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उत्तराखंड के इतिहास में मोदी की सुनामी में बह गए उत्तराखंड के कई मिथक

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नवीन समाचार, नैनीताल, 24 मई 2019। इस बार लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उत्तराखंड की पांचों सीटों पर शानदार प्रदर्शन किया। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के साथ ही प्रदेश में कई मिथक इस बार मोदी सुनामी में बह गए। उल्लेखनीय है कि नैनीताल के नवागत सांसद अजय भट्ट के साथ यह दुर्योय युक्त मिथक जुड़ा था कि वे जब भी अपनी परंपरागत रानीखेत सीट से जीते, तब-तब उनकी पार्टी भाजपा की राज्य में सरकार नहीं बनी, और जब-जब हारे, तब-तब भाजपा की सरकार बनी। किंतु सीट बदलते और लोक सभा चुनाव लड़ते ही यह मिथक अजय भट्ट तोड़ चुके हैं। अब वे स्वयं भी प्रचंड बहुमत से जीते हैं, और उनकी पार्टी की भी प्रचंड बहुमत से जीत के बाद केंद्र में सरकार बनने की महज औपचारिकता शेष है। वहीं नैनीताल लोक सभा सीट के साथ एक अन्य, यह मिथक भी जुड़ा था कि जिस पार्टी के प्रत्याशी नैनीताल से जीतते हैं, उसी पार्टी की सरकार केंद्र में बनती है। यानी नैनीताल हमेशा केंद्र की राजनीति के साथ कदमताल करता है। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। नैनीताल से भाजपा जीती है, और इसी पार्टी की केंद्र में सरकार बनने जा रही है।

इसी तरह पहली बार, प्रदेश में सत्ता संभाल रही पार्टी बीजेपी ने वर्ष 2014 के अपने प्रदर्शन को दोहराते हुए क्लीन स्वीप किया और प्रदेश में पड़े कुल मतों में से 61 फीसदी से ज्यादा वोट उसके पक्ष में गए। सभी सीटों पर बीजेपी प्रत्याशी रेकॉर्ड मतों के अंतर से जीते। पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ने वाले बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने नैनीताल सीट पर दिग्गज कांग्रेस नेता हरीश रावत को 3.40 लाख मतों के अंतर से पटखनी दी जबकि अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ रहे तीरथ सिंह रावत ने पौड़ी गढ़वाल सीट पर बतौर कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव लड़ने वाले वरिष्ठ बीजेपी नेता भुवन चंद्र खंडूरी के पुत्र मनीष खंडूरी को तीन लाख से ज्यादा मतों से हराया। 

वहीँ टिहरी से मालाराज्य लक्ष्मी शाह ने तीन लाख से ज्यादा मतों से, हरिद्वार में रमेश पोखरियाल निशंक ने 2.58 लाख और अल्मोड़ा से अजय टम्टा ने 2.32 लाख मतों के अंतर से अपने प्रतिद्वंदियों को मात दी। इससे पहले कभी प्रदेश में सत्ताधारी पार्टी लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। वर्ष 2014 में जब बीजेपी ने पांचों सीटें जीती थीं तब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। वर्ष 2009 के आम चुनावों में राज्य की पांचों लोकसभा सीटों पर कांग्रेस को विजय हाथ लगी थी और उस समय प्रदेश में बीजेपी की सरकार थी। वर्ष 2004 के आम चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस के कार्यकाल के समय बीजेपी के हाथ तीन सीटें लगी थीं जबकि एक सीट कांग्रेस और एक समाजवादी पार्टी ने जीती थी। टिहरी सीट पर तत्कालीन टिहरी रियासत की महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह की यह लगातार तीसरी जीत है। यहां कहा जाता है कि भगवान बदरीनाथ के कपाट बंद रहने के दौरान मतदान होने पर टिहरी राजपरिवार के सदस्य को चुनावों में हार का सामना करना पड़ता है। इस बार उत्तराखंड में 11 अप्रैल को मतदान हुआ था जबकि बदरीनाथ के कपाट 10 मई को श्रद्धालुओं के लिए खुले थे। प्रदेश बनने के बाद हरिद्वार सीट से किसी भी सांसद के लगातार दो बार नहीं जीत पाने का मिथक भी टूट गया। 2014 में यहां से सांसद चुने गए पूर्व मुख्यमंत्री रमेंश पोखरियाल निशंक ने शानदार तरीके से इस बार दोबारा विजय प्राप्त की। इस संबंध में एक राजनीतिक प्रेक्षक ने कहा, ‘इस बार देश में मोदी की सुनामी ऐसी आई जिसमें सभी मिथक बह गए। 

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-पौड़ी सांसद तीरथ सिंह रावत को छोड़कर राज्य के पांच में से चार सांसद बताये जा रहे दावेदार, पर अजय भट्ट दावेदारी में सबसे आगे..
नवीन समाचार, नैनीताल, 24 मई 2019। लोक सभा चुनाव में भाजपा को मिली प्रचंड जीत के बाद आगे प्रदेश के सांसदों को मंत्री पद मिलने पर भी कयास लगने प्रारंभ हो गये हैं। पहली बार चुनाव लड़े व बड़े अंतर से जीते पौड़ी गढ़वाल के सांसद तीरथ सिंह रावत को छोड़कर राज्य के पांच में से चार सांसदों को केंद्र में मंत्री पद का दावेदार बताया जा रहा है। इनमें भी नैनीताल के सांसद अजय भट्ट का दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है। कारण, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं पार्टी अध्यक्ष अमित शाह तक भट्ट की सीधी पहुंच है। उन्हें 2017 के विधानसभा चुनाव में स्वयं की सीट हारकर भी पार्टी को 70 में से 53 सीटें जीतने का निकार्ड बनाने का श्रेय भी दिया जाता है। वे पूर्व में राज्य विधानसभा में उप नेता एवं नेता प्रतिपक्ष सहित स्वास्थ्य मंत्री आदि कमोबेश सभी पदों का दायित्व संभाल कर संसदीय एवं विधायी ज्ञान भी रखते हैं। वहीं इस लोक सभा चुनाव में उन्होंने जिस तरह राज्य में कांग्रेस के सबसे मजबूत प्रत्याशी बताये जा रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व मुख्यमंत्री के विरुद्ध राज्य में इस चुनाव ही नहीं अब तक के इतिहास में इस सीट पर सर्वाधिक सात लाख 72 हजार 195 यानी कुल मतों के 61.35 फीसद वोट प्राप्त किये और तीन लाख 39 हजार 96 वोटों के रिकार्ड अंतर से हराया है, और पिछली बार इस सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी के दो लाख 84 हजार 717 वोटों से जीत के रिकार्ड को भी तोड़ दिया है। उनके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते हरिद्वार सांसद डा. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, पिछली बार भी केंद्र में मंत्री रहे व दलित वर्ग से आने के नाते अल्मोड़ा के सांसद अजय टम्टा और दो बार की सांसद होने के नाते टिहरी की सांसद माला राज्य लक्ष्मी के भी केंद्र में मंत्री बनने की उनके प्रशंसक उम्मीद कर सकते हैं। अलबत्ता, इस बारे में अजय भट्ट का कहना है, ईश्वर की जैसी मर्जी होगी, वैसे देखेंगे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 23 मई 2019। भाजपा प्रत्याशी अजय भट्ट ने समाचार लिखे जाने तक नैनीताल लोक सभा क्षेत्र से प्रदेश में सर्वाधिक तीन लाख 35 हजार 670 वोटों की अजेय बढ़त हासिल कर ली है। उन्हें सात लाख 45 हजार 961 एवं दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत को चार लाख 24 हजार 729 वोट मिले हैं, जबकि तीसरे स्थान पर बसपा प्रत्याशी इं. नवनीत अग्रवाल को 28059 मिले हैं, जबकि चौथे स्थान पर नोटा यानी किसी को नहीं को 10 हजार 239 वोट मिले हैं। वहीं चार प्रत्याशियों-कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सवादी लेनिनिस्ट लिबरेशन के कामरेड डा. कैलाश पांडेय, बहुजन मुक्ति पार्टी के इं. ज्योति प्रकाश टम्टा, प्रगतिशील लोक मंच के प्रेम प्रसाद आर्य व निर्दलीय सुकुमार विश्वास को नोटा से भी कम वोट मिले हैं। उल्लेखनीय है कि 2014 के लोक सभा चुनाव में इस सीट पर कोश्यारी को कुल पड़े 11,01,435 मतों में से 57.78 फीसद यानी 6,36,669 मत मिले, जबकि उनके विरोध में अन्य सभी प्रत्याशियों को मिलकार 4,64,666 वोट ही मिले थे। वहीं इस बार भाजपा प्रत्याशी भट्ट को कुल पड़े 12 लाख 22 हजार 803 वोटों में से सात लाख 45 हजार 961 यानी 61 फीसद यानी पिछली बार से 3.22 फीसद अधिक वोट मिले हैं। यह तभी संभव है जब भट्ट ने किसी एक जाति, धर्म या क्षेत्र विशेष के वोट ही हासिल किये हों, अथवा किसी खास जाति, धर्म या क्षेत्र विशेष के वोट हासिल न किये हों। राजनीतिक विश्लेषकों के द्वारा खासकर यह भी माना जा रहा था कि मुस्लिम मतदाता बहुल जसपुर, किच्छा, खटीमा, हल्द्वानी व बाजपुर विधानसभाओं में भट्ट कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत से पीछे रह सकते हैं, लेकिन ऐसी सभी आशंकाएं निराधार साबित हुई हैं।

नैनीताल विधानसभा से 10 हजार वोटों से जीते..

नैनीताल।उत्तराखंड एवं कुमाऊं मंडल की सर्वप्रमुख नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोक सभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट एवं कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री के बीच जितने कांटे के मुकाबले की उम्मीद की जा रही थी, उतनी मतगणना के दौरान नहीं दिखी। बल्कि आंकड़े राउंड-दर-राउंड किस्मत के धनी अजय भट्ट को ‘अजेय’ बनाने की ओर बढ़ते दिखाई दिये। नैनीताल विधानसभा की बात करें तो पहले राउंड में भाजपा प्रत्याशी अजय भट्ट को 2160 व कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत को 1571 वोट मिले यानी पहले राउंड के कुल 3998 वोटों में करीब 504 फीसद वोट भट्ट को तो 39 फीसद वोट रावत को मिले। वहीं दूसरे राउंड में भट्ट को 2766 और रावत को 1601 वोट मिले और यहां तक भट्ट को 4926 व रावत को 3172 वोट मिल चुके थे। आगे तीसरे राउंड में भट्ट को 2630 तथा रावत को 1497 वोट मिले एवं यहां तक भट्ट को 7556 व रावत को 4669 वोट मिल चुके थे।
वहीं चौथे राउंड में भट्ट को 2663 एवं रावत को 1805 वोट मिले एवं चौथे राउंड तक भट्ट को 10219 एवं रावत को 6474 वोट मिल चुके थे। वहीं पांचवे राउंड में अजय भट्ट को 2490 व हरीश रावत को 1310 वोट मिले, एवं पांचवे राउंड तक भट्ट के 12709 एवं रावत के 7784 वोट मिले। सातवें राउंड में रावत कुछ हद तक भट्ट के करीब पहुंचे, किंतु पीछे ही रहे। इस राउंड में भट्ट को 2594 व रावत को 2518 वोट मिले और यहां तक भाजपा के वोटों की संख्या रावत के 12465 के मुकाबले करीब डेढ़ गुना यानी 18134 हो गयी। आठवें राउंड में भट्ट को 2973 व रावत को 2683 वोट मिले व यहां तक भट्ट को मिले वोटों की संख्या 21107 व रावत के वोटों की संख्या 15148 हो गयी। वहीं नौवें राउंड में भट्ट को 2839 व रावत को 2440 वोट मिले एवं यहां तक भट्ट के वोटों की संख्या 23946 व रावत के वोटों की संख्या 17588 हो गयी थी। जबकि 11वें राउंड में भट्ट को 2777 तथा रावत को 1501 वोट मिले एवं यहां तक भट्ट को 29663 व रावत को 21291 वोट मिल चुके थे। जबकि 12वें राउंड में भट्ट को 2629 व रावत को इसके एक तिहाई से भी कम 834 वोट मिले एवं यहां तक भट्ट को 32292 व रावत को 22125 वोट मिले। इस प्रकार नैनीताल विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी की जीत का अंतर 10 हजार 167 वोटों का रहा।

भीमताल से 15109 वोटों से जीते भट्ट, चौथे राउंड में तीन गुना अधिक वोट हासिल कर चुके थे

भीमताल विधानसभा में पहले राउंड में भाजपा प्रत्याशी अजय भट्ट को 2442 व कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत को 2064 वोट मिले, वहीं दूसरे राउंड में भट्ट को 2765 व रावत को 1018 यानी करीब एक तिहाई वोट मिले एवं यहां तक दो राउंड में भाजपा के वोटों की संख्या 5207 व कांग्रेस प्रत्याशी को 3082 वोट मिल चुके थे। आगे तीसरे राउंड में भट्ट को 2770 व रावत को 1486 वोट मिले एवं यहां तक भट्ट को 7977 तथा रावत को 4568 वोट मिल चुके थे। वहीं चौथे राउंड में भट्ट को 4431 व रावत को 2019 वोट मिले और चौथे राउंड तक भट्ट को 19489 व रावत को 6319 वोट मिल चुके थे, और यहां तक भट्ट को मिले वोट रावत के मुकाबले तीन गुने हो गये थे। पांचवे राउंड में भट्ट को 2177 व रावत को 1268 वोट मिले एवं यहां तक भट्ट को मिले वोटों की संख्या 12334 तथा रावत के वोटों की संख्या 6419 यानी अंतर करीब दोगुने से थोड़े कम का हो गया था। वहीं छठे राउंड में भट्ट को 1922 जबकि रावत को आधे से भी कम 863 वोट मिले और यहां तक भट्ट को 14256 व रावत को 7282 वोट मिले थे, और दोनों के वोटों का अंतर दो गुने का रहा। सातवें राउंड में भट्ट को 3058 व रावत को 2846 वोट मिले एवं यहां तक भाजपा के वोटों की संख्या 17314 एवं कांग्रेस के वोटों की संख्या 10128 हो गयी थी। आठवें राउंड में अजय भट्ट को 2919 व हरीश रावत को 1883 वोट मिले। इसके साथ आठवें राउंड तक भट्ट के वोटों का जोड़ 20233 एवं रावत को 12011 वोट हो गया था। वहीं नौवें राउंड में भाजपा प्रत्याशी अजय भट्ट को 2312 व हरीश रावत को 1702 वोट मिले, जिसके बाद नौवें राउंड में भट्ट के वोटों का जोड़ 22545 एवं रावत के वोटों का जोड़ 13713 हो गया। 11वें राउंड में भट्ट को 3419 व रावत को 2024 वोट मिले एवं यहां तक भट्ट के वोटों की संख्या 28888 व रावत की 17539 हो गयी। 12वें राउंड में भट्ट को 3475 व रावत को 1231 वोट मिले और यहां तक भट्ट को 32363 तथा रावत को 18770 वोट हो चुके थे। वहीं 13वें राउंड में भट्ट को 2020 व रावत को 954 वोट मिले एवं यहां तक भट्ट को 34383 व रावत को 19724 वोट मिल चुके थे। इस प्रकार भीमताल विस से भाजपा प्रत्याशी की जीत का आंकड़ा 15109 वोटों का रहा।

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मैं भी चौकीदार

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 19 मई 2019। लोकसभा चुनाव के सातवें और आखिरी चरण का मतदान रविवार शाम समाप्त होते ही एग्जिट पोल्स के अनुमान बीजेपी के लिए अच्छी खबर लेकर आए हैं। पहले पोल ऑफ पोल्स (Poll of Polls) के जरिये चुनाव परिणाम का अनुमान लगाया जाता है. NDTV के ‘पोल ऑफ पोल्स’ के अनुसार NDA 303+, कांग्रेस  126+ और अन्य को 113+ सीटें मिलती दिख रही हैं। वहीं न्यूज चैनल टाइम्स नाउ और वीएमआर द्वारा कराए गए एग्जिट पोल की मानें तो बीजेपी की अगुआई वाला NDA सत्ता में शानदार तरीके से वापसी कर रहा है। मोदी लहर के आगे ऐंटी-इनकंबेंसी फैक्टर धराशायी हो गया और बिखरा दिख रहा विपक्ष मौजूदा सरकार की सत्ता को हिलाने में नाकाम रहा। गौर करने वाली बात यह है कि यूपी में महागठबंधन भी कोई चुनौती दे पाने में नाकाम साबित होता दिख रहा है। विपक्ष के तमाम आरोपों के बावजूद जनता ने NDA सरकार पर भरोसा जताया है। आंकड़ों से समझें तो टाइम्स नाउ के एग्जिट पोल के मुताबिक NDA को 542 में से 306 सीटें मिल सकती हैं जो बहुमत (272) के जादुई आंकड़े से काफी ज्यादा हैं। वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व वाले UPA को तगड़ा झटका लगता दिख रहा है। हाल के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस जबर्दस्त वापसी करती दिखी थी पर लोकसभा चुनावों में NDA के वोटबैंक को साधने में वह असफल रही। टाइम्स नाउ-VMR एग्जिट पोल के मुताबिक UPA 132 सीटों पर सिमटता दिख रहा है। अन्य दलों के खाते में 104 सीटें जाती दिख रही हैं।

एग्जिट पोल LIVE: किसकी बनेगी सरकार?

C-वोटर भी दे रहा NDA की वापसी के संकेत
सी-वोटर का एग्जिट पोल भी NDA की बहुमत वाली सरकार बनने के स्पष्ट संकेत दे रहा है। इसकी मानें तो बीजेपी की अगुआई वाला गठबंधन 287 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी कर रहा है। कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूपीए 128 सीटें हासिल कर सकता है। आपको बता दें कि अगर 23 मई को नतीजे इन एग्जिट पोल्स के अनुसार रहे तो केंद्र में पीएम नरेंद्र मोदी की अगुआई में NDA की सरकार आसानी से बन जाएगी।

महागठबंधन के बाद भी UP में बीजेपी बेहतर
कहते हैं कि दिल्ली की सत्ता यूपी से होकर जाती है। बीजेपी को 2014 का ऐतिहासिक जनमत दोहराने से रोकने के लिए इस बार यूपी में धुर विरोधी समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने हाथ मिला लिया था और साथ में अजित कुमार की RLD भी आ गई थी। राजनीतिक जानकार इस महागठबंधन को बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती मानकर चल रहे थे लेकिन टाइम्स नाउ-VMR एग्जिट पोल के मुताबिक यह गठजोड़ भी बीजेपी को झटका दे पाने में नाकाम साबित हो रहा है। इसके मुताबिक 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में बीजेपी अकेले 47 सीटें जीत सकती हैं और उसके सहयोगी दलों को 2 सीटें मिल सकती हैं, जिससे NDA के खाते में 49 सीटें जाती दिख रही हैं। यूपी में कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है और उसे पिछली बार की तरह ही मात्र 2 सीटें मिलती दिख रही हैं। अन्य दलों जिसमें महागठबंधन शामिल है, को 29 सीटें मिल सकती हैं।

जानिए, कब-कब कितने सही रहे हैं Exit Poll

UP में बीजेपी का बढ़ेगा वोट शेयर?
2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी+ को यूपी में 43.3 फीसदी वोट मिले थे। दिलचस्प यह है कि एसपी, बीएसपी और RLD के महागठबंधन के बावजूद सत्ताधारी NDA का वोट शेयर बढ़कर 44.8 फीसदी (+1.5%) तक पहुंच सकता है। तुलनात्मक रूप से देखें तो पिछली बार तीनों दलों को 42.65 फीसदी वोट मिले थे जबकि इस बार साथ लड़ने के बाद भी महागठबंधन का वोट शेयर घटा (40.2%) है।

बंगाल में TMC को झटका
यूपी के बाद जिन दो राज्यों में पीएम मोदी ने सबसे ज्यादा रैलियां कीं, उनमें पश्चिम बंगाल दूसरे नंबर पर रहा और चुनाव के दौरान हिंसा के कारण भी यह राज्य सुर्खियों में बना रहा। ऐसे में यहां के नतीजों पर देशभर की नजरें टिकी हैं। बीजेपी के दावे के अनुसार ही एग्जिट पोल में भी यहां उसके वोट शेयर में जबर्दस्त इजाफा होता दिख रहा है। 42 सीटों वाले इस राज्य में बीजेपी 11 सीटें जीतती दिख रही है। कांग्रेस को 2 और अन्य, जिसमें ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और लेफ्ट शामिल हैं, को 29 सीटें मिल सकती हैं। खास बात यह है कि पिछले चुनाव में बीजेपी को मात्र 2 सीटें मिली थीं और उसका वोट शेयर भी 16.8 फीसदा था। इस बार एग्जिट पोल के अनुमानों पर यकीन करें तो बीजेपी तृणमूल कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने में कामयाब रही है। 31.86 फीसदी वोटों के साथ BJP 9 सीटों के फायदे में दिख रही है। वहीं, राज्य में सरकार चला रही ममता बनर्जी की पार्टी TMC का वोट शेयर आंशिक रूप से ही सही पर घट सकता है। सीटों में भी पिछली बार की 34 में से उसे 6 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है।एग्जिट पोल्स क्या हैं? यहां जानिए 5 बड़ी बातें

बिहार में बीजेपी+ की घट सकती हैं सीटें
40 सीटों वाले बिहार में NDA की सीटें घट सकती हैं। यहां कांग्रेस की अगुआई वाले UPA को पिछले चुनाव की तुलना में सीधे तौर पर 5 सीटों का फायदा होता दिख रहा है। 42.78 फीसदी वोटों के साथ कांग्रेस+ को 15 सीटें मिल सकती हैं जबकि 2.98 फीसदी वोट शेयरों की कमी के साथ (48.52%) BJP+ को 25 सीटें मिल सकती हैं।

गुजरात, महाराष्ट्र में घटेंगी BJP की सीटें तो ओडिशा में इजाफा
टाइम्स नाउ-VMR सर्वे की मानें तो पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात में बीजेपी 4 सीटें गंवा सकती है। पिछली बार उसने सभी 26 सीटों पर फतह हासिल की थी लेकिन इस बार 4 सीटें कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही हैं। 48 लोकसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में बीजेपी+ ने पिछली बार 42 सीटें जीती थीं और कांग्रेस+ को 6 सीटें मिली थीं। हालांकि इस बार टाइम्स नाउ एग्जिट पोल के मुताबिक NDA को 38 सीटों (-4) से ही संतोष करना पड़ सकता है जबकि यही नुकसान UPA में बढ़त के तौर पर जुड़कर उसकी सीटों की संख्या 10 तक (+4) पहुंचा सकता है।

अब बात पीएम मोदी की सबसे ज्यादा रैलियों वाले प्रमुख राज्यों में तीसरे नंबर पर रहे ओडिशा (21) की। पिछली बार भले ही बीजेपी का यहां खाता ही खुल पाया था पर इस बार राज्य की सत्ता पर काबिज बीजेडी को मोदी-शाह की रणनीति ने तगड़ा नुकसान पहुंचाया है। टाइम्स नाउ के एग्जिट पोल की मानें तो BJD को पिछली बार की 20 सीटों की तुलना में 12 सीटों का नुकसान हो सकता है। वहीं, BJP एक सीटों से आगे बढ़कर इस बार 12 सीटें जीत सकती है। कांग्रेस के खाते में 1 सीट जाने की संभावना जताई गई है।

दिल्ली और MP भी समझ लीजिए
पिछले चुनावों में बीजेपी ने दिल्ली की सभी सातों सीटों पर कब्जा जमाया था। हालांकि इस बार कांग्रेस एक सीट जीतने में कामयाब हो सकती है। 29 सीटों वाले मध्य प्रदेश में 2014 में बीजेपी को 27 और कांग्रेस को 2 सीटें मिली थीं। इस बार राज्य की सत्ता भले ही कांग्रेस को मिल गई हो पर वह लोकसभा चुनावों में बीजेपी का ज्यादा नुकसान नहीं कर सकी है। टाइम्स नाउ की मानें तो इस बार BJP को 21 और कांग्रेस को 8 सीटें मिल सकती हैं।

यह भी पढ़ें : ‘सेल्फी’ के फेर में और फंसे 11, संख्या डेढ़ दर्जन के पार पहुंची…

नवीन समाचार, नैनीताल, 12 अप्रैल 2019। उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव के लिए हुए मतदान के दौरान आचार संहिता का उल्लंघन और मतदान की गोपनीयता भंग करते हुए ‘सेल्फी’ खींचना एक दर्जन से अधिक लोगों पर भारी पड़ने वाला है। राज्य निर्वाचन आयोग ने ऐसी गतिविधियों पर सख्ती दिखाते हुए राज्य के चार जिलों में 11 और लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर दिए हैं।
इनमें ऊधमसिंह नगर जिले के काशीपुर, रुद्रपुर, गदरपुर, दिनेशपुर व सुल्तानपुर में गंधर अग्रवाल, वेद ठुकराल, मोहन लाल, विकास गुप्ता व अकरम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। इन पर आरोप है कि उन्होंने मत डालते समय मोबाइल फोन से ईवीएम की फोटो व वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर जारी कर चुनाव की गोपनीयता को भंग किया। वहीं, नैनीताल जिले में तीन मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इसमें कपिल अग्रवाल के खिलाफ ईवीएम की फोटो खींचने, नशे की हालत में होने पर निर्वाचन कर्मचारी संजय पाटनी और विपिन पांडे पर भाजपा के चुनाव निशान को फेसबुक पर टैग करने पर मुकदमा दर्ज किया गया है। साथ ही हरिद्वार जिले में हरीश गर्ग व विपुल तथा पौड़ी में अनूप बहुगुणा पर मतदान की गोपनीयता भंग करने पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व हरिद्वार में भाजपा के जिला महामंत्री विकास तिवारी, लक्सर में नगरपालिका के अध्यक्ष अंबरीश गर्ग व सभासद अरविंद कल्याणी तथा पिथौरागढ़ एवं रामनगर में दो-दो लोगों के खिलाफ भी इन्ही कारणों से मुकदमे दर्ज किये गये हैं।

यह भी पढ़ें : खुशखबरी: डेढ़ फीसद बढ़ गया नैनीताल जिले का मतदान, संशोधित आंकड़े जारी, जानें कहाँ कितने पड़े वोट…

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p style=”text-align: justify;”>-नैनीताल जिले में हुआ 63.81 फीसद अधिक मतदान
नवीन समाचार, नैनीताल, 12 अप्रैल, 2019। जिला प्रशासन ने जनपद की विभिन्न विधानसभाओं में हुए मतदान के संशोधित आंकड़े पेश कर दिये हैं। संशोधित आंकड़े पूर्व के मुकाबले करीब डेढ़ फीसद अधिक होने की खुशखबरी लिये हुए हैं। इनके अनुसार नैलीताल जिले के नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोक सभा के अंतर्गत आने वाले भीमताल विधानसभा के 152 बूथों पर कुल 97719 मतदाताओं में से 58931 यानी 60.31 फीसद, हल्द्वानी विधानसभा में 168 बूथों पर 145575 मतदाताओं में से 90871 यानी 62.42 फीसद, कालाढुंगी में 189 बूथों पर 159768 मतदाताओं में से 106807 यानी 66.85, लालकुआं में 140 बूथों पर 115678 मतदाताओं में से 80317 यानी 69.43 फीसद, नैनीताल में 153 बूथों पर 109360 मतदाताओं में से सबसे कम 60457 यानी 55.28 फीसद एवं पौड़ी विधानसभा के अंतर्गत रामनगर विधान सभा में 141 बूथों पर 113166 मतदाताओं में से 75649 यानी 66.85 फीसद एवं कुल मिलाकर जनपद में 943 बूथों पर 741264 मतदाताओं में से 473033 यानी 63.81 फीसद मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व नैनीताल जनपद में मतदान का औसत प्रतिशत 62.33 प्रतिशत बताया गया था, जो कि अब बताये जा रहे मतदान प्रतिशत से 1.48 फीसद अधिक है।

पूर्व समाचार : कम रहा मतदान, नहीं लगी लाइनें, जानें कहाँ-कितना हुआ मतदान

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 11 अप्रैल, 2019। लोक सभा चुनाव के लिए बृहस्पतिवार को आम तौर पर सभी मतदान केंद्रों पर कोई भीड़भाड़ नहीं दिखाई दी। मतदाता मतदान को मतदान केंद्र पर आते और कमोबेश बिना लाइन में लगे मतदान करते नजर आये। शहरी क्षेत्रों में लाइनें केवल वहीं लगीं जहां ईवीएम में कोई समस्या रही। अलबत्ता, ग्रामीण क्षेत्रों में पूरे गांव के लोग दूसरे गांव स्थित मतदान केंद्र के लिए पूरे झुंड में जाते भी नजर आये। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस चुनाव में प्रदेश की टिहरी लोकसभा में 54.38 फीसद, पौड़ी में 49.85 फीसद, अल्मोड़ा में 48.78 फीसद, नैनीताल में 66.39 फीसद एवं हरिद्वार में 66.24 फीसद यानी कुल मिलाकर 57.85 फीसद मतदान हुआ, जबकि इससे पूर्व 2014 के लोक सभा चुनाव में टिहरी से 57.5, पौड़ी से 55.03, अल्मोड़ा से 53.22, नैनीताल से 68.89 एवं हरिद्वार से 71.02 यानी कुल मिलाकर 62.15 फीसद मतदान हुआ था। वहीं नैनीताल- ऊधमसिंह नगर लोकसभा के अंतर्गत नैनीताल जनपद की बात करें तो कालाढुंगी विधानसभा से 67, लालकुआं से 69, भीमताल से 59, हल्द्वानी में सबसे कम 57, नैनीताल में जिले में सबसे कम 56 एवं पौड़ी लोकसभ के अंतर्गत आने वाली रामनगर में 66 फीसद और ऊधमसिंह नगर जिले की जसपुर विधानसभा में 72.6 फीसद, काशीपुर में 65.82, बाजपुर में 72.27, गदरपुर में 75.74, रुद्रपुर में 68.21, किच्छा में 68.69, सितारगंज में 78.59, नानकमत्ता में 73.83 व खटीमा में 72.87 एवं कुल मिलाकर जिले में 71.63 फीसद मतदान हुआ। जबकि इससे पूर्व अपराह्न तीन बजे तक कालाढुंगी में 58.74, लालकुआं में 58.25, भीमताल में 51, हल्द्वानी में 52.39, नैनीताल में 46.1 व रामनगर विधानसभा में 51.06 फीसद मतदान हुआ। वहीं इससे पूर्व अपराह्न एक बजे तक नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा के अंतर्गत भीमताल विधानसभा के 152 बूथों पर 97719 मतदाताओं में से 38110 यानी मात्र 39 फीसद, हल्द्वानी के 168 बूथों पर 145576 मतदाताओं में से 59685 यानी 41 फीसद, कालाढुंगी के जिले में सर्वाधिक 189 बूथों में सर्वाधिक 159768 मतदाताओं में से 68700 यानी 41 फीसद, लालकुआं के 140 बूथों में 115676 मतदाताओं में से 48583 यानी जिले में सर्वाधिक 42 फीसद, नैनीताल के 153 बूथों में 109360 मतदाताओं में से 42650 यानी 39 फीसद एवं पौड़ी लोक सभा के अंतर्गत आने वाली जनपद की पौड़ी विधानसभा के 141 बूथों में 113166 मतदाताओं में से 46398 यानी 41 फीसद ने और कुल मिलाकर नैनीताल जिले के 943 बूथों में 741264 मतदाताओ में से 304126 यानी 41.02 फीसद मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।
वहीं इससे पूर्व सुबह के पहले दो घंटों में यानी नौ बजे तक कालाढुंगी में 11.21, लालकुआं में 11.71, भीमताल में 7.71, हल्द्वानी में 10.19, नैनीताल में सबसे कम 7.48 व रामनगर में 9.57 जबकि अगले दो घंटों के बाद 11 बजे तक कालाढुंगी में 18.63, लालकुआं में 19.64, भीमताल में 16.2, हल्द्वानी में 19, नैनीताल में 13.08 एवं रामनगर में 20.01 फीसद मतदान हो चुका था।

खास समाचार: यहां मतदाता सूची में नाम व पहचान पत्र होने के बावजूद मतदाताओं को नहीं डालने दिये वोट

नैनीताल विधानसभा के इकलौते ‘आल वुमन बूथ’ पर मतदान कराती महिला चुनाव कर्मी

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 11 अप्रैल 2019। जिला व मंडल मुख्यालय के माल रोड स्थित किंडर गार्डन के कक्ष संख्या एक में पहली बार अभिनव प्रयोग के तहत बने ‘ऑल वूमन बूथ’ में कई ऐसे मतदाताओ को भी वोट नहीं देने दिया गया, जिनके नाम मतदाता सूची में थे, साथ ही उनके पास मतदाता पहचान पत्र भी था, बावजूद कई लोग मतदान नहीं कर पाये। इस बूथ की बीएलओ बीना उप्रेती ने भी इस पर विरोध जताया एवं शिकायत की। बाद में अपराह्न डेढ़ बजे मीडिया प्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के साथ मामला बढ़ने के बाद यह व्यवस्था सामान्य हुई। तब तक कई मतदाता बिना वोट दिये जा चुके थे।
ऐसा इसलिये कि चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार बीएलओ के द्वारा चुनाव से पूर्व मतदाताओं को उनके विवरणो की पर्ची सोंपनी थी, और इस दौरान घर पर न मिले यानी अनुपस्थित, मृत एवं अन्यत्र स्थानांतरित हुए मतदाताओं की सूची भी सोंपनी थी। इस सूची में अनुपस्थित रहे मतदाताओं के नाम के आगे ‘ए’, अन्यत्र स्थानांतरितों के लिए ‘एस’ एवं मृतों के लिए ‘डी’ शब्द का प्रयोग करना था। इस बूथ पर ऐसे सैकड़ों मतदाता थे, जिनका नाम ‘ए’ श्रेणी में डाला गया था। ऐसे कई लोग मतदान करने के लिए आये, किंतु बीएलओ का आरोप था कि ऐसे कई मतदाताओं को वोट नहीं डालने दिया गया। ऐसे मतदाताओं को वोट देने के लिए ‘फॉर्म-17क’ भरने का नियम था। बीएलओ के आरोपों के अनुसार पीठासीन अधिकारी ने विकास आर्या सहित कई ऐसे मतदाताओं को दिन में दो बजे आने को कहा। ऐसे में कई मतदाता लौट गये। वहीं पीठासीन अधिकारी प्रतिभा आर्या ने कहा कि ऐसे मतदाता फॉर्म भरने के लिए रुक नहीं रहे थे। अलबत्ता अपराह्न डेढ़ बजे मीडिया कर्मियों के हस्तक्षेप के पीठासीन अधिकारी ने एआरओ से बात करने के बाद कहा कि चूंकि ऐसे बहुत मामले हैं, और इसमें बीएलओ के स्तर से रिपोर्ट देर में आने के कारण गलती हुई है। इसलिए अब बिना फार्म भरे ही ऐसे मतदाताओं को वोट देने दिया जाएगा।

मतदाता सूची में नाम न होने एवं बीएलओ के स्तर से तमाम खामियां मतदान प्रतिशतता गिराने को जिम्मेदार

नैनीताल। नैनीताल नगर एवं विधानसभा में अपराह्न एक बजे तक करीब 39 फीसद एवं नैनीताल जनपद में 41.02 फीसद मतदान ही रिकार्ड किया जा सका है। इसमें मतदाताओं के मतदान केंद्र पर न आने के कारण तो हो ही सकते हैं, वहीं आजादी के 70 वर्षों के बाद भी त्रुटिहीन मतदाता सूचियां न बन पाने के भी बड़े कारण हैं। बानगी देखिये कि जिला व मंडल मुख्यालय एवं उत्तराखंड के उच्च न्यायालय होने के बावजूद नैनीताल में मतदाता सूचियों में अनेकानेक गलतियां चुनाव के दिन प्रकाश में आई हैं। यह जरूर है कि मतदाता सूची में नाम है अथवा नहीं, और नहीं है तो प्रशासन द्वारा दी गयी समय सीमा व अनेक मौकों का लाभ उठाकर नाम लिखाया जनता की भी जिम्मदारी है, किंतु इस बार ऐसे उदाहरण भी सामने आये कि एक परिवार के सभी सदस्यों के नाम शामिल हैं, किंतु परिवार के मुखिया, पति या पत्नी का नाम सूची से गायब है। सीआरएसटी इंटर कॉलेज के बूथ पर वोट देने आये करीब 70 वर्षीय बुजुर्ग अब्दुल अजीज ने बताया कि उनके पूरे परिवार के लोगों ने मतदान किया, किंतु उन्हें सूची में नाम न होने के कारण वोट नहीं करने दिया गया। हालांकि चुनाव आयोग ने ऐसे मतदाताओं एवं जिनके नाम पर फर्जी मतदान हो चुका हो, उनके भी वोट देने के लिए प्राविधान किये थे, किंतु चुनाव कर्मी उन प्राविधानों का सदुपयोग कराकर मतदाताओं को उनका वोट दिलाने की पहल करते कहीं नहीं दिखे। इस मामले में मीडियाकर्मियों के द्वारा ध्यानाकर्षण करने के बाद बुजुर्ग को वोट देने दिया गया। वहीं नगर के अधिकांश बूथों पर आरोप लगाये गये कि 15 वर्षों से नगर में नहीं रह रहे लोगों के नाम मतदाता सूची में हैं, और एक परिवार के कुछ सदस्यों के नाम हैं और कुछ के नहीं। वहीं कई पूरे क्षेत्रों के मतदाताओं के नाम सूची से गायब हैं।

जीआईसी, नारायण नगर सहित कई बूथों पर ईवीएम एवं वीवीपैट मशीनों में दिक्कत आने से हुआ चुनाव में व्यवधान

नैनीताल। लोक सभा चुनाव में मुख्यालय के जीआईसी के कक्ष संख्या 3, अयारपाटा एवं नारायण नगर सहित कई बूथों पर ईवीएम व वीवी पैट मशीनों में आई तकनीकी दिक्कतों की वजह से भी मतदान में दिक्कत आई। बताया गया कि जीआईसी केंद्र में सुबह एक घंटे मतदान नहीं हो पाया। इसी तरह अयारपाटा के बूथ पर करीब सवा घंटे देरी से सवा आठ बजे मतदान शुरू हो पाया। इसके बाद सेक्टर मजिस्ट्रेट के आने पर मशीन को बदला गया। इसी तरह जिला पंचायत, लोनिवि कार्यालय के बूथों पर भी मतदान प्रभावित हुआ। भवाली एवं खैरना से आगे अल्मोड़ा जिले की सीमा पर कोश्यां कुटौली तहसील के अंतर्गत रामगढ़ विकासखंड के चोपड़ा, ढौकाने व तिकुरी आदि मतदान केंद्रों पर भी मतदान के आधा घंटा देरी से शुरू होने का समाचार है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बीएलओ की पर्ची के साथ आये मतदाता भी रहे वोट से वंचित

नैनीताल। शहरी क्षेत्रों में जहां अनुपस्थित एवं स्थानांतरित श्रेणी के मतदाताओं को मतदान नहीं करने दिया गया, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में कई किमी पैदल चलकर बीएलओ की पर्ची लेकर मतदान करने पहुंचे कई ऐसे मतदाताओं को वोट नहीं देने दिया गया, जो मतदाता पहचान पत्र अथवा आधार कार्ड या कोई अन्य पहचान पत्र साथ लेकर नहीं आये थे। उन्हें बताया गया कि बीएलओ की पर्ची का उपयोग पहचान पत्र के रूप में मान्य नहीं है। वहीं ग्रामीणों का कहना था कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं दी गयी। वे कई किमी पैदल चलकर मतदान करने पहुंचे हैं। उनके लिए संभव नहीं है कि वे वापस घर जाकर मतदान पहचान पत्र लेकर आ पायें। उनकी पहचान की पुष्टि कराकर मतदान करने दिया जाये।

मिडिल स्कूल बूथ पर ‘स्थानांतरित’ के नाम पर रोके गये 60-70 मतदाता

नैनीताल। नगर के मल्लीताल मिडिल स्कूल बूथ पर भी करीब 60-70 मतदाताओं को उनके स्थान से ‘स्थानांतरित’ बताकर रोका गया। बाद में भाजपा नेताओं के विरोध के बाद हर मतदाता से दो रुपये मूल्य का फार्म 17क भरवाकर उन्हें वोट देने दिया गया। इस तरह की शिकायतें कमोबेश हर बूथ पर आम रहीं।

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-लोक सभा चुनाव के लिये बनने लगे बूथ, बृहस्पतिवार को होगा मतदान
नवीन समाचार, नैनीताल, 10 अप्रैल 2019। लोक सभा चुनाव के लिए बुधवार को चुनाव पार्टियां अपने निर्दिष्ट बूथों पर पहुंच गयी हैं, और उन्होंने बूथों का निर्माण भी प्रारंभ कर दिया है, वहीं शाम तक कई बूथ बनकर भी तैयार हो गये हैं। राजस्व उप निरीक्षक अमित साह ने बताया कि नगर क्षेत्र में कुल 38 बूथ बनाये गये हैं, इनमें से माल रोड स्थित नर्सरी विद्यालय का बूथ नैनीताल विधानसभा का एकमात्र ‘ऑल वूमन बूथ’ होगा। यहां सुरक्षा कर्मियों से लेकर सभी मतदान कर्मी महिला होंगी।

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साथ ही यहां मतदाताओं की सुविधा के लिए टेंट आदि का प्रबंध किया जा रहा है। इसके बाद सभी को बृहस्पतिवार को होने वाले मतदान का इंतजार है। अधिक से अधिक मतदान लोकतंत्र के इस महापर्व में शामिल होकर भयमुक्त तरीके से एवं बिना किसी परेशानी के मतदान करें, इसके कई प्रबंध किये गये हैं। उम्मीद की जा रही है कि इन प्रबंधों के बाद अच्छी संख्या में लोग मतदान करेंगे।

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p style=”text-align: justify;”>-गली-मोहल्लों, चाय की दुकानों आदि पर चल रही हर चुनावी चर्चाओं के केंद्र में है यह शब्द
नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 9 अप्रैल 2019। प्रदेश में लोक सभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार की समय सीमा बीतने तक पार्टियों के जीत-हार के समीकरण जन चर्चाओं में ‘देश’ शब्द पर सिमट गये हैं। खासकर भाजपा के समर्थक मतदाताओं के लिए ‘देश’ शब्द एक तरह का ‘कूट शब्द’ बन गया है। लोग एक-दूसरे से पूछ रहे हैं, किसे वोट देंगे या कौन जीत रहा है। उत्तर मिल रहा है ‘देश’, तो समझ लें बात भाजपा की हो रही है। पूर्व के ‘चौकीदार चोर है’ जैसे शब्द अब सुनने को नहीं मिल रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी यही स्थिति है। खासकर प्रधानमंत्री मोदी के लिए यदि सोशल मीडिया पर कहीं यदि एक शब्द दिखता है तो उसके समर्थन में दर्जनों लोग आ जा रहे हैं, और समर्थन में गिने-चुने। लोग लोक सभा चुनाव को देश का चुनाव बताते हुए इस दौरान स्थानीय मुद्दों को आगे शीघ्र आने जा रहे त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए छोड़ने की बात भी कर रहे हैं।
कारण साफ हैं। भाजपा ने इस चुनाव में देश और ‘राष्ट्रवाद’ पर अपने प्रचार को केंद्रित रखा है, साथ ही कांग्रेस के घोषणा पत्र में अन्य बिंदुओं से इतर ‘देशद्रोह’ व ‘अफस्पा’ हटाने जैसे बिंदुओं को खुद भी जनता के बीच रखा है, ऐसे में आजादी के बाद से ही राष्ट्रीय चरित्र वाले व हर दूसरे घर से सैनिकों वाले पर्वतीय क्षेत्रों में लोग पूरे चुनाव में ‘देश’ शब्द पर केंद्रित हो गये हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के घोषणा पत्र के ये दो बिंदु इस चुनाव की दिशा तय करने वाले साबित होंगे। वहीं कांग्रेस ने 72000 रुपए प्रति वर्ष की न्याय योजना एवं खासकर नैनीताल सीट पर हरीश रावत को वरिष्ठ नेता बताते हुए माहौल बनाने की कोशिश की है। किंतु मुख्यालय में भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशियों की रैलियों में आई भीड़ पर भी लोग चर्चा कर रहे हैं। वहीं चुनाव में ‘गड़े मुर्दे’ उखाड़ने की कोशिशें भी एक दल के समर्थकों के द्वारा बढ़-चढ़ कर की जा रही हैं।

वाकई इस चुनाव में ‘इकलू…’ हो गये हरीश रावत !

चुनाव प्रचार के दौरान हरीश रावत बेतालघाट में, साथ में केवल सुरक्षा कर्मी, और कोई नहीं !

लोक सभा चुनाव के लिए मतदान तक पहुंचते कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत अकेले पड़ते नजर आ रहे हैं। चुनाव प्रचार के आखिरी दिनों में जब उन्हें सहारे की जरूरत थी, ‘दीदी’ ठीक मौके पर हाथ छुड़ा देहरादून, हरिद्वार चली गयीं। पार्टी के दोनों तरह के अन्य नेता, जिन्हें हरदा कभी लोक सभा के लिए आगे भी करते दिखे थे, और जिन्हें पीछे कर आगे बढ़े थे, पूरे चुनाव में उनके साथ केवल दिखाने भर को रहे। यहां तक कि उनके ‘रणजीत’ भी इस बार उनके साथ नहीं दिखे। पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी हाईकमान-तत्कालीन उपाध्यक्ष व मौजूदा अध्यक्ष राहुल गांधी की जगह स्वयं को सीधे मोदी के बरक्स खड़े करना भी इस चुनाव में हरीश रावत को भारी पड़ा है। इस बार उनकी मदद को न ही राहुल आये और ना ही उनकी बहन प्रियंका। रही सही कसर उनके भाजपाई समकक्ष भगत सिंह कोश्यारी ने उन्हें ‘इकलू बानर’ कह कर पूरी कर दी, जिसे हरीश रावत के साथी इस चुनाव में सही साबित करने पर तुले दिखे। जरूर रावत ने इस चुनाव में अपनी रणनीति बदली। जनता में व्यापक प्रभाव वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला करने से बचे। शायद पिछले विधानसभा चुनाव में चुनाव को ‘मोदी बरक्स हरीश रावत’ करने की अपनी भूल को उन्होंने स्वीकार कर लिया। मोदी के बजाय स्थानीय मुद्दों, कुछ हद तक क्षत्रिय और मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण करने की भी कोशिश की। लेकिन सच्चाई यह है कि इस बार उनका कोई दांव चलता नजर नहीं आ रहा है, और वे इस चुनाव में ‘इकलू….’ ही नजर आ रहे हैं।

यह भी पढ़ें : भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की उत्तराखंड में सभी चुनावी रैलियां टलीं, स्मृति भी बागेश्वर नहीं अल्मोड़ा आएंगी..

नवीन समाचार, नैनीताल, 8 अप्रैल 2019। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह कि सोमवार को उत्तराखंड में चुनावी रैलियां स्थगित हो गई हैं उन्हें आज उत्तराखंड के अल्मोड़ा और श्रीनगर आदि में आना था है लेकिन किन्हीं कारणों से उनका कार्यक्रम स्थगित हो गया है वही केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का बागेश्वर में आना भी स्थगित हो गया है अबे बागेश्वर की जगह अल्मोड़ा में चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगी अल्मोड़ा के सिंफनी मैदान में अमित शाह के लिए की जा रही तैयारियों का उपयोग स्मृति ईरानी की जनसभा के लिए किया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी सोमवार को अल्मोड़ा आ रही हैं। वे अल्मोड़ा लोअर मालरोड में एसएसजे परिसर के सिमकनी मैदान में भाजपा प्रत्याशी अजय टम्टा के समर्थन में दोपहर एक बजे से जनसभा को संबोधित करेंगी। सभा में प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष नरेश बंसल के भी भाग लेने की संभावना है। बताया गया है कि जनसभा में जिले के करीब दस हजार लोग भाग लेंगे। वहीं सिमकनी मैदान में जनसभा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

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चुनाव प्रचार के दौरान हरीश रावत बेतालघाट में

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 अप्रैल 2019। पिछले दिनों चुनावी रण में जीत के लिए खेतों में उतरे प्रसिद्ध सिने अभिनेत्री एवं आगरा से सांसद प्रत्याशी हेमा मालिनी व पूर्व सीएम व नैनीताल से सांसद प्रत्याशी हरीश रावत की कड़ी में एक और नेत्री का नाम एक तरह का कार्य करने के लिये जुड़ गया है। गत दिवस हेमा मालिनी की आगरा के एक खेत में गेहूं काटने की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, वहीं इसके एक-दो दिन बाद हरीश रावत की नैनीताल लोकसभा के बेतालघाट क्षेत्र में ग्रामीण महिलाओं से लेकर घास की डलिया अपने सिर पर रख लिया था। अब इसी तर्ज पर महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य ने नैनीताल विधानसभा से लगते कोटाबाग के डॉन परेवा क्षेत्र में रविवार को कटे गेहूं का गट्ठा अपने सिर पर रखकर स्वयं को जनता से जुड़ा दिखाने की कोशिश की है। आगे देखने वाली बात होगी कि इन नेताओं के इस फोटो खिंचाऊ परिश्रम का जनता पर कितना असर आगामी चुनाव में दिखाई देता है।

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p style=”text-align: justify;”>-नगर से कुछ 100 मीटर के दूर के क्षेत्रवासियों को वाहनों को नगर में लाने के लिए बीते 6 माह से 25 किमी का चक्कर लगाना पड़ रहा है

चुनाव बहिस्कार संबंधी कृष्णापुर वार्ड वासियों का पोस्टर।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 6 अप्रैल 2019। एक ओर शासन-प्रशासन के अधिक से अधिक मतदान करने के प्रयासों के बीच लगातार चुनाव बहिस्कार की धमकियों की खबरें भी आती जा रही हैं। इधर सोशल मीडिया पर ‘रोड नहीं तो वोट नहीं, अबकी बार चुनाव बहिष्कार’ लिखे पोस्टर वायरल हुए हैं। पोस्टर के नीचे समस्त क्षेत्रवासी तल्ला कृष्णापुर, नैनीताल लिखा हुआ है। पोस्टर में मुट्ठियां भींचे लोग दिखाए गये हैं। इस बारे में पूछे जाने पर क्षेत्रीय सभासद कैलाश रौतेला ने कहा कि उन्हें भी यह पोस्टर मिला था। साथ ही सोशल मीडिया पर आये एक संदेश में रविवार को सुबह 11 बजे केनॉल कॉलोनी में बैठक आयोजित करने की बात भी की गयी है। बैठक में आगे की रणनीति तय करने की बात कही गयी है। अलबत्ता यह मुहिम किन लोगों के द्वारा चलाई जा रही है, इसकी जानकारी से सभासद ने भी इंकार किया।
उल्लेखनीय है कि कृष्णापुर क्षेत्र को नगर से जोड़ने वाला एकमात्र सीसी मार्ग बीते वर्ष सितंबर माह में बलियानाला क्षेत्र में हुए भूस्खलन के बाद से बंद पड़ा है। इस कारण लोग केवल पैदल ही शहर में आ पा रहे हैं। वैसे भी यह मार्ग पहले भी वाहनों के लिए प्रतिबंधित था, बावजूद लोग अपने जोखिम पर दो व चार पहिया वाहन ले कर आ जाते थे। किंतु वर्ष 2017 में हुए भूस्खलन के बाद से केवल दो पहिया वाहन ही बमुश्किल आ पा रहे थे। इधर सितंबर माह के बाद किसी भी तरह के वाहन नहीं आ पा रहे हैं। इस कारण नगर से कुछ 100 मीटर दूरी के इस इलाके लिए वाहनों को शहर में आने के लिए बीरभट्टी-दो गांव होते हुए करीब 25 किमी का चक्कर लगाना पड़ रहा है। स्थानीय भाजपा नेता भी पूर्व में कूड़ा खड्ड के पास से क्षेत्र के लिए मार्ग बनाने के लिये प्रयासरत रहे हैं, किंतु सफलता नहीं मिली है।

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-70 वर्षों में नहीं हो पाया मात्र 4 किमी सड़क का डामरीकरण

एसडीएम के रीडर को ज्ञापन सोंपते ग्रामीण।

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p style=”text-align: justify;”>दान सिंह लोधियाल @ नवीन समाचार, धानाचूली (नैनीताल), 5 अप्रैल 2019। नैनीताल एवं चंपावत जिलों के सीमावर्ती क्षेत्र में 1950 में बनी मात्र 4 किमी सड़क का करीब 70 वर्षों बाद भी डामरीकरण नहीं हो पाया है। इससे आहत कई सीमावर्ती गांवों के वासियों ने चुनाव बहिष्कार करने की धमकी दे दी है। शुक्रवार को धारी तहसील के एसडीएम की अनुपस्थिति में ग्रामीणों के द्वारा उनकी रीडर को ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन में कहा गया है कि उनके आवागमन का एकमात्र साधन, 1950 में चौड़े हुए मात्र चार किमी के करायल से टकुरा मोटरमार्ग के डामरीकरण न होनेएवं थलाड़ी से दीनी पहाड़पानी के बीच 5 किमी का मिलान न होने से ग्राम पंचायत रैकुना, थलाड़ी, पुटपुड़ी, तुषराण, पैटना, जमराड़ी, कोटली व टकुरा के ग्रामीण लोक सभा चुनाव का बहिस्कार करेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि इतने वर्षों से वे कई बार यह मांग उठा चुके हैं। लोनिवि व वन विभाग को कई बार प्रस्ताव भी दिये जा चुके हैं। लेकिन विभागों के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गयी। बताया गया कि इस मोटर मार्ग पर करायल-टकुरा से आगे थलाड़ी तक 5 किमी एवं जमरानी तक दो किमी तक डामरीकरण हो चुका है, एवं वर्ष 1950 में बने विजयपुर पहाड़पानी पैदल मार्ग में थलाड़ी से दीनी पहाड़पानी तक 5 किमी रोड का मिलान आज तक नहीं होने के कारण क्षेत्रीय जनता में रोष है। कहा है कि जब तक उनकी दोनों मार्गों पर लिखित आश्वासन नहीं मिल जाता है, वे तब तक लोकसभा में मतदान नहीं करने के लिए बाध्य हैं।

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-कांग्रेस में शामिल होने वालों में आप के नगर अध्यक्ष व पूर्व अध्यक्ष सहित दर्जन भर कार्यकर्ता भी 
नवीन समाचार, नैनीताल, 4 अप्रैल 2019। जिला व मंडल मुख्यालय में आम आदमी पार्टी के नगर अध्यक्ष देवेंद्र लाल, पूर्व संस्थापक सदस्य श्रीकांत घिल्डियाल, पूर्व नगर अध्यक्ष प्रकाश पांडे, पूर्व उपाध्यक्ष विपिन सैनी, पूर्व संगठन मंत्री महेश आर्य सहित करीब एक दर्जन कार्यकर्ता कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गये हैं। शुक्रवार देर रात्रि सभी कार्यकर्ताओं ने निकटवर्ती कैंची कस्बे में आप के कुल 11 कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत के समक्ष नगर अध्यक्ष अनुपम कबडवाल के प्रयासों से कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। देवेंद्र लाल ने बताया कि इससे पूर्व दो दिन पहले उन्होंने आम आदमी पार्टी के पदों एवं सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। कांग्रेस में शामिल होने वालों में राम नारायण, बलराम पुरोहित, अजय परगाई, बिशन कुमार, राजेंद्र सिंह रावत व प्रकाश आर्य भी शामिल बताये गये हैं। इधर आप के पर्वतीय जिलाध्यक्ष प्रदीप दुम्का ने पार्टी के कार्यकर्ताओं के इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल होने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी में ऊपर के स्तर से यथोचित सहयोग न मिलने की वजह से यह स्थितियां आई हैं। आगे पार्टी को और मजबूत बनाया जाएगा।
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नवीन समाचार एक्सक्लूसिव: ऋतु खंडूड़ी ने पिता व भाई को लेकर पहली बार साफ की स्थिति

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p style=”text-align: justify;”>कहा-पिता के कांग्रेस का मंच साझा करने की बात कोरी अफवाह, भाई को शुभकामनाएं
-राष्ट्रीय सहारा से खास बातचीत में यमकेश्वर विधायक ने साफ की पूरी पारिवारिक स्थिति

सोमवार शाम महिला मोर्चा कार्यकर्ताओं को संबोधित करतीं भाजपा विधायक ऋतु खंडूड़ी।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 1 अप्रैल 2019। भाजपा नेत्री एवं यमकेश्वर विधायक ऋतु खंडूड़ी ने पहली बार राजनीतिक तौर पर अपने परिवार पर लगे सभी प्रश्नों के साफ-साफ उत्तर देते हुए स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा, उनके पिता का कांग्रेस का मंच साझा करने या कांग्रेस में शामिल होने का कोई प्रश्न ही नहीं है। वे जीते जी मर जाएंगे किंतु ऐसा कभी नहीं करेंगे। वे जब ऐसा कर सकते थे, तब उन्होंने ऐसा नहीं किया तो अब तो ऐसा प्रश्न ही नहीं उठ सकता। इस बारे में आ रही सारी बातें पूरी तरह से कोरी बकवास हैं। इन्हें पता नहीं कौन उड़ा रहा है। वहीं अपने भाई, पौड़ी से कांग्रेस प्रत्याशी मनीश खंडूड़ी के बारे में उन्होंने कहा वे पहले भी उनके भाई थे और 11 अप्रैल के बाद भी उनके भाई होंगे। अभी वे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, और यह राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता 11 अप्रैल तक के लिए है। बावजूद भारतीय संस्कृति के तहत वे उन्हें और सभी प्रत्याशियों को शुभकामनाएं देती हैं, जीत का आर्शीवाद नहीं।
सोमवार को पार्टी कार्यालय में ‘नवीन समाचार’ से खास बातचीत में श्रीमती खंडूड़ी ने कहा हमारा परिवार बेहद संस्कारित परिवार है। यहां सबको अपने विचारों की आजादी भी है। उनके कांग्रेस में जाने के बाद भी परिवार में कोई कलह नहीं है। अलबत्ता, मनीश के पिता खंडूड़ी को उनकी इमानदारी के कारण रक्षा समिति से हटाये जाने के आरोपों पर उनकी बहन ऋतु ने साफ उत्तर नहीं दिया। कहा, उन्हें (भुवन चंद्र खंड़ूड़ी को) पार्टी ने ही पद दिया था, और पार्टी ने ही संगठन के निर्णय से पद वापस लिया, जो सही ही लिया होगा। वे (ऋतु) पार्टी की अनुशासित कार्यकर्ता हैं। इसलिये इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगी। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनके पता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीब शीर्ष अधिकारी हैं। वे बताते हैं कि मोदी दिन में 18 घंटे कार्य करते हैं। वे देश के लिए स्वयं को खपा रहे हैं। उन्होंने देश में विकास करने के साथ ही देश वासियों की देश के लिए मानसिकता भी बदल दी है। उन्होंने विश्वास दिलाया है कि 5 वर्ष बिना भ्रष्टाचार के भी सरकार चल सकती है। देश दुनिया का नंबर एक देश बन सकता है। अब मोदी के नेतृत्व में देश उड़ान भरने को तैयार है। उन्हें 300 से अधिक सीटें देकर ताकत देनी है। इसके लिए अपने बूथ को जिताने का संकल्प हैं। इस दौरान पार्टी के महिला मोर्चा की कुमाऊं प्रभारी हेमा ने भी कार्यकर्ताओं में जोश भरा। इस मौके पर पूर्व दायित्वधारी शांति मेहरा, बिमला अधिकारी, रीना मेहरा, जीवंती भट्ट, नीतू बोहरा, दीपाली कन्याल, संगीता पन्त, डा. अनिल डब्बू, चंदन भंडारी, तुलसी कठायत, दया बिष्ट, तारा राणा, कलावती असवाल, पिंकी मुंडे सहित अनेक भाजपा महिला मोर्चा कार्यकत्रियां मौजूद रहीं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 1 अप्रैल 2019। हालांकि यह नियमों के अधीन ही है कि लोक सभा चुनाव में देश का कोई नागरिक देश के किसी भी राज्य की और किसी भी लोक सभा सीट से नियमानुसार नामांकन पत्र भरकर चुनाव मैदान में उतर सकता है, तो भी नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोक सभा क्षेत्र में संभवतया पहली बार यह अभूतपूर्व स्थिति बनी है, जब चुनाव में उतरे तीनों राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के प्रत्याशी दूसरों से तो स्वयं को मतदान करने की पुरजोर अपील करेंगे किंतु वे स्वयं को मतदान नहीं कर पाएंगे। ऐसा इसलिये कि तीनों प्रत्याशियों ने अपने नामांकन में अपना पता नैनीताल लोक सभा से बाहर का प्रदर्शित किया है। भाजपा प्रत्याशी अजय भट्ट अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ लोक सभा के रानीखेत के, बसपा प्रत्याशी नवनीत अग्रवाल यूपी की बरेली लोक सभा के और कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत देहरादून के निवासी हैं। इसलिये इस लोक सभा से चार में से तीन प्रत्याशी स्वयं के लिए मतदान की अपील करेंगे किंतु स्वयं को मतदान नहीं कर पाएंगे।

नैनीताल के सात में दो-दो प्रत्याशी अधिवक्ता व इंजीनियर, एक पीएचडी

नैनीताल। नैनीताल लोक सभा से चुनाव लड़ रहे दो प्रत्याशी-भाजपा के अजय भट्ट और कांग्रेस के हरीश रावत दोनों पेशे से अधिवक्ता हैं। अजय भट्ट की पत्नी पुष्पा भट्ट भी अधिवक्ता एवं उत्तराखंड उच्च न्यायालय में अपर महाधिवक्ता हैं। वहीं बसपा प्रत्याशी नवनीत अग्रवाल और निर्दलीय प्रत्याशी प्रेम प्रसाद आर्य पेशे से इंजीनियर हैं। जबकि बाम दलों के संयुक्त प्रत्याशी डा. कैलाश पांडेय पीएचडी एवं अन्य निर्दलीय प्रत्याशी सुकुमार विश्वास महज साक्षर हैं।

हर विधानसभा में इन एक-एक मतदान केंद्रों पर होंगी सभी महिला कर्मी

नवीन समाचार, नैनीताल, 30 मार्च 2019। जनपद में हर विधानसभा में एक-एक मतदान केंद्र ऐसा होगा जहां पीठासीन अधिकारी से लेकर सभी मतदान कर्मी और सुरक्षा में लगे पुलिस के जवान भी महिलाएं होंगे। जिले के मुख्य विकास अधिकार विनीत कुमार ने बताया कि नैनीताल विधानसभा में मुख्यालय स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय किंडर गार्डन, कालाढुंगी विस में राप्रावि पतलिया, रामनगर में प्रभागीय विपणन प्रबंधक उत्तराखंड कार्यालय, भीमताल में ब्लॉक कार्यालय भीमताल, हल्द्वानी में खालसा नेशनल गर्ल्स इंटर कॉलेज कक्ष-चार एवं लालकुआ में कुष्ठ रोग आश्रम सरकारी भवन हाथीखाल को ‘केवल महिला मतदान केंद्र’ बनाने के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

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p style=”text-align: justify;”>-25 वर्ष की आयु में यूपी के सबसे कम उम्र के विधायक बने बाद में स्वास्थ्य मंत्री रहे नैनीताल के प्रताप भैया
-इस सभा में बाद में नेपाल के विदेश सचिव रहे उद्धव देव भट्ट भी एक युवा के रूप में थे मौजूद
-दर्जनों स्कूल खोल शिक्षा की अलख भी जलायी, जाति प्रथा के रहे विरोधी

तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के साथ भैया जी
तत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के साथ भैया जी

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p style=”text-align: justify;”>नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल। आज के दौर में जबकि राजनेता अपना जन-धन व बाहु बल दिखाकर ही स्वयं को बड़ा नेता दिखाने की कोशिश करते हैं, वहीं 25 वर्ष की आयु में यूपी के सबसे कम उम्र के विधायक बनने का रिकार्ड बनाने वाले नैनीताल निवासी यूपी के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री स्वर्गीय प्रताप भैय्या जैसे नेता भी रहे, जिनके कई किस्से आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं। उन्होंने खुद को दिखाने के लिये भीड़ जुटाने के बजाय खुद से पहल करते हुए क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाने के साथ ही जाति प्रथा के विरुद्ध भी ऐसे अनूठे कार्य किये, कि लोग खुद-ब-खुद उनके साथ होते चले गये।
युवा प्रताप का उनके पहले 1956 के विधानसभा चुनाव का किस्सा आज के राजनेताओं के लिये अनुकरणीय हो सकता है। इस चुनाव में प्रताप लखनऊ विवि से पढ़ाई पूरी करके प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर घर से दूर, अनजान सी तत्कालीन संयुक्त नैनीताल जनपद की खटीमा सीट से चुनाव लड़ रहे थे। खटीमा में न उनकी पार्टी का ढांचा था, और ना बहुत समर्थक ही। इसकी परवाह किये बिना अपनी सभा से पूर्व उन्होंने दिन में खुद ही सभा स्थल पर दरी बिछायी और खुद ही घंटी बजाकर लोगों को अपनी सभा की जानकारी भी दी। ऐसे में शाम को जब वे सभा को संबोधित करने लगे तो हर कोई उनका मुरीद हो गया था कि सुबह यही लड़का सभास्थल पर दरी बिछा रहा था। इस चुनाव में एक और खास बात यह भी रही कि उनकी इस सभा की अध्यक्षता उस समय एक अनजान नेपाली युवक उद्धव देव भट्ट ने की थी, जोकि बाद में नेपाल के विदेश सचिव रहे। उनके जीवन के कई और भी दिलचस्प उदाहरण मिलते हैं। अपने जीवन के आखिरी दिनों तक वे विधि विचार गोष्ठी व हाथ-हल किसान गोष्ठी सहित कई गोष्ठियां व अन्य कार्यक्रम करते थे, और इनमें कितने कम लोगों की उपस्थिति होती, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता था, और वे गोष्ठी शुरू करने के लिये किसी का इंतजार भी नहीं करते थे। एक बार तो उनकी गोष्ठी में उनके पुत्र, कुछ अन्य परिजन तथा जूनियर अधिवक्ता मिलाकर कुल पांच लोग ही गोष्ठी शुरू होने के समय तक पहुंचे थे। बावजूद उन्होंने यह कहकर गोष्ठी शुरू कर दी कि ये ही उनके ‘पंच परमेश्वर’ हैं। उन्होंने नैनीताल के प्रतिष्ठित शहीद सैनिक विद्यालय सहित एक सौ से अधिक स्कूलों की स्थापना कर उन्होंने समाज में शिक्षा की ज्योति जलाई। उन्होंने स्वयं और पुत्र ज्योति प्रकाश के नाम के पीछे जाति न लिखकर अपने स्कूलों में छात्रों की जाति न लिखने का नया प्राविधान भी बनाया, जो आज भी लागू है।

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नवीन समाचार, हल्द्वानी, 27 मार्च 2019। चुनाव आयोग की फ्लाइंग स्क्वाड टीम ने हल्द्वानी में रुपयों के बाद अब दबंग ब्रांड की शराब की बड़ी खेप बरामद की है। बुधवार सुबह फ्लाइंग स्क्वायड की टीम ने नैनीताल रोड पर जजी कोर्ट के निकट पिकअप वाहन संख्या यूके 04 सीए 3054 को रोका और जांच पड़ताल की तो उसमें दबंग ब्रांड की 163 बेटी शराब बरामद की गई। वाहन चालक शराब के बारे में आवश्यक दस्तावेज नहीं दिखा पाया। हालांकि शराब उत्तराखंड की ही है। माना जा रहा है कि यह कम बिक्री वाली दुकान के कोटे से मतदाताओं को प्रभावित करने वाले स्थानों पर ले जाई जा रही थी। वाहन एवं शराब को जब्त कर लिया गया है। गिरफ्तार किये गए वाहन चालक से पूछताछ जारी है।

यह भी पढ़ें : काठगोदाम में मतदाताओं को प्रभावित करने ले जाई जा रही लाखों की नगदी पकड़ी…

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 27 मार्च 2019। स्टैटिक्स टीम ने चेकिंग के दौरान काठगोदाम से 1.12 लाख रुपये की नकदी पकड़ी। रुपये ले जा रहा व्यक्ति रुपये से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं दिखा सका। टीम ने बरामद रुपये को सीज कर पुलिस को सौंप दिया है। माना जा रहा है यह चुनाव में मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए ले जाई जा रही थी।

मंगलवार को स्टैटिक्स टीम प्रभारी उर्मिला पींचा और एसआई गुरविंदर कौर के साथ काठगोदाम में चेकिंग कर रहीं थी। इस दौरान काठगोदाम थाना क्षेत्र के चांदमारी निवासी पारुल भाटिया पुत्र सुभाष भाटिया की कार को टीम ने जांच के लिए रोका। कार की तलाशी लेने पर उसमें से 1.12 लाख रुपये की नकदी बरामद की गई। टीम ने रुपये से संबंधित दस्तावेज मांगे तो वह नहीं दिखा सका। इस पर स्टैटिक्स टीम प्रभारी ने रुपये सीज कर काठगोदाम पुलिस को सौंप दिए। स्टैटिक्स टीम की सदस्य एसआई गुरविंदर कौर ने बताया कि कार सवार नैनीताल की ओर जा रहा था। उसने पूछताछ में रुपये से संबंधित कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।

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p style=”text-align: justify;”>-नैनीताल सीट पर भाजपा को मोदी तो कांग्रेस अल्पसंख्यक, अनुसूचित व क्षत्रिय वोटों के ध्रुवीकरण से उम्मीद
नवीन समाचार, नैनीताल, 25 मार्च 2019। पहले नां कहने के बाद पूर्व सीएम हरीश रावत ने आखिर नैनीताल से टिकट हासिल करने के बाद नामांकन भी कर लिया है। सबके मन में एक सवाल है कि पहले हरीश रावत क्यों नैनीताल से लड़ने से पीछे हट गये थे, और फिर अचानक आखिर में फिर हरिद्वार सीट छोड़कर नैनीताल आ गये। वह भी तब, जब नैनीताल सीट से कांग्रेस के केवल दो विधायक हल्द्वानी से डा. इंदिरा हृदयेश और जसपुर से आदेश चौहान ही हैं, और इनमें से भी इंदिरा रावत का लगातार प्रबल विरोध कर रही थीं। वहीं हरिद्वार में कांग्रेस के तीन विधायक हैं और तीनों हरीश रावत के पक्ष में रहे हैं।
इसका केवल एकमात्र कारण, जैसा कि स्वयं हरीश रावत भी कह चुके थे, भगत सिंह कोश्यारी के चुनाव न लड़ने पर हरीश रावत नैनीताल सीट पर लड़ने के लिए आये। तो क्या हरीश रावत व कोश्यारी के बीच कोई सांठ-गांठ थी। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो ऐसा नहीं है, बल्कि असली वजह है हरीश रावत को इस सीट पर सर्वाधिक करीब 26 फीसद क्षत्रिय वोटों के ध्रुवीकरण का अपनी पक्ष में होने की उम्मीद। रावत को लगता है कि कोश्यारी के लड़ते भाजपा-कांग्रेस दोनों के प्रत्याशी क्षत्रिय होते, लिहाजा वे क्षत्रियों के वोटों को अपनी पक्ष में नहीं कर पाते। लेकिन जैसे ही भाजपा से ब्राह्मण प्रत्याशी अजय भट्ट को टिकट मिलने की घोषणा हुई, तत्काल हरीश रावत ने पैंतरा बदला और नैनीताल से चुनाव लड़ने के लिए हाईकमान पर आठ कांग्रेसी विधायकों को लेकर लामबंदी शुरू कर दी।
उल्लेखनीय है कि हरीश रावत के बिना भी नैनीताल से कांग्रेस क्षत्रिय प्रत्याशी डा. महेंद्र सिंह पाल को टिकट देने के पक्ष में थी। डा. पाल के टिकट के बीच हरीश रावत का आ खड़ा होना भी इसी क्षत्रिय वोटों की राजनीति के कारण रहा है। कारण दो बार सांसद डा. महेंद्र पाल तीसरी बार चुनाव जीत जाते तो उत्तराखंड से बड़ा क्षत्रिय चेहरा बन सकते थे, जो कि हरीश रावत नहीं चाहते थे। इसलिये भी वे पाल की राह में आये और टिकट हासिल कर लिया।

दोनों प्रत्याशी रानीखेत के, एक मौजूदा तो दूसरा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल संसदीय सीट पर अब जबकि दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों भाजपा व कांग्रेस के प्रत्याशियों ने अपने नामांकन कर दिये हैं तो यह सीट जैसे रानीखेत में तब्दील हो गयी है। भाजपा प्रत्याशी अजय भट्ट व कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत दोनों रानीखेत से आते हैं। यह भी इत्तफाक है कि पिछले विधानसभा चुनाव में जहां अजय भट्ट पार्टी अध्यक्ष होते हुए पार्टी को रिकार्ड 57 सीटें जितवाने के बावजूद अपनी रानीखेत सीट नहीं बचा पाये थे तो हरीश रावत ने मुख्यमंत्री रहते हुए हरिद्वार ग्रामीण व किच्छा सीटें हारने का अनूठा निकार्ड बनाया था।
इस संसदीय सीट की 14 में से 11 विधानसभा सीटों पर भाजपा, केवल दो पर कांग्रेस और एक पर भाजपा से निकटता रखने वाले निर्दलीय प्रत्याशी का कब्जा है। कांग्रेस के दो में से एक विधायक, हल्द्वानी की विधायक व नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस प्रत्याशी हरीश रावत से बुरी तरह से उखड़ी हुई हैं, ऐसे में पूरा चुनाव की बहस का मुद्दा कौन अधिक मजबूत से अधिक कौन कमजोर पर आ टिकी है। ऐसे में जहां भाजपा प्रत्याशी अजय भट्ट की जीत का आधार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रणकौशल व उनकी आगामी 28 मार्च को प्रस्तावित जनसभा पर टिका हुआ है तो कांग्रेस प्रत्याशी की जीत इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कांग्रेस के वोट बैंक माने जाने वाले दलित व अल्पसंख्यक मतदाताओं के साथ क्षत्रिय मतदाताओं को कितना अपने पक्ष में कर पाते हैं। हालांकि आखिर तक टिकट की दौड़ में आगे बने रहे दो बार के पूर्व सांसद व क्षत्रिय वर्ग से ही आने वाले डा. महेद्र पाल पक्ष का कहना है कि रावत ने पाल का टिकट कटवाकर राज्य में कोई दूसरा क्षत्रिय नेता न बनने देने का काम किया है, इसलिये क्षत्रिय वर्ग रावत से नाराज है और उनके पक्ष में लामबंद नहीं होगा।
यह है नैनीताल सीट के मतदाताओं के आंकड़े
वहीं मतदाताओं के आंकड़ों की बात करें तो इस सीट पर 9,37,354 पुरुष व 8,41,420 महिलाएं व 26 अन्य मिलाकर कुल 17,78,800 मतदाता हैं। इनमें सर्विस वोटरों की संख्या 9,756 पुरुष व 181 महिलाएं मिलाकर कुल 9,937 है। इस सीट की करीब 63 फीसद आबादी ग्रामीण व 37 फीसद शहरी क्षेत्र में रहती है। वहीं जातिगत आधार पर सर्वाधिक 29 फीसद क्षत्रिय, करीब 16 फीसद ब्राह्मण, 16 फीसद मुस्लिम, 12.5 फीसद अनुसूचित जाति, 12.5 फीसद सिख, 6 फीसद बंगाली, 4-4 फीसद राय सिख एवं वैश्य तथा करीब 8 फीसद अन्य जातियों के लोग रहते हैं।

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p style=”text-align: justify;”>-ऑडियो जारी कर कहा, वे जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए सकुचा भी रहे हैं
नवीन समाचार, नैनीताल, 24 मार्च 2019। नैनीताल संसदीय सीट से कांग्रेस पार्टी का टिकट प्राप्त करने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक भावनात्मक ऑडियो के माध्यम से अपने विचार रखे हैं। उन्होंने कहा है कि चुनाव मैदान में सभी प्रतिद्वंद्वी उनसे अधिक योग्य हैं, साथ ही वे सकुचा रहे हैं कि इस अनेक महान एवं विशाल व्यक्तित्व के लोगों के प्रतिनिधित्व वाली सीट के मतदाताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप स्वयं को स्वयं को सिद्ध कर पाएंगे या नहीं। उनका यह ऑडियो संदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
रविवार को सोशल मीडिया पर जारी ऑडियो संदेश में पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा है कि उन्हें अभी-अभी नैनीताल संसदीय सीट से चुनाव लडने के निर्देश प्राप्त हुए हैं। नैनीताल सीट के सभी पूर्व सांसदों स्वयं सीडी पांडे, केसी पंत, एनडी तिवारी, भारत भूषण, सत्येंद्र चंद्र गुड़िया, इला पंत, डा. महेंद्र पाल, बलराज पासी, केसी सिंह बाबा व भगत सिंह कोश्यारी का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कियह विशाल व्यक्तित्व इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वे (रावत) हमेशा तुलना से बचते हैं, मगर अतीत का अवश्य अध्ययन करते हैं। “चुनाव लडने वाले प्रत्येक व्यक्ति का संकल्प रचनात्मक है। मेरे सभी प्रतिद्वंदी मुझसे अधिक योग्य हैं और मेरे लिए सम्मान के पात्र हैं। हम व्यक्तिगत कटुता व आलोचना से बचने का प्रयास करेंगे। चुनाव में सद्भावना का वातावरण बना कर हम आगे बढ़ेंगे। विश्वास बनाए रखें की आलोचना संसदीय मर्यादा के दायरे में ही हो। मैं थोड़ा सकुचा रहा हूं, क्या मैं आप की अपेक्षा के अनुरूप अपने को सिद्ध कर पाऊंगा? क्या मैं आपकी परीक्षा में उत्तीर्ण हो पाऊंगा? एक बड़ा प्रश्न है। अंत में वे कहते हैं कि कुलदेवता उनकी मदद करें…।”
अलबत्ता, इशारों में बात करने के माहिर हरीश रावत ही बता सकते हैं कि वे ऐसा कहकर क्या इशारा कर रहे हैं।

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-पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह, सभी केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, प्रदेश के सीएम समेत चारों पूर्व सीएम सूची में शामिल

नवीन समाचार, देहरादून, 23 मार्च 2019। सत्तारूढ़ भाजपा का चुनाव प्रचार करने वालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, राजनाथ सिंह केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, तमाम केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, प्रदेश के मौजूदा सीएम व चार पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश, हिमाचल व हरियाणा के मुख्यमंत्री, प्रदेश कैबिनेट के मंत्री, केंद्रीय व प्रदेश संगठन के नेता करेंगे। खास बात यह है कि सूची में फिल्म स्टार के नाम पर केवल हेमा मालिनी हैं और अधिकांश स्टार प्रचारक राजनेता शमिल हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी के स्टार प्रचारकों में पूरी तरह सूखा नजर आ रहा है। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी महासचिव प्रियंका गांधी व पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के आने की भी कम ही संभावनाएं हैं।
भाजपा के प्रदेश मीडिया सह प्रभारी बलजीत सोनी ने बताया कि भाजपा के स्टार प्रचारकों की सूची में गृह मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली, सड़क-परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय सामाजिक अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत, स्वास्य मंत्री जेपी नड्डा. उमा भारती, स्मृति ईरानी, राज्य वर्धन राठौर, राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामलाल, सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश, प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू, हेमा मालिनी, शहनवाज हुसैन, उप्र के सीएम योगी आदित्यनाथ, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, हिमाचल के सीएम जयराम ठाकुर, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष व सांसद मनोज तिवारी, प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी व सांसद अनिल बलूनी, पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी, भुवन चंद्र खंडूड़ी, विजय बहुगुणा, रमेश पोखरियाल निशंक, कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत, मदन कौशिक, सतपाल महाराज, यशपाल आर्य, हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल, अरविंद पांडेय, राज्यमंत्री रेखा आर्य, धन सिंह रावत, महामंत्री नरेश बंसल, खजान दास, गजराज सिंह बिष्ट और बलराज पासी शामिल हैं। इस तरह प्रदेश के चुनाव अभियान के लिए सशक्त टीम बनाई गई है।

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नवीन समाचार, हरिद्वार/चंपावत, 23 मार्च 2019। कुछ बिरले लोग ऐसे भी होते हैं जो अपने कार्य के साथ ही कला के क्षेत्र में भी अच्छा दखल रखते हैं। उत्तराखंड में ऐसे ही दो प्रशासनिक अधिकारी हैं हरिद्वार जिले के डीएम आईएएस अधिकारी दीपक रावत और चंपावत जिले के डीएम के पद पर कार्यरत आईएएस रणवीर सिंह चौहान। खास बात यह है कि दोनों अधिकारियों की गायकी प्रतिभा सर्वप्रथम नैनीताल में दिखाई दी थी, जब नैनीताल जिले के डीएम रहते दीपक रावत शरदोत्सव व नैनीताल विंटर कार्निवाल के मंच पर अक्सर माइक संभालकर तथा कई बार निजी जीवन में भी और कार्यालय में भी गीत गुनगुनाने लगते थे, वहीं नैनीताल के सीडीओ रहते रणवीर सिंह चौहान ने ‘नैनीताल सिटी एंथम’ – ‘ये नैनीताल है’ स्वयं गाकर और उसमें एक्ट भी करके तैयार किया था। इसे आज भी नैनीताल में नैनीताल के स्थापना दिवस व नैनीताल विंटर कार्निवाल तथा गर्मियों के सीजन में कई सार्वजनिक मौकों पर बजाया जाता है। इंटरनेट पर भी वह गीत खासा हिट है। वहीं इधर पहले चौहान ने और अब रावत ने भी भारत सरकार के स्वीप कार्यक्रम के तहत मतदाता जागरूकता अभियान के गीत तैयार किये हैं जो उत्तराखंड में मतदाता जागरूकता के लिए थीम सोंग के तौर पर पुनः काफी पसंद किये जा रहे हैं। चौहान के गीत के बोल हैं ‘हक है जो तेरा कर ले तू उसको अदा, अपनी शक्ति को अब तो तुम पहचान लो, वोट दो, अब की बार ये मौका ना हाथ से जाने दो…’ वहीं रावत के गीत के बोल हैं ‘अपने अधिकारों का सम्मान करें, चलो मतदान करें, खुद अपनी नगरी का नवनिर्माण करें चलो मतदान करें…’

आईएएस दीपक रावत का मतदाता जागरूकता गीत : 

आईएएस रणवीर सिंह चौहान का मतदाता जागरूकता गीत :

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p style=”text-align: justify;”>-नैनीताल व टिहरी पर दोनों धड़ों को बांटने का बन रहा फॉर्मूला, साथ ही नैनीताल की कीमत पर हरिद्वार भाजपा को गिफ्ट देने की तैयारी
नवीन समाचार, नैनीताल, 22 मार्च 2019। लोक सभा चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी फिर चुनाव से पहले ही जंग से पिछड़ती जा रही है। पार्टी के दो शीर्ष नेताओं की वजह से उत्तराखंड की कांग्रेस में तीन सीटों पर पेंच फिर फंस गया है। विरोधी पार्टी भाजपा के बजाय कांग्रेस में भीतर का संघष तेज हो गया है। खासकर एक गुट में मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह व नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश तो दूसरे गुट में पूर्व सीएम हरीश रावत व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के बीच की जंग चरम पर पर पहुंच गयी है और लोक सभा के लिए टिकट इस जंग में अपने खेमे को आगे दिखाने का माध्यम बन गया है। वहीं पौड़ी सीट पर मनीष खंडूड़ी और अल्मोड़ा सीट पर राज्य सभा सांसद अजय टम्टा की सीट को दांव पर लगाकर उन्हें लोक सभा का टिकट देने पर स्थिति कमोबेश साफ बताई जा रही है।
बताया गया है कि खुद चुनाव लड़ने से मना करने के बाद पार्टी अध्यक्ष प्रीतम सिंह टिहरी सीट से अपने पुत्र अभिषेक सिंह के लिए अड़ गये हैं तो पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने भी प्रीतम के खिलाफ ताल ठोंक दी है। वहीं पूर्व सीएम हरीश रावत हरिद्वार की जगह नैनीताल सीट के लिए अड़ गये हैं, जबकि यहां नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश ने उनके खिलाफ मोर्चा लिया हुआ है। उल्लेखनीय है कि हरीश रावत पर हमेशा धमकियां देकर पार्टी को झुकाकर कांग्रेस को ‘हरीश कांग्रेस’ बनाने के आरोप लगते रहे हैं, अब एक बार फिर हरीश रावत ने धमकी दे दी है कि यदि उन्हें नैनीताल से टिकट न दिया गया तो वे पार्टी के लिए चुनाव प्रचार भी नहीं करेंगे। ऐसे में टिहरी और नैनीताल सीट के लिए दोनों धड़ों के बीच समझौता करने यानी हरीश को नैनीताल और प्रीतम के पुत्र अभिषेक को टिहरी से टिकट देने के लिए मनाने की तैयारी की जा रही है। ऐसा होता है तो हरिद्वार सीट के लिये आखिरी समय में कोई नया प्रत्याशी लाना पड़ सकता है और ऐसा करना हरिद्वार भाजपा को गिफ्ट में देने जैसा हो सकता है।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 21 मार्च 2019। यूं हाल ही में राजनीतिक पदार्पण करते हुए कांग्रेस की महासचिव बनायी गयी और राजनीतिक तौर पर काफी मजबूत बताई गयी प्रियंका गांधी का पहला राजनीतिक कदम उत्तराखंड की राजनीति को काफी प्रभावित करने वाला साबित हो रहा है। प्रियंका के पहले राजनीतिक कदम यूपी में भीम सेना के प्रमुख चंद्रशेखर उर्फ रावण के दर पर गये, जिससे बसपा प्रमुख मायावती ऐसी उखड़ीं कि कांग्रेस से हर तरह से राजनीतिक तौर संबंध विच्छेद कर दिये। उत्तराखंड में भी कांग्रेस को अलग कर सपा-बसपा के गठबंधन के तहत प्रत्याशियों की घोषणा कर दी। पौड़ी की सीट सपा को देकर शेष सीटों पर बसपा के प्रत्याशी घोषित कर दिये। इससे खासकर सपा-बसपा के प्रभाव वाली हरिद्वार और नैनीताल-ऊधमसिंह नगर सीटों पर कांग्रेस की राजनीति प्रभावित कर दी है। खासकर हरिद्वार से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के कदम ठिठका दिये हैं। क्योंकि हरिद्वार सीट से 2004 में सपा लोकसभा का चुनाव जीत भी चुकी है। और 2002 में यहीं से बसपा को 10.93 प्रतिशत मतों के साथ सात तथा 2007 में हरिद्वार की 6 और ऊधमसिंह नगर की 2 सहित कुल 8 सीटों पर जीत मिली थी। 2012 में बुरे प्रदर्शन के बावजूद बसपा ने तीन विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की।
ऐसे में हरीश रावत हरिद्वार से रणछोड़ साबित होकर वापस नैनीताल की सीट से टिकट मांग रहे हैं। उनके एक समर्थक विधायक हरीश धामी ने तो रावत को नैनीताल से टिकट न मिलने पर विधायकी से इस्तीफा देने की घोषणा भी कर दी है।

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p style=”text-align: justify;”>-भाजपा में मोदी, शाह के साथ ही इन स्टार प्रचारकों की फौज तो कांग्रेस घर के जुगनुओं के ही भरोसे
नैनीताल। लोक सभा चुनाव के लिए भले भाजपा-कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा न की हो, परंतु अब जबकि नामांकन के लिए वास्तविक तौर पर केवल दो दिन-23 व 25 अप्रैल की तिथियां ही बची हैं। ऐसे में भाजपा-कांग्रेस दोनों ने अपने स्टार प्रचारकों के नामों पर भी अंतिम मंथन शुरू कर दिया है। पिछले दिनों रुद्रपुर के कार्यक्रम के बावजूद मोदी के यहां न पहुंच पाने और योगी आदित्यनाथ के हल्द्वानी में कार्यक्रम के बावजूद न पहुंच पाने की स्थितियों के बाद अब भाजपा की कोशिश इसकी भरपाई की भी है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी आगामी 28 मार्च को रुद्रपुर आ सकते हैं। वहीं इसके अलावा मोदी का एक कार्यक्रम देहरादून या हरिद्वार में से किसी एक स्थान पर लगाने की भी कोशिश की जा रही है।
इसके अलावा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली हल्द्वानी में और मोदी के हल्द्वानी आने पर अल्मोड़ा में शाह की रैली हो सकती है। माना जा रहा है कि मोदी व शाह की कुमाऊं मंे इन दो रैलियों से ही भाजपा नैनीताल-ऊधमसिंह नगर सीट के 17 लाख और अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ सीट के 11 लाख मतदाता भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में प्रभावित किये जा सकते हैं। इसके अलावा भाजपा के स्टार प्रचारकों में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, पूर्व सेना प्रमुख और केंद्रीय मंत्री वीके सिंह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, हेमा मालिनी और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी भी शामिल हैं। वहीं देहरादून में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की रैली से पहले ही राज्य में चुनावी शंखनाद कर चुकी कांग्रेस के पास अब कोई बड़ा राष्ट्रीय स्तर का नेता नहीं बचा है। सोनिया गांधी का स्वास्थ्य कारणों से तो प्रियंका गांधी का यूपी में व्यस्त होने की वजह से उत्तराखंड आने का कोई कार्यक्रम बनने की संभावना फिल्हाल बिलकुल क्षींण है। ऐसे में कांग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह, नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश और पार्टी के राज्य प्रभारी अनुग्रह नारायण के भरोसे ही रह सकती है।

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-कोश्यारी के टिकट पर टिकीं कांग्रेस की निगाहें, भगतदा नैनीताल से नहीं उतरे तो नैनीताल से लड़ेंगे हरीश रावत

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 मार्च 2019। कांग्रेस में पांचों सीटों को लेकर प्रत्याशियों की तस्वीर साफ हो गयी है, लेकिन नैनीताल सीट को लेकर अभी प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की जा रही है। कांग्रेस के जिम्मेदार सूत्रों का कहना है कि भगत सिंह कोश्यारी के चलते अभी दो सीटों पर निर्णय नहीं हो पा रहा है। उल्ललेखनीय हैै कि इससे पूर्व नैनीताल सीट के लिये अजय भट्ट द्वारा अपने समर्थकों को ‘जुटने’ का इशारा भी कर दिया था। किंतु यह भी सच्चाई है कि नामांकन के लिये केवल आज 23 मार्च व 25 मार्च की तिथियां ही बची हैं और अब तक भाजपा-कांग्रेस के किसी संभावित प्रत्याशी ने नामांकन पत्र भी नहीं खरीदे हैं।

उल्लेखनीय है कि नैनीताल के वर्तमान सांसद भगत सिंह कोश्यारी चुनाव लड़ने में अनिच्छा जता चुके हैं। ऐसे में इस बात पर असमंजस की स्थिति है कि भाजपा वहां से भगतदा को ही उतारती है या फिर प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को उम्मीदवार बनाती है। इसी पर कांग्रेस का सारा गुणा-भाग चल रहा है। बताया जा रहा है कि हरीश रावत ने दो जगह नैनीताल और हरिद्वार से दावेदारी की है। अगर कोश्यारी को भाजपा नैनीताल से उतारती है तो रावत हरिद्वार से लड़ेंगे और अगर भाजपा कोश्यारी के बजाय किसी को और को नैनीताल में प्रत्याशी बनाती है तो हरीश रावत नैनीताल से लड़ेंगे। सूत्रों का कहना है कि भाजपा का पेंच भी नैनीताल पर ही फंसा हुआ है। इस सीट पर भगत सिंह कोश्यारी को सबसे मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि भाजपा इस चुनाव में किसी भी सीट पर रिस्क लेने की स्थिति में नहीं है और हर सीट पर सबसे मजबूत दावेदार पर ही दांव लगाने के लिए पार्टी पहले ही तय कर चुकी है। कोश्यारी द्वारा चुनाव लड़ने से अनिच्छा जताने के पीछे यह भी बताया जा रहा है कि उन्हें केंद्र में मंत्री बनाते-बनाते पार्टी ने निर्णय बदल दिया था। इस बात से वे आहत भी बताये जा रहे हैं। बताया तो यह भी जा रहा है कि वे पार्टी के निर्णय को मानेंगे और सरकार बनने की स्थिति में अपने मंत्री पद को पक्का करना चाहते हैं। बहरहाल भाजपा नैनीताल पर क्या निर्णय लेती है यह तो प्रत्याशियों की घोषणा के बाद ही सामने आएगा, लेकिन इसकी वजह से कांग्रेस भी अधर में लटकी हुई है।

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, देहरादून, 18 मार्च 2019। सोमवार को उत्तराखंड में पांचों संसदीय सीटों पर पहले चरण में 11 अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिये आज अधिसूचना जारी होने के साथ ही नामांकन पत्र भरने की प्रक्रिया शुरू हो गयी। पूरे दिन खासकर भाजपा व कांग्रेस के द्वारा अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की गयी। पहले दिन आज किसी भी प्रत्याशी ने अपना नामांकन पत्र नहीं भरा लेकिन पांचों सीटों, हरिद्वार, टिहरी, पौडी, अल्मोडा और नैनीताल पर 48 उम्मीदवारों ने फार्म खरीदे। इन फार्मों से खासकर पौड़ी सीट पर भाजपा-कांग्रेस के संभावित प्रत्याशियों के बारे में बात काफी साफ हो गयी।
दरअसल यहां नामांकन पत्र खरीदने वालों में प्रमुख रूप से कांग्रेस की तरफ से मनीष खंडूरी और भाजपा की तरफ से पार्टी के राष्ट्रीय सचिव तीरथ सिंह रावत शामिल रहे। माना जा रहा है कि दोनों अपने दलों से प्रत्याशी घोषित हो सकते हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी सौजन्या ने बताया कि पांचों सीटों पर चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्याशी 25 मार्च तक हर कार्य दिवस पर प्रातः 11 बजे से लेकर अपराह्न तीन बजे तक नामांकन पत्र भर सकेंगे।

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नवीन समाचार, नई दिल्ली, 17 मार्च 2019। उत्तराखंड में सभी पांच सीटों पर पहले चरण में 11 अप्रैल को मतदान होना है। इसके लिए सोमवार 18 मार्च से ही नामांकन प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी। यह प्रक्रिया शुरू होने के लिए जबकि अब कुछ ही घंटों का समय शेष है, सत्तारूढ़ भाजपा व कांग्रेस दोनों दलों की ओर से प्रत्याशियों की घोषणा में देरी हो रही है। दोनों दल इस हेतु ‘पहले आप, पहले आप’ की रणनीति पर भी चलते नजर आ रहे हैं, ताकि दूसरे दल के प्रत्याशी के आधार पर अपने प्रत्याशी तय कर सकें। बहरहाल, दोनों पार्टियों से जुड़े भरोसेमंद उच्च पदस्थ सूत्रों मिली जानकारी के अनुसार निम्न प्रत्याशियों को टिकट देने की घोषणा किसी भी समय हो सकती है।

भाजपा:
अल्मोड़ाः अजय टम्टा
हरिद्वार: डा. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’
टिहरी: महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह
नैनीताल: अजय भट्ट
पौड़ी: तीरथ सिंह रावत

कांग्रेस:
अल्मोड़ा: प्रदीप टम्टा
हरिद्वार: हरीश रावत
नैनीताल: डा. महेंद्र पाल
पौड़ी : मनीश खंडूड़ी
टिहरी: प्रीतम सिंह

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 15 मार्च 2019। चुनावों में बार-बार मतदाताअ सूचियों को बदलने की वजह से अनेक लोगों के नाम छूट जाने की अक्सर आने वाली शिकायतों का मामला उत्तराखंड उच्च न्यायालय के दरबार में पहुंच गया है। इस संबंध में देहरादून निवासी रविन्द्र जुगरान ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में नाम छूटने की शिकायत के साथ ही मतदाता पहचान पत्रों को आधार कार्ड से जोड़ने की मांग भी की गयी है। न्यायमूर्ति आलोक सिंह की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई की। इस दौरान केंद्रीय चुनाव आयोग के अधिवक्ता के मौजूद नहीं होने के कारण एकलपीठ ने सुनवाई की अगली तिथि सोमवार की तिथि नियत कर दी है।
जुगरान ने याचिका दायर कर कहा है कि पिछले विधान सभा के चुनाव में लाखों लोगांे ने वोट दिया था परंतु निकाय चुनाव में उन में में से कई के नाम बिना उनको सुने हटा दिये गये, जोकि भारतीय सम्विधान के अनुच्छेद 326 व जनप्रतिनिधि कानून के विरुद्ध है। इस संबंध में याची ने 19 दिसंबर 2018 को राज्य निर्वाचन आयोग को प्रत्यावेदन भी दिया था, जिस पर आयोग ने जाँच करने को भी कहा है। उन्होंने देश भर में लागू जीएसटी की तरह मतदाता पहचान पत्रों को आधार से जोड़ने की मांग की है। साथ ही कहा है कि निकाय, विधानसभा व लोक सभा चुनावों में हर बार अलग-अलग मतदाता सूचियां तैयार करना नियम विरुद्ध है। आधार से जुड़ने पर बार-बार सूचियों को बदलने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी, और जनता का पैंसा भी बचता।

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p style=”text-align: justify;”>-‘बेहतर भारत’ एजेंडे के साथ विद्यार्थियों के बीच जाएगी एनएसयूआई
नवीन समाचार, नैनीताल, 12 मार्च 2019। भाजपा के ‘राष्ट्रवाद’ के बरक्श कांग्रेस पार्टी भी पार्टी की नई बनीं महासचिव प्रियंका बाड्रा गांधी के आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनगर दिये नये ‘देशभक्ति’ के एजेंडे की राह पर चलने वाली है। वहीं कांग्रेस पार्टी का छात्र संगठन एनएसयूआई भी इसी रणनीति पर ‘बेहतर भारत एजेंडे’ की राह पर चलेगा। बुधवार को एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव व नैनीताल जिला प्रभारी गोपाल मोहन भट्ट ने नगर के माल रोड स्थित शालीमार होटल में संगठन कार्यकर्ताओं की बैठक ली और संदेश दिया कि सभी कार्यकर्ता ‘बेहतर भारत’ एजेंडे के साथ विद्यार्थियों के बीच जाएंगे और कॉलोजों की समस्याओं को दूर करेंगे। साथ ही उन्होंने आगामी 16 मार्च को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के उत्तराखंड आगमन पर सभी कार्यकर्ताओं से देहरादून पहुंचने का आह्वान भी किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने डीएसबी परिसर के छात्र संघ चुनाव में एनएसयूआई प्रत्याशी ललित बोरा के खिलाफ काले झंडे लेकर चुनाव लड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, इसे भट्ट ने स्वीकार करते हुए कहा कि संगठन विरोधी लोगों को कतई बर्दास्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने एनएसयूआई की नगर कार्यकारिणी को भंग करने की घोषणा भी की और कहा कि अतिशीघ्र नई कार्यकारिणी बनाई जाएगी। बैठक में जिला महासचिव शार्दूल नेगी, सोहित चंद्र, नीरज बोरा सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूर रहे।

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2 thoughts on “उत्तराखंड के इतिहास में मोदी की सुनामी में बह गए उत्तराखंड के कई मिथक

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