उत्तराखंड बार काउंसिल चुनाव में बड़ा बदलाव: महिलाओं के लिए सात सीटें आरक्षित, घट गईं पुरुषों की सीटें

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नवीन समाचार, नैनीताल, 26 दिसंबर 2025 (Women Reservation in Bar Council)। उत्तराखंड बार काउंसिल के आगामी चुनावों से पहले चुनावी गणित में बड़ा और ऐतिहासिक परिवर्तन सामने आया है। कुल सदस्यों की संख्या 20 से बढ़ाकर 25 किए जाने के बाद अब इनमें से सात सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी गई हैं। इस नए प्रावधान के चलते पुरुष उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध सीटों की संख्या 25 से घटकर 18 रह गई है, जबकि महिला अधिवक्ताओं के लिए प्रतिनिधित्व के नए और सशक्त अवसर खुल गए हैं। यह बदलाव न्यायिक निर्देशों के अनुपालन में किया गया है, जिससे बार काउंसिलों में लैंगिक संतुलन और सहभागिता को बढ़ावा मिलेगा।

आरक्षण के पीछे सुप्रीम कोर्ट का निर्देश : योगमाया एमजी मामले का प्रभाव

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रधान सचिव श्रीमंतो सेन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, यह निर्णय हाल ही में Supreme Court of India द्वारा योगमाया एमजी बनाम भारत सरकार व अन्य प्रकरण में दिए गए आदेशों के अनुपालन में लिया गया है। न्यायालय ने देश की सभी राज्य बार काउंसिलों में कुल सदस्य संख्या का 30 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षण अनिवार्य किया है, ताकि विधिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

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चुनाव व मनोनयन का संतुलन

निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि कुल 30 प्रतिशत महिला आरक्षण में से 20 प्रतिशत सीटें प्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से भरी जाएंगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत महिला सीटों पर निर्वाचित सदस्य मनोनयन करेंगे। उत्तराखंड जैसे उन राज्यों में, जहां बार काउंसिल की कुल सदस्य संख्या 25 है, वहां पांच महिला सदस्य सीधे चुनाव से चुनी जाएंगी और चयनित 23 सदस्य बाद में दो महिला सदस्यों को मनोनीत करेंगे। इस प्रकार कुल सात महिला सदस्य बार काउंसिल का हिस्सा बनेंगी।

पुरुष उम्मीदवारों की सीटें घटीं, महिलाओं के लिए अवसर बढ़े

पूर्व में जब महिला आरक्षण लागू नहीं था, तब 25 सदस्यीय बार काउंसिल में सभी सीटें सामान्य श्रेणी में थीं। अब सात सीटों के आरक्षित होने से पुरुष उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध अवसर दो सीटों तक कम हो गए हैं। हालांकि, इसे अधिवक्ता समाज में सकारात्मक कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे महिला अधिवक्ताओं की भागीदारी, नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया में भूमिका मजबूत होगी।

पहले से तय कार्यक्रम में बदलाव संभव

उत्तराखंड बार काउंसिल के 25 सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया 19 दिसंबर 2025 से प्रारंभ हो चुकी थी। पहले घोषित कार्यक्रम के अनुसार 15 जनवरी 2026 को अभ्यर्थियों की अंतिम सूची प्रकाशित होनी थी, 4 फरवरी 2026 को मतदान तथा 5 और 6 फरवरी को मतपत्रों की प्राप्ति के बाद 9 फरवरी 2026 को नैनीताल क्लब में मतगणना प्रस्तावित थी।

शीतावकाश बना अड़चन

हाईकोर्ट में 9 फरवरी तक शीतावकाश होने के कारण बड़ी संख्या में अधिवक्ता मतदान तिथि में परिवर्तन की मांग कर रहे हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि अवकाश के दौरान अधिकांश परिजन सहित बाहर चले जाते हैं और न्यायालय खुलने पर ही लौटते हैं, जिससे वे मतदान से वंचित रह सकते हैं। इस स्थिति में चुनाव की निष्पक्षता और भागीदारी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

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हाईपावर समिति की भूमिका

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, देश की सभी बार काउंसिलों के चुनाव 31 मार्च 2026 से पूर्व कराए जाने हैं। इसी क्रम में उत्तराखंड बार काउंसिल के चुनावों के सफल संचालन हेतु एक हाईपावर समिति गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता उत्तराखंड हाईकोर्ट के पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तथा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा कर रहे हैं। समिति में उत्तराखंड हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश यूसी ध्यानी और हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश कुलदीप सिंह सदस्य हैं।

संभावित निर्णय

मतदाता सूची में नाम जोड़ने की तिथि बढ़ाने और मतदान कार्यक्रम में संशोधन की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की गई थी, जिस पर न्यायालय ने गठित हाईपावर समिति के समक्ष पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। इस विषय पर 28 दिसंबर को बैठक प्रस्तावित है। महिला आरक्षण लागू होने के बाद प्रक्रिया में आवश्यक परिवर्तन और तिथियों पर पुनर्विचार की संभावना को देखते हुए यह लगभग तय माना जा रहा है कि उत्तराखंड बार काउंसिल के चुनाव निर्धारित समय से कुछ आगे खिसक सकते हैं।

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