News

हिमालयी राज्यों पर मंडरा रहे इस बड़े खतरे की वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी

0 0

यहाँ से दोस्तों को भी शेयर करके पढ़ाइये
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
Read Time:9 Minute, 30 Second

हिमालयी राज्यों पर मंडरा रहा है ये बड़ा खतरा, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनीअंतर्राष्ट्रीय पत्रिका ‘एन्वायरमेंटल रिसर्च लेटर्स’ में वैज्ञानिकों ने भारत के बड़े भू-भाग के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। चेतावनी दी है कि बढ़ती गर्मी एवं उमस के संयुक्त प्रभाव से भारत का उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिमी बंगाल, दार्जिलिंग, सिक्किम एवं अरुणाचल प्रदेश) 21वीं सदी के अंत तक हीट स्ट्रेस से प्रभावित होने वाला दुनिया का सबसे प्रमुख क्षेत्र होगा। कोलंबिया विश्वविद्यालय की ‘नासा गोडार्ड इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस स्टडीज एवं सेंटर फार इंटरनेशनल अर्थ साइंस इन्फार्मेशन नेटवर्क’ के वैज्ञानिकों के जनवरी 2018 में प्रकाशित शोध पत्र में बढ़ती गर्मी का सबसे बड़ा खतरा हिमालयी पर्वत श्रंखला को बताया गया है। हिमालय भले ही एशिया के आठ देशों की सीमाओं तक विस्तार लिए हुए है, लेकिन सबसे अधिक खतरा भारतीय हिमालय पर ही मंडरा रहा है।

ऐसी संभावना भी है कि सदी के मध्य अथवा उत्तरार्ध में गर्माहट सहन करने की मानव क्षमता ही बेहद कम हो जाएगी। गोविंद बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय के पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. वीर सिंह का कहना है कि शोध हमें चेता रहे है। हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन गंभीर चेतावनी है। इस पर अभी ध्यान नहीं दिया गया तो बाद में बहुत देर हो जाएगी।

हैरान करने वाले आंकड़े

वायुमंडल में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा बढ़कर 410 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) हो चुकी है, जो कि खतरे की घंटी है। यह 18वीं शताब्दी के अंत में 280 पीपीएम मापी गई थी। इस गर्माहट के सबसे अधिक शिकार हिमालय हो रहा हैं।

तप रहा है हिमालय 

जीबी पंत विवि के शोधार्थी श्रेष्ठा, गौतम एवं बावा के शोधपत्र के अनुसार 1982 से 2006 तक हिमालय का तापक्रम 1.5 डिग्री सेल्सियस अर्थात 0.6 डिग्री प्रतिवर्ष की दर से बढ़ा, जो अत्यंत गंभीर है। उत्तराखंड में सार्वभौमिक गर्माहट की स्थानीय हलचल खतरे की ओर संकेत करती है। वर्ष 1911 में यहां का औसत तापमान 21.0 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता था, जो अब बढ़कर 23.5 डिग्री सेल्सियस हो गया है।

तीन लाख करोड़ की पर्यावरणीय सेवाएं दे रहा है उत्तराखंड
  • पर्यावरण संरक्षण के जरिये देश की आबोहवा को शुद्ध और सांस लेने लायक बनाने में उत्तराखंड अहम योगदान दे रहा है उत्तराखंड
खुद तकलीफें झेलकर पर्यावरण संरक्षण के जरिये देश की आबोहवा को शुद्ध और सांस लेने लायक बनाने में उत्तराखंड अहम योगदान दे रहा है। नियोजन विभाग की ओर से इको सिस्टम सर्विसेज को लेकर कराए जा रहे अध्ययन के प्रारंभिक आकलन को देखें तो विषम भूगोल वाला यह राज्य करीब तीन लाख करोड़ की पर्यावरणीय सेवाएं दे रहा है। इसमें अकेले यहां के वनों का योगदान 98 हजार करोड़ के लगभग है। 71.05 फीसद वन भूभाग वाले उत्तराखंड में जंगलों को सहेज पर्यावरण संरक्षण यहां की परंपरा का हिस्सा है। यही वजह भी है कि यहां के जंगल अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित हैं। कुल भूभाग का लगभग 46 फीसद फॉरेस्ट कवर इसकी तस्दीक भी करता है। इससे न सिर्फ पहाड़ महफूज हैं, बल्कि पर्यावरण के मुख्य कारक हवा, मिट्टी व पानी भी। यही नहीं, गंगा-यमुना जैसी जीवनदायिनी नदियों का उद्गम भी उत्तराखंड ही है। हर साल ही वर्षाकाल में बड़े पैमाने पर यहां की नदियां अपने साथ बहाकर ले जाने वाली करोड़ों टन मिट्टी से निचले इलाकों को उपजाऊ माटी देती आ रही है। ऐसे में सवाल अक्सर उठता है कि आखिर यह राज्य सालाना कितने की पर्यावरणीय सेवाएं दे रहा है। पूर्व में इसे लेकर 107 बिलियन रुपये का अनुमान लगाया गया था, लेकिन बाद में राज्य सरकार ने खुद इसका आकलन कराने का निश्चय किया। नियोजन विभाग के जरिये इको सिस्टम सर्विसेज को लेकर सालभर से यह अध्ययन चल रहा है। अब इसके प्रारंभिक आंकड़े सामने आने लगे हैं। इको सिस्टम सर्विसेज को लेकर चल रहे अध्ययन के नोडल अधिकारी मनोज पंत के मुताबिक राज्य के वनों से ही अकेले 98 हजार करोड़ रुपये की सालाना पर्यावरणीय सेवाएं मिलने का अनुमान है। जंगलों के साथ ही नदी, सॉयल समेत अन्य बिंदुओं को भी शामिल कर लिया जाए तो इन सेवाओं का मोल लगभग तीन लाख करोड़ से अधिक बैठेगा। उन्होंने कहा कि अभी अध्ययन चल रहा है और फाइनल रिपोर्ट आने पर ही पर्यावरणीय सेवाओं के मोल की असल तस्वीर सामने आएगी। (केदार दत्त)

About Post Author

नवीन समाचार

‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
नवीन समाचार
‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
https://navinsamachar.com

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

loading...