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नैनीताल: करोड़ों की बैंक-इंश्योरेंस धोखाधड़ी के मामले में एक गिरफ्तार, एक इंश्योरेंस कंपनी व बड़े गिरोह के शामिल होने का खुलासा

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नैनीताल, 27 सितंबर 2018। नैनीताल जिले की काठगोदाम पुलिस ने बैंक के खाते से 31.72 लाख रुपए की धोखाधड़ी के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने इसी तरह की धोखाधड़ी के जरिये उसके खाते में एक करोड़ से अधिक की धनराशि आने और धोखाधड़ी में मैक्स इंश्योरेंस कंपनी और पूरे एक गिरोह के शामिल होने की बात कही है। आगे देखने वाली बात होगी कि पुलिस पीड़ित को उसके खाते से गयी धनराशि वापस दिला पाती है अथवा नहीं।
मामले के अनुसार 14 सितंबर से 4 अक्टूबर 2015 पीड़ित जनपद के काठगोदाम थानांतर्गत तुलसीनगर पालीशीट निवासी मुकेश जोशी पुत्र गिरीश चन्द्र जोशी निवासी के खाते से 31 लाख 71 हजार 922 रुपये नेट बैंकिंग के जरिये निकाल लिये गये थे, और इस धनराशि को अपने साथियों के अलग-अलग बचत खातों में जमा कर दिया गया था। इस मामले में पीड़ित की तहरीर पर 14 सितंबर 2015 को थाना काठगोदाम में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406, 446, 467, 468 व 471 के तहत अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध मामला पंजीकृत किया गया था। इस 3 वर्ष पुराने मामले में बृहस्पतिवार 27 सितंबर को मनीष कुमार पुत्र रामप्रसाद निवासी ई-3-985 गल्ला मण्डी नौबस्ता थाना बरा मोहल्ला जनता नगर जिला कानपुर उत्तर प्रदेश को मुखबिर की सूचना एवं फोटो के आधार’ पर जमुनानगर हरियाणा के रोडवेड बस अड्डे के पास से गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में आरोपी का कहना है कि वर्ष 2015 में उसने महिंद्रा कोटक बैंक में बचत खाता खोला था, तथा इस खाते का नम्बर कुछ लोगों को दिया था। उन लोगों के द्वारा विभिन्न खातों  से उसके खाते पैसे आते थे, और खाता बंद होने तक उसके खाते में 1 करोड़ 2 लाख 15 हजार 112 रुपए 73 पैंसे आये। इस फर्जीवाड़े में एक पूरा गिरोह काम करता है, जिनको वह नहीं जानता है। उन लोगों का मैक्स  इंश्योरेंस कम्पनी से कांट्रेक्ट था, जहां से उन्हें किसी पॉलिसी धारक की पॉलिसी पूरी होने की सूचना मिलती थी। सूचना प्राप्त होने पर वे पॉलिसी धारक को फोन कर उसके खाते मेे रकम डलवाते थे। आरोपी की गिरफ्तारी में काठगोदाम के थानाध्यक्ष कमाल हसन, उप निरीक्षक दान सिह मेहता, आरक्षी नवीन राणा, मोहन जुकरिया व मोहन नेगी की भूमिका रही है।

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नैनीताल, 4 सितंबर 2018। जिला उपभोक्ता फोरम ने अपनी तरह के दूसरे मामले में बैंक को खातेधारक को उसके एटीएम कार्ड से हुए फ्रॉड के जरिये निकाली गयी 50 हजार से अधिक की धनराशि 5 हजार रुपए मानसिक कष्ट एवं परिवाद व्यय के रूप में चुकाने के आदेश दिये हैं। फोरम के अध्यक्ष यूएस नबियाल, वरिष्ठ सदस्य मंजू कोटलिया एवं सदस्य राजेंद्र परगांई ने मंगलवार को यह आदेश सुनाया कि बैंक को ‘फ्रॉड्यूलेंट ट्रांजेक्शन’ मानते हुए धनराशि खाताधारक को देनी होगी।। मामले के अनुसार मल्लीताल रॉयल होटल कंपाउंड नैनीताल निवासी पार्वती बिष्ट पत्नी स्वर्गीय दर्शन सिंह बिष्ट ने आयोग में शिकायत की थी कि 2 मार्च 2016 को उसके पंजाब नेशनल बैंक के खाते से अज्ञात व्यक्ति के द्वारा 50,020 रुपए धोखे से निकाल लिये गये। उसने तत्काल बैंक शाखा तथा मल्लीताल कोतवाली को इसकी लिखित सूचना दी। बैंक की ओर से धनराशि वापस दिलाने का वादा किया गया, किंतु धनराशि लौटाई नहीं गयी। इस पर उसने वाद दायर किया।

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  • साइबर ठगों ने खाते से निकाले थे 25 हजार, बैंक को ‘फ्रॉड्यूलेंट ट्रांजेक्शन’ मानते हुए धनराशि खाताधारक को देनी होगी
  • बैंक, पुलिस से मिली निराशा के बाद खाताधारक को मात्र 9 माह में उपभोक्ता फोरम से मिला न्याय

नैनीताल, 8 अगस्त 2018। बैंकों के खाताधारकों के साथ अक्सर साइबर ठगी होती है, परंतु बैंक ठगों द्वारा खातों से हड़पी गयी धनराशि लौटाने में सिरे से इंकार कर देता है। लेकिन जिला उपभोक्ता फोरम नैनीताल ने एक ऐसा महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है जोकि आगे भी ऐसे मामलों में नजीर बन सकता है। जिला उपभोक्ता फोरम नैनीताल ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए बैंक को उसके एक खातेदार के खाते से अज्ञात व्यक्ति द्वारा निकाली गयी धनराशि परिवाद व्यय 5000 रुपए अतिरिक्त सहित चुकाने के आदेश दिये हैं। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष यूएस नबियाल एवं वरिष्ठ सदस्य मंजू कोटलिया व सदस्य राजेंद्र परगाई ने आईडीबीआई बैंक शाखा मल्लीताल नैनीताल के शाखा प्रबंधक को यह आदेश मुन्ना सिंह पुत्र मोहन सिंह दरम्वाल निवासी बोहराकोट मल्ला रामगढ़ के मामले में दिये हैं।

खाताधारक की ओर से पैरवी करने वाले युवा अधिवक्ता दीपक रुबाली ने बताया कि मुन्ना सिंह के खाते से 29 फरवरी 2016 की रात्रि कुछ मिनटों के अंतराल में 10, 15 व 5 हजार यानी कुल 25 हजार रुपए की धनराशि अज्ञात व्यक्ति द्वारा निकाल ली गयी। इसकी शिकायत उन्होंने अगले ही दिन एक मार्च को थाना भवाली में की, साथ ही बैंक के शाखा प्रबंधक को भी इसकी सूचना दी, उसे खाते में धनराशि वापस जमा करने का आश्वासन दिया, किंतु अब तक धनराशि नहीं मिली। बाद में बैंक का कहना था कि यह धनराशि खाताधारक के एटीएम कार्ड व पिन का दुरुपयोग करके निकाली गयी है। बैंक का इससे कोई सरोकार नहीं है। वहीं पुलिस ने भी 26 अक्टूबर को बिना किसी सफलता के मामले की जांच समाप्त कर दी। इसके बाद पीड़ित ने 13 नवंबर 2017 को उपभोक्ता फोरम में इस मामले में शिकायत दर्ज कराई, जिसके 9 माह में ही उसे न्याय मिल गया। उपभोक्ता फोरम ने कहा कि यह मामला एक व्यक्ति के एटीएम कार्ड व पिन लीक होकर दुरुपयोग होने का नहीं, बल्कि साइबर क्राइम का है। बैंक ने यदि अपने सुरक्षा मानक कड़े किये होते तो ऐसा न होता। बैंक इन सेवाओं के लिए खााताधारकों से शुल्क वसूलता है। इसलिए इसका दायित्व खाताधारक पर नहीं थोपा जा सकता, बल्कि बैंक को ‘फ्रॉड्यूलेंट ट्रांजेक्शन’ मानते हुए धनराशि खाताधारक को देनी होगी।

नैनीताल उपभोक्ता फोरम ने ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी पर लगाया 3000 रुपए का जुर्माना

नैनीताल, 24 अगस्त 2018। जिला उपभोक्ता फोरम नैनीताल की ओर से फोरम के सदस्य राजेंद्र परगाई ने ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी एलटी-एफएबी पर तीन हजार रुपए जुर्माने का फैसला सुनाया है। मामले के अनुसार नगर के तल्लीताल पंजाब होटल के पास रहने वाली शशि वर्मा पत्नी गणेश लाल वर्मा ने इस ऑनलाइन कंपनी से 12 सितंबर 2017 को 1399 रुपए की एक साड़ी मंगवाई थी। साड़ी पसंद नहीं आने पर उसने कंपनी के कहे अनुसार बताये गये पते पर वह साड़ी 14 सितंबर को ही वापस भेज दी, किंतु कंपनी ने उसे धनराशि नहीं लौटाई। शशि वर्मा इस मामले को उपभोक्ता फोरम में लेकर गयीं। फोरम ने इसे कंपनी की ओर से सेवा में कमी पाते हुए पीड़िता को साड़ी की पूरी कीमत के साथ ही मानसिक वेदना, आर्थिक क्षति व परिवाद व्यय के रूप में 3000 रुपए व परिवाद दायर करने की तिथि से 8 फीसद वार्षिक की दर से ब्याज भी अदा करने के आदेश दिये हैं।

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कभी सोचा है भाजपा की नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के आने के बाद से ही घोटालेबाज विदेश क्यों भाग रहे हैं ? क्या ऐसे घोटाले पहले नहीं होते थे? ऐसे ही 1 लाख निवेशकों का लगभग 1,030 करोड़ डुबोने वाला चैन रूप भंसाली (सीआरबी) व स्टॉक मार्केट को करीब 5000 करोड़ रुपये का घाटा कराने वाला भागा हर्षद मेहता तो नहीं भागे थे, फिर क्यों पंजाब नैशनल बैंक को 11,300 करोड़ रुपये की चपत लगाने वाले नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चौकसी, ललित मोदी और विजय माल्या ही भागे ? जबकि आजादी से अब तक देश में काफी बड़े घोटालों का इतना लंबा इतिहास रहा है। ज़रा देखिये और सोचिये तो…

पीएनबी घोटाला एक नज़र में : 1,300 करोड़ के इस घोटाले में अब तक प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी 5100 करोड़ की संपत्ति ज़ब्त कर चुकी है. मामले में पीएनबी के 10 अधिकारी-कर्मचारी निलंबित, मामले में बेल्जियम की नागरिकता वाले 2017 में फ़ोर्ब्स की लिस्ट में 84वें सबसे अमीर भारतीय हीरा कारोबारी नीरव मोदी, उसकी पत्नी ऐमी, भाई निशाल और मामा मेहुल चोकसी ने पीएनबी के अधिकारियों गोकुल शेट्टी (डिप्टी मैनेजर) व मनोज खरट (क्लर्क) आदि से ‘लेटर ऑफ़ अंडरटेकिंग’ (LoU) यानी एक तरह की बैंक गारंटी लेकर भारत नहीं दुनियां के अन्य देशों में स्थित भारतीय बैंकों से यह अरबों रुपये निकाल लिए। LoU के आधार पर दूसरे बैंक पैसा देते हैं, और खाताधारक के डिफ़ॉल्टर होने पर बैंक की ज़िम्मेदारी होती है, तथा LoU देने वाले बैंक को दूसरे बैंक का बक़ाया चुकाना होता है

यह भी पढ़ें : यह युग परिवर्तन की भविष्यवाणी के सच होने का समय तो नहीं ? 2011 में लिखी इस पोस्ट के कुछ अंश : … एक रिपोर्ट के अनुसार केंद्र की कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार अब तक चीनी, आईपीएल, राष्ट्रमंडल खेल, आदर्श सोसाइटी, 2-जी स्पेक्ट्रम आदि सहित 2,5०,००० करोड़ मतलब 2,5०,००, ००,००,००,००० रुपये का घोटाला कर चुकी है. मतलब दो नील 5० खरब रुपये का घोटाला…. 100 लाख करोड़ (यानी 1०,००,००,००,००,००,००,०००) यानी 10 पद्म रुपये (बाबा रामदेव के अनुसार) और एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार 70 लाख करोड़ यानी सात पद्म रुपये भारत से बाहर स्विस और दुनिया ने देश के अन्य देशों के अन्य बैंको में छुपाये है…..

नीरव मोदी प्रकरण में धूमिल हुई छवि सुधारने को पीएनबी कर्मियों ने की यह पहल

नैनीताल। नीरव मोदी मामले में छवि धूमिल होने के बाद बृहस्पतिवार को 124वें स्थापना दिवस के मौके को पंजाब नेशनल बैंक कर्मियों ने बैंक की छवि सुधारने के लिए प्रयोग किया। इस दौरान बैंक कर्मियों ने बैंक शाखा को सुरुचिपूर्ण तरीके से सजाया एवं स्वैच्छिक रक्तदान किया। मल्लीताल बड़ा बाजार शाखा के प्रमुख डीआर आर्या ने ग्राहकों का भरोसे व विश्वास के लिए धन्यवाद जताया। इस दौरान अनिल दायमा, केसी पुनेठा, केएस ह्यांकी, महेंद्र कोटवाल, संतोष आर्य, भुवन जोशी, नैना कार्की आदि कर्मियों ने स्वैच्छिक रक्तदान भी किया। कार्यक्रम में पीएनबी स्टाफ एसोसिएशन के जिला उपाध्यक्ष सुमित कुमार, राकेश पांडे, पान सिंह, दीपक नेगी, चंदन राजपूत, रीता मेहता, अरुण भारती सहित कई ग्राहक भी मौजूद रहे।

एक्सिस बैंक ने की मानवता शर्मसार ! वहां 5500 करोड़ का एनपीए, यहां महज 55 हजार के लिए गर्भवती को पहुंचाया अस्पताल

प्रतीकात्मक फोटो (स्रोत; गूगल)

-एक्सिस बैंक के कर्मचारियों ने मानवता को किया शर्मसार
-भाई ने नोएडा में क्रेडिट कार्ड से 55 हजार की खरीददारी कर समय पर न लौटाने की की थी चूक, नैनीताल में भाई व गर्भवती बहु को दी धमकियां, रिश्तेदारों को फोन कर की बेइज्जती, अस्पताल में उपचार कराना पड़ा गर्भवती को
नैनीताल। एक ओर 5500 करोड़ रुपए का एनपीए खड़ा करने वाले और नीरव मोदी जैसे भगोड़ों पर 11,500 करोड़ रुपए से अधिक लुटाने वाले भारतीय बैंकों का एक दूसरा शर्मसार करने वाला पक्ष सामने आया है। क्रेडिट कार्ड से महज 55 हजार रुपए लेकर निर्धारित समय के भीतर न चुका पाने वाले उपभोक्ता के परिजनों के मोबाइल नंबरों के साथ ही फोटो आदि भी हैक कर उन्हें ‘चोर, फर्जी’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया, फलस्वरूप एक नवविवाहिता गर्भवती युवती को भारी तनाव व अवसाद के चलते अस्पताल पहुंचना पड़ा। मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से बैंक के अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस में तहरीर दे दी गयी है।
नैनीताल नगर के माल्डन कॉटेज मल्लीताल निवासी सुरेश (बदला हुआ नाम) द्वारा पुलिस में दी गयी तहरीर के अनुसार उसके पास 27 मार्च की सुबह स्वयं को एक्सिस बैंक की कर्मी बताने वाली श्रुति नाम की महिला का बैंक के ही लैंडलाइन नंबर 011-41216106 से फोन आया कि उसके छोटे भाई विनोद सिंह ने एक्क्सि बैंक की नोएडा सैक्टर 128 शाखा से क्रेडिट कार्ड लेकर 55 हजार रुपए की खरीददारी की थी, और तय समय पर वह इसे चुकाया। लिहाजा वह इसे बैंक में जमा कराये। उमेश के यह कहने पर कि धनराशि विनोद द्वारा चुका दी जाएगी। वह (उमेश) इस मामले में गवाह नहीं है, और न ही उसने भाई द्वारा क्रेडिट कार्ड लेने में किसी तरह की गारंटी दी है। इसके बाद बैंक के कर्मी बताने वाले राजेश का मोबाइल नंबर 09999339320 से व कविता का मोबाइल नंबर 08130774615 तथा पुनः श्रुति का मोबाइल नंबर 09711217022 के साथ ही 9456122333, 8881008804, 011-41216108 आदि नंबरों से फोन आए, और इन नंबरों से सुरेश की पत्नी, पत्नी के कार्यस्थल तथा ससुराल व रिश्तेदारों आदि के नंबर न जाने कहां से लेकर इस हद तक गलत लांछन लगा कर बदनाम किया गया व डराया धमकाया गया कि ‘उमेश व उसकी पत्नी चोर और फर्जी हैं।’ इससे अपमानित महसूस करते हुए मानसिक तनाव की वजह से उमेश की गर्भवती पत्नी का स्वास्थ्य खराब हो गया, और उसे हल्द्वानी ले जाकर उपचार कराना पड़ा। उन्हें उनके अन्य रिश्तेदारों के भी मोबाइल नंबर निकालकर, कुछ भी कर सकने व मजा चखाने तथा जान से मारने जैसी धमकियां भी गयीं। इस पर घबराकर उमेश ने एक्सिस बैंक के खाते में 29 मार्च को 55 हजार की धनराशि भी जमा कर दी। इसके बाद उमेश ने मल्लीताल कोतवाली में पुलिस को तहरीर देकर उसकी निजी जानकारियां, मोबाइल नंबर व फोटो आदि चुराने तथा बेवजह अपमानित करने के आरोप लगाते हुए बैंक के कथित कर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

यह भी पढ़ें : ऐक्सिस बैंक की ब्रांच में छापा, 20 फर्जी कंपनियों के खाते में जमा है 60 करोड़ से ज्यादा की रकम

15 दिसंबर 2016। केंद्र सरकार की ओर से नोटबंदी के बाद फर्जी अकाउंट्स में बड़े पैमाने पर रकम जमा होने के मामले में घिरे ऐक्सिस बैंक की नोएडा स्थित ब्रांच में गुरुवार को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने छापेमारी की। सेक्टर-51 स्थित ब्रांच में आयकर विभाग की छापेमारी में 20 फर्जी कंपनियों के अकाउंट्स होने की बात सामने आई है। इन खातों में 60 करोड़ से अधिक की राशि जमा हुई है। कुछ ही दिन पहले आयकर विभाग ने ऐक्सिस बैंक की चांदनी चौक स्थित शाखा में भी छापेमारी की थी, जिसमें 40 से अधिक फर्जी अकाउंट्स होने की बात सामने आई थी। इन फर्जी खातों में 100 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जमा होने का अनुमान है। गौरतलब है कि इस मामले में यह खबरें भी आई थीं कि रिजर्व बैंक की ओर से ऐक्सिस बैंक के लाइसेंस को रद्द करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि केंद्रीय बैंक ने ऐसी किसी भी कार्रवाई पर विचार करने से इनकार कर दिया था। 

केजरीवाल, सिब्बल, चिदंबरम, वाड्रा व राहुल गाँधी से जुड़े पीएनबी घोटाले के तार

देेश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले के बाद अब एक-एक करके बड़े खुलासे हो रहे हैं. देश के कई बड़े नेता, राजनीतिक पार्टियों और मशहूर हस्तियों के काले कारनामों का पर्दाफ़ाश हो रहा है. लुटेरे देश को बेचने में लगे हुए थे, खोखला कर रहे थे, मगर मोदी सरकार ने इनकी सारी योजनाओं को धराशायी कर दिया. मामला अब केवल पीएनबी बैंक तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब इसके लिंक कागजी कंपनियों और हवाला नेटवर्क से होते हुए देश की बड़ी राजनीतिक पार्टियों से जुड़ गए हैं.

पीएनबी घोटाले के तार जुड़े आम आदमी पार्टी से

मोदी सरकार के सख्त आदेशों के बाद जांच एजेंसियां तेजी से एक्शन में हैं. पीएनबी घोटाले के मुख्य आरोपी नीरव मोदी, रिश्तेदारों और उनके सहयोगियों से जुड़ी 150 शैल कंपनियों का पता लगा है. कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग और सीबीआई की कार्रवाई को देखते हुए यह कदम उठाया गया है.

दरअसल शैल कंपनियों का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों और कालेधन को खपाने में किया जाता है. पूरे मामले के लिंक अब अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी से भी जुड़ गए हैं. जानकारी मिली है कि 2010 से लेकर 2014 के बीच पीएनबी और केनरा बैंक ने एक बेनामी कंपनी को 5,86,50,00,000 रुपये के लोन दिए.

मजे की बात ये है कि इस बेनामी कंपनी के डायरेक्टर हेम प्रकाश शर्मा वही हैं, जिसने दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी को हवाला के जरिये 2 करोड़ रुपये कालाधन बतौर चंदे के रूप में दिया था. ये खुलासा आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक और इंडिया अगेंस्ट करप्शन के सदस्य रह चुके नील टेरेंस हसलम ने किया है.

कपिल सिब्बल भी घपले में शामिल

दरअसल जितने कोंग्रेसी, वामपंथी व् आम आदमी पार्टी के नेता पीएनबी घोटाले को लेकर पीएम मोदी पर कीचड उछाल रहे हैं, उन सभी के नाम इस घोटाले से जुड़ रहे हैं. कोंग्रेसी नेता कपिल सिब्बल, जोकि राम मंदिर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ रहे हैं, उन्होंने भी पीएम मोदी पर काफी कीचड उछाला, मगर अब उन्ही का नाम इस महाघोटाले से जुड़ गया है.

डाटा साइंटिस्ट गौरव प्रधान ने खुलासा किया है कि नीरव मोदी ने एमआर एमजीएफ में कपिल सिब्बल का घर खरीदने के लिए पैसे दिए थे, इस घर की कीमत करीब 200 करोड़ रुपये है और ये सिब्बल की बेनामी संपत्ति है. कपिल सिब्बल दिखाने के लिए इस घर में रहने के लिए एमआर एमजीएफ को 15 लाख रुपये महीने का किराया भी दे रहे थे, मगर गुपचुप तरीके से एमजीएफ वो पैसे कपिल को वापस कर देती थी.

उन्होंने बताया कि एमजीएफ का सम्बन्ध रोबर्ट वाड्रा के साथ है और एमआर को जब इस अवैध लेन-देन की जानकारी मिली तो उसने एमजीएफ के साथ पार्टर्नशिप ख़त्म कर दी. एमजीएफ कनिष्क सिंह की कंपनी है, जो अब प्रियंका गाँधी के साथ काम कर रही है.

इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि सिस्टम में बैठे कोंग्रेसियों ने नीरव मोदी के घोटाले के बाहर आने से पहले ही इसकी जानकारी वाड्रा तक पहुंचा दी. 3 जनवरी, 2018 को रोबर्ट वाड्रा ने नीरव मोदी को फ़ोन किया और इसके फ़ौरन बाद नीरव मोदी अपने परिवार के साथ देश छोड़कर भाग गया.

गौरव प्रधान ने सवाल किया है कि राहुल गाँधी ने अपनी लंदन और बैंकाक यात्रा के दौरान नीरव मोदी से मुलाक़ात क्यों की थी, दोनों के बीच क्या डील हुई थी? इन यात्राओं के दौरान राहुल गाँधी ने SPG को भी साथ में नहीं रखा था, ताकि किसी तरह का रिकॉर्ड ना रहे.

कोंग्रेसी नेता रेणुका चौधरी के दोस्त हस्सान अली खान ने नीरव मोदी के एक सहयोगी के स्विट्ज़रलैंड के बैंक अकाउंट नंबर 35833342181 में 48 करोड़ रुपये क्यों जमा करवाए?

मेहुल चौकसी ने अपने सिंगापुर के बैंक अकाउंट से पी चिदंबरम के दुबई के बैंक अकाउंट नंबर DBS 24007007 में 14.5 करोड़ रुपये क्यों जमा करवाए?

उन्होंने दावा किया पीएनबी घोटाले के जरिये यदि नीरव मोदी हत्थे चढ़ जाता तो हथियारों के डीलर अदनान खाशोगगी, नीरव मोदी, हसन अली और पी चिदंबरम के आपसी संबंधों का पर्दाफ़ाश हो जाता, इसीलिए नीरव मोदी को भगा दिया गया.

वहीँ उन्होंने दावा किया है कि पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन का भी इस घपले में पूरा-पूरा हाथ है. जांच के बाद राजन भी जेल जा सकते हैं.

उन्होंने सवाल उठाया है कि गीतांजलि जेम्स, गिली इंडिया, नक्षत्रा, फॉरेस्टर डायमंड इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, ये सभी पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की कंपनी मेसर्स चैस मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के ग्राहक कैसे बन गए?

नीरव मोदी ने पी चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम को हीरे तोहफे में क्यों दिए? इसके बदले में चिदंबरम ने नीरव मोदी की क्या सहायता की थी?

कोंग्रेसी नेता अभिषेक सिंघवी की पत्नी अनीता सिंघवी, नीरव मोदी की कंपनी के मालिकाना हक़ वाली प्रॉपर्टी की डायरेक्टर कैसे बनी?

काले कारोबारियों व भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिलकर की कांग्रेस ने खुली लूट

इतने खुलासों से साफ़ है कि कांग्रेस के महाभ्रष्ट नेताओं ने पहले तो बैंकों के जरिये नीरव मोदी जैसे कुछ चुने हुए कारोबारियों को गैर कानूनी तरीके से लोन दिए, जिसमे आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने भी उनका साथ दिया. इसके बदले में नीरव मोदी जैसे इन कारोबारियों ने कोंग्रेसी नेताओं व् उनके परिजनों को करोड़ों-अरबों की घूस दी, उनके परिजनों को अपनी कंपनियों में ऊंचे ओहदे दिए.

कुल मिलाकर मिल बाँट कर सभी देश को लूटने में लिप्त रहे. मगर देश की जनता ने मोदी को प्रधानमंत्री बनाकर इनका खेल बिगाड़ दिया. जैसे ही पीएम मोदी ने नोटबंदी की, सभी भ्रष्टाचारी एक सुर में रोने-चिल्लाने लगे. रघुराम राजन ने भी पद छोड़ने के बाद मीडिया में जाकर नोटबंदी के खिलाफ खूब दुष्प्रचार किया. दरअसल इन सभी भ्रष्टाचारियों को पता था कि आज नहीं तो कल उनके पापों का पर्दाफ़ाश होकर रहेगा.

बहरहाल अब जांच शुरू हो चुकी है और बैंक अधिकारियों के साथ-साथ वित्त मंत्रालय के कुछ अधिकारी भी जांच के घेरे में आ चुके हैं. धीरे-धीरे सारी पोल खुलती ही जायेगी, ऐसे में ये कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा कि देश के कई बड़े नेता व कारोबारी इसी तरह से देश छोड़कर भाग सकते हैं.

क्या आप जानते हैं कि जब यूपीए सरकार को भारत की जनता ने सत्ता से उखाड़ फेंका उस समय देश के आर्थिक हालात कितने खतरनाक हो चुके थे। हम दीवालियापन के कगार पर थे। चन्द्रशेखर के कार्यालय में तो सोना गिरवी रखना पड़ा था, यहां देश को ही गिरवी रखने की नौबत आ रही थी । तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जाने विश्व बैंक और आईएमएफ के किस दबाव में थे, जाने यूपीए की चैयरमैन सोनिया गांधी क्या करवाना चाहती थीं, कि देश को उस हाल में ले जाया जा रहा था जहां सारे वित्तीय संस्थानों की हालत बिगाड़ी जा रही थी । बैंकों से छांट छांट कर उन लोगों को ॠण पर ॠण दिया जा रहा था जो लगातार डिफाल्टर हो रहे थे । अगर सत्ता में आते ही मोदी सरकार सत्य सामने लाती तो गृहयुद्ध और वैनेजुएला जैसे हालात पैदा होने का खतरा पैदा हो सकता था । मोदी सरकार ने नोटबंदी और दूसरे जो उपाय किए उससे खतरा टल गया, अब यूपीए सरकार के पापों का भंडाफोड़ हो रहा है । कांग्रेस चीख चिल्ला कर मोदी सरकार पर आरोप लगा रही है ताकि उनके नेताओं के गर्दन फंसने से बचाई जा सके। धीरे धीरे बैंकों के घोटाले सामने आ रहे हैं.. कोई आश्चर्य नहीं कि आने वाले दिनों में और भी एनपीए सामने आएं….. तो तैयार रहें अच्छे दिन आने वाले हैं…… खबरें ऐसी ही आती रहेंगी…. (निशीथ जोशी जी, संपादक अमर उजाला की फेसबुक वॉल से साभार)

देश के कुछ प्रमुख घोटाले :
जीप खरीदी घोटाला (१९४८) : आजादी के बाद भारत सरकार ने एक लंदन की कंपनी से २००० जीपों को सौदा किया। सौदा 80 लाख रुपये का था। लेकिन केवल १५५ जीप ही मिल पाई। घोटाले में ब्रिटेन में मौजूद तत्कालीन भारतीय उच्चायुक्त वी.के. कृष्ण मेनन का हाथ होने की बात सामने आई। लेकिन १९५५ में केस बंद कर दिया गया। जल्द ही मेनन नेहरु केबिनेट में शामिल हो गए। 

साइकिल आयात घोटाला (१९५१):  तत्कालीन वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सेकरेटरी एस.ए. वेंकटरमन ने एक कंपनी को साइकिल आयात कोटा दिए जाने के बदले में रिश्वत ली। इसके लिए उन्हें जेल जाना पड़ा।

मुंध्रा मैस घोटाला (१९५८) : हरिदास मुंध्रा द्वारा स्थापित छह कंपनियों में लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के 1.2 करोड़ रुपये से संबंधित मामला उजागर हुआ। इसमें तत्कालीन वित्त मंत्री टीटी कृष्णामचारी, वित्त सचिव एच.एम.पटेल, एलआईसी चेयरमैन एल एस वैद्ययानाथन का नाम आया। कृष्णामचारी को इस्तीफा देना पड़ा और मुंध्रा को जेल जाना पड़ा।

तेजा ऋण घोटाला : १९६० में एक बिजनेसमैन धर्म तेजा ने एक शिपिंग कंपनी शुरू करने केलिए सरकार से २२ करोड़ रुपये का लोन लिया। लेकिन बाद में धनराशि को देश से बाहर भेज दिया। उन्हें यूरोप में गिरफ्तार किया गया और छह साल की कैद हुई।

पटनायक मामला : १९६५ में उड़ीसा के मुख्यमंत्री बीजू पटनायक को इस्तीफा देने केलिए मजबूर किया गया। उन पर अपनी निजी स्वामित्व कंपनी ‘कलिंग ट्यूब्स’ को एक सरकारी कांट्रेक्ट दिलाने केलिए मदद करने का आरोप था।

मारुति घोटाला : मारुति कंपनी बनने से पहले यहां एक घोटाला हुआ जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का नाम आया। मामले में पेसेंजर कार बनाने का लाइसेंस देने के लिए संजय गांधी की मदद की गई थी।

कुओ ऑयल डील : १९७६ में तेल के गिरते दामों के मददेनजर इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने हांग कांग की एक फर्जी कंपनी से ऑयल डील की। इसमें भारत सरकार को १३ करोड़ का चूना लगा। माना गया इस घपले में इंदिरा और संजय गांधी का भी हाथ है।

अंतुले ट्रस्ट : १९८१ में महाराष्ट्र में सीमेंट घोटाला हुआ। तत्कालीन महाराष्ट्र मुख्यमंत्री एआर अंतुले पर आरोप लगा कि वह लोगों के कल्याण के लिए प्रयोग किए जाने वाला सीमेंट, प्राइवेट बिल्डर्स को दे रहे हैं।

एचडीडब्लू दलाली (1987) : जर्मनी की पनडुब्बी निर्मित करने वाले कंपनी एचडीडब्लू को काली सूची में डाल दिया गया। मामला था कि उसने 20 करोड़ रुपये बतौर कमीशन दिए हैं। 2005 में केस बंद कर दिया गया। फैसला एचडीडब्लू के पक्ष में रहा।

बोफोर्स घोटाला :  1987 में एक स्वीडन की कंपनी बोफोर्स एबी से रिश्वत लेने के मामले में राजीव गांधी समेत कई बेड़ नेता फंसे। मामला था कि भारतीय १५५ मिमी. के फील्ड हॉवीत्जर के बोली में नेताओं ने करीब 64 करोड़ रुपये का घपला किया है।

सिक्योरिटी स्कैम (हर्षद मेहता कांड) : 1992 में हर्षद मेहता ने धोखाधाड़ी से बैंको का पैसा स्टॉक मार्केट में निवेश कर दिया, जिससे स्टॉक मार्केट को करीब 5000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ।

इंडियन बैंक घोटाला : 1992 में बैंक से छोटे कॉरपोरेट और एक्सपोटर्स ने बैंक से करीब 13000 करोड़ रुपये उधार लिए। ये धनराशि उन्होंने कभी नहीं लौटाई। उस वक्त बैंक के चेयरमैन एम. गोपालाकृष्णन थे।

चारा घोटाला : 1996 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और अन्य नेताओं ने राज्य के पशु पालन विभाग को लेकर धोखाबाजी से लिए गए 950 करोड़ रुपये कथित रूप से निगल लिए।

तहलका : इस ऑनलाइन न्यूज पॉर्टल ने स्टिंग ऑपरेशन के जारिए ऑर्मी ऑफिसर और राजनेताओं को रिश्वत लेते हुए पकड़ा। यह बात सामने आई कि सरकार द्वारा की गई १५ डिफेंस डील में काफी घपलेबाजी हुई है और इजराइल से की जाने वाली बराक मिसाइल डील भी इसमें से एक है।

स्टॉक मार्केट घोटाला : स्टॉक ब्रोकर केतन पारीख ने स्टॉक मार्केट में 1,15,000 करोड़ रुपये का घोटाला किया। दिसंबर, २००२ में इन्हें गिरफ्तार किया गया।

स्टांप पेपर घोटाला : यह करोड़ो रुपये के फर्जी स्टांप पेपर का घोटाला था। इस रैकट को चलाने वाला मास्टरमाइंड अब्दुल करीम तेलगी था।

सत्यम घोटाला : 2008 में देश की चौथी बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी सत्यम कंप्यूटर्स के संस्थापक अध्यक्ष रामलिंगा राजू द्वारा 8000 करोड़ रूपये का घोटाले का मामला सामने आया। राजू ने माना कि पिछले सात वर्षों से उसने कंपनी के खातों में हेरा फेरी की।

मनी लांडरिंग घोटाला : 2009 में मधु कोड़ा को 4000 करोड़ रुपये की मनी लांडरिंग का दोषी पाया गया। मधु कोड़ा की इस संपत्ति में हॉटल्स, तीन कंपनियां, कलकत्ता में प्रॉपर्टी, थाइलैंड में एक हॉटल और लाइबेरिया ने कोयले की खान शामिल थी।

बोफ़ोर्स घोटाला64 करोड़ रुपये, मामला दर्ज हुआ – 22 जनवरी 1990, सजा – किसी को नहीं, वसूली – शून्य

एच.डी. डब्ल्यू सबमरीन घोटाला :  32 करोड़ रुपये, मामला दर्ज हुआ – 5 मार्च 1990, सजा – किसी को नहीं, वसूली – शून्य

(1981 में जर्मनी से 4 सबमरीन खरीदने के 465 करोड़ रु. इस मामले में 1987 तक सिर्फ 2 सबमरीन आयीं, रक्षा सौदे से जुड़े लोगों द्वारा लगभग 32 करोड़ रु. की कमीशनखोरी की बात स्पष्ट हुई।)

स्टाक मार्केट घोटाला4100 करोड़ रुपये, 72 मामला दर्ज हुए – 1992 से 1987 के बीच, सजा – हर्षद मेहता (सजा के 1 साल बाद मौत) सहित कुल 4 को, वसूली – शून्य

(हर्षद मेहता द्वारा किए गए इस घोटाले में लुटे बैंकों और निवेशकों की भरपाई करने के लिए सरकार ने 6625 करोड़ रुपए दिए, जिसका बोझ भी करदाताओं पर पड़ा।)

एयरबस घोटाला120 करोड़ रुपये, मामला दर्ज हुआ – 3 मार्च 1990, सजा – अब तक किसी को नहीं, वसूली – शून्य 

(फ्रांस से बोइंग 757 की खरीद का सौदा अभी भी अधर में, पैसा वापस नहीं आया)

चारा घोटाला950 करोड़ रुपए, मामला दर्ज हुआ – 1996 से अब तक कुल 64, सजा – सिर्फ एक सरकारी कर्मचारी को, वसूली – शून्य

(इस मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव हालांकि 6 बार जेल जा चुके हैं)

दूरसंचार घोटाला : 1200 करोड़ रुपए, मामला दर्ज हुआ – 1996, सजा – एक को, वह भी उच्च न्यायालय में अपील के कारण लंबित, वसूली – 5.36 करोड़ रुपए

(तत्कालीन दूरसंचार मंत्री सुखराम द्वारा किए गए इस घोटाले में छापे के दौरान उनके पास से ५.३६ करोड़ रुपए नगद मिले थे, जो जब्त हैं। पर गाजियाबाद में घर (१.२ करोड़ रु.), आभूषण (लगभग १० करोड़ रुपए) बैंकों में जमा (५ लाख रु.) शिमला और मण्डी में घर सहित सब कुछ वैसा का वैसा ही रहा। सूत्रों के अनुसार सुखराम के पास उनके ज्ञात स्रोतों से ६०० गुना अधिक सम्पत्ति मिली थी।)

यूरिया घोटाला133 करोड़ रुपए, मामला दर्ज हुआ – २६ मई १९९६, सजा – अब तक किसी को नहीं, वसूली – शून्य

(प्रधानमंत्री नरसिंहराव के करीबी नेशनल फर्टीलाइजर के प्रबंध निदेशक सी.एस.रामाकृष्णन ने यूरिया आयात के लिए पैसे दिए, जो कभी नहीं आया।)

सी.आर.बी1030 करोड़ रुपए, मामला दर्ज हुआ – २० मई १९९७, सजा – किसी को नहीं, वसूली – शून्य

(चैन रूप भंसाली (सीआरबी) ने १ लाख निवेशकों का लगभग १ हजार ३० करोड़ रु. डुबाया और अब वह न्यायालय में अपील कर स्वयं अपनी पुर्नस्थापना के लिए सरकार से ही पैकेज मांग रहा है।)

केतन पारेख3200 करोड़ रुपए, मामला दर्ज हुआ – २००१ में ३ मामले, सजा – अब तक नहीं, वसूली – शून्य

(हर्षद मेहता की तरह केतन पारेख ने बैंकों और स्टाक मार्केट के जरिए निवेशकों को चूना लगाया।)

जानकारी तो मोदी सरकार को इन सब मामलों की भी है, बावजूद वह कोई कार्रवाई नहीं कर रही है, इसलिए इन मामलों में भी जिम्मेदारी तो उसी की बनती है !

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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