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चिंताजनक: मॉल रोड पर जिला, मंडल व प्रदेश के उच्चाधिकारियों की नाक के नीचे अतिक्रमण कर किया जा रहा अवैधधंधा

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मॉल रोड पर बोर्ड लगाकर चल रही साइकिलों की दुकानदारी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 मार्च 2021। पर्यटन नगरी में मॉल रोड पर भी अब भी अतिक्रमण होने लगा है। यहां माल रोड के बड़े हिस्से पर व्यवसायियों द्वारा लंबे समय से साइकिलें खड़ी कर अपना कारोबार किया जा रहा है, बल्कि अब तो सड़क पर ही स्थायी तौर पर बोर्ड लगाकर पूरी दुकान ही सजा दी गई है। नगर में मोटे पहियों वाली साइकिलों का चाव भी ऐसा बढ़ गया है कि इन्हें चलाने का किराया तो करीब 150 रुपए घंटे है ही इन पर क्षण भर बैठकर अपने मोबाइल से एक फोटो खींचने के भी 20 रुपए तक लिए जा रहे हैं। उल्लेखनीय बात यह भी है कि माल रोड जिले व मंडल के साथ प्रदेश के उच्चाधिकारियों का आम तौर पर आना-जाना लगा रहता है, किंतु लगता है कि इस अवैधधंधे पर किसी की नजर नहीं पड़ी है।

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नवीन समाचार, हल्द्वानी 10 जनवरी 2020। हल्द्वानी में रेलवे की भूमि पर अतिक्रमण हटाने का जिन्न एक बार फिर से बाहर आ गया है। भारतीय रेलवे ने 1581 घरों को तोड़ने का नोटिस जारी कर दिया है। इस हेतु 15 दिन के भीतर घरों को खाली करने के आदेश दे दिए हैं। इस हेतु रेलवे के अधिकारियों ने पुलिस और आरपीएफ की भारी सुरक्षा बलों के साथ गफूर बस्ती से 1581 घरों को चयनित कर 15 दिन के भीतर खाली करने का नोटिस चस्पा करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। रेलवे ने नोटिस में स्पष्ट लिखा है कि 15 दिन के अंदर घर खाली न करने पर अतिक्रमण को बलपूर्वक हटाया जाएगा। इससे क्षेत्र में एक बार पुनः हड़कंप मच गया है, और अतिक्रमण की जद में आ रहे लोग इस स्थिति से बचने के लिए पुनः जुगत लगाने में जुट गए हैं। इससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति भी है।शनिवार को नोटिस चस्पा करने से पहले रेलवे अफसरों की स्थानीय प्रशासन के अफसरों के साथ बैठक हुई।
इन लोगों ने रेलवे की इस कार्रवाई को मनमानी कार्रवाई बताया है। मौके पर जनप्रतिनिधियों का भी जमवाड़ा लगना शुरू हो गया है। पुलिस प्रशासन से भी वार्ता हो रही है। उल्लेखनीय है कि हल्द्वानी में रेलवे की भूमि पर लंबे समय से अतिक्रमण है जिसको लेकर कई बार रेलवे सीमांकन भी कर चुका है। रेलवे के रिकॉर्ड के अनुसार हल्द्वानी से लेकर गौजाजाली तक 38.89 हेक्टेयर जमीन पर लोंगो के कब्जा कर रखा है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर वर्ष 2007 और फिर 2019 में रेलवे ने अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही शुरू कर दी थी। इस पर स्थानीय लोग सुप्रीम कोर्ट चले गए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट ने रेलवे न्यायालय से लोंगो की आपत्तियों पर सुनवाई कर निस्तारित करने के लिए कहा। रेलवे न्यायालय ने नोटिस देकर लोगों को सुनवाई के लिए बुलाया, लेकिन अधिकांश लोग नहीं आये, जो लोग आए भी तो वह जमीन के मालिकाना हक के संबंधित दस्तावेज नहीं दिखा पाए। 4363 लोगों ने रेलवे बोर्ड में अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। इसके बाद रेलवे के राज्य संपदा विभाग ने 1581 लोंगो के खिलाफ नोटिस जारी कर दिया है।

यह भी पढ़ें : एक शताब्दी के बाद लोनिवि को आरटीआई से पता लगी अपनी 5 एकड़ जमीन

-नैनीताल-हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग से लगी है करोड़ों रुपए मूल्य की है जमीन
नवीन जोशी, नैनीताल। सूचना का अधिकार अधिनियम पुराने दबे इतिहास की परतें भी खोल रहा है। नैनीताल के सूचना अधिकार कार्यकर्ता अधिवक्ता पुनीत टंडन द्वारा मांगी गयी सूचनाओं से लोक निर्माण विभाग को करीब एक शताब्दी के बाद अपनी करीब 5 एकड़ जमीन के नक्शे प्राप्त हुए हैं। हल्द्वानी-नैनीताल राष्ट्रीय राजमार्ग से लगी स्प्रिंगडेज इस्टेट की यह जमीन करोड़ों रुपए मूल्य की बतायी जा रही है। जमीन की तस्दीक में इस इस पर एक बाहरी व्यक्ति द्वारा भवन निर्माण भी किया गया है, जिसे नोटिस दिया गया है। मामले का एक अन्य पहले यह भी है कि पिछले करीब 10 माह से मामले में सूचना अधिकार कार्यकर्ता द्वारा सूचना के अधिकार के तहत मांगी जा रही जानकारियों एवं मामले के समाधान पोर्टल के जरिये मुख्यमंत्री के दरबार तक पहुंचने के बावजूद कार्रवाई अपेक्षित तेजी से नहीं हो रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सूचना अधिकार कार्यकर्ता पुनीत टंडन करीब नवंबर 2018 से यह मामला उठा रहे हैं। आगे मामला समाधान पोर्टल एवं डीएम नैनीताल के स्तर से मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया। शुरू से इस बेशकीमती जमीन का स्वामी लोक निर्माण विभाग का प्रांतीय खंड अपने पास नक्शे ही न होने की बात करता रहा। बाद में नगर पालिका से 1918 व 1929 के स्प्रिंगडेल इस्टेट के नक्शों में तत्कालीन सार्वजनिक निर्माण विभाग एवं जूनियर हाईस्कूल की करीब 5 एकड़ भूमि प्रदर्शित की गयी है। यह भूमि वर्तमान जीआईसी को धर्मशाला की ओर से जाने वाले मार्ग से नीचे की ओर हल्द्वानी रोड तक बतायी गयी है। इधर जनवरी 2018 में टंडन द्वारा मांगी गयी जानकारी पर एसडीएम नैनीताल अभिषेक रुहेला ने लोनिवि, राजस्व एवं नगर पालिका के अधिकारियों की टीम बनाकर उन्हें जमीन की धरातल पर तस्दीक करने को कहा था। फरवरी 2018 में टंडन ने मामले की शिकायत समाधान पोर्टल के जरिये मुख्यमंत्री से भी की, और इस जमीन की धरातल पर तस्दीक कर जमीन की दाखिल-खारिज लोनिवि के प्रांतीय खंड के नाम करने को कहा। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले में 20 फरवरी 2018 को सचिव शहरी विकास को भेजकर शिकायत के अनुरूप कार्रवाई करने को कहा। इधर संयुक्त जांच टीम ने भूमि पर एक बाहरी व्यक्ति द्वारा किये गये निर्माण को चिन्हित किया है। इधर एक सप्ताह पूर्व भवन स्वामियों को लोनिवि की ओर से उनका पक्ष जानने के लिए नोटिस भी दे दिया गया है। लेकिन करीब 10 माह से मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने, अब तक जमीन के बारे में ठीक-ठीक चिन्हीकरण ही न हो पाने पर सूचना अधिकार कार्यकर्ता ने सवाल उठाये हैं। उन्होंने बताया कि कई बिल्डरों की भी इस बेशकीमती जमीन पर नजर है। वहीं एसडीएम अभिषेक रुहेला ने बताया कि मामला नगर पालिका के स्तर से लंबित है। सरकारी विभागों की जमीनों के नक्शे नगर पालिका के पास हैं। इधर नगर पालिका ने जो नक्शा उपलब्ध कराया है वह बंदोबस्ती तरह का नहीं है। इसलिए इसकी धरातल पर तस्दीक करने में दिक्कत आ रही है।

प्राधिकरण से नक्शा है पास, लोनिवि ने दी है अनापत्ति

नैनीताल। स्प्रिंगडेल इस्टेट की जिस भूमि की बात हो रही है, उस पर हाल ही में एक भवन निर्मित हुआ है। बताया जा रहा है कि यह मामला इस भवन के निर्माण के बाद ही भवन के मालिक एवं निर्माणकर्ता ठेकेदार के बीच हुए विवाद के बाद आगे बढ़ा। बताया गया है कि भवन निर्माण के लिए तत्कालीन बृहत्तर झील परिक्षेत्र विकास प्राधिकरण से भवन का नक्शा पास है, तथा इसके लिए लोनिवि ने भी अनापत्ति दी है। वहीं यह भी बताया जा रहा है कि वर्ष 2011 में इस जमीन से लगे जीजीआईसी की सड़क से ऊपर की ओर स्थित फेयरीहॉल विला क्षेत्र के कुछ निवासियों ने आपसी सहमति से घर बंटवारा करते हुए घर के सदस्यों को लोनिवि की यह जमीन दे दी थी।

पूर्व समाचार : नैनीताल में 5 एकड़ सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का बड़ा मामला खुला

    • लोनिवि की है जमीन, पर विभाग को पता ही नहीं, नक्शे भी लोनिवि नहीं नगर पालिका के पास हैं
  • पुष्टि हुई तो अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मचना तय

नवीन जोशी, नैनीताल। सरोवरनगरी में 5 एकड़ सरकारी भूमि पर अतिक्रमण होने का नया मामला प्रकाश में आया है। सूचना के अधिकार के तहत इस मामले का खुलाशा हुआ है। नगर के अधिवक्ता पुनीत टंडन को सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर के तल्लीताल धर्मशाला के पास के स्प्रिंगफील्ड कंपाउंड क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग की करीब 5 एकड़ भूमि पर लोगों का अवैध कब्जा है, तथा कई आवासीय भवन भी बने हैं। खास बात यह भी है कि लोक निर्माण विभाग को अपनी इस भूमि के बारे में कुछ भी खास जानकारी यहां तक कि इसके नक्शे भी उपलब्ध नहीं है। उल्लेखनीय है कि इस भूमि पर अंग्रेजी दौर में तत्कालीन सार्वजनिक निर्माण विभाग के गोदाम होते थे।

सूचना के अधिकार के तहत जानकारी दिये जाते समय यह मामला संज्ञान में आया है। इस पर एसडीएम के नेतृत्व में लोनिवि, राजस्व व नगर पालिका की टीम ने संबंक्षित क्षेत्र का संयुक्त निरीक्षण किया है। टीम में लोनिवि की ओर से अधिशासी अभियंता सीएस नेगी, नगर पालिका की ओर से अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा व राजस्व विभाग की ओर से तहसीलदार शामिल रहे। लोनिवि के अधिशासी अभियंता सीएस नेगी ने इस बारे में पूछे जाने पर बताया कि नेगी ने बताया कि नगर पालिका से इस भूमि के मूल रंगीन नक्शे लेने के लिए आवेदन किया गया है, साथ ही विभाग के संबंधित सहायक अभियंता से मामले की जांच तथा नक्शे के आधार पर लोनिवि की जमीन का चिन्हीकरण करने और इस पर अतिक्रमण होने की स्थिति में अतिक्रमणकारियों को नोटिस देने को कहा गया है। बताया गया है कि कुछ अतिक्रमणकारियों को नोटिस दे भी दिये गये हैं। आगे इस मामले में अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मचना तय है।

नवीन समाचार
‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
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2 Replies to “चिंताजनक: मॉल रोड पर जिला, मंडल व प्रदेश के उच्चाधिकारियों की नाक के नीचे अतिक्रमण कर किया जा रहा अवैधधंधा

  1. नमस्कार नवीन जोशी जी

    🙏 सादर प्रणाम

    मेरा नाम विश्व प्रताप गर्ग है और मेरे सहकर्मी देवेन्द्र परमार भगवान शिव के महायोगी स्वरूप भगवान गुरू गोरखनाथ के अनुयायी हैं और आपके पाठक वर्ग हैं।

    बात तो सही है नैनीताल एक पर्यटन नगरी है और इस प्रकार का अतिक्रमण नैनीताल की नैसर्गिक सुंदरता को कमतर तो करता ही है दुर्घटनाओं का अंदेशा और साइकिल माफिया का राज भी बेखौफ चलता है। पर्यटकों से बदतमीजी अलग से।

    आपका संदर्भ निस्संदेह प्रसंशनीय है जो आम जनता को सचेत किया हमेशा की तरह। और सोए हुए प्रशासन को जगाकर उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराया।

    बहरहाल अगर आप ऐसा लिखें ” उच्च अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहा अतिक्रमण का अवैध धंधा” उचित वाक्य है “गोरख-धंधा” शब्द अनुचित है।

    भगवान शिव महायोगी स्वरूप में भगवान “गुरू गोरखनाथ” होते हैं।भगवान “गुरू गोरखनाथ” जैसे पवित्र कल्यणकारी नाम को किसी घटिया धंधे से जोड़ने से लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है और शिव तो सदैव कल्याण ही करते हैं कोई धंधा नहीं।” गोरख-धंधा” शब्द अनुचित है और एक निम्न श्रेणी की उपहासात्मक अपमानजनक गरिमाहीन अभद्र संज्ञा है जो प्रयोग में नहीं होनी चाहिए कृप्या इस पहलू का भी संज्ञान लें ।

    अधिक जानकारी के लिए आप इन लिंक पर विजिट भी कर सकते हैं https://hindi.oneindia.com/news/india/an-introduction-on-lord-guru-gorakshnath-427761.html

    कुछ शब्द हैं जो आप प्रचुरता से प्रयोग कर सकते हैं जैसे अवैध धंधा /अनैतिक धंधा /भ्रष्टाचार /ठगधंधा /घपला /घोटाला /गडबडघोटाला /धांधली /मकड़जाल इत्यादि।

    एक पाठक के रूप में यही सुझाव है अगर इस शब्द को ठीक कर लें और आप अपनी रिपोर्टिंग टीम को भी इस संवेदनशील पहलू की ओर आगाह करें और एक विज्ञप्ति जारी कर भविष्य में भी प्रयोग से बचें तो आपकी ज्वलंत पत्रकारिता उम्दा ही प्रतीत होगी और पाठकगण भी एक जुडाव महसूस कर पाएंगे
    🙏

    अलख निरंजन!!

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