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निशंक का भवाली टीबी सेनीटोरियम को इमामी समूह को देने का आदेश निरस्त

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-मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल बनाने का पूर्व आदेश होगा प्रभावी

भवाली

नैनीताल, 16 अगस्त 2018। उत्तराखण्ड हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खण्डपीठ ने भवाली टीबी सेनीटोरियम के एक हिस्से को वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमन्त्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा आयुश ग्राम बनाने के लिए इमामी ग्रुप को 35 साल के लिये लीज पर देने के आदेश को निरस्त कर दिया है मामले के अनुसार भवाली निवासी मोहम्मद आजम ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि भवाली सेनीटोरिएम ब्रिटिश कालीन ऐतिहासिक अस्पताल है। यह अस्पताल कई राजनेताओं के इलाज का गवाह बना है। पूर्व में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने इस अस्पताल को चेस्ट इंस्टिट्यूट के रूप में विकसित करने के लिए करोड़ो रूपये की मशीने मंगाई थीं, जो अब बिना किसी उपयोग के बेकार हो गयी हैं। वहीं वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने टीबी सेनीटोरियम के एक हिस्से को आयुष ग्राम बनाने के लिए 35 साल की लीज पर दे दी। याची ने इसे इस सम्पति को खुर्द-बुर्द करने की साजिश बताया। मामले को सुनने के बाद खंडपीठ ने सरकार के 2010 के आदेश को निरस्त कर दिया, साथ ही इस अस्पताल को मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल बनाने के संदर्भ में अधिवक्ता दीपक रुवाली की जनहित याचिका में दिए गए निर्देशो को प्रभावी माना है।

यह भी पढ़ें : ऐतिहासिक भवाली सेनिटोरियम को लगाया 22 लाख का ‘चूना’

  • भवाली सेनिटोरियम में लघु निर्माण मद में अलग-अलग भागों में 11 लाख एवं अनुरक्षण मद में रंगाई-पुताई पर 11 लाख के घोटाले का अंदेशा
  • महानिदेशक के आदेशों पर स्वास्थ्य निदेशक कुमाऊं की जांच में सेनिटोरियम की तत्कालीन प्रमुख अधीक्षक सहित तीन अधिकारियों को उत्तरदायी बताते हुये की गई है विशेष जांच की संस्तुति
  • गठिया के पूर्व ग्राम ट्रेवोर मेसी व नैनीताल के पूर्व सभासद संजय साह द्वारा सूचना के अधिकार के तहत ली गयी जानकारी में हुआ खुलासा 

नवीन जोशी, नैनीताल। जनपद में एनआरएचएम के बाद भवाली स्थित ऐतिहासिक टीबी सेनीटोरियम में पिछले वित्तीय वर्ष 2014-15 में 22 लाख रुपये के कार्यों में घोटाले का नया मामला प्रकाश में आया है। प्रदेश की स्वास्थ्य महानिदेशक के आदेशों पर स्वास्थ्य निदेशक कुमाऊं डा. गीता शर्मा द्वारा की गई जांच सूचना के अधिकार के तहत उजागर हुई है। जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर इस धनराशि से हुये रंगाई-पुताई व अन्य लघु निर्माण के कार्यों को गैर तर्कसंगत तरीके से गैंग मजदूरों से बिना आगणन गठित किये करने व बिलों का सत्यापन किसी अभियंता से न कराये जाने का हवाला देते हुये कहा गया है कि तत्कालीन प्रमुख अधीक्षक डा. तारा आर्या, सहायक अधीक्षक केएल गौतम और प्रधान सहायक डीडी पांडे उत्तरदायी प्रतीत होते हैं, लिहाजा मामले में विशेष सम्प्रेक्षा की संस्तुति की गई है। इसके अलावा आगे ऐसे कार्यों में नियमानुसार प्रक्रिया अपनाये जाने की भी संस्तुति की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2014-15 में श्रय रोगाश्रम भवाली में लघु निर्माण मद में अलग-अलग भागों में 11 लाख एवं अनुरक्षण मद में 11 लाख का बजट आवंटित हुआ था। इसमें से अनुरक्षण पद में आवासीय एवं अनावासीय भवनों की दीपावली पर रंगाई-पुताई का कार्य तत्कालीन प्रमुख अधीक्षक के स्तर पर गठित कमेटी द्वारा कोटेशन के आधार पर प्राप्त दरों से न्यूनतम दरों पर सामग्री क्रय करने के उपरांत सभी कार्मिकों को सामग्री वितरित कर दी गई। इन कार्यों का पूर्व आगणन तथा कार्य के उपरांत बिलों का सत्यापन विभागीय अभियंता से नहीं कराया गया। इसे जांच अधिकारी निदेशक डा. शर्मा ने गलत ठहराया है।

कमला नेहरु चेस्ट इंस्टिट्यूट और आयुष ग्राम बनने के टूटे ख्वाब भी देख चुका है ऐतिहासिक भवाली सेनीटोरियम

नैनीताल। वर्ष 1912 में अंग्रेजों ने 220 एकड़ भूमि में सम्राट एडवर्ड सप्तम की याद में भवाली में एशिया के सबसे बड़े 320 बेड के टीबी संस्थान की स्थापना की थी। 16 जून 1929 को यहां महात्मा गांधी भी आये थे, और 11 अक्टूबर 1934 को नैनी जेल में रहने के दौरान देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू को यहां डा. प्रेम लाल से टीबी के उपचार कराने के लिये भर्ती कराया गया था। इस कारण 1935 में नेहरू को पत्नी के करीब रहने के लिये नैनी से अल्मोड़ा जेल स्थानांतरित किया गया था। यहां कमला नेहरू के नाम से एक वार्ड अब भी है। इधर टीबी का इलाज घर बैठे डॉट विधि से किये जाने की व्यवस्था के बाद से इसके बुरे दिन शुरू हुये। वर्ष 2002 में तत्कालीन सीएम एनडी तिवारी की सरकार ने यहां बेडों की संख्या 150 तक सीमित करते हुये जापान के सहयोग व 50 करोड़ रुपये की लागत से कमला नेहरू चेस्ट इंस्टिट्यूट की स्थापना के लिये शासनादेश भी जारी कर दिया था, और इस हेतु 2.67 करोड़ रुपये से अत्याधुनिक सीटी स्कैन, 44 लाख रुपये से अल्ट्रासाउंड व 11.89 लाख से ऑटो ऐनालाइजर सहित कई अन्य मशीनें भी ले आई गई थीं। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डा. तिलक राज बेहड़ ने चेस्ट इंस्टिट्यूट का उद्घाटन भी कर दिया था। लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती न होने से करोड़ों की मशीनें कबाड़ में तब्दील हो गयीं। आगे 2010 में तत्कालीन सीएम डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने यहां करीब 10 एकड़ भूमि पर देश की प्रमुख सौंदर्य प्रसाधन कंपनी-इमामी की मदद से करीब 50 करोड़ रुपये से आयुष ग्राम बनाने का प्रस्ताव तैयार करवाया, लेकिन डा. निशंक का यह ड्रीम प्रोजेक्ट भी परवान नहीं चढ़ पाया।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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