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आस्ट्रेलिया के दसवीं के बच्चे अपने खर्च पर पहुंचे भारत-नैनीताल

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  • सभी 12 बच्चे पढ़ाई के साथ ईंट उठाने, खाना बनाने और सुपर स्टोर में सामान बेचने जैसे करते हैं कार्य
  • अपने शिक्षक के साथ सप्ताह भर के लिए भ्रमण पर आए हैं भारत, ताजमहल के साथ हिमालय देखने का है चाव
  • नैनीताल आकर स्थानीय बच्चों के साथ बास्केटबॉल कोर्ट में बहाया पसीना
स्थानीय बच्चों के साथ बास्केटबॉल कोर्ट में बास्केटबॉल खेलते आस्ट्रेलियाई छात्र।

नवीन जोशी, नैनीताल। भारत में जहां काम को बड़ा व छोटा माना जाता है, और खासकर समर्थ माता-पिता कभी भी अपने बच्चों को पढ़ाई के दौरान काम नहीं कराते हैं, लेकिन आस्ट्रेलिया जैसे अन्य अंग्रेजी पश्चिमी देशों में ऐसा नहीं है। वहां अच्छे घरों के बच्चे भी पढ़ाई के साथ काम करते हैं, और अपनी पढ़ाई व जेब खर्च के साथ काफी धनराशि इकट्ठी भी कर लेते हैं। ऐसे ही 12 आस्ट्रेलियाई छात्रों का दल इन दिनों सप्ताह भर के भारत भ्रमण पर आया हुआ है। शुक्रवार को नैनीताल पहुंचे आस्ट्रेलिया के मेलबॉर्न शहर के ‘ब्रॉनस्विक सेकेंडरी कॉलेज’ के 12 छात्रों के दल ने अपने शिक्षक जेरोड वार्मिंगटन के साथ नगर से हिमालय पर्वत के नजारे लिये, और नगर के ऐतिहासिक फ्लैट्स मैदान स्थित बास्केटबॉल कोर्ट में स्थानीय सीआरएसटी इंटर कॉलेज के बच्चों के साथ बास्केटबॉल खेलकर पसीना बहाया।

राष्ट्रीय सहारा, राष्ट्रीय हिंदी दैनिक, 2 दिसम्बर 2017

इस मौके पर बात करते हुए शिक्षक वॉर्मिंगटन ने बताया कि सभी छात्र 10वीं कक्षा के छात्र हैं, और स्वयं के कमाये हुए पैंसे से यहां घूमने आये हैं। इस दौरान वे यहां पहाड़ों से हिमालय का दर्शन करेंगे, और आगरा में ताजमहल सहित देश के अन्य दर्शनीय स्थलों का भ्रमण भी करेंगे। वहीं दल में शामिल छात्र लुकास ने बताया कि वे कॉलेज में पढ़ाई के बाद ईंट ढोने का कार्य करते हैं। जबकि जेन एक रेस्टोरेंट में कार्य करते हैं। इसी तरह ऑगस एक बुकस्टोर में, फ्रांसिस सुपर मार्केट में खाना सर्व करने, मिथिस होटल में और मैक्स क्रिकेट के मैदान में शेफ यानी भोजन बनाने और ऐरिक निर्माण कार्य में मजदूरी करते हैं। शिक्षक वॉर्मिंगटन ने यह भी बताया कि उनके माता-पिता अच्छी आर्थिक स्थिति के हैं। वे आर्थिक विपन्नता या मजबूरी के कारण इन कार्यों को नहीं करते हैं, वरन वहां पढ़ाई के साथ बच्चों का काम करना आम बात है।

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नवीन समाचार

मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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