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एडीएम हरबीर सिंह ने संभाला जिला विकास प्राधिकरण सचिव पद का अतिरिक्त कार्यभार

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नैनीताल, 9 2018। जनपद के अपर जिलाधिकारी हरबीर सिंह ने शुक्रवार को नैनीताल जिला विकास प्राधिकरण के सचिव पद का अतिरिक्त कार्यभार संभाल लिया। वे दिन में प्राधिकरण के कार्यालय पहुंचे और कामकाज निपटाया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि प्राधिकरण के सचिव के रूप में मिले दायित्व का ईमानदारी से निर्वाह किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि श्री सिंह इससे पूर्व जनवरी माह से दो बार इस पद का दायित्व पहले भी संभाल चुके हैं, किंतु तत्कालीन नाटकीय परिस्थितियों में वे इस पद पर कार्य आगे बढ़ा नहीं पाए। अब उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उम्मीद की जा रही है कि उनका कार्यकाल ‘निशंक’ होगा।

नैनीताल जिला प्राधिकरण सचिव पद पर यथास्थिति समाप्त, हरबीर होंगे सचिव

श्रीश कुमार

-निवर्तमान सचिव श्रीश कुमार की याचिका पर होती रहेगी सुनवाई
नैनीताल, 9 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने नैनीताल जिला विकास प्राधिकरण के सचिव पद पर एकलपीठ के यथास्थिति संबंधित आदेश को खारिज कर दिया है। अलबत्ता, सचिव श्रीश कुमार द्वारा दायर याचिका को अभी जारी रखा है। मामले की सुनवाई दो दिन बात होगी। इस आदेश के बाद प्राधिकरण के सचिव श्रीश कुमार को सरकार द्वारा पटवारी प्रशिक्षण संस्थान अल्मोड़ा के लिए किए गये स्थानांतरण और जनपद के एडीएम हरबीर सिंह को नैनीताल जिला विकास प्राधिकरण के सचिव पद का अतिरिक्त कार्यभार देने का आदेश का आदेश प्रभावी हो गया है।

मामले के अनुसार राज्य सरकार ने नैनीताल विकास प्राधिकरण के सचिव श्रीश कुमार का स्थानांतरण 10 जनवरी 2018 को एसडीएम चमोली के पद पर कर दिया था, जिसमे बाद में संशोधन करते हुए उन्हें पटवारी प्रशिक्षण संस्थान अल्मोड़ा का अधिशासी निदेशक नियुक्त कर दिया था। सरकार के इस आदेश को श्रीश कुमार ने उच्च न्यायालय में चुनोती देते हुए कहा कि उनका पे-ग्रेड 7600 के कैडर का है, जबकि उन्हें इससे निचले कैडर के पद पर भेजा जा रहा है। इसके अलावा याचिका में कहा गया था कि देहरादून व हरिद्वार विकास प्राधिकरण में सचिव को पूर्ण चार्ज दिया गया है, किन्तु नैनीताल जिला विकास प्राधिरकण के सचिव का चार्ज एडीएम को दिया गया है, जो नियम विरुद्ध है। इसके अलावा चार जिलो में सचिव को नियमावली के अनुसार और 9 जिलों में पदेन व्यवस्था के तहत रखा गया है। सरकार की ओर से न्यायालय में कहा गया कि श्रीश कुमार का स्थानांतरण जनहित में किया गया है। मामले को सुनने के बाद मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ ने पूर्व में उक्त स्थानांतरण पर जारी यथास्थिति के अंतरिम आदेश को खारिज कर दिया।

पूर्व आलेख : प्राधिकरण सचिव पद पर 7 मार्च तक यथास्थिति बरकरार
नैनीताल, 6 मार्च, 2018। नैनीताल जिला विकास प्राधिकरण के सचिव पद को लेकर दायर याचिका पर मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ और न्यायमूर्ति शरद शर्मा की खंडपीठ में सुनवाई हुई। इस दौरान प्राधिकरण के सचिव श्रीश कुमार की ओर से उनके अधिवक्ता ने न्यायालय में न्यायालय द्वारा मांगा गया प्रति शपथ पत्र पेश कर दिया। इसके बाद खंडपीठ नेे मामले की सुनवाई के लिए बुधवार सात मार्च की तिथि निश्चित कर दी। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व 21 फ़रवरी को उत्तराखंड उच्च न्यायालय की अवकाशकालीन पीठ के बाद यह मामला मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ और न्यायमूर्ति शरद शर्मा की खंडपीठ में पहुंच गया था। खंडपीठ ने मामले की सुनवाई कर याची पक्ष को सरकार के प्रतिशपथ पत्र पर जवाब देने के लिए समय देते हुएअगली सुनवाई के लिए 6 मार्च की तिथि तय कर दी थी।

राष्ट्रीय सहारा, 22 फ़रवरी 2018

उल्लेखनीय है कि प्राधिकरण के सचिव पद से अल्मोड़ा पटवारी ट्रेनिंग कॉलेज भेजे गए श्रीश कुमार की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सरकार के तबादला आदेश को चुनौती दी गई है। याचिका में उन्हें अनुमन्य पे-स्केल नहीं दिए जाने को भी शामिल किया गया है। पिछली सुनवाई पर एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान यथास्थिति के आदेश दिए थे, तब से सरकार व याची दोनों इसको अपने पक्ष में बता रहे हैं। इधर सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता परेश त्रिपाठी ने बुधवार को फिर से इस बारे में पक्ष रखा। इसमें बताया गया कि 10 जनवरी को श्रीश कुमार का अल्मोड़ा तबादला हो गया था। इस बीच 11 जनवरी को एडीएम हरबीर सिंह ने शासन के आदेश पर चार्ज संभाल लिया था। इस बीच श्रीश कुमार 23 जनवरी तक अवकाश पर चले गए थे।  19 जनवरी को अदालत ने यथास्थिति के आदेश दिए। वहीं बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि याची का कदम पूरी तरह वैधानिक है। सरकार के प्रतिशपथ पत्र का जवाब देने के लिए उन्हें समय दिया जाय। इस पर संयुक्त खंडपीठ ने एक सप्ताह का समय देते हुए अगली सुनवाई के लिए 6 मार्च की तिथि तय की है।

पेड़ पर चढ़ते हुए यथास्थिति मतलब चढ़ते जाना नहीं
नैनीताल। अदालत में सुनवाई के दौरान ‘यथास्थिति’ के संबंध में एक टिप्पणी पर माहौल हल्का होने के साथ इस शब्द पर भी रोशनी पड़ी। कहा कि किसी व्यक्ति के पेड़ पर चढ़ते हुए या दौड़ते हुए ‘यथास्थिति’ के आदेश दिये जाने का मतलब यह नहीं है कि वह अगले आदेश तक पेड़ पर चढ़ता या दौड़ता चला जाए। इस पर न्यायालय में देर तक ठहाके भी लगे।

उल्लेखनीय है कि श्रीश कुमार इस पद पर पहले से थे, और उनके कार्यभार छोड़े बिना दूसरे अधिकारी एडीएम हरवीर सिंह ने दो बार (बिना किसी से, और बिना प्रोपर चैनल, व्हाट्स एप पर आये शासनादेश के जरिये) कार्यभार ग्रहण कर लिया था, और पहली बार कार्यभार ग्रहण करने से ही मुकरने की स्थितियों के बाद उन्हें लगातार दूसरी बार भी फिर वैसी ही स्थितियों से उन्हें दो-चार होना पड़ गया है। खासकर तब, जबकि उच्च न्यायालय के ‘यथा स्थिति’ के आदेश के बाद इस पद पर रहे श्रीश कुमार ने कहा है कि उन्होंने कार्यभार छोड़ा ही नहीं है। वे अवकाश पर थे।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड शासन ने नवंबर माह में नैनीताल झील क्षेत्र विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (झील विकास प्राधिकरण) को प्रोन्नत करते हुए राज्य के सभी जिलों के साथ जिला विकास प्राधिकरण के रूप में प्रोन्नत कर दिया गया था। तब वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी श्रीश कुमार झील विकास प्राधिकरण के सचिव थे। नये आदेश में सभी जिलों में वहां के अपर जिला अधिकारियों को जिला विकास प्राधिकरण के आदेश हुए तो एडीएम हरवीर सिंह ने तुरंत ही बिना जिले में सरकारी आदेश पहुंचे ‘ह्वाट्सएप’ पर आए आदेशों के आधार पर ही जिला प्राधिकरण के सचिव पद का कार्यभार ग्रहण कर लिया। लेकिन यह बात प्राधिकरण के कक्ष से बाहर निकली ही थी कि उन्हें तत्काल ही कार्यभार ग्रहण करने से ही मुकरना पड़ गया, और श्रीश कुमार अपने पद पर बने रहे। इधर प्रदेश में हुए पीसीएस अधिकारियों के स्थानांतरण में कुमार को उनकी वरिष्ठता को नजरअंदाज करते हुए चमोली का डिप्टी कलेक्टर और एडीएम हरवीर सिंह को उनके मौजूदा दो पदों के साथ ही जिला विकास प्राधिकरण का साफ तौर पर सचिव बना दिया गया। इस आदेश के बाद कुमार बिना कार्यभार छोड़े अवकाश पर चले गये, और इसके तुरंत बाद ही सिंह ने प्राधिकरण के सचिव पद का कार्यभार ग्रहण कर लिया। हमने तभी आज घटित होने वाले घटनाक्रमों की संभावना जाहिर कर दी थी। अलबत्ता, उधर प्रशासनिक हलकों में वरिष्ठ अधिकारी कुमार को कनिष्ठ स्तर के पद पर तैनाती का मामला पीसीएस अधिकारियों के संगठन के स्तर से भी शासन में उठा, तो उनसे खार खाए शासन ने उन्हें अल्मोड़ा स्थित राजस्व पुलिस एवं भूलेख सर्वेक्षण प्रशिक्षण संस्थान का अधिशासी निदेशक बना दिया। इधर शुक्रवार को कुमार ने अपने इन दोनों स्थानांतरणों को उनकी वरिष्ठता से कमतर बताते हुए और अवैध निर्माणकर्ताओं के खिलाफ चलाये गए अभियान के दृष्टिगत और उनकी जगह कनिष्ठ अधिकारी की तैनाती बताते हुए उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की अवकाशकालीन एकल पीठ के समक्ष चुनौती दी तो पीठ ने ‘यथास्थिति’ के आदेश दे दिये। हालांकि इस आदेश में अस्पष्टता भी बतायी गयी। क्योंकि कुमार जिला प्राधिकरण के सचिव पद का कार्यभार छोड़े बिना अवकाश पर हैं, और सिंह इस पद का कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं। ऐसे में क्या यथास्थिति यही रहेगी। वहीं कुमार ने पूछे जाने पर साफ कहा कि वे शनिवार को उच्च न्यायालय का आदेश लेकर अवकाश से कार्य पर लौट जाएंगे।

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