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आज़ाद के तीर में आज पढ़ें-गाड़ी वाला आया घर से कचरा निकाल, न आया तो कचरा कहां डाल ??

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अंक 153 : 

साहिबान,
डोर- टू – डोर कूड़ा निस्तारण योजना के तहत
गाड़ी वाला जहाँ -जहाँ आता है बस उन्हीं घरों से कचरा बाहर निकलेगा बाक़ी जिन क्षेत्रों में गाड़ी नहीं पहुंच पाती, उनका क्या होगा ये कोई नहीं बता पाया।

हमें ख़ुशी है हमारे शहर में डोर टू डोर कूड़ा निस्तारण का अभियान चलाया जा रहा है, यह सराहनीय प्रयास है, किन्तु वार्ड नंबर एक के जैसे कई वार्ड ऐसे हैं जिनकी स्थिति यह है कि संस्था के कर्मचारियों द्वारा कई -कई दिन तक कूड़ा उठाने की ज़ेहमत गवारा नहीं की जा रही। जनता इस उम्मीद पर खामोश है की व्यवस्था सुधरेगी, मगर, संस्था के इंचार्ज रोहित का कहना है कि संस्था के पास मैन पावर की कमी है, इस पर प्रश्न यह उठता है कि इसमें जनता का क्या दोष है ?आपने जब नगर पालिका के साथ टेंडर किया है और आप प्रत्येक घर से शुल्क भी वसूल रहे हैं या वसूलेंगे तो फिर व्यवस्था सुधारना भी आपकी ज़िम्मेदारी है। नतीजा यह है कि वार्ड नंबर एक जैसे अन्य क्षेत्रों की जनता जहाँ डोर-टू-डोर के कर्मचारी नियमित तौर से आ नहीं पाते, असहयोग की मुद्रा में आ रही है क्योंकि तीन माह का कार्यकाल कम नहीं होता, यदि ऐसा ही (महज़ चुनिंदा स्थानों पर गाड़ी में गाना बजाकर ढोल पीटना) होता रहा तो इस संस्था का बहिष्कार निश्चित है, जिसके लिए संबंधित विभाग खुद ज़िम्मेदार होगा।
इसलिये नगर पालिका अध्यक्ष महोदय से हमारा अनुरोध है कि उक्त संस्था को यथोचित संसाधन उपलब्ध कराने की कृपा करें जिससे उनका मिशन सफ़ल हो सके, अथवा आपकी पुरानी नीति ही कारगर है, जिसमें कम से कम नगरवासी घर में कूड़ा इकट्ठा किये इस आशा में तो नहीं बैठे रहते कि कोई आएगा, और कूड़ा उठाकर ले जाएगा, अपनी सुविधानुसार सब अपना – अपना कूड़ा डस्टबिन में डाल देते थे।

आज़ाद मंच®
नैनीताल से-आज़ाद

(और अगर आपके पास भी है कोई जनहित से जुड़ा मुद्दा तो हमें बता सकते हैं ,
समाज को एक नई उम्मीद देने के उद्देश्य से आप हमारे ग्रुप “आज़ाद मंच ® “खोलो आंखें ज़िंदगी की” से भी जुड़ सकते हैं … 09756293651 पर अपने नाम के साथ सन्देश भेजें ….
आओ एक नए युग का आग़ाज़ करें…
बंद सोच को आज़ाद करें …©
💪💪💪🙏🙏🙏

अंक 152 : क्यों नैनीताल में बंध्याकरण के बाद भी बरकरार है कुत्तों की फौज..?


साहिबान,
नैनीताल शहर की सड़कों पर अँधेरी रातों सूनसान राहों तक बस कोई दिखे न दिखे ऊपर वाले का बनाया हुआ एक करिश्मा दिख जाएगा, वो भी अपने संयुक्त परिवार के साथ,
हाँ ये अलग बात है उन संयुक्त परिवारों के कुछ सदस्य कुछ देर बाद किसी और परिवार के सदस्य नज़र आते हैं,
ख़ैर छोड़िये,
इस बात को, वो उनका निजी मामला है और किसी की निजता में झांकना बुरी बात होती है,
तो जनाब यहाँ, हम ये ज़िक्र कर रहे थे कि भरे पूरे परिवार के साथ ये वफ़ादार जानवर आपको शहर के हर कोने में मिल जाएंगे,
एक ज़माना था जब इनको घर के मालिक के लिये वफ़ादारी का प्रतीक माना जाता था, अब दो दिन अगर मालिक रोटी / हड्डी न डाले तो भौंकते हुये घर से चल देते हैं, वो तो ग़नीमत ये है कि अभी कोई ट्रांसलेटर नहीं बना जो ये बताये कि आख़िर ये वफ़ादार जानवर कह क्या रहा है, वरना बाई गॉड न जाने कितने मालिकों के कानों से तो ख़ून ही निकल जाता, यही सोचकर शायद टेक्नोलॉजी ज्ञाताओं ने भी इसमें हाथ नहीं डाला क्योंकि एक -दो तो उनके घर में भी पक्का होंगे, ख़ैर, यहां हम किसी की वफ़ादारी में चरस नहीं बोना चाहते, हम तो बस ध्यान का चरखा थोड़ा उधर घुमाने की कोशिश कर रहे हैं जिधर इस करिश्मे ने करिश्मा कर रखा है और उस करिश्मे से शहर के बाशिंदों के अलावा परदेसी भी करिश्माई हो चुके हैं, अभी कल – परसों के अख़बार में ये आया था की ये वफ़ादार जानवर,
इतनी शिद्द्त वाली वफ़ादारी से लोगों को काट रहे हैं जितनी वफ़ादारी से रेबीज की मीटिंग में कोई मुख्य अधिकारी की बातें भी नहीं सुन रहा होगा क्योंकि सरकारी कर्मचारी महाशय का मानना होता है कि ऐसी बातों से तो अच्छा अपना फ़ोन चलाना है, ख़ैर, कोई बात नहीं, ये शहर ही ऐसा हो गया है,सबको कुछ न कुछ चलाने की आदत हो गयी है, कोई ज़ुबान चला रहा है, कोई फ़ोन चला रहा है, एक वफ़ादार जानवर ही है जो मस्त है अपनी ज़िंदगी बेख़ौफ़ होकर जी रहा है और उनमें कोई चुनाव भी नहीं होते, जो दो से ज़्यादा बच्चों का डर होता, अब आप कहेंगे अरे जनाब बंध्याकरण तो होता है??? और फिर हम बोलेंगे रहने दीजिये न साहब,
जिस शहर के सारे काम कागज़ों में होने लगें तो काग़ज़ की कश्तियाँ ही दिखेंगी,
बारिश के पानी के लिये तो
वो दौलत, वो शौहरत सब दांव पर लगानी होगी जनाब,
और हाँ, अगर आप ये सब करने को तैयार नहीं, तो यहां न आइयेगा, क्योंकि यहां एक चीज़ है जिसमें वफ़ा कूट कूटकर भरी है, हो सकता है वफ़ादारी का अगला इंजेक्शन ???

न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर

अंक 151 : नैनीताल में चिराग़ के घर अँधेरा !

साहिबान,

आज हम आपको ऐसे लोगों की दास्तान सुनाने वाले हैं जो पूरे शहर में सफ़ाई के सिपाही के नाम से जाने जाते हैं, वे लोग सुबह – शाम शहर की गंदगी से लड़ते हैं और फिर हार थककर अपने घर पहुंचते हैं, घर पहुँचकर फिर अगली सुबह शहर की सफ़ाई करनी है ऐसी फ़िक्र लिये सो जाते हैं, इस सबके चलते ये लोग अपने आसपास की गंदगी के बारे में ध्यान नहीं दे पाते, जी हाँ, इसमें इनका कोई कुसूर नहीं क्योंकि वो तो इनकी ड्यूटी है जो ये लोग करते हैं और अपना घर चलाते हैं,
लेकिन क्या सरकार के किसी महकमे की कोई ज़िम्मेदारी नहीं कोई ड्यूटी नहीं इनके घर के आस- पास सफ़ाई व्यवस्था कराने की, एक बार सीवर लाइन डाल दी तो बहुत बड़ा काम हो गया ? उसके बाद सीवर टूटे या फूटे उससे कोई मतलब नहीं, कोई ड्यूटी नहीं,  बहते सीवर को ठीक कराने की ? यही हाल है तल्लीताल मस्जिद के पास रोड में पिछले चार-पांच दिनों से सीवर खुले में बह रही है जो वैष्णो देवी मंदिर से मस्जिद होते हुए हरि नगर का मुख्य मार्ग है, राहगीरों को गंदगी से ही गुजरना पड़ रहा है, मलिन बस्तियों में प्रशासन और संबंधित विभाग हमेशा अनदेखी करता है अगर यही सीवर कहीं बाज़ार में या वीआईपी क्षेत्रों में बह रही होती तो अब तक कब का समाधान हो चुका होता,
क्या मेरे शहर के कुछ लोगों को समानता का अधिकार पाने का कोई अधिकार नहीं ?
ज़िम्मेदार विभाग ज़िम्मेदारी से ज़िम्मेदारी लेने की ज़िम्मेदारी दिखायें…

न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर

अंक 150 : पधारो म्हारे गड्ढ़ों के देस…

यूँ तो ज़िंदगी बिन गड्ढों के भी जी जा सकती है लेकिन लाइफ में अगर दो – तीन गड्ढे न हों तो लाइफ का मज़ा ही खत्म हो जाता है और हमारी लाइफ में मज़ा बरक़रार रखे हुये है नैनीताल का एक डिपार्टमेंट, जिसकी बदौलत हमें महंगी से महंगी और आरामदायक से आरामदायक गाड़ी में भी झटकों का एहसास हो जाता है, अगर आपके पास मोटर साइकिल या स्कूटी है तो यही मज़ा दोगुना हो जाता है, आप उस गड्ढे से बचकर निकल गये तो समझिये ज़िंदगी से आपकी रोमांच खत्म हो गया और अगर आपने स्टंट दिखाते हुये गड्ढा पार किया तो उससे तीन फ़ायदे होंगे, पहला तो वो जो आप बैठे- बैठे फैटी होते जा रहे हैं वो नहीं रहोगे, झटके खा-खाकर आपका वज़न कम हो जाता है, दूसरा फायदा ये कि आपके अंदर का स्टंटमैन सामने आ जाता है और आप स्टंट की दुनिया के बेताज बादशाह बन जाते हैं, तीसरा फ़ायदा ये कि अगर सावधानी हटी और दुर्घटना घटी तो आपकी वजह से अस्पताल और दवाई की दुकान से जुड़े कई लोगों को रोज़गार मिल जाता है, इससे आप चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांति ले आते हैं और आपको अंदाज़ा भी नहीं हो पाता आपने कितना महान कार्य कर दिया है, 
और आप अस्पताल के बेड पर गंदे से लाल कंबल में लेटे-  लेटे उस गड्ढे को कोसते रह जाते हैं जिसने आपको महान बनाया, 
जाने- अंजाने ऐसी गलतियां हो ही जाती हैं किसकी (डिपार्टमेंट की ) गलती किसके (आम नागरिक के ) लिये महानता का कारण बन जाये, कुछ नहीं कहा जा सकता,
इसलिये तस्वीर में जो गड्ढा दिखाया गया है वो मनु महारानी के सामने चौराहे का है जिस किसीको भी अपने अंदर का स्टंटमैन बाहर निकालना हो या चिकित्सा क्षेत्र में महानता का अध्याय लिखना हो तो पधारो म्हारे देस |

अंक 149 : ठेके पर आसमान, ठेंगे पर सम्मान (5 जुलाई 2019)

साहिबान,
आज आपको एक राजा की कहानी सुनाते हैं, उसका राज्य बहुत बड़ा था, जिसके उसने टुकड़े किये और उन टुकड़ों की ज़िम्मेदारी के लिये जनता की पसंद से ज़िम्मेदार लोग चुने, राजा की इस समझदारी से वहां की प्रजा बहुत खुश हुई कि रोज़-रोज़, नई -नई फ़रियाद लेकर राजा के पास जाना बच गया,
सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था, प्रजा खुश थी, क्योंकि राजा तक उनकी फ़रियादें ज़िम्मेदार लोगों के ज़रिये आसानी से पहुंचने लगी और पूरे राज्य की प्रजा हंसी ख़ुशी गुज़ारा कर रही थी, फिर अचानक एक साहूकार राज्य में आया और उसने राजा को अपना राज्य ठेके पर देने का प्रस्ताव रखा, साहूकार ने कहा यदि आप मुझे अपना राज्य ठेके पर देते हो तो फिर आपको अपनी प्रजा पर अपना धन खर्चने की आवश्यकता नहीं होगी बल्कि मैं राज्य के ठेके के नाम पर आपको समय-समय पर राशि चुकाता रहूँगा, राजा को ये बात बहुत पसंद आयी और उसने अपना राज्य ठेके पर दे दिया, एक के बाद एक आवश्यकता के लिये ठेके होते रहे और धीरे – धीरे राज्य की पूरी व्यवस्था ठेकेदारों के हाथों में चली गयी, फिर हुआ यूँ कि जो ज़िम्मेदार लोग राजा ने जनता की पसंद से चुने थे उनके अधिकार कम होते चले गये अब राजा सिर्फ़ साहूकार के ठेकेदारों की बात तवज्जो से सुनता और अपने ज़िम्मेदारों को नज़रअंदाज़ करता, ऐसा करते -करते फिर तो ऐसी नौबत आ गयी कि राज्य के ज़िम्मेदार यदि हल्के बोलते तो उनकी आवाज़ राजा के कानों तक नहीं पहुँचती, ज़ोर से बोलते तो राजा बोलता इतना चिल्लाते क्यों हों, ख़ामोश रहते तो कमज़ोर समझा जाता, सभा से उठ जाएँ तो मुँहज़ोर समझा जाता और दरबार के बाहर बैठ जाते तो
न फ़रमान समझा जाता, आख़िरकार उन ज़िम्मेदार लोगों के लिये ये स्थिति आ गयी कि राज्य में जाएँ तो प्रजा प्रश्न पूछ पूछकर जीने न दे, और राजा के दरबार में जाओ तो कोई सुनवाई नहीं होती, ऐसे में ज़िम्मेदारों के लिये विकट स्थिति पैदा हो गयी, आत्मसम्मान रक्षा करने की, सबने मन बनाया और राजा के ख़िलाफ़ ही जंग का एलान कर दिया, अपने ख़िलाफ़ ऐसी खबरें सुनकर राजा आग बबूला हो गया, राजा ने अपने स्तर से हर प्रयास किये उन लोगों के हौसले पस्त करने के लिये एक- एक करके सब हथकण्डे अपनाये लेकिन हुआ कुछ नहीं, ज़िम्मेदारों की हिम्मत के आगे सब हार मान गये और राज्य के ज़िम्मेदारों को आख़िरकार खोया हुआ सम्मान वापस मिला और राज्य फिर से खुशहाल हो गया…

नोट:-
कहानी के सभी पात्र, चित्र व घटनाएं काल्पनिक हैं इनका किसी जीवित या मृत से कोई संबंध नहीं है, अगर ऐसा कहीं पाया जाता है तो वो महज़ एक संयोग होगा |

न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर

🙏

अंक 148 : नैनीताल के नवनियुक्त ज़िलाधिकारी सविन बंसल से पहला साक्षात्कार, भाग-2… (1 जुलाई 2019)

डीएम सविन बंसल

नवनियुक्त ज़िलाधिकारी, नैनीताल सविन बंसल से
विभिन्न मुद्दों व उनकी योजनाओं से सम्बंधित बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने, प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :-

संक्षिप्त परिचय :-
हरियाणा में जन्मे सविन बंसल की प्रारंभिक व उच्च शिक्षा हरियाणा में ही सम्पन्न हुई। किताबें पढ़ने के शौकीन सविन ने NIT ( कुरुक्षेत्र ) से मैकेनिकल इंजीनिरिंग में गोल्ड मेडल प्राप्त किया लेकिन उससे भी आप संतुष्ट नहीं हुये और आपने प्रशासनिक अधिकारी बनकर देश सेवा करने का मन बना लिया और आख़िरकार कड़ी मेहनत व लगन के जरिये आपका आईएएस 2009 के बैच में सिलेक्शन हो गया। आप प्रशिक्षु आईएएस के तौर पर सर्वप्रथम नैनीताल की सरज़मीं पर आये और यहीं से आपकी आधिकारिक यात्रा की शुरुआत हुई। 2011 में आप परगनाधिकारी (रुड़की), सीडीओ (टिहरी), 2013 में अपर सचिव वित्त, लोक निर्माण, आपदा प्रबंधन, निदेशक ऑडिट, निदेशक बाह्य सहायतित परियोजना में ज़िम्मेदारी निभाने के पश्चात् 2015 से 2017 तक अल्मोड़ा के ज़िलाधिकारी रह कर आपने शानदार व यादगार कार्य किये। 29/06/2019 दिन शनिवार से आपने नैनीताल के ज़िलाधिकारी का पद भार ग्रहण कर लिया।

यह भी पढ़ें : पर्यटन, सुशासन, आपदा चेतावनी, रेफरल अस्पतालों, बलियानाला के लिए कई अभिनव पहल करेंगे नैनीताल के नये डीएम सविन बंसल

नव नियुक्त ज़िलाधिकारी सविन बंसल, नैनीताल के लिये क्या ख़्वाब और क्या हक़ीक़त लेकर आये हैं आइये जानते हैं :-

सवाल (05) से आगे जारी :-

आज़ाद सवाल (06):-
नगर के नाले जो झील की धमनियां कहलाते हैं, वो अपने साथ सीवर भी झील में समाहित कर रहे हैं। इस संबंध में आपके द्वारा क्या प्रयास किये जाएंगे?

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
नैनीताल के नालों का एक माह के भीतर मैं स्वयं निरीक्षण करने वाला हूँ उसके पश्चात् ही कोई निश्चित योजना बनाकर उस पर कार्य किया जाएगा।

आज़ाद सवाल (07) :-
यही हाल यहां के उद्यानों का है, जिसमें कैनेडी पार्क और कैपिटोल सिनेमा के सामने वाला पार्क है जो बदतर हालत में हैं, आपके द्वारा उद्यान जीर्णोद्धार के लिये क्या प्रयास रहेंगे ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल  :-
जो भी संबंधित विभाग हैं उनसे वार्ता करके जल्द ही कोई ठोस योजना बनाई जाएगी।

आज़ाद सवाल (08) :-
पंत पार्क में अघोषित पार्किंग बना  दी गयी है और जो घोषित पार्किंग हैं उनमें काफी अनियमितताओं की खबरें मिल रही हैं। इस संबंध में क्या कार्य योजना रहेगी ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
पुलिस प्रशासन व नगर पालिका प्रशासन के साथ बैठक कर सभी पार्किंग पर बात की जाएगी।

आज़ाद सवाल (09):-
टैक्सी बाइक स्वरोज़गार का अच्छा साधन साबित हुआ है लेकिन अभी तक इनका किराया निर्धारित नहीं हुआ है, जिससे चालक स्वयं कंफ्यूज हो जाते हैं किससे कितना किराया लेना है, क्या हो सकता है इनकी समस्या का निस्तारण?

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
इस संबंध में आरटीओ से बात की जाएगी और जल्द ही किराया निर्धारित किया जाएगा ।

आज़ाद सवाल (10)  :-
अंत में, कुछ व्यक्तिगत जानकारी जो जनता जानने को उत्सुक रहती है अपने प्रिय ज़िलाधिकारी के विषय में जैसे वर्तमान प्राधिकरण सचिव व पूर्व ज़िलाधिकारी दीपक रावत गाने के शौकीन हैं आपकी क्या रुचि हैं।

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
मैं इन लोगों के जैसा तो नहीं गा पाता हूँ लेकिन थोड़ा बहुत शौक है, बाक़ी जॉगिंग, बेडमिंटन, किताबें पढ़ना ये भी मेरी रूचि में शामिल है |

साक्षात्कार समाप्त..🙏

(साक्षात्कार भाग : 1)

यह भी पढ़ें : पर्यटन, सुशासन, आपदा चेतावनी, रेफरल अस्पतालों, बलियानाला के लिए कई अभिनव पहल करेंगे नैनीताल के नये डीएम सविन बंसल

आज़ाद सवाल (01):- 

आपकी नैनीताल ज़िले के लिये क्या प्राथमिकताएं हैं और क्या चुनौतियां हैं ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य बेहतर पर्यटन व्यवस्था, ये सब प्राथमिकताएं हैं और यातायात व्यवस्था, झील संरक्षण, बलियानाला व वहां रह रहे लोगों को सुरक्षा प्रदान करना प्राथमिकता व चुनौती दोनों हैं।

आज़ाद सवाल (02) :-
नगर व ज़िले की यातायात व्यवस्था सुधारने हेतु आपके द्वारा क्या प्रयास किये जाएंगे ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
अभी-अभी होटल एसो. वालों से इस मुद्दे पर भी बात चल रही थी। शीघ्र ही पुलिस प्रशासन के साथ वार्ता कर कोई ठोस योजना बनाई जाएगी।

आज़ाद सवाल (03) :-
नगर व ज़िले की चिकित्सा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिये आपके द्वारा क्या खाका तैयार किया जाएगा ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
समस्त अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया जाएगा, कोई कमी पाई गयी तो उस पर तत्काल एक्शन लिया जाएगा।

आज़ाद सवाल (04):-
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र बने हैं लेकिन उनमें दवाइयां नहीं हैं, आयुष्मान कार्ड बनवा दिये हैं लेकिन किसी को कोई इलाज नहीं मिल रहा है, आये दिन इलाज के अभाव में मौतें हो रही हैं, कौन लेगा इसकी ज़िम्मेदारी, क्या कहना चाहेंगे इस स्थिति पर ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
(संबंधित अधिकारियों को फ़ोन पर आदेश देने के पश्चात् )
चिकित्सा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कोई कमी न आये इसके लिये समस्त स्वास्थ्य अधिकारियों को मीटिंग के लिये बुला लिया गया है, मीटिंग में मामलों का संज्ञान लिया जाएगा।

आज़ाद सवाल (05) :-
नगर हो या ज़िला सरकारी स्कूल बद से बदतर और निजी स्कूल तान से तानाशाह होते जा रहे हैं, कैसे नियंत्रण में आएगी इनकी स्थिति ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
(संबंधित अधिकारियों को फ़ोन पर आदेश देने के पश्चात् )
सरकारी व निजी स्कूलों का निरीक्षण करके अनियमितताओं का पता लगाया जाएगा। सरकारी स्कूलों की दशा में सुधार लाने के प्रयास किये जाएंगे व निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाई जाएगी।

साक्षात्कार जारी ..🙏

अंक 147 : नैनीताल नगर पालिका के EO के खिलाफ झंडा बुलंद करने वाले सभासद पर आज़ाद के तीखे तीर…. (28 जून 2019)

साक्षात्कार : मनोज साह जगाती, सभासद (वार्ड नंबर 08)
नगर पालिका परिषद, नैनीताल
से विभिन्न मुद्दों पर बात की हमारे
संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने, प्रस्तुत है उनसे
बातचीत के प्रमुख अंश :-

*आज़ाद* सवाल (01):-
आपने किन- किन मुद्दों को लेकर पालिका प्रशासन के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला हुआ है ?

*मनोज साह जगाती* :-
ऐसे कई मुद्दे हैं जिनको लेकर पालिका प्रशासन से हमारा रोष है जैसे :- स्ट्रीट लाइट का ठेका जब दिया ब पुरानी लाइट निकाली गयी होंगी लेकिन वो सारी लाइट कहाँ गयी कुछ पता नहीं ?
दूसरा, नये ठेकेदार को सरकारी गाड़ी इस्तेमाल करने क्यों दी जा रही है, तीसरा ठेकेदार के केवल 5 आदमी हैं जो 15 वार्ड की प्रकाश व्यस्वस्था को देखते हैं जो उनका देखना न देखने की ही बराबर हो जाता है, पार्किंग में ₹20 की जगह ₹50 बाइक वालों से और ₹200/- कार वालों से वसूले जा रहे हैं जो अधिशासी अधिकारी के निर्देशों पर हो रहा है, और हाँ नगर पालिका में जो सामान मंगाया जाता है उसमें इतनी ऊँची दरों पर सामान खरीदा गया है जो किसी ष्टिकोण से उचित नहीं लगता, जैसे हाथ कूड़ा गाड़ी जो कि ₹5000/- तक की आ जाती है वो ₹9500/- की खरीदी जा रही है ये तो मात्र एक उदाहरण हैं, बहुत धांधलियां की गयी हैं ईओ के द्वारा |

*आज़ाद* सवाल (02) :-
इन सब मुद्दों को लेकर आप खुद अकेले चल रहे हैं या बाकी सदस्य भी आपका साथ दे रहे हैं ?

*मनोज साह जगाती* :- नहीं, ऐसा नहीं है मैं अकेला नहीं हूँ, इन आरोपों को लेकर हम 15 में से 13 सभासद एक जुट हो गए हैं जो बहुमत से भी बहुत बड़ा मत है और हम सब मिलकर इन आरोपों की जांच कराना चाहते हैं |

*आज़ाद* सवाल (03) :-
पालिका प्रशासन की नीतियों में सभासदों का कितना योगदान होता है ?

*मनोज साह जगाती* :-
योगदान तो तब होगा जब सभासदो को किसी नीति पर चर्चा करने के लिये बुलाया जाएगा, यहां का प्रशासन अपनी मर्ज़ी से सब नीतियां बनाता व रातों रात लागू करवाता है |

*आज़ाद* सवाल (04):-
और क्या – क्या मुद्दें हैं जिनसे सभी सभासद आक्रोश में हैं ?

*मनोज साह जगाती* :-
मुद्दे तो इतने हैं कि बताते -बताते दिन निकल जाएगा लेकिन कुछ खास मुद्दे बता देता हूँ जैसे :-
बलियानाला के नाम पर हरिनगर से मकान ख़ाली कराये जा रहे हैं पालिका द्वारा पक्का स्लॉटर हाउस बनवाया जा रहा है ऐसा क्यों ?
दूसरा, खेल मैदान में पान मसाला व गुटके के ही विज्ञापन क्यों लगाए जाते हैं ?
तीसरा, चाहे मेट्रोपोल पार्किंग हो या सूखाताल पार्किंग कहीं भी शौचालय की उचित व्यवस्था नहीं है सिर्फ पैसा कमाया जा रहा है
चौथा, पिछली कूड़ा निस्तारण वाली संस्था की गाड़ियों का इस्तेमाल किस अधिकार से किया जा रहा है ?
पांचवा, न्यायालय में मामला जाने पर भी वार्डों में अँधेरा क्यों है ?
ऐसे अनगिनत मुद्दे हैं |

*आज़ाद* सवाल (05) :-
इन सब मुद्दों के ख़िलाफ़ आप सभी 13 सभासदों की आगे की क्या रणनीति है ?

*मनोज साह जगाती*:-
इन सब मुद्दों को लेकर हमने मा. आयुक्त महोदय से निष्पक्ष जाँच की मांग की है, ज्ञापन में हमने ये भी अनुरोध किया है कि यदि अधिशासी अधिकारी के कार्यों की जाँच नहीं होती तो हम सब आगामी सोमवार 01 जुलाई से आयुक्त कार्यालय में ही धरने पर बैठ जाएँगे |

*साक्षात्कार समाप्त*…

🙏

अंक 146 : नैनीताल नगर पालिका के EO पर आज़ाद के तीखे तीर : पेड़ों पर लाइटिंग, पंत पॉर्क की अवैध पार्किंग, आवारा कुत्तों आदि पर…. (25 जून 2019)

साक्षात्कार : भाग (02)

रोहिताश शर्मा
अधिशासी अधिकारी,
नगर पालिका परिषद, नैनीताल

नगर की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं पर कई वर्षों से नगर पालिका परिषद नैनीताल में अधिशासी अधिकारी के पद पर तैनात रोहिताश शर्मा से बात की हमारे
संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने, प्रस्तुत है उनसे
बातचीत के प्रमुख अंश :- भाग – 2 (सवाल 5 से आगे)

आज़ाद सवाल (06):-
आप पर एक आरोप ये भी है कि आपने माल रोड पर सजावट के नाम पर लाइट लगवाकर वृक्षों में कीलें ठुकवाकर क्षति पहुंचाई , आख़िर क्यों किया गया ऐसा ?

रोहिताश शर्मा :- सजावट के नाम पर हमने किसी भी वृक्ष को कोई क्षति नहीं पहुंचाई है, रही बात वृक्ष में कीलें ठुकवाने की तो यदि कोई भी एक कील वृक्ष में दिखा दे नगर पालिका उसे इनाम देगी।

आज़ाद सवाल (07) :- वृक्षों पर फेंसी लाइट लगाने से पहले क्या आपके द्वारा वन विभाग से कोई अनुमति मांगी गयी ?

रोहिताश शर्मा :- वृक्षों पर स्वामित्व हमारा है तो हम वन विभाग से किस बात की अनुमति प्राप्त करें। दूसरी बात हमने वृक्षों के साथ कोई छेड़ – छाड़ नहीं की फिर कोई औचित्य नहीं बनता वन विभाग के पास जाने का।

आज़ाद सवाल (08) :-
पंत पार्क में अघोषित पार्किंग बना दी गयी है, ये सब किसकी शह पर हो रहा है, पालिका की गाड़ियां भी दिखती हैं वहां, ऐसा क्यों ?

रोहिताश शर्मा :-
पंत पार्क में हुई पार्किंग पूरी तरह से अवैध है, हम पुलिस प्रशासन से मांग करते हैं कि वो पालिका की सरकारी गाड़ियों के अलावा हर गाड़ी का चालान काटे।

आज़ाद सवाल (09):-
आवारा कुत्तों से जनता बहुत परेशान है आपके द्वारा क्या प्रयास किये जा रहे हैं कुत्तों के आतंक के ख़िलाफ़ ?

रोहिताश शर्मा :-
मा. उच्चतम न्या. में मामला विचाराधीन है कि आवारा कुत्तों को यहां से नहीं भगा सकते, उनका केवल बध्याकरण किया जाता है। ह्यूमन सोसाइटी मुंबई के साथ मिलकर अब तक लगभग 120 आवारा कुत्तों का बध्याकरण किया जा चुका है और आगे भी प्रयासरत हैं।

आज़ाद सवाल (10) :-
अंत में एक अहम् सवाल, डोर टू डोरकेकिििशश  तो बहुत सुन लिए अब वो फ़साना हक़ीक़त कब बनेगा ?

रोहिताश शर्मा :-
फ़साना हक़ीक़त बनने वाला है, 21 जून को नये सिरे से टेंडर हो गये हैं एक अनुभवी संस्था को चिह्नित कर लिया गया है, अगले माह जुलाई के प्रथम सप्ताह से वो संस्था डोर टू डोर कूड़ा निस्तारण का कार्य प्रारम्भ कर देगी, जिससे नगर के नालों, व सड़कों पर गंदगी होने से काफ़ी राहत मिलेगी।

साक्षात्कार समाप्त….🙏

भाग : 1

आज़ाद (01):-

सबसे पहले बात करते हैं सड़क से उच्च न्यायालय पहुंची स्ट्रीट लाइट की, आख़िर क्या था मामला, जो ये मुद्दा जनहित का मुद्दा बन गया ?

रोहिताश शर्मा :-
अमृत योजना के अंतर्गत स्वीकार योजना जिसे सोडियम लाइट से हटाकर एलईडी में कन्वर्ट किया गया और जिसे पीपीपी मोड में चलाने की शुरूआत हुई, इसमें विद्युत् बिल में कटौती तो हुई ही साथ ही साथ पालिका को आय भी प्राप्त हुई, रही बात स्ट्रीट लाइट का सड़क से उच्च न्यायालय तक पहुंचने का मामला तो उसमें हम कोई टिप्पणी नहीं कर सकते क्योंकि मामला मा. न्यायालय में लंबित है |

आज़ाद सवाल (02) :-
सुनने में ये भी आया है कि ईको ड्राइव कम्पनी ने स्ट्रीट लाइट का ठेका तो ले लिया लेकिन अपना एक भी कर्मचारी प्रकाश व्यवस्था हेतु नियुक्त नहीं किया ?

रोहिताश शर्मा :-
ऐसा नहीं है, ईको ड्राइव कम्पनी के छः कर्मचारी नियुक्त हैं जिनमें दो लाइनमेन, दो हेल्पर, एक इलेक्ट्रीशियन व एक ड्राइवर शामिल है, प्रकाश व्यवस्था के लिये एक गाड़ी पालिका की ओर से दी गयी है जिसका ईंधन खर्चा कम्पनी वहन करती है |

आज़ाद सवाल (03) :-
क्या ये सत्य है कि आप अपने सभासदों की शिकायतों को नहीं सुन रहे हैं और शिकायती पत्र लेने से मना कर दे रहे हैं, आख़िर अपने ही सभासदों के साथ ऐसा बर्ताव क्यों किया जा रहा है ?

रोहिताश शर्मा :-
जिस मामले की आप बात कर रहे हैं असल में कोई बात ही नहीं थी, सबकी शिकायतों के लिये हमने कार्यालय में शिकायती पंजिका रखी है, उसमें कोई भी शिकायत लिखवा सकता है, जिस पर एक्शन लिया जाता है, रही बात शिकायती पत्र न लेने की तो उस पत्र में किसी भी तरह की समस्या का कोई भी स्पष्टीकरण नहीं दिया गया था, जो विचार करने योग्य नहीं था, जिस पत्र में समस्या कहाँ पर है, क्यों हैं आदि बातों का समावेश होगा उसे हम सहर्ष स्वीकार करेंगे |

आज़ाद सवाल (04):-
अब बात करते हैं डीएसए पार्किंग की इतनी बड़ी पार्किंग होने के बावजूद भी पर्यटकों को गाड़ियों के लिये जगह मुहैया नहीं कराई गयी, आख़िर क्या वजह रही इस बात की?

रोहिताश शर्मा :-
सबसे पहले तो वो डीएसए की पार्किंग नहीं है वो नगर पालिका की पार्किंग है, क्योंकि डीएसए का अपना कुछ भी नहीं है, डीएसए की लीज़ भी 2004 में ख़त्म हो गयी थी, अब तक बिना लीज़ के इतने बड़े मैदान को प्रयोग में लाया जा रहा है।

आज़ाद सवाल (05) :- तो फिर डीएसए द्वारा इतने समय में लीज़ बढ़ाने के प्रयास तो किये गये होंगे ?

रोहिताश शर्मा :- नहीं, डीएसए नैनीताल द्वारा सन् 2004 से अब तक कोई प्रयास नहीं किये गये, जिससे लीज़ बढ़ाई जा सके |

साक्षात्कार जारी …

🙏

अंक 145 : आज़ाद के तीर : सूखाताल नहीं सूख पा रही थी ? जो यह सब भी कर दिया.. (4 जून 2019)

झील का विकास करती, लोहे की मशीनें!!!

साहिबान,
हमारे शहर में एक बड़ी झील है एक छोटी झील है, बड़ी झील को तो सब जानते हैं क्योंकि वो फिल्मों के मुख्य किरदार की तरह नैनीताल की फिल्म में हैं लेकिन क्या किसी ने उस सहयोगी, नैनी झील को सर्वाधिक 70 फीसद जल प्रदाता सूूूखाताल झील को जानने की कोशिश की जिसके सहयोग से मुख्य किरदार का क़द बड़ा हो जाता है, हमारा जवाब है हाँ जानने की कोशिश की इसलिये उस झील के विकास के लिये लोहे की चार पहिये वाली मशीनें बुलवा दी गयी हैं और उनके ज़रिये झील के गर्भ में छिपे हुये पानी को भी सुखाने की कोशिशें शुरू कर दी गयी हैं, हम ये नहीं जानते शासन – प्रशासन को इससे कितना मुनाफ़ा होगा लेकिन इतना ज़रूर है इन लोहे की मशीनों की चहलकदमी से प्राकृतिक श्रोत ज़रूर सूख जाएंगे, और जैसा कि ग्रीष्म ऋतु में नैनी झील सूखने लगती है ऐसा करने से दोगुनी रफ़्तार से जल स्तर में गिरावट आएगी और जल संकट से वे लोग भी बच नहीं पाएंगे जिनकी सहमति से अथवा संरक्षण में झील को पार्किंग में तब्दील कर दिया गया है …
आख़िर में,
मा.प्रधानमंत्री महोदय,
मा. मुख्यमंत्री महोदय उत्तराखंड,
मा. मुख्य न्यायाधीश महोदय उच्च न्यायालय उत्तराखंड,
कुमाऊँ आयुक्त महोदय व
मुख्य सचिव मुख्यमंत्री महोदय,
ज़िलाधिकारी महोदय नैनीताल,
सचिव महोदय, झील विकास प्राधिकरण, नैनीताल,
सांसद महोदय, नैनीताल,
विधायक महोदय नैनीताल
नगर पालिकाध्यक्ष महोदय, नैनीताल,
अधिशासी अधिकारी महोदय, नगर पालिका परिषद् नैनीताल
व सम्बंधित क्षेत्रीय सभासद महोदया व सम्बंधित अधिकारीगणों से इल्तेजा है कि जिस तरह एक तरफ़ झीलों के विकास के लिये करोड़ों का बजट जारी किया जा रहा है वहीँ नैनी झील की सहयोगी सूखाताल झील में पार्किंग बना दी गयी है, जो झील का जीते जी क़त्ल कर देने जैसा है, इसलिये हाथ जोड़कर हमारी इल्तेजा है कि झील में जो पार्किंग बनाई गयी है उसे तत्काल प्रभावी आदेश देकर हटवा दिया जाये और झील को पुनर्जीवित करने की योजना बनाकर उसको अमल में लाया जाये, जिससे प्राकृतिक श्रोत बने रहेंगे साथ ही साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और नाव आदि द्वारा स्थानीय लोगों को रोज़गार भी मिलेगा..
हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यकीन है कि सूखाताल झील से लोहे की मशीने तुरंत हटवा दी जाएंगी और झील विकास के लिये योजना अमल में लाई जाएगी…

न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर

अंक 144 : हादसों को दावत देती कूड़ा गाड़ी ! (28 मई 2019)

साहिबान,
ये मंज़र जो आप देख रहे हैं वो किसी सर्कस का नहीं है बल्कि चार्टन लॉज एरिया मल्लीताल नैनीताल का है, जहाँ एक कूड़ा गाड़ी कूड़ादान उठा कर ले जा रही है, कूड़ादान उठाना कोई ग़लत बात नहीं है ग़लत बात तो है लोगों की जान से खेलना!
जी हाँ, ये कूड़ा गाड़ी आने का समय और छोटे – छोटे बच्चों के स्कूल जाने का समय लगभग एक ही होता है, इसलिये मजबूरन अभिभावकों को बच्चों का हाथ पकड़कर गाड़ी से बच रही छोटी सी जगह से जान का जोखिम उठाते हुये निकलना पड़ता है,
भगवान न करे किसी दिन गाड़ी के चालक से कोई भूल हो जाये, फिर तब कोई बड़ा हादसा हो सकता है,
जनाब, आप भी सोच रहे होंगे कि इतनी बात लिखने की क्या ज़रूरत थी सीधा उन लोगों को बोल देते तो शायद वे लोग अपनी गाड़ी का समय बदल लें, किया साहब, वो भी किया लेकिन उन महान लोगों के पास बस एक ही शब्द होता है, नहीं हो पाएगा,
हम ये जानना चाहते हैं आख़िर क्यों नहीं हो सकता?
क्या समय में बदलाव तब आएगा जब कोई हादसा हो जाएगा ?
घटना से पहले कोई सचेत करे तो उसके शब्दों की कोई कीमत नहीं ?
हुज़ूर,
एक और सुझाव है अगर ग़ौर फरमायें तो वो यूँ है कि अगर जिस रास्ते में ये कूड़ादान लगाये गए हैं उन्हें थोड़ा आस- पास ही अन्यत्र शिफ्ट कर दें तो फिर कूड़ा गाड़ी जब भी आए उससे कोई खतरा नहीं होगा !
बाक़ी साहब लोगों की इच्छा पर डिपेंड करता है कि क्या करना हैं ?
जनता यूँ ही डर के साये में जियेगी या उसे भी खुलकर जीने का हक़ है ?

न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर

अंक 143 : यह तस्वीर देख कर आप भी कहेंगे, ‘मैं भी ख़ास होता काश !’ (25 मई 2019)

साहिबान,
आज आपको जो तस्वीर दिखाई दे रही है, वो किसी आम की तस्वीर नहीं, बल्कि किसी ख़ास की तस्वीर है। और ये मंज़र है नैनीताल की लोअर मॉल रोड का, जहाँ सीज़न में ट्रैफ़िक जाम कब हो जाये, कुछ नहीं कहा जा सकता। इसलिये मित्र पुलिस बहुत सावधानियां बरतती है, कि कहीं कोई गाड़ी न रुके, जिससे ट्रैफ़िक बाधित हो। लेकिन ये नियम और कायदे-क़ानून सिर्फ़ और सिर्फ़ आम आदमी के लिये हैं, किसी ख़ास के लिये नहीं हैं,
वे जब चाहे, जहाँ चाहे, सरकारी गाड़ी रुकवा सकते हैं, भले ही वो काम या दौरा सरकारी न हो, और
नितांत व्यक्तिगत ही क्यों न हो ?
सारा सरकारी ताम-झाम साथ लेकर शॉपिंग होती है या नौका विहार का आनंद उठाया जाता है, वो भी सब सरकारी ख़र्चे पर !
ख़ैर, अभी हम बात कर रहे हैं यातायात नियमों के दोहरे मापदंड की जो आम आदमी को लाठी और ख़ास लोगों को सलाम ठोकता है!
‘हुज़ूर’ जब नैनीताल से दो किमी दूर होते हैं तो चौराहों पर नाकेबंदी कर दी जाती है। ऊपर का वाहन ऊपर और नीचे का वाहन नीचे ही रोक दिया जाता है। फिर चाहे उस कतार में कोई मरीज़ या बूढ़े बाबा ही क्यों न हों। उनको तब तक नहीं जाने दिया जाता जब तक माननीय अपने गंतव्य तक न पहुंच जाएँ।
जनाब
आख़िर में,
हमारा ये सवाल है कि
क्या हम आज भी उसी ग़ुलाम देश में जी रहे हैं, जिस देश में अंग्रेज़ों ने भारतीयों के लिये अलग क़ानून बनाये थे, जो अंग्रेज़ों पर लागू नहीं होते थे ?
आज की तस्वीर भी क्या यही बयां करती नही करती है कि अगर आपको मॉल रोड में अपना वाहन खड़ा करके शॉपिंग करने जाना है तो कम से कम आपको ऐसा भाग्य लेकर जन्म लेना होगा जो आपको ख़ास या ‘माननीय’ बना दे, फिर हर क़ानून आपको सलाम करेगा !

न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर…

अंक 142 : ..तो अघोषित नेशनल हाईवे बना मल्लीताल बाज़ार ! (13 मई 2019)

साहिबान,
आज हम मल्लीताल बाज़ार क्षेत्र की बात करेंगे, नहीं नहीं, जैसा आप समझ रहे हैं, वैसा कुछ भी नहीं करेंगे, आज न ही हम, वहां सड़क पर निकली आधी से ज़्यादा दुकानों की बात करेंगे और न ही उस अतिक्रमण को रोकने के लिये शासन -प्रशासन द्वारा क्या प्रयास किये जा रहे हैं, न ही उसकी बात करेंगे, आज हम बात करेंगे उक्त तथाकथित बाज़ार मार्ग की जिसे दो – पहिया वाहनों के साथ – साथ चार पहिया वाहनों ने अपनी रफ़्तार और शोर मचाते हॉर्न की आवाज़ों ने बेसुध कर दिया है, मल्लीताल कोतवाली से ऊपर गाड़ी पड़ाव से होकर अंडा मार्केट व जय लाल साह बाज़ार को निकलने वाले इस मार्ग पर बाइक चलाने वाले इतने बेतरतीब ढंग से बाइक चलाते है कि उनकी बाइक से टकराकर कोई भी व्यक्ति कभी भी निजी अस्पतालों की चांदी कटवा सकता है। यही सूरत कार चलाने वालों की है जहाँ इतनी जनता खरीदारी करने आती है, जिसमें महिला, बच्चे, बुज़ुर्ग सभी शामिल हैं, उन सबको बोनट पर टांगने के इरादे से कार किसी भी टाइम आ और जा रही हैं, कुछ लोगों ने तो महानता की वाट लगाने की कसम खा रखी है बाई गॉड, वे आते -जाते हैं इस सड़क से ऊपर से ये दबंगई जगह हो न हो सड़क के बीचों – बीच अपनी बाइक या कार खड़ी करके कानों के लिए रुई और आँखों के लिए पट्टी लेने चल देते हैं, फिर उनकी बला से उस रोड पर जाम लगे या ब्रेड पर जेम लगे, वहीँ दूसरी तरफ़ बड़ा बाज़ार की बात करें तो वहां की हालत ग़नीमत है, हाँ भई, अब इतना खुश होने वाली बात भी नहीं है, वहां का ट्रैफ़िक प्लान जो सक्सेस हुआ है, उसका सारा क्रेडिट जाता है, बाज़ार के मुख्य द्वार पर लगे ताले को, जो सुबह और शाम को ही खुलता है, जिस वजह से बड़ा बाज़ार चैन की साँस ले रहा है,
ख़ैर, अभी हम बात कर रहे हैं गाड़ी पड़ाव से कनेक्ट होने वाले बाज़ार की, जिसने अपने साथ खरीदारों को कम बाइक और कार को ज़्यादा कनेक्ट किया है, अब इस कनेक्शन के पीछे पुलिस की लापरवाही कहें या व्यापार मंडल की मेहरबानी या नगर पालिका का मौन व्रत, सब एक ही बात है, अभी तो धीरे -धीरे इन गाड़ियों को सड़क पर खड़ा करवाया जा रहा है, हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यक़ीन है, एक दिन सड़क पर पार्किंग करने के लिये नगर पालिका द्वारा टेंडर निकाले जाएंगे और नैनीताल की छोटी – बड़ी हर सड़क पर सिर्फ़ और सिर्फ़ वाहन ही खड़े होंगे, बाक़ी ख़रीदारी करने लोग हल्द्वानी के मॉल में जाया करेंगे,
काश उक्त बाज़ार के लिये भी एक गेट लगता जिसका एक निश्चित समय होता खुलने और बंद होने का तब शायद बच्चे और बुज़ुर्ग निश्चिंत होकर घर से निकलते,
लेकिन हम आदि हो गये हैं, ऊँचे फरमानों के बाद पहल करने के लिये, उससे पहले हम बदल जाएँ हमारे स्टैण्डर्ड की तौहीन होगी न, हैं ना ?
न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर

अंक 141 : …तो वो दिन दूर नहीं जब हमारे घरों के भीतर से भी गुजरेंगी गाड़ियां ! (6 मई 2019)

साहिबान,
ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न, वो दरअसल तस्वीर नहीं है, नैनीताल के बाशिंदों पर थोपा गया फ़रमान है, कैसे और क्यों हम इस इंतज़ाम को थोपा गया फ़रमान बता रहे हैं, आइये जानते हैं :-
नैनीताल पर्वतों का राजा है और पूरे जहान में, ये ही इकलौता राजा है, जिसके राज में वज़ीर की कोई सुनता नहीं और जिसके सेनापति अपनी- अपनी ज़िम्मेदारियों से बचते फिरते हैं, जब किसी के पास कुछ नया निज़ाम लागू करवाने का वक़्त आता है तब सब उछलते रहते हैं और जब उस फ़रमान के लिये जवाबदारी का वक़्त आता है तो बॉल एक दूसरे के पास उछालते रहते हैं, ये तो उनकी फ़ितरत है,
ख़ैर,
कुछ साल पहले मस्जिद चौराहे से नैनीताल क्लब तक आने-जाने के लिये, मेट्रोपोल वाली सड़क का ही इस्तेमाल होता था, लेकिन ट्रैफ़िक जाम से निजात दिलाने के लिये नैनीताल क्लब से बीडी पाण्डे अस्पताल तक की सड़क को गाड़ियों के लिए खोल दिया गया,
उसमें हुआ यूँ कि नैनीताल आने वाली गाड़ियां मस्जिद वाली सड़क से शहर में आएंगी और यहां से जाने वाली गाड़ियां नैनीताल क्लब से होते हुए
शहर से बाहर निकल जाएंगी,
सोच सही भी हो सकती थी अगर उसके साइड इफेक्ट्स पर उन सिपहसालारों ने ज़रा भी सोचा होता, काश उन्होंने ये निज़ाम लागू करवाने से पहले ये सोचा होता कि जब गाड़ियां तेज़ रफ़्तार से आएंगी तो वहां बाज़ार से सामान ख़रीदने आये और काम पर आते -जाते महिला / पुरुष कैसे चल पाएंगे ? दूसरा छोटे – छोटे मासूम बच्चे स्कूल से आते – जाते एक ख़ौफ़ का साया साथ लेकर चलते हैं कि कहीं कोई रॉंग साइड बाइक वाला या ऊपर से आती कोई तेज़ रफ़्तार गाड़ी टक्कर न मार दे, (ऐसी ही एक घटना कुछ दिन पहले हुई थी जिसमें एक पिकअप वाहन की चपेट में एक युवक घायल हो गया था) वहीँ अगर बुज़ुर्गों की बात करें तो उनके लिये ये सड़क मुसीबत का सबब बन गयी है, दरअसल ये सड़क मल्लीताल के लगभग सभी मोहल्लों को जोड़ती है और न चाहकर भी उन बुज़ुर्गों को अस्पताल / दवाई वगैरह के लिये इस ख़ौफ़नाक सड़क पर चलना ही पड़ता है यक़ीन जानिये जब तक वे लोग इस सड़क को नहीं छोड़ देते तब तक उनके माथे पर फ़िक्र का पसीना बहता रहता है,
जानवरों की बात करें तो उन सबने तो इसको ख़ूनी सड़क क़रार दे दिया है और भला ऐसा हो भी क्यों न उनके परिवारों के शेरू, टाइगर, ब्लैकी न जाने कितने सदस्य तेज़ रफ़्तार गाड़ियों की चपेट में अब तक आये हैं, शहर की बिल्लियोंं ने तो खुन्नस में कई खम्बे नोच दिए हैं, एक हम ही हैं जो इंसान कहलाते हैं और हमने ही कभी अपनी खुन्नस निकालने की कोशिश नहीं की,
कभी इस वाहियात इंतज़ाम के लिये धरना / प्रदर्शन नहीं किया,
घुट- घुट कर जीने को मजबूर हैं,
दब- दब कर सिकुड़कर चलने के आदि हो गए हैं,
और इसी तरह हम इन बदइंतज़ामों को गले लगाते रहे तो वो दिन दूर नहीं जब ये सिपहसालार ट्रैफ़िक मैनेज करने के नाम पर आपके / हमारे घरों के बीच से सड़क निकाल देंगे और आप चाय का कप हाथ में लेकर गाड़ी को निकलने का रास्ता देंगे और फिर अख़बार बिछाकर उसी सड़क पर बैठकर आराम से पकौड़े खाएंगे…
तो तैयार रहिये ऐसे ही किसी लाजवाब ट्रैफ़िक कण्ट्रोल प्लांनिग के लिये जो बैडरूम से सीधा हाई- वे के नज़ारे दिखाएगा और हम ख़ुशी- ख़ुशी हर दबाव के लिये आदि हो जाएंगे !

न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर

अंक 140 :  ‘6 से 8’ के चक्कर में कहीं ‘ऊपर’ ही न पहुंचा दे और खुद भी शहीद न हो जाये ऊपर वाली सड़क ! (3 मई 2019)

साहिबान,
दिल को बहलाने को एक ख़बर मिली है कि शाम के वक़्त अपने वाहन से मल्ली से तल्ली जा सकेंगे लोग, वाह बेहद खूब, चलो ख़ुशी है इस बात कि हमारे शासन व प्रशासन में बैठे महानुभावों को यहां के लोगों का कुछ तो ख़याल आया, ख़याल आया लेकिन महज़ लोगों का अगर नैनीताल का ख़याल आया होता तो शायद ऐसा ख़याल नहीं आता, हमें यक़ीन है ,कि जिस सड़क को चार पहिया वाहनों के लिये खोलने की बात हो रही है क्या उस सड़क का भौगोलिक सर्वे किया ? नहीं !
क्या हमारे महानुभावों ने कभी उस सड़क पर खुद जाकर देखा कि उसमें कितने गड्ढे, कितने टल्ले या कितने अटपटे मोड़ हैं ? या ये जानने की कोशिश की कि वहां कितने स्थानीय बुज़ुर्ग लोग शाम की हवा खाने टहलने आते हैं ?
छोटे- छोटे बच्चे अपनी मांओं का हाथ पकड़कर बाज़ार से डोरेमोन का पेंसिल बॉक्स खरीदने जाते हैं, जी हाँ इन सभी बातों पर हमें पूरा यक़ीन है कि किसी भी हस्ती के पास इतना सोचने का वक़्त नहीं है बस फैसले लेने का हक़ है, सब अपनी अपनी ज़िम्मेदारियों से हाथ झाड़ना जानते हैं कोई उन हाथों को नैनीताल के आंसू पोंछने के लिए इस्तेमाल करना नहीं जानता,
ख़ैर, हमारे कहने या न कहने से क्या फ़र्क़ पड़ता है, साहब लोगों ने जो फैसला कर दिया वो पत्थर की लक़ीर समझा जाएगा, फिर चाहे नैनीताल की रूह दर्द से तड़प जाए, किसी को कोई परवाह नहीं, आप तो बस अपनी आरामदायक गाड़ियों के महंगे शॉकर से सड़कों के गड्ढे महसूस नहीं कर पाओगे लेकिन उस गड्ढे वाली सड़क के नीचे जो कमज़ोर परत है वो धीरे – धीरे खिसकती जाएगी और उसके आगे का तस्सवुर करना भी हमारे लिये मुमकिन नहीं !
न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर

अंक 139 : ADB मतलब, ए डेंजरस ब्लंडर इन पाइपलाइन, घोटाला तो नई पाइप लाइन में है ! (1 मई 2019)

बुधवार को पानी आने के बाद पॉपुलर कंपाउंड में ADB की लाइन से हो रहे लीकेज के बाद छाता पकड़कर जाना पड़ा

साहिबान,
बरसों पहले की बात है त्रिऋषि सरोवर नगरी में जल की कोई समस्या नहीं थी, क्योंकि आबादी बहुत कम थी लोगों का काम जल श्रोतों के ज़रिये ही चल जाया करता फिर धीरे- धीरे नगर की आबादी बढ़ने लगी लोग जगह – जगह अपने मकान बनाने लगे, अब हर जगह पानी के श्रोत हों ये ज़रूरी तो नहीं इसलिए उन लोगों को पानी की दिक्कत पेश आने लगी, इसी तरह की परेशानी से काफी लोग दो – चार होने लगे तब घऱ- घर पानी पहुंचाने का कार्य शुरू हुआ और धीरे – धीरे इस काम ने सरकार द्वारा गठित जल विभाग का रूप धारण किया पानी की नलों के ज़रिये सप्लाई अंग्रेज़ों ने ही शुरू की और बेहद बेहतरीके से पाइप का ताना- बाना बुना गया, अंग्रेज़ों के जाने के बाद हम भारतीयों ने इस विभाग को अपने क़ब्ज़े में ले लिया फिर जल की सप्लाई सुचारु हो गयी, सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था कि एक दिन अचानक नगरवासियों को मिनरल वाटर का झांसा देकर नार्मल वाटर की भी आबरू तार तार कर दी, न मिनरल वाटर आया न कुछ और ऊपर से जो नार्मल वाटर भी आता था उससे भी हाथ धो बैठे हालाँकि चुल्लू भर पानी के लिए भी उल्लू बनना पड़ रहा है फिर भी कोई बात नहीं, सबसे दिलचस्प बात ये है कि नगरी में शनिवार सनी घरों तक नहीं पहुंच रहा है, सब इसका ज़िम्मेदार सीधे तौर पर जल संस्थान को मान रहे हैं लेकिन उस छिपे हुए चोर का ज़िक्र कोई नहीं कर रहा है जिसकी वजह से आज झीलों की नगरी के वासी बूँद बूँद को तरस रहे हैं इसके पीछे मुख्य कारण है ए डी बी द्वारा बिछाई गयी लाइन जिसमें कितने करोड़ों का घोटाला हुआ है कुछ नहीं कहा जा सकता ? उक्त तथाकथित लाइन को नेपाल के कुशल इंजीनियर काम पर लगाये शटर में वेल्डिंग करने वालों से लाइन को जुड़वाया और मज़े की बात पूरी टीम का नेतृत्व किया था किसी शिक्षक ने, किसी क्लर्क ने और न जाने कितने ऐसे ही अलग अलग संस्थानों के लोगों ने मिलकर एक मुजैसिमा तैयार किया जिसे ए डी बी की लाइन के नाम से जाना जाता है,

ये लाइन इतनी शानदार मेटल में तैयार करवाई है कि उसमें वेल्डिंग नहीं किया जा सकता जो पुरानी लाइन थी वो लोहे की बनी होती थी जिस पर वेल्डिंग करना आसान होता था, इसलिये कहीं लाइन टूटने पर जल्दी जुड़ जाती थी आज की तरह अनिश्चितकालीन मामला नहीं होता,
कितने करोड़ों की योजना का पलीता लगाया गया है और क्यों हम उसका जवाब चाहते हैं आखिर क्यों नहीं ए डी बी के ख़िलाफ़ जाँच बैठाई जा रही ?
हम इस योजना की जाँच की मांग करते हैं |

न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर

अंक 138: ‘शिक्षा कर कार्यालय’ के तानाशाह का फ़रमान: अगर अफोर्ड नहीं कर सकते तो सरकारी स्कूल में डाल दो बच्चे..” (26 अप्रैल 2019)

जी हाँ,
साहिबान,
ये फ़रमान है हमारे शहर नैनीताल के एक मशहूर स्कूल (नाम तो आपने सुना ही होगा) की मुखिया का कि “अगर आप अफोर्ड नहीं कर सकते हो तो सरकारी स्कूल में डाल दो” इसके बाद वो जो कहना चाहती थी उसको पूरा करने में आइये हम उनकी मदद करते हैं :-
अगर आप अफोर्ड नहीं कर सकते तो
सरकारी स्कूल में डाल दो,
क्योंकि हम नहीं सुधरेंगे,
सरकारी स्कूल में डाल दो,
क्योंकि
कोई अभिभावक हमारा
कुछ नहीं बिगाड़ सकता,
सरकारी स्कूल में डाल दो,
क्योंकि हम तो यूँ ही लूटेंगे, सरकारी स्कूल में डाल दो,
क्योंकि हमारा लालच कभी
ख़त्म नहीं होगा,
सरकारी स्कूल में डाल दो
क्योंकि हम तो मुंह ज़ोर ही रहेंगे,
सरकारी स्कूल में डाल दो,
क्योंकि शिक्षा विभाग हम पर कोई कार्रवाई नहीं सकता…
ऐसे ही न जाने कितने परमाणु बम मारक क्षमता रखने वाले ऊल- जलूल ख़यालों के साथ उन हिटलर का मन शांत होता है,
आप समझ ही सकते हैं स्कूल वालों का मन जब शांत होता है तब एक अभिभावक के मन में सैलाब उमड़ रहा होता है, उसी सैलाब की ख़ामोशी को महसूस करते हुये हमने 02/04/2019 को अपर शिक्षा निदेशक महोदय को एक चिट्ठी लिखी थी, जिसमें हमने स्कूल खुलते ही निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिये कार्रवाई की मांग की थी लेकिन बड़े शिकारी जब बड़ी मछलियों के रेहबर बन जाएँ तो छोटी मछलियों को अपने परिवार दांव पर लगाने पड़ते हैं, यही हाल हमारे शिक्षा तंत्र में हो रहा है कौन सा स्कूल कितनी फीस बढ़ाएगा, किस मद के लिए कितना शुल्क तय किया जाये किसी को कोई परवाह नहीं हर स्कूल अपने -अपने समंदर के हिसाब से तय कर लेता है कि किस मछली का शिकार कब और कितना करना है,
ख़ैर,
हमने अभिभावकों को बार -बार जागरूक करने की कोशिश की है कि कोई भी अभिभावक किसी भी स्कूल प्रशासन के दबाव में न आएं, हाँ हम ये भी जानते हैं कि एक अभिभावक की मजबूरी हो जाती है स्कूल की हर मांग मान लेना क्योंकि वे सब नहीं चाहते कि उनके बच्चे के साथ स्कूल प्रशासन नफ़रत से पेश आये,
या उनकी ऊँची आवाज़
उनके बच्चे का भविष्य ख़ामोश कर दे, इसी बात का फ़ायदा स्कूल प्रशासन उठाता है और चला देता है, चाबुक अभिभावकों की इसी दुःखती रग पर…

आख़िर में,
प्रधानमंत्री महोदय,
मुख्यमंत्री महोदय,
शिक्षा मंत्री महोदय,
कुमाऊँ आयुक्त महोदय,
ज़िलाधिकारी महोदय,
अपर शिक्षा निदेशक महोदय,
मुख्य शिक्षा अधिकारी महोदय,
से तहे दिल से इल्तेजा है कि सूबे में निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने के लिये शुल्क नियामक अधिनियम को लागू कर सभी शिक्षण संस्थानों पर नकेल कसी जाये जिससे शिक्षा, शिक्षा ही रहे व्यापार न बने और नैनीताल के प्रकरण में जाँच कर उचित कार्रवाई करने की कृपा करें कि आख़िर क्यों इतनी शुल्क वृद्धि करके अभिभावकों को दबाव में लिया जा रहा है |

न काहू से दोस्ती,
न काहू से बैर

अंक 137: आज़ाद के तीर : पॉपुलर कंपाउंड में नल सूखे, सीवर झील में…(14 अप्रैल 2019)

कहीं पड़ा सूखा,
कहीं जल की बर्बादी,
कहीं सीवर जा रही झील में 
किसी ने कूड़ा फेंका नालों में
हुज़ूर, ये कैसी आज़ादी ?

साहिबान,
ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं वो दरअसल तस्वीर नहीं है बल्कि सबूत हैं उस गुनाह के जो जाने- अनजाने पॉपुलर कम्पाउंड मल्लीताल नैनीताल के इलाक़े में हो रहा है लेकिन हममें से किसी की निगाह उस पर नहीं पड़ रही, जिन महकमों की ज़िम्मेदारी बनती है, वो अपना -अपना मतदान करके हर फ़िक्र से आज़ाद हो गये हैं या यूँ कहें सो गए हैं, उन्हें न ही मोबाइल की घंटी सुनाई देती है और न ही शहर की हालत दिखाई देती है,
इसकी साड़ी मेरी साड़ी से सफ़ेद कैसे? ये लाइन तो आपने अक्सर सुनी होगी लेकिन ये कम्पटीशन की भावना सिर्फ़ महिलाओं में
ही नहीं होती जनाब
बल्कि सरकारी महकमों में भी होती है, इसकी बानगी आपने देखनी हो तो कभी पधारो म्हारे देस,
जी हाँ,
आप ज़्यादा दूर नहीं
जाइये बस नैनीताल आइये, यहां किसी भी गली मोहल्ले के किसी भी कोने से शुरुआत कर दें,
तो आप पाएंगे कि जगह -जगह सीवर लाइन लीक हो रही होगी, नालियों का गंदा पानी नालों में पहुंचने के लिये बेताब हो रहा होगा, जगह-जगह गंदगी के ढेर दिखाई देंगे, बेतरतीब रखे कूड़ेदान चीख -चीखकर ये ऐलान कर रहे होंगे कि हम तो ऐसे ही चौड़े होकर सड़क पर खड़े रहेंगे हमारा कोई कुछ नहीं सुधार सकता, नालों की क़िस्मत लोगों के घरों से निकले कूड़े से चमक रही होगी, कुल मिलाकर देखा जाये तो आप पाएंगे कि नाले साफ़ रहने चाहिये लेकिन वो कूड़ादान बने हैं, कूड़ादान जो साफ़ रहने चाहिये वो लबालब भर कर सड़क तक शैतान बने हुये हैं,
सरकार ने ग़रीबों के लिये जो कभी सरकारी नल लगाये थे,
वो सूखे खड़े हैं, और जिन नालियों में बारिश का पानी बहना चाहिये, वो सीवर की गंदगी लिये झील की तरफ़ सरपट दौड़ रही है, कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती
अब किसी भी दफ्तर में कोई भी फरियाद लेकर जाओ, दफ़्तर के मुअज़्ज़िज़ लोग अपनी -अपनी सफ़ाई का पिटारा खोलकर बहानों के साँपों को हमारे गले में डाल देते हैं या कुछ सज्जन उन बहाना रूपी साँपों को दरवाज़े के नीचे से दूसरे दफ़्तर में छोड़ देते हैं और जब उस दफ़्तर में जाकर हालात देखो तो वही सांप किसी तीसरे दफ़्तर के दरवाज़े में सरका दिया जाता है, बस यही सांप – मदारी का खेल देखते – देखते जनता मायूसी के आख़िरी सिरे तक जाती है और जब कुछ हासिल होता नहीं दिखता तो वो वापस आ जाती है, घर में बैठकर यही ख्याल आता है, कितने साल, दिन – रात बदल गये लेकिन ये सरकारी महकमों में बैठे हुये लोग कब बदलेंगे, यही सवाल कायनात में गूंजता रह जाता है और एक आम आदमी सरकारी दफ्तरों में घूमता रह जाता है…
आख़िर में,
मा.प्रधानमंत्री महोदय,
कुमाऊँ आयुक्त महोदय,
ज़िलाधिकारी महोदय,
अधिशासी अधिकारी महोदय
जल संस्थान, नैनीताल
अधिशासी अभियंता महोदय
सिंचाई खंड, नैनीताल,
अधिशासी अधिकारी /
पालिकाध्यक्ष महोदय
नगर पालिका नैनीताल,
समस्त सभासद महोदय / महोदया
आप सबसे तहे दिल से इल्तेजा है कि कभी पॉपुलर कम्पाउंड में जाकर देखें कि वहां की ग़रीब जनता किस हाल में रह रही है, यहां एक पुराना जनता नल हुआ करता था जिसमें पहले कभी पानी आता रहता था और आस पास के लोग उसमें से पानी भरकर गुज़ारा कर लेते थे लेकिन कई महीनों से वो नल सूखा पड़ा है, वो तो भला हो किसी खुराफाती इंसान का जिसने नल के नज़दीक नाले से गुजरने वाली पाइप लाइन को तोड़ दिया। अब सुबह-शाम जब भी पानी आता है वहां की ग़रीब जनता नाले में उतरकर अपनी जान को खतरे में डालकर उस पाइप लाइन से पानी भरती हैं और गुज़ारा करती है, वहीँ थोड़ी आगे सीवर लाइन फटने के कारण सीधे नाले में जा रही है। स्थानीय लोगों ने करीब 50 बार इसकी शिकायत भी कर दी है लेकिन किसी के कानों में जूं नहीं रेंग रही।

मेहरबानी करके सूखे नल में पानी सप्लाई करने, टूटी पाइप लाइन को जोड़कर पानी की बर्बादी रोकने और सीवर जो नाले में जा रही है उसे हटवाकर नैनी झील और नैनीताल के पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में मददगार बनकर एक मिसाल क़ायम करें …

न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर

अंक 136: चुनावी मेंढक और हम !(12 अप्रैल 2019) 

मैं भी चौकीदार

साहिबान,
चुनावी बरसात में कितने बरसाती मेंढक निकलते हैं,
सबके सब हर आंगन में जाकर टर्र -टर्र करते हैं और ये टर्र – टर्र मतदान से दो दिन पहले शाम 5 बजे बंद हो जाती है, इस बरसात में टरटराने वाले सारे मेंढकों की आवाज़ एक जैसी लगती है,
पहचानने के लिये हमने एक दिन इनमें से “सुरीला टरटराने” वाले मेंढकों को एक थाली में रखकर उनकी पहचान करनी चाही लेकिन ये क्या थाली में एक भी मेंढक नहीं टिका, सब एक के बाद एक फुदक कर थाली से बाहर निकल गये और हम उन्हें देखते रह गये, कि इतनी शिद्दत से हमारे दर पर टरटराने वाले मेंढक इज़्ज़त के साथ थाली में रखते ही उछल गये और किसी झाड़ी में जाकर छिप गये, अब तो टरटराने की आवाज़ भी नहीं आ रही, और हम समझ गये लगता है ये मेंढक अगली चुनावी बरसात में ही निकलकर आएंगे।

न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर

अंक 135 : एक अपील : किताबों को रद्दी न बनायें, यह करें… (8 अप्रैल 2019) 

साहिबान,
आप सबसे हमारी हाथ जोड़कर विनती है कि जिस तरह अमेरिका जैसे देश में शिक्षा सत्र के प्रारम्भ में बच्चों को किताबें दे दी जाती है जिससे वो अपनी पढ़ाई पूरी करते और दूसरी कक्षा में चले जाते हैं और फिर उन्हीं किताबों से उसके बाद वाले बच्चे पढ़ते हैं लेकिन हमारे देश में हर सत्र में नई किताबें बच्चों को खरीदने के लिये मजबूर किया जाता है, जैसे हर साल पाठ्यक्रम बदल जाता हो आख़िर क्यों हमारा शिक्षा विभाग इस तरफ़ ध्यान नहीं देता,
वैसे तो हम पर्यावरण के बड़े चिंतक बने घूमते हैं और जब नई किताबों की बात आती है तो हम मौन धारण कर लेते हैं, आख़िर कहाँ जाता है हमारा पर्यावरण प्रेम, दूसरी तरफ़ हम गरीबी का रोना रोते हैं लेकिन हर साल पुरानी किताबों को रद्दी में बेचने में और नई -नई महंगी किताबें खरीदते हुये हम धन्नासेठ बन जाते हैं,
आखिर क्यों हम इस कुप्रथा का अंत नहीं होने देते, आख़िर क्यों हम विरोध नहीं करते, क्यों हम न चाहते हुये भी लाखों पेड़ों के गुनहगार और लाखों दलालों के वफ़ादार न चाहते हुए हैं,
आख़िर में,
प्रधानमंत्री महोदय,
मुख्यमंत्री महोदय,
शिक्षा मंत्री महोदय,
कुमाऊँ आयुक्त महोदय,
जिलाधिकारी महोदय
हमारी इल्तेजा है कि जितने भी निजी और सरकारी स्कूल हैं उनमें किताबों के वितरण की प्रणाली को एक दूसरे के काम आने वाली बनाकर लागू करवाया जाये जिससे सबसे पहले अनावश्यक पेड़ों का कटान कम होगा, अभिभावकों के सर से बोझ कम होगा और दलालों की दुकान बंद हो जाएगी, करके देखिये जनाब
अच्छा लगेगा |
न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर

अंक 134 : जानें कहां फिर हुआ असर ‘नवीन समाचार’ व ‘आज़ाद मंच’ नैनीताल का (4 अप्रैल 2019) 

शुक्रिया : प्रशासन नैनीताल का

साहिबान,
हमने नवीन समाचार के स्तम्भ आज़ाद के तीर के 02/04/2019 के अंक में “सीज़न की धारदार तैयारियां शुरू” उन्वान के साथ नैनीताल शहर का हाल बयां किया था कि किस तरह यहां बड़ा बाज़ार को जाने वाले मेन गेट पर धारदार टीन निकला हुआ है जिससे कभी भी कोई हादसा हो सकता था, शासन -प्रशासन ने हमारी बात का संज्ञान लेते हुये उस पर तत्काल कार्रवाई की और उक्त तथाकथित टीन को वहां से हटाया गया जिसके लिये आज़ाद मंच परिवार शासन – प्रशासन का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता है और साथ ही ये भी उम्मीद करता है कि उक्त टीन के अलावा हमने जितने भी मौज़ू पर आपका ध्यान खींचने की कोशिश की गयी थी जैसे पार्किंग, उद्यान, साफ़ – सफ़ाई के इंतज़ामात, हमें उम्मीद के साथ पूरा यक़ीन है कि महज़ दो बेरी केडिंग व्यवस्था से ऊपर उठते हुए कोई बेहतर कार्य प्रणाली के साथ इस बार सीज़न व्यवस्था संभाली जाएगी, जिससे नगर हित के साथ – साथ पर्यटन हित भी बना रहे |

न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर

अंक 133 : नैनीताल में सीजन की ‘धारदार’ तैयारियां शुरू… जानें कैसे.. (2 अप्रैल 2019) 

जी हां, सीज़न की ‘धारदार’ तैयारियां शुरू हो गई हैं !
इसके लिए नुकीले टीन
मेन गेट पर लटका दिये गए हैं !
जगह- जगह से कूड़ेदान हटा दिये गये हैं !
पार्किंग व्यवस्था राम भरोसे छोड़ दी गयी है !
साहिबान,
सरोवर नगरी में सीज़न ने दस्तक दे दी है, तो हमारे यहां के शासन – प्रशासन ने भी लापरवाही में मिसाल बीसतक दे दी है, हुज़ूर आप कहेंगे ये क्या बात हुई और हम बोलेंगे यही तो बात हुई जो बार बार मिन्नतें करने के बाद भी हर साल इतने सबक़ के बाद भी हमारा शासन -प्रशासन कोई सीख नहीं लेता, बस लेता है तो दो बेरी केडिंग लेता है एक हल्द्वानी रोड पर और एक कालाढूंगी रोड पर लगा देता है,
और किसी भी वाहन को ऊपर नगर में आने नहीं देता, वाह भई वाह, ये तरकीब जिसने निकाली उसे लाखों तोपों की सलामी देने का मन करता है, बाई गॉड,
साला सांप भी नहीं मरा और लाठी भी तोड़ दी, इसे कहते है टैलेंट, जब टूरिस्ट ही ऊपर को नहीं आएगा तो न ही ट्रैफिक होगा, न प्रदूषण होगा, न गंदगी होगी, सब कुछ शांत रहेगा, तो बस कुछ नहीं करना है, दो पुलिस वाले इस रोड से टूरिस्ट को उधर लताडेंगे, दो उधर से इधर,
तो फिर वो जाएगा किसी और हिल स्टेशन, फ़िलहाल तो वो ये सोचकर रानीखेत- अल्मोड़ा का रुख ले लेगा के अब इतनी दूर आ ही गए तो क्या वापस जाएँ,
ख़ैर,
इससे नैनीताल के आस- पास के इलाकों की मांग बढ़ जाएगी बहुत ख़ुशी की बात है लेकिन आपने वो गाना तो सुना ही होगा जिसमें इन्हें पंछी कहा गया है कि “रात को ठहरे तो उड़ जाएँ दिन को, आज यहां कल वहां है ठिकाना” जी
बस एक -दो बार तो नैनीताल के नाम पर टूरिस्ट कहीं और चला जाएगा लेकिन अगली बार हमारे प्रशासनिक बेहतरीन इंतज़ामात की वजह से अगली बार नैनीताल आने से पहले दस बार सोचेगा के अगर इस बार भी वहां हाउस फुल का बोर्ड लगा दिया फिर क्या होगा ?
ख़ैर, उसके लिये घूमने की जगह कम नहीं है उत्तराखंड में ही ऋषिकेश, मसूरी, पिथौरागढ़, कौसानी, बागेश्वर, रानीखेत, अल्मोड़ा जैसे बेहद खूबसूरत पहाड़ी क्षेत्र हैं, जहाँ वो घूमने जा सकता है, फिर धीरे -धीरे सरोवर नगरी में वही टूरिस्ट आएंगे जो रोड़वेज़ की बस में ₹65 रूपये का किराया लगाकर आएगा, ₹10 में शेयरिंग रिक्शे में बैठेगा और एक चक्कर चाट मार्केट जाएगा, ₹50 की सोनम की चाऊमीन खाकर, ठंडी सड़क
पर सेल्फी खींचता हुआ, वापस रोडवेज़ की बस में बैठकर ₹65 का टिकट खरीदकर घर वापस लौट जाएगा,
न टैक्सी वालों को कोई पूछेगा,
न किसी गाइड से कोई होटल पूछेगा, सब मस्त आराम से चैन की बंशी बजाएंगे,
शहर की हालत पर क्या बोला जाये, पार्क, सड़कें, साफ़ – सफ़ाई और कूड़ेदान की व्यवस्था चीख – चीखकर अपने पैरों को देखकर आज भी रोती है …
न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर

अंक 132 :  आ गया देश का पहला लोकपाल, ऐसी बदलेंगी व्यवस्थायें..(25 मार्च 2019)

देश के पहले लोकपाल न्यायमूर्ति पिनाकी घोष

भ्रष्टाचार का सीसीटीवी लोकपाल !
लोकपाल से जगी उम्मीदें !
देश को मिला पहला लोकपाल

साहिबान,
ये बेहद ख़ुशी की बात है कि
हमारे देश को जस्टिस पिनाकी घोष के रूप में पहला लोकपाल मिल गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू और मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की मौजूदगी में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने उन्हें शपथ दिलाई।

जस्टिस घोष के साथ न्यायिक सदस्यों के तौर पर जस् कुमार त्रिपाठी, जस्टिस अभिलाषा कुमारी, जस्टिस दिलीप बी.भोंसले और जस्टिस प्रदीप कुमार मोहंती को शामिल किया गया है। न्यायिक सदस्यों के साथ ही कमेटी में 4 और सदस्यों के तौर पर दिनेश कुमार जैन, अर्चना रामसुंदरम, महेंद्र सिंह और इंद्रजीत प्रसाद गौतम भी रहेंगे।
जस्टिस पी. सी. घोष राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्‍य रह चुके हैं। जस्टिस घोष को मानवाधिकार कानूनों के जानकार के तौर पर भी जाना जाता है। लोकपाल केंद्रीय सतर्कता आयोग के साथ मिलकर काम करेगा। लोकपाल सीबीआई समेत किसी भी जांच एजेंसी को आरोपों की जांच करने का आदेश दे सकेगा। इसके अलावा इसकी जांच के दायरे में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री सांसद और सभी तरह के कर्मचारी आएंगे ये और भी ख़ुशी की बात है, अब कोई नहीं बच सकता भ्रष्टाचार पर नकेल लगाने के लिये सीसीटीवी होना बेहद लाज़मी था, अब आम जनता को इससे काफ़ी उम्मीदें जागी हैं, और हम इस क़दम के लिये भारत सरकार का शुक्रिया अदा करते हैं,
और उम्मीद करते हैं कि लोकपाल रूपी सीसीटीवी
जिस मक़सद के साथ लागू किया है हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यक़ीन है वो 24 घंटे हर पल देश की नब्ज़ के हाल से रूबरू रहेंगे और किसी भी भ्रष्टाचार की शिकायत पर तत्काल एक्शन लेंगे, फिर चाहे उनके सामने कोई तुर्रम खां ही क्यों न हो, और साथ ही ये भी दुआ है कि हमारे लोकपाल रूपी सीसीटीवी में कभी शार्ट सर्किट न हो और न ही किसी जहां पनाह की तौलिया सुखाने के लिये सीसीटीवी पर डाली जाये,
फिर असली मक़सद पूरा होने में कोई माई का लाल हो या काला, या गोरा कोई नहीं रोक सकता,
अब भ्रष्टाचारियों की दाल नहीं गलने वाली नहीं |

अंक 131 : एक ‘करेला’ जो आज ‘नीम’ पर चढ़ गया…, बूझो कौन ? (24 मार्च 2019)

एक तो था ही कड़वा
ऊपर से नीम पर चढ़ गया!
अब कुछ पता नहीं,
कब तक पेड़ पर से उतरेगा?

साहिबान,
हमारे शहर में एक करेला था,
आप ये मत कहियेगा जनाब कि करेला वो भी शहर में,
ये क्या माजरा है,
अरे हुज़ूर, माजरा कुछ नहीं है बस करेले की कहानी पर फोकस करिये तो फ़ायदा महसूस होगा, तो साहब
वो करेला अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आता था इसलिए मशहूर भी था, जिसके मुंह भी लगता उसका मुंह कड़वा हो जाता, फिर चाहे शहर वाला हो या गांव वाला कोई भी उससे मुंहज़ोरी नहीं करना चाहता था, उसमें बस एक गुण था, वो मिलता हर जगह था, चाहे गिनती में एक हो या दो लेकिन मिल ज़रूर जाता था, इसलिए इसी ख़ूबी की वजह से गाँव- देहात के लोग तो उसे भगवान से कम नहीं मानते और ये बात किसी ने एक दिन करेले को बता दी, फिर क्या था ?
भाव बढ़ गये तब से उसके, और इन्हीं भावों की वजह से करेले का सर सातवें आसमान पर रहता और पैर सातवीं ज़मीन पर, अगर उसका बस चलता तो आठवीं, नौवीं या दसवीं ज़मीन भी कम पड़ जाती उसके लिये,
अब जिसके सर, पैर, दिमाग़ अपनी-अपनी जगह पर न हो वो भला कब तक ख़ैर मनाता,
हो गयी एक दिन, टांय-टांय फिस्स, जिस गांव-देहात के लोग करेले को भगवान मानते उन लोगों को भी आईडिया आ गया कि करेले के नाम बड़े और दर्शन छोटे हैं, और उन्होंने अपने घरों से करेले की पुरानी से पुरानी बेलों को भी उतारना शुरू कर दिया, देखते ही देखते करेले की गुणवत्ता पर से लोगों का भरोसा उठने लगा, सब एक ही ज़ुबान में बस एक ही बात बोलने लगे,
जब इस करेले की बेल
*भगवान से न लगे* तो हम तो फिर भी इंसान ठैरे, और धीरे -धीरे करेले के चाहने वालों की गिनती कम होती चली गयी, फिर एक दिन तो ऐसा आया बाई गॉड,
वो कहते हैं न ऊपर वाले की लाठी में आवाज़ नहीं होती, बस एक दिन पड़ गयी भगवान की बेआवाज़ लाठी और लग गयी करेले की फसल में आग, ऐसे में उन लोगों को उस आग में हाथ सेंकने का मौक़ा मिल गया जिन लोगों के मुंह का स्वाद करेले ने कड़वा किया था, देखते ही देखते सब कुछ जलकर खाक हो गया, हाँ करेला फिर भी बच गया क्योंकि करेला था बहुत शातिर, जैसे ही आग लगी वो अपने कुछ साथियों के साथ नीम के पेड़ पर चढ़ गया, फिर क्या था उसके चाहने वाले और न चाहने वाले सब यही कहने लगे कि देखते हैं, आग बुझने के बाद पहले जैसा कड़वा स्वाद अब कब तक आएगा ?
वरना करेले की बला से,
उसे क्या फ़र्क़ पड़ता है, वो तो था ही कड़वा अब नीम पर चढ़ा है ही,
सीधा सा फंडा है जिनको ज़्यादा ही कड़वा लगे वो बाज़ार जाओ और अपने आइडिया से कुछ मीठा खरीदकर खाओ और जिओ जी भरके |

अंक 130 : आज मजदूरों के दर्द पर (13 मार्च 2019)

ज़िम्मेदारी बनी मजबूरी !

मजबूरी बनी मज़दूरी !

न कोई न्यूनतम वेतन !

न कोई निश्चित काम के घंटे !

न कोई अवकाश !

न कोई त्यौहार !

न कोई पेंशन !

न कोई बीमा !

साहिबान,
आज फिर हम बात करेंगे उसी मज़दूर तबक़े की जिसे इंसान तो कहा जाता है लेकिन उसके साथ इंसानों जैसा बर्ताव नहीं किया जाता, अक्सर आपने देखा होगा किसी दुकान में, किसी रेस्टौरेंट में, किसी छोटी सी फैक्टरी में या किसी घर में काम करते हुये नौकरों को,
हालाँकि, बड़ी -बड़ी फैक्ट्री, कारखानों में तो फिर भी नियमों- उपनियमों का पालन हो जाता है, लेकिन जिस जगह की हम बात कर रहे हैं, वहां न कोई नियम होता है, न कोई पालन,
वहां होती है फ़क़त काम करने वाले की मजबूरी और काम पर रखने वाले की तानाशाही,
शहरों की इन दुकानों में, होटलों में कोई श्रम विभाग का अधिकारी झांकने तक नहीं जाता, कहीं – कहीं तो इन जगह पर काम करते हुए आपको छोटे -छोटे मासूम बच्चे जिनकी उम्र खेलने कूदने और पढाई करने की होती है वे बच्चे अपने मालिकों की सेवा करते दिख जाएंगे, इस सेवा के बदले उनके मालिकों की उनपर
ये मेहरबानी होती है कि न तो
उनकी कोई न्यूनतम मज़दूरी तय होती है, न उनको कोई उचित वेतन मिलता है, और न ही उनको कोई अवकाश दिया जाता है, 24 घंटे में से लगभग 16 घंटे काम ही काम, यहां तक कि उनके हिस्से से त्यौहारों की रौनक़ भी छीन ली जाती है, न ही काम के घंटे तय होते हैं, न दुर्घटना होने पर कोई बीमा या मदद मिलती है, मिलती है तो बस ज़िल्लत और रुस्वाई, छोटी सी ग़लती पर मालिक की गालियां और मार खा खाकर यहां काम करने वाले बच्चे कब जवान हो जाते हैं और एक ही जगह काम करते हुये ये कब बूढ़े हो जाते हैं, कुछ पता नहीं लगता, जब तक इनके हाथ पैर सही सलामत होते हैं इनको थोड़े बहुत पैसे मिलते रहते हैं लेकिन जैसे ही ये बीमार या किसी दुर्घटना में घायल हो जाते हैं वही धन्ना सेठ मालिक उन्हें पहचानने तक से इंकार कर देते हैं, उस वक़्त उस बेचारे ग़रीब पर क्या बीतती होगी जिसने बचपन से लेकर जवानी और बुढ़ापा तक उस ज़ालिम सेठ की सेवा में लगाया हो, ऐसी हालत में आखिरकार वो बेचारा या तो अपने घर लौट जाता है या यूँ ही दर दर की ठोकरें खाने पर मजबूर हो जाता है,
ख़ैर,
मज़दूरों के क्या अधिकार हैं,
उनके बारे में जानते हैं :-
मजदूरी के अधिकार

न्यूनतम मजदूरी अधिनियम,1948 में विभिन्न प्रकार के कार्यों के लिए न्यूनतम मजदूरी की दरें तय की गयी हैं।

1- मजदूरी के बारे में अपने नजदीकी श्रम कार्यालय में से कोई भी व्यक्ति किसी भी वर्ग की न्यूनतम मजदूरी का पता कर सकता है ।

2- अगर नियोक्ता न्यूनतम मजदूरी से कम मजदूरी दे रहा है तो श्रम निरीक्षक के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं ।

3- अगर कर्मचारी न्यूनतम मजदूरी से कम रकम पर काम करने को तैयार हो जाए, तो भी नियोक्ता का यह कर्तव्य है कि वह उसे न्यूनतम मजदूरी दे।

मजदूरी का भुगतान

1-मजदूरी का भुगतान हमेशा नकद और पूरा होना चाहिए।

2-मजदूरी का भुगतान हर हालत में अगले महीने की दस तारीख तक कर दिया जाना चाहिए।

3-मजदूरी में कोई कटौती कानून के मुताबिक ही होनी चाहिए।

समान कार्य के लिए समान मजदूरी

समान वेतन अधिनियम, 1976 में एक ही तरीके के काम के लिए समान वेतन का प्रावधान है।

1-अगर कोई महिला अपने साथ काम करने वाले पुरुष जैसा ही काम करती है तो उसे पुरुष से कम वेतन नहीं दिया जा सकता है।

2-महिला (कानूनी पाबंदी वाली नौकरियों को छोड़कर) और पुरुष में नौकरी में भर्ती और सेवा शर्तों में कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा।

काम करने के निश्चित घंटे

1-किसी कर्मचारी से रोज नौ घंटे से ज्यादा काम नहीं लिया जाना चाहिए।

2- नौ घंटे से ज्यादा काम के लिए, अतिरिक्त मजदूरी दी जानी चाहिए।

3-कर्मचारी को सप्ताह में एक दिन वेतन-सहित अवकाश जरुर मिलनी चाहिए।

कर्मचारियों को मुआवजा

कामगार मुआवजा अधिनियम, 1923 के अंदर्गत कर्मचारियों को अनेक परिस्थितियों में मुआवजा पाने का अधिकार है।

1-कर्मचारी को ड्यूटी के दौरान किसी दुर्घटना में चोटिल होने पर मुआवजा पाने का अधिकार ।

2-काम पर आते या काम से घर जाते समय दुर्घटना होने पर भी कर्मचारी को मुआवजा पाने का अधिकार।

3-नियोक्ता का काम करने के दौरान दुर्घटना होने पर भी मुआवजा पाने का अधिकार ।

4-काम की प्रकृति की वजह से अगर कर्मचारी को कोई बीमारी लगती है तो कर्मचारी को मुआवजा पाने का अधिकार है।

5-लेकिन अगर बीमारी काम छोड़ने के दो साल बाद लगती है तो कर्मचारी को मुआवजे का अधिकार नहीं है।

6-अगर दुर्घटना या बीमारी से कर्मचारी की मौत हो जाती है तो उसके आश्रित संबंधी को मुआवजा दिया जायेगा।

मुआवजे का हकदार

1-फैक्ट्रियां, खानें, रेलवे , डाक, तार, निर्माण, इमारतों का रख-रखाव,

2-किसी इमारत में इस्तेमाल , परिवहन तथा बिक्री के लिए सामान रखना, जहां 20 से ज्यादा कर्मचारी हों।

3-टैक्टर अथवा अन्य मशीनों से खेती-बाड़ी, इसमें मुर्गी फार्म, डेयरी फार्म आदि शामिल हैं।

4-बिजली की फिटिंग के रख-रखाव का काम।

किस चोट पर मुआवजा

1-ऐसी चोट जिससे मौत हो जाए, शऱीर का कोई अंग कट जाए या आंख की रोशनी चली जाय आदि।

2-चोट की वजह से लकवा या अंग-भंग जैसी हालत हो जाए, जिसकी वजह से व्यक्ति रोजी-रोटी कमाने लायक नहीं रहे।

3-ऐसी चोट जिसकी वजह से कर्मचारी कम से कम तीन दिन तक काम करने के लायक ना रहे।

किस चोट पर मुआवजा नहीं

1-शराब पीने या नशीली चीजों के सेवन से दुर्घटना हुई हो।

2-कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए बने किसी नियम या निर्देश का जान-बूझकर उल्लंघन करने से हुई दुर्घटना।

3-कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध उपकरणों का जानबूझकर इस्तेमाल नहीं करने से हुई दुर्घटना।

मुआवजे लिए प्रमाण

1-कर्मचारी को सबसे पहले अपनी मेडिकल जांच करा लेनी चाहिए। जांच की रिपोर्ट की कॉपी अपने पास रखें।

2-कर्मचारी दुर्घटना की रिपोर्ट नजदीकी थाने में लिखवा देना चाहिए । रिपोर्ट में चोट का पूरा ब्योरा होना चाहिए।

3-दुर्घटना के चश्मदीद गवाह होने चाहिए।

महिला कर्मचारियों को विशेष अधिकार

1-फैक्ट्रियों में महिलाओं के लिए अलग प्रसाधन कक्ष होना चाहिए।

2-अगर किसी फैक्ट्री में 30 से ज्यादा महिला कर्मचारी हों तो वहां बच्चों के लिए शिशुगृह की व्यवस्था होनी चाहिए।

3-फैक्ट्री में काम सवेरे 6 बजे से शाम 7 बजे के बीच होना चाहिए।

4-मशीन में तेल डालने या साफ कराने का काम नहीं कराया जाना चाहिए।

5-एक सप्ताह में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जाना चाहिए।

6-लगातार 5 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराया जाना चाहिए।

7-खानों में जमीन के नीचे काम करने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए |

मुआवजे का दावा

1-दुर्घटना होने पर सबसे पहले नियोक्ता को नोटिस दें, नोटिस में कर्मचारी का नाम, चोट के कारण , तारीख और स्थान लिखें।

2-अगर नियोक्ता मुआवजा नहीं देता या पर्याप्त मुआवजा नहीं देता है तो कर्मचारी लेबर कमिश्नर को आवेदन दे।

3-आवेदन में कर्मचारी का पेशा, चोट की प्रकृति, चोट की तारीख, स्थान , नियोक्ता का नाम, पता नियोक्ता को नोटिस देने की तिथि, अगर नियोक्ता को नोटिस नहीं भेजा हो तो नोटिस नहीं भेजने का कारण का उल्लेख करें ।

3-यह आवेदन दुर्घटना होने के 2 साल के अंदर दे दिया जाना चाहिए। विशेष हालात में 2 साल के बाद भी आवेदन किया जा सकता है।

4-कुछ मामलों में मुआवजा श्रम आयुक्त के जरिये ही दिया जा सकता है। जैसे, कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में, उसके संबंधियों को श्रम आयुक्त के माध्यम से ही मुआवजा दिया जा सकता है।

महिलाओं का मातृत्व लाभ

मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 में महिला कर्मचारियों के लिए कुछ विशेष लाभ दिए गए हैं।

1-प्रसव के पहले और बाद में छह-छह सप्ताह का पूरे वेतन का अवकाश( 12 सप्ताह का अवकाश प्रसव के बाद भी लिया जा सकता है, इस अवधि का वेतन दे दिया जाना चाहिए)

2-गर्भस्राव हो जाने पर छह सप्ताह का अवकाश।

3-गर्भावस्था, प्रसव या गर्भस्राव की वजह से अस्वस्थ हो जाने पर वेतन सहित एक महीने का अतिरिक्त अवकाश।

4-अगर नियोक्ता के संस्थान में प्रसव से पहले तथा प्रसव के बाद की चिकित्सा सुविधाएं नहीं हैं तो चिकित्सा बोनस दिया जाना चाहिए।

5-शिशु के 15 महीने का होने तक रोजाना काम के बीच सामान्य अवकाश के अलावा, शिशु को स्तनपान कराने के लिए दो बार ब्रेक दिया जाना चाहिए।

6-गर्भावस्था के अंतिम महीने में महिला कर्मचारी से भारी काम नहीं कराया जाना चाहिए।

7-अगर महिला की प्रसव के बाद मौत हो जाती है तो नियोक्ता को उसके परिवार को 6 सप्ताह का वेतन देना होगा।

8-जबकि नवजात शिशु की मौत हो जाने पर , शिशु की मृत्यु हो जाने तक की अवधि तक का ही वेतन देना होगा।

9-जिस महिला ने प्रसव से पहले, पिछले 12 महीनों में कम से कम 80 दिन नियोक्ता के संस्थान में काम किया है, वहीं महिला इन लाभों को पाने की अधिकारी है।

गर्भावस्था का नोटिस

1-महिला कर्मचारी को प्रसव की संभावित तिथि, छुट्टी लेने की संभावित तिथि और प्रसव के दौरान किसी दूसरी जगह नहीं करने के विवरणों के साथ गर्भावस्था का नोटिस देना चाहिए।

2-यह नोटिस प्रसव के बाद भी दिया जा सकता है।

3-अगर किसी महिला ने गर्भावस्था का नोटिस नहीं या है तो इस आधार पर नियोक्ता उसे मातृत्व से जुड़े लाभ और सुविधाएं देने से मना नहीं कर सकता है।

शिकायतों का निपटारा

1-अगर नियोक्ता कर्मचारी को उसके लाभ नहीं देता है तो वह श्रम कार्यालय अथवा श्रम आयुक्त के पास शिकायत कर सकता है।

2-500 से ज्यादा कर्मचारियों वाली फैक्ट्री तथा खान में और 300 से ज्यादा कर्मचारियों वाले बागान में कल्याण अधिकारी की नियुक्ति अनिवार्य है।

3-केंद्र सरकार के अनेक कार्यालय, अस्पताल तथा अन्य कल्याण अधिकारी नियुक्त करते हैं। जहां कर्मचारी शिकायत कर सकते हैं।

आख़िर में,
हमारा सरकार व प्रशासन से यही सवाल है कि इतने नियम अधिनियम बनाने के बावजूद भी अगर हमारे देश में मज़दूरों, कामगारों, कर्मचारियों आदि की हालत में सुधार नहीं आता तो क्या महज़ फाइल भरने के लिये ही बनाये गये हैं उपरोक्त नियम / अधिनयम ?
जब तक हमारे समाज से धन्ना सेठों की तानाशाही खत्म नहीं हो जाती तब तक हमारे समाज के मासूम बच्चों और ऐसे ही न जाने कितने निजी कर्मचारी शोषण का शिकार होते रहेंगे और ये तानाशाही तब ही खत्म होगी जब सरकार और प्रशासन में बैठे हुये लोग जागेंगे और जागकर उक्त नियमों व उप नियमों का पालन करवाएंगे, फिर बनेगा
हमारा
उदयमान भारत,
खुशहाल भारत |

न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर

अंक 129 : आज पलायन के दर्द पर (12 मार्च 2019)

एक सफ़र :
मजबूरी से मज़दूरी तक !
आज़ादी से ग़ुलामी तक !
बेरोज़गारी से बीमारी तक !

साहिबान,
एक अर्सा पहले की बात है,
सर्दी अपनी उम्र की ढलान पर मौसम से अपना रौब खो रही थी, गर्मी नवजात शिशु की तरह हर दिल को भा रही थी, बस ऐसे ही किसी सुनहरी सुबह को मेरा दोस्त अपने पहाड़ी पुस्तैनी गांव में अपनी माँ से उस कच्चे गोबर वाले घर में माँ को छोड़कर शहर जाने की बात करने लगा, उसने गांव के ही किसी लड़के से शहर के ठाट -बाट की बात सुनी थी, बस तभी से उसका मन शहर की चकाचौंध को अपना हमदर्द समझ रहा था, बच्चे चाहे कितनी ही चिकनी चुपड़ी बातों से माँ को बेहलाने की कोशिश करें माँ समझ तो जाती है लेकिन अपने मासूम बच्चे की आँखों में जो उम्मीदों की चमक वो देखती है बस वही देखकर ख़ामोश रह जाती है और जब नए परिन्दें उड़ने के लिये अपने पंख फड़फड़ाते हैं तो अपने बच्चों को दर्द में देखकर परिंदों की माँ को भी दर्द होता है लेकिन ख़ुशी इस बात की ज़्यादा होती है कि आज से मेरा बच्चा आसमान में अपनी परवाज़ खुद भरेगा, हर तूफ़ान का सामना खुद करेगा, उस वक़्त माँ बच्चे को हौसला देती है और वही हौसला, मेरे दोस्त को शहर ले आया, जो पहाड़ी पर ही बसा हुआ था, जहां बारह महीने सैलानी घूमने आते, इस लिहाज़ से वहां होटल, रेस्टौरेंट, दुकाने बहुत ज़्यादा थी, जिस दोस्त ने मेरे दोस्त की आँखों में सपने भरे थे, उसी ने अपने बदले एक दुकान में उसे बतौर नौकर रखवा दिया और ख़ुद को मक्खन में से छुरी की तरह अलग करता हुआ, न जाने कहाँ ग़ायब हो गया,
ख़ैर, जो चला गया उसका भगवान भला करे उसके लिये दुआ की और खुद लग गया मालिक की सेवा में, उसने दुकान को सुबह ठीक नौ बजे खोलना शुरू कर दिया, दोपहर में अपने मालिक का खाना उसके घर से लाकर देना और पिछली रात का बचा हुआ खाना खुद खाकर दुकान पर वापस काम पर लग जाना, रात को 11 बजे तक दुकान बंद करके मालिक के घर दिन का बचा खाना खाना और गोदाम में जाकर चुपचाप सो जाना, बस यही दिनचर्या में कब दिन, महीने, साल बीत गये पता नहीं चला, क्यूंकि उसमें सहने की ताक़त हर ज़ुल्म से ज़्यादा बड़ी थी, त्यौहार भी नौकरी की भेंट चढ़ते चले गये, हाँ उसे तसल्ली इस बात की रहती कि गांव जाने वाली केमू की बस में अपनी माँ को वो हर महीने पैसे टाइम से भिजवा देता, जैसे तैसे सबकुछ ठीक चल रहा था कि एक दिन एक तेज़ रफ़्तार गाड़ी ने उसे टक्कर मार दी और वो बेहोश हो गया, जब उसे होश आया तो सरकारी अस्पताल में था और उसके पैर पर प्लास्टर, सर पर पट्टी और हाथ से ख़ून की बोतल चढ़ रही थी, वो घबरा गया और आसपास देखा, वहां मरीज़ों के अलावा कोई नहीं, फिर एक नर्स आयी उसने बताया आपका एक्सीडेंट हो गया था, गाड़ी वाला भाग गया और आपको कुछ लोग यहां लेकर आये, घर का नंबर दे दो, हम आपके घर वालों को बता देते हैं, माँ को परेशान नहीं करना चाहता सोचकर उसने कोई जवाब नहीं दिया और जब पैर का प्लास्टर खुला तो वो अपने मालिक के पास पहुंचा जहाँ उसके जैसा कोई गांव का दूसरा लड़का काम पर लग गया था, उसने मालिक को सलाम किया लेकिन मालिक ने उसे ग़ैरों सी नज़रों से देखा और कोई तवज्जो नहीं दी, कुछ देर वो उसका चेहरा देखता रहा लेकिन मालिक अपने नोटों की गड्डियां गिनने में इतना मसरूफ़ था कि वो मासूम लड़का कब उसकी आँखों से ओछिल हो गया कुछ पता नहीं चला, शायद मालिक चाहता भी यही था, गांव की गाड़ी में बैठकर वो वापस गांव की पगडंडियों पर लड़खड़ाता हुआ अपने गोबर से बने कच्चे घर के सामने खड़ा होकर सोचता है कि जब वो अपने घर से निकला था तब उसके पास उम्मीदें, उमंगें, जोश और जुनून था लेकिन आज न सेहत है, न पैसा, न कोई ख़्वाब, साथ है तो बस ईमानदारी, लगन और मेहनत जिसके दम पर वो अपनी माँ की दुआओं से फिर सेहतमंद हुआ और अपने पुश्तैनी खेत में खेती करने लगा, आज ऊपर वाले ने अपनी मेहर उस पर बरसा रखी है, गोबर का घर पक्का दो मंज़िला बन गया, शादी हो गयी, उसकी माँ अपने पोते को बड़े नाज़ से खिलाती है भरा पूरा परिवार हंसी ख़ुशी अपनी ज़िंदगी अपने गांव में बिता रहा है।

“पलायन का अंत करें
अपना गांव रोशन करें”

न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर..

अंक 129 :  महिलाओ सहना छोड़ो-कहना सीखो… (8 मार्च 2019)

ज़िंदगी तो है अमल सब्र के क़ाबू में नहीं,
नब्ज़ का गर्म लहू, ठन्डे से आंसू में नहीं,
उड़ने खुलने में है ख़ुश्बू, ख़में गेसू में नहीं,
जन्नत एक और है,
जो मर्द के पहलू में नहीं,
उसकी आज़ाद रविश पर ही मचलना है तुझे,
जिस मैं जलता हूँ,
उसी आग में जलना है तुझे,
क़द्र अब तक तेरी तारीख़ ने जानी ही नहीं,
रोशनी भी तेरी आँखों में
पानी ही नहीं,
हार तूने कभी तक़दीर से
मानी ही नहीं,
हर अदा तेरी क़यामत है
जवानी ही नहीं,
अपनी तारीख़ का उन्वान
बदलना है तुझे,
उठ मेरी जान,
मेरे साथ ही चलना है तुझे।।।

साहिबान,
कैफ़ी आज़मी साहब की नज़्म के साथ आज अपनी बात आपके सामने पेश करने की हिम्मत कर रहा हूँ, 08 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है, बेशक़ मनाना भी चाहिये। लेकिन क्या सिर्फ़ एक दिन हम महिला सम्मान, महिला सम्मान की झूठी दलीलें पेश करके नहीं रह जाते, फिर उसके अगले दिन से ही जैसे अक्सर होता आया है, सब नॉर्मल हो जाता है, लोग उसी ढर्रे पर चलने लगते हैं, बाज़ार, गली, मोहल्लों में हर चौराहे पर भूखे भेड़ियों की तरह औरत ज़ात को लार टपकाते देखने लगते हैं, यहां हम हर मर्द ज़ात को गुनाहगार साबित नहीं कर रहे बल्कि हमीं में से छिपे हुये कुछ हैवान होते हैं, जो मासूम बच्चियों तक को अपनी हवस का शिकार बना लेते हैं, उनकी नज़र में औरत ज़ात के मायने महज़ भोग विलास की वस्तु है, हमारा समाज जब तक इन गिद्धों से निजात नहीं पा लेगा तब तक हमें महिला सम्मान, महिला सम्मान चीख – चीखकर दिखावा करने की ज़रूरत नहीं है, औरत ज़ात किसी सम्मान की मोहताज नहीं है, अरे जनाब,
हमें तो अपने देश में हुये निर्भया कांड से भी सीख नहीं मिली, उसके बाद भी न जाने कितनी निर्भया हैवानों की हैवानियत का शिकार हुईं, जब तक हम अपनी सोच को बड़ा नहीं कर लेते हमें कोई हक़ नहीं, महिला दिवस पर सफ़ेद कुर्ता पहनकर बड़ी बड़ी बातें करने की, ऑफिस का माहौल या कॉलेज का सब जगह छोटी सोच वाले ठरकी क़िस्म के लोग मिल ही जाएंगे,
ख़ैर,
हमें ख़ुशी इस बात की है कि आज इतनी सुलगती फ़िज़ा में भी कुछ दिल को ठंडक देने वाली हिम्मती लड़कियां आगे आ रही हैं जो और लड़कियों को अपना हक़ मांगना नहीं छीनना सीखा रही हैं,
जो बुलेट पर घूमती हैं, लड़कों के जैसे कपड़े भी पहनती हैं और कभी -कभी तो सिगरेट के कश भी मार लेती हैं, कुल मिलाकर इन परवाज़ भरने वाली लड़कियों को एक तब्क़ा भले ही उनके पीठ पीछे कुछ भी कहता फिरे, लेकिन जिन हैवानों ने धरती पर ही नरक बना दिया है, उन हरामखोरों का मुंह तोडना भी ये दिलेर लड़कियां जानती हैं,
इसलिये बाक़ी सीधी -सादी लड़कियों चलना नहीं उड़ना सीखो, बाइक पर चलने वाली इन लड़कियों से थोड़ा टशन किराये पर ले लो और फिर देखना कोई भी बुरी नीयत वाला पास आना तो बहुत दूर तुम्हारी तरफ़ आँख उठाकर नहीं देखेगा,
इसलिये सहना छोड़ो, कहना शुरू करो तभी हम असल मायनों में एक नया भारत देखेंगे, जब लड़की को कमज़ोर नहीं समझा जाएगा, उसे भी हर जगह उसी अनुपात में इज़्ज़त मिलेगी जितनी किसी मर्द को मिलती है, पैर से मोच निकालो और दिमाग़ से छोटी सोच निकालो,
फिर अगले साल देखना असली वाला
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस जब एक भी बलात्कार की घटना हमारे देश या विश्व में नहीं होगी,
और हमारे समाज की लड़कियां निडर होकर तितली बनकर उड़ रही होंगी वो होगा हर महिला के लिये असली सम्मान, सच्चा सम्मान |
आइये एक नये युग की शुरुआत करें,
आग़ाज़ करें।

अंक 128 :’शत्रु की संपत्ति’ के आखिर कौन हैं ‘शत्रु’ ? (7 मार्च 2019)

आकाश से गिरी बिजली ! दुश्मन न करे दोस्त ने वो काम किया है !

साहिबान,
हमारे शहर में एक बेहद पुरानी इमारत मौजूद है, जिसे दुश्मन की मिल्कियत कहा जाता है, उसका कुछ हिस्सा फिर से जलकर खाक हो गया, सुना है उस बारे में ज़िले के मुखिया ने जाँच के हुक़्म दिये हैं,
ख़ैर,
हमारे मन मंदिर में तो आज तक किसी जाँच ने कोई घंटी नहीं बजाई हों, फिर ज़्यादा दूर ही क्या जाना 20 रुपये का रिक्शा करो और पहुंच जाओ वहीं जहाँ हमारे ज़िले के मुअज़्ज़िज़ लोग बैठते हैं, कुछ साल पहले भी आग लगी थी, तब भी तत्कालीन साहब ने इसी टाइप वाली जाँच के आदेश दिये थे। वो जाँच कहाँ तक पहुंची कोई कंडक्टर बताएगा या उस ड्राइवर से पूछें जिस गाड़ी में जाँच आ रही है। हो सकता है वो हमारी तरह पैदल ही हो शायद इसलिये कहीं टाइम से नहीं पहुंच पा रही। वाह भई, हम तो आज तक उसी चौखट पर पलकें बिछाये बैठे हैं कि क्या पता कहीं से कोई जाँच पायल छनकाती हुई जीवन में आ जाये। सुबह से शाम दिन रात सब गुज़र गये लेकिन कोई उम्मीद लेकर नहीं आया।
अब तो ये जांचें भी बेवफ़ा साबित होती जा रही हैं…।
ख़ैर,
जाँच में स्टेमिना तगड़ा होता है लम्बी चलती हैं। हमें तो ख़ुफ़िया बात ये भी पता लगी है कि दुश्मन मुल्क़ के पहले मुखिया इस दुश्मन जायदाद में जब ये शानदार होटल हुआ करता था आये भी थे। कुछ लोगों की मनहूसियत ऐसी शदीद तरीन होती है कि हज़ार उल्लुओं की मनहूसियत भी कम पड़ जाये।
शानदार इमारत का उजड़ना लाज़िमी था, ख़ुदा का शुक्र है हमारे मुल्क़ को ऐसी मनहूसियत से तो निजात मिली…।
ख़ैर
आख़िर में,
हमारा शासन – प्रशासन से एक छोटा सा सवाल है कि क्या शत्रु सम्पत्ति का मतलब ये है कि उसमें शराबियों, नशेड़ियों, जुआरियों का अड्डा बनाने की आज़ादी दे दी जाये ? क्या शत्रु सम्पत्ति का मतलब ये है कि उसमें पार्किंग बनाकर पैसा कमाया जाये ?
क्या शत्रु सम्पत्ति का मतलब ये है कि कोई भी आगज़नी करके चले जाये और हम उसका ठीकरा या तो आकाश पर फोड़ें या जाँच का शिगूफा छोड़कर ज़िम्मेदारी से हाथ झाड़ लें ?
जनता ख़ामोश हैं, लेकिन सब देख रही है…।

आख़िर क्या है नया शत्रु संपत्ति क़ानून ?
आइये जानते हैं :-
1962 (चीन के साथ) , 1965 और 1971 (पाकिस्तान के साथ) के युद्ध के बाद भारत से जाने वाले वारिस अब भारतीय संसद के बाद 1968 के कानून में दुश्मन संपत्तियों पर स्वामित्व का दावा करने में समर्थ नहीं होंगे, देश में दुश्मन संपत्तियों को शासित कर रहे हैं । 14 मार्च को लोकसभा के बाद शहीजा संपत्ति (संशोधन और मान्यन) विधेयक, को संसद ने मंजूरी दे दी थी, जिसमें आवाज़ वोट के ज़रिए विधेयक पारित किया गया था। संशोधन विधेयक को राज्यसभा से पहले ही मंज़ूरी मिल गई है। कानून का उद्भव विश्व युद्ध -2 की शुरुआत में, भारतीय कानून रक्षा अधिनियम, 1939 को भारत सरकार के नियम, 1939 को लागू करने के लिए अधिनियमित किया गया था। नियमों के तहत, भारत, मुंबई, अधिकारियों द्वारा बनाई गई एक कार्यालय के लिए दुश्मन संपत्ति का संरक्षक, शांति बहाल होने तक दुश्मन संपत्तियों को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। हालांकि, भारत के लिए दुश्मन संपत्ति के संरक्षक का कार्यालय 1945 में युद्ध समाप्त होने के बावजूद इन गुणों का प्रशासन रखता था। 1962 में भारत के साथ चीन के युद्ध के बाद, और 1965 और 1971 में पाकिस्तान के साथ दो युद्धों के बाद, कार्यालय ने दुश्मन संपत्तियों का अधिग्रहण किया भारत के रक्षा के नियम 1968 में, भारत सरकार ने एनी प्रॉपर्टी अधिनियम बनाया, जिसमें यह निर्धारित किया गया कि सभी दुश्मन संपत्ति को संरक्षक के नियंत्रण में जारी रहेगी। हाल ही में पारित विधेयक इस 50 वर्षीय विधेयक के कुछ प्रावधानों में संशोधन करता है अब क्या बदलाव है? पुराने कानून में संशोधन करने के लिए यह राशि होगी: जैसा कि विधेयक पूर्वव्यापी प्रभाव में आता है (7 जनवरी 2016, जब अध्यादेश को पहले प्रख्यापित किया गया था) , उस समय से पहले हुई कोई भी दुश्मन संपत्ति हस्तांतरण और प्रावधानों का विरोध नए कानून का शून्य और शून्य हो जाएगा दूसरी ओर, कानून के कई प्रावधान 1968 से पूर्वव्यापी रूप से लागू होंगे, जब शत्रु संपत्ति अधिनियम अधिनियमित किया गया था। पुराने कानून के मुताबिक, दुश्मन की परिभाषाएं देश के रूप में शामिल हैं, जिनमें उनके नागरिक शामिल हैं, जो कि भारत के विरुद्ध बाहरी आक्रमण नई परिभाषा में दुश्मनों के कानूनी उत्तराधिकारियों को भी शामिल किया गया है भले ही वे भारत के नागरिक हैं या किसी अन्य देश और एक दुश्मन देश के नागरिक हैं, जिन्होंने अपनी राष्ट्रीयता बदल दी सिविल न्यायालयों को दुश्मन संपत्तियों के खिलाफ मामलों को सुनने के लिए अधिकृत नहीं किया जाएगा। संरक्षक के मामलों में हस्तक्षेप करने का उनका कोई भी कानूनी अधिकार नहीं होगा। केंद्र सरकार ने मालिक या किसी अन्य व्यक्ति को दुश्मन संपत्ति के हस्तांतरण के लिए संरक्षक का आदेश दे सकता था। अब, एक दुश्मन संपत्ति को स्वामी को वापस लौटाया जा सकता है, जब केंद्र सरकार ने यह घोषणा करने के बाद मंजूरी दे दी कि यह संपत्ति दुश्मन संपत्ति नहीं है।
1968 के कानून ने दुश्मन द्वारा दुश्मन की संपत्ति के हस्तांतरण पर रोक लगा दी, अगर यह सार्वजनिक हित के खिलाफ था या अगर वह संपत्ति के हस्तांतरण से संरक्षक को हस्तांतरण से बचने के लिए किया गया था। नया कानून एक दुश्मन द्वारा सभी स्थानान्तरण को प्रतिबंधित करता है संशोधित कानून का कहना है कि दुश्मन संपत्तियों को संरक्षक के साथ निहित रहना होगा, यहां तक ​​कि दुश्मनों की मृत्यु के बाद भी; यहां तक ​​कि अगर कानूनी उत्तराधिकारी एक भारतीय है; और यहां तक ​​कि अगर दुश्मन अपनी राष्ट्रीयता बदलता है उत्तराधिकार के अधिकारों को नियंत्रित करने वाले कोई भारतीय कानून दुश्मन संपत्तियों पर लागू नहीं होंगे। संशोधित कानून के तहत, ऐसे अधिकारों में सभी अधिकार, शीर्षक और हितों संरक्षक के साथ झूठ होंगी। पुराने कानून के तहत, संरक्षक केवल “संपत्ति के संरक्षण के हित में” या “भारत में दुश्मन या उसके परिवार के रखरखाव को सुरक्षित रखने के लिए” दुश्मन संपत्ति बेच सकता है। अब, कस्टोडियन केंद्र सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद दुश्मन संपत्ति का निपटान कर सकता है इससे पहले, संरक्षक को दुश्मन और उसके परिवार को बनाए रखना चाहिए था अगर वे संपत्ति से प्राप्त आय से भारत में हैं। कस्टोडियन अब दुश्मन और उसके परिवार के लिए उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार नहीं होगा। कई घोषणाएं 7 जनवरी, 2016 से शुरू होने वाले पांच बार के लिए अध्यादेश का विमोचन किया गया और पुन: प्रख्यापित किया गया। अध्यादेश 28 मई को तीसरी बार 31 मई को दूसरी बार 2 अप्रैल को दोबारा शुरू किया गया था। चौथी बार और पांचवें समय के लिए 22 दिसंबर को। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 123 के अनुसार, संसद के पुनर्मिलन के छह सप्ताह बाद एक अध्यादेश समाप्त हो जाता है यदि इसे किसी अधिनियम द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है या दोनों सदनों द्वारा अस्वीकृत किया जाता है 2010 में, यूपीए सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए एक अध्यादेश भी जारी किया है कि दुश्मन संपत्तियों को संरक्षक के नियंत्रण में रखा गया। हालांकि, उस वर्ष सितंबर में उस अध्यादेश समाप्त हो गया था। उस संबंध में एक विधेयक पारित करने के लिए तत्कालीन सरकार के प्रयासों में भी फल नहीं था।
1971 में ताशकंद घोषणापत्र के प्रावधानों के बारे में पता करने की आवश्यकता है, पाकिस्तान को
1971 में सभी दुश्मन संपत्तियों का निपटान किया गया था। भारत और पाकिस्तान ने 1965 युद्ध के बाद घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे और प्रत्येक पक्ष के नियंत्रण में दुश्मन संपत्तियों की वापसी की संभावनाओं पर चर्चा करने का निर्णय लिया था। कथित तौर पर, भारत भर में 16,000 से अधिक दुश्मन संपत्तियां हैं, लाखों करोड़ की कीमतें। पहचान प्रक्रिया अभी भी चल रही है। इसका मतलब यह है कि भविष्य में दुश्मन संपत्तियों की संख्या बढ़ सकती है |

न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर

अंक 127 : साक्षात्कार निजी व सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था पर (भाग-2)(5 मार्च 2019)

कमलेश कुमार गुप्ता
अपर शिक्षा निदेशक
(अतिरिक्त प्रभार) व मुख्य शिक्षा अधिकारी, नैनीताल

संक्षिप्त परिचय :-
￰बुंदेलखंड हमीरपुर के किसान / ￰वार्त्तिक परिवार में जन्मे कमलेश कुमार की प्रारम्भिक शिक्षा गांव के ही स्कूल से हुई। उसके बाद आपने स्नातक व स्नातकोत्तर बुंदेलखंड विवि से किया। आपकी प्रथम नियुक्ति मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग में व्याख्याता के पद पर हुई। नौकरी के दौरान ही आपने कड़ी मेहनत से उ.प्र.लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा सन् 1997 में उत्तीर्ण कर तत्कालीन उत्तर प्रदेश में  रुद्रप्रयाग जिले के गणेशनगर के स्कूल में प्रधानाचार्य के पद को सुशोभित किया। SCERT गठित होने के बाद आप उप निदेशक के पद पर और उसके बाद टिहरी फिर हरिद्वार में रहे। दोबारा रुद्रप्रयाग में ज़िला शिक्षा अधिकारी बनकर गये। राज्य परियोजना जन कार्यक्रम व सर्व शिक्षा जैसे अभियानों में आपने विशेषज्ञ की भूमिका भी बखूबी निभाई। वर्तमान में आप अपर शिक्षा निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) तथा मुख्य शिक्षा अधिकारी के कर्तव्य को अत्यंत कुशलता से निर्वाह कर रहे हैं….।

विभिन्न पदों की ज़िम्मेदारी निभा चुके कमलेश कुमार से बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने, प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :-

आज़ाद सवाल (06):-
क्या निजी विद्यालय
रि-एडमिशन के नाम पर पैसा वसूल कर सकता है ?

कमलेश कुमार गुप्ता :-
रि- एडमिशन के नाम पर या डोनेशन के नाम पर पैसा लेना प्रतिबंधित है, यदि किसी विद्यालय में ऐसा पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी, ऐसी शिकायत आप उप -शिक्षा अधिकारी, खंडिक्षा अधिकारी, ज़िला / राज्य शिकायत प्रकोष्ठ में भी कर सकते हैं |

आज़ाद सवाल (07) :-
विद्यालयों द्वारा अभिभावकों से
ग्रीष्म / शीत कालीन अवकाशों की फीस लेना क्या वैध है या नहीं ?

कमलेश कुमार गुप्ता :-
विद्यालयों द्वारा अभिभावकों से
ग्रीष्म / शीत कालीन अवकाशों की फीस लेना वैध है |

आज़ाद सवाल (08) :-
इन्हीं अवकाशों के लिये स्कूल प्रबंधन द्वारा शिक्षकों का वेतन नहीं दिया जाता, क्या ये उचित है ?

कमलेश कुमार गुप्ता :-
गेस्ट टीचर, अनियमित अथवा सशर्त शिक्षकों का अवकाशों के दौरान का वेतन रोका जा सकता है लेकिन किसी भी हाल में नियमित शिक्षक का वेतन नहीं रुकना चाहिये |

आज़ाद सवाल (09):-
क्या कोई विद्यालय स्टेशनरी/ यूनिफार्म आदि हेतु किसी दुकान विशेष के लिये अभिभावकों पर मौखिक / लिखित दबाव बना सकता है ?

कमलेश कुमार गुप्ता :-
इसके लिये सभी स्कूलों को आदेश हैं कि ऐसा करने के लिये कोई भी बाध्य नहीं करेगा, यदि ऐसी शिकायतें प्राप्त होती हैं तो जाँच कर स्कूल का रेजिस्ट्रेशन रद्द किया जाएगा।

आज़ाद सवाल (10) :-
क्या कोई विद्यालय विभिन्न कार्यक्रमों के नाम पर जैसे स्पोर्ट्स डे, टीचर्स डे, एनुअल फंक्शन आदि के लिये अभिभावकों से पैसा वसूल सकता है ?

कमलेश कुमार गुप्ता :-
हर स्कूल में एक PTA गठित है, इस तरह के कार्यक्रमों के लिये अभिभावक – शिक्षक समिति अपनी बैठक में ये निर्धारित करते हैं कि किस कार्यक्रम की फीस कितनी होनी चाहिये अथवा नहीं होनी चाहिये |

साक्षात्कार समाप्त 🙏

अंक 126 : साक्षात्कार (भाग – 01) (4 मार्च 2019)

आज़ाद सवाल (01) :-
वर्तमान शिक्षा प्रणाली किस व्यवस्था के अंतर्गत चल रही है?

कमलेश कुमार गुप्ता :-
भारत सरकार का सर्व शिक्षा अभियान प्रारंभिक शिक्षा को सार्वभौमिक करने के उद्देश्य से चलया गया। उस उद्देश्य को हमने प्राप्त भी किया। शिक्षक शिक्षा हेतु समग्र शिक्षा अभियान चल रहा है जिसके अंतर्गत बच्चों का सर्वांगीण विकास हो रहा है और गुणवत्ता के साथ पूर्ण शिक्षा भी प्राप्त हो रही है। बच्चों की आर्थिक मदद हेतु धनराशि भी दी जा रही है और शिक्षकों को नये पाठ्यक्रम व पाठ्यचर्या के अनुसार भी अपडेट किया जा रहा है…।

आज़ाद सवाल (02) :-
सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या दिन ब दिन कम होती जा रही है, इसका कारण क्या मानते हैं आप ?

कमलेश कुमार गुप्ता :-
शिफ़्टिंग इसका मुख्य कारण है। अभिभावकों की धारणा बनी है कि पब्लिक स्कूलों में सुविधाएँ अधिक हैं और शिक्षा का स्तर उच्च है जबकि हमारे सरकारी विद्यालयों में चकाचौंध नहीं है लेकिन अध्यापक मानकों के अनुसार योग्यताधारी और प्रशिक्षित हैं…।

आज़ाद सवाल (03) :-
धीरे-धीरे सरकारी स्कूल बंद होने की कगार पर आ गये हैं। इसे रोकने के लिये क्या सुधारात्मक क़दम उठाये जा रहे हैं?

कमलेश कुमार गुप्ता :-
सरकार ने सभी सरकारी विद्यालयों में निजी स्कूलों की भांति NCERT पाठ्यक्रम लागू करवाया है, ताकि बच्चे अंग्रेज़ी के साथ साथ किसी भी विषय में पीछे न रहें। इसकी कोशिश लगातार जारी है…।

आज़ाद सवाल (04):-
इसके बावजूद भी क्यों सरकारी स्कूलों को मर्ज किया जा रहा है ?

कमलेश कुमार गुप्ता :-
उसके पीछे मुख्य कारण ये है कि विगत वर्षों में विभिन्न कारणों से अनावश्यक रूप से हर गली – मोहल्ले में नवीन विद्यालय खोले गये एवं विद्यालयों का उच्चीकरण किया गया। उस दशा में बच्चे सरकारी विद्यालयों तक पहुंच नहीं पा रहे हैं, इसलिये छात्र संख्या कम हो या अधिक सरकार द्वारा न्यूनतम अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध कराया जाना आवश्यक हो जाता है, जिसका व्यय भार अधिक होता है।अतः शासन द्वारा ये निर्णय लिया गया है कि जिन विद्यालयों की छात्र संख्या कम है, उन्हें नज़दीकी विद्यालय में मर्ज कर दिया जाये…।

आज़ाद सवाल (05) :-
अब बात करते हैं, निजी विद्यालयों की। निजी विद्यालय किन मानकों के अनुसार प्रत्येक वर्ष फीस वृद्धि करते हैं ?

कमलेश कुमार गुप्ता :-
निजी स्कूल खोलने की NOC राज्य सरकार प्रदान करती है व स्कूल संचालन की CBSE, फिर शिक्षा का अधिकार अधिनियम -2009 के अनुसार स्कूल संचालित होता है। राज्य सरकार को निजी विद्यालयों के नियंत्रण हेतु नियम बनाने का अधिकार प्राप्त है। भारत में कुछ राज्यों ने फीस कण्ट्रोल एक्ट लागू कर दिया है लेकिन हमारे राज्य में अभी एक्ट बनाने की प्रक्रिया चल रही है, जिसे जल्द ही पूर्ण कर लागू किया जाएगा…।

साक्षात्कार जारी…🙏

अंक 125 : साक्षात्कार (भाग – 03) (2 मार्च 2019)

राजीव रौतेला (आइएएस) कुमाऊं आयुक्त व सचिव मुख्यमंत्री आदि

संक्षिप्त परिचय :-
2001 बैच के आइएएस अधिकारी राजीव रौतेला सर्वप्रथम उत्तर प्रदेश में ज़िलों में कलेक्टर रहे, तत्पश्चात आप देवी पाटन मंडल के प्रथम बार मंडलायुक्त नियुक्त हुये। उसके बाद नोएडा अथॉरिटी में भी आपने सेवायें दीं। तब से आपने विभिन्न पदों को अपनी कुशलता व कर्मठता से सुशोभित किया। वर्तमान में आप कुमाऊँ मंडलायुक्त के साथ-साथ सचिव मुख्यमंत्री, प्रशासक, बाज़पुर शुगर मिल और बागेश्वर स्थित अल्मोड़ा मैेग्नेसाइट लि. फैक्ट्री के चैयरमेन पद का कार्यभार बख़ूबी निभा रहे हैं।

विभिन्न पदों पर आसीन राजीव रौतेला से बात की हमारे
संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने। प्रस्तुत है उनसे
बातचीत के प्रमुख अंश :- सवाल (10) से आगे…

आज़ाद सवाल (11):- कुछ समय पहले बुज़ुर्गों के लिये एक योजना चलती थी ‘मेरे बुज़ुर्ग मेरे तीर्थ’ क्या वो योजना अब भी क़ायम है ?

राजीव रौतेला ( आइएएस):-
जी हाँ, अब उस योजना में कुछ विस्तार करते हुये उसका नाम ‘पं दीन दयाल उपाध्याय मातृ-पितृ तीर्थाटन’ योजना कर दिया गया है। तथा इसके अलावा बुज़ुर्गों के लिये वृद्धावस्था पेंशन योजना आदि चलाई जा रही है…।

आज़ाद सवाल (12):-
उत्तराखंड के बेरोज़गार युवाओं का पलायन लगातार जारी है, उनके लिये कोई योजना ?

राजीव रौतेला ( आइएएस):-
बेरोज़गारों को रोज़गार देने के उद्देश्य से ही उधम सिंह नगर में ‘वाटर स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन’ डेवेलप किया गया है। उसके अलावा वीर चंद्र गढ़वाली स्वरोज़ग़ार योजना ऐसी और भी कई योजनाओं से युवाओं को लाभान्वित किया जा रहा है …।

आज़ाद सवाल (13):-
कुमाऊँ समेत पूरे राज्य में नशे का कारोबार फल फूल रहा है, उस पर नियंत्रण के लिये क्या प्रयास किये जा रहे हैं?

राजीव रौतेला ( आइएएस):-
इसके लिये हमारी उत्तराखंड पुलिस लगातार कोशिशें कर रही है। मेडिकल स्टोर्स में ड्रग इंस्पेक्टर लगातार छापामारी कर रहे हैं। हमारा पूरा प्रयास है कि नशा और उसका कारोबार जड़ से उखाड़ फ़ेंके…

आज़ाद सवाल (14):-
निजी स्कूलों की मनमानी पर कब लगाम लगाई जाएगी।स्कूल खुलते ही स्कूलों के मीटर चालू हो गये हैं। अभिभावकों पर किसी निश्चित दुकान से स्टेशनरी और यूनिफार्म खरीदने का दबाव बनाने का खेल शुरू हो गया है। इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है ?

राजीव रौतेला ( आइएएस):-
इस सम्बन्ध में निदेशक (अतिरिक्त ) शिक्षा विभाग को शिकायत की जा सकती है, यदि ऐसा पाया जाता है तो सम्बंधित स्कूल के विरुद्ध उचित कार्रवाई होगी, इसकी जाँच के आदेश आपके सामने अभी किये गये हैं…

आज़ाद सवाल (15) :-
अंत में आख़िरी सवाल, छह ज़िलों में आपका पसंदीदा ज़िला कौन सा है ?

राजीव रौतेला ( आइएएस):-
पूरा मंडल और उसके लोग मुझे बहुत पसंद हैं…

साक्षात्कार समाप्त.. 🙏

अंक 124 : साक्षात्कार (भाग – 02) (1 मार्च 2019) : सवाल (05) से आगे :-

आज़ाद सवाल (06):-
साफ़ सफ़ाई की बात हम करते हैं लेकिन हमारे पास न कोई ट्रेन्चिंग ग्राउंड है और न ही कोई डंपिंग ज़ोन, ऐसे में नगर पालिका को भी परेशानी होती है और नालों की सफ़ाई के बाद सिंचाई खंड को भी, क्या प्रयास हो रहे हैं इस संबंध में ?

राजीव रौतेला ( आइएएस):-
इस संबंध में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से बात हो गयी है, शीघ्र ही यहां ‘मग डिस्पोज़ल सिस्टम’ लागू होगा…

आज़ाद सवाल (07):-
जनता ने अपनी बात
मुख्यमंत्री तक पहुंचानी हो तो कैसे पहुंचाई जा सकती है ? मुख्यमंत्री कार्यालय कहाँ से संचालित होता है ?

राजीव रौतेला ( आइएएस):-
मुख्यमंत्री कार्यालय नैनीताल और हल्द्वानी दोनों जगह से संचालित होतार और बुधवार को यहां नैनीताल स्थित कार्यालय में अवश्य बैठता हूँ, जनता अपनी बात मुझसे कह सकती है, मेरी अनुपस्थिति में मेरा स्टाफ़ जनता की शिकायत दर्ज कर लेगा…

आज़ाद सवाल (08):-
सचिव मुख्यमंत्री होने के नाते ये जानकारी दीजियेगा कि वर्तमान में कितनी योजनाओं का लाभ उत्तराखंड की जनता को मिल रहा है ?

राजीव रौतेला ( आइएएस):-
किसान पेंशन योजना, ￰विधवा पेंशन योजना, विकलांग पेंशन योजना, इन जैसी तमाम पेंशन योजनाओं की पेंशन मार्च माह की पहली तारीख़ को उनके खातों में पंहुचा दी जाएगी…

आज़ाद सवाल (09):-
हड़ताल आपकी नज़र में ?

राजीव रौतेला ( आइएएस):-
सबका अपना रोष प्रकट करने का अपना तरीक़ा है,  डीएम के माध्यम से बात होती है, हम उस दशा में शासकीय स्तर से कार्य करते हैं। निजी चिकित्सालयों की हड़ताल के दौरान सरकारी चिकित्सालयों ने बेहतर कार्य किया।

आज़ाद सवाल (10) :-

सरकारी अस्पताल आपकी नज़र में ?

राजीव रौतेला ( आइएएस):-
बीडी पांडे नैनीताल में तो चिकित्सक ही नहीं है। जीबी पंत चिकित्सालय की हालत भी किसी से छिपी नहीं है, लेकिन मैं सुशीला तिवारी अस्पताल की सेवाओं से संतुष्ट हूँ। सघन निरीक्षण के दौरान हमने अपनी टीम के साथ सुबह 10 बजे सुशीला तिवारी अस्पताल में प्रवेश किया फिर शाम को
7 बजे बाहर निकले थे, अब भी समय-समय पर वहां का दौरा होता रहता है, और स्वास्थ्य लाभ में आयुष्मान योजना से भविष्य में जनता को बहुत लाभ मिलने वाला है…।

साक्षात्कार जारी…🙏

अंक 123, भाग-1 : सवाल 5 से पहले (28 फरवरी 2019)

आज़ाद सवाल (01):-
06 ज़िलों के मुखिया होने के नाते प्रत्येक ज़िले में आपके स्तर से अभी तक क्या अभूतपूर्व प्रयास किये गये?

राजीव रौतेला (आइएएस):-
मंडल में कोसी नदी, गगास, राम गंगा, गरुड गंगा, उत्तरवाहिनी शिप्रा नदी को पुनर्जीवित (कायाकल्प) करने को प्रयास किये जा रहे हैं, जिसमें कोसी नदी में वास्तविक कार्य अभी चल रहा है, और नदियों के संरक्षण हेतु दिल्ली में प्रथम पुरस्कार हमारे मंडल को प्राप्त हुआ है। इसी संदर्भ के लिये 01 मार्च को नैनीताल-अल्मोड़ा वृहद् कॉन्फ्रेंस रखी गयी है।
दूसरा सभी जनपदों के उच्चाधिकारियों को सख़्त निर्देश दिये गए हैं कि वो जन सामान्य के प्रति संवेदनशील रहें।बरसात व बर्फ़ के पानी को रिस्टोर करने के लिये प्रयास हो रहे हैं, भारत सरकार की योजना ‘एक जनपद एक डेस्टिनेशन’ के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है और पर्यटन को बढ़ाने के उद्देश्य से ही अल्मोड़ा और नैनीताल जनपद में विंटर कार्निवाल आरम्भ किया गया है…।

आज़ाद सवाल (02):-
नैनीताल की सूखाताल झील को कृत्रिम झील के रूप में कायाकल्प करने की ख़बरें छायी रहती हैं, उसके लिये आपकी कार्य योजना क्या है ?

राजीव रौतेला (आइएएस):- सूखाताल झील को कृत्रिम झील के रूप में विकसित नहीं किया जाएगा बल्कि 3 मीटर खुदाई करके बॉउंड्री वॉल की जाएगी, जिससे बरसात का पानी इकट्ठा किया जायेगा और उस पानी को नैनी झील संरक्षण हेतु काम में लाया जायेगा…।

आज़ाद सवाल (03):-
आपने कुमाऊं कमिश्नर पद ग्रहण करते ही नैनीताल की पार्किंग व्यवस्था को दुरुस्त करने की बात कही थी, आपके वो क़दम कहाँ तक पहुंचे हैं ?

राजीव रौतेला (आइएएस):- पार्किंग व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिये हमने विभिन्न क़दम उठाये हैं। सबसे पहले हम अशोक सिनेमा पार्किंग को मल्टी लेवल पार्किंग बनाने वाले हैं। दूसरा कैलाखान पार्किंग पर भी अनुमति प्राप्त हो गयी है। तीसरा नारायण नगर में भी पार्किंग की अनुमति मिल गयी है। चौथा रूसी बाईपास पर भी पार्किंग बनायी जाएगी। और सबसे बड़ी बात ये है कि नैनीताल के स्थानीय लोगों के लिये सुनहरा अवसर है यदि उनके पास गाडी खड़ी करने की जगह है तो वो प्राधिकरण की अनुमति प्राप्ति के पश्चात् स्वयं भी पार्किंग चला सकते हैं…।

आज़ाद सवाल (04):-
आप पंत विवि के कुलपति भी रहे हैं, अपने कार्यकाल के दौरान आपने विवि को क्या विशेष योगदान दिया ?

राजीव रौतेला (आइएएस):- वैसे तो वहां का कार्यकाल मात्र एक से डेढ़ माह का रहा फिर भी वहां हमने छात्रों व शिक्षकों के हित के लिये प्रयास किये। इंटीग्रेटेड फार्मिंग को बढ़ावा दिया। किसान मेला व्यापक व सुनियोजित तरीके से आयोजित किया और भी बहुत सारे प्रयास विवि के उत्थान के लिये किये गये…।

आज़ाद सवाल (05) :-
बलियानाला भू-स्खलन को रोकने के लिये क्या प्रयास किये जा रहे हैं ? और अब तक कितनी धनराशि शासन से मरम्मत कार्यों के लिये आवंटित हुई है ? तथा प्रभावित परिवारों को स्कूल से कब विस्थापित किया जाएगा?

राजीव रौतेला (आइएएस):-
भू-स्खलन को रोकने के लिये आइआइटी रुड़की द्वारा
डीपीआर तैयार की जा रही है, जिसके लिये शासन से 10.50 लाख रुपये मंज़ूर हुये हैं। उसके अलावा भू-स्खलन के नाम पर और कोई धनराशि आवंटित नहीं हुई, और हिल सेफ़्टी कमेटी की मीटिंग में भू- स्खलन प्रभावित परिवारों को स्कूलों से विस्थापित करने की बात रखी जाएगी…

साक्षात्कार जारी… 🙏

अंक 122 : (27 फरवरी 2019) : आयुष्मान कार्ड बनाने में क्यों आ रही है समस्या, डीएसओ से साक्षात्कार में हुआ खुलासा… साक्षात्कार (भाग – 02)

तेजबल सिंह
ज़िला पूर्ति अधिकारी, नैनीताल

संक्षिप्त परिचय:-
उत्तर प्रदेश वाराणसी / बनारस के एक साधन-संपन्न परिवार में जन्मे तेजबल सिंह के पिताजी स्वास्थ्य विभाग में अतिरिक्त निदेशक थे, आपकी प्रारंभिक शिक्षा बनारस में ही हुई तथा स्नातक स्तर की शिक्षा आपने केएनएस विवि सुल्तानपुर से और स्नातकोत्तर लखनऊ विवि से सत्र 95-96 में किया। उसके बाद आप प्रतियोगी परीक्षाओं
की तैयारी में जुट गये। आख़िरकार 2005 में आपकी मेहनत रंग लायी और आपने यूकेपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की। आपकी पहली ज्वाइनिंग क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी के रूप में देहरादून में हुई। फिर आप ट्रेनी ऑफ़िसर पिथौरागढ़ रहे और वहीं प्रथम बार ज़िला पूर्ति अधिकारी (पिथौरागढ़) के रूप में पद भार संभाला। उसके बाद अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़, पुनः नैनीताल फिर पुनः अल्मोड़ा और फिर तीसरी बार नैनीताल के ज़िला पूर्ति अधिकारी के रूप में पद ग्रहण किया। आप फरवरी 2018 से वर्तमान तक एक कुशल अधिकारी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं …

उनसे बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने
प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :- अंक -2

सवाल (05) से आगे :-

आज़ाद सवाल (06) :-
राज्य में राशन कार्ड किस-किस श्रेणी के हैं तथा उनसे किस प्रकार के लाभ लोगों को मिल रहे हैं, थोड़ा विस्तारपूर्वक जानकारी दीजियेगा ?

ज़िला पूर्ति अधिकारी :-
आज की तिथि में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना और राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत राशन कार्ड बनाये जा रहे हैं:-
रा.खा.सु.यो. के अनुसार तीन श्रेणियों में कार्ड बनते हैं :-
(अ) अंत्योदय राशन कार्ड जिनका रंग गुलाबी होता है, ये कार्ड समाज के दबे कुचले सबसे निचले ग़रीब परिवारों के लिये बनते हैं, जिसमें प्रत्येक कार्ड पर 35 किलो राशन (13.300 ग्रा. गेंहू + 21.700ग्रा. चावल ) एक किलो चीनी प्रति माह वितरित की जाती है।
(ब) बी.पी.एल. कार्ड:- ये सफ़ेद रंग के राशन कार्ड ग़रीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिये बनाये जाते हैं जिनके परिवार की समस्त श्रोतों से आय ₹1,80,000 हज़ार सालाना हो या उससे कम होनी चाहिये, इसमें प्रति माह 5 किलो राशन (02 किलो गेंहू + 03 किलो चावल) मिलता है।
(स) पात्र प्राथमिक परिवार :-
ये सफ़ेद कार्ड थोड़े ठीक स्थिति वाले ग़रीब परिवारों के लिये है, इसमें भी 5 किलो राशन मिलता है…
दूसरी योजना राज्य खाद्य सुरक्षा अंतर्गत पीले वाले राशन कार्ड बनाये जाते हैं। जो ग़रीबी रेखा से ऊपर जीवन यापन कर रहे लोगों के लिये होता है, जिनकी आय ₹1.80लाख से ऊपर और 5 लाख से कम होती है, इस कार्ड धारक को 5 किलो गेंहू व 2.5 किलो चावल मिलता है। इसमें 2.5किलो चावल के एवज़ में सरकार ₹75/ माह
डी.बी.टी.के माध्यम से बैंक खाते में जमा करती है…।

आज़ाद सवाल (0-7)
जैसा कि आपने बताया कि प्रति माह राशन दिया जाता है, यदि इस स्थिति में पता चले कि कोई सस्ते गल्ले का दुकानदार कार्ड धारकों को राशन न देकर ब्लैक मार्केटिंग कर रहा हो तो उसके विरूद्ध क्या कार्रवाई होगी ?

ज़िलापूर्ति अधिकारी :-
यदि ऐसी स्थिति पायी जाती है तो सम्बंधित डीएसओ, एसडीएम अथवा एस.आइ. से शिकायत की जा सकती है।आरोप सत्य पाये जाने पर उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा…।

आज़ाद सवाल (08):-
आयुष्मान अटल स्वास्थ्य योजना में राशन कार्ड सिंक नहीं हो पा रहे हैं, जिससे आम जनता को समस्या हो रही है। कौन है इसका ज़िम्मेदार?

ज़िला पूर्ति अधिकारी:-
इसके लिये हम नहीं स्वास्थ्य विभाग ज़िम्मेदार है। जब आधार कार्ड से हर काम हो जा रहे थे, तो राशन कार्ड से लिंक वाला सिस्टम नहीं होना चाहिए था। आधार ही आधार होना चाहिये था…।

आज़ाद सवाल (09):-
कुछ सी.एस.सी. संचालकों का आरोप है कि आपके विभाग से उन्हें डेटा प्रोवाइड करने में सहयोग नहीं मिल रहा है। ऐसा क्यों ?

ज़िला पूर्ति अधिकारी :-
नहीं, यह आरोप बे-बुनियाद है। हमारी ओर से हमेशा सहयोग किया गया है। बल्कि यहां तो हल्द्वानी और रामनगर से भी लोग आ रहे हैं। डेटा हम उपलब्ध करा रहे हैं…।

आज़ाद सवाल (10):-
अंत में… एक छोटा सा सवाल कि क्या अब आप चौथी बार भी नैनीताल में ही रहना चाहेंगे ?

ज़िला पूर्ति अधिकारी :-
नहीं, अब गढ़वाल जाने की इच्छा है। यहां नैनीताल में बहुत प्यार मिला है अब तक, यहां के लोग बहुत सीधे व ईमानदार हैं….।

साक्षात्कार समाप्त

🙏

अंक 122 : साक्षात्कार (भाग – 02)

आज़ाद सवाल (01) :-
नैनीताल में तीसरी बार ज़िला पूर्ति अधिकारी बनने के बाद
यहां के परिवेश और नागरिकों के बारे में क्या अनुभव किया है ?

ज़िला पूर्ति अधिकारी :- यहां तीसरी बार आकर जनपद व जनपद के लोगों की अच्छी समझ हो गयी है, नैनीताल शहर की बात करें तो यहां के लोगों को हमारे विभाग से कम शिकायतें रही हैं, ओखलकांडा -बेतालघाट चूँकि पिछड़ा क्षेत्र है इसलिये वे लोग हमारे विभाग पर अधिक निर्भर हैं, तो शिकायतें भी अधिक होती हैं…

आज़ाद सवाल (02):-
इतनी शिकायतें होने पर आप ग्रामीणों की शिकायतों का निबटारा कैसे करते हैं ?

ज़िलापूर्ति अधिकारी :-
ग्रामीणों की समस्या समाधान हेतु जन मिलन कार्यक्रम और हर तीन माह में एक बार बीडीसी बैठक की जाती है, जिसमें हमारी कोशिश रहती है कि हर ग्रामीण की समस्या का निराकरण हो जाये…

आज़ाद सवाल (03):-
जबसे राशन कार्ड ऑनलाइन किये गये हैं, विभाग के लिये काम कितना आसान हुआ है अथवा कितना मुश्किल ?

ज़िला पूर्ति अधिकारी :-
पिछले चार सालों में डिजिटाइज़ेशन के होने से कार्य शैली में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है, पहले पुराने रिकॉर्ड चेक कर पाना बहुत मुश्किल होता था लेकिन अब सब कुछ आसानी से हो जाता है…

आज़ाद सवाल (04):-
ऑनलाइन सिस्टम होने और आधार लिंक होने से विभाग / राज्य को क्या फ़ायदा मिला है ?

ज़िला पूर्ति अधिकारी :-
ऑनलाइन सिस्टम और आधार लिंक होने से फ़र्ज़ीवाड़े पर लगाम लगी है, पहले हर घर में दो -दो, तीन-तीन राशन कार्ड पाये जाते थे, जिनको पकड़ पाना बेहद मुश्किल हो रहा था, अब तो एक क्लिक पर सबके रिकॉर्ड सामने आ जाते हैं…

आज़ाद सवाल (05):-
तो अब तक कितनी संख्या में फ़र्ज़ी राशन कार्ड पकड़ में आये हैं ?

ज़िला पूर्ति अधिकारी :-
ऑनलाइन और आधार लिंक होने से सबसे पहले तो वो ट्रेस हुये जो एक नाम से दो -दो राशन कार्ड चला रहे थे, दूसरा वो पकड़ में आये जिनकी आय 5 लाख सालाना से अधिक थी फिर भी उनके राशन कार्ड चल रहे थे, आपको यक़ीन नहीं आएगा कुल मिलाकर 40 हज़ार फर्ज़ी राशन कार्ड हमने डिजिटाईज़ेशन होने के बाद निरस्त किये हैं…

साक्षात्कार जारी

🙏

अंक 120 : साक्षात्कार (भाग – 03) नैनीताल के जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन से जिले की यातायात, पार्किंग व शौचालय आदि व्यवस्थाओं पर…

डीएम विनोद कुमार सुमन।

विनोद कुमार सुमन
ज़िलाधिकारी, नैनीताल

संक्षिप्त परिचय :-

कालीन उद्योग के लिये मशहूर संत रविदास नगर ज़िला या यूँ कहें उत्तर प्रदेश के चार ज़िलों (प्रयागराज, जौनपुर, वाराणसी और मिर्ज़ापुर) की सरहदों को छूने वाले भदोही ज़िले में 1970 को एक ग़रीब किसान के घर में जन्मे श्री विनोद कुमार सुमन पांच भाई और दो बहनों में सबसे बड़े हैं, आपकी प्रारंभिक शिक्षा भदोही में ही हुई, उसके बाद आप घर छोड़कर श्रीनगर गढ़वाल आ गये, जहां आपने कई महीनों तक एक मंदिर परिसर में दिन गुज़ारे और बी.ए. की पढ़ाई पूरीे के लिये आपने वहां बन रहे एक सुलभ शौचालय निर्माण में मज़दूर के रूप में मज़दूरी भी की और इस तरह से बीए की डिग्री आपने गढ़वाल विवि से हासिल की, इसके बाद पिताजी ने घर वापस बुला लिया, फिर आपने एम.ए. कीिक्षा प्रयागराज विवि (तत्कालीन इलाहबाद विवि) से प्राप्त की, माता -पिता की प्रेरणा से आपका बचपन से ही मन शिक्षा की ओर अग्रसर रहा इसलिए आपने पढाई नहीं छोड़ी तथा सन् 1998 में आपने
पीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर ली, पीसीएस अधिकारी के रूप में अपनी कुशल सेवाएं देने के कारण आपको सन् 2007 में आइएएस केडर में पदोन्नत किया गया, तब से आज तक आप एक कुशल आइएएस के रूप में देश को अपनी सेवाएं दे रहे हैं और आज नैनीताल के ज़िलाधिकारी द को सुशोभित कर रहे है,
उनसे बात की हमारे संवाददाता मो.ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने
प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :-

सवाल (10) से आगे :-

आज़ाद सवाल (11):-
आयुष्मान अटल योजना कार्ड बनाने में नागरिकों को दिक्कतें आ रही है राशन कार्ड सिंक नहीं हो पा रहे हैं, खाद्य आपूर्ति विभाग पर भी दबाव है, कैसे आसान होगी प्रक्रिया ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
खाद्य आपूर्ति विभाग के अलावा अब नागरिक अपने -अपने सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान में जाकर कार्ड अपडेट करा सकते हैं जिससे उन्हें जल्द होजना का लाभ मिल सकेगा…

आज़ाद सवाल (12):-
प्रधानमंत्री जगह – जगह शौचालय निर्माण की बात करते हैं लेकिन नैनीताल को जोड़ने वाले हमारे कालाढूंगी – नैनीताल मोटर मार्ग पर शौचालय की समस्या है पर्यटक व नागरिक दोनों के लिये समस्या है, कुछ हो पाएगा इस समस्या का ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
नहीं ऐसा नहीं है, कालाढूंगी – नैनीताल मोटर मार्ग पर 2-3 जगह शौचालय हैं, अब हर 10 मीटर की दूरी पर तो शौचालय नहीं बनवा सकते…

आज़ाद सवाल (13):-
नैनीताल में पार्किंग की समस्या है जिस कारण पर्यटक हर वर्ष परेशान रहता है, इस समस्या से निजात के लिये क्या क़दम उठाये जा रहे हैं…

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
रुसी बाईपास पर पार्किंग बनाई जा रही है, जिसका टेंडर निकल चुका है, वहां 2000 से 3000 गाड़ियां सुरक्षित रह सकेंगी और ड्राइवर वगैरह के लिये वहां शौचालय इत्यादि बनाये जाएंगे, जिससे पर्यटकों को बहुत सुविधा मिलेगी…

आज़ाद सवाल (14):-
सरकारी योजनाओं का लाभ जनता को मिल सके उसके लिये क्या कवायद की जा रही है ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
हम समय- समय पर योजनाओं का प्रचार करवाते रहते हैं अभी ज़िले में किसान पेंशन योजना से 35000 लोग लाभान्वित हुये हैं। अटल आयुष्मान योजना तो चल ही रही है…

आज़ाद सवाल (15):-
अंत में एक काल्पनिक सवाल,
2020 में नैनीताल को किस स्तर पर देखते हैं, कितना परिवर्तन होगा तब तक ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल:-
2020 तक हल्का फुल्का अंतर आएगा, ज़्यादा बदलाव नहीं आएगा नैनीताल में…

साक्षात्कार समाप्त

🙏

अंक 119 : फिर हुआ असर, नवीन समाचार व आज़ाद मंच का, जानें कहाँ ?

धन्यवाद : अधिशासी अभियंता जल संस्थान का

साहिबान,
नवीन समाचार के स्तम्भ आज़ाद के तीर में हमने पानी की जगह सीवर नैनी झील में ले जा रहे हैं नाले क्यों सोया है विभाग उन्वान के साथ ये बताया और दिखाया था कि किस तरह से भारी मात्रा में सीवर का गंदा पानी सीधा झील में जा रहा था, हमारी ख़बर का संज्ञान लेते हुये संतोष कुमार उपाध्याय, अधिशासी अभियंता जल संस्थान नैनीताल ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को तत्काल हुक्म दिया और कनिष्ठ अभियंता भास्कर सुयाल अपनी टीम को लेकर मस्जिद चौराहे और मस्जिद के सामने बने पिट खुलवाकर उनकी सफ़ाई करवाने लगे, इस बारे में जब कनिष्ठ अभियंता भास्कर सुयाल से बात की गयी तो उन्होंने बताया कि काफ़ी मेहनत से सभी कर्मचारी लगे हुए हैं और हमारी कोशिश है कि शनिवार तक झील में जाने वाला सीवर बिल्कुल बंद हो जाये,
इतनी तत्परता दिखाने के लिये आज़ाद मंच परिवार जल संस्थान नैनीताल का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता है और आने वाले वक़्त में भी इसी तत्परता की उम्मीद करता है और हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यक़ीन है कि जनसेवा में आपका साथ यूँही हमेशा मिलता रहेगा…

न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर

अंक 118 : पानी की जगह सीवर नैनी झील में ले जा रहे हैं नाले, क्यों विभाग सोया ?

नैनी झील में जा रहा है सीवर का पानी

जल संस्थान गहरी नींद में सोया

गंदा पानी कर रहा है झील को दूषित

कौन है ज़िम्मेदार ?

साहिबान,
ये जो तस्वीर / वीडियो आप देख रहे हैं न, वो किसी सीवर लाइन की नहीं है बल्कि नैनीताल में मौजूद एक ऐसे नाले की है जिससे बारिश का पानी ऊपर पहाड़ी से होता हुआ नगर के रॉयल होटल कम्पाउण्ड से निकलकर नयना देवी मंदिर के बराबर से निकलकर झील में समा जाता है लेकिन एक विभाग की नई योजना के चलते नाले में पानी की जगह सीवर की गंदगी आ रही है और सीधा नैनी झील में जाकर झील को दूषित कर रही है,
ऐसा नहीं है कि इस बारे में अमुक विभाग अंजान हो, ऐसा कतई नहीं है इस मामले की वजह से ही कुछ दिन पहले नगर पालिका के सभासदों ने 2 दिवसीय धरना भी दिया था लेकिन उक्त विभाग की तानाशाही रवैये के चलते कोई मांग पूरी न हो सकी और आज शहर में सीवर जगह-जगह लीक होती रहती है, जिसे कोई देखने वाला नहीं,
क़ाबिलेगौर बात ये है कि इसी झील के निर्मल जल को
नैनीतालवासी पीने को मजबूर हैं…
आज़ाद मंच द्वारा
अधिशासी अभियंता महोदय से इस बावत बात करने के लिये काफ़ी बार कोशिश की लेकिन महोदय कभी फ़ोन उठा नहीं पाते, इसलिये जनता को पता भी नहीं लग पाता आख़िर इस सबकी वजह क्या है ?
ख़ैर, 

आख़िर में,
मुख्यमंत्री महोदय उत्तराखंड
मुख्य सचिव मुख्य मंत्री कार्यालय /
कुमाऊं आयुक्त महोदय
ज़िलाधिकारी महोदय,
अपरज़िलाधिकारी महोदय,
अधिशासी अभियंता महोदय,
जल संस्थान, नैनीताल
से हमारी इल्तेजा है कि सीवर के गंदे पानी को नैनी झील में जाने से रोकने के लिये तत्काल कोई कार्रवाई की जाए, जिससे हमारी नैनी झील दूषित न हो और शहर के बाशिंदों व बाहर से आने वाले सैलानियों को साफ़ पीने का पानी मयस्सर हो सके …

न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर

अंक 117 : साक्षात्कार नैनीताल के जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन से जिले की चिकित्सा, शिक्षा, खनन आदि व्यवस्थाओं पर…(भाग – 02)

संक्षिप्त परिचय :- विनोद कुमार सुमन, ज़िलाधिकारी, नैनीताल

डीएम विनोद कुमार सुमन।

कालीन उद्योग के लिये मशहूर संत रविदास नगर ज़िला या यूँ कहें उत्तर प्रदेश के चार ज़िलों (प्रयागराज, जौनपुर, वाराणसी और मिर्ज़ापुर) की सरहदों को छूने वाले भदोही ज़िले में 1970 को एक ग़रीब किसान के घर में जन्मे श्री विनोद कुमार सुमन पांच भाई और दो बहनों में सबसे बड़े हैं। आपकी प्रारंभिक शिक्षा भदोही में ही हुई। उसके बाद आप घर छोड़कर श्रीनगर गढ़वाल आ गये, जहां आपने कई महीनों तक एक मंदिर परिसर में दिन गुज़ारे और बी.ए. की पढ़ाई पूरी करने के लिये आपने वहां बन रहे एक सुलभ शौचालय के निर्माण में मज़दूर के रूप में भी योगदान दिया और इन कठिन परिस्थितियों में आपने बीए की डिग्री गढ़वाल विवि से हासिल की। इसके बाद पिताजी ने घर वापस बुला लिया। फिर आपने एम.ए. की शिक्षा प्रयागराज विवि (तत्कालीन इलाहबाद विवि) से प्राप्त की। माता-पिता की प्रेरणा से आपका बचपन से ही मन शिक्षा की ओर अग्रसर रहा इसलिए आपने पढाई नहीं छोड़ी तथा सन् 1998 में आपने पीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण की। पीसीएस अधिकारी के रूप में अपनी कुशल सेवाएं देने के कारण आपको सन् 2007 में आइएएस कैडर में पदोन्नत किया गया। तब से आज तक आप एक कुशल आइएएस के रूप में देश को अपनी सेवाएं दे रहे हैं और आज नैनीताल के ज़िलाधिकारी के पद को सुशोभित कर रहे है।
उनसे बात की हमारे संवाददाता मो.ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने
प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :- सवाल (05) से आगे :-

आज़ाद सवाल (06):-
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खुल तो गये हैं लेकिन उनमें उचित मात्रा में  दवाइयां कब उपलब्ध होंगी ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल:-
फ़िलहाल जो कमी आयी उसका कारण भण्डार गृह में ही कमी थी, क्योंकि उत्पादन ही कम हो रहा था, अब पूर्ति बहाल हो जाएगी…

आज़ाद  सवाल (07):-
निजी स्कूल खुलने लगे हैं और अभिभावकों पर अमुक दुकान से यूनिफार्म, किताबें लेने का दबाव बनने लगा है। प्रशासनिक स्तर से इन स्कूली दबाव पर कब लगाम लगेगी ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
अभिभावकों को परेशान न होना पड़े इसलिये स्कूल यूनिफार्म व क़िताबों की सुविधायें देता है …

आज़ाद सवाल (08):-
निजी अस्पताल, अस्पताल न होकर फाइव स्टार होटल बन गई हैं। इन अस्पतालों पर कब नकेल कसी जाएगी ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल*:-
क्लीनिकल ईस्टब्लिशमेंट एक्ट (सीईए)  लागू होने के बाद ये सब बंद हो जाएगा…

आज़ाद सवाल (09):-
अवैध खनन लगातार हो रहा है। उस पर रोकथाम के लिये क्या क़दम उठाये जा रहे हैं ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
हम लगातार कोशिश कर रहे हैं ऐसा न हो।बयदि जब कभी ऐसी खबरें मिलती भी हैं तो उस पर कार्रवाई करते रहते हैं…

आज़ाद सवाल (10):-
हालांकि पॉलिथीन प्रतिबंधित है फिर भी पॉलिथीन का बाज़ार में धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है। उसे रोकने हेतु कब कार्रवाई की जाती है ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
पॉलिथीन का प्रयोग न हो उसके लिये हम समय-समय पर दुकानों व बाज़ारों में छापामारी करते रहते हैं …

साक्षात्कार जारी

अंक 116 : साक्षात्कार  (भाग – 01) :

आज़ाद सवाल (01):-
सबसे पहले हम बात करते हैं पुलवामा में हुये हमले की।उसमें शहीद हुये जवानों की शहादत पर क्या कहना चाहेंगे आप घटना पर ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
बेहद दुःखद घटना है। हम इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं तथा शहीद हुये जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं …

आज़ाद सवाल (02):-
बलियानाला भू -स्खलन प्रभावित क्षेत्र से कितने परिवारों को विस्थापित किया जा चुका है ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
बलियानाला भू-स्खलन प्रभावित क्षेत्र से लगभग 20-22 परिवारों को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित किया जा चुका है। बाक़ी के 2-3 परिवार शेष हैं। उन्हें भी जल्द ही विस्थापित किया जाएगा…

आज़ाद सवाल (03):-
नैनीताल से लेकर हल्द्वानी, रामनगर कहीं भी चले जाओ सब सरकारी अस्पतालों की हालत बदतर क्यों है ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
नही, ऐसा नहीं है। अगर नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल की ही बात करें तो उक्त अस्पताल को कायाकल्प पुरस्कार से नवाज़ा गया है, जो काफ़ी कड़े मानदंडों के आधार पर दिया जाता है। रही बात अन्य अस्पतालों की तो निजी अस्पतालों के हड़ताल पर जाने से सरकारी अस्पताल ही मसीहा बने हुये हैं…

आज़ाद सवाल (04):-
महोदय, आपका कहना अपने स्तर पर ठीक होगा।न्यायाधीश, प्रशासनिक अधिकारी या कोई भी हाई प्रोफाइल पर्सनालिटी को बेहतर इलाज मिल रहा होगा लेकिन एक आम नागरिक को अवार्ड नहीं इलाज चाहिये।जनता का कहना है कि मरीज़ कक्ष में बैठकर चिकित्सक की प्रतीक्षा करते हैं और चिकित्सक बाहर धूप सेंकते हैं, क्या ये आरोप सही हैं ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
नहीं, ऐसा नहीं हो रहा है। बीडी पांडे अस्पताल में सब सही चल रहा है। अगर चिकित्सक धूप सेंक भी रहे हैं तो कोई गुनाह नहीं कर रहे हैं…।

आज़ाद सवाल (05):-
इसका मतलब जिलाधिकारी महोदय सरकारी अस्पतालों की कार्यशैली से संतुष्ट हैं ?

ज़िलाधिकारी नैनीताल :-
जी हाँ, जहाँ तक हमने अनुभव किया है वहां तक तो हम संतुष्ट ही हैं। वैसे बिल्कुल अंदर तक तो जाकर हमने भी नहीं देखा है…

साक्षात्कार जारी…

अंक 115 : बदल रही है नैनीताल की तस्वीर, आज़ादी के बाद पहली बार हो रही यहाँ सफाई…

-साफ़ हो रहे हैं नैनीताल के नाले, सिंचाई खंड का विशेष आभार, पालिका प्रशासन का भी मिल रहा सहयोग, नागरिकों का सहयोग अपेक्षित

साहिबान,
ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न,
वो हमारे शहर नैनीताल के अलग – अलग नालों की है, जिसमें सिंचाई खंड नैनीताल के कर्मचारी कार्य करते नज़र आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक़ हमारे शहर में कुल 59 नाले हैं, इनकी वर्ष में तीन बार सफ़ाई का प्रावधान है। एक बरसात से पहले, दूसरा बरसात के बीच व तीसरा बरसात के बाद। आजकल जो सफ़ाई चल रही है, वो बरसात के बाद वाली चल रही है, इस बारे में सिचाई विभाग के अधिशासी अभियंता हरीश चन्द्र सिंह बताते हैं कि वैसे तो नालों का स्वामित्व नगर पालिका नैनीताल का है, हम केवल नालों की मेंटिनेंस के लिये उत्तरदायी हैं। अब तक हमारे द्वारा लगभग 30 नालों की सफ़ाई हो चुकी शेष नाले मार्च के प्रथम सप्ताह तक लगभग पूरे साफ़ हो जाएँगे। नाले से निकले मलबे और कूड़ा निस्तारण से सम्बंधित बात करने पर सचिन नेगी, नगर पालिकाध्यक्ष नैनीताल ने बताया कि जो भी कूड़ा नालों से निकलता है उसे पालिका द्वारा उठाया जाएगा और जो मलबा होगा उसके निस्तारण की ज़िम्मेदारी सिंचाई खंड की होगी, तस्वीरें बता रही हैं कि सिंचाई खंड अपना कार्य बखूबी अंजाम दे रहा है, उसके लिये हरीश सिंह, अधिशासी अभियंता, मदन मोहन जोशी, सहायक अभियंता, नीरज तिवारी कनिष्ठ अभियंता व पर्यवेक्षक रमेश सिंह के साथ तमाम टीम जो आड़े-तिरछे, फिसलन वाले नालों को भी जान जोखिम में डालकर साफ़ कर रहे हैं, उन सबका तथा सचिन नेगी, नगर पालिकाध्यक्ष, रोहिताश शर्मा, अधिशासी अधिकारी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, डॉ. जीएस धर्मसत्तू , नगर सफ़ाई निरीक्षक, कुलदीप सिंह के साथ एक से लेकर पंद्रह तक सभी सभासदगण नगर पालिका परिषद व उनकी पूरी टीम का आज़ाद मंच परिवार तहे दिल से शुक्रिया अदा करता है।
साथ ही नागरिकों से ये अपील करता है कि मेहरबानी करके नालों में कूड़ा न डालें, कूड़ा हमेशा कूड़ेदान में ही डालें और हर एक वार्ड के सभासद से ये गुज़ारिश है कि अपने -अपने वार्ड के लोगों को स्वच्छता के लिये प्रेरित व जागरूक करें तभी बनेगा हमारा ‘क्लीन नैनीताल-ग्रीन नैनीताल’।
न काहू से दोस्ती,
न काहू से बैर…

अंक 114: साक्षात्कार-डीएफओ बिजू लाल टीआर, भाग-3 : नैनीताल चिड़ियाघर पर उपयोगी जानकारी

टीआर बिजुलाल, मंडलीय वन अधिकारी  ( डिवीज़नल फॉरेस्ट ऑफिसर)  डीएफ़ओ, नैनीताल

टीआर बिजुलाल, मंडलीय वन अधिकारी (डिवीज़नल फॉरेस्ट ऑफिसर) डीएफ़ओ, नैनीताल

संक्षिप्त परिचय :- केरल प्रान्त के तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम) में जन्मे टी.आर. बीजुलाल की शिक्षा-दीक्षा तिरुवनंतपुरम में ही हुई। एमएससी (ज़ूलॉजी) उत्तीर्ण करने के पश्चात् आपने आईएफ़एस परीक्षा (2004) में आपने 18वीं रैंक हासिल की। 3 वर्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम के पश्चात् आपने हल्द्वानी स्थित एफटीआई में उप-निदेशक के पद को ग्रहण किया। एक वर्ष उप-निदेशक पद पर रहने के पश्चात 2008 में नैनीताल के डीएफ़ओ के तौर पर सरोवर नगरी में आगमन हुआ, कुछ समय की सेवायें देने के बाद आप डीएफ़ओ सिविल अल्मोड़ा, उप-निदेशक गोविन्द पशु विहार (पुरोला), वर्किंग मेन ऑफिसर (चकराता) में अपनी सेवायें देते हुये मई-2018 में पुनः नैनीताल की वादियों में डीएफ़ओ के तौर पर शानदार वापसी की तथा मई से फरवरी तक आपने वन संरक्षण के क्षेत्र में क्या-क्या उल्लेखनीय कार्य किये, इस सम्बन्ध में बात की हमारे संवाददाता मो ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने…
प्रस्तुत है टीआर बीजुलाल डीएफ़ओ, नैनीताल से बातचीत के प्रमुख अंश :-

सवाल 10 से आगे …
आज़ाद सवाल (11):
25 लाख रुपये प्रतिमाह क्या प्राणी उद्यान की आय होती है ?
 
डीएफ़ओ नैनीताल:-
नहीं, ऐसा तो नहीं हो पाता,
आय कम व्यय अधिक होने के कारण ज़ू घाटे में चलाया जा रहा है …
 
आज़ाद सवाल (12):-
क्या ज़ू के जानवरों को गोद लिया जा सकता है ?
 
डीएफ़ओ नैनीताल:-
जी हाँ, ज़ू में जितने भी पशु-पक्षी हैं सभी को गोद लिया जा सकता है उसका विकल्प मौजूद है, इच्छुक व्यक्ति यहां कार्यालय में सम्पर्क कर सकते हैं…
 
आज़ाद सवाल (13):-
नैनीताल ज़ू में और क्या विशेषतायें लाई जाएंगी ?
 
डीएफ़ओ नैनीताल:-
नैनीताल ज़ू को और विकसित करते हुये यहां एक इंटरप्रिटेशन थिएटर खोलने की योजना है, जिसमें यहां आने वाले लोगों को वाइल्ड लाइफ संबंधी डॉक्यूमेंट्री फिल्में दिखाकर वन्य जीव संरक्षण के लिये प्रेरित किया जा सकेगा ..
 
आज़ाद सवाल (14):-
ज़ू के अलावा पर्यटन व आय को बढ़ावा देने के लिये आपके द्वारा क्या प्रयास किये जा रहे हैं ?
 
डीएफ़ओ नैनीताल:-
पर्यटन व राज्य की आय बढ़ाने के लिये हम हनुमान गढ़ी स्थित ईको पार्क, कालाढूंगी मार्ग पर सरिता ताल (सड़िया ताल) वाटर फॉल, हिमालयन बॉटैनिकल गार्डन तथा रानीबाग़ स्थित रेस्क्यू सेंटर को पर्यटकों के लिये विकसित कर रहे हैं…
 
आज़ाद सवाल (15):-
तो इन सब स्थलों को विकसित करने में देरी क्यों हो रही है ?
 
डीएफ़ओ नैनीताल:-
बस फण्ड की कमी है, नैनीताल को स्वर्ग बनाने का संकल्प है, और हमें विश्वाश है वो ज़रूर पूरा होगा…
 
(साक्षात्कार समाप्त)

अंक 113: साक्षात्कार-डीएफओ बिजू लाल टीआर, भाग-2 :

सवाल 5 से आगे …

आज़ाद सवाल (06):-
नगर क्षेत्र में आवास बनाते समय किसी वृक्ष की कितनी दूरी होनी चाहिये?

डीएफ़ओ नैनीताल :-
नगर क्षेत्र में आवास बनाते समय किसी वृक्ष की दूरी लगभग 3 मीटर होनी चाहिये…

आज़ाद सवाल (07):-
नैनीताल में तो अधिकतर आवास वृक्षों से सटाकर बनाये गये हैं, उनका क्या होगा ?

डीएफ़ओ नैनीताल:-
पुराने समय से ऐसे आवास बन चुके हैं, हमने अपने कार्यकाल में ऐसी कोई अनुमति नहीं दी है…

आज़ाद सवाल (08):-
नैनीताल क्षेत्र में कौन सा वन अधिनियम लागू होता है ?

डीएफ़ओ नैनीताल :-
जहां तक नगर पालिका परिषद का क्षेत्र आता है वहां तक नगर पालिका अधिनियम और उसके पश्चात् वन संरक्षण अधिनियम 1927 लागू होता है और उन्हीं के अंतर्गत कार्रवाई होती है…

आज़ाद सवाल (09):-
अब बात करते हैं वन्य प्राणी उद्यान की। नैनीताल वन्य प्राणी उद्यान (ज़ू) में कितने संख्या में कितने जानवर व अन्य पक्षी हैं ?

डीएफ़ओ नैनीताल :-
नैनीताल वन्य प्राणी उद्यान वन्य जीव संरक्षण 1972 के अंतर्गत चलाया जा रहा है। यहां पर कुल 33 प्रजाति निवास करते हैं। जिनमें 232 जानवर हैं और जानवरों में
2 टाइगर (01नर +01 मादा ), 7 लैपर्ड (4 नर +3 मादा ), 4 भालू (1 नर +3 मादा ), 2 तिब्बती भेड़िये
(1 नर + 1 मादा), 5 रेड पांडा (2 नर + 3 मादा) हैं फ़िलहाल। बाक़ी आगे संख्या बढ़ सकती है…

आज़ाद सवाल (10):-
वन्य प्राणी उद्यान में जीवों के रख रखाव में प्रति माह कितना ख़र्चा आता है ?

डीएफ़ओ नैनीताल :-
सभी जीवों के रख रखाव पर प्रति माह ₹25 लाख का खर्चा आ जाता है…

साक्षात्कार जारी…

आज़ाद सवाल (01):-
आपके वनाधिकार में कौन-कौन से क्षेत्र आते हैं ?

अंक 110 : साक्षात्कार-डीएफओ बिजू लाल टीआर, भाग-1 :

डीएफ़ओ नैनीताल :-
हमारे वनाधिकार में नैनीताल, खैरना, बेतालघाट, रानीबाग़ तथा कालाढूंगी का क्षेत्र आता है…

आज़ाद सवाल (02) :-
नैनीताल में जगह-जगह भवन निर्माण हो रहे हैं। मानचित्र पास कराने को आपकी एनओसी भी अनिवार्य है। क्या आप बता पाएंगे कि किन आधारों पर आपने
एनओसी दी हैं ?

डीएफ़ओ नैनीताल :-
जितने भी निर्माण हो रहे हैं उनमें हमारी ओर से कोई एनओसी नहीं दी गयी है…

आज़ाद सवाल (03) :-
भवन निर्माण में धड़ल्ले से वृक्षों की बलि दी जा रही है। कौन है इसके लिये ज़िम्मेदार ?

डीएफ़ओ नैनीताल :-
यदि ऐसा हो रहा है तो उसके लिये पूरी तरह से भू -स्वामी ही ज़िम्मेदार है…

आज़ाद सवाल (04) :-
इसका मतलब आप उस पर कोई कार्रवाई नहीं करते ?

डीएफ़ओ नैनीताल :-
जो अवैध रुप से वृक्ष को काटता या क्षति पहुंचाता है उस पर नगर पालिका के नियमानुसार ₹5000 तक न्यूनतम तथा ₹25000 अधिकतम जुर्माना वसूला जाता है …

आज़ाद सवाल (05):-
मतलब ये हुआ कि अधिकतम ₹25000 दीजिये और वृक्षों का सफ़ाया कीजिये। यही अर्थ जाता है इसका तो ?

डीएफ़ओ नैनीताल :-
नहीं, ऐसा नहीं है, हम अपनी तरफ़ से पूरी कोशिश करते हैं कि वृक्ष कटान न हो। यदि दुर्भाग्यवश ऐसा हो जाता है तो उस पर क़ानूनी रूप से कार्रवाई की जाती है …

साक्षात्कार जारी…. 🙏

अंक 112 (15 फरवरी 2019) : सुनो सुनो सुनो ! यहां एक महीने से खड़ी है एक एम्बुलेंस, जिस किसी की हो ले जाये, वरना…

  • क्या खुलने वाला है नैनीताल में नया अस्पताल!
  • क्या स्टाफ़ हाउस क्षेत्र में बनेगा अस्पताल!
  • क्या एम्बुलेंस 108 सबसे पहले पहुंचाई
  • एक महीने से क्यों  खड़ी है एम्बुलेंस
  • क्यों कोई कोई सुध लेने वाला नहीं

साहिबान,
एक ज़रूरी एलान सुन लीजिये!
एक एम्बुलेंस जिसका नाम 108 है, सफ़ेद, नीली, लाल धारीदार कपड़े पहने हुए है, पिछले एक महीने से मल्लीताल सात नंबर क्षेत्र के भोटिया बैंड पर लावारिस हालत में खड़ी है, जिस किसी की भी हो, कृपया यहाँ आकर ले जाएँ, उसके हाथ- पैर अभी सलामत हैं, कहीं ऐसा न हो कुछ दिन बाद वो ईंटों पर खड़ी मिले। फिर मत कहना बताया नहीं। और तो और एम्बुलेंस का रौब लेकर घूमने वाली गाड़ी ‘कूड़ा गाड़ी’ का तमग़ा न हासिल कर ले, अभी रो- रो कर ,एम्बुलेंस के डीज़ल रूपी आंसू सड़क पर बिखरे पड़े हैं, मेहरबानी करके इस मैसेज को तब तक फैलाइये जब तक इसके ख़ैर ख़्वाह इस 108 एम्बुलेंस को अपने घर न ले जाएँ…
ख़ैर,
हमारे शहर में जो दो अस्पताल (अस्पताल कहने में बाई गॉड गला भर आया है फिर भी ) हैैं, उनकी हालत तो किसी से छिपी नहीं है, इसलिए नया अस्पताल बनने की कल्पना करने में भी डर लगता है हुज़ूर!

आख़िर में,
स्वास्थ्य मंत्री महोदय, उत्तराखंड,
मुख्य चिकित्साधिकारी महोदया, नैनीताल तथा सम्बंधित अधिकारीगणों से इल्तेजा है कि
108 एम्बुलेंस का उपयोग रोगियों की सेवा में हो तो अच्छा लगता है लेकिन किसी सूनसान जगह पर ले जाकर लावारिस हालत में एम्बुलेंस को खड़ा कर देना ये अच्छा महसूस नहीं होता।
अगर आपके संज्ञान में ये मामला नहीं था, तब भी ये चिंता का विषय है लेकिन अब मामला संज्ञान में आने के बाद कितनी जल्दी उस पर कार्रवाई होती है।
ये देखने वाली बात होगी…

न काहू से दोस्ती,
न काहू से बैर

अंक 111 (14 फरवरी 2019) : 15 दिन में ही 1/6 रह गई नगर पालिका की टॉल फ्री नंबर सेवा

  • नगर पालिका टॉल फ्री नंबर सेवा हुई बाधित
  • एक से लेकर पांच नंबर तक कोई रिस्पॉन्स नहीं
  • केवल छठे नंबर पर हो रही है शिकायत दर्ज
  • पालिकाध्यक्ष स्वयं जवाब दे रहे हैं लोगों की शिकायतों पर

साहिबान,
अभी 26 जनवरी को नगर पालिका ने लोगों की समस्या निवारण हेतु ऐतिहासिक शुरुआत की थी जिसमें सोचा ये गया था कि नगर पालिका से सम्बंधित हर समस्या से निजात दिलाने के लिये उक्त टोल फ्री नंबर काम आएगा जहाँ पर आम नागरिक अपनी शिकायत दर्ज करा सके, 15 दिन से पहले ही फ्री के नाम पर जारी एक से लेकर 6 नंबर में से केवल 6 नंबर ही काम कर रहा है, जिस पर स्वयं पालिकाध्यक्ष शिकायत सुन रहे हैं व निवारण हेतु उचित जवाब भी दे रहे हैं,
अन्य नंबर क्यों नहीं उठाये जा रहे जब इस बावत पालिकाध्यक्ष से बात की गयी तो उन्होंने अन्य कर्मचारियों के अवकाश पर जाने का कारण बताया और साथ ही ये भी कहा कि जल्द ही इस समस्या को दूर किया जाएगा कि कर्मचारी के अवकाश पर जाने पर भी फोन अटेंड हो सकें, वहीँ दूसरी ओर अधिशासी अधिकारी से इस संबंध में बात की गयी तो उनका जवाब भी एक समान था। 
दोनों ही ज़िम्मेदार अधिकारियों ने अपनी ज़िम्मेदारी को बखूबी समझते हुये जनहित में जवाब दिये।
हम आपके जज़्बे की क़द्र करते हैं और आम नागरिकों से अपील करते हैं कि टोल फ्री नंबर डायल करने के बाद एक से लेकर पांच तक जब कोई जवाब न आये तब छठे नंबर को दबाएं व सीधे पालिकाध्यक्ष से अपनी पीड़ा बताएं वो हर सम्भव उक्त समस्या निवारण हेतु आपको एक ज़िम्मेदार जवाब अवश्य देंगे…

आख़िर में,
नगर पालिका अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी महोदय से हमारा एक ही सवाल है जब इतना बड़ा महत्वकांक्षी क़दम उठाना ही था तो जल्दी किस बात की थी, कुछ दिन और रुक जाते तो क्या बुराई थी,
ख़ैर,
हमें उम्मीद ही नहीं पूरा यक़ीन है कि जल्द से जल्द टोल फ्री नंबर के एक से लेकर पांच तक नंबर पर भी शिकायत दर्ज व उसका समाधान हो पाएगा …

न काहू से दोस्ती,
न काहू से बैर…

अंक 109 (9 फरवरी 2019) : साक्षात्कार (भाग-03)

तत्कालीन ज़िला नैनीताल (वर्तमान ज़िला उधम सिंह नगर तहसील किच्छा में मौजूद गाँव रामेश्वरपुर में बैसाखी और अम्बेडकर जयंती (14 अप्रैल ) के दिन सन् 1962 में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे श्री हरबीर सिंह की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही स्कूल से हुई उसके बाद आपने इंटर तक की शिक्षा आदित्य नाथ झा इण्टर कॉलेज रुद्रपुर से 1980 में ग्रहण की और कुमाऊँ विश्वविद्यालय से सन् 1984 में एमए करने के उपरांत ही आपकी नैनीताल बैंक में नौकरी लग गयी। नौकरी लगने से पहले तक आपने अपने पिताजी के साथ खेती- किसानी भी की, जिसमें गन्ने की फ़सल धान लगाना व खेतों की रोपाई आदि शामिल थी। बचपन से ही अभिनय व गायन के शौक़ के चलते आपने हल्द्वानी रामलीला में दशरथ व जनक का क़िरदार बख़ूबी निभाया और अक्सर किसी भी कार्यक्रम में अपने गायन से श्रोताओं का मन मोह लेने वाले ऐसे हरफ़नमौला किसान, कलाकार, गायक और बेहतरीन व्यक्तित्व के स्वामी जो हमारे नैनीताल के अपर ज़िलाधिकारी व झील विकास प्राधिकरण के सचिव की भूमिका को भी बखूबी निभा रह हैं, विभिन्न मुद्दों को लेकर उनसे बातचीत की हमारे संवाददाता मो.ख़ुर्शीद हुसैन (आज़ाद) ने, प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :-

सवाल 10 से आगे :-

आज़ाद (11) :-
भवाली से निकलने वाली उत्तरवाहिनी शिप्रा नदी में सीवर लाइन की खुली गंदगी समाहित हो रही है साथ ही साथ नदी को गंदा नाला बना दिया गया है, उक्त नदी को दूषित होने से बचाने के लि्या क़दम उठाये जाएंगे ?

हरबीर सिंह :-
अभी तक हमारे संज्ञान में मामला नहीं था, प्राधिकरण की आगामी बोर्ड बैठक में इस नदी को स्वच्छ करने सम्बन्धी निर्णय लिये जाएंगे…

आज़ाद सवाल (12) :-
नैनीताल प्रारम्भ से ही रंगकर्मियों की रंगभूमि रही है लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि अभी तक यहां एक रंगशाला नहीं है। प्रशासनिक अधिकारी व कलाकार होने के नाते आपके स्तर से क्या सहयोग मिल सकता है ?

हरबीर सिंह :-
अभी तक तो कोई हमारे पास रंगशाला का ये मुद्दा लेकर नहीं आया, यदि ज्ञापन दिया जाता है तो हम यक़ीनन उस पर अपनी तरफ़ से पूरा सहयोग करेंगे…

आज़ाद सवाल (13) :-

सर पिछली बार के विंटर कार्निवाल से यहां के स्थानीय कलाकारों में रोष है कि उन्हें अवसर नहीं दिया गया, ऐसी चूक कैसे हो गयी ?

हरबीर सिंह :-
चूक नहीं हुई, हमने प्रारम्भ से ही प्रार्थना पत्र स्वीकार करने शुरू कर दिये थे लेकिन यहां के स्थानीय कलाकार बहुत देर में प्रार्थना पत्र लेकर आये जिससे शायद कुछ लोग नाराज़ हो गए। हम अगले विंटर कार्निवाल में पूरी कोशिश करेंगे कि कोई रोष न हो …

आज़ाद सवाल (14):-
आप में एक बेहद अच्छा कलाकार भी है। कलाकार से पीसीएस अधिकारी बनने तक का सफर कैसे तय किया ?

हरबीर सिंह :-
शौक़िया तौर पर पुराने गीतों को गा लेता हूँ। बाक़ी हल्द्वानी की रामलीला में दशरथ और जनक के किरदारों को निभाया है। नैनीताल बैंक में नौकरी के साथ – साथ सिविल सर्विसेज़ की तैयारी भी करता रहता था। बस एक बार वाहे गुरु जी की मेहरबानी से परीक्षा उत्तीर्ण की और वहीं से प्रशासनिक अधिकारी की यात्रा प्रारम्भ हो गयी…

आज़ाद सवाल (15) :-
आप अपनी सफ़लता का श्रेय किसे देना चाहेंगे ?

हरबीर सिंह :-
सिविल सर्विसेज़ को अत्यधिक गंभीरता से दिलाने का पूरा श्रेय मैं अपनी पत्नी अमरजीत कौर (रानी ) को देना चाहूंगा। एक प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिये मेरी पत्नी ने सदा मुझे प्रोत्साहित किया। मैं उनका आजीवन आभारी रहूंगा और मेरी दिली ख्वाहिश है कि हर जन्म में मुझे पत्नी के रूप में रानी ही मिले…

साक्षात्कार समाप्त
🙏💐💐💐💐🙏

अंक 108 (7 फरवरी 2019) : साक्षात्कार (भाग-02) सवाल (05) से आगे…

आज़ाद सवाल (06):-
झील विकास प्राधिकरण झील के विकास के लिये क्या प्रयास कर रहा है ?

हरबीर सिंह
झील को साफ़ व स्वच्छ रखने के लिये हमने ग्लोबल एक्वा प्रा. लि. को वॉटर एरियेशन की ज़िम्मेदारी सौंप रखी है जिसकी रख रखाव लागत रुपये अठारह लाख ( ₹18 लाख ) प्रतिवर्ष तथा विद्युत व्यय रुपये एक लाख साठ हज़ार (₹ 1,60,000) झील विकास प्राधिकरण के द्वारा भुगतान किया जाता है…।

आज़ाद सवाल (07) :-
अपर ज़िलाधिकारी की हैसियत से आपके द्वारा बलियानाला के भू-स्खलन प्रभावित क्षेत्र में रह रहे लोगों को अभी तक किसी सुरक्षित जगह विस्थापित क्यों नहीं किया गया ?

हरबीर सिंह
हमारी ओर से भ-ूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है। और रही बात वहां के निवासियों को अन्यत्र विस्थापित करने की तो रूसी बाईपास के पास जगह चिन्हित की गयी है, जहां उनके लिये विचार किया जा रहा है…।

आज़ाद सवाल (08)
हमारे शहर में दोनों अस्पताल रेफ़रल सेंटर बन कर रह गए हैं। क्या कभी आपके द्वारा वहां की स्थितियों का जायज़ा लिया गया ?

हरबीर सिंह
पिछली बार नंदा देवी महोत्सव के दौरान एक बच्ची की अचानक तबियत ख़राब हो गयी थी उसको बीडी पाण्डे के इमरजेंसी में अच्छा उपचार दिया गया था लेकिन हाँ कभी अंदर वार्ड तक नहीं जा पाया लेकिन जल्द ही औचक निरीक्षण किया जाएगा…।

आज़ाद सवाल (09) :-
निजी विद्यालय शीत अवकाश के उपरांत खुलते ही अभिभावकों को लूटना प्रारम्भ कर देंगे। उक्त लूट को
अपर ज़िलाधिकारी स्तर पर रोकने को क्या प्रयास किये जाएंगे ?

हरबीर सिंह
सरकार द्वारा समस्त स्कूलों को आदेशित किया गया है कि किसी भी स्कूल द्वारा अभिभावकों पर यूनिफार्म, स्टेशनरी आदि के लिये दबाव नहीं बनाया जाएगा। यदि ऐसी शिकायतें प्राप्त होंगी तो सम्बंधित स्कूल प्रबंधन पर सख़्त कार्रवाई की जाएगी…।

आज़ाद सवाल (10):-
सरकारी कार्यालयों में अनियमिततायें जारी हैं। उक्त अनियमितताओं को रोकने हेतु कभी आपके द्वारा औचक निरीक्षण किया जाएगा ?

हरबीर सिंह
किसी भी हालत में अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।ज़िलाधिकारी स्तर से निरीक्षण किया जाता रहा है और हमने भी अपने स्तर से अपर निदेशालय, नगर पालिका, जल संस्थान आदि विभागों में औचक निरीक्षण कर कार्रवाई की है…।

साक्षात्कार जारी….

अंक 107 (6 फरवरी 2019) : साक्षात्कार (भाग-01)

आज़ाद:- सवाल (01)
सबसे पहले बात करते हैं, झील विकास प्राधिकरण सचिव की हैसियत से नगर में हो रहे अतिक्रमण को रोकने हेतु आपने क्या कार्रवाई की ?

हरबीर सिंह :-
हमारे क्षेत्राधिकार में पूरा नैनीताल ज़िला आता है, जिसका क्षेत्र विस्तृत परंतु टीम सीमित है। लेकिन फिर भी जितना हो सकता है हम अतिक्रमण रोकने को तत्पर व हमेशा प्रयासरत हैं…

आज़ाद:- (02)
प्राधिकरण किन मानदंडों के आधार पर किसी भवन का मानचित्र पास करता है ?

हरबीर सिंह
प्राधिकरण जिन मानदंडों के आधार पर मानचित्र पास करती है उसमें सर्वप्रथम राजस्व एनओसी, लोनिवि एनओसी, अग्निशमन विभाग, वन विभाग द्वारा तथा हिल सेफ़्टी कमेटी द्वारा एनओसी प्राप्ति के पश्चात ही मानचित्र पास किया जाता है..

आज़ाद (03)
सूखाताल क्षेत्र में एक विवादस्पद इमारत है जिस पर आपके द्वारा कार्रवाई भी की गयी थी लेकिन वहां अभी भी स्थितियां जस की तस हैं, आख़िर क्यों दोबारा कार्रवाई नहीं हो रही ?

हरबीर सिंह
वहां का मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है इसलिए उस पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा..

आज़ाद (04)
हिल सेफ़्टी कमेटी और प्राधिकरण नियमानुसार नैनीताल नगर में कितना मंज़िला अथवा कितना ऊँचा भवन बनाना वैध है ?

हरबीर सिंह
हिल सेफ़्टी कमेटी और प्राधिकरण के नियमानुसार केवल दो मंज़िला भवन जिसमें भू-तल व प्रथम तल शामिल है तथा उक्त भवन की ऊंचाई अधिकतम 7.5 मीटर वैध है…

आज़ाद (05)
नगर पालिका के अलावा नैनीताल में प्राधिकरण के अंतर्गत कितने शौचालय आते हैं तथा क्या आप उनकी वर्तमान हालात से संतुष्ट हैं ?

हरबीर सिंह
नगर में जितने हाईटेक शौचालय हैं वे सभी प्राधिकरण के अंतर्गत आते हैं जिनकी संख्या कुल नौ (09) है तथा उनकी हालत देखने के लिये हम समय समय पर निरीक्षण करते रहते हैं…

अंक 106 : जानें फिर क्या व कहाँ हुआ असर नवीन समाचार और आज़ाद मंच का

शुक्रिया :- वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल का

साहिबान,
हमने नवीन समाचार के स्तम्भ आज़ाद के तीर में 01 फरवरी के अंक ज़रूरत मंदों के लिये ख़ुशख़बरी, कोई भी पहन सकता है पुलिस की वर्दी
उन्वान के साथ ये बताने की कोशिश की गयी थी कि पुलिस लाइन के प्रांगण में ऐसी वर्दी पड़ी है जिसको साल भर बड़ी शिद्द्त के साथ सेल्यूट किया जाता रहा और काम निकलने / पुरानी होने पर उसे घर के कपड़ों की तरह बारिश में सड़ने गलने को फेंक दिया,
ख़ैर,
हमारी ख़बर का संज्ञान लेते हुये वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय ने तत्काल प्रभाव से अपने अधीनस्थों को निर्देश दिये, जिस पर कार्रवाई करते हुये, पुलिस लाइन प्रांगण में पड़ी पड़ी सड़ रही वर्दियों को वहां से हटाकर किसी सही जगह पर रखा गया,
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की
तत्काल प्रभाव कार्रवाई के लिये
आज़ाद मंच परिवार आपका
दिल से शुक्रिया अदा करता है और आने वक़्त में भी आपसे यही उम्मीद करता है |

अंक 105 : स्थायी लोक अदालत, ‘नवीन समाचार’ और ‘आज़ाद मंच’ का

शुक्रिया : अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी नगर पालिका नैनीताल का

साहिबान,
कुछ महीनों पहले हमने नवीन समाचार के स्तम्भ आज़ाद के तीर में झील का गुनहगार पेशाबघर उन्वान के साथ ये बताने की कोशिश की थी कि किस तरह से जीर्ण क्षीर्ण हो चुके पेशाबघर की सारी गंदगी झील में जा रही थी जिससे नैनीताल वासियों की सेहत का सीधे तौर पर वास्ता था, काफी दिन बाद भी इस मामले का संज्ञान नहीं लिया गया तब कहीं जाकर नैनीताल में मौजूद स्थायी लोक अदालत में मामला दायर किया गया, जिसमें दो माह से पहले ही नगर पालिका को ये आदेश दिये गए कि यदि पेशाबघर को मरम्मत करके उसका जीर्णोद्धार किया जाता है तो उसकी समय समय पर देख रेख यानि साफ़ – सफ़ाई की उचित व्यवस्था करनी होगी, जिसमें वाटर टैंक, सीवर कनेक्शन और नियमित सफ़ाई शामिल है यदि उक्त पेशाबघर का उचित रख रखाव के लिए आप असमर्थ हैं तो उसको तुड़वाकर जगह ख़ाली करें,
हमें इस बात की ख़ुशी है कि
आखिरकार नगर पालिका प्रशासन ने आज से उक्त तथाकथित पेशाबघर का जीर्णोद्धार का काम शुरू करवा दिया है जिसमें सबसे पहले सीवर का कनेक्शन दिया गया, जो किसी भी शौचालय / पेशाबघर की पहली शर्त होती है, जब ये बनाया गया था तब इतनी बड़ी भूल कैसे हुई इस विषय पर चर्चा फिर कभी, फ़िलहाल, इस बेहतरीन शुरुआत के लिये सबसे पहले हम स्थायी लोक अदालत के न्यायाधीश श्री बृजेन्द्र सिंह जी का हार्दिक आभार व्यक्त करना चाहेंगे जिनकी न्यायदृष्टि जल्द ही न्याय मिला, उसके बाद अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका नैनीताल रोहिताश शर्मा का आभार व्यक्त करना चाहते हैं जिनके निर्देशन में उक्त कार्य सम्पन्न हो रहा है,
साथ ही साथ हमें यक़ीन है आने वाले वक़्त में भी आपका साथ यूँही मिलता रहेगा…

न काहू से दोस्ती
न काहू से बैर

सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है

अंक 104 : ज़रुरतमंदों के लिये ख़ुशख़बरी, अब कोई भी पहन सकता है पुलिस की वर्दी

नैनीताल पुलिस लाइन में बिखरी पड़ी हैं वर्दियां, जाइये, उठाइये, पहनिए और बन जाइये पुलिसकर्मी

साहिबान,
ये जो तस्वीर आप देख रहे हैं न,
ये नैनीताल में मौजूद पुलिस मुख्यालय के मैदान का है, जहाँ पिछले क़रीब एक हफ्ते से पुलिस कर्मियों की वर्दियां लावारिस हालात में पड़ी हुई हैं, मामला तब ज़्यादा रोचक हो जाता है जब वहीँ मौजूद एक पुलिस कर्मी से इस बावत बात करने पर उसने बड़ा भोला जवाब दिया हमने उससे पूछा भाई ये माजरा क्या है क्यों पड़ी हैं ? हमारे पुलिस कर्मियों की वर्दियां इस हालत में ? तो उसने सीधे जवाब दिया कि हमारे किसी काम की नहीं है ये वर्दियां,आपको चाहिए होंगी तो ले जाना, ये सुनकर तो मानो हम सपनों की दुनिया में ही खो गये, वर्दी पहनकर इसी बहाने उत्तराखंड पुलिस का फ़ख़्र और नाज़ हासिल होगा, गली, मोहल्ले में सीना तानकर चलेंगे, परिवार वालों को भी नकारा लड़के के तारीफ़ों के पुल बांधने का मौक़ा मिल जाएगा, रिश्तेदारों में भी अलग शान बन जाएगी और तो और चाय- समोसा, बस, ऑटो का किराया माफ़ हो जाएगा,
अस्पताल वाले उतना ही इलाज करेंगे जितना जायज़ है, स्कूल वाले अंट- शन्ट शुल्क के लिये बार बार फोन नहीं करेंगे, फिर तो घर से लेकर बाहर तक अपने क़दम चांदी (कामयाबी तो वर्दी पहनकर ही क़दम चूमने लगती है ) चूमेगी, और मन में एक ही गीत बजेगा,
आला रे आला सिम्बा आला
फिर क्या था अचानक उस पुलिसकर्मी ने आवाज़ दी हाँ भैया आपको चाहिये क्या?
हमारा प्यारा ख्वाब टूटा और उसकी तरफ़ सर हिलाकर हाँ में जवाब दिया और आ गये घर से बड़ा सा थैला लेने,
अब सुबह का इंतज़ार है जल्दी से सुबह हो और वर्दी लेकर पहनूं और बन जाऊँ मैं भी उत्तराखंड का होनहार पुलिसकर्मी…
जय हिन्द बोलने में अलग ही फ़ील आता है बाई गॉड…

आज़ाद के तीर अंक 103 : नैनीताल के प्रथम नागरिक का प्रथम साक्षात्कार नगर के अंतिम नागरिक द्वारा (भाग – 3)

सचिन नेगी को देश की दूसरी एतिहासिक नगर पालिका नैनीताल का प्रथम नागरिक बने एक माह छबीस दिन पूरे हुये हैं, उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष पद की शपथ ग्रहण करने के बाद अब तक नगर हित के लिये क्या कार्य किये हैं। आइये जानते हैं प्रथम नागरिक से अंतिम नागरिक की हुई बातचीत के अंश :- सवाल (13) से आगे

साक्षात्कार नगर पालिकाध्यक्ष भाग -03

आइये जानते हैं प्रथम नागरिक से अंतिम नागरिक की हुई बातचीत के अंश :- सवाल (12) से आगे

सवाल (13)
अंतिम नागरिक
कुछ सालों पहले नगर पालिका द्वारा शरदोत्सव के नाम से एक उत्सव आयोजित किया जाता था, क्या नगरवासी दोबारा कभी शरदोत्सव देख पाएंगे ?

जवाब (13)
प्रथम नागरिक
मैं आपको यक़ीन दिलाता हूँ कि
इस वर्ष शरदोत्सव का आयोजन नगर पालिका द्वारा किया जाएगा।
सवाल (14)
अंतिम नागरिक
नगर पालिका के द्वारा
नगर के विकास के लिये क्या योजनायें चलाई जाएंगी ?

जवाब (14)
प्रथम नागरिक
सबसे पहले हमने नगर की समस्या से संबंधित टोल फ्री नंबर जनता की सेवा में समर्पित कर दिया है, जिस पर सफ़ाई, प्रकाश आदि की शिकायतें कर सकते हैं उनका तीन दिन के अंदर निदान भी किया जाएगा, दूसरा झील में नौकायन रोज़गार के अवसर बढ़ाने के लिये सोलर एनर्जी से चलने वाली नावें जल्द ही लाई जाएंगी, उस पर बात चल रही है, तीसरा रा.शहरी आजीविका मिशन के तहत बेरोज़गारों को स्वरोज़ग़ार स्थापित करने के लिये ₹2 लाख तक का ऋण दिलाने में सहायता की जा रही है, ऐसे ही बहुत से माध्यमों से नगर का विकास किया जा रहा है और किया जाएगा।

सवाल (15)
अंतिम नागरिक
ई- रिक्शा की सौग़ात नैनीतालवासियों को कब तक मिलेगी ?

जवाब (15)
प्रथम नागरिक
ई -रिक्शा की सौग़ात मिल जाती लेकिन यहां अगर प्रेक्टिकली सोचा जाये तो यहां के मौसम को देखते हुये चार्जिंग समस्या रहेगी, पार्किंग की नई समस्या आ जाएगी और भी कई दिक्कतों की वजह से ई -रिक्शा नैनीताल में चलाना मुमकिन नहीं है।

सवाल (16)
अंतिम नागरिक
पालिका की आय बढ़ाने के लिये आपके द्वारा क्या -क्या उपाय किये जा रहे हैं ?

जवाब (16)
प्रथम नागरिक
दो नई पार्किंग शुरू की जा रही हैं,
एक पम्प हाउस के पास, दूसरी बारा पत्थर के पास, और भी बहुत कुछ उपाय किए जा रहे हैं वो भी जल्द ही पता लग जाएंगे आपको।

सवाल (17)
अब बस एक अंतिम सवाल:- आप अभी नये हैं पालिका के लिये तो यहां अन्य लोगों के साथ आप सामंजस्य कैसे बैठा पा रहे हैं, कोई कठिनाई महसूस तो नहीं हो रही ?

जवाब (17)
प्रथम नागरिक
परिवार का मुखिया होने के नाते सभी मेरे परिवार के प्रिय सदस्य हैं, अभी तक सबके साथ अच्छा तालमेल रहा है और यकीन है आगे भी अच्छा ही रहेगा |

साक्षात्कार समाप्त

(नोट :- सभी से अनुरोध है कि कृपया यहां प्रयोग हुए अंतिम नागरिक शब्द को किसी अन्य चश्में से न देखा जाये, इस शब्द का प्रयोग केवल अपनी बात रखने के लिये किया गया है,
धन्यवाद )

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न काहू से बैर

सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है ….

आज़ाद के तीर अंक 102 : साक्षात्कार भाग:- 2

सवाल (07) अंतिम नागरिक
अब बात करते है फड़ – खोखा व्यवसायियों की, जिन्होंने न समय का पालन किया है, न आवंटित संख्या का, कभी निरीक्षण किया आपने उस क्षेत्र का ?

जवाब (07)
प्रथम नागरिक
इसमें ज़िला प्रशासन के द्वारा आवंटन है तथा प्रशासन के द्वारा ही एक कमेटी गठित की जा रही है, जिसमें प्रशासनिक अधिकारी, दोनों व्यापर मंडल के अध्यक्ष,
तिब्बती मार्केट के अध्यक्ष, मुख्य चिकित्साधिकारी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारे व चर्च से एक एक प्रतिनिधि, होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष, दो एन.जी.ओ. के प्रतिनिधि तथा चार खोखा फड़ समिति के प्रतिनिधि उक्त कमेटी में शामिल किये गये हैं, अब कमेटी बैठकर निर्णय लेगी इसमें आगे क्या करना है।

सवाल (08)
अंतिम नागरिक
चाट पार्क और भोटिया माला बाज़ार का अतिक्रमण फिर पैर पसारने लगा है पालिका की आंखें कब खुलेंगी ?तिमंज़िला बनने के बाद ?

जवाब (08)
प्रथम नागरिक
चाट पार्क में केवल आठ रेस्टौरेंट को बाहर बेंच लगाने की अनुमति प्राप्त है, उनके अलावा कोई और लगाता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। भोटिया माला बाज़ार पर भी वही नियम लागू रहेगा। पालिका सबके लिये एक ही मापदंड लेकर चलेगी।

सवाल (09)
अंतिम नागरिक
नगर के प्रमुख बाज़ार दुकानों में कम, सडकों पर अधिक लग रहे हैं, उक्त अतिक्रमण पर चुप्पी क्यों साधी है पालिका प्रशासन ने ?

जवाब (09)
प्रथम नागरिक
इस सम्बन्ध में जल्द ही दोनों व्यापार मंडल अध्यक्षों के साथ मीटिंग करने वाला हूँ। जल्द ही निबटारा होगा इस समस्या का भी।

सवाल (10)
अंतिम नागरिक
नगर की जर-जर सडकों पर आपका क्या कहना है? टूटी फूटी सड़कों की मरम्मत कब तक की जाएगी ?

जवाब (10)
प्रथम नागरिक
शपथ ग्रहण के अगले ही दिन से मैंने एक से लेकर पंद्रह वार्ड की टूटी सड़कों को चिन्हित करवाया था। अब दो या तीन माह का समय और दीजिये। नगरवासियों को कोई शिकायत का मौक़ा नहीं मिलेगा।

सवाल (11)
अंतिम नागरिक
नगर पालिका के अंतर्गत आने वाले शौचालय कितने हैं ?तथा उनकी हालत में सुधार कब आएगा ?

जवाब (11)
प्रथम नागरिक
नगर पालिका के लगभग पांच या छह शौचालय हैं, जिनमें नारायण नगर, जुबिली हॉल, पोस्ट ऑफिस के पीछे और चार्टन लॉज के निकट (पेशाबघर) हैं जिनका जीर्णोद्धार जल्दी किया जाएगा।

सवाल (12)
अंतिम नागरिक
नगर पालिका के अंतर्गत आने वाले कितने स्कूल हैं ? और उनमें शिक्षा का स्तर बेहतर करने के लिये क्या प्रयास किये जा रहे हैं ?

जवाब (12) प्रथम नागरिक :-
पालिका के अंतर्गत तीन स्कूल हैं। एक प्रा.वि. लाइब्रेरी के सामने वाला, दूसरा मिडिल स्कूल और तीसरा सूखाताल स्थित ऐशडेल स्कूल। इन तीनों में ही जल्द से जल्द निःशुल्क इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स की व्यवस्था लागू की जाएगी।

साक्षात्कार जारी…

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आज़ाद के तीर अंक 101, साक्षात्कार भाग – 1

सवाल (01)
अंतिम नागरिक:-
सबसे पहले बात करते हैं नगर में आतंक मचा रहे आवारा कुत्तों की, खुराफात मचाते बंदरों की और सड़क पर घूमते पालतू बड़े जानवरों की, इस सम्बन्ध में क्या क़दम उठाये जा रहे हैं आपके द्वारा ?

जवाब (01)
प्रथम नागरिक:- आवारा कुत्तों के बंध्याकरण की प्रक्रिया चलाई गयी है, जिसमें 90% कुत्तों का वेक्सिनेशन किया गया है। लंगूरों और बंदरों को पकड़ने के लिये टीम बुलाई जा रही है और आवारा पालतू जानवरों को हल्द्वानी के पशु घरों में ले जाया जाएगा, जल्द ही इन सबसे निजात मिल जाएगी।

सवाल (02)
अंतिम नागरिक :- नगर में डोर टू डोर कूड़ा निस्तारण योजना का प्रचार तो ख़ूब हो रहा है लेकिन धरातल पर कोई कार्य नहीं दिख रहा, ऐसा क्यों ?

जवाब (02)
प्रथम नागरिक:- अभी हमारी ओर से निजी संस्था जाग्रति को 2000 कूड़ेदान दिए जा चुके हैं। जिससे काम तो प्रारम्भ हो चुका है, आगे जल्द ही उचित संख्या में कूड़ेदान और प्रदान किये जाएंगे ताकि योजना धरातल पर जल्द से जल्द दिखे।

सवाल (03)
अंतिम नागरिक :- नगर के उद्यानों की हालत बेहद ख़राब है। अब तो उद्यान भी पालिका के तहत हैं। फिर इनका सौंदर्यीकरण कब किया जाएगा ?

जवाब (03)
प्रथम नागरिक :- इसके लिये सारी तैयारियां हो चुकी हैं, मार्च तक हर उद्यान का सौंदर्यीकरण हो जाएगा।

सवाल (04)
अंतिम नागरिक :-  नगर में नालियां जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, उससे दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है, अनुरक्षण विभाग कहाँ सो रहा है आपका ?

जवाब (04)
प्रथम नागरिक :- इसके लिये इस्टीमेट बनाया जा रहा है, 15-20 दिन बाद कार्य प्रारम्भ हो जाएगा इस पर भी।

सवाल (05)
अंतिम नागरिक :- नगर की स्ट्रीट लाइट का ठेका ईको ड्राइव कम्पनी को दे रखा है। कई वार्ड से बहुत शिकायतें मिल रही हैं कि अँधेरा है। आख़िर क्या कर रही है उक्त कम्पनी ?

जवाब (05)
प्रथम नागरिक :- कम्पनी ने लगभग समस्त स्ट्रीट लाइट पर एल.ई.डी. बल्ब लगा दिये हैं । जहाँ नहीं लग पाये हैं वहां भी कोशिश रहेगी कि जल्द ही लग जायें।

सवाल (06)
अंतिम नागरिक :- शहर में जगह-जगह मलबे के कट्टे शोभा बढ़ा रहे हैं, लोनिवि कहता है हमारा काम नहीं है कट्टे उठाना। आपका क्या कहना है इस बारे में ?

जवाब (06)
प्रथम नागरिक :- सबसे पहले तो ये जानना होगा कि आख़िर वो कट्टे वहां रखे किसने हैं । पता लगते ही उक्त व्यक्ति का चालान काटा जाएगा। और जो मलबे के कट्टे लावारिस अवस्था में पड़े हैं उनको पालिका द्वारा उठाया जाएगा।

साक्षात्कार जारी…

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न काहू से बैर, क्योंकि सावधानी ही समस्या का पहला समाधान है ….

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