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शराब तस्करों को 5-5 साल की जेल की सजा, जांच अधिकारी सीओ पर प्रतिकूल टिप्पणी

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नवीन समाचार, नैनीताल, 19 मार्च 2020। वर्ष 2016 में होली के दौरान अवैध शराब के दो तस्करों ने एक पुलिस उप निरीक्षक को क्षेत्र में अवैध शराब का धंधा करने के लिए 40 हजार रुपये रिश्वत देने की पेशकश की थी। मामले में दोनों आरोपितों थाना इज्जतनगर बरेली वर्तमान निवासी जोशीखोला बड़ी मुखानी हल्द्वानी निवासी रामेश्वर सिंह तथा ज्ञानेंद्र कुमार ओझा को 18 मार्च, 2016 को रिश्वत की धनराशि के साथ पकड़ा गया था। 
इस मामले में आज जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे ने दोनों आरोपितों को रिश्वत देने के आरोप में 5-5 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 5-5 हजार रुपए अर्थदंड तथा अर्थदंड न चुकाने पर 2 माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है। आदेश के बाद दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामले में न्यायालय ने विवेचनाधिकारी-तत्कालीन पुलिस क्षेत्राधिकारी स्वतंत्र कुमार सिंह के विरुद्ध प्रतिकूल टिप्पणी की है। आदेश में कहा है कि विवेचनाधिकारी ने यूपी पुलिस रेगुलेशन तथा उत्तराखंड में लागू रेगुलेशन संख्या 108 व 109 का पालन नहीं किया है। साथ ही धारा 172 दंड प्रक्रिया संहिता में दिये गए प्रावधानों की अनदेखी भी की है। कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले की जांच एक पुलिस क्षेत्राधिकारी स्तर के अधिकारी को दी गई, जिनसे त्रुटिपूर्ण विवेचना की उम्मीद नहीं की जाती है। आदेश की एक प्रति निदेशक अभियोजन उत्तराखंड शासन को भी भेजी है तथा विवेचना के स्तर में वृद्धि के लिए सार्थक प्रयास करने की आवश्यकता जताई है। 
उल्लेखनीय है कि इस मामले में पैरवी करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने तत्कालीन संबंधित सीओ राजेंद्र सिंह ह्यांकी व उपनिरीक्षक रजत कसाना व अन्य साक्षियों को न्यायालय में पेश किया। इस दौरान एक स्वतंत्र चश्मदीद गवाह विनीत कुमार अग्रवाल अपने बयानों से मुकर कर पक्षद्रोही हो गया था। 

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नवीन समाचार, नैनीताल, 6 मार्च 2020.। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने पिता के सेवानिवृत्ति की धनराशि को पूरा हड़पने के लिए अपने सगे भाई के हत्यारे को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास एवं 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर उसे तीन माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। साथ ही धारा 201 के तहत दो वर्ष का कारावास व 2 हजार रुपए अर्थदंड एवं अर्थदंड न चुकाने पर 2 माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है।
जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से नौ गवाह पेश करते हुए न्यायालय को बताया कि 22 मार्च 2017 को हल्द्वानी के बिठौरिया नंबर 1 में अनिल कुमार पांडे के छोटे पुत्र सूर्यकांत के गायब होने, बड़े बेटे कृष्णकांट के गड्ढा खुदवाने और पास जाने पर बदबू आने की सूचना पुलिस को दी थी। बाद में पुलिस को इसी गड्ढे में सूर्यकांत का अर्धनग्न शव सड़ी गली अवस्था में बरामद हुआ। एक गवाह न्यायालय में अपने बयानों से मुकर भी गया था। अलबत्ता एक गवाह ने कहानी साफ की कि पिता के सेवानिवृत्ति पर मिले रुपयों को पूरा हड़पने के लिए कृष्णकांत ने अपने भाई सूर्यकांत की चाकू से गले में वार कर हत्या कर दी थी और शव पानी की टंकी में डाल दिया था। बताया गया कि पिता ने सेवानिवृत्ति पर हत्यारे कृष्णकांत के खाते में 16 लाख व मृतक सूर्यकांत के खाते में 18 लाख यानी अधिक रुपए की एफडी बनाई थी। इस कारण ही पूरी धनराशि हड़पने की नीयत से हत्या की गई।

यह भी पढ़ें : फिर साबित हुआ न्याय सर्वोपरि: हत्यारे ने जज को दी थी अंजाम भुगतने की धमकी, अभियोजन ने की थी फांसी की मांग, बावजूद….

नवीन समाचार, नैनीताल, 26 फरवरी 2020। गत 24 फरवरी को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार की अदालत ने हल्द्वानी में छह साल पहले हुई व्यापारी की हत्या के मामले में दो आरोपितों को दोषी करार देते समय एक अभियुक्त ने भरी अदालत में न्यायाधीश को अंजाम भुगतने की धमकी दे डाली थी। हत्यारे ने न्यायाधीश से कहा था, ‘तूने मुझे दोषी पाकर बहुत बड़ी गलती कर दी भाई, तुझे इसका अंजाम भुगतना होगा।’ इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने आरोपितों को फांसी और अधिकतम अर्थदंड दिये जाने की मांग की। बावजूद न्यायालय ने ‘न्याय सर्वोपरि’ की भावना के तहत आरोपित को केवल उम्र कैद एवं अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय ने सजा सुनाते हुए यह टिप्पणी भी की कि हालांकि आरोपित ने पीठ को धमकी दी, किंतु चूंकि सजा अभियुक्त पर पूर्व में लगे हत्या के मामले में सुनाई जा रही है, और न्याय के स्थापित सिद्धांत के अनुसार केवल विरलतम से विरल मामलों में ही मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने का प्राविधान है, और अभियुक्तों द्वारा किया गया अपराध इस श्रेणी के अपराध में नहीं आता है, इसलिए उन्हें फांसी नहीं दी जा सकती है।
न्यायालय ने दोनों आरोपितों संदीप जायसवाल व राहुल राठौर को हल्द्वानी के जुलाई 2014 में हुई योगेश गुप्ता की हत्या के अभियोग में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 व 34 के तहत आजीवन कारावास एवं 50-50 हजार का अर्थदंड एवं अर्थदंड न चुकाने पर 3-3 वर्ष के अतिरिक्त साधारण कारावास, आयुध अधिनियम की धारा 25 के तहत 5-5 वर्ष के कारावास एवं 20-20 हजार के अर्थदंड तथा अर्थदंड न चुकाने पर 1-1 वर्ष के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा सुनाई। दोनों सजाएं अलग-अलग चलेंगी, यानी एक सजा की अवधि पूरी होने के बाद दूसरी सजा भुगतनी होगी। अलबत्ता, यह व्यवस्था भी दी गई है कि अभियुक्तों के द्वारा पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि भी समायोजित की जाएंगी। उल्लेखनीय है कि इस मामले में दोनों मुख्य चश्मदीद गवाह अपनी गवाही से मुकर गए थे। बावजूद जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने अभियुक्तों के फिंगर प्रिंट, बैलेस्टिक रिपोर्ट व मोबाइल कॉल रिकॉर्डिंग के माध्यम से उन पर दोष सिद्ध किया। मृतक के शव के पास घटना स्थल पर पड़े खोखे को आरोपित संदीप जायसवाल के पास मिले तमंचे का ही होना तथा सर्विलांस से दोनों की घटनास्थल पर मौजूदगी सिद्ध की गई।

यह था मामला
नैनीताल। 20 जुलाई 2014 को जुगल किशोर गुप्ता पुत्र राम प्रसाद निवासी मुनगली गार्डन ने हल्द्वानी कोतवाली में तहरीर दी थी कि उसके भाई योगेश गुप्ता सदर बाजार से दुकान बंद कर घर आ रहे थे। घर के पास ही दो लोगों ने तमंचे से गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी। पुलिस चश्मदीदों के बयान के आधार पर संदीप जायसवाल निवासी बरेली रोड व राहुल राठौर निवासी खेड़ा, रुद्रपुर को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने योगेश की हत्या की बात कबूल करते हुए बताया कि योगेश व उनके भाई जुगल किशोर के पास ट्रक थे। पूरे कुमाऊं में खाद्यान्न आपूर्ति का टेंडर भी उन्हीं के पास था।संदीप जायसवाल ने उनका एक ट्रक ले लिया और कहा कि फायदे की रकम बराबर बांटी जाएगी। मगर एक साल बाद संदीप ने न कोई पैसा दिया और न ही ट्रक लौटाया। बाद में पता चला कि उसने ट्रक का फर्जी इकरारनामा बना लिया था। इस संदर्भ मेें जुगल किशोर ने संदीप के खिलाफ 31 मई 2014 को धोखाधड़ी की रिपोर्ट लिखवाई। चार्जशीट दाखिल होने पर आरोपितों ने जुगल किशोर व योगेश से मुकदमा वापस लेने को कहा, जिसे न मानने पर योगेश की हत्या कर दी।

यह भी पढ़ें : नैनीताल : हत्या के आरोपित ने दोषी ठहराते जज को अदालत में दी अंजाम भुगतने की धमकी

नवीन समाचार, नैनीताल, 24 फरवरी 2020। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार की कोर्ट ने सोमवार को हल्द्वानी में छह साल पहले हुई व्यापारी की हत्या मामले में दो आरोपितों को दोषी करार दिया। इस बीच एक अभियुक्त ने भरी कोर्ट में जज को अंजाम भुगतने की धमकी दे डाली। जज ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश व हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को इसकी सूचना दे दी। दोनों को 26 मार्च को सजा सुनाई जाएगी। हुआ यह कि दिसंबर 2004 के एक मामले में न्यायालय ने सुनवाई पूरी कर सोमवार को दो अभियुक्तों को धारा-302 व 25 आम्र्स एक्ट के तहत दोषी करार दिया। इसके बाद कोर्ट मोहर्रिर एक अभियुक्त राहुल के पास कागजात पर दस्तखत कराने पहुंचीं तो उसने इन्कार करते हुए भरी कोर्ट में चिल्लाते हुए जज को अंजाम भुगतने की धमकी दे डाली।

यह भी पढ़ें : ब्रेकिंग नैनीताल: न्यायाधीश को न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता ने दी जान से मारने की धमकी, की अभद्रता, न्यायिक कार्य में भी डाली बाधा

-न्यायाधीश की तहरीर पर वरिष्ठ अधिवक्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज
-अधिवक्ता पर न्यायिक कार्य में बाधा डालने, न्यायाधीश से अभद्रता करने एवं जान से मारने की धमकी देने के आरोप में न्यायाधीश ने दी है तहरीर
नवीन समाचार, नैनीताल, 4 फरवरी 2020। नैनीताल जिला न्यायालय के एडीजे-द्वितीय यानी अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह को मंगलवार को जिला न्यायालय में वकालत करने वाले एक वरिष्ठ अधिवक्ता भूदेव शर्मा न्यायालय में ही जान से मारने की धमकी देने से सनसनी फैल गई। यही नहीं अधिवक्ता ने न्यायालय में न्यायिक कार्य में बाधा डाली और न्यायाधीश से अभद्रता भी की। न्यायाधीश ने अधिवक्ता के खिलाफ तल्लीताल थाने में शिकायती पत्र दिया है। अधिवक्ता शर्मा पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने मंगलवार को न्यायिक कार्य के दौरान न्यायिक कार्य में बाधा डाली और एडीजे सिंह के साथ अभद्रता भी की। यही नहीं अधिवक्ता ने न्यायाधीश को जान से मारने की धमकी भी दी।
इस पर तल्लीताल पुलिस ने आरोपित अधिवक्ता के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 228, 504 तथा 506 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। सीओ विजय थापा ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। पुलिस ने अधिवक्ता के विरुद्ध पूर्व में दर्ज मामलों की पड़ताल भी शुरू कर दी है, और प्रारंभिक जांच के आधार पर बताया है कि आरोपित अधिवक्ता के खिलाफ पूर्व में हल्द्वानी कोतवाली में एक मामले की सुनवाई के दौरान अपने मुवक्किल के साथ मारपीट करने के आरोप में भी मामला न्यायालय में विचाराधीन है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला न्यायालय के द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह द्वारा तल्लीताल थाने में दी गई तहरीर में कहा है कि मंगलवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता भूदेव शर्मा ने न्यायालय के न्यायिक कार्य में बाधा डालने का प्रयास किया। इसका विरोध करने पर न्यायाधीश से अभद्रता की और जान से मारने की धमकी भी दी। मामले में उप निरीक्षक दिलीप कुमार को सोंपी गई है।

यह भी पढ़ें : नाबालिग को भगाने के आरोपित को चार साल के कठोर कारावास की सजा..

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 जनवरी 2020। खबरदार, जो किसी नाबालिग को भगाया। न्यायालय ने नाबालिग को बहला फुसलाकर भगाने के मामले में आरोपित को दोषी करार देते हुए चार साल के कठोर कारावास व दस हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। मामला बिंदुखत्ता के रावत नगर प्रथम का है। यहां रहने वाले दीपक मेहता पुत्र केएस मेहता क्षेत्र पर पड़ोस की नाबालिग को बहला फुसलाकर पंजाब भगा ले जाने का आरोप लगा था।

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पीड़िता की मां की तहरीर पर लालकुआं कोतवाली में अपहरण व अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पीड़िता को पुलिस ने हल्द्वानी से बरामद किया था और आरोपित को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया था। इधर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम मनीष कुमार पांडे की अदालत में अभियोजन पक्ष ने आठ गवाह पेश किये। इस पर न्यायालय ने आरोपित दीपक मेहता को नाबालिग को भगाने के आरोप में दोषी साबित करते हुए सजा सुनाई, जिसके बाद अभियुक्त को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी की महिला को अश्लील संदेश भेजने वाले बागेश्वर के युवक को तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा

नवीन समाचार, नैनीताल, 17 जनवरी 2020। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मुकेश चंद्र आर्य की अदालत ने हल्द्वानी निवासी महिला शिक्षिका को अश्लील संदेश भेजने वाले बागेश्वर निवासी आरोपित को अलग-अलग धाराओं में तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास एवं चार हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। उम्मीद की जा रही है अदालत द्वारा सुनाई गई कठोर सजा महिलाओं को इसी तरह अश्लील संदेश भेजने वाले अन्य मनचलों के लिए भी सबक साबित होगी।

मामले के अनुसार हल्द्वानी के कुसुमखेड़ा में किराये के घर में रहने वाली एक निजी विद्यालय की शिक्षिका ने चार वर्ष पूर्व 4 फरवरी 2016 को मुखानी थाने में पुलिस को तहरीर देकर कहा था कि एक अनजान व्यक्ति द्वारा अपने मोबाइल नंबर 9720165056 से एक सप्ताह से ह्वाट्सएप के जरिये आपत्तिजनक फोटो व अश्लील संदेश भेजकर परेशान किया जा रहा है। साथ ही धमकी भी दे रहा था कि अगर वह उससे दोस्ती नहीं करेगी व मुलाकात नहीं करेगी तो वह उसकी फोटो को एडिट कर आपत्तिजनक बनाकर नेट के जरिये बदनाम कर देगा। बाद में विवेचना में मोबाइल नंबर के आधार पर धरमपाल मौर्य व विक्रम सिंह मेहता निवासी जिला बागेश्वर को मामले में प्रथमदृष्टया अभियुक्त बनाया गया। इधर न्यायालय में सहायक अभियोजन अधिकारी के द्वारा 6 गवाह पेश किये गये। इधर न्यायालय ने आरोपित विक्रम मेहता को भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 66, 66 व 67 में तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास तथा एक-एक हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई, वहीं दूसरे आरोपित धरमपाल मौर्य को संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त कर दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी मोहन सिंह रावत ने पैरवी की।

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी के बहुचर्चित सर्राफ हत्याकांड में अंडरवर्ल्ड सरगना दोषमुक्त, शूटर दोषी साबित, भाई पर ही था भाई की हत्या का आरोप

-पंकज खंडेलवाल हत्याकांड में अंडरवर्ल्ड सरगना पीपी, भुपी व पांडे दोषमुक्त
नवीन समाचार, नैनीताल, 4 जनवरी 2019। हल्द्वानी में वर्ष 2006 में हुई सर्राफ पंकज खंडेलवाल की हत्या के मामले में गैंगस्टर से संबंधित एक मामले में विशेष जज गैंगस्टर एक्ट-अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम नैनीताल विनोद कुमार की अदालत ने अंडरवर्ल्ड सरगना प्रकाश पांडे उर्फ पीपी, भूपेंद्र बोरा उर्फ भुपी एवं सतीष पांडे को दोषमुक्त पाया है, जबकि एक अन्य आरोपित शूटर इरफान को दोषी पाया है। आगे न्यायालय 13 वर्ष से जेल में बंद इरफान को दी जाने वाली सजा पर आगामी 7 जनवरी सुनवाई करेगी।
उल्लेखनीय है कि 24 जनवरी 2006 की शाम सवा आठ बजे हल्द्वानी के जय गुरु ज्वेलर्स के स्वामी पंकज खंडेलवाल की दुकान बंद कर पत्नी व बेटे के साथ निकलते समय मृतक के भाई द्वारा दी गई सुपारी पर भाड़े के दो शूटरों ने गोली मारकर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या का आरोप मृतक के बड़े भाई प्रदीप खंडेलवाल, कथित तौर पर वियतनाम में मौजूद एवं रेड कॉर्नर नोटिस जारी अंडरवर्ल्ड डॉन प्रकाश पांडे उर्फ पीपी एवं उसके स्थानीय तौर पर सक्रिय साथी भुपी व सतीष पांडे आदि पर लगा था। इनके खिलाफ यूपी गैंगस्टर एंड एंटी सोसियल एक्टीविटीज प्रिवेंशन एक्ट 1986 के तहत मुकदाम चल रहा था। बाद में मामले में प्रदीप खंडेलवाल तो बरी हो गया अलबत्ता एक शूटर वकील अहमद उर्फ गुड्डू को आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है। जबकि इधर शनिवार को दूसरे शूटर इरफान का मामला न्यायालय में विचाराधीन था। गैंगस्टर एक्ट के मामले में एडीजे प्रथम विनोद कुमार की अदालत में पीपी, भुपी व सतीष पांडे दोषमुक्त हो गए, जबकि अन्य आरोपित इरफान दोषी साबित हुआ है।

यह भी पढ़ें : लूट, चोरी, धोखाधड़ी के मामलों में चार आरोपितों को चार-पांच माह भी नहीं मिली जमानत

नवीन समाचार, नैनीताल, 11 दिसंबर 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने दो अलग-अलग मामलों में लूट के आरोपितों की जमानत अर्जी खारिज कर दी। जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने पहले मामले में बताया कि गत 12 अगस्त को आरोपित गुरुतेज सिंह पुत्र कुलवंत सिंह निवासी बंगला नंबर 12 कैंट बरेली सहित अन्य बदमाशों ने नैनीताल मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड हल्द्वानी के वाहन संख्या यूके04जेड-0298 को चालक दीपक से तीनपानी हल्द्वानी से बंदूक की नोक पर लूट गए थे। कहा कि आरोपित का अब तक पुलिस की पकड़ में न आ पाये सह अभियुक्त के साथ राष्ट्रीय स्तर का गिरोह है, तथा लंबा आपराधिक इतिहास भी है। इसलिए उसे जमानत नहीं दी जानी चाहिए। इस पर न्यायालय ने चार माह बाद भी आरोपित द्वारा पेश की गई जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।
वहीं, दूसरे मामले में आरोपित रामबाबू पुत्र राम आश्रम निवासी राजपुर जिला फतेहपुर की जमानत अर्जी भी जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने खारिज कर दी। मामले में जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने रामबाबू की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए न्यायालय को बताया कि आरोपित सहित सात लड़कों ने गत माह 14 नवंबर की शाम भोलानाथ गार्डन हल्द्वानी निवासी व्यवसायी अर्चित सिंघानिया पुत्र मधुप कुमार के रामपुर रोड स्थित आर्यन ट्रेडर्स प्रतिष्ठान के गोदाम में सामान लेने के बहाने प्रवेश किया और अर्चित को दबोच कर उसका पर्स छीन कर भाग गए। आरोपितों के वाहन का व्यवसायी ने नंबर नोट कर लिया था, जिसकी मदद से वे पकड़े जा सके। अदालत ने रामबाबू की जमानत भी खारिज कर दी।

चोरी व धोखाधड़ी के दो आरोपितों की जमानत अर्जी भी खारिज
नैनीताल। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने बुधवार को गणेश बिष्ट पुत्र भूपाल बिष्ट निवासी दमुवाढूंगा काठगोदाम की जमानत अर्जी भी खारिज कर दी। जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि आरोपित को 6 जुलाई 2019 को हल्द्वानी के द्वारिकापुरी कुसुमखेड़ा निवासी एक बीएसएफ के जवान के घर का ताला तोड़कर नगदी व 12 बोर की बंदूक आदि सामान चोरी करने के आरोप में आठ चाबी के गुच्छों, 71 चाबियों व स्वर्ण आभूषणों के साथ गिरफ्तार किया गया था। आरोपित ने स्वीकारा था कि उसने अपने दोस्त अनिल व रवि के साथ एक महीना पहले भी ईश्वरी विहार में एक घर का ताला तोड़कर चोरी की थी।
वहीं जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने बुधवार को गजेंद्र बिष्ट नाम के आरोपित की जमानत अर्जी भी खारिज कर दी। गजेंद्र की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने न्यायालय को बताया कि मामले में बरेली की धरमपाल कॉलोनी के निवासी मनीष तेजवानी पुत्र स्व.सुंदर लाल ने पुलिस उप महानिरीक्षक को 25 मई 2019 को थाना हल्द्वानी में रिपोर्ट दी थी कि उसके हल्द्वानी के ग्राम देवलचौड़ बंदोबस्ती में 300 वर्ग फिट भूमि गजेंद्र सिंह से 25 लाख रुपए में रजिस्ट्री-बैनामा कराकर क्रय की थी, और अपनी सीमा में पीलर गाड़े थे। लेकिन बाद में किसी ने उस भूमि का अपनी बताकर पीलर हटा दिये। कहने पर पहले गजेंद्र ने पूरी धनराशि लौटाने की बात कही, लेकिन बाद में टालता रहा। इस पर न्यायालय ने आरोपित की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

यह भी पढ़ें : शारीरिक-मानसिक रूप से कमजोर महिला के बलात्कारी को आठ वर्ष का कठोर कारावास..

-जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता को प्रतिकर देने की भी न्यायालय ने की संस्तुति
नवीन समाचार, नैनीताल, 30 नवंबर 2019। द्वितीय जिला न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह की अदालत ने एक शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर 33 वर्षीया महिला से बलात्कार करने के जुर्म में जनपद के बेतालघाट तहसील की ऊंचाकोट पट्टी के ग्राम दाड़िमा-रतौड़ा निवासी भगत सिंह पुत्र ईश्वर सिंह को आठ वर्ष के कठोर कारावास एवं 6500 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न चुकाने पर अभियुक्त को दो माह का अतिरिक्त कारावास भी झेलना होगा।

शनिवार को आरोपित को सजा देने पर हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने न्यायालय को बताया कि आरोपित भगत सिंह ने गत वर्ष 11 मई 2018 को शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण मायके में अपने भाई के परिवार के साथ रहने वाली पीड़िता को घर के अन्य सदस्यों के बाहर होने का मौका देखकर घुसकर और चाकू दिखाकर व डरा-धमकाकर बलात्कार किया। लिहाजा उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। इस पर न्यायालय में आरोपित को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत आठ वर्ष के कठोर कारावास एवं पांच हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न चुकाने पर अभियुक्त को दो माह का अतिरिक्त कारावास, धारा 457 के तहत दो वर्ष के कठोर कारावास व 1000 रुपए अथ्रदंड तथा अर्थदंड न चुकाने पर एक माह के अतिरिक्त कारावास तीन धारा 506 के तहत दो वर्ष के कठोर कारावास व 500 रुपए अथ्रदंड तथा अर्थदंड न चुकाने पर एक माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल को भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357ए के तहत उत्तराखंड अपराध से पीड़ित सहायता योजना-2013 के तहत प्रतिकर की धनराशि उपलब्ध कराने की संस्तुति भी की।

यह भी पढ़ें : शारीरिक-मानसिक रूप से कमजोर महिला के बलात्कारी पर अदालत में दोष साबित, अदालत ने की दूरगामी-उल्लेखनीय टिप्पणी

-शनिवार को सुनाई जाएगी सजा
नवीन समाचार, देहरादून, 29 नवंबर 2019। जनपद के बेतालघाट तहसील की ऊंचाकोट पट्टी के ग्राम दाड़िमा-रतौड़ा निवासी भगत सिंह पुत्र ईश्वर सिंह पर द्वितीय जिला न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह की अदालत में एक शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर 33 वर्षीया महिला से बलात्कार करने का दोष साबित हो गया है। अब दोषी को सजा देने पर शनिवार को सुनवाई होगी।
अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने न्यायालय को बताया कि आरेापित भगत सिंह ने गत वर्ष 11 मई 2018 को शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण मायके में अपने भाई के परिवार के साथ रहने वाली पीड़िता को घर के अन्य सदस्यों के बाहर होने का मौका देखकर घुसकर और चाकू दिखाकर व डरा-धमकाकर बलात्कार किया। उन्होंने आरोपित पर दोष साबित करने के लिए 7 गवाह पेश किये। इस पर न्यायालय में आरोपित पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 506 व 457 के तहत दोष साबित कर दिया।

‘मानसिक रूप से कमजोर व सामान्य व्यक्ति के साक्ष्य के मूल्यांकन का पैमाना अलग रखना न्यायालय का कर्तव्य’

नैनीताल। शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर पीड़िता के साथ बलात्कार की घटना पर द्वितीय जिला न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह की अदालत ने उल्लेखनीय टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा, ‘मानसिक रूप से कमजोर महिला के साथ बलात्कार होने के मामलों में अभियोजन को अपने मामले को संदेह से परे साबित करना है, लेकिन न्यायालय का यह कर्तव्य है कि साक्ष्य के मूल्यांकन के समय एक सामान्य व्यक्ति व एक मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति के साक्ष्य का मूल्यांकन का पैमाना अलग-अलग रखें। मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति की सामाजिक अनुकूलता सामान्य व्यक्ति से कम होती है तथा उसके द्वारा तथ्यों को सही तौर पर प्रतिबिंबित नहीं किया जाता है। ऐसे मामले में साक्ष्य अधिनियम के विरोधाभास के सिद्धांत को कठोरतापूर्वक लागू नहीं किया जा सकता है।’

यह भी पढ़ें : पत्नी की हत्या, गौकशी, मोटरसाइकिल चोरी, फर्जी जमानत के आरोपितों की जमानत अर्जी खारिज

नवीन समाचार, नैनीताल, 28 नवंबर 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव खुल्बे की अदालत ने गौकशी, मोटरसाइकिल चोरी तथा न्यायालय में फर्जी जमानती पेश करने के आरोप में जेल में बंद चार आरोपितों की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने बृहस्पतिवार को इन मामलों में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए न्यायालय को बताया कि आरोपित महेंद्र सिंह बिरौड़िया पुत्र कुंदन सिंह बिरौड़िया निवासी पेटशाल अल्मोड़ा पर भवाली में अपनी पत्नी किरन की 21 मई 2019 को शराब पीने से मना करने पर पत्थर से मारकर जघन्य तरीके से हत्या कर दी थी।

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वहीं दूसरे मामले में जिला शासकीय अधिवक्ता ने गौकशी के मामले में आरोपित ताजिम पुत्र तस्लीम निवासी इंद्रानगर हल्द्वानी की जमानती अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि ताजिम अपने साथी के साथ हल्द्वानी मंडी में घूमती गाय को हांककर लाया और 19 जुलाई 2019 को गौलापार रोड पर स्लॉटर हाउस से आगे जंगल में काट चुका था। उसे बनभूलपुरा चौकी के एसआई मंगल सिंह नेगी ने कटे हुए गौमांश के साथ दो अन्य साथियों शावेज कुरैशी व रुवाब खान के साथ पकड़ा था। दोनों की जमानत अर्जियां भी पूर्व में खारिज हो चुकी हैं। वहीं तीसरे मामले में रामनगर केातवाली के एसआई नीरज चौहान ने मोटर साइकिल चोरी के आरोपित धर्मेंद्र कुमार पुत्र भोज राम निवासी बाजपुर के साथ दानेश, आसिम व मोहम्मद समीन उर्फ लक्की आदि को चोरी की मोटरसाइकिलों के साथ गत 13 नवंबर 2019 को गिरफ्तार किया था। मामले में न्यायालय ने धर्मेंद्र की जमानत अर्जी खारिज कर दी जबकि बताया गया कि दानेश, आसिम व लक्की की जमानत न्यायालय पूर्व में ही खारिज कर चुकी है। इसी तरह एक अन्य मामले में आरोपित युनुस अली पुत्र यूसुफ अली निवासी काशीपुर ने गैंग्स्टर एक्ट के तहत जेल में बंद नाजिम नाम के आरोपी को जमानत दिलाने के लिए उससे 30 हजार रुपए लेकर 8-8 हजार रुपए में दो जमानती प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश-विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर न्यायालय में पेश किये थे। इस पर उसके खिलाफ न्यायालय के अहलमद ओवैश सिद्दीकी ने 12 दिसंबर 2018 को थाना तल्लीताल में मुकदमा दर्ज कराया था। लिहाजा न्यायालय ने यूनुस की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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-गला घोंटकर हत्या करने के बाद नैनीताल के जिला अस्पताल उपचार के लिए लाया, चिकित्सक द्वारा मृत घोषित करने के बाद बिना पोस्टमार्टम कराए गाड़ी की सीट में जीवित की तरह बैठाकर गंगनहर ले गया, अदालत में पत्नी होने से ही इंकार किया
-बाद में अपने परिचित चिकित्सक को पोस्टमार्टम हेतु नियुक्त कराया, लेकिन बहन की शिकायत पर डीएम द्वारा कराये गए तीन चिकित्सकों के पैनल द्वारा कराए गए मेडिकल में हुई गला दबाकर हत्या करने की पुष्टि
नवीन समाचार, नैनीताल, 23 नवंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मनीष अरोड़ा को द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार की अदालत ने अपनी पत्नी पùिनी की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुना दी है। अदालत ने दोषी अधिवक्ता को हत्या के जुर्म में धारा 302 के तहत आजीवन कारावास व 20 हजार रुपए जुर्माना तथा जुर्माना न देने पर 6 माह की अतिरिक्त जेल, दहेज की मांग पर परेशान करने के आरोप में धारा 498ए के तहत 3 वर्ष का कठोर कारावास व 5 हजार अर्थदंड व अर्थदंड न चुकाने पर 3 माह का अतिरिक्त कारावास तथा हत्या करने के उपरांत साक्ष्य छुपाने के आरोप में धारा 201 के तहत 3 वर्ष के कारावास व 5 हजार अर्थदंड व अर्थदंड न चुकाने पर 3 माह का अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को मृतका की नाबालिग पुत्री को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357 ए के प्रतिकर की धनराशि देने के निर्देश भी दिये।

शनिवार को दोषी अधिवक्ता को सजा पर सुनवाई के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने कहा कि मृतका की पूर्व विवाह से एक पुत्री भी थी, जो कि अपनी मौसी रजनी नवानी के पास रहती थी। मृतका अपनी बच्ची के लिए हर माह स्वयं कमाकर 6 हजार रुपए प्रतिमाह उसके भविष्य के लिए देती थी। उसकी मृत्यु के बाद बच्ची के जीवन यापन का कोई सहारा नहीं रह गया है। इसलिए अंतर्गत पुत्री को प्रतिकर धनराशि भी दिया जाए।
उल्लेखनीय है कि 19 मई 2016 को अधिवक्ता ने नैनीताल में अपनी पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के बाद उसकी मौत को छुपाने की भरसक कोशिश की थी। यहां तक कि अभियोजन पक्ष के अनुसार पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के बाद नैनीताल के बीडी पांडे जिला अस्पताल में उपचार के लिए लाया। यहां चिकित्सक डा. अरिरुद्ध गंगोला द्वारा पùिनी को मृत घोषित करने के बाद मोर्चरी में रखने को कहने पर बिना पोस्टमार्टम कराए मृतका को गाड़ी की सीट में जीवित की तरह बैठाकर गंगनहर रुड़की ले गया। वहां पत्नी की बहन द्वारा पुलिस को सूचना देने पर जब पुलिस मृतका का पोस्टमार्टम कराने लगी तो अपने परिचित डा. अरोड़ा को अपने प्रभाव से पोस्टमार्टम हेतु नियुक्त करवा दिया। बहन द्वारा इसकी शिकायत हरिद्वार के डीएम से की गई, जिस पर डीएम ने डा. अरोड़ा को हटाकर तीन अन्य चिकित्सकों के पैनल से मृतका का पोस्टमार्टम करवाया, जिसमें मृतका की गला दबाकर हत्या किये जाने की पुष्टि हुई। यही नहीं आरोपित ने अदालत में सुनवाई के दौरान मृतका के अपनी पत्नी होने से इंकार कर दिया। कहा कि वह उसके दरवाजे पर पड़ी हुई थी। उसे उपचार के लिए अस्पताल ले गया था। हालांकि गंगनहर में पोस्टमार्टम कराते हुए उसने खुद को मृतका का पति व अपने पिता को मृतका का ससुर बताया था। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने मामले में पैरवी करते हुए आरोपित के दोस्त व मुंशी सहित कुल 20 गवाह पेश किये और यह भी बताया कि आरोपित व मृतका दोनों ने प्रेम विवाह किया था और दोनों की यह दूसरी शादी थी। पिछली सुनवाई पर अभियोजन पक्ष को स्वीकार करते हुए अदालत ने उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 201 व 498 के तहत दोष साबित कर दिया था।

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नवीन समाचार, टिहरी, 23 नवंबर 2019। खुद को न्यायाधीश बताकर सरकारी गेस्ट हाउस में अनाधिकृत तरीके से ठहरने और बिना इजाजत टैक्सी वाहन पर लालबत्ती लगाने की आरोपी एक महिला को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट टिहरी की अदालत ने दो साल के कठोर कारवास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर आरोपी को चार माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
उल्लेखनीय है कि 19 जनवरी 2016 को मसूरी रेंज के वन दरोगा दिगंबर सिंह चौहान ने थाना कैंपटी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 19 जनवरी को शाम वन विभाग के धनोल्टी अतिथि गृह में संजीव कुमार भटनागर निवासी नई दिल्ली के साथ पहुंची डा. पूजा ठक्कर निवासी जुहू मुंबई हाल निवासी देहरादून ने स्वयं को न्यायाधीश बताकर कमरा खोलने को कहा। इस पर तत्कालीन डीएफओ धीरज पांडे के निर्देश पर महिला को कक्ष संख्या-2 आवंटित किया गया। कक्ष आवंटन के रजिस्टर में भी पूजा ठक्कर ने अपने आप को न्यायाधीश लिखाया। अगले दिन 20 जनवरी को जब वन रेंजर नीलम बड़थ्वाल ने उनसे आईडी मांगा तो वह धमकाने लगी। कैंपटी थाने को सूचना देने पर मौके पर पहुंचे थानाध्यक्ष कैंपटी ने पूछताछ करने के बाद आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया। बृहस्पतिवार को सीजेएम राहुल कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी डा. पूजा ठक्कर को दोषी पाते हुए दो साल के कठोर कारावास और 25 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।

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-प्रेम विवाह के एक साल बाद ही गला घोंटकर हत्या छुपाने को क्या-क्या किया सुनकर दंग रह जाएंगे आप…

-गला घोंटकर हत्या करने के बाद नैनीताल के जिला अस्पताल उपचार के लिए लाया, चिकित्सक द्वारा मृत घोषित करने के बाद बिना पोस्टमार्टम कराए गाड़ी की सीट में जीवित की तरह बैठाकर गंगनहर ले गया, अदालत में पत्नी होने से ही इंकार किया
-बाद में अपने परिचित चिकित्सक को पोस्टमार्टम हेतु नियुक्त कराया, लेकिन बहन की शिकायत पर डीएम द्वारा कराये गए तीन चिकित्सकों के पैनल द्वारा कराए गए मेडिकल में हुई गला दबाकर हत्या करने की पुष्टि
नवीन समाचार, नैनीताल, 19 नवंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मनीष अरोड़ा पर द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार की अदालत में अपनी पत्नी पùिनी की हत्या का दोष साबित हो गया है। वर्ष 2015 में हुई शादी के एक वर्ष बाद ही 19 मई 2016 को अधिवक्ता ने नैनीताल में अपनी पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के बाद उसकी मौत को छुपाने की भरसक कोशिश की। यहां तक कि अभियोजन पक्ष के अनुसार पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के बाद नैनीताल के बीडी पांडे जिला अस्पताल में उपचार के लिए लाया। यहां चिकित्सक डा. अरिरुद्ध गंगोला द्वारा पùिनी को मृत घोषित करने के बाद मोर्चरी में रखने को कहने पर बिना पोस्टमार्टम कराए मृतका को गाड़ी की सीट में जीवित की तरह बैठाकर गंगनहर रुड़की ले गया। वहां पत्नी की बहन द्वारा पुलिस को सूचना देने पर जब पुलिस मृतका का पोस्टमार्टम कराने लगी तो अपने परिचित डा. अरोड़ा को अपने प्रभाव से पोस्टमार्टम हेतु नियुक्त करवा दिया। बहन द्वारा इसकी शिकायत हरिद्वार के डीएम से की गई, जिस पर डीएम ने डा. अरोड़ा को हटाकर तीन अन्य चिकित्सकों के पैनल से मृतका का पोस्टमार्टम करवाया, जिसमें मृतका की गला दबाकर हत्या किये जाने की पुष्टि हुई। यही नहीं आरोपित ने अदालत में सुनवाई के दौरान मृतका के अपनी पत्नी होने से इंकार कर दिया। कहा कि वह उसके दरवाजे पर पड़ी हुई थी। उसे उपचार के लिए अस्पताल ले गया था। हालांकि गंगनहर में पोस्टमार्टम कराते हुए उसने खुद को मृतका का पति व अपने पिता को मृतका का ससुर बताया था। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने मामले में पैरवी करते हुए आरोपित के दोस्त व मुंशी सहित कुल 20 गवाह पेश किये और यह भी बताया कि आरोपित व मृतका दोनों ने प्रेम विवाह किया था और दोनों की यह दूसरी शादी थी। अभियोजन पक्ष को स्वीकार करते हुए अदालत ने उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 201 व 498 के तहत दोष साबित हो गया। घटना के बाद पकड़े जाने के बाद से आरोपित को उच्च न्यायालय से भी जमानत नहीं मिली थी। अलबत्ता व पेरोल पर बाहर था। दोष साबित होने के बाद उसे जेल भेज दिया गया।

यह भी पढ़ें : सूचना अधिकार कार्यकर्ता को धोखाधड़ी के आरोप में तीन वर्ष की जेल की सजा

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 15 नवंबर 2019। प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जिला एवं सत्र न्यायालय हल्द्वानी की अदालत ने हल्द्वानी निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता भाष्कर बृजवासी को तीन वर्ष की जेल एवं जुर्माने की सजा सुनाई है। उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास व चार हजार रुपए अर्थदंड तथा अर्थदंड न चुकाने पर तीन माह के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही भाष्कर एवं उनके भाई शेखर बृजवासी व दीपू उर्फ दीप चंद्र पांडे को धारा 323, धारा 342, धारा 504 व धारा 506 के तहत अलग-अलग 3-3 माह के सश्रम कारावास व 1-1 हजार रुपए अर्थदंड और अर्थदंड न चुकाने पर 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास तथा धारा 384 के तहत 2-2 वर्ष के सश्रम कारावास व 2-2 हजार रुपए अर्थदंड और अर्थदंड न चुकाने पर 1-1 माह के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा सुनाई है।
मामले के अनुसार पीड़ित हरीश मेहरा ने क्षेत्राधिकारी हल्द्वानी को तहरीर देकर कहा था कि आरोपित भाष्कर बृजवासी ने 28 जनवरी 2005 को डिग्री कॉलेज हल्द्वानी के चपरासी बिट्ठन के साथ नगर पालिका कार्यालय के समक्ष मारपीट व गाली गलौच की थी। बिट्ठन ने इसकी रिपोर्ट थाना हल्द्वानी में दर्ज कराई थी। मेहरा इस मामले में चश्मदीद गवाह था। इसके बाद 25 मार्च 2005 को सुबह करीब साढ़े नौ बजे मेहरा के पास दीपू उर्फ दीप चंद्र पांडे व एक अन्य लड़का स्कूटर से आये तथा भाष्कर के भाई शेखर बृजवासी द्वारा बिट्ठन वाले मामले में बातचीत के लिए बुलाने की बात कह साथ चलने को कहा, और मना करने पर दीपू ने मेहरा को थप्पड़ मारकर जबर्दस्ती स्कूटर पर भाष्कर बृजवासी के घर ले गए। घर पर भाष्कर व शेखर ने बिट्ठन मामले में गवाही न देने को कहते हुए मारपीट की थी। पूर्व में आरोपितों को इस मामले में सिविल जज-न्यायिक मजिस्ट्रेट हल्द्वानी ने आरोपों से दोषमुक्त कर दिया था। इस आदेश पर की गई अपील पर प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जिला एवं सत्र न्यायालय हल्द्वानी की अदालत से ताजा फैसला आया है।

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-नैनीताल जनपद के अनुसूचित जाति के करीब 28 छात्रों के नाम पर करीब 20 लाख रुपए के चेक फर्जी तरीके से हड़पने का है आरोप
नवीन समाचार, नैनीताल, 7 नवंबर 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण राजीव कुमार खुल्बे के न्यायालय ने प्रदेश के बहुचर्चित दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले में आरोपित की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
बृहस्पतिवार को मामले में आरोपित की जमानत अर्जी का अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने मामले के बारे में बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश पर आईजी एसआईटी द्वारा गठित एसआईटी के सदस्य काठगोदाम थाने के प्रभारी दान सिंह मेहता पुत्र लक्ष्मण सिंह मेहता ने गत 26 सितंबर को थाना भीमताल में तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई है। एसआईटी को जांच में प्रकाश में आया कि 2011-12 में समाज कल्याण विभाग नैनीताल के द्वारा यूपी के हापुड़ स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी को 28 छात्रों की 20 लाख 63 हजार 900 रुपए की छात्रवृत्ति के चेक प्रेषित किये गये। मामले में बिचौलिये अंकित अग्रवाल पुत्र सुनील अग्रवाल निवासी राधा गोविंद कॉलेज चंदोसी रोड मुरादाबाद के साथ ही राकेश, जोगेंदर, अनुज, सचिन, समाज कल्याण विभाग के अधिकारी व आदि कर्मचारियों तथा संबंधित बैंक कर्मियों के खिलाफ भादंसं की धारा 420, 466, 467, 468, 471, 120 बी के तहत थाना भीमताल में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जांच में प्रकाश में आया कि बिचौलिये अंकित के खिलाफ प्रदेश के थाना जसपुर में भी इन्ही धाराओं में मामला पंजीकृत हुआ है। जांच में आशा आर्या, प्रमोद कुमार, किरन, दिवाकर, राम चंद्र, अजय आर्या, अरविंद कुमार आदि ने पूछताछ में मोनाड यूनिवर्सिटी के संबंध में किसी जानकारी अथवा वहां पढ़ने से ही इंकार किया। बृहस्पतिवार को आरोपित अंकित की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि आरोपित ने नैनीताल जनपद के युवाओं के प्रमाण पत्र लेकर उनके फर्जी प्रवेश मोनाड विवि में कराए थे और उनके नाम के बैंकों में फर्जी खाते खोलकर उनके नाम की छात्रवृत्ति फर्जी तरीके से प्राप्त कर ली थी।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 4 नवंबर 2019। बीते माह 7 अक्टूबर को हल्द्वानी के बनभूलपुरा थाना क्षेत्र स्थित लाइन नंबर 12 की मीट मार्केट में बनभूलपुरा थाने के उप निरीक्षक मंगल सिंह नेगी की अगुवाई में गए पुलिस बल ने ताजिम कुरैशी को एक दुधारू गाय को काटते हुए पकड़ा था। इस मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने आरोपित की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि आरोपित द्वारा वीभत्स तरीके से काटी गाय के थनों से काफी दूध भी बह रहा था। आरोपित गाय का मीट भैंस के मीट के साथ बेचता था। उससे काफी मात्रा में गौमांश एवं गाय को काटने में प्रयुक्त छुरी आदि हथियार भी बरामद हुए। गाय आवारा लग रही थी, जो पन्नी भी खाती थी। आरोपित पुलिस से बचकर भाग गया था, हालांकि उसे भागते हुए पहचान लिया गया था और बाद में पकड़ लिया गया था। इस पर न्यायालय ने आरोपित की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी में विद्युत चोरी कर चला रहा था फैक्टरी, मिली एक वर्ष के जेल व सवा पांच लाख जुर्माने की सजा

नवीन समाचार, नैनीताल, 4 अक्टूबर 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने बिजली चोरी के आरोप में हल्द्वानी के इमरान नाम के व्यक्ति को विद्युत अधिनियम के अधीन दोषी पाते हुए एक वर्ष के कारावास तथा 5 लाख 25 हजार 199 रुपए की धनराशि अदा करने की सजा सुनाई है। इमरान पर मीटर से पहले बिजली की केबल काटकर उससे मोमबत्ती बनाने की फैक्टरी चलाने का आरोप है।
मामले के अनुसार विद्युत वितरण उप खंड द्वितीय हल्द्वानी के अवर अभियंता बंशीधर डालाकोटी ने थाना बनभूलपुरा में फरजाना, मोहम्मद नाजिका, मो. आरिफ व इमरान को 8266 वाट की विद्युत चोरी करते पकड़कर उनके विरुद्ध विद्युत अधिनियम की धारा 135 के तहत 23 फरवरी 2017 को मुकदमा दर्ज कराया था। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने पैरवी करते हुए पांच साक्षी पेश किये, जिसके फलस्वरूप इमरान दोषी सिद्ध हुआ, और उसे शुक्रवार को सजा सुनाई गई।

यह भी पढ़ें : साथ रह रही साली के हत्यारे की जमानत अर्जी खारिज

नवीन समाचार, नैनीताल, 1 अक्तूबर 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने अपने पति से अलग जीजा के साथ रह रही महिला की हत्या के आरोप में बंद उसके जीजा की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। आरोपित जीजा सोनू सैनी पुत्र पूरन सिंह सैनी निवासी चोरपानी स्टोन क्रेसर के पीछे रामनगर की जमानत अर्जी का मंगलवार को न्यायालय में विरोध करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि मृतका जन्नत उर्फ निखत अंसारी की शादी भजनपुरा दिल्ली निवासी अंकित शर्मा से हुई थी, किंतु पांच-छह दिन ही पति के साथ रहने के बाद वह नवंबर 2018 से पति से अलग अपने जीजा सोनू सैनी के पास रह रही थी।

इधर जून 2019 में पुलिस को एक अज्ञात महिला का शव बरामद किया गया। उसके शव के इश्तिहार को देखकर उसके पति ने 22 जून को उसकी शिनाख्त की। पति की तहरीर पर मृतका के जीजा सोनू व उसके साले गुड्डू के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 व 201 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ। मामले में आरोपित स्वयं अपना जुर्म कबूल कर चुका है कि उसने घटना के दिन मृतका के साथ शराब पी थी। इस दोरान दोनों के बीच झगड़ा होने पर सोनू ने जन्नत को पहले पटका और गिरने पर बिजली के तार से उसका गला घोंटा और मरने पर उसे रेलवे लाइन पर डाल दिया और उसकी पहचान छुपाने के लिए उसके मुंह पर कपड़ों में पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी। हत्या में प्रयुक्त तार आदि भी आरोपित से बरामद हो चुके हैं, लिहाजा उसे जमानत नहीं दी जा सकती।

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-जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने जमानत अर्जी की खारिज
नवीन समाचार, नैनीताल, 19 सितंबर 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने हल्द्वानी के दो बैंकट हॉल संचालकों-भूपेंद्र मेहरा पत्र बीरेंद्र मेहरा निवासी जीतपुर निगल्टिया लामाचौड़ हल्द्वानी व विशाल मेहरा पुत्र जगमोहन मेहरा निवासी जगतपुर थाना चोरगलिया गौलापार हल्द्वानी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए न्यायालय को बताया कि दोनों ने ओम प्रकाश उर्फ पप्पू मौर्य निवासी दमुवाढूंगा से बैंकट हॉल के गार्डन में दो लाख 25 हजार रुपए का कार्य कराने के बावजूद उसे पैंसे नहीं दिये। ऐसे में ओम प्रकाश को दूसरों से उधार पैंसे लेकर कार्य कराना पड़ा। बावजूद पैंसे मांगने पर उसके साथ मारपीट की। इस कारण ओम प्रकाश ने गत 25 जुलाई माह में जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। दलीलों को सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपितों की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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