लूट, चोरी, धोखाधड़ी के मामलों में चार आरोपितों को चार-पांच माह भी नहीं मिली जमानत

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नवीन समाचार, नैनीताल, 11 दिसंबर 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने दो अलग-अलग मामलों में लूट के आरोपितों की जमानत अर्जी खारिज कर दी। जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने पहले मामले में बताया कि गत 12 अगस्त को आरोपित गुरुतेज सिंह पुत्र कुलवंत सिंह निवासी बंगला नंबर 12 कैंट बरेली सहित अन्य बदमाशों ने नैनीताल मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड हल्द्वानी के वाहन संख्या यूके04जेड-0298 को चालक दीपक से तीनपानी हल्द्वानी से बंदूक की नोक पर लूट गए थे। कहा कि आरोपित का अब तक पुलिस की पकड़ में न आ पाये सह अभियुक्त के साथ राष्ट्रीय स्तर का गिरोह है, तथा लंबा आपराधिक इतिहास भी है। इसलिए उसे जमानत नहीं दी जानी चाहिए। इस पर न्यायालय ने चार माह बाद भी आरोपित द्वारा पेश की गई जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।
वहीं, दूसरे मामले में आरोपित रामबाबू पुत्र राम आश्रम निवासी राजपुर जिला फतेहपुर की जमानत अर्जी भी जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने खारिज कर दी। मामले में जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने रामबाबू की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए न्यायालय को बताया कि आरोपित सहित सात लड़कों ने गत माह 14 नवंबर की शाम भोलानाथ गार्डन हल्द्वानी निवासी व्यवसायी अर्चित सिंघानिया पुत्र मधुप कुमार के रामपुर रोड स्थित आर्यन ट्रेडर्स प्रतिष्ठान के गोदाम में सामान लेने के बहाने प्रवेश किया और अर्चित को दबोच कर उसका पर्स छीन कर भाग गए। आरोपितों के वाहन का व्यवसायी ने नंबर नोट कर लिया था, जिसकी मदद से वे पकड़े जा सके। अदालत ने रामबाबू की जमानत भी खारिज कर दी।

चोरी व धोखाधड़ी के दो आरोपितों की जमानत अर्जी भी खारिज
नैनीताल। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने बुधवार को गणेश बिष्ट पुत्र भूपाल बिष्ट निवासी दमुवाढूंगा काठगोदाम की जमानत अर्जी भी खारिज कर दी। जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि आरोपित को 6 जुलाई 2019 को हल्द्वानी के द्वारिकापुरी कुसुमखेड़ा निवासी एक बीएसएफ के जवान के घर का ताला तोड़कर नगदी व 12 बोर की बंदूक आदि सामान चोरी करने के आरोप में आठ चाबी के गुच्छों, 71 चाबियों व स्वर्ण आभूषणों के साथ गिरफ्तार किया गया था। आरोपित ने स्वीकारा था कि उसने अपने दोस्त अनिल व रवि के साथ एक महीना पहले भी ईश्वरी विहार में एक घर का ताला तोड़कर चोरी की थी।
वहीं जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने बुधवार को गजेंद्र बिष्ट नाम के आरोपित की जमानत अर्जी भी खारिज कर दी। गजेंद्र की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने न्यायालय को बताया कि मामले में बरेली की धरमपाल कॉलोनी के निवासी मनीष तेजवानी पुत्र स्व.सुंदर लाल ने पुलिस उप महानिरीक्षक को 25 मई 2019 को थाना हल्द्वानी में रिपोर्ट दी थी कि उसके हल्द्वानी के ग्राम देवलचौड़ बंदोबस्ती में 300 वर्ग फिट भूमि गजेंद्र सिंह से 25 लाख रुपए में रजिस्ट्री-बैनामा कराकर क्रय की थी, और अपनी सीमा में पीलर गाड़े थे। लेकिन बाद में किसी ने उस भूमि का अपनी बताकर पीलर हटा दिये। कहने पर पहले गजेंद्र ने पूरी धनराशि लौटाने की बात कही, लेकिन बाद में टालता रहा। इस पर न्यायालय ने आरोपित की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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-जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता को प्रतिकर देने की भी न्यायालय ने की संस्तुति
नवीन समाचार, नैनीताल, 30 नवंबर 2019। द्वितीय जिला न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह की अदालत ने एक शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर 33 वर्षीया महिला से बलात्कार करने के जुर्म में जनपद के बेतालघाट तहसील की ऊंचाकोट पट्टी के ग्राम दाड़िमा-रतौड़ा निवासी भगत सिंह पुत्र ईश्वर सिंह को आठ वर्ष के कठोर कारावास एवं 6500 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न चुकाने पर अभियुक्त को दो माह का अतिरिक्त कारावास भी झेलना होगा।

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शनिवार को आरोपित को सजा देने पर हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने न्यायालय को बताया कि आरोपित भगत सिंह ने गत वर्ष 11 मई 2018 को शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण मायके में अपने भाई के परिवार के साथ रहने वाली पीड़िता को घर के अन्य सदस्यों के बाहर होने का मौका देखकर घुसकर और चाकू दिखाकर व डरा-धमकाकर बलात्कार किया। लिहाजा उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। इस पर न्यायालय में आरोपित को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत आठ वर्ष के कठोर कारावास एवं पांच हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड न चुकाने पर अभियुक्त को दो माह का अतिरिक्त कारावास, धारा 457 के तहत दो वर्ष के कठोर कारावास व 1000 रुपए अथ्रदंड तथा अर्थदंड न चुकाने पर एक माह के अतिरिक्त कारावास तीन धारा 506 के तहत दो वर्ष के कठोर कारावास व 500 रुपए अथ्रदंड तथा अर्थदंड न चुकाने पर एक माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल को भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357ए के तहत उत्तराखंड अपराध से पीड़ित सहायता योजना-2013 के तहत प्रतिकर की धनराशि उपलब्ध कराने की संस्तुति भी की।

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-शनिवार को सुनाई जाएगी सजा
नवीन समाचार, देहरादून, 29 नवंबर 2019। जनपद के बेतालघाट तहसील की ऊंचाकोट पट्टी के ग्राम दाड़िमा-रतौड़ा निवासी भगत सिंह पुत्र ईश्वर सिंह पर द्वितीय जिला न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह की अदालत में एक शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर 33 वर्षीया महिला से बलात्कार करने का दोष साबित हो गया है। अब दोषी को सजा देने पर शनिवार को सुनवाई होगी।
अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने न्यायालय को बताया कि आरेापित भगत सिंह ने गत वर्ष 11 मई 2018 को शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण मायके में अपने भाई के परिवार के साथ रहने वाली पीड़िता को घर के अन्य सदस्यों के बाहर होने का मौका देखकर घुसकर और चाकू दिखाकर व डरा-धमकाकर बलात्कार किया। उन्होंने आरोपित पर दोष साबित करने के लिए 7 गवाह पेश किये। इस पर न्यायालय में आरोपित पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 506 व 457 के तहत दोष साबित कर दिया।

‘मानसिक रूप से कमजोर व सामान्य व्यक्ति के साक्ष्य के मूल्यांकन का पैमाना अलग रखना न्यायालय का कर्तव्य’

नैनीताल। शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर पीड़िता के साथ बलात्कार की घटना पर द्वितीय जिला न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह की अदालत ने उल्लेखनीय टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा, ‘मानसिक रूप से कमजोर महिला के साथ बलात्कार होने के मामलों में अभियोजन को अपने मामले को संदेह से परे साबित करना है, लेकिन न्यायालय का यह कर्तव्य है कि साक्ष्य के मूल्यांकन के समय एक सामान्य व्यक्ति व एक मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति के साक्ष्य का मूल्यांकन का पैमाना अलग-अलग रखें। मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति की सामाजिक अनुकूलता सामान्य व्यक्ति से कम होती है तथा उसके द्वारा तथ्यों को सही तौर पर प्रतिबिंबित नहीं किया जाता है। ऐसे मामले में साक्ष्य अधिनियम के विरोधाभास के सिद्धांत को कठोरतापूर्वक लागू नहीं किया जा सकता है।’

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नवीन समाचार, नैनीताल, 28 नवंबर 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव खुल्बे की अदालत ने गौकशी, मोटरसाइकिल चोरी तथा न्यायालय में फर्जी जमानती पेश करने के आरोप में जेल में बंद चार आरोपितों की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने बृहस्पतिवार को इन मामलों में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए न्यायालय को बताया कि आरोपित महेंद्र सिंह बिरौड़िया पुत्र कुंदन सिंह बिरौड़िया निवासी पेटशाल अल्मोड़ा पर भवाली में अपनी पत्नी किरन की 21 मई 2019 को शराब पीने से मना करने पर पत्थर से मारकर जघन्य तरीके से हत्या कर दी थी।

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वहीं दूसरे मामले में जिला शासकीय अधिवक्ता ने गौकशी के मामले में आरोपित ताजिम पुत्र तस्लीम निवासी इंद्रानगर हल्द्वानी की जमानती अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि ताजिम अपने साथी के साथ हल्द्वानी मंडी में घूमती गाय को हांककर लाया और 19 जुलाई 2019 को गौलापार रोड पर स्लॉटर हाउस से आगे जंगल में काट चुका था। उसे बनभूलपुरा चौकी के एसआई मंगल सिंह नेगी ने कटे हुए गौमांश के साथ दो अन्य साथियों शावेज कुरैशी व रुवाब खान के साथ पकड़ा था। दोनों की जमानत अर्जियां भी पूर्व में खारिज हो चुकी हैं। वहीं तीसरे मामले में रामनगर केातवाली के एसआई नीरज चौहान ने मोटर साइकिल चोरी के आरोपित धर्मेंद्र कुमार पुत्र भोज राम निवासी बाजपुर के साथ दानेश, आसिम व मोहम्मद समीन उर्फ लक्की आदि को चोरी की मोटरसाइकिलों के साथ गत 13 नवंबर 2019 को गिरफ्तार किया था। मामले में न्यायालय ने धर्मेंद्र की जमानत अर्जी खारिज कर दी जबकि बताया गया कि दानेश, आसिम व लक्की की जमानत न्यायालय पूर्व में ही खारिज कर चुकी है। इसी तरह एक अन्य मामले में आरोपित युनुस अली पुत्र यूसुफ अली निवासी काशीपुर ने गैंग्स्टर एक्ट के तहत जेल में बंद नाजिम नाम के आरोपी को जमानत दिलाने के लिए उससे 30 हजार रुपए लेकर 8-8 हजार रुपए में दो जमानती प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश-विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर न्यायालय में पेश किये थे। इस पर उसके खिलाफ न्यायालय के अहलमद ओवैश सिद्दीकी ने 12 दिसंबर 2018 को थाना तल्लीताल में मुकदमा दर्ज कराया था। लिहाजा न्यायालय ने यूनुस की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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-गला घोंटकर हत्या करने के बाद नैनीताल के जिला अस्पताल उपचार के लिए लाया, चिकित्सक द्वारा मृत घोषित करने के बाद बिना पोस्टमार्टम कराए गाड़ी की सीट में जीवित की तरह बैठाकर गंगनहर ले गया, अदालत में पत्नी होने से ही इंकार किया
-बाद में अपने परिचित चिकित्सक को पोस्टमार्टम हेतु नियुक्त कराया, लेकिन बहन की शिकायत पर डीएम द्वारा कराये गए तीन चिकित्सकों के पैनल द्वारा कराए गए मेडिकल में हुई गला दबाकर हत्या करने की पुष्टि
नवीन समाचार, नैनीताल, 23 नवंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मनीष अरोड़ा को द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार की अदालत ने अपनी पत्नी पùिनी की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुना दी है। अदालत ने दोषी अधिवक्ता को हत्या के जुर्म में धारा 302 के तहत आजीवन कारावास व 20 हजार रुपए जुर्माना तथा जुर्माना न देने पर 6 माह की अतिरिक्त जेल, दहेज की मांग पर परेशान करने के आरोप में धारा 498ए के तहत 3 वर्ष का कठोर कारावास व 5 हजार अर्थदंड व अर्थदंड न चुकाने पर 3 माह का अतिरिक्त कारावास तथा हत्या करने के उपरांत साक्ष्य छुपाने के आरोप में धारा 201 के तहत 3 वर्ष के कारावास व 5 हजार अर्थदंड व अर्थदंड न चुकाने पर 3 माह का अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को मृतका की नाबालिग पुत्री को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357 ए के प्रतिकर की धनराशि देने के निर्देश भी दिये।

शनिवार को दोषी अधिवक्ता को सजा पर सुनवाई के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने कहा कि मृतका की पूर्व विवाह से एक पुत्री भी थी, जो कि अपनी मौसी रजनी नवानी के पास रहती थी। मृतका अपनी बच्ची के लिए हर माह स्वयं कमाकर 6 हजार रुपए प्रतिमाह उसके भविष्य के लिए देती थी। उसकी मृत्यु के बाद बच्ची के जीवन यापन का कोई सहारा नहीं रह गया है। इसलिए अंतर्गत पुत्री को प्रतिकर धनराशि भी दिया जाए।
उल्लेखनीय है कि 19 मई 2016 को अधिवक्ता ने नैनीताल में अपनी पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के बाद उसकी मौत को छुपाने की भरसक कोशिश की थी। यहां तक कि अभियोजन पक्ष के अनुसार पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के बाद नैनीताल के बीडी पांडे जिला अस्पताल में उपचार के लिए लाया। यहां चिकित्सक डा. अरिरुद्ध गंगोला द्वारा पùिनी को मृत घोषित करने के बाद मोर्चरी में रखने को कहने पर बिना पोस्टमार्टम कराए मृतका को गाड़ी की सीट में जीवित की तरह बैठाकर गंगनहर रुड़की ले गया। वहां पत्नी की बहन द्वारा पुलिस को सूचना देने पर जब पुलिस मृतका का पोस्टमार्टम कराने लगी तो अपने परिचित डा. अरोड़ा को अपने प्रभाव से पोस्टमार्टम हेतु नियुक्त करवा दिया। बहन द्वारा इसकी शिकायत हरिद्वार के डीएम से की गई, जिस पर डीएम ने डा. अरोड़ा को हटाकर तीन अन्य चिकित्सकों के पैनल से मृतका का पोस्टमार्टम करवाया, जिसमें मृतका की गला दबाकर हत्या किये जाने की पुष्टि हुई। यही नहीं आरोपित ने अदालत में सुनवाई के दौरान मृतका के अपनी पत्नी होने से इंकार कर दिया। कहा कि वह उसके दरवाजे पर पड़ी हुई थी। उसे उपचार के लिए अस्पताल ले गया था। हालांकि गंगनहर में पोस्टमार्टम कराते हुए उसने खुद को मृतका का पति व अपने पिता को मृतका का ससुर बताया था। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने मामले में पैरवी करते हुए आरोपित के दोस्त व मुंशी सहित कुल 20 गवाह पेश किये और यह भी बताया कि आरोपित व मृतका दोनों ने प्रेम विवाह किया था और दोनों की यह दूसरी शादी थी। पिछली सुनवाई पर अभियोजन पक्ष को स्वीकार करते हुए अदालत ने उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 201 व 498 के तहत दोष साबित कर दिया था।

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नवीन समाचार, टिहरी, 23 नवंबर 2019। खुद को न्यायाधीश बताकर सरकारी गेस्ट हाउस में अनाधिकृत तरीके से ठहरने और बिना इजाजत टैक्सी वाहन पर लालबत्ती लगाने की आरोपी एक महिला को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट टिहरी की अदालत ने दो साल के कठोर कारवास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर आरोपी को चार माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
उल्लेखनीय है कि 19 जनवरी 2016 को मसूरी रेंज के वन दरोगा दिगंबर सिंह चौहान ने थाना कैंपटी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 19 जनवरी को शाम वन विभाग के धनोल्टी अतिथि गृह में संजीव कुमार भटनागर निवासी नई दिल्ली के साथ पहुंची डा. पूजा ठक्कर निवासी जुहू मुंबई हाल निवासी देहरादून ने स्वयं को न्यायाधीश बताकर कमरा खोलने को कहा। इस पर तत्कालीन डीएफओ धीरज पांडे के निर्देश पर महिला को कक्ष संख्या-2 आवंटित किया गया। कक्ष आवंटन के रजिस्टर में भी पूजा ठक्कर ने अपने आप को न्यायाधीश लिखाया। अगले दिन 20 जनवरी को जब वन रेंजर नीलम बड़थ्वाल ने उनसे आईडी मांगा तो वह धमकाने लगी। कैंपटी थाने को सूचना देने पर मौके पर पहुंचे थानाध्यक्ष कैंपटी ने पूछताछ करने के बाद आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया। बृहस्पतिवार को सीजेएम राहुल कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने आरोपी डा. पूजा ठक्कर को दोषी पाते हुए दो साल के कठोर कारावास और 25 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।

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-प्रेम विवाह के एक साल बाद ही गला घोंटकर हत्या छुपाने को क्या-क्या किया सुनकर दंग रह जाएंगे आप…

-गला घोंटकर हत्या करने के बाद नैनीताल के जिला अस्पताल उपचार के लिए लाया, चिकित्सक द्वारा मृत घोषित करने के बाद बिना पोस्टमार्टम कराए गाड़ी की सीट में जीवित की तरह बैठाकर गंगनहर ले गया, अदालत में पत्नी होने से ही इंकार किया
-बाद में अपने परिचित चिकित्सक को पोस्टमार्टम हेतु नियुक्त कराया, लेकिन बहन की शिकायत पर डीएम द्वारा कराये गए तीन चिकित्सकों के पैनल द्वारा कराए गए मेडिकल में हुई गला दबाकर हत्या करने की पुष्टि
नवीन समाचार, नैनीताल, 19 नवंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मनीष अरोड़ा पर द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार की अदालत में अपनी पत्नी पùिनी की हत्या का दोष साबित हो गया है। वर्ष 2015 में हुई शादी के एक वर्ष बाद ही 19 मई 2016 को अधिवक्ता ने नैनीताल में अपनी पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के बाद उसकी मौत को छुपाने की भरसक कोशिश की। यहां तक कि अभियोजन पक्ष के अनुसार पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के बाद नैनीताल के बीडी पांडे जिला अस्पताल में उपचार के लिए लाया। यहां चिकित्सक डा. अरिरुद्ध गंगोला द्वारा पùिनी को मृत घोषित करने के बाद मोर्चरी में रखने को कहने पर बिना पोस्टमार्टम कराए मृतका को गाड़ी की सीट में जीवित की तरह बैठाकर गंगनहर रुड़की ले गया। वहां पत्नी की बहन द्वारा पुलिस को सूचना देने पर जब पुलिस मृतका का पोस्टमार्टम कराने लगी तो अपने परिचित डा. अरोड़ा को अपने प्रभाव से पोस्टमार्टम हेतु नियुक्त करवा दिया। बहन द्वारा इसकी शिकायत हरिद्वार के डीएम से की गई, जिस पर डीएम ने डा. अरोड़ा को हटाकर तीन अन्य चिकित्सकों के पैनल से मृतका का पोस्टमार्टम करवाया, जिसमें मृतका की गला दबाकर हत्या किये जाने की पुष्टि हुई। यही नहीं आरोपित ने अदालत में सुनवाई के दौरान मृतका के अपनी पत्नी होने से इंकार कर दिया। कहा कि वह उसके दरवाजे पर पड़ी हुई थी। उसे उपचार के लिए अस्पताल ले गया था। हालांकि गंगनहर में पोस्टमार्टम कराते हुए उसने खुद को मृतका का पति व अपने पिता को मृतका का ससुर बताया था। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने मामले में पैरवी करते हुए आरोपित के दोस्त व मुंशी सहित कुल 20 गवाह पेश किये और यह भी बताया कि आरोपित व मृतका दोनों ने प्रेम विवाह किया था और दोनों की यह दूसरी शादी थी। अभियोजन पक्ष को स्वीकार करते हुए अदालत ने उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 201 व 498 के तहत दोष साबित हो गया। घटना के बाद पकड़े जाने के बाद से आरोपित को उच्च न्यायालय से भी जमानत नहीं मिली थी। अलबत्ता व पेरोल पर बाहर था। दोष साबित होने के बाद उसे जेल भेज दिया गया।

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नवीन समाचार, हल्द्वानी, 15 नवंबर 2019। प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जिला एवं सत्र न्यायालय हल्द्वानी की अदालत ने हल्द्वानी निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता भाष्कर बृजवासी को तीन वर्ष की जेल एवं जुर्माने की सजा सुनाई है। उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास व चार हजार रुपए अर्थदंड तथा अर्थदंड न चुकाने पर तीन माह के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही भाष्कर एवं उनके भाई शेखर बृजवासी व दीपू उर्फ दीप चंद्र पांडे को धारा 323, धारा 342, धारा 504 व धारा 506 के तहत अलग-अलग 3-3 माह के सश्रम कारावास व 1-1 हजार रुपए अर्थदंड और अर्थदंड न चुकाने पर 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास तथा धारा 384 के तहत 2-2 वर्ष के सश्रम कारावास व 2-2 हजार रुपए अर्थदंड और अर्थदंड न चुकाने पर 1-1 माह के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा सुनाई है।
मामले के अनुसार पीड़ित हरीश मेहरा ने क्षेत्राधिकारी हल्द्वानी को तहरीर देकर कहा था कि आरोपित भाष्कर बृजवासी ने 28 जनवरी 2005 को डिग्री कॉलेज हल्द्वानी के चपरासी बिट्ठन के साथ नगर पालिका कार्यालय के समक्ष मारपीट व गाली गलौच की थी। बिट्ठन ने इसकी रिपोर्ट थाना हल्द्वानी में दर्ज कराई थी। मेहरा इस मामले में चश्मदीद गवाह था। इसके बाद 25 मार्च 2005 को सुबह करीब साढ़े नौ बजे मेहरा के पास दीपू उर्फ दीप चंद्र पांडे व एक अन्य लड़का स्कूटर से आये तथा भाष्कर के भाई शेखर बृजवासी द्वारा बिट्ठन वाले मामले में बातचीत के लिए बुलाने की बात कह साथ चलने को कहा, और मना करने पर दीपू ने मेहरा को थप्पड़ मारकर जबर्दस्ती स्कूटर पर भाष्कर बृजवासी के घर ले गए। घर पर भाष्कर व शेखर ने बिट्ठन मामले में गवाही न देने को कहते हुए मारपीट की थी। पूर्व में आरोपितों को इस मामले में सिविल जज-न्यायिक मजिस्ट्रेट हल्द्वानी ने आरोपों से दोषमुक्त कर दिया था। इस आदेश पर की गई अपील पर प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जिला एवं सत्र न्यायालय हल्द्वानी की अदालत से ताजा फैसला आया है।

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-नैनीताल जनपद के अनुसूचित जाति के करीब 28 छात्रों के नाम पर करीब 20 लाख रुपए के चेक फर्जी तरीके से हड़पने का है आरोप
नवीन समाचार, नैनीताल, 7 नवंबर 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण राजीव कुमार खुल्बे के न्यायालय ने प्रदेश के बहुचर्चित दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले में आरोपित की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
बृहस्पतिवार को मामले में आरोपित की जमानत अर्जी का अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने मामले के बारे में बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश पर आईजी एसआईटी द्वारा गठित एसआईटी के सदस्य काठगोदाम थाने के प्रभारी दान सिंह मेहता पुत्र लक्ष्मण सिंह मेहता ने गत 26 सितंबर को थाना भीमताल में तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई है। एसआईटी को जांच में प्रकाश में आया कि 2011-12 में समाज कल्याण विभाग नैनीताल के द्वारा यूपी के हापुड़ स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी को 28 छात्रों की 20 लाख 63 हजार 900 रुपए की छात्रवृत्ति के चेक प्रेषित किये गये। मामले में बिचौलिये अंकित अग्रवाल पुत्र सुनील अग्रवाल निवासी राधा गोविंद कॉलेज चंदोसी रोड मुरादाबाद के साथ ही राकेश, जोगेंदर, अनुज, सचिन, समाज कल्याण विभाग के अधिकारी व आदि कर्मचारियों तथा संबंधित बैंक कर्मियों के खिलाफ भादंसं की धारा 420, 466, 467, 468, 471, 120 बी के तहत थाना भीमताल में नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जांच में प्रकाश में आया कि बिचौलिये अंकित के खिलाफ प्रदेश के थाना जसपुर में भी इन्ही धाराओं में मामला पंजीकृत हुआ है। जांच में आशा आर्या, प्रमोद कुमार, किरन, दिवाकर, राम चंद्र, अजय आर्या, अरविंद कुमार आदि ने पूछताछ में मोनाड यूनिवर्सिटी के संबंध में किसी जानकारी अथवा वहां पढ़ने से ही इंकार किया। बृहस्पतिवार को आरोपित अंकित की जमानत अर्जी का विरोध करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि आरोपित ने नैनीताल जनपद के युवाओं के प्रमाण पत्र लेकर उनके फर्जी प्रवेश मोनाड विवि में कराए थे और उनके नाम के बैंकों में फर्जी खाते खोलकर उनके नाम की छात्रवृत्ति फर्जी तरीके से प्राप्त कर ली थी।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 4 नवंबर 2019। बीते माह 7 अक्टूबर को हल्द्वानी के बनभूलपुरा थाना क्षेत्र स्थित लाइन नंबर 12 की मीट मार्केट में बनभूलपुरा थाने के उप निरीक्षक मंगल सिंह नेगी की अगुवाई में गए पुलिस बल ने ताजिम कुरैशी को एक दुधारू गाय को काटते हुए पकड़ा था। इस मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने आरोपित की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि आरोपित द्वारा वीभत्स तरीके से काटी गाय के थनों से काफी दूध भी बह रहा था। आरोपित गाय का मीट भैंस के मीट के साथ बेचता था। उससे काफी मात्रा में गौमांश एवं गाय को काटने में प्रयुक्त छुरी आदि हथियार भी बरामद हुए। गाय आवारा लग रही थी, जो पन्नी भी खाती थी। आरोपित पुलिस से बचकर भाग गया था, हालांकि उसे भागते हुए पहचान लिया गया था और बाद में पकड़ लिया गया था। इस पर न्यायालय ने आरोपित की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 4 अक्टूबर 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने बिजली चोरी के आरोप में हल्द्वानी के इमरान नाम के व्यक्ति को विद्युत अधिनियम के अधीन दोषी पाते हुए एक वर्ष के कारावास तथा 5 लाख 25 हजार 199 रुपए की धनराशि अदा करने की सजा सुनाई है। इमरान पर मीटर से पहले बिजली की केबल काटकर उससे मोमबत्ती बनाने की फैक्टरी चलाने का आरोप है।
मामले के अनुसार विद्युत वितरण उप खंड द्वितीय हल्द्वानी के अवर अभियंता बंशीधर डालाकोटी ने थाना बनभूलपुरा में फरजाना, मोहम्मद नाजिका, मो. आरिफ व इमरान को 8266 वाट की विद्युत चोरी करते पकड़कर उनके विरुद्ध विद्युत अधिनियम की धारा 135 के तहत 23 फरवरी 2017 को मुकदमा दर्ज कराया था। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने पैरवी करते हुए पांच साक्षी पेश किये, जिसके फलस्वरूप इमरान दोषी सिद्ध हुआ, और उसे शुक्रवार को सजा सुनाई गई।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 1 अक्तूबर 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने अपने पति से अलग जीजा के साथ रह रही महिला की हत्या के आरोप में बंद उसके जीजा की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। आरोपित जीजा सोनू सैनी पुत्र पूरन सिंह सैनी निवासी चोरपानी स्टोन क्रेसर के पीछे रामनगर की जमानत अर्जी का मंगलवार को न्यायालय में विरोध करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि मृतका जन्नत उर्फ निखत अंसारी की शादी भजनपुरा दिल्ली निवासी अंकित शर्मा से हुई थी, किंतु पांच-छह दिन ही पति के साथ रहने के बाद वह नवंबर 2018 से पति से अलग अपने जीजा सोनू सैनी के पास रह रही थी।

इधर जून 2019 में पुलिस को एक अज्ञात महिला का शव बरामद किया गया। उसके शव के इश्तिहार को देखकर उसके पति ने 22 जून को उसकी शिनाख्त की। पति की तहरीर पर मृतका के जीजा सोनू व उसके साले गुड्डू के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 व 201 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ। मामले में आरोपित स्वयं अपना जुर्म कबूल कर चुका है कि उसने घटना के दिन मृतका के साथ शराब पी थी। इस दोरान दोनों के बीच झगड़ा होने पर सोनू ने जन्नत को पहले पटका और गिरने पर बिजली के तार से उसका गला घोंटा और मरने पर उसे रेलवे लाइन पर डाल दिया और उसकी पहचान छुपाने के लिए उसके मुंह पर कपड़ों में पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी। हत्या में प्रयुक्त तार आदि भी आरोपित से बरामद हो चुके हैं, लिहाजा उसे जमानत नहीं दी जा सकती।

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-जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने जमानत अर्जी की खारिज
नवीन समाचार, नैनीताल, 19 सितंबर 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार खुल्बे की अदालत ने हल्द्वानी के दो बैंकट हॉल संचालकों-भूपेंद्र मेहरा पत्र बीरेंद्र मेहरा निवासी जीतपुर निगल्टिया लामाचौड़ हल्द्वानी व विशाल मेहरा पुत्र जगमोहन मेहरा निवासी जगतपुर थाना चोरगलिया गौलापार हल्द्वानी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए न्यायालय को बताया कि दोनों ने ओम प्रकाश उर्फ पप्पू मौर्य निवासी दमुवाढूंगा से बैंकट हॉल के गार्डन में दो लाख 25 हजार रुपए का कार्य कराने के बावजूद उसे पैंसे नहीं दिये। ऐसे में ओम प्रकाश को दूसरों से उधार पैंसे लेकर कार्य कराना पड़ा। बावजूद पैंसे मांगने पर उसके साथ मारपीट की। इस कारण ओम प्रकाश ने गत 25 जुलाई माह में जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। दलीलों को सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपितों की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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