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माल रोड पर अधेड़ को आवारा कुत्तों ने बुरी तरह नौंचा, केवल सड़कों तक सीमित है आवारा कुत्तों को पकड़ने का अभियान

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रात्रि में आवारा कुत्तों ने अधेड़ को इस तरह नौंच डाला।

नवीन समाचार, नैनीताल, 3 अक्तूबर 2019। मुख्यालय में एक ओर डीएम के प्रयासों ने दूसरे चरण में चल रहे आवारा कुत्तों के बंध्याकरण के बीच आवारा कुत्तों के हिंसक होने का सिलसिला जारी है। इससे रात्रि में लोगों का कहीं बाहर आना-जाना मुश्किल हो रहा है, वहीं दिन में भी आवारा कुत्तों का खौफ बना हुआ है। बुधवार देर रात्रि एक अधेड़ को आवारा कुत्तों के झुण्ड ने जिला सूचना कार्यालय के पास पैर में जांघ के बार बुरी तरह से नौंच डाला। कुत्तों के काटने से अधेड़ के पैर से रक्त की धार बह पड़ी। स्थानीय लोगों ने मदद कर उसे बीडी पांडे जिला चिकित्सालय पहुंचाया। बताया गया है कि जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन छोटा सा शहर होने के बावजूद औसतन एक दर्जन रोगी कुत्तों के काटने के कारण उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।

सड़कों तक सीमित है आवारा कुत्तों को पकड़कर बंध्याकरण करने का अभियान

नैनीताल। डीएम सविन बंसल की पहल पर इन दिनों नगर में आवारा कुत्तों की धरपकड़ कर उनका बंध्याकरण किया जा रहा है, किंतु आवारा कुत्तों को पकड़ने का कार्य केवल पक्के रास्तों तक सीमित नजर आ रहा है। वहां भी सभी कुत्ते टीम की पकड़ में नहीं आपा रहे हैं। नगर पालिका के कार्यालय व बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के पास के आवागढ़, पॉपुलर कंपाउंड व चार्टन लॉज क्षेत्र में अभियान के सदस्य यूं तो कुछ कुत्तों को पकड़कर ले जा चुके हैं, बावजूद क्षेत्र में बिना बंध्याकरण वाले आवारा कुत्तों की बड़ी संख्या बनी हुई है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 17 सितंबर 2019। डीएम सविन बंसल की पहल पर जिला मुख्यालय को सड़कों पर घूमने वाले चिन्हित 28 में से 11 आवारा गौवंशीय पशुओं (7 बैल तथा 4 गाय) को मंगलवार सुबह अभियान चलाकर हल्दूचौड स्थित स्वामी नित्यानन्द पाद आश्रम (हरे कृष्णा हरे रामा) को भेज दिया गया। इससे इन मूक पशुओं को तो आश्रय मिला ही, नगर को इनकी वजह से होने वाली परेशानियों से मुक्ति मिल गई, वहीं एक दूसरी समस्या ने डीएम को चुनौती पेश कर दी है।
मंगलवार सुबह करीब 8 बजे ही, जब आवारा गौवंशीय पशुओं को हल्दूचौड़ भेजा जा रहा था, करीब उसी समय नगर के अपर मेविला कंपाउंड पर ओल्ड ग्रोव के पास रहने वाले 7 वर्षीय बच्चे निश्चय पुत्र संदीप पर आवार कुत्तों का झुंड झपट पड़ा। बताया गया है कि बच्चे पर झपटने वाले कुत्तों की संख्या 12 से 14 की थी। बच्चा बिरला रोड पर ओल्ड ग्रोव के पास से गुजर रहा था, तभी अकारण आवारा कुत्तों का झंुड उस पर झपट पड़ा, और उसके पैर का मांस नोंच लिया। उसे तुरंत बीडी पांडेय जिला चिकित्सालय लाया गया, जहां उसे 8 टांके लगाये गये।

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-आवारा कुत्तों के बध्याकरण के लिए 25 सितंबर से शुरू होगा अभियान
नवीन समाचार, नैनीताल, 6 अगस्त 2019। जनपद में आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जाएगा। डीएम सविन बंसल ने बताया कि आवारा कुत्तों को पकड़कर उनका बंध्याकरण करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसकी शुरुआत आगामी 25 सितंबर को नैनीताल नगर पालिका से होगी। डीएम सविन बंसल ने बताया कि आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए नगर पालिका परिषद नैनीताल, भवाली एवं भीमताल के 10 युवा कार्मिकों का दल बनाने एवं उन्हें प्रशिक्षित करने के निर्देश दिये गये हैं। साथ ही आवारा कुत्तों के बंध्याकरण की शल्य चिकित्सा एवं रैबीज टीकाकरण के लिए भी अभियान से पहले पर्याप्त मात्रा में जन-जागरूकता अभियान चलाने तथा उन्हें पकड़ने के लिए उपकरण खरीदने को भी कहा गया है। उल्लेखनीय है कि श्री बंसल ने इसी तरह का अभियान अल्मोड़ा जिले में भी वहां के डीएम रहते चलाया था।
श्री बंसल ने बताया कि एचएसआई तथा पशुपालन विभाग को संयुक्त रूप से आवारा कुत्तों के बधियाकरण के लिए कार्यक्रम एवं शिविरों का संचालन करने, बधियाकरण कार्यक्रम में एसओपी-एडब्लूबीआई के मानकों एवं एबीसी यानी पशुओं के जनसंख्या नियंत्रण के नियमों का अनुपालन करते हुए बधियाकरण कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए भी दिए हैं। बधियाकरण अभियान हेतु प्रति पशु 950 रूपये की दर निर्धारित की गयी है, जिसमें 429 रुपये राज्यांश से एवं 521 रुपये नगर पालिकाओं द्वारा वहन किया जाएगा। इसके अलावा पूर्व में एचएसआई द्वारा चलाए गये बध्याकरण अभियान के मूल्यांकन के लिए नगर के दो वार्डों में सर्वेक्षण कर कुत्तों के व्यवहार में आये बदलाव, बधियाकरण किये गये पशुओं का प्रतिशत, पशुओं की संख्या आदि मानकों की जॉच करने के निर्देश भी दिये गये हैं। साथ ही मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के पीएमएस से सप्ताह में आवारा कुत्तों द्वारा काटे गये मरीजों की संख्या व उनके नाम, पते एवं मोबाईल नम्बर की सूचना निर्धारित प्रारूप पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

यह भी पढ़ें : नैनीताल में एक माह में 256 लोगों को आवारा कुत्तों ने काटा, नगर में आवारा कुत्तों के झुंड वाले 16 स्थान चिन्हित

नैनीताल, 28 मई 2018। ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन के बीच जिला व मंडल मुख्यालय नैनीताल में आवारा कुत्तों का आतंक जारी है। सोमवार को जिला अस्पताल में सात लोग जबकि 28 अप्रैल से 27 मई के बीच एक माह में शहर के 256 लोगों को आवारा कुत्तों के द्वारा काटे जापे के बाद जिला अस्पताल में रैबीज के इंजेक्शन लगाये गये। इधर नगर पालिका क्षेत्र में कुत्तों के झुण्ड रहने के 16 स्थानों को चिन्हित किया गया है। अब यहां डीएम के आदेशों के बाद प्राथमिकता से कटखने कुत्तों का टीकाकरण व बधियाकरण किया जाएगा। इधर 2017 में ह्यूमन सोसायटी के माध्यम से नगर में 836 कुत्तों का बधियाकरण कराने का दावा किया गया है, वहीं नगर पालिका क्षेत्र में मात्र 30 पालतू कुत्तों का ही रजिस्ट्रेशन कुत्ता पालकों द्वारा कराया गया है, जबकि शहर के 30 फीसद लोगों के द्वारा कुत्ते पाले जाते हैं।

हाईकोर्ट के जजों के आवास भी आवारा कुत्तों से सुरक्षित नहीं, 9 वर्षीय बच्चे को नोंचा

-जिला अस्पताल में रैबीज के इंजेक्शन उपलब्ध नहीं, बाहर से मंगाये गये

नैनीताल। आवारा कुत्तों के आतंक से नगर का कोई भी क्षेत्र सुरक्षित नहीं। मंगलवार सुबह तो आवारा कुत्तों ने एक तरह से चुनौती देते हुए नगर के वीवीआईपी क्षेत्र माने जाने वाले ओकपार्क क्षेत्र में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के आवासों के पास सुबह सवा आठ बजे के करीब एक नौ वर्षीय बच्चे आयुष बिष्ट पर करीब 8-9 कुत्तों का झुंड झपट पड़ा। सुबह की सैर पर निकली एक महिला ने उसे बमुश्किल कुत्तों के चंगुल से बचाया। उसके बांये पैर में कुत्तों ने करीब तीन इंच तक गहरा व पांच इंच तक चौड़ा घाव कर दिया। उसे जिला अस्पताल लाया गया, जहां उसके पैर में एक दर्जन से अधिक टांके लगाने पड़े। वहीं अस्पताल में रैबीज का इंजेक्शन न दिये जाने पर लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर नाराजगी भी जताई।
उल्लेखनीय है कि गत दिवस आवारा कुत्तों ने नगर की सूखाताल झील में घास चर रही एक बकरी को जान से मार दिया था। इसके साथ ही जिला अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार यहां हर रोज करीब आधा दर्जन लोग कुत्तों के काटे जाने के बाद उपचार कराने पहुंच रहे हैं। बुधवार को भी अयारपाटा के एक अन्य बालक तथा स्नो व्यू क्षेत्र के एक पिता व बेटी सहित आधा दर्जन लोग आवारा कुत्तों के काटे जाने के बाद अस्पताल पहुंचे। चिकित्सकों के अनुसार अस्पताल में रैबीज के करीब 200 इंजेक्शन इसी माह आये हैं। लेकिन यह पीड़ितों को क्यों नहीं दिये जा रहे यह बड़ा सवाल है। बताया जा रहा है कि रैबीज के इंजेक्शन बाजार में भी आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। वहीं उपचार कराने में योगदान देने वाले नगर के समाजसेवी मनोज साह जगाती ने कहा कि यदि जिला अस्पताल मरीजों को रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध नहीं कराने का अपना रवैया नहीं बदलता है, तो मामले को उच्च स्तर पर उठाया जाएगा।

यह भी पढ़ें :सीजन से एक दिन पहले एक छोटी घटना ने दिए बड़े-खतरनाक संकेत

-आज से शुरू हो रहे ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन में सैलानियों की सुरक्षा पर सवाल, आवारा कुत्ते हुए खूंखार, बकरी को मार डाला, पिछले वर्ष राजस्थान की एक सैलानी बच्ची की कुत्तों के हमले से हुई थी मौत

सूखाताल झील में मरी बकरी (लाल घेरे में) को देखती बकरी पालक महिलाएं।

नैनीताल। सरोवरनगरी में जहां ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन के ऑपचारिक तौर पर एक दिन बाद ही यानी 15 मई से शुरू होने जा रहा है। वहीं सीजन शुरू होने के ठीक एक दिन पूर्व नगर के सूखाताल क्षेत्र में आवारा कुत्तों ने एक बकरी को नोंच-नोंच कर मार डाला। ऐसे में नगर में आवारा कुत्तों के बने हुए आतंक से सैलानियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गये हैं। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष गुजरात की एक सैलानी बालिका की नगर के तल्लीताल में कुत्तों के पीछे पड़ने के कारण मृत्यु हो गयी थी।
सोमवार सुबह करीब 11 बजे सूखाताल झील क्षेत्र में पास ही में रहने वाले एक व्यक्ति की बकरी हमेशा की तरह घास चर रही थी, तभी आवारा कुत्तों ने उस पर हमला बोल दिया, जिस कारण उसने दम तोड़ दिया। बात बकरी से संबंधित होने के कारण छोटी लग सकती है, परंतु यह इस लिहाज से भयावह है कि एक दिन बाद ही नगर में सीजन शुरू हो रहा है। इस तरह खूंखार हुए आवारा कुत्ते नगर वासियों को भी नहीं बख्श रहे। हर रोज जिला चिकित्सालय में करीब आधा से एक दर्जन लोग आवारा कुत्तों के काटे जाने का इलाज कराने पहुंच रहे हैं। सुबह के समय ‘राष्ट्रीय सहारा’ सहित कई समाचार पत्रों के हॉकरों को पिछले एक-दो दिन में आवारा कुत्ते काट चुके हैं। यह स्थिति तब है जबकि नगर पालिका लाखों रुपए से निर्मित एबीसी यानी एनीमल बर्थ कंट्रोल सेंटर में 80 फीसद कुत्तों का बंध्याकरण करने का दावा कर रही है, बावजूद कुत्तों के नये बच्चे होने का सिलसिला नहीं थमने के आरोप भी आम हैं।

बकरियों ने चर दिये नये पौधे
नैनीताल। उल्लेखनीय है कि सूखाताल झील नैनी झील की सर्वाधिक जल प्रदाता है। यहां जल संरक्षण के उद्देश्य से पिछले एक-दो वर्षों में वन सहित कई विभागों व स्वयं सेवी संस्थाओं के साथ ही निजी तौर पर कई लोगों ने सैकड़ों की संख्या में पेड़-पौधों का रोपण किया है। लेकिन इधर हाल में क्षेत्र में कई लोग झील को खाली घास का मैदान मान कर यहां बकरी पालन कर रहे हैं। इन बकरियों ने यहां लगाए गये लगभग सभी पौधे चर दिये हैं। सोमवार को जो बकरी मिली, वह भी इन्हीं बकरी पालकों की थी। लगाये गये पौधों के संरक्षण पर संबंधित संस्थाओं-विभागों को ध्यान देने की आवश्यकता है।

यह भी पढ़ें : नैनीताल में बन्दर, लंगूर, कुत्तों के हमले से तीसरी मौत

  • बीते जुलाई माह में इसी तरह की घटना में कुत्तों के भय से गिरकर राजस्थान निवासी पर्यटक बच्ची की और दो वर्ष पूर्व तल्लीताल में एक अन्य बच्चे की भी हो गयी थी मौत
  • विधायक संजीव आर्य व डीएफओ धर्म सिंह मीणा ने परिजनों को ढांढस बधाने के साथ दिया मदद का भरोसा
साक्षी की फाइल फोटो

नवीन जोशी, नैनीताल। जिला व कुमाऊँ मंडल के मुख्यालय, पर्यटन नगरी नैनीताल में लंगूर के हमले से एक बच्ची के सीढ़ियों से गिरने से मौत हो गयी। उल्लेखनीय है कि इसी तरह की एक अन्य घटना में बीते जुलाई माह में राजस्थान निवासी एक पर्यटक बच्ची की कुत्तों के भय से गिरकर और दो वर्ष पूर्व तल्लीताल में एक अन्य बच्चे की बन्दर के भय से छत से गिरकर मौत हो गई थी। घटना के बाद लोगों में स्थानीय प्रशासन के विरुद्ध बंदर-लंगूरों व आवारा कुत्तों का भय बरकरार रहने से गहरी नाराजगी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जल संस्थान कर्मी दीवान सिंह राणा की कक्षा पांच में पढ़ने वाली 12 वर्षीया पुत्री साक्षी दोपहर में स्कूल से घर आने के बाद घर की छत पर खेलने के लिए गई थी। बताया गया है कि इस दौरान एक लंगूर ने उसे धक्का दे दिया। उससे बचने की कोशिश में वह घबराकर छत की सीढ़ियों से नीचे गिर कर गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे तत्काल अपराह्न दो बजे के करीब बीडी पांडे जिला चिकित्सालय ले जाया गया। यहां प्राथमिक उपचार करने के बाद चिकित्सकों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे उच्च केंद्र के लिए रेफर कर दिया। इस दोरान हल्द्वानी ले जाते वक्त उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

घटना के बाद स्थानीय विधायक संजीव आर्य व प्रभागीय वनाधिकारी नैनीताल धर्म सिंह मीणा लंगूर के हमले के कारण जान गंवाने वाली बालिका साक्षी के घर पहुंचे, और उसके माता-पिता व परिजनों को ढांढस बधाने के साथ मदद का भरोसा दिया। विधायक ने कहा कि बच्ची की मौत की किसी भी तरह भरपाई नहीं की जा सकती है, परंतु फिर भी वे मुख्यमंत्री से मिलकर राहत कोष से अधिकाधिक मदद दिलाने का प्रयास करेंगे। वहीं डीएफओ मीणा ने भी वन्य जीवों की वजह से होने वाली मौत से संबंधित कोष से अधिकाधिक मदद दिलाने का भरोसा दिया।

यह भी पढ़ें : प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच कर भी नहीं हो पा रहा उत्तराखंड की इस समस्या का निदान !

उत्तराखंड में बंदरों के आतंक की समस्या पीएमओ पहुंची, प्रधानमंत्री मोदी से बंदरों से निजात दिलाने के लिये ‘नमो एप’ पर लगायी गुहार

रवीन्द्र देवलियाल, नैनीताल, 29 सितम्बर। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बंदरों व वन्य जीवों का आतंक एक बड़ी चुनौती बन गयी है। पहाड़ सी जिदंगी के आगे उत्तराखंड के लोग पहले ही पस्त थे लेकिन वन्य जीवों व बंदरों की इस समस्या ने जनता को झकझोर कर रख दिया है। वन्य जीवों के आतंक के चलते पहाड़ की कृषि तबाह हो गयी व हरे भरे रहने वाले खेत बंजर पड़ गये हैं। लोग बेकार व बेरोजगार हो गये हैं। इससे प्रदेश में तेजी से पलायन बढ़ रहा है। पहाड़ खाली हो रहे हैं।
इस पहाड़ सी समस्या का न तो प्रदेश सरकार व न ही वन विभाग के पास कोई समाधान दिखायी दे रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में चुनावों में अब विकास मुद्दा नहीं रहा बल्कि वन्य जीवों के आतंक से निजात दिलाने का मुद्दा पहले नम्बर पर रहा है लेकिन हासिल सिफर है। अब हार झक मार कर लोग इस समस्या से निजात दिलाने के लिये केन्द्र सरकार से गुहार लगा रहे हैं।
बंदरों की इसी समस्या से निजात दिलाने के लिये प्रदेश की गैर सरकारी संस्था देवभूमि जनसेवा समिति ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का दरवाजा खटखटाया है। संस्था के संचालक अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट ब्लॉक के देवलधार तोक निवासी किसान व सामाजिक कार्यकर्ता राजेन्द्र सिंह नेगी ने नमो एप पर प्रधानमंत्री को संबोधित एक शिकायत भेजी है। नमो एप पर नेगी की इस शिकायत को पंजीकृत भी कर लिया गया है। इस शिकायत का पंजीकरण संख्या पीएमओ/ई/2018/0453790 है।

नेगी ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में बंदरों के आतंक की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। पहाड़ की जनता बेरोजगार हो गयी है। बंदर खेती को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। कृषि व वानिकी पूरी तरह से तबाह हो गयी है। खेत बंजर हो गये हैं। बंदर फसल को होने से पहले ही तबाह कर दे रहे हैं। ऐसे में पहाड़ की पूरी आर्थिकी बिगड़ गयी है। लोगों की बाजार पर निर्भरता बढ़ गयी है।
प्रधानमंत्री को भेजी शिकायत में कहा गया है कि पहले पहाड़ों में किसान खेतीबाड़ी पर निर्भर रहता था।काश्तकार फल, साग-सब्जी के साथ साथ परंपरागत खेती करता रहता था लेकिन अब वन्य जीवों के चलते कुछ नहीं कर पा रहा है। शिकायत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस समस्या से निजात दिलाने की मांग की गयी है। साथ ही उल्लेख किया गया है कि काश्तकारों को इस समस्या के बदले किसी प्रकार का मुआवजा भी नहीं मिलता है। वन विभाग के सर्वे के अनुसार राज्य में बंदरों की आबादी 1.46 लाख व लंगूरों की संख्या 54800 है। बंदरों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है।

राजेंद्र नेगी ने बताया कि पीएमओ के शिकायत दर्ज करने के बाद प्रधानमंत्री के ट्विटर पर भी ट्वीट कर इस बड़ी समस्या को सामने रखा गया। 2015 से चल रही बंदरों के बधियाकरण की योजना प्रदेश में वर्ष 2015 में बंदर बधियाकरण योजना शुरू तो की गई, लेकिन इसकी रफ्तार इतनी धीमी हैं कि बंदरों की आबादी नियंत्रित नहीं हो पा रही। हरिद्वार के चिड़ियापुर में दो करोड़ की लागत से राज्य के पहले बधियाकरण सेंटर का निर्माण किया गया। जबकि हल्द्वानी के गौलापार में वन विभाग की भूमि पर तकरीबन चालीस हजार बंदरों को रखने की क्षमता वाला बंदरबाड़ा अभी तैयार होना है। इसके अलावा कुमाऊं में अल्मोड़ा, रानीबाग और नैनीताल जू में बंदरों का बधियाकरण किया जा रहा है, लेकिन स्टाफ की कमी और संसाधनों के अभाव में यह योजना परवान नहीं चढ़ पा रही।

वन प्रभागों में बंदरों संख्या :

प्रभाग=संख्या

तराई पूर्वी=9963

तराई पूर्वी=9963

अल्मोड़ा=9477

रामनगर=8400

नैनीताल=7500

तराई पश्चिम=7100

टिहरी=7020

कालसी=6900

रामनगर=6000

हल्द्वानी=5300

देहरादून=4900

राजाजी पार्क=4600

बंदरबाड़ा बनने के बाद काम में तेजी आएगी

वनाधिकारियों के अनुसार बंदरों के बधियाकरण के लिए नैनीताल जू में कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाता है। तराई-पूर्वी वन प्रभाग में भी कार्य किया जा रहा है। बंदरबाड़ा बनने के बाद इस काम में तेजी आएगी।

यह भी पढ़ें : वन विभाग ने आखिर ढूंढ लिया बंदरों की समस्या का इलाज, प्रमुख वन संरक्षक ने किया खुलासा

-अल्मोड़ा व रानीबाग में होगी बंदरों की नसबंदी, कुमाऊँ व गढ़वाल में बनाये जाएंगे 3-4 हजार की संख्या में रखने के दो बाड़े 
-वन रक्षकों के 1200 पदों पर शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया 
नैनीताल। प्रदेश में बंदरों की समस्या के समाधान के लिए चिड़ियापुर की तरह अल्मोड़ा व रानीबाग में बंध्याकरण केंद्र को जल्द शुरू किया जाएंगे। इस प्रकार वन विभाग अब तक केवल चिड़ियाघर में ही बंदरों पर चल पा रही कार्रवाई को विभाग तीन गुना बढ़ाएगा। इसके अलावा बंदरों को एक बार में 3-4 हजार की संख्या में रखने के दो बाड़े कुमाऊँ व गढ़वाल में बनाये जा रहे हैं। प्रदेश के प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसके अलावा आगामी वर्षाकाल में वनों में जल संरक्षण के भी कार्य किये जाएंगे।
कुमाऊं के दौरे पर आये प्रदेश के प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने शनिवार को नैनीताल चिड़ियाघर में एक भेंट में कहा कि वे 12-13 दिन के दौरे पर यहां आये हैं। प्रदेश में वनाग्नि की बड़ी समस्या इन दिनों मुंहबांये खड़ी है। विभाग आग बुझाने में पूरी ताकत लगाए हुए है। अल्मोड़ा में स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए जनता दरबार भी लगाया जा रहा है। वन रक्षकों की 1400 पद खाली हैं, इनमें से 1200 से अधिक पदों का विज्ञापन निकल चुका है, इससे अधिकांश पद भर जाएंगे। इस दौरान नैनीताल जू का निरीक्षण भी किया।

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