बचाव दल मंजिल के करीब हैं। आगे जल्द ही कुछ और अच्छी-बुरी खबरें लगातार आ सकती हैं। अपडेट जानने को इस लिंक को लगातार अपडेट करते रहें।


उत्तराखंड पुलिस, एसडीआरएफ से मिली जानकारी के अनुसार, टनल में 130 मीटर अंदर जाने के बाद तीन शव बरामद हुए हैं। बताया जा रहा है कि दोनों व्यक्ति इलेक्ट्रिशियन का काम करते थे। इस तरह अब तक उत्तराखंड पुलिस, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवान 204 लापता लोगों में से करीब 41 शव व अन्य मानव अंग बरामद कर चुके हैं, वहीं 165 लोगों की तलाश अभी भी जारी है। चमोली की डीएम स्वाति भदोरिया ने जानकारी देते हुए बताया कि तपोवन में खोज और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है।

यह भी पढ़ें : 1 और शव बरामद, 167 लोगों की तलाश जारी, उधर एक झील बनने से हड़कंप..

नवीन समाचार, देहरादून, 12 फरवरी 2021। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार सांय 6:30 बजे तक बचाव दल ने 204 लापता में से 38 शव बरामद किए हैं। जिसमें से 13 शवों की शिनाख्त की गई है।

लोगों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।

नियमानुसार 72 घंटे बाद बाकी शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

वहीं ऋषिगंगा के मुहाने पर झील बनने से एक बार फिर क्षेत्र में बाढ़ के हालात पैदा हो सकते हैं। शासन ने वाडिया, टीएचडीसी, एनटीपीसी और आईआईआरएस को जांच करने का आदेश दिया है।


भारतीय वायु सेना का चिनूक की मदद से आपदा क्षेत्र में भारी सामान लाने मे मददगार साबित हो रहा है। रेस्क्यू टीम और साजो सामान के साथ आज चिनूक चौथी बार जोशीमठ हेलिपेड पर लैंड हुआ। चिनुक हेली से ड्रिल उपकरण और मशीनें लायी गईं।

यह भी पढ़ें : आपदाग्रस्त धौलीगंगा में फिर पानी बढ़ा, रोकना पड़ गया रेस्क्यू अभियान, फिर हुआ शुरू..

नवीन समाचार, गोपेश्वर, 11 फरवरी 2021। उत्तराखंड के चमोली जनपद अंतर्गत तपोवन में धौली गंगा नदी जल स्तर और प्रवाह में अचानक वृद्धि होने के कारण गुरुवार को दोपहर बाद सुरंग में बचाव और तलाशी अभियान अस्थायी रूप से स्थगित करना पड़ गया है।

अलबत्ता, ऋषि गंगा नदी का जल स्तर बढ़ने के बाद एक बार फिर से बचाव दल ने रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया गया है।

इससे पूर्व राज्यपाल बेबी रानी मौर्य और विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने आज चमोली जिले के आपदाग्रस्त क्षेत्र तपोवन का दौरा किया। राज्यपाल ने घटनास्थल का जायजा लिया और तपोवन टनल के अंदर फंसे लोगों के सकुशल बाहर आने की कामना की। विधानसभा अध्यक्ष ने आपदा प्रभावित लोगों से मुलाकात की और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया। साथ ही आपदा में मारे गए लोगों के परिवारों से मिलकर उन्हें ढाँढस बंधाया। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन युद्ध स्तर पर जारी है। 

वहीं राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार दोपहर साढ़े 12 बजे तक बचाव दल ने 204 लापता लोगों में से 35 लोगों के शव बरामद कर लिए हैं, इनमें से 10 शवों की शिनाख्त ही हो पाई है।

उधर एसडीआरएफ के द्वारा श्रीनगर जलभराव क्षेत्र में सोनार सिस्टम से सर्चिंग की जा रही है। चमोली के रैणी से लेकर श्रीनगर तक सर्चिंग कार्य किया जा रहा है, SDRF, उत्तराखंड पुलिस की 8 टीमें सर्चिंग कार्य कर ही है। ड्रोन ओर मोटरवोट के जरिए भी सर्चिंग की जा रही है साथ ही SDRF डॉग स्क्वार्ड टीम भी मौके पर है। अलकनन्दा नदी के तटों पर बायनाकुलर से भी खोजबीन जारी है। श्रीनगर जलभराव क्षेत्र में सोनार सिस्टम द्वारा भी सर्चिंग की जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ऋषिगंगा मे दोपहर में पानी बढ़ने से तपोवन मे फिलहाल खोज बचाव अभियान बंद किया गया। अब तक 500 मीटर तक टनल को खाली कराया जा रहा है। पुलिस कंट्रोल रूम द्वारा अपराह्न 2 बजकर 19 मिनट पर जारी किये अलर्ट के अनुसार नदी का जल स्तर बढ़ रहा है। पुलिस अधीक्षक चमोली यशवंत सिंह चौहान ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सावधान रहने की हिदायत दी है। उन्होंने कहा कि घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है सिर्फ सर्तकता बनाये रखें। बताया गया है कि जहां बचाव अभियान चल रहा है, वहां पानी के स्तर में वृद्धि के कारण ऑपरेशन अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। जेसीबी मशीन, उपकरण और बचाव दल सुरंग से बाहर आ गए हैं। उधर, एनटीपीसी के परियोजना निदेशक उज्ज्वल भट्टाचार्य का कहना है कि रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान हमने महसूस किया कि वहां पानी आ रहा है। अगर हम ऑपेरेशन जारी रखते तो चट्टानें अस्थिर होतीं, जो परेशानी का सबब बन सकता था। इसलिए हमने ड्रिलिंग ऑपरेशन को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया है।

यह भी पढ़ें : अंतरराष्ट्रीय भूवैज्ञानिकों व ग्लेशियोलॉजिस्ट्स ने बताया कुछ और ही कारण…

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 10 फरवरी 2021। आपदा से पहले और बाद के उपग्रह चित्रों का अध्ययन करने वाले अंतरराष्ट्रीय भूवैज्ञानिकों एवं ग्लेशियोलॉजिस्ट्स यानी हिमनद विज्ञानियों का कहना है कि उत्तराखंड के चमोली में प्राकृतिक आपदा का कारण भूस्खलन है न कि हिमस्खलन!

आपदा से संबंधित वर्तमान स्थिति :

विज्ञानियों का मानना है कि ग्लेशियर का एक हिस्सा पहाड़ से नीचे गिरने से भूस्खलन की शुरुआत हुई जो बाद में बाढ़ का कारण बनी। रविवार को उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर के फटने की घटना से जुड़ी मध्यम दृश्यता वाली सैटेलाइट तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय हैं।

उत्तराखंड में ग्लेशियर फटने की घटना के जुड़ी सैटेलाइट तस्वीरों पर अध्ययन करने वालों ने कारणों पर जो राय रखी है वह सोशल मीडिया पर यूजर्स का ध्यान आकृष्ट कर रही है।

प्लानेट लैब्स की तस्वीरें –

इस ओर उच्च ऊंचाई वाले हिमनदों और भूगर्भिक वातावरण के अध्ययन में एक्सपर्ट कैलगरी विश्वविद्यालय के डॉक्टर डी. शुगर (Dr Dan Shugar) ने सैटेलाइट इमेजेस के अध्ययन से ध्यान आकृष्ट कराया है।

उन्होंने प्लानेट लैब्स (Planet Labs) की आपदा के पहले और बाद की उपग्रह छवियों (satellite images) की स्टडी के आधार पर अपनी राय रखी है।

सैटेलाइट चित्रों की स्टडी के बाद उनकी राय है कि भूस्खलन (landslide) के कारण अलकनंदा और धौलीगंगा नदियों में प्रलयकारी बाढ़ आई। उन्होने सैटेलाइट चित्रों में मौजूद धूल की मौजूदगी पर भी ध्यान खींचा है।

पूर्व कयास –

पहले की रिपोर्ट्स में कहा गया था कि प्रलयकारी बाढ़ हिमनद झील के फूटने से पैदा हुई बाढ़ का परिणाम है। यह तब होता है जब हिमनद बर्फ से प्राकृतिक झील निर्मित होती है। हालांकि उपलब्ध उपग्रह छवियों (Satellite Images) में बाढ़ की घटना से पहले हिमनदी झील की उपस्थिति के संकेत नहीं मिले हैं।

लटकता टुकड़ा –

इस तर्क के अलावा ग्लेशियोलॉजिस्ट्स और भूवैज्ञानिकों ने दरार पैदा करने में सक्षम ग्लेशियर के एक छोटे से लटकते टुकड़े की भी पहचान की है।

अध्ययन कर रहे एक्सपर्ट्स ने संभावना जताई है कि इस टुकड़े ने दरार पैदा की जिससे भूस्खलन हुआ। इसके बाद भूस्खलन से हिमस्खलन निर्मित हुआ जो प्रलयकारी बाढ़ का कारण बना।

सैटेलाइट तस्वीरों (Satellite Images ) में रविवार को उत्तराखंड (Uttarakhand/ UK) के चमोली में ग्लेशियर फटने (glacier burst) की घटना के पहले की स्थिति पर विश्लेषकों ने अपनी राय रखी है।

आपको बता दें, हिमस्खलन (Avalanche/एवलॉन्च) में 30 लोगों के मारे जाने और 170 से अधिक लोगों के लापता होने की सूचना है।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कोपरनिकस (Copernicus Sentinel 2) के सेंटिनल 2 उपग्रह की छवियों ने नंदादेवी ग्लेशियर में दरार के गठन या शुरुआत को दिखाया है। इन छवियों से माना जा रहा है कि इससे भूस्खलन शुरू हुआ।

क्या संभावना है?

संभावना जताई जा रही है कि, त्रिशूली में नंदादेवी ग्लेशियर का एक खड़ा हिस्सा टूट गया। इसे चट्टान की ढलान का अलगाव (rock slope detachment) भी कहा जाता है।

रिपोर्ट्स में उल्लेख है कि चट्टान के इस अलगाव ने संभावित रूप से लगभग दो लाख वर्ग मीटर बर्फ को 2 किलोमीटर तक लंबवत गिरा दिया। इसके गिरने से भूस्खलन हुआ, जिससे घाटी का फर्श प्रभावित हुआ और तुरंत कांच की तरह बिखर गया।

सैटेलाइट चित्रों के हवाले से इस बात को बल दिया गया है कि इससे उत्पन्न चट्टान और बर्फ का मलबा हिमस्खलन के रूप में नीचे की ओर सरकता नजर आया। इस बात की पुष्टि सैटेलाइट इमेज में नजर आ रहे धूल के निशान से हुई है।

प्रचंड गर्मी –

राय यह भी दी गई है कि ऐसे तीव्र प्रवाह में मलबे में शामिल चट्टानों के सरकने से प्रचंड गर्मी पैदा हो सकती है। इस गर्मी से बर्फ पिघल सकती है। फिर बर्फ के पिघलने से गंदी झीलों आदि से पानी का प्रवाह हो सकता है।

एक सिद्धांत यह भी –

न्यूज वेबसाइट द प्रिंट (theprint) पर नॉर्थम्ब्रिया विश्वविद्यालय (Northumbria University) के व्याख्याता मैट वेस्टोबी (Matt Westoby) के हवाले से जानकारी दी गई है कि; वहां अधिक आइस कोर्ड मोराइन हो सकते हैं अथवा तलछट से ढंकी हुई बर्फ होगी। साथ ही स्थिर हिमनद बर्फ नीचे की ओर जाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

इस सिद्धांत के मुताबिक लगभग 3.5 किमी तक फैली बर्फ की ये बड़ी मात्रा भूस्खलन और हिमस्खलन से उत्पन्न होने वाली गर्मी के कारण और पिघल जाएगी, जिससे नदियों में पानी का भारी मात्रा में प्रवाह होगा। भूस्खलन विशेषज्ञों ने भी इस सिद्धांत की पुष्टि की है।

सेती नदी का हवाला –

शेफील्ड विश्वविद्यालय के डेव पेटली के अनुसार, यह घटना नेपाल में साल 2012 में सेती नदी (Seti river) में आई बाढ़ की ही तरह है, जो (बाढ़) चट्टानों में आई गड़बड़ी के कारण सक्रिय हुई थी।

आईआईटी-रुड़की में सहायक प्रोफेसर सौरभ विजय ने सैटेलाइट चित्रों के आधार पर पिछले सप्ताह बड़ी मात्रा में ताजे गिरे बर्फ की पहचान की, जो हिमस्खलन और पानी की मात्रा बढ़ाने का कारक है।

ग्लेशियर का आकार-प्रकार –

ग्लेशियर के स्थान छोड़ने, यानी पिघलने के कारण उसके आकार में कमी आ जाती है। ऐसा होने से यह पिघले हुए मीठे पानी में मिट्टी और रेत के साथ-साथ चट्टानों, बोल्डर और बजरी के रूप में तलछट छोड़ देता है।

इन निक्षेपों से अक्सर प्राकृतिक बांध बन जाते हैं जिन्हें मोराइन (moraine- ग्लेशियर द्वारा बहा कर लाया हुआ मलबा) कहा जाता है, जिसमें पिघली बर्फ का पानी बड़ी मात्रा में होता है।

आपदा के पहले और बाद की तस्वीरें –

प्लानेट लैब्स (Planet Labs) के सैटेलाइट विजन से उत्तराखंड के जोशीमठ (Joshimath) के पास प्राकृतिक आपदा के पहले और बाद की तस्वीरें प्राप्त हुई हैं। हासिल चित्र उस स्थान से संबंधित हैं जहां से पहाड़ों से ढहकर आया बर्फ और मलबा धौलीगंगा नदी घाटी में गिरा जो कि अलकनंदा नदी में मिलती है।

एक्सपर्ट्स ने 6 और 7 फरवरी को इस इलाके में आए बदलावों के बारे में सैटेलाइट चित्रों के आधार पर अपनी राय रखी हैं। इन दो दिनों की तस्वीरों में इलाके में आए प्राकृतिक बदलावों के संकेतों को स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है।

प्रकृति की ताकत –

ये प्राकृतिक बांध या हिमनद झीलें अति प्रवाहित (over flow) या छिद्रित हो सकती हैं/टूट सकती हैं, जिसके कारण बाढ़ का पानी नीचे की ओर बह सकता है।

पानी के अत्यधिक दबाव के कारण हिमस्खलन से मोराइन में टूटन पैदा होती है। इससे भूकंप अथवा नैचुरल मोराइन के पतन का खतरा पैदा होता है। इसके अलावा वनों की कटाई और प्रदूषण से पड़ने वाले स्थानीय जलवायु पर प्रभाव भी आपदाओं के कारण हो सकते हैं।

यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि उत्तराखंड में आई आपदा का मूल कारण क्या है। हालांकि उपग्रह के नए चित्रों, सर्वेक्षण डेटा और आगामी जांच से अगले कुछ दिनों में अधिक जानकारी मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है।

यह भी पढ़ें : अब तक 206 लापता लोगों में से 32 लोगों के शव व सात मानव अंग बरामद

नवीन समाचार, देहरादून, 09 फरवरी 2021। चमोली जिले के रैणी तपोवन क्षेत्र में गत रविवार को आई प्राकृतिक आपदा में लापता व्यक्तियों का राहत, बचाव और खोज अभियान लगातार जारी है। आपदा के तीसरे दिन आज मंगलवार को 9 अन्य लापता लोगों के शव नदी किनारे अलग अलग स्थानो से बरामद किए गए हैं। अभी तक 206 लापता लोगो में से कुल 32 लापता लोगों के शव बरामद हो चुके हैं , इसके अलावा 7 से 9 मानव अंग भी रेस्क्यू टीम को बरामद हुए है। मंगलवार को जिला प्रशासन ने नीति वैली के 126 फंसे हुए लोगों को हैलीकॉप्टर से रेस्क्यू कर उनके गंतव्य तक पहुचाया। मंगलवार को रैणी क्षेत्र से 4, नंदप्रयाग के डिडोली व सैकोट के टैटूणा के पास एक एक शव बरामद हुए हैं। इनमें से आठ लोगों की शिनाख्त हो गई है, जबकि 197 लोग अभी भी गुमशुदा हैं।

जनपद केेे जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने आपदा वाले दिन से ही जोशीमठ में जिला प्रशासन के साथ डेरा जमा रखा है। जिसके तहत आपदा पीड़ितों की हर संभव मदद की जा रही है। घटनास्थल पर डीएम की मौजूदगी से बचाव कार्य काफी तेजी से हो रहा है। वह जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक यशवंत सिंह चौहान भी अपने अधीनस्थों के साथ मौके पर डटे हैं। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के साथ उत्तराखंड पुलिस के जवान बचाव कार्य में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं । जनपद के दो वरिष्ठ अधिकारियों के मौके पर रहने से बचाव कार्य में तेजी आ रही है। रैणी, तपोवन, जोशीमठ रतूड़ा, गौचर, कर्णप्रयाग ,रुद्रप्रयाग, श्रीनगर डेम जलभराव क्षेत्र, सहित अलकनन्दा नदी तटों पर अनेक स्थानों में सर्चिंग दस्ते शवों की तलाश कर रहे है। वहीं जोशीमठ से रुद्रप्रयाग एवं रुद्रप्रयाग से श्रीनगर क्षेत्र में डीप डाइविंग टीम सर्चिंग कर रही है। श्रीनगर क्षेत्र में राफ्ट एवम मोटरबोट की सहायता से सर्चिंग की जा रही है। दूसरी ओर टनल में रास्ता बनाया जा रहा है। जहां पर रात दिन रेस्कयू कर सुरंग से मलवा हटा कर रास्ता बनाने का प्रयास किया जा रहा है। यहां पर टनल मे 35 से 40 लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। वही क्षेत्र मे इधर-उधर फंसे लोगो को हैलीकॉप्टर को उनके गतंव्य तक भेजा जा रहा है। मंगलवार को जिला प्रशासन ने नीति वैली के 126 फंसे हुए लोगों को हैलीकॉप्टर से रेस्कयू किया हैं।

यह भी पढ़ें : मृतक संख्या 28 पहुंची, 25 बचाये, अब भी 197 गायब

नवीन समाचार, देहरादून. 09 फरवरी 2021। उत्तराखंड के चमोली जिले की ऋषिगंगा घाटी में रविवार को अचानक आई विकराल बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र में बचाव और राहत अभियान में सोमवार को तेजी आ गई। वही राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र द्वारा आज सुबह 8 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार लापता लोगों की संख्या बढ़कर 206 हो गयी है। तथा अब तक कुल 28 लोगों के शव बरामद किये जा चुके हैं। 180 लोग अभी भी लापता हैं। 25 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है। मंगलवार को भी दो लोगों के शव बरामद किए गए हैं।

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड त्रासदी कोष में 11 करोड़ रूपये की राशि का सहयोग देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार देवभूमि उत्तराखंड के लिए हर सम्भव सहायता प्रदान करेगी। बाढ़ से रैणी गांव के निकट नीति घाटी को जोडने वाला सड़क पुल बह गया है, जिससे घाटी व 13 गांवो का संपर्क टूट गया है। BRO के इंजीनियर ए.एस राठौड़ ने बताया कि जल्द ही बीआरओ के द्वारा वैकल्पिक मार्ग बना लिया जाएगा।

ऋषिगंगा घाटी के रैंणी क्षेत्र में ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदियों में आई बाढ से क्षतिग्रस्त 13.2 मेगावाट ऋषिगंगा और 480 मेगावाट की निर्माणाधीन तपोवन विष्णुगाड़ पनबिजली परियोजनाओं में लापता लोगों की तलाश के लिए सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के जवानों के बचाव और राहत अभियान में जुट जाने से उसमें तेजी आ गई है। उत्तराखंड राज्य आपदा परिचालन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, आपदा में 171 लोगों के लापता होने की सूचना है जबकि अभी तक 26 शव बरामद हो चुके हैं।
अधिकारियों ने बताया कि लापता लोगों में पनबिजली परियोजनाओं में कार्यरत लोगों के अलावा आसपास के गांवों के स्थानीय लोग भी है जिनके घर बाढ़ के पानी में बह गए। केंद्रीय उर्जा मंत्री आरके सिंह ने भी प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया और बताया कि एनटीपीसी की निर्माणाधीन 480 मेगावाट तपोवन विष्णुगाड़ परियोजना को अनुमानित 1,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
उन्होंने बताया कि एनटीपीसी को परियोजना में मरने वालों के परिजनों को 20—20 लाख रुपये मुआवजा देने को भी कहा गया है ताकि वह इस त्रासदी से उबर सकें। आपदा प्रभावित क्षेत्र तपोवन क्षेत्र में बिजली परियोजना की छोटी सुरंग से 12 लोगों को रविवार को ही बाहर निकाल लिया गया था जबकि 250 मीटर लंबी दूसरी सुरंग में फंसे 35 लोगों को बाहर निकालने के लिए अभियान जारी है। बचाव और राहत अभियान में बुलडोजर, जेसीबी आदि भारी मशीनों के अलावा रस्सियों और स्निफर कुत्तों का भी उपयोग किया जा रहा है। हालांकि, सुरंग के घुमावदार होने के कारण उसमें से मलबा निकालने तथा अंदर तक पहुंचने में मुश्किलें आ रही हैं। रविवार को मुख्यमंत्री रावत ने आपदा प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया था और सोमवार को वह फिर बचाव और राहत कार्यों का जायजा लेने के लिए तपोवन पहुंचे। तपोवन के लिए रवाना होने से पहले सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री रावत ने कहा, ‘मैं प्रभावित क्षेत्रों में जा रहा हूं और रात्रि प्रवास वहीं करूंगा।’ उन्होंने कहा कि क्षेत्र में राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहे हैं और सरकार इसमें कोई भी कसर नहीं छोड़ रही है। उन्होंने इस हादसे को विकास के खिलाफ दुष्प्रचार का कारण नहीं बनाने का भी लोगों से अनुरोध किया। रावत ने कहा कि पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार कल से ही इस क्षेत्र में कैम्प किये हुए हैं जबकि गढ़वाल आयुक्त और पुलिस उपमहानिरीक्षक गढ़वाल को भी सोमवार से वहीं कैंप करने के निर्देश दिये गये हैं।
इसी बीच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री डा रमेश पोखरियाल निशंक, गढवाल सांसद तीरथ सिंह रावत आदि ने भी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। संपर्क से कट गए 13 गांवों में हैलीकॉटर की मदद से राशन, दवाइयां तथा अन्य राहत सामग्री पहुंचाई जा रही हैं। राहत और बचाव कार्यों के लिए राज्य आपदा प्रतिवादन बल मद से 20 करोड़ रुपये तत्काल जारी कर दिए गए हैं। मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने बताया कि सरकार की मंशा लापता लोगों के परिजनों को भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की है जिसकी जल्द ही प्रक्रिया तय की जाएगी।

यह भी पढ़ें : अब तक 12 शव बरामद, खोज-बचाव अभियान जारी

नवीन समाचार, जोशीमठ, 8 फरवरी 2021। उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने की घटना में अब तक 12 शव बरामद हो गए है। इस आपदा में तपोवन-रैणी क्षेत्र में स्थित ऊर्जा परियोजना में काम करने वाले करीब 100-150 कर्मी के लापता हैं। ग्लेशियर टूटने के चलते अलकनंदा और धौली गंगा उफान पर हैं। ऋषिगंगा प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे लोगों को निकालने का अभियान रविवार देर रात नदी का जल स्तर बढ़ने के कारण रोकना पड़ा। इधर देश के बहादुर जवान रात भर के बचाव कार्य के पश्चात सुरंग के मुहाने तक पहुँच गए हैं। बचाव कार्य पूरे जोरों से चल रहा है। बचाव दलों ने अब तक 12 शवों को भी बरामद किया है। इस करीब ढाई सौ मीटर सुरंग में अब भी 30 से अधिक लोगों के फंसे होने की संभावना थी।

सेना के 100, आईटीबीपी के 315, एनडीआरएफ के 250 जवानों को भी राहत और बचाव कार्य में लगाया गया। इधर, गाजियाबाद से भी एनडीआरएफ के 100 जवान, एयरफोर्स के विशेष विमान से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंच गए हैं। जिन्हें सोमवार को चमोली रवाना किया जाएगा। जबकि एनडीआरएफ के साठ जवानों की एक टुकड़ी पहले ही सड़क मार्ग से चमोली रवाना हो चुकी है।

हादसे की वजह से ऋषिगंगा प्रोजेक्ट क्षतिग्रस्त हो गया है तथा रैणी गांव के पास बीआरओ का लगभग 90 मीटर लंबा पुल भी आपदा में बह गया। करीब ढाई सौ मीटर सुरंग में अब भी 30 से अधिक लोगों के फंसे होने की संभावना है। अब तक 25 लोगों का रेस्क्यू किया जा चुका है। इनमें तपोवन से 12 लोगों को बचाया गया है। वहीं रेणी से 13 लोगों का रेस्क्यू किया गया है। 250 मीटर लंबी सुरंग में बचाव कार्य अभी भी जारी है। हालात को देखते हुए सेना के 100, आईटीबीपी के 315, एनडीआरएफ के 250 जवानों को भी राहत और बचाव कार्य में लगाया गया। इधर, गाजियाबाद से भी एनडीआरएफ के 100 जवान, एयरफोर्स के विशेष विमान से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंच गए हैं, जिन्हें सोमवार को चमोली रवाना किया जाएगा। जबकि एनडीआरएफ के साठ जवानों की एक टुकड़ी पहले ही सड़क मार्ग से चमोली रवाना हो चुकी है। हादसे की वजह से रैणी गांव के पास बीआरओ का लगभग 90 मीटर लंबा पुल भी आपदा में बह गया।ऋषिगंगा पर स्थित यह पुल सीमावर्ती क्षेत्र मलारी को जोड़ता है, लेकिन इसके टूटने से फिलहाल यह क्षेत्र सड़क संपर्क मार्ग से अलग हो गया है। इसके अलावा चार अन्य झूला पुल भी बह गए। इसकी वजह से आसपास के गांवों का संपर्क भी टूट गया है। आपदा की वजह से ऋषिगंगा व धौलीगंगा के 17 गांवों का जिले से संपर्क पूरी तरह कट गया है। इनमें छह गांव ऐसे भी हैं जो सर्दियों में बर्फबारी के चलते माइग्रेट कर लेते हैं। फिलहाल 11 गांवों के ग्रामीणों के सामने मुसीबतें बढ़ गई हैं।
इस बीच खबर है कि ग्लेशियर टूटने के बाद तपोवन के पास एक झील बन गई है। अब इस झील का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में जिलाधिकारी (डीएम) ने एहतियातन टिहरी बांध से पानी छोड़ने का निर्देश दिया है। वहीं अभी भी बड़ी संख्या में कर्मचारी प्रोजेक्ट के टनलों में फंसे हुए हैं। ऋषिगंगा प्रोजेक्ट में एक जबकि एनटीपीसी प्रोजेक्ट की दो टनलें हैं। सीएम ने बताया कि बाढ़ से इन टनलों में लगभग 35 फीट तक गाद भर चुकी है। एनटीपीसी के एक टनल लगभग 250 मीटर लंबी है, जिसके लगभग 150 मीटर तक आईटीबीपी के जवान रोप वे बना कर प्रवेश कर चुके हैं, और देर शाम तक 12 लोगों को सकुशल निकाल चुके हैं। इनके अलावा ऋषिगंगा व एनटीपीसी प्रोजेक्ट में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी काम करते हैं। रविवार होने की वजह से ये अवकाश पर थे, जिससे जानमाल का नुकसान कम हुआ। सीएम त्रिवेंद्र ने बताया कि छह स्थानीय लोगों के भी लापता होने की खबर है। इनमें एक महिला भेड़-बकरियां चुगाने भी गई थी। साथ ही एनटीपीसी प्रोजेक्ट में सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात चार में से दो पुलिस कर्मचरियों का भी बाढ़ आने के बाद से कोई पता नहीं चल पाया है।

हताहतों व गायबों पर CM ने साफ की तस्वीर…

महिपाल गुसांई, नवीन समाचार, जोशीमठ, 07 फरवरी 2021। उत्तराखंड में फिर केदारनाथ जैसी जल प्रलय में करीब 175 लोग गायब हैं, जबकि अब तक 7 लोगों के शव बरामद किए गए हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देर शाम पत्रकार वार्ता में यह जानकारी दी।
देखें मुख्यमंत्री की पत्रकार वार्ता :

उल्लेखनीय है कि नंदा देवी पर्वत की तलहटी के पास सुबह करीब 10 बजकर 45 मिनट पर से गौरा देवी के गांव रैणी के निकट एक बांध में ग्लेशियर के फट गया, साथ ही ऋषि गंगा प्रोजेक्ट व तपोवन में निर्माणाधीन तपोवन-विष्णुगाड परियोजना में भारी तबाही हुई। इन बांधों से पानी का जबरदस्त रिसाव हुआ। इससे तपोवन क्षेत्र में भारी तबाही की आशंका जताई गई। इसके बाद पूरे अलकनंदा घाटी में हरिद्वार तक हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। सभी लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई।

प्रधानमंत्री-गृह मंत्री रखे हैं नजर, एयरलिफ्ट करके भेज रहे एनडीआरएफ की टीमें

प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री भी उत्तराखंड में आ रही आपदा को लेकर सतर्क हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बारे में ट्वीट करते हुए कहा है कि वह लगातार उत्तराखंड की स्थितियों पर नजर रखे हुए हैं। वहीं गृह मंत्री अमित साह ने दिल्ली से एनडीआरएफ को एयरलिफ्ट करके उत्तराखंड भेजने की बात कही है।

इधर राहत की खबर ये है कि नंदप्रयाग से आगे अलकनंदा नदी का बहाव सामान्य हो गया है। नदी का जलस्तर सामान्य से अब 1 मीटर ऊपर है लेकिन बहाव कम होता जा रहा है। राज्य के मुख्य सचिव, आपदा सचिव, पुलिस अधिकारी एवं मेरी समस्त टीम आपदा कंट्रोल रूम में स्थिति पर लगातार नज़र रख रही है।

प्रशासनिक संदेश में कहा गया है, ’तपोवन रैणी’ क्षेत्र में ग्लेशियर आने के कारण ’ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट’ को काफी क्षति पहुंची है, जिससे नदी का जल स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिस कारण अलकनंदा नदी किनारे रह रहे लोगों से अपील है जल्दी से जल्दी सुरक्षा की दृष्टि से सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। इससे धौलीगंगा, अलकनंदा व गंगा के तपोवन, जोशीमठ, हैलंग, पीपलकोटी, मायापुर, गडोरा, चमोली, मैठाना, नंदप्रयाग, लंगासू, सौनला, कर्णप्रयाग, गौचर, घोलतिर आदि तटीय क्षेत्रों में प्रशासन ने हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया है।

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उत्तराखंड में ग्लेशियर फटने से फिर केदारनाथ आपदा जैसी जल प्रलय

प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार सुबह चमोली जिले में ग्लेशियर फट गया। इसके बाद मलबे और पानी का तेज बहाव धौलीगंगा की ओर बढ़ा। नतीजतन रैणी से करीब 10 किमी दूर तपोवन में धौलीगंगा नदी पर निर्माणाधीन 520 मेगावाट की विद्युत परियोजना का बैराज भी टूट गया। साथ चमोली जिले के ही अंर्तगत ऋषिगंगा नदी पर रैणी गांव में ऋषिगंगा और फिर धौलीगंगा पर निर्माणाधीन 24 मेगावाट का ऋषिगंगा हाइड्रो प्रोजेक्ट का बांध भी टूट गया है। इससे गंगा और उसकी सहायक नदियों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। इसे देखते हुए राज्य में चमोली से लेकर हरिद्वार तक अलर्ट जारी कर दिया गया है। जब यह हादसा हुआ, तब दोनों प्रोजेक्ट पर काफी संख्या में मजदूर कार्य कर रहे थे। बड़ी संख्या में मजदूरों के बहने की भी सूचना है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत लगातार इस घटनाक्रम पर निगरानी रखे हुए हैं। वे कुछ ही देर में घटनास्थल के लिए रवाना हो रहे हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिद्धिम अग्रवाल के अनुसा सुबह पहाड़ से भारी मलबा, हिमखंड टूटकर आने से इन हाइड्रो प्रोजेक्ट के बैराज क्षतिग्रस्त हुए। उन्होंने बताया कि बाढ़ के खतरे को देखते हुए तपोवन से लेकर हरिद्वार तक के सभी जिलों में अलर्ट जारी करने के साथ ही गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे के रास्ते बंद कर दिए गए हैं। गंगा के किनारे के लगभग 100 कैंपों को खाली कराया जा रहा है। साथ ही बाढ़ के खतरे की जद में आ रही गंगा व उसकी सहायक नदियों के आसपास की बस्तियों को खाली करा दिया गया है। स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा रही है।

उधर, गढवाल मंडलायुक्त रविनाथ रमन के मुताबिक चमोली के डीएम और एसएसपी मौके के लिए रवाना हो गए हैं। इधर, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ट्वीट करते हुए लिखा है, चमोली जिले से एक आपदा का समाचार मिला है। जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और आपदा प्रबंधन को इस आपदा से निपटने की आदेश दे दिए हैं। किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। सरकार सभी जरूरी कदम उठा रही है।

हरिद्वार में मेला अधिकारी दीपक रावत और जिलाधिकारी सी रविशंकर ने अलर्ट जारी किया। नदी किनारे सभी क्षेत्रों में बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है। लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी गई है। जिलाधिकारी श्री रविशंकर ने गंगा किनारे सभी क्षेत्रों को खाली करने के और खाली कराने के निर्देश जारी किए हैं। डूब क्षेत्र में रहने वाले सभी लोगों को सुरक्षित इलाकों के स्कूल व अन्य सरकारी इमारतों में शिफ्ट किया जा रहा है। सभी गंगा घाटों को खाली करने के निर्देश दे दिए गए हैं। इसके अलावा नदी किनारे हो रहे सभी कार्यों को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। कार्य कर रहे, कर्मियों को जगह खाली करने के आदेश दिए गए हैं। हरिद्वार शहर को सुरक्षित रखने के लिए गंगा नहर को तत्काल प्रभाव से बंद करने के निर्देश उत्तराखंड सिंचाई विभाग और उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग को दिए गए हैं, स्थिति पर नजदीक नजर रखी जा रही है और सभी को अलर्ट कर दिया गया है। पूरी प्रशासनिक मशीनरी इस कार्य में लग गई है। स्नान करने आए लोगों को स्नान छोड़कर गंगा घाटों को खाली करने को कहा जा रहा है।

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नवीन समाचार
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