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एक्सक्लूसिव: अपर शिक्षा निदेशक डा. सती की डिग्रियों की फिर जांच के आदेश

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अपर शिक्षा निदेशक डा. मुकुल कुमार सती।

नवीन समाचार, नैनीताल, 6 अप्रैल 2019। कुमाऊं मंडल के अपर शिक्षा निदेशक की डिग्रियों की एक बार पुनः जांच के आदेश दिये गये हैं। उत्तराखंड सीएम हेल्पलाइन 1905 पर हल्द्वानी निवासी भास्कर बृजवासी ने आरोप लगाया है कि सती के द्वारा वर्ष 1989-90 में हल्द्वानी में नौकरी करते हुए अल्मोड़ा के कॉलेज से बीएडी की संस्थागत छात्रों के रूप में डिग्री तथ्यों को छुपाकर व जालसाजी से प्राप्त की गयी, तथा इस डिग्री की आढ़ पर माध्यमिक शिक्षा के अपर निदेशक का पद प्राप्त किया है। एसएसपी नैनीताल के 31 जनवरी 2019 को आदेश के बावजूद शिक्षा विभाग इस पर कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है। पुलिस जांच में फर्जीवाड़ा साबित हुआ है और माध्यमिक शिक्षा सचिव के द्वारा इस मामले को दबाया जा रहा है। इस शिकायत पर 5 अप्रैल को अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा उत्तराखंड को जांच अधिकारी नामित करते हुए प्रकरण की जांच कर जांच आख्या प्रस्तुत करने को कहा गया है।
उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों भी तब इसी शिकायतकर्ता के द्वारा इसी तरह की शिकायत पर अपर निदेशक पद से हटाकर डायट के प्राचार्च बनाये गये डा. मुकुल सती के मामले की जांच एसएसपी नैनीताल के द्वारा की गयी थी। इसके बाद एसएसपी ने 50 पेज की जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेज दी थी। बताया गया था कि इतनी लंबी जांच रिपोर्ट के बावजूद कुछ भी साफ तौर पर नहीं बताया गया। इसके बाद ही उनकी अपर शिक्षा निदेशक-माध्यमिक के पद पर वापसी हुई थी। इधर पूछे जाने पर डा. सती ने कहा कि कई बार उनकी डिग्री की जांच हो चुकी है, और हर बार उन्हें क्लीन चिट मिली है। बावजूद शिकायतकर्ता निजी कारणों से बार-बार अलग-अलग स्तर पर शिकायत करते रहते हैं। वे हमेशा जांच को तैयार हैं।

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नवीन समाचार नैनीताल 5 फरवरी 2019। डायट के प्राचार्य डॉ मुकुल सती की डिग्री के मामले में एसएसपी नैनीताल ने 50 पन्ने की जांच रिपोर्ट तैयार कर पुलिस मुख्यालय को भेज दी है। लेकिन इतनी लंबी रिपोर्ट के बावजूद रिपोर्ट में कुछ भी साफ नहीं है। रिपोर्ट में वही बातें कही गई हैं जो हम पहले भी कह चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार कुमाऊं विश्वविद्यालय ने अल्मोड़ा से B.Ed की डिग्री करने की बात कही है लेकिन यह साफ नहीं है यह डिग्री नियमानुसार ली गई है अथवा नहीं।

कुमाऊं विवि ने डॉक्टर पंत को B.Ed की डिग्री करने की बात स्वीकार की है, अलबत्ता विवि ने इस मामले में पल्ला झाड़ते हुए साफ कर दिया है कि यदि कोई भी व्यक्ति तथ्यों को छिपाता है तो वह उसकी जिम्मेदारी है। कुमाऊं विवि सीनेट सदस्य हुकुम सिंह कुंवर की ओर से शिकायती पत्र कुलाधिपति को भेजा गया था। वहां से मामला डीजीपी तक पहुंचा तो एसपी शिकायत प्रकोष्ठ द्वारा मामले को एसएसपी नैनीताल को जांच के लिए भेजा गया। मल्लीताल कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक द्वारा डिग्री मामले की जांच करवा कर रिपोर्ट एसएसपी को भेजी गई है। एसएसपी ने 31 जनवरी को मुख्यालय को रिपोर्ट भेज दी। जिसमें कहा गया है कि डॉ मुकुल सती द्वारा 1989 में अस्थाई अध्यापक रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान के पद पर कार्य कर मानदेय प्राप्त किया। जिसकी पुष्टिï उपस्थिति पंजिका व मानदेय रसीद से होती है। छह जुलाई 1990 को प्रवक्ता रसायन विज्ञान में नियुक्ति ली। बीएड की डिग्री मामले में रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि अल्मोड़ा कंसल्टेंसी कॉलेज अल्मोड़ा की सत्र 1989-90 की की उपस्थिति पंजिका उपलब्ध नहीं होने की वजह से यह नहीं कहा जा सकता कि सती द्वारा किस-किस तारीख को अल्मोड़ा कॉलेज जाकर कक्षाएं ली गई। जब कुमाऊं विवि से इस संबंध में संपर्क साधा गया तो विवि द्वारा बताया गया कि डिग्री विवि से जारी है। विवि ने साफ किया है कि कोई भी व्यक्ति यदि तथ्यों को छिपाकर डिग्री हासिल करता है तो यह उसकी जिम्मेदारी है। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि हरिदत्त इंटर कॉलेज हल्द्वानी में जुलाई 1989 से 1990 तक डॉ सती द्वारा विद्यालय से मानदेय प्राप्त किया गया है, लेकिन विद्यालय द्वारा सती का अस्थाई अध्यापक पद पर कोई नियुक्ति का आदेश उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसी साल सती द्वारा अल्मोड़ा से बीएड की डिग्री हासिल की गई मगर कॉलेज से उपस्थिति पंजिका उपलब्ध नहीं हुई। एसएसपी ने रिपोर्ट को संलग्न करते हुए मामले की जांच शिक्षा विभाग को रेफर कर दिया है। यहां उल्लेखनीय है कि इस मामले की लोकायुक्त उत्तराखंड, प्रमुख सचिव शिक्षा से जांच हो चुकी है, जिसमें सती को क्लीन चिट मिल चुकी है। पूर्व में एसएसपी नैनीताल द्वारा भी जांच हुई मगर उसका नतीजा भी सती के पक्ष में रहा। सती का साफ कहना है कि शिकायतकर्ता के निजी स्वार्थों की पूर्ति नहीं हुई, इसलिए उसके द्वारा बेवजह परेशान किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें : डायट के प्राचार्य डा. सती पर लगे फर्जी बीएड की डिग्री के आरोपों का पूरा सच

-कोतवाली पुलिस ने अब तक शिकायत दर्ज नहीं की है, अलबत्ता उपनिरीक्षक आशा बिष्ट से जांच तलब की है, आगे संबंधित विभाग को जांच संदर्भित करने की है तैयारी
नवीन समाचार, नैनीताल, 24 जनवरी 2019।
डायट भीमताल के प्राचार्य व कुमाऊं मंडल के पूर्व अपर शिक्षा निदेशक डा. मुकुल सती की कथित अवैध बीएड की डिग्री के मामले में राज्यपाल तक पहुंची शिकायत पर मामला परीक्षण के लिए नैनीताल एसएसपी और वहां से कोतवाली को भेजा गया है। अलबत्ता नगर कोतवाल विपिन चंद्र पंत ने कहा कि मामला विभागीय नियमों से संबंधित है, इसलिए मामले को अभी दर्ज नहीं किया गया है, बल्कि जांच तलब रखा गया है और जांच उप निरीक्षक आशा बिष्ट को सोंपी गयी है। मामले को प्रारंभिक जांच पड़ताल के बाद शिक्षा विभाग एवं कुमाऊं विश्वविद्यालय को भेजे जाने की तैयारी है।
इधर शिकायत के अनुसार डा. सती ने हल्द्वानी के एचएन इंटर कॉलेज में इंटर-विज्ञान वर्ग की मान्यता मिलने पर रसायन व जीव विज्ञान के प्रवक्ता के रूप में 19 जुलाई 1989 से 14 मई 1990 तक नियमित रूप से नौकरी कर अध्यापन कार्य कर रहे थे और नियमित तौर पर उपस्थित पंजिका में हस्ताक्षर भी कर रहे थे। ऐसे में वे इसी दौरान 100 किमी दूर कुमाऊं विवि के अल्मोड़ा परिसर से बीएड की कक्षा में 75 फीसद की उपस्थिति दर्ज करके कैसे बीएड की डिग्री भी हासिल कर सकते हैं, जबकि दोनों संस्थानों के खुलने व बंद होने का समय भी एक ही है।

आरोप लगाने वाले बताये जा रहे कुंवर मुकरे
नैनीताल। डायट भीमताल के प्राचार्य व कुमाऊं मंडल के पूर्व अपर शिक्षा निदेशक डा. मुकुल सती की कथित अवैध बीएड की डिग्री के मामले में शिकायतकर्ता बताये जा रहे कुमाऊं विवि के सीनेट सदस्य हुकुम सिंह कुंवर आरोपों से मुकर गये हैं। उनका कहना है कि वह शिकायतकर्ता नहीं हैं। उन्हें हल्द्वानी निवासी कुमाऊं विवि के स्नातक एवं अधिवक्ता भास्कर बृजवासी ने करीब छह माह पूर्व एक शिकायती पत्र दिया था। जिसमें कहा गया था कि डॉ. मुकुल सती ने 1989-90 में नौकरी के साथ कुमाऊं विवि के अल्मोड़ा परिसर से संस्थागत छात्र के रूप में बीएड किया। उन्होंने इस शिकायती पत्र को ऐसी अन्य शिकायतों की तरह ही कवरिंग लेटर संलग्न कर राज्यपाल के पास भेज दिया था। जिस पर राज्यपाल के स्तर से नैनीताल के एसएसपी एवं वहां से मल्लीताल कोतवाल को जांच के लिए कहा गया है।

शिकायतकर्ता भास्कर बृजवासी।

शिकायत गलत है तो मेरे खिलाफ मुकदमा दर्ज करायें : बृजवासी
नैनीताल। इधर शिकायतकर्ता भास्कर बृजवासी का कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री के सचिव, कुमाऊं आयुक्त एवं नैनीताल के डीएम को ज्ञापन देकर चुनौती देते हुए कहा है कि डा. मुकुल कुमार सती ने हल्द्वानी में नौकरी करते हुए 100 किमी दूर अल्मोड़ा से संस्थागत छात्र के रूप में बीएड की डिग्री हासिल नहीं की है, यानी उनकी शिकायत गलत है तो शिकायतकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने पुलिस को सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने की बात करते हुए सवाल उठाया कि नैनीताल पुलिस क्यों मामले को दबा रही है। उनका दावा है कि उनके बीएड करने के दौरान ही 19 जुलाई 1989 से 14 मई 1990 तक प्रबंधकीय व्यवस्था के अंतर्गत 500 रुपये प्रति विषय के मानदेय पर नियमित रूप से नौकरी करने के उपस्थिति पंजिका में हस्ताक्षर जैसे प्रमाण उनके पास उपलब्ध हैं। उन्होंने डा. सती के विरुद्ध पूर्व में हुई जांच को भी नियमविरुद्ध करार देते हुए कहा कि जांच के दौरान शिकायतकर्ता को नहीं बुलाया गया, एवं उत्तराखंड शासन के नियमों के अनुसार शपथ पत्र पर शिकायत भी नहीं ली गयी।

डा. मुकुल कुमार सती।

बीएड की डिग्री लेने के बाद हुई नियुक्ति, फर्जी पत्रिका में विज्ञापन की वजह से पीछे पड़ा है शिकायतकर्ताः सती
नैनीताल। पूरे मामले में आरोपित डायट के प्राचार्य व कुमाऊं मंडल के पूर्व अपर शिक्षा निदेशक डा. मुकुल सती का कहना है कि उन्होंने 1989-90 के सत्र में अल्मोड़ा से बीएड की डिग्री ली है। सत्र जून तक चलता है, यानी जून 1990 तक चला। इसके बाद 5 जुलाई 1990 को उनकी नियुक्त के लिए शासन से अनुमोदन मिला है तथा 6 जुलाई 1990 से उन्होंने प्रबंधन के अंतर्गत नौकरी शुरू की है। वे बीएड की डिग्री करने के दौरान न सरकारी नौकरी में थे, और ना ही उन्होंने कोई सरकारी वेतन लिया है। पूर्व में हुई जांचों में आरोप गलत साबित हुए हैं। इससे पूर्व पढ़ाये जाने के शिकायतकर्ता के दावों पर उन्होंने कहा कि इस तिथि से पूर्व पद का अनुमोदन ही नहीं था, इसलिये वह नियुक्ति नहीं थी। बताया कि वह सरकारी नौकरी में 1999 में आये हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता ने 1999-2000 में ‘द आर्टिकल’ नाम की पत्रिका में विज्ञापन लिया था। इस पत्रिका के विज्ञापन का भुगतान उन्होंने रोक दिया था। इसलिये वह उनके पीछे पड़ा है। यह पत्रिका जिला सूचना अधिकारी की जांच में फर्जी पायी गयी थी।

यह भी पढ़ें : हद है, कानून तोड़कर कानून की पढ़ाई कर रहे हैं केंद्रीय संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी

-एसएसजे परिसर अल्मोड़ा का मामला, पांचवे सेमेस्टर में हैं वर्तमान में, विधि संकाय एवं केंद्रीय संस्थान की ओर से नियमों में भारी हीलाहवाली

प्रशासनिक अधिकारी अनिल कुमार यादव का शपथ पत्र।

नवीन जोशी, नवीन समाचार, नैनीताल, 10 जनवरी 2019। कुमाऊं विश्वविद्यालय के एसएसजे परिसर के विधि संकाय में नियम विरूद्ध तरीके से प्रवेश करने का मामला आया है। निकटवर्ती कोसी कटारमल स्थित गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी अनिल कुमार यादव ने पद पर रहते हुए नियम कानूनों को ताक में रखकर विधि संकाय में नियमित छात्र के रूप में विधि की शिक्षा ले रहे हैं। खास बात यह भी है कि यादव ने प्रवेश के समय अपने स्वघोषित पत्र में लिखा है कि वह किसी संस्थान में कार्यरत नहीं है। उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय मंे किसी भी नियमित पाठ्यक्रम में छात्रों को विश्व विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के अनुसार वर्ष में 75 फीसद उपस्थिति होनी अनिवार्य होती है, जो कि किसी राजकीय कर्मचारी के लिए कार्य पर रहते हुए संभव नहीं हो सकता।
सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी से यह खुलासा हुआ है। खास बात यह भी है कि कुमार ने किसी भी संस्थान में कार्य नहीं करने के कॉलम को तो नहीं काटा है, किंतु प्रवेश के साथ नीचे छोटे अक्षरों में ‘एनओसी अटैच्ड’ यानी अनापत्ति संलग्न होने की बात भी लिखी है। लिहाजा दोनों बातें विरोधाभासी हैं। इस विरोधाभास पर एसएसजे परिसर की प्रवेश समिति का गौर नहीं करना भी सवाल खड़े कर रहा है।
खास बात यह भी है कि एक केंद्रीय संस्थान में नौकरी कर रहे प्रशासनिक अधिकारी अनिल कुमार चार सैमेस्टरों की परीक्षा पास कर चुके हैं, और वे वर्तमान में पांचवे सेमेस्टर के छात्र हैं। यह भी बताया जा रहा है कि पांचवे सेमेस्टर में केवल 12 दिन उपस्थित होने के बावजूद उन्हें यूजीसी के 75 फीसद उपस्थिति के नियमों को ताक पर रखकर परीक्षा देने की अनुमति दे दी गई। जबकि कई विद्यार्थियों को पूर्व में 75 फीसद उपस्थिति न होने पर परीक्षा देने से रोका जा चुका है। यह भी बताया जा रहा है इसी संस्थान की एक महिला कार्मिक भी इसी तरह से विधि की विद्यार्थी के रूप में अध्ययनरत हैं। इस बावत सूचना मांगने वालों की ओर से बार काउंसिल आफ इंडिया में भी शिकायत की गई है। इस संबंध में कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। मामले की पूरी सत्यता के साथ जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ःःइनसेटःः
घोषणा पत्र भी हास्यास्पट
नैनीताल। कोसी कटारमल स्थित गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान के निदेशक की ओर से अपने प्रशासनिक अधिकारी अनिल कुमार यादव को जो अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया गया है उसमें लिखा गया है कि कुमार को नियमित विधि की पढ़ाई करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अलबत्ता वह अवकाश से इसे ‘मैनेज’ कर पढ़ाई कर सकते है। लेकिन वे कैसे ‘मैनेज’ कर सकते हैं, यह नहंी बताया गया है। यानी अनापत्ति न दी जा सकने वाली परिस्थिति में भी दी गयी है।
चित्र परिचयः 10एनटीएल-3ः नैनीताल। प्रशासनिक अधिकारी अनिल कुमार यादव का शपथ पत्र।

यह भी पढ़ें : डिग्रियों के फर्जीवाड़े में कुमाऊं विवि की तहरीर पर ‘केवल इनके’ खिलाफ मुकदमा दर्ज, ‘उन्हें’ छोड़ दिया…

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 जनवरी 2019। कुमाऊं विश्वविद्यालय के फर्जी प्रमाणपत्र मामले में मंगलवार को विवि के कुलसचिव डा. महेश कुमार की ओर से मल्लीताल कोतवाली पुलिस में तहरीर पर मल्लीताल कोतवाली पुलिस ने मुक़दमा दर्ज कर लिया है। खास बात यह है कि मुकदमा केवल फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने वाले 19 नामजदों के खिलाफ दर्ज किया गया है, उन लोगों या गिरोह के खिलाफ नहीं जिन्होंने फर्जी प्रमाण पत्र बनाये हैं। जबकि तहरीर में ‘इसे अज्ञात व्यक्ति जिनके द्वारा यह कृत्य किया गया है, उनके विरुद्ध’ भी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने’ की मांग की गयी थी। मुकदमा अनुज मित्तल, गुरविंदर सिंह, हरप्रीत कौर, अशनीन बजाज, सौरभ गुप्ता, मनप्रीत कौर, अमृतप्रेम, रीटा अमित प्रेमजी, साहिब इकबाल सिंह,अमनिंदर सिंह, अवतार सिंह, संदीप सिंह, जिबनू राठौर, वरुण खुराना करमजीत कौर, करण मेहरा, जोध्रवीर सिंह, नर्मदा पनीर सेलवम व सिमरनजीत कौर के नाम शामिल हैं। इन लोगों के नाम पर कुमाऊं विवि की बीए,  बीटेक  मैकेनिकल,  डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग, बीएससी कंप्यूटर साइंस, एमबीए फाइनेंस,  फाइनेंस एंड मार्केटिंग,  एमबीए  आईटी,  बीसीए, एमसीए, एमबीए प्रोडक्शन मैनेजमेंट, बीकॉम, एमए व बीएससी हेल्थकेयर मैनेजमेंट आदि की फर्जी डिग्रियां बनायी गयी हैं। उल्लेखनीय है कि इनमेंं से कई कोर्स एवं डिग्रियां कुमाऊंं विश्वविद्यालय के द्वारा कराई ही नहीं जाती हैं। तहरीर में फर्जी डिग्रियां बनवाने वाले इन तथा तथा फर्जी डिग्रियां तैयार करने वाले गिरोह के सदस्यों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गयी है। कोतवाल विपिन चंद्र पंत ने बताया कि अज्ञात पते वाले 19 नामजद लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467 व 468 के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है।
उल्लेखनीय है कि विदेश जाने अथवा महत्वपूर्ण नौकरियों के लिए कुछ एजेंसियां निर्धारित शुल्क लेकर डिग्रियों की जांच करवाती हैं। ऐसी भी 2-3 भारतीय के साथ ही कनाडा की वर्ल्ड एजुकेशन सर्विस और आस्ट्रेलिया की ऐसी ही एजेंसियों से हालिया दौर में कुमाऊं विवि के परीक्षा विभाग को मिली डिग्रियों में से 19 लोगों की 21 डिग्रियां जांच में पूरी तरह से फर्जी पायी गयी हैं। बड़े स्तर पर आई फर्जी डिग्रियों पर गंभीर हुए कुमाऊं विवि प्रशासन की कोशिश इन फर्जी डिग्रियों के जरिये उन्हें बनाने वाले गिरोह तक पहुंचने की है। सामान्य देखने में ऐसा लग रहा है कि यह डिग्रियां एक ही गिरोह के द्वारा बनायी गयी हैं। इस कोशिश में कुमाऊं विवि ने संबंधित एजेंसियों को ईमेल के जरिये उन लोगों के पते, संपर्क सूत्र, फोन नंबर आदि की जानकारी पूछी, किंतु करीब 10 दिनों का समय बीतने के बावजूद विवि को किसी भी एजेंसी से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद विवि की ओर से कुलसचिव डा.महेश कुमार मंगलवार को उन 19 लोगों के खिलाफ पुलिस में नामजद तहरीर दी, जिनके नाम फर्जी पायी गयी डिग्रियों में हैं।

पूर्व समाचार : कुमाऊं विवि के फर्जी प्रमाणपत्रों से 45 भारतीयों के विदेश जाने का बड़ा खुलासा…

-विदेश मंत्रालय से जांच को आए 45 प्रमाणपत्र फर्जी निकले, कुविवि के फर्जी लेटरहेड और मुहर से बनाए गए हैं प्रमाणपत्र, विवि इन डिग्रीधारकों के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी में

कुमाऊं विवि की फर्जी अंकतालिका।

नवीन पालीवाल @ नवीन समाचार, नैनीताल, 28 दिसंबर 2018। कुमाऊं विश्वविद्यालय के फर्जी प्रमाणपत्र बनाकर कम से कम 45 लोगों के विदेश जाने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। विदेश मंत्रालय की ओर से सत्यापन के लिए कुमाऊं विश्वविद्यालय को भेजे गए प्रमाण पत्रों में से 45 प्रमाणपत्र जांच में फर्जी पाए गए हैं। सूत्रों के अनुसार विदेश मंत्रालय की ओर से आए संदिग्ध प्रमाणपत्रों में से ज्यादातर प्रमाणपत्र कनाडा तथा अमेरिका जाने के लिए इस्तेमाल किए गए हैं, और अधिकांश बीएड और एमबीए की डिग्री के हैं। अब कुमाऊं विवि प्रशासन इन फर्जी डिग्रीधारकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है।
बताया गया है कि वर्ल्ड एजुकेशन सर्विस (डब्ल्यूईएस) कनाडा, अमेरिका सहित अन्य विदेशी संस्थाओं ने विदेश मंत्रालय के माध्यम से 45 संदिग्ध अंकतालिकाएं और प्रमाण पत्र कुमाऊं विश्वविद्यालय को सत्यापन के लिए भेजे हैं। इनमें बीएड तथा एमबीए के ज्यादातर प्रमाणपत्र हैं। इनमें हरप्रीत कौर, असमीन बजाज, सौरभ गुप्ता, मनप्रीत कौर, अमृतप्रेम आदि के नाम प्रकाश में आये हैं। जांच में पता चला कि ये सभी प्रमाण पत्र कुविवि के फर्जी लेटरहेड और फर्जी मुहर से बनाए गए हैं। इनमें पूर्व कुलपति प्रो. एचएस धामी के फर्जी हस्ताक्षर कुलसचिव के स्थान पर किए गए हैं। जबकि नियमानुसार प्रमाणपत्रों पर कुलसचिव के हस्ताक्षर होते ही नहीं हैं, बल्कि कुलपति तथा परीक्षा नियंत्रक के हस्ताक्षर होते हैं। दावा है कि प्रमाणपत्र पर लगे मुहर तथा हस्ताक्षरों की नकल विवि की वेबसाइट से की गई है। कुविवि के नाम पर फर्जी प्रमाणपत्र बनाने का खुलासा होने के बाद अब विवि प्रशासन कर्रवाई करने की तैयारी में है। बताया गया है कि राज्य गठन से पूर्व भी ऐसे मामले सामने आए थे। जिसमें कुविवि के फर्जी दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे। विवि प्रशासन की ओर से कार्रवाई करते हुए मामले में केस दर्ज किया गया था। जांच शुरू होने के बाद विवि के नाम पर फर्जी प्रमाणपत्रों का यह गोरखधंधा बंद हो गया था। लेकिन एक बार फिर फर्जी डिग्रियों का धंधा सामने आया है। कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल ने कहा है कि इस मामले में फर्जी डिग्री धारकों तथा उन्हें बनाने वालों के नाम, पता समेत अन्य जानकारी एकत्रित की जा रही है। तथा आगे संबंधितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।

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नवीन जोशी

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