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सरोवरनगरी में बसंत पंचमी पर 24 वर्षों बाद हुआ यह आयोजन

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-श्रीराम सेवक सभा के तत्वावधान में 1994 के बाद आयोजित हुआ सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार

श्रीराम सेवक सभा में आयोजित कार्यक्रम में सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार कराते बटुक।

नवीन समाचार, नैनीताल, 10 फरवरी 2019। सरोवरनगरी की सबसे पुरानी धार्मिक-सामाजिक संस्था श्रीराम सेवक सभा के तत्वावधान में रविवार को बसंत पंचमी के अवसर पर सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पांच बटुकों-उज्जवल साह, कुणाल, गौतम, कृष्णा व प्रणय साह का यज्ञोपवीत संस्कार किया गया। बताया गया कि यह आयोजन संस्था के द्वारा 24 वर्षों के बाद किया गया। बताया गया कि  इससे पूर्व 1994 में हुए ऐसे ही आयोजन में 51 बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार किया गया है।
श्रीराम सेवक सभा के सभागार में आयोजित हुई कार्यक्रम में धार्मिक अनुष्ठान आचार्य जगदीश लोहनी, घनश्याम जोशी व मनोज कांडपाल ने संपन्न कराये। आगे सामूहिक भोज का कार्यक्रम भी हुआ। सभा के उपाध्यक्ष अनूप शाही ने बताया कि इस बार जल्दी में यह कार्यक्रम किया गया। भविष्य में इसे बृहद स्तर पर किया जाएगा। आयोजन में सभा के अध्यक्ष मनोज साह, महासचिव राजेंद्र लाल साह, विमल चौधरी, मुकेश जोशी, विमल साह, सतीश पांडे, मिथिलेश पांडे, कमलेश ढोंढियाल, हिमांशु जोशी, राजेंद्र बिष्ट, चंद्र लाल साह, ललित साह, पुष्कर साह व गीता साह आदि ने भी योगदान दिया, जबकि डा. राजीव उपाध्याय, भारती साह, आभा साह, दीप्ति साह, कमला साह, सुनीता साह, सुधा साह, सुनीता साह व डा. सावित्री कैड़ा जंतवाल आदि भी मौजूद रहे।
ःःइनसेटःः
घर-घर में रहा भक्तिमय माहौल
नैनीताल। बसंत पंचमी के अवसर पर नगर में घर-घर में भक्तिमय माहौल रहा। लोगों ने नहा-धोकर पीले बासंती रंग के वस्त्र धारण किये एवं घरों में विशेष सरस्वती पूजा की एवं पकवान बनाये। इस दौरान नगर की आराध्य देवी नयना देवी सहित अन्य देवालयों में भी पूरे दिन श्रद्धालुओं की भीड़भाड़ रही। रविवार का साप्ताहिक अवकाश होने के कारण व्यवसायी वर्ग भी घरों-मंदिरों में धार्मिक आयोजनों में शामिल हो पाये।

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कुमाऊं में ‘श्री पंचमी’, ‘सिर पंचमी’ व ‘जौं पंचमी’ के रूप में मनायी जाती है बसंत पंचमी

सभी मित्रों को फूलों के इस त्योहार की बधाइयाँ। आपके जीवन में भी इसी तरह फूलों के रंग-बिरंगे रंग खिलें।

-कुमाऊं में अलग उत्साह से मनाया जाता है ऋतुराज बसंत के आगमन का त्योहार
नवीन जोशी, नैनीताल। कुमाऊं मंडल के पर्वतीय अंचलों में ऋतुराज बसंत के आगमन का पर्व ‘बसंत पंचमी” माघ माह के शुक्ल कक्ष की पंचमी की तिथि को परंपरागत तौर पर ‘श्री पंचमी’ के रूप में मनाया जाता है। इसे यहां सिर पंचमी या जौं पंचमी कहने की भी परंपरा है। इस अवसर पर ऋतुराज बसंत में खिलने वाले पीले ‘प्योंली’ के फूलों की तरह नये पीले रंग के वस्त्र धारण करने की परंपरा है। कोई पीला वस्त्र न हो तो पीले रंग के रुमाल जरूर रखे जाते हैं। साथ ही घरों व मंदिरों में खास तौर पर विद्या की देवी माता सरस्वती की विशेष पूजन-अर्चना की जाती है। इस दिन लोग सुबह स्नान कर अपने देवी-देवताओं के थान यानी मंदिरों को और घर को गाय के गोबर से लीपते हैं। उसके बाद अक्षत-पिठ्याँ और धूप-दीप जलाकर जौं के खेतों में जाकर वहां जौं के पौधों की पूजा कर उन्हें उखाड़कर घर में लाते हैं। इन पौधों पर सरसों का तेल लगाया जाता है। परिवार के सभी लोगों को स्नान व पूजा के उपरांत अक्षत-पिठ्याँ लगाते हैं। खेतों से विधि-विधान के साथ जाैं के पौधों को उखाड़कर घर में लाते हैं, और मिट्टी एवं गाय के गोबर का गारा बनाकर इससे जौं के तिनकों को अपने घरों की चौखटों पर चिपकाते हैं, साथ ही परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर जौं के तिनकों को हरेले की तरह चढ़ाते हुये आशीष दी जाती हैं। ‘लाग हरियाल, लाग बग्वाल, लाग सिर पंचमी, जी रये, जागि रये, यो दिन मास भेटनै रये’ यानी हरेला, बग्वाल एवं श्री पंचमी के त्योहार तुम्हारे लिये शुभ होवें, तुम हर वर्ष इन शुभ दिवसों को देखते जाओ। इस अवसर पर घरों में अनेक तरह के परंपरागत पकवान भी बनते हैं। साथ ही इस दिन छोटे बच्चों को विद्यारंभ एवं बड़े बच्चों का यज्ञोपवीत संस्कार भी कराया जाता है, तथा उनके कान एवं नाक भी छिंदवाए जाते हैं। बसंत पंचमी के इस पर्व को गांवों में बहन-बेटी के पावन रिश्ते के पर्व के रूप में मनाने की भी परंपरा है। इस पर्व को मनाने के लिए बेटियां ससुराल से अपने मायके आती हैं, अथवा मायके से पिता अथवा भाई उन्हें स्वयं पकवान व आशीष देने बेटी के घर जाकर उसकी दीर्घायु की कामना करते हैं। उल्लेखनीय है पहाड़ों पर छह मौसमों में ऋतुराज बसंत का मौसम सबसे सुखद माना जाता है। इस दौरान से कड़ाके की सर्दी से निजात मिलती है, इसलिए इस त्योहार पर आम जन में खासा उत्साह नजर आता है।

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नवीन समाचार

मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….।मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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