Oops! It appears that you have disabled your Javascript. In order for you to see this page as it is meant to appear, we ask that you please re-enable your Javascript!

उत्तराखंड की राज्यपाल से की गयी उनसे ही संबंधित अब तक की ‘सबसे बड़ी’ मांग

Spread the love

-राज्यपाल की फ्लीट के लिए रोकने के विरोध में राज्यपाल को भेजा ज्ञापन
-वीआईपी कल्चर पर रोक लगाने के लिए राज्यपाल से स्वयं पहल कर उदाहरण प्रस्तुत करने का किया अनुरोध
नैनीताल, 6 सितंबर 2018। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के नगर सचिव अधिवक्ता कैलाश जोशी के नेतृत्व में बृहस्पतिवार को अधिवक्ता प्रमोद कुमार, राजेंद्र असवाल, रोहित कुमार, त्रिभुवन फर्त्याल व नवनीश आदि के प्रतिनिधिमंडल ने कुमाऊं आयुक्त राजीव रौतेला के माध्यम से प्रदेश की राज्यपाल को एक ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में नैनीताल शहर में ‘वीआईपी कल्चर’ से शहर में उत्पन्न होने वाली दिक्कतों का जिक्र किया गया है। कहा गया है, ‘नगर में पहले ही यातायात का भारी दबाव है, और इस कारण लोवर माल रोड धंस भी चुकी है। उस पर नगर में वीआईपी व वीवीआईपी आने के समय उनके लिए मार्ग सुगम बनाना प्रशासन की प्राथमिकता बन जाता है, इससे आम जनता त्रस्त होती है, और उसे घंटों इंतजार करना पड़ता है। राज्यपाल के नैनीताल राजभवन के दौरे के दौरान भी जनता को काफी कष्ट झेलने पड़ते हैं।’ उम्मीद की गयी है कि इस वीआईपी कल्चर पर रोक लगाने के लिए राज्यपाल स्वंय पहल कर उदाहरण प्रस्तुत कर सकती हैं। ज्ञापन में नैनीताल शहर में वीआईपी व वीवीआईपी वाहनों के लिए विशेष महत्व दिया जाना बंद करने और राज्यपाल के नैनीताल आने पर उनके काफिले को मिलने वाले वीआईपी ट्रीटमेंट को खत्म करने के लिए आदेश जारी करने की मांग की गयी है, ताकि यह आगे के लिए भी एक अच्छी परंपरा बन जाये। ज्ञापन में उत्तराखंड महिला मंच की डा. उमा भट्ट, डा. शीला रजवार, कौशल्या साह, राजीव लोचन साह, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रताप सिंह मौनी, मान सिंह बिष्ट, पंकज चौहान, सुभाष जोशी, हितेश पाठक, प्रदीप परगाई, भुवन जोशी, मनीष जोशी, संजय त्रिपाठी व राजेंद्र बोरा सहित नगर के विभिन्न संगठनों एवं बुद्धिजीवियों व अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर हैं।

यह भी पढ़ें: नयना देवी को शीश नवाकर लौटीं राज्यपाल बेबी रानी मौर्य

नैनीताल, 28 सितंबर 2018। उत्तराखंड की राज्यपाल शुक्रवार को नगर की आराध्य देवी माता नयना के मंदिर में दर्शन करके लौट गयी हैं। नगर से लौटने से पहले शुक्रवार सुबह वे अपने परिजनों के साथ नयना देवी मंदिर पहुंचीं और विधिवत पूजा-अर्चना की। इस दौरान कुमाऊं आयुक्त राजीव रौतेला, एएसपी हरीश चंद्र सती आदि उच्चाधिकारी भी मौजूद रहे।
उल्लेखनीय है कि वे यहां मंगलवार को पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने नैनीताल राजभवन में अपने तीन दिन के प्रवास के दौरान ‘नैनीताल को उत्तराखंड का दिल और इस नगर के कारण उत्तराखंड की वैश्विक पहचान’ बताकर नगर वासियों का दिल जीत लिया। साथ ही नगर की मजबूती के लिए नगर के आधार बलियानाला के सुधार कार्यों के लिए अधिकारियों से वार्ता की। साथ ही नगर के स्कूली बच्चों, शिक्षकों एवं शिक्षाधिकारियों से बात कर बच्चों की सुरक्षा तथा उन्हें नशे से दूर रखने पर चर्चा की। साथ ही बच्चों से बड़े सपने देखने का आह्वान भी किया।

यह भी पढ़ें: नयी राज्यपाल बेबी रानी ने जीत लिया नैनीतालवासियों का ‘दिल’

-उत्तराखंड का दिल है नैनीताल, नैनीताल के कारण है उत्तराखंड की वैश्विक पहचान, बताया 1970 से यहां आती रही हैं

पहली बार नैनीताल राजभवन पहुंचीं राज्यपाल बेबी रानी मौर्य

नैनीताल, 25 सितंबर 2018। प्रदेश की राज्यपाल बैबी रानी मौर्या मंगलवार को अपने निर्धारित कार्यक्रमानुसार नैनीताल प्रवास पर पहुचीं। राजभवन पहुचने पर कुमाऊं कमिश्नर राजीव रौतेला, आईजी पूरन सिंह रावत, कुलपति डीके नौड़ियाल, केएमवीएन के एमडी धीराज गर्ब्याल व जीएम त्रिलोक सिंह मर्तोलिया, राज्यपाल के सचिच आरके सुधांशु, गोल्फ कैप्टन कर्नल हरीश साह सहित अन्य अधिकारियों के द्वारा पुष्प गुच्छ देकर उनका स्वागत किया गया तथा पुलिस विभाग की गारद द्वारा सलामी दी गयी। इस अवसर पर श्रीमती मौर्या ने कहा कि उनके लिए नैनीताल शहर नया नहीं है, तथा देवभूमि उत्तराखंड से उनका दिली लगाव रहा है। वह वर्ष 1970 से लगातार नैनीताल आती रहीं हैं। कहा कि नैनीताल उत्तराखंड का दिल है और नैनीताल के कारण विश्व पटल पर उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान है। नैनीताल में पर्यटकों की संख्या में पहले की तुलना में वृद्धि हुई है। कहा कि नैनीताल शहर के आस पास के गांवों तथा पर्यटन स्थलों को और अधिक विकसित करने तथा यहां के माता नयना देवी मंदिर सहित क्षेत्र के सभी ऐतिहासिक मंदिरों के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक किये जाने की आवश्यकता है। कहा कि समय की मांग तथा जनहित में यहां कुछ नवाचारी कार्य होने भी जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि जापानी कम्पनी व आईआईटी रूड़की के वैज्ञानिकों द्वारा क्षेत्र का अध्ययन करते हुए कुछ सुझाव दिये गये हैं। इसके अनुरूप नगर की मजबूती के लिये कार्य किये जाएंगे। वह चाहती हैं कि नैनीताल सहित राज्य का चहुमुखी विकास हो, क्षेत्रवासियों को उत्पन्न हुई समस्याओं से तत्काल राहत मिले और पर्यटन को बढ़ावा मिले। वह राज्यपाल के रूप में प्राप्त जिम्मेदारियों एवं दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करते हुए देवभूमि के विकास के लिए सदैव तत्परता से कार्य करती रहेंगी। इस दौरान राज्यपाल को आयुक्त कुमाऊं राजीव रौतेला नेे मंडल में संचालित विभिन्न कार्यों की तथा आईजी पूरन सिंह रावत ने कानून एवं शान्ति व्यवस्था के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने आईजी पूरन सिंह रावत को कानून एवं शान्ति व्यवस्था बनाए रखने तथा वांछित अपराधिकयों को पकड़ने के लिए ठोस कार्य योजना बनाकर कार्य करने के निर्देश दिये।

यह भी पढ़ें: इसलिए बेबी रानी बनीं उत्तराखंड की राज्यपाल ! और उत्तराखंड को यह बनाना है उनका लक्ष्य

बेबी रानी मौर्य को उत्तराखंड की नयी राज्यपाल बन गयी हैं। उनकी नियुक्ति के पीछे उन पर राष्ट्रपति रामलाल कोविंद की कृपादृष्टि रही है। आगरा के बालूगंज की निवासी बेबी रानी का परिवार गैरराजनीतिक रहा है। उनके ससुर एमडी मौर्य आईपीएस अधिकारी, जबकि पति प्रदीप कुमार मौर्य बैंक के अधिकारी रहे हैं। बावजूद वे साल 1995 से 2000 तक आगरा की पहली मेयर रह चुकी हैं। इस बीच 1997 में वे भाजपा के राष्ट्रीय अनुसूचित मोर्चा की कोषाध्यक्ष रहीं। तब वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद राष्ट्रीय अनुसूचित मोर्चा के अध्यक्ष थेे। इसलिए उनकी नियुक्ति को इसी कोण से जोड़कर देखा जा रहा है। 

बेबी रानी मौर्य ने रविवार को रक्षाबंधन के पर्व पर शाम पांच बजे उत्तराखंड के सातवें राज्यपाल के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया। उन्हें राज्य के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा ने शपथ दिलाई। यह पहला मौका भी रहा जब राज्य के किसी कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश ने राज्यपाल को शपथ दिलाई। श्रीमती मौर्य में हिंदी में शपथ ग्रहण की। इस दौरान उन्होंने हिंदी में शपथ ग्रहण की, और इसके बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘न्यू इंडिया’ की तर्ज पर ऐसा ‘न्यू उत्तराखंड’ बनाने का संकल्प भी जताया, जो देश की तरक्की में अपना योगदान दे सके। देवभूमि उत्तराखंड का राज्यपाल बनने को उन्होंने अपने लिये गौरव बताया। कहा कि उत्तराखंड विकास के नये आयाम बनाते हुए देश के शीर्षस्थ राज्यों में स्थान बनाये, यह उनकी प्राथमिकता होगी। इस हेतु महिला सशक्तीकरण, बालिका शिक्षा व स्वच्छता अभियान को मजबूती दी जाएगी। उच्च शिक्षा में शोध को प्रोत्साहित किया जाएगा। 

यह भी पढ़ें : पूर्व महापौर बेबी विधायक नहीं बन पायीं, पर बन गयीं राज्यपाल, इसे कहते हैं कुछ भी हो सकता है…

नवीन जोशी, नैनीताल (21 अगस्त 2018)। राष्ट्रपति भवन की ओर से मंगलवार देर शाम जारी विज्ञप्ति के अनुसार देश के सात राज्यों के राज्यपाल बदल गये हैं। इस सूची में सबसे चौंकाने वाला नाम तीसरे नंबर पर उत्तराखंड की भावी राज्यपाल का है। बेबी रानी मौर्य (जन्म 15 अगस्त 1956) को केके पॉल की जगह उत्तराखंड का नया राज्यपाल बनाया गया है। हालांकि उत्तराखंड सहित संयुक्त यूपी की शुरुआत ही महिला राज्यपाल से हुई थी। 15 अगस्त 1947 को देश की आजादी के दिन सरोजनी नायडू यूपी की पहली कार्यवाहक राज्यपाल बनी थीं। हालांकि उनके बाद से यूपी को कभी भी महिला राज्यपाल नहीं बनीं, अलबत्ता उत्तराखंड में मार्गरेट आल्वा राज्यपाल बनीं। अब श्रीमती मौर्य मार्गरेट आल्वा के बाद उत्तराखंड की दूसरी महिला राज्यपाल होंगी।
उल्लेखनीय है कि यूपी की भाजपा नेत्री, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती मौर्य वर्ष 2007 में भाजपा के टिकट से यूपी के आगरा जिले की एत्मादपुर सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ी थीं, और बसपा प्रत्याशी नरायन सिंह सुमन से करीब 10 हजार वोटों के अंतर से हारकर दूसरे स्थान पर रही थीं। इस चुनाव में उन्हें 37,916 जबकि बसपा प्रत्याशी को 47,536 वोट मिले थे। इसके अलावा 2001 में उन्हें प्रदेश सामाजिक कल्याण बोर्ड का सदस्य आर 2002 में राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य बनाया गया। 2013 से 2015 तक भाजपा संगठन में उन्होंने प्रदेश मंत्री का दायित्व दिया। आलाकमान ने पार्टी का दलित चेहरा और महिला होने के नाते ही उन्हें दायित्व सौंपा है। इसके अलावा सामाजिक कार्यों के लिए 1996 व 1997 में उत्तर प्रदेश समाज रत्न तथा 1998 में नारी रत्न से सम्मानित किया गया। फिलहाल वे अमेरिका गई हुई हैं। यूपी में केशव प्रसाद मौर्य के बाद श्रीमती मौर्य को उत्तराखंड का राज्यपाल बनाने के साथ भाजपा की नजर मौर्य बिरादरी किस हद तक साधने की है, अथवा एक महिला भी होने के नाते उनकी नियुक्ति के क्या राजनीतिक निहितार्थ हैं, फिलहाल कहना मुश्किल है।
अपनी नियुक्ति के बाद श्रीमती मौर्य उत्तराखंड से सर्वाधिक सर्च की जा रही हैं, लेकिन खास बात यह है कि उनके बारे में उत्तराखंड के साथ ही उनके गृह राज्य यूपी के भाजपा नेताओं को भी अधिक जानकारी नहीं है। वहीं गूगल के लिए भी वे बेहद अल्पज्ञात हैं। गूगल पर भी उनके बारे में जितनी जानकारियां हैं, उनमें से अधिकांश उनकी नियुक्ति के बाद की हैं। इसके अलावा गूगल उनके बारे में केवल इतना भर बताता है कि वे आगरा की महापौर निर्वाचित हुईं, तथा 20 फरवरी 2002 से 19 फरवरी 2005 तक यानी तीन वर्ष तक राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य रही हैं, और इधर अगस्त 2018 का महीना उनके लिए दोहरी खुशियों, या कहें कि लॉटरी लगने सरीखा रहा है। इसी माह के शुरू में पहले उन्हें तीन वर्ष के लिए राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग का सदस्य बनाया गया, और अब अगस्त के दूसरे पखवाड़े में ही उन्हें उत्तराखंड के राज्यपाल का बड़ा ओहदा मिला है। 

राष्ट्रपति भवन से जारी विज्ञप्ति के अनुसार उनके अलावा बिहार के राज्यपाल सतपाल मलिक को जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया है। वह एनएन वोहरा का स्थान लेंगे। वहीं दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निकटस्थ रहे वरिष्ठ भाजपा नेता लालजी टंडन बिहार के राज्यपाल नियुक्त किये गये हैं। वह मलिक की जगह लेंगे। जबकि हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी को त्रिपुरा भेज दिया गया है, और उनकी जगह सत्यदेव नारायण आर्य हरियाणा के नये राज्यपाल होंगे। वहीं त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत रॉय अब मेघालय के राज्यपाल होंगे, जबकि मेघालय के राज्यपाल गंगाप्रसाद का स्थानांतरण सिक्किम कर दिया गया है। इस पूरे बदलाव में केवल उत्तराखंड के राज्यपाल केके पॉल व जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल एनएन बोहरा ही हैं, जिन्हें आगे कोई जिम्मेदारी नहीं दी गयी है। उल्लेखनीय है कि यूपीए के दौर में नियुक्त पॉल का पांच वर्ष का कार्यकाल पहले ही पूरा हो चुका है। कांग्रेस शासन के दौर में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगने के दौर में उन्होंने राज्य की पूरी शासन व्यवस्था भी संभाली। इस बारे में पूछे जाने पर उत्तराखंड के एक बड़े नेता ने भी उनके नाम पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, भाजपा में ही रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति, और बेबी रानी मौर्य राज्यपाल बन सकती हैं।

यह भी पढ़ें: पंजाब में आतंकवाद खत्म करने व तहलका जांच सहित अनेक उपलब्धियां जुड़ी हैं उत्तराखण्ड के मनोनीत राज्यपाल डा. कृष्ण कांत पॉल के नाम

Loading...

Leave a Reply