नवीन समाचार, देहरादून, 20 जनवरी 2026 (High Court on Jyoti Adhikari)। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से जुड़े एक महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने चर्चित ब्लॉगर ज्योति अधिकारी को बड़ी राहत दी है। देवी-देवताओं और पहाड़ की महिलाओं के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक भाषा के प्रयोग से जुड़े सात अभियोगों में से पांच अभियोगों में न्यायालय ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
शीतकालीन अवकाश के दौरान न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सामाजिक माध्यमों (सोशल मीडिया-Social Media) पर साझा की गई पोस्ट को तुरंत हटाने के निर्देश देते हुए कहा कि भाषा का चयन संवेदनशीलता के साथ होना चाहिए, ताकि किसी की भावनाएं आहत न हों। देखें संबंधित वीडिओ :
उच्च न्यायालय की टिप्पणी, गिरफ्तारी पर रोक और आगे की कानूनी प्रक्रिया
किन मामलों में राहत और क्या आदेश पारित हुआ
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि ज्योति अधिकारी के विरुद्ध कुल सात अभियोग दर्ज हैं। इनमें से दो अभियोगों में उन्हें जेल जाना पड़ा था, जबकि शेष पांच अभियोगों में न्यायालय ने सुनवाई के बाद गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। इससे स्पष्ट है कि न्यायालय ने फिलहाल इन पांच मामलों में गिरफ्तारी जैसी कठोर कार्रवाई पर विराम लगाते हुए कानूनी प्रक्रिया के तहत पक्षों की दलीलें सुनने और सरकारी जवाब आने तक स्थिति को नियंत्रित किया है। देखें वीडिओ : ज्योति अधिकारी : वही करते हुए, जिसके लिए दूसरों को कोस रही थी…
न्यायालय ने राज्य सरकार से 3 सप्ताह में जवाब क्यों मांगा
एकलपीठ ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है, ताकि अभियोगों, आरोपों और तथ्यों के आधार पर न्यायालय के समक्ष सरकारी पक्ष विधिवत रखा जा सके। ऐसे प्रकरणों में न्यायालय का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे जांच-पड़ताल और तथ्यों की पुष्टि के साथ निष्पक्ष निर्णय की प्रक्रिया को बल मिलता है।
सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के निर्देश, “उचित भाषा” पर जोर
न्यायालय ने ज्योति अधिकारी से कहा है कि जो पोस्ट उन्होंने सामाजिक माध्यमों पर साझा की हैं, उन्हें तुरंत हटाएं, ताकि और कोई आहत न हो। न्यायालय ने यह टिप्पणी भी की कि सामाजिक माध्यमों पर कोई भी सामग्री साझा करते समय उचित भाषा का चयन करना आवश्यक है। यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह डिजिटल मंचों पर जिम्मेदार अभिव्यक्ति और सामाजिक संवेदनशीलता को लेकर स्पष्ट संदेश देता है।
प्रकरण की पृष्ठभूमि: अंकिता भंडारी प्रकरण के आंदोलन से विवाद
मामले के अनुसार, हल्द्वानी निवासी ब्लॉगर ज्योति अधिकारी पर आरोप है कि अंकिता भंडारी हत्या से जुड़े आंदोलन के दौरान सामाजिक माध्यमों पर और धरना-प्रदर्शन के समय देवी-देवताओं और पहाड़ की महिलाओं के विरुद्ध हाथ में दराती लेकर गलत भाषा का प्रयोग किया गया और अपमानजनक शब्द बोले गये। इसके बाद व्यापक विवाद उत्पन्न हुआ और लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होने की बात सामने आई। इसी आक्रोश के बाद हल्द्वानी सहित कई स्थानों पर उनके विरुद्ध सात अभियोग दर्ज किये गये।
सरकार की दलील: “अनुयायी बढ़ाने के लिए” आपत्तिजनक शब्द कहे
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से यह कहा गया कि ब्लॉगर ने देवी-देवताओं और पहाड़ की महिलाओं के लिए आपत्तिजनक शब्द अपने अनुयायी बढ़ाने के लिए कहे, जिससे पहाड़ की महिलाएं आहत हुईं। सरकार पक्ष ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति विशेषकर सार्वजनिक मंच/डिजिटल मंच पर सक्रिय व्यक्ति को ऐसे शब्दों से बचना चाहिए, जो किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाएं।
याचिकाकर्ता पक्ष का तर्क: पोस्ट हटायी, दो मामलों में जेल भी जा चुकी
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सौरभ अधिकारी ने न्यायालय को अवगत कराया कि संबंधित पोस्ट सामाजिक माध्यम से हटा दी गयी हैं और शेष पोस्ट भी हटायी जाएंगी। यह भी कहा गया कि दो अभियोगों में ज्योति अधिकारी 6 दिन की जेल की सजा भुगत चुकी हैं, इसलिए अन्य पांच अभियोगों में गिरफ्तारी पर रोक लगायी जाए। न्यायालय ने सुनवाई के बाद पांच अभियोगों में गिरफ्तारी पर रोक का आदेश पारित किया।
आगे क्या होगा: जवाब के बाद अगली सुनवाई और जांच दिशा
अब आगे की प्रक्रिया में राज्य सरकार का जवाब निर्णायक भूमिका निभाएगा। न्यायालय में सरकारी पक्ष आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि अभियोगों की प्रकृति, साक्ष्य, वक्तव्य/वीडियो और डिजिटल सामग्री की कानूनी स्थिति क्या है। क्या जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की पुष्टि कर पाएंगी? या प्रकरण में कानूनी राहत आगे भी बनी रहेगी? इन प्रश्नों के उत्तर अगली सुनवाई में सामने आ सकते हैं।
पाठकों से आग्रह है कि इस समाचार से संबंधित अपनी राय और विचार नीचे दिए गए कमेन्ट बॉक्स में अवश्य साझा करें।
नैनीताल जनपद में हाल के दिनों में हुई अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी पूरी रिपोर्ट यहाँ क्लिक करके पढ़ी जा सकती है। इसी तरह पिथौरागढ़ के समाचारों के लिए यहाँ👉, अल्मोड़ा के समाचारों के लिए यहाँ👉, बागेश्वर के समाचारों के लिए यहाँ👉, चंपावत के समाचारों के लिए यहाँ👉, ऊधमसिंह नगर के समाचारों के लिए यहाँ👉, देहरादून के समाचारों के लिए यहाँ👉, उत्तरकाशी के समाचारों के लिए यहाँ👉, पौड़ी के समाचारों के लिए यहाँ👉, टिहरी जनपद के समाचारों के लिए यहाँ👉, चमोली के समाचारों के लिए यहाँ👉, रुद्रप्रयाग के समाचारों के लिए यहाँ👉, हरिद्वार के समाचारों के लिए यहाँ👉और उत्तराखंड से संबंधित अन्य समाचार पढ़ने के लिये यहां👉 क्लिक करें।
आज के अन्य एवं अधिक पढ़े जा रहे उत्तराखंड के नवीनतम अपडेट्स-‘नवीन समाचार’ पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यहां क्लिक कर हमारे व्हाट्सएप चैनल से, फेसबुक ग्रुप से, गूगल न्यूज से यहाँ, एक्स से, थ्रेड्स चैनल से, टेलीग्राम से, कुटुंब एप से और डेलीहंट से जुड़ें। अमेजॉन पर सर्वाधिक छूटों के साथ खरीददारी करने के लिए यहां क्लिक करें। यदि आपको लगता है कि ‘नवीन समाचार’ अच्छा कार्य कर रहा है तो हमें यहाँ क्लिक करके सहयोग करें..।
Tags (High Court on Jyoti Adhikari) :
High Court on Jyoti Adhikari, Uttarakhand High Court Stay On Arrest Jyoti Adhikari, Jyoti Adhikari Blogger Five Cases Arrest Stayed, Dehradun High Court Single Bench Justice Alok Mahra Order, Social Media Post Removal Direction Uttarakhand High Court, Ankita Bhandari Protest Controversy Jyoti Adhikari Case, Seven FIRs Against Jyoti Adhikari Haldwani, Uttarakhand Court Asked State Reply In Three Weeks, Religious Sentiments And Social Media Speech Case Uttarakhand, Legal Relief In Blogger Case Uttarakhand High Court, Social Media Responsible Language Court Observation Uttarakhand, #UttarakhandNews #DehradunNews #HighCourtNews #JyotiAdhikari #SocialMediaCase #LegalNews #HindiNews #WomenIssues #ReligiousSentiments #CourtOrder
डॉ.नवीन जोशी, पिछले 20 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, ‘कुमाऊँ विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीएचडी की डिग्री प्राप्त पहले और वर्ष 2015 से उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। 15 लाख से अधिक नए उपयोक्ताओं के द्वारा 150 मिलियन यानी 1.5 करोड़ से अधिक बार पढी गई आपकी अपनी पसंदीदा व भरोसेमंद समाचार वेबसाइट ‘नवीन समाचार’ के संपादक हैं, साथ ही राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्थान समाचार आदि समाचार पत्र एवं समाचार एजेंसियों से भी जुड़े हैं। देश के पत्रकारों के सबसे बड़े संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) उत्तराखंड’ के उत्तराखंड प्रदेश के प्रदेश महामंत्री भी हैं और उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त राज्य आंदोलनकारी भी हैं। डॉ. जोशी के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से जून 2009 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त रहा, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।















3 जून 2009 से संचालित उत्तराखंड का सबसे पुराना डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘नवीन समाचार’ अपने आरंभ से ही उत्तराखंड और देश-दुनिया की सटीक, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरें आप तक पहुँचाने का प्रयास करता आ रहा है। हिंदी में विशिष्ट लेखन शैली हमारी पहचान है। हमारा उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक आवाज को मजबूती से सामने लाना, स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देना और हिंदी पत्रकारिता को जीवित रखना है। हमारे प्रत्येक समाचार एक लाख से अधिक लोगों तक और हर दिन लगभग 10 लाख बार पहुंचते हैं।