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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दिल्ली से पन्तनगर व देहरादून के लिए नियमित हवाई सेवा शुरू करने के लिए दिये यह बड़े निर्देश

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दिल्ली एयरपोर्ट पर उत्तराखंड के जहाजों के लिए जगह उपलब्ध कराने को कहा
नैनीताल, 11 अक्टूबर 2018। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया व केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय भारत सरकार से नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे में उत्तराखंड के छोटे हवाई जहाजों के लिए जगह आवंटित करने का आग्रह एवं तीन सप्ताह के भीतर विचार करने को कहा है। साथ ही हेली सेवा कंपनी डेक्कन एविएशन से इस आशय का प्रस्ताव एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ इंडिया व भारत सरकार को 24 घंटे के भीतर भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही खंडपीठ ने एयरपोर्ट अथॉरिटी इंडिया को निर्देश दिया है कि यदि डेक्कन एविएशन 24 अक्टूबर तक नियमित हवाई सेवा शुरू नही करता है तो उसके साथ हुए करार को निरस्त करें और नए सिरे से 10 सप्ताह के भीतर टेंडर प्रक्रिया शुरू करें।
मामले के अनुसार हरिद्वार निवासी अधिवक्ता पंकज मिगलानी ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि पंतनगर से दिल्ली व देहरादून के लिए सीधे हवाई सेवा नहीं है। इसलिये उन्होंने पंतनगर को उड़ान सेवा में शामिल करने की मांग की है। इस याचिका की पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने डेक्कन एविएशन व हेरिटेज हेली कंपनी से राज्य सरकार के साथ हुए समझौते के अनुसार राज्य में हेली सेवा शुरू करने को कहा था। इधर, आज सुनवाई के दौरान डेक्कन एविएशन कम्पनी ने खंडपीठ को बताया कि वह दिल्ली से पंतनगर व देहरादून के लिए हवाई सेवा कराने के लिए तैयार है। किंतु उन्हें दिल्ली के इंटरनेशनल एयरपोर्ट में हवाई सेवा शुरू करने के लिए जगह नही मिल रही है। इस पर खंडपीठ ने हेली सेवा कंपनी से दिल्ली हवाई अड्डे में उत्तराखंड के लिए अलग जगह दिए जाने हेतु प्रस्ताव एयरपोर्ट अथॉरिटी को 24 घंटे में भेजने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान एयरपोर्ट अथॉरिटी के डीजीएम जगवीर सिंह, नागरिक उड्डयन मंत्रालय की संयुक्त सचिव रुबीना अली व उप सचिव उमेश कुमार भारद्वाज भी कोर्ट में पेश हुए, और उन्होंने खंडपीठ को बताया कि इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट काफी व्यस्त रहता है। यहां छोटे जहाजों के लिए जगह उपलब्ध करना बहुत कठिन है। मामले को सुनने के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन सचिव से आग्रह किया कि पूर्ण रूप से पर्यटन पर आधारित अर्थव्यवस्था वाले छोटे राज्य उत्तराखंड के हित को ध्यान में रखकर इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली में उत्तराखंड के लिए जगह आवंटित करने के लिए विचार करें और दिल्ली से पन्तनगर व देहरादून के लिए नियमित हवाई सेवा शुरू की जाय।

यह भी पढ़ें : 7 अक्टूबर को उत्तराखंड को करीब 1 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों सहित दून-पिथौरागढ़ को ‘उड़ान’ दे सकते हैं पीएम

देहरादून, 3 अक्टूबर 2018। प्रदेश में उड़ान यानी ‘उड़े आम आदमी’ योजना के तहत पिथौरागढ़-देहरादून व पिथौरागढ़-पंतनगर हवाई सेवा का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 7 अक्टूबर को कर सकते हैैं। इस दिन वह राज्य में पहली बार देहरादून में आयोजित होने जा रहे ‘इन्वेस्टर्स समिट’ में शामिल होने जा रहे हैं। इस मौके पर उत्तराखंड को करीब 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों का भी औपचारिक तौर पर तोहफा मिल सकता है। उल्लेखनीय है कि राज्य के सीएम एवं मंत्रियों के लंबे समय से देश-विदेश में जाकर किये गये प्रयासों से अब तक उत्तराखंड को 74 हजार करोड़ तक के निवेश प्रस्ताव मिलने की बात कही जा रही है। इसमें भारत के चर्चित अडानी और जापान के हिताची समूहों के प्रस्ताव भी शामिल हो सकते हैं।
बताया जा रहा है कि पिथौरागढ़-देहरादून हवाई सेवा के लिए अब केवल डीजीसीए (महानिदेशक, नागरिक उड्डयन कार्यालय) से लाइसेंस मिलने का इंतजार किया जा रहा है। पिथौरागढ़ के नैनीसैनी हवाई अड्डे को इसके लिए दुरुस्त कर दिया गया है। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) ने इसके लिए डीजीसीए के अधिकारियों का दौरा कराकर सभी कमियों को दूर भी कर लिया है। केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई महत्वाकांक्षी उड़ान योजना को अब तक उत्तराखंड में लागू नहीं किया जा सका है। प्रथम चरण में प्रदेश सरकार पिथौरागढ़-देहरादून और पिथौरागढ़-पंतनगर के बीच इस हवाई सेवा को शुरू करने की तैयारी में जुटी है। हैरीटेज एविएशन कंपनी इस हवाई मार्ग पर नौ सीटर हवाई जहाज चलाएगा। इस हवाई सेवा को शुरू करने में सबसे अधिक समस्या अभी तक नैनीसैनी एयरपोर्ट को दुरुस्त करने की थी। दरअसल, डीजीसीए की ओर से किसी भी हवाई मार्ग को लाइसेंस जारी करने के लिए कुछ मानक बनाए गए हैं। इस हवाई सेवा को शुरू करने से पहले डीजीसीए ने 29 बिंदुओं पर यूकाडा का ध्यान आकर्षित करते हुए इनमें इंगित कमियों को दूर करने को कहा था। इसे देखते हुए यूकाडा ने यहां सुरक्षा, अग्निशमन, तकनीकी क्षमता आदि को दुरुस्त करने का कार्य शुरू कर दिया है। इस पूरे कार्य में तेजी इसलिए भी की जा रही है ताकि इस हवाई सेवा का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों कराया जा सके। विभाग की मंशा इस हवाई सेवा को सात या आठ अक्टूबर तक संचालित करने की है। इस संबंध में अपर सचिव नागरिक उड्डयन आर राजेश कुमार का कहना है कि नैनीसैनी हवाई अड्डे को तकरीबन तैयार कर लिया गया है। अब इंतजार केवल डीजीसीए से लाइसेंस मिलने का है। जैसे ही डीजीसीए से लाइसेंस मिलेगा, यह हवाई सेवा शुरू करा दी जाएगी। विभाग की मंशा सात अथवा आठ अक्टूबर को यहां से हवाई सेवा शुरू करने की है।

यह भी पढ़ें : ‘उड़ान’ योजना से पंतनगर एयरपोर्ट को बाहर करने पर केंद्र सरकार को नोटिस

उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने पंतनगर एयरपोर्ट को ‘उड़ान’ योजना से बाहर करने के मामले में दायर जनहित याचिका में सुनवाई करते हुए  केंद्रीय नागरिक उड्डयन सचिव को नोटिस जारी कर 24 सितम्बर तक जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने पूछा है कि पंतनगर को उड़ान योजना में शामिल करने पर देरी क्यों हो रही है ? साथ ही राज्य के प्रमुख सचिव नागरिक उड्डयन को भी निर्देश दिए हैं कि वह इस मामले में  विशेष ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री के समुख पेश करे। 
मामले के अनुसार पंकज मिगलानी ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर कहा कि केन्द्र सरकार ने 2016 में छोटे शहरों को हवाई सेवा से जोड़ने के लिये ‘उड़े देश का आम आदमी’ (उड़ान) नीति के तहत क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना बनायी। इस योजना के तहत जहां देश में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाना था वहीं ढांचागत सुविधाओं का विकास भी करना था। इस नीति के अंडर सर्विस एयरपोर्ट के तहत राज्य के पंतनगर हवाईअड्डा को शामिल किया गया था। सूची में उसका 15वां स्थान था। लेकिन 2017 में योजना के समीक्षा के तहत पंतनगर को उड़ान योजना से बाहर कर दिया गया, और प्रदेश के चिन्यालीसौड़, नैनी-सैनी, गौचर व हरिद्वार को शामिल कर दिया। ची  ने कहा कि पंतनगर को इस आधार पर गलत किया गया कि पंतनगर से सप्ताह में मात्र चार सेवायें ही हैं। जबकि सप्ताह में सात सेवायें होनी चाहिए। इससे पंतनगर का विकास रुक गया है। याची ने कहा कि पंतनगर से दिल्ली के लिये एकमात्र सेवा उपलब्ध है। प्रदेश की राजधानी के लिये पंतनगर से एक भी सेवा नहीं है। देहरादून के लिए दिल्ली से होकर जाना पड़ता है। याची का कहना है कि इसलिये पंतनगर को कम से कम सेवा की सूची से बाहर करना गलत है जबकि पंतनगर हवाईअड्डा नैनीताल शहर में पर्यटन की रीढ़ है। नैनीताल में ही उच्च न्यायालय मौजूद हैै। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि केन्द्र सरकार का यह कदम गलत है।

यह भी पढ़ें : दिल्ली, देहरादून, आगरा व लुधियाना से पंतनगर को हवाई सेवा 25 मार्च से, नियमित उड़ान के लिए एयर डेक्कन तैयार, 24 सीटर विमानों का होगा इस्तेमाल

सब कुछ ठीक ठाक रहा तो अगले सप्ताह से पंतनगर हवाई अड्डे से रोजाना दिल्ली, देहरादून, आगरा व लुधियाना के लिए हवाई सेवा शुरू होने जा रही है। इसके लिए एयर डेक्कन ने हामी भर दी है जबकि पिथौरागढ़ के लिए भी नियमित उड़ान शुरू होने की संभावना है। पंतनगर एयरपोर्ट के निदेशक एसके सिंह ने बताया कि 25 मार्च को दिल्ली, देहरादून, आगरा व लुधियाना के लिए हवाई जहाज उड़ान भर सकते हैं। इन उड़ानों में 24 सीटर हवाई जहाज के इस्तेमाल होने की उम्मीद है। एयर डेक्कन ने इसकी कसरत पूरी कर ली है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार एवं एयरपोर्ट प्राधिकरण के बीच तेजी से बातचीत चल रही है। उन्होंने बताया कि अल्मोड़ा, नैनीताल, हल्द्वानी व रामनगर में हैलीपेड बनाए जाने के लिए भी कसरत की जा रही है जबकि नैनीसैनी (पिथौरागढ़) में हवाई अड्डा बनकर तैयार है। जल्दी ही दून एवं पंतनगर से पिथौरागढ़ के लिए हवाई सेवा शुरू हो सकती है। उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में हवाई कनेक्टविटी का रोडमैप बनाया जा रहा है। 

अब ‘उड़ान’ भर कर पहुंचिये नैनीताल, मसूरी, श्रीनगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, धारचूला, गौचर, जोशीमठ, चिन्यालीसौड़ व नई टिहरी

जी हां, मोदी सरकार की ‘उड़ान’ यानी ‘उड़े देश का हर नागरिक’ योजना के जरिए अब पहाड़ों की उड़ान अधिक दूर नहीं। केंद्र सरकार के नागर विमान मंत्रालय ने 24 जनवरी 2018 को उत्तराखंड के नैनीताल, मसूरी, श्रीनगर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, धारचूला, गौचर, जोशीमठ, चिन्यालीसौड़, नई टिहरी आदि के लिए करीब डेढ़ दर्जन हवाई सेवाओं की ‘उड़ान’ के दूसरे चरण की निविदा प्रक्रिया के पश्चात देश के 25 असेवित हवाई अड्डों व 31 अवेसित हैलीपैडों के साथ इन्हें भी मंजूरी दे दी है। दी गयी मंजूरी के अनुसार पिथौरागढ़ के लिए देहरादून, हिंडन दिल्ली व पंतनगर से हेरिटेज कंपनी अपने विमान चलाएगी। वहीं अल्मोड़ा से पंतनगर व पिथौरागढ़, चिन्यालीसौड़ से सहस्रधारा, धारचूला से हल्द्वानी, गौचर से जोशीमठ, सहस्रधारा व श्रीनगर, मसूरी से देहरादून, नैनीताल से पंतनगर, नई टिहरी से देहरादून व श्रीनगर, रामनगर से देहरादून व पंतनगर आदि सेवाएं पवन हंस के माध्यम से तथा हल्द्वानी से हरिद्वार सेवा हेरिटेज कंपनी के माध्यम से चलाई जाएंगी।

रानीबाग-कालाढुंगी से नैनीताल के लिए रोपवे की संभावनाएं तलाशीं, 800 करोड़ से बनेगा 11 किमी लंबा रोपवे

केबल कार।रानीबाग-कालाढुंगी से नैनीताल के लिए रोपवे की संभावनाएं तलाशीं

नैनीताल 09 अगस्त 2018। प्रदेश के पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने बृहस्पतिवार को नैनीताल के लिए रानीबाग, हल्द्वानी व कालाढुंगी से प्रस्तावित रोपवे की व्यवहार्यता की जांच हेतु सम्भावित विकल्पों का व्यापक निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नैनीताल के लिए रोपवे निर्माण के लिए गंभीरतापूवर्क कार्य कर रही है। इस संदर्भ में शुक्रवार को कुमाऊं आयुक्त राजीव रौतेला के साथ भी वह बैठक करेंगे। इसके अतिरिक्त उन्होंने रामनगर में निर्माणाधीन होटल मैनेजमेंट संस्थान तथा कन्वेनशन सेंटर में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी भी ली।
नैनीताल के लिए रोपवे निर्माण के संबंध में आज पयर्टन सचिव ने रानीबाग स्थित एचएमटी फैक्ट्री का निरीक्षण किया, तथा एचएमटी व वन विभाग के अधिकारियों से भूमि उपलब्धता को लेकर विस्तृत चर्चा की। साथ ही रानीबाग से ज्योलीकोट होते हुए हनुमानगढ़ी तक रोपवे निमार्ण की संम्भावना पर विभिन्न दृष्टिकोणों से विचार-विर्मश किया। इस संबंध में उन्होंने एचएमटी के भू-राजस्व अभिलेखों की भी जांच की। वहीं दूसरे विकल्प के तौर पर उन्होंने कालाढूंगी सेे नैनीताल के केव गार्डन तक सम्भावित रोपवे के टर्मिनल हेतु कालाढूंगी स्थित उद्यान विभाग की भूमि का भी निरीक्षण किया गया। साथ ही अन्य वैकल्पिक टर्मिनल के लिए उन्होंने कालाढुंगी स्थित छोटी हल्द्वानी का भी निरीक्षण किया ओर सीबीआरआई के अधिकारियों से इस विषय में व्यापक विचार-विमर्श किया। निरीक्षण के दौरान उनके साथ कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेश धीराज गर्ब्याल, जिला पर्यटन विकास अधिकारी के साथ ही वन व राजस्व विभाग तथा सीबीआरआई के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : पानी की बूंद-बूंद पर रहेगी नजर: प्रदेश में लगेंगे पानी के वाई-फाई वाले ऑटोमैटेड डिजिटल मीटर

-मीटर रीडिंग के लिये रीडर को घर-घर भी नहीं आना पड़ेगा, बल्कि पास से गुजरते हुए सभी मीटरों की रीडिंग मिल जायेगी
-नैनीताल व देहरादून में एशियाई विकास बैंक के माध्यम से योजना स्वीकृत, आगे रामनगर व रुड़की में भी योजना होगी लागू
-उपभोक्ताओं को नये मीटरों के लिये कोई शुल्क नहीं देना होगा, मीटर लगाने वाली संस्था की ही अगले सात वर्षों तक इन मीटरों के रखरखाव की जिम्मेदारी
नवीन जोशी। नैनीताल। प्रदेश में पेयजल की बरबादी अब बीते समय की बात होने वाली है। अब प्रदेश में पेयजल की एक-एक बूंद पर संबंधित विभाग की नजर होगी। उपभोक्ता पेयजल का कितना उपयोग कर रहे हैं, और कितना पानी पेयजल लाइनों से लीक होकर बरबाद हो रहा है, यह सब कुछ संबंधित विभाग की निगरानी में रहेगा। ऐसा प्रदेश में पेयजल उपभोक्ताओं के पेयजल संयोजनों पर लगने जा रहे ऑटोमेटेड डिजिटल मीटरों से संभव होगा, जिनकी पहली चरण की योजना नैनीताल व देहरादून के लिये स्वीकृत हो गयी है, तथा आगे रामनगर व रुड़की कस्बों में भी यह मीटर लगाने की योजना है। खास बात यह भी है कि यह ‘ऑटोमेटेड डिजिटल मीटर वाई-फाई’ सुविधा से युक्त होंगे। इसका लाभ यह होगा कि मीटर रीडरों को पेयजल के उपयोग की रीडिंग लेने के लिये घर-घर भी नहीं जाना पड़ेगा। बल्कि मोटर साइकिल या पैदल टहलते हुए ही उनके पास मौजूद ‘हैंड हेल्ड यूनिट’ पर उस क्षेत्र में मौजूद सभी मीटरों की रीडिंग स्वयं दर्ज हो जायेगी। साथ ही यह भी पता चल जायेगा कि उस क्षेत्र में कोई मीटर खराब अथवा बंद तो नहीं हो गया है। इसके साथ ही यह भी पता चल जायेगा कि किसी क्षेत्र में पेयजल की कितनी जरूरत अथवा उपयोग है, तथा मीटर रीडरों पर दर्ज हो रही रीडिंग से इतर कोई लीकेज तो नहीं है।
एशियाई विकास बैंक से संबद्ध उत्तराखंड अर्बन सेक्टर डेवलपमेंट इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम के प्रोग्राम मैनेजर अभियंता दुर्गेश पंत ने प्रदेश में लगने जा रहे ‘ऑटोमैटेड मीटरिंग सिस्टम’ के बारे में बताया कि इसके तहत नैनीताल व देहरादून नगरों में ‘डिजिटल वाई-फाई ओरिएंटेड’ पेयजल मीटर लगने जा रहे हैं। नैनीताल के सभी 20 जोनों में यह कार्य अप्रैल माह के आखिर से धरातल पर आना शुरू हो जायेगा। मीटरों के सात वर्ष तक रखरखाव, मरम्मत की जिम्मेदारी इन्हें लगाने वाली संस्था की होगी। उपभोक्ताओं को इन्हें लगाने के लिये कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। इन मीटरों के लगने से नगर के सभी 20 जोनों में अलग-अलग व कुल मिलाकर उपयोग हो रहे पेयजल की पूरी जानकारी मिल जायेगी। इन आंकड़ों का पंप हाउस में लगे ‘इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फ्लो मीटर’ के आंकड़ों से मिलाकर जोनों में आपूर्ति किये जाने वाले व उपयोग हो रहे आंकड़ों से मिलान कर पानी की लीकेज से बरबादी के साथ ही अवैधानिक संयोजनों पर खर्च हो रहे पेयजल के सही-सही आंकड़े व स्थान का भी पता लग सकेगा।

खर्च के मुताबिक ही देना पड़ सकता है पेयजल का बिल

नैनीताल। अभी प्रदेश में घरेलू उपभोक्ताओं को बिना मीटर रीडर के कितना भी पानी की बरबादी करने पर नियत बिल का ही भुगतान करना होता है, लेकिन नये मीटर लगने के बाद बहुत संभव है कि पानी के उपयोग की मात्रा के आधार पर ही बिल निर्धारित हो सकते हैं। साथ ही पेयजल के खर्च के आंकड़े उपलब्ध होने पर सरकार कोई अन्य नीतिगत निर्णय भी आसानी से ले सकती है।

प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर चलेंगे उत्तराखंड के सरकारी स्कूल, 500 मॉडल स्कूल बनेंगे, नर्सरी कक्षाएं भी होंगी, स्मार्ट क्लासें भी लगेंगी

 D Senthil Pandian-हर ब्लॉक में होंगे पांच मॉडल स्कूल, यहां प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर होगी पढ़ाई व अन्य आयोजन
-शिक्षकों-प्रधानाध्यापकों कोे दिया जाएगा प्रशिक्षण, गणित-विज्ञान व भाषाओं के अतिरिक्त शिक्षक होंगे तैनात
नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड में हालांकि अधिकांश सरकारी खबरें ‘गा, गे व गी” की ही यानी भविष्य के लिए बेहतर उम्मीदें जगाने वाली आती हैं, पर यह वर्तमान के धरातल पर उतरती हैं या नहीं, यह अलग बात है। अब प्रदेश सरकार प्रदेश के सरकारी स्कूलों की दुर्दशा को सुधारने की ओर सकारात्मक कदम उठाने का दावा कर रही है। प्रदेश के शिक्षा महानिदेशक एवं शिक्षा सचिव की दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे डी सेंथिल पांडियन ने बताया कि प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में नर्सरी की पढ़ाई कराने की भी योजना है। साथ ही राज्य सरकार प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर पहले चरण में प्रदेश के सभी ब्लॉकों में बेहतर चल रहे कम से कम पांच-पांच और कुल मिलाकर 500 स्कूलों को मॉडल स्कूलों के रूप में परिवर्तित करने जा रही है। इसके अलावा हर स्कूल का अपना वार्षिकोत्सव होगा और पढ़ाई से इतर खेल, नृत्य, गीत व वाद-विवाद आदि की प्रतियोगिताएं भी होंगी। साथ ही इन विद्यालयों में हर कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों का अपना एक अलग ऐसा मानक भी होगा, जितनी जानकारी बच्चों को होनी जरूरी होगी।
श्री पांडियन ने बताया कि प्रदेश के सभी स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से मॉडल स्कूल बनाने की योजना है। योजना के तहत सभी स्कूलों की स्थानीय आवश्यकताओं को देखते हुए अपनी अलग ‘स्कूल विकास योजना” बनाई जाएगी। योजना के लिए प्रदेश सरकार से शिक्षा विभाग को अगले शैक्षणिक सत्र यानी 2015-16 के लिए 20 करोड़ रुपए प्राप्त हो गए हैं। इससे अगले दो-तीन माह में जरूरी ढांचागत सुविधाएं तैयार कर ली जाएंगी। योजना के तहत हर ब्लॉक में दो-दो प्राथमिक एवं माध्यमिक तथा एक जूनियर हाईस्कूल को चिन्हित किया जाएगा। स्मार्ट क्लास आईआईटी मुंबई द्वारा तैयार किए गए उपकरण की मदद से चलाई जाएंगी। इन उपकरणों व सॉफ्टवेयर का प्रयोग करने के लिए चिन्हित मॉडल स्कूलों के प्रधानाध्यापकों व शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही हिंदी-अंग्रेजी भाषाओं तथा गणित व विज्ञान के पूरे शिक्षक दिए जाएंगे। जरूरत पड़ी तो गेस्ट टीचर भी नियुक्त किये जायेंगे।

नई नीति में स्कूलों की सफाई के प्रबंध का प्रस्ताव तैयार

नैनीताल। अक्सर सरकारी स्कूलों में बच्चों द्वारा सफाई का कार्य कराए जाने पर प्रश्न खड़े किए जाते हैं। इस बाबत ‘राष्ट्रीय सहारा’ द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में प्रदेश के शिक्षा महानिदेशक डी सेंथिल पांडियन ने बताया कि स्कूलों में सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इस हेतु स्कूलों में अलग कर्मचारियों की तैनाती की जा सकती है। प्रदेश में शून्य अथवा 10 से कम छात्र संख्या वाले अनेक स्कूल होने के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि शिक्षा के अधिकार के तहत हर बच्चे को एक किमी के दायरे में शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। संभव है कि किसी स्थान पर बच्चे उपलब्ध ही ना हों, ऐसे स्कूलों के ‘रिडिप्लाइमेंट प्लान” तैयार किया जा रहा है।

प्रमाण पत्रों की जांच के बाद ही होगा 2014 में भर्ती हुए शिक्षकों का स्थायीकरण

नैनीताल। शिक्षा महानिदेशक डी सेंथिल पांडियन ने बताया कि वर्ष 2014 में भर्ती हुए शिक्षकों में से अनेक शिक्षकों कि शैक्षणिक प्रमाण पत्र फर्जी निकले हैं। नैनीताल जनपद में भी ऐसे पांच शिक्षक चिन्हित हुए हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। साथ ही 2014 के सभी शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच कराई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही इन शिक्षकों के स्थायीकरण की कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने बताया कि काउंसिलिंग आधारित स्थानांतरण नीति का परीक्षण किया जा रहा है। बताया कि 2015 के बात बीएड की जगह डी.एल.एड.  यानी ‘डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन’ प्रशिक्षितों की ही प्राइमरी शिक्षकों के रूप में तैनाती की जाएगी। उन्होंने यह टिप्पणी भी की कि ‘उत्तराखण्ड में शिक्षकों का ध्यान केवल ‘सुगम’ स्थानों पर तैनाती प्राप्त करने पर है।’ उल्लेखनीय है महकमे के एक अन्य पूर्व महानिदेशक व सचिव ने शिक्षा विभाग पर टिप्पणी की थी-‘उत्तराखण्ड के शिक्षा विभाग को स्वयं भगवान भी नहीं सुधार सकते।’

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अधिकारियों की काहिली से उत्तराखंड के किसानों को नुकसान का मुआवजा मिलना मुश्किल 

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योग दिवस मनाने से इंकार कर क्या अंतराष्ट्रीय ‘खनन’ या ‘मदिरा’ दिवस मनाने की पहल करेगा ‘उत्तराखंड राष्ट्र’ ? 

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अब बच्चों को लगेगा केवल एक “पेंटावैलेंट टीका”

मापी जाएगी टेक्टोनिक प्लेटों की गतिशीलता 

आज भी सड़क से दो से 15 किमी पैदल दूर हैं नैनीताल के 130 गांव

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

2 thoughts on “उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दिल्ली से पन्तनगर व देहरादून के लिए नियमित हवाई सेवा शुरू करने के लिए दिये यह बड़े निर्देश

  • December 24, 2015 at 9:04 PM
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    उत्तराखंड की सरकार ही निकम्मी है कुछ करना नहीं चाहती एक तरफ कहती है की हमारी शिक्षा की स्थिति बेकार है, वही इतनी बड़ी तादाद मैं प्रशिक्षित है बीएड टेट वाले वही इतनी बड़ी संख्या मैं पद भी रिक्त है और बेरोजगारों के पास 2016 मार्च तक का ही समय है और अधिकारी भी अंधे है न्यूज़ मैं आने के लिए बड़ी बड़ी बातें करते है और जमीन पर सब जीरो है और बोलते है प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूल बनाएंगे पब्लिक को मुर्ख बनाना छोड़ दो और बेरोजगारों के साथ अन्याय मत करो

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