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सोनू, ‘बुलेट’ पर भी भरोसा नहीं क्या….?

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गुजरात विधानसभा चुनावों के मद्देनजर चुनावी रैलियों में पीएम नरेंद्र मोदी लगातार कांग्रेस पर निशाना साध रहे हैं। रविवार को चुनावी रैलियों में एक बार फिर कांग्रेस मोदी के निशाने पर रही। भरूच में चुनावी रैली में पीएम मोदी ने बुलेट ट्रेन को लेकर कांग्रेस को घेरने की कोशिश की। पीएम ने कहा कि जो लोग बुलेट ट्रेन परियोजना का विरोध कर रहे हैं, उन्हें बैलगाड़ी से यात्रा करनी चाहिए….

इससे पूर्व पिछले दिनों इंटरनेट पर दो चीजें जोरों से वायरल हो रही थीं। पहला, एक गाना-‘सोनू, हमरा पे भरोसा नहीं क्या ?’ और दूसरा बुलेट ट्रेन। और दोनों को सुनकर मन में प्रश्न उठा, “सोनू ,बुलेट पर भी भरोसा नहीं क्या ?” देश में पहली बार 320 किमी की रफ्तार से चलने वाली बुलेट ट्रेन की आधारशिला रखी जा रही है तो इस पहल को आशाजनक तरीके से कम, निराशाजनक तरीके से अधिक देखा जा रहा है। 60 सालों तक भारतीय रेल को लोकलुभावन तरीकों और अपने निहित स्वार्थों की भेंट चढ़ाए कांग्रेस सहित लालू-ममता के दल भी बुलेट ट्रेन से पहले मौजूदा रेलों की स्थितियों पर रोना रो रहे हैं। पिछली सरकार के दौर से ही देश की जनता को लगी ‘बेभरोसे ‘ की बीमारी फिर सिर उठाने लगीं कि मानो बुलेट ट्रेन समय से आ गयी तो पटरियों पर ‘फ्रेश’ होने का मजा जाता रहेगा… मजाक तक तो कोई बात नहीं, पर सच यह है कि ‘बुलेट’ चलती है तो जरूर असर करती है.. लग जाये तो निशाने पर. ना लगे तो वहाँ भी, जहां कहीं भी लगी हो..

देश में बुलेट ट्रेन के आगमन के ऐलान का स्वागत किया जाना चाहिए …रंग में भंग के लिए कांग्रेस नेता रेल की बदरंग सूरत का रोना रो रहे हैं …इतनी ही चिंता और प्रतिबद्धता थी कि इतने साल में रेल को बदल क्यों नहीं दिया ? देश में रेल की दुर्दशा पर रोना रोने का हक़ कम से कम कांग्रेस को तो नहीं ..बुलेट ट्रेन का स्वागत करने में इतनी आह क्यों निकल रही है ? इसमें कोई शक नहीं कि देश में पटरियों और रेल परिचालन की दुर्दशा पर सरकार को सबसे पहले ध्यान देना चाहिए …दुर्घटनाएँ न हों …सफ़र सुरक्षित और बेहतर हो , इसकी कोशिश सबसे पहले होनी चाहिए लेकिन इसका मतलब ये नही कि हम इसी तर्क पर टिके रहें कि पहले ये हो तो वो हो …दोनों ज़रूरी हैं …अगर साठ सालों में रेल को हमने विश्व स्तरीय बनाने में ज़ोर लगा दिया होता , नेताओं /मंत्रियों और रेल मंत्रियों के इलाक़ों से नई -नई ट्रेनें गुज़ारने का खेल करके रेल का खेल ख़राब न किया होता ..तो आज जो रेल की दुर्दशा पर आह भरने की इतनी नौबत न आती …
बुलेट ट्रेन के बहाने रेल पर कांग्रेसियों का रोना जम नहीं रहा …
और अंत में रेल में सफ़र करने वाले यात्री भी अपने हिस्से की थोड़ी ज़िम्मेदारी निभाना सीखे लें तो कुछ सूरत इससे भी बदलेगी (वरिष्ठ पत्रकार Ajit Anjum जी की फेसबुक वाल से )

भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना के बारे में जानें सब कुछ

बुलेट ट्रेन के निर्माण का सबसे पहला वडोदरा में ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट खोला जाएगा। यहां तकरीब चार हजार लोगों को ट्रेनिंग दी जाएगी। जून 2018 से पुल बनाए जाने लगेंगे जिसपर ट्रेक बिझेगा। इससे 20 हजार लोगों को रोजगार मिलने का दावा किया जा रहा है। भारत की पहली बुलेट ट्रेन जून 2021 तक भारत आ जाएगी। वैसे तो ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से चल सकती है, लेकिन इसका ट्रायल अंतरर्राष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

बुलेट ट्रेन के लिए गुजरात अहमदाबाद के साबरमती स्टेशन को नया बनाया जाएगा। उसका स्वरूप पूरे तरीके से बदल दिया जाएगा। दावा किया जा रहा है कि बुलेट ट्रेन में सालाना 150 मिलियन लोग सफर करेंगे। माना जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट 2022 तक पूरा हो जाएगा। इसकी मदद से मुंबई तक की सात घंटे की दूरी को तीन घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इसका रास्ता बनाने के लिए 21 किलोमीटर की सुरंग भी खोदी जाएगी। जिसमें से सात किलोमीटर का रास्ता समुद्र से होकर जाएगा।

बुलेट ट्रेन में अहमदाबाद से मुंबई के बीच 12 स्टेशन होंगे। इसमें मुंबई, थाने, विरर, बोसिर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भारुच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं। अगर बुलेट ट्रेन सिर्फ चार स्टेशन (अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और मुंबई) पर रुकेगी तो 508 किलोमीटर का यह सफर दो घंटे सात मिनट में पूरा किया जा सकेगा।

मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट भारत के विकास पर एक दूरगामी असर डालेगा. इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही भारतीय रेलवे विश्व स्तर पर इस तकनीक में एक अग्रणी के तौर पर आगे आएगी. 125 करोड़ आबादी वाले भारत देश में बुलेट ट्रेन एक ऐसा सपना है जो जल्द ही हकीकत में तब्दील हो जाएगा.

केंद्र की मोदी सरकार ने यह तय किया है कि पूर्व निर्धारित 2023 की जगह बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को 15 अगस्त 2022 तक पूरा कर दिया जाएगा. इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए भारत और जापान दोनों ही मिलकर अपनी पूरी ताकत झोंक देंगे.

बुलेट ट्रेन के लिए जापान देगा पैसे और टेक्नोलॉजी

बुलेट ट्रेन को हकीकत में तब्दील करना इतना आसान काम नहीं है. वजह है इसमें होने वाला भारी भरकम खर्च और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी. अहमदाबाद और मुंबई के बीच  बुलेट ट्रेन चलाने के लिए कुल लागत 10,8000 करोड़ रुपये आने का अनुमान है. भारत और जापान के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों के चलते यह दोनों दिक्कतें खत्म हो गई हैं. जापान ने पहले ही भारत को अट्ठासी हजार करोड़ रुपये बतौर कर्ज देने पर सहमति जता दी है. खास बात यह है कि इस कर्ज पर ब्याज नहीं के बराबर है.

50 साल में चुकाना होगा कर्ज

इसी के साथ इस कर्ज को भारत 50 साल में जापान को चुकाएगा. बुलेट ट्रेन के लिए दिए गए इस कार्य पर 0.1 फीसदी के ब्याज को जोड़ें तो अट्ठासी हजार करोड़ रुपये के कर्ज के बदले भारत को जापान को 90500 करोड़ रुपये चुकाने होंगे. यानी केवल 25 सौ करोड़ रुपये ज्यादा. इसके अलावा जापान से मिले इस कर्ज में एक सहूलियत यह भी है कि कर्ज की अदायगी में 15 साल का ग्रेस पीरियड है. इसका मतलब यह हुआ कि बुलेट ट्रेन के लिए मिले कर्ज की किस्त बुलेट ट्रेन शुरू होने के 15 साल बाद शुरू होगी.

मेक इन इंडिया को मिलेगा बढ़ावा

अगर भारत 7 साल बाद बुलेट ट्रेन बनाने की शुरुआत करता तो 25 सौ करोड़ रुपये तो महंगाई की वजह से ही भर जाते. ऐसे में यह सौदा घाटे का सौदा तो बिल्कुल नहीं है. इतना ही नहीं जापान से कर्ज के साथी भारत को बुलेट ट्रेन की सबसे बेहतरीन और सुरक्षित तकनीक भी मिलेगी. मेक इन इंडिया के तहत बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में इस्तेमाल होने वाली तकनीक के कलपुर्जे भारत में ही बनेंगे. इस वजह से देश में सहयोगी उद्योग बढ़ेंगे और लोगों को रोजगार मिलेगा. नई तकनीक आने से हमारे देश के इंजीनियरों को इसको समझने का मौका मिलेगा. इसके अलावा कर्ज और तकनीक के साथ जापान भारत को बुलेट ट्रेन के संचालन और रख-रखाव की ट्रेनिंग भी देगा यानी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के जरिए देश में मेक इन इंडिया का भी विस्तार होगा. तो वहीं देश में लोगों को नए रोजगार भी मिलेंगे.

ये हैं बुलेट ट्रेन की खूबियां

देश की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई और अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर का फासला तय करेगी. यह दूरी महज 2 घंटे में पूरी की जाएगी. इस रूट पर 12 रेलवे स्टेशन बनाए जाएंगे. मुंबई और अहमदाबाद के बीच बनने जा रहा बुलेट ट्रेन रूट ज्यादातर जगहों पर एलिवेटेड होगा और इसका महेश 7 किलोमीटर का हिस्सा मुंबई में समंदर के नीचे से होकर गुजरेगा.

जापान इंटरनेशनल कारपोरेशन एजेंसी ने बनाई रिपोर्ट

भारत में चलने जा रही पहली बुलेट ट्रेन कैसी होगी और इसके स्टेशन कहां-कहां पर बनाए जाएंगे किस तरीके का रूट बनाया जाएगा और उसमें किस तरह के पिलर बनेंगे और क्या मटेरियल इस्तेमाल किया जाएगा इन सारी चीजों को ध्यान में रखते हुए जापान इंटरनेशनल कारपोरेशन एजेंसी ने पूरी रिपोर्ट पहले ही तैयार कर ली है. इस रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई से अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर की दूरी 4 स्टेशनों पर रुकते हुए बुलेट ट्रेन से सिर्फ 2 घंटे 7 मिनट में तय होगी. मुंबई और अहमदाबाद के बीच 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं. यह स्टेशन बांद्रा, कुर्ला, कांप्लेक्स थाने, विरार बोईसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भड़ौच, वडोदरा, आनंद अहमदाबाद और साबरमती होगा. इन स्टेशनों में मुंबई में बनने वाला रेलवे स्टेशन अंडरग्राउंड होगा और बाकी सभी स्टेशन एलिवेटेड होंगे.

7 किलोमीटर का रूट समंदर से गुजरेगा

बुलेट ट्रेन का रूट डबल लाइन का बनाया जाएगा. 508 किलोमीटर की लंबाई वाला रूट महाराष्ट्र गुजरात और दादरा नगर हवेली से होकर गुजरेगा. महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन रूट का 156 किलोमीटर का हिस्सा गुजरात में 351 किलोमीटर का हिस्सा और केंद्र शासित प्रदेश दादर नगर हवेली से 2 किलोमीटर का हिस्सा गुजरेगा. बुलेट ट्रेन रूट पर कई सुरंगे होंगी और इनमें से सबसे लंबी सुरंग 21 किलोमीटर की होगी. इसके अलावा हम आपको बता दें कि अहमदाबाद मुंबई बुलेट ट्रेन रूट का 7 किलोमीटर का हिस्सा थाने क्रिक में समंदर के नीचे से होकर गुजरेगा.

2 घंटे 7 मिनट में पहुंचेगी मुंबई से अहमदाबाद

जापान के मुताबिक बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को अधिकतम 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है. लेकिन अहमदाबाद और मुंबई के बीच चलने वाली पहली बुलेट ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चलाई जाएगी. मुंबई और अहमदाबाद के बीच चलने वाली पहली बुलेट ट्रेन 2 घंटा 7 मिनट में सफर पूरा करा देगी. इस सफर में चार जगहों पर ट्रेन रुकेगी तो वहीं दूसरी तरफ सभी 12 स्टेशनों पर बुलेट ट्रेन रुकने की स्थिति में यह सफर 2 घंटा 58 मिनट में पूरा हो पाएगा.

रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक अहमदाबाद मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा. जापान और भारत के बीच बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए हुए समझौते के मुताबिक जापान भारत को टेक्नोलॉजी का ट्रांसफर करेगा और साथ ही इस प्रोजेक्ट के लिए जरूरी साजो-सामान भारत में बनाने के लिए उद्योग को बढ़ावा देगा. बुलेट ट्रेन समझौते के तहत भारतीय इंडस्ट्री जापानी इंडस्ट्री और जापान सरकार के उपक्रमों की साझेदारी से 4 ग्रुप बनाए गए हैं. यह चारों संगठन ट्रैक, सिविल रोलिंग, स्टॉक इलेक्ट्रिकल और साइंस एंड टेक्नोलॉजी को संभालेंगे.

सुरक्षित है जापान की बुलेट ट्रेन तकनीक

अहमदाबाद और मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन को दौड़ाने का सपना 15 अगस्त 2022 को पूरा किए जाने का टारगेट रखा गया है. जब यह ट्रेन भारत में चलने लगेगी तो भारत उन चुनिंदा देशों की कतार में शामिल हो जाएगा जहां पर हाई स्पीड ट्रेन चलती है. जापान की बुलेट ट्रेन तकनीक काफी सुरक्षित मानी जाती है. जब से यह जापान में चलने शुरू हुई है तब से इसमें कोई भी हादसा नहीं हुआ है. जापान की बुलेट ट्रेन एकदम समय पर चलती है. इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं किसका पंक्चुअलिटी रिकॉर्ड पिछले 50 सालों में सिर्फ 60 सेकंड से भी कम लेटलतीफी का है.

बुलेट ट्रेन चलाने की ट्रेनिंग देगा जापान

भारत और जापान के बीच हुए समझौते के मुताबिक अहमदाबाद मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में जापान पूरा तकनीकी सहयोग करेगा. प्रोजेक्ट को बनाने के बाद भारत के लोगों को बुलेट ट्रेन चलाने की ट्रेनिंग देगा और इसके अलावा बुलेट ट्रेन तकनीक का भारत के दूसरे इलाकों में इस्तेमाल करने के लिए भी पूरी मदद करेगा. बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए हाई स्पीड रेल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट बड़ोदरा में बनाया जा रहा है. इस इंस्टिट्यूट में बुलेट ट्रेन की ऑपरेशंस और मेंटेनेंस के लिए 4000 लोगों को ट्रेनिंग दी जाएगी.

बुलेट ट्रेन से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

जापान की मदद से अहमदाबाद और मुंबई के बीच बनने वाला बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट देश में 20000 कंस्ट्रक्शन रोजगार मुहैया कराएगा. बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की वजह से महाराष्ट्र, गुजरात और दादर नगर हवेली में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा. मुंबई और अहमदाबाद के बीच सभी महत्वपूर्ण जगहों को आपस में जोड़ दिया जाएगा और इससे लोगों को आने जाने में काफी सहूलियत होगी.

समय से पहले प्रोजेक्ट पूरा होने की उम्मीद

अहमदाबाद मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसलिए इस परियोजना का काम काफी तेजी से चल रहा है. इसके लिए रेल मंत्रालय गुजरात और महाराष्ट्र सरकार ने मिलकर बीते साल नेशनल हाई स्पीड रेल कारपोरेशन लिमिटेड का गठन किया था. परियोजना के लिए जनरल कंसल्टेंट और इन्वायरमेंट कंसल्टेंट नियुक्त किए जा चुके हैं. बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए नाप जोख का काम पूरा किया जा चुका है. कहां पर सुरंगे बनेंगी कहां पर पुल बनेंगे और सिग्नलिंग के लिए क्या किया जाना है इन सारी चीजों का हिसाब-किताब लगाया जा चुका है.

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए एरियल लीदर सर्वे किया जा चुका है. इसके अलावा बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए जिओ टेक्निकल इंवेस्टिगेशन भी पूरे हो चुके हैं. इस प्रोजेक्ट में सोशल इंपेक्ट एसेसमेंट के लिए गुजरात और महाराष्ट्र सरकार ने कंसल्टेंट नियुक्त कर दिए हैं. ऐसा अनुमान है कि इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए मात्र 825 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है. कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है की बुलेट ट्रेन का प्रोजेक्ट समय से पहले ही पूरा कर लिया जाएगा.

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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