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चंपावत में हुआ अजब वाकया, 35 साल की महिला को छठे प्रसव में अस्पताल के बाहर पैदा हुआ 5 किलो का बेटा, और पति करता रहा ऐसी शर्मनाक हरकत…

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नवीन समाचार, चंपावत, 15 अप्रैल 2019। सोमवार को चंपावत के जिला चिकित्सालय में के एक अजीबोगरीब मामला प्रकाश में आया। यहां 35 साल की प्रसूता महिला ने अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के न होने की स्थितियों के बीच अस्पताल के बाहर एक पांच किलो के बच्चे को जन्म दिया। यह उसकी छठी संतान है। अजीबोगरीब बात यह भी रही कि अस्पताल द्वारा रेफर किये जाने और 108 बुलाये जाने के बावजूद महिला का प्रति उसे हायर सेंटर नहीं ले गया, बल्कि अस्पताल के बाहर ही पीछे की ओर उसका प्रसव करवा दिया, और प्रसव, बच्चे के बाहर आने व बच्चे की गर्भनाल काटे जाने व इस दौरान पत्नी को काफी रक्तश्राव होने की नाजुक स्थितियों में भी वीडियो बनाता रहा। गनीमत रही कि सूचना मिलने पर चिकित्सक व चिकित्सा कर्मी वहां पहुच गये और महिला को लेबर रूम में ले जाकर उसे उपचार दिया।
बताया गया कि सोमवार सुबह ग्राम बुड़ाखेत सिप्टी निवासी दिनेश राम अपनी पत्नी भावना (35) को प्रसव के लिए जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचा। यहां जांच में पता चला कि भावना को बीती 13 अप्रैल को ही गर्भधारण किये 10 सप्ताह हो चुके थे। इसलिए जिला चिकित्सालय में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के न होने के कारण उसे जिला चिकित्सालय पिथौरागढ़ के लिए रेफर किया गया। महिला के पहले से पांच बच्चे बताये गये। डा. वर्षा ने सुबह साढे आठ बजे उसे पिथौरागढ़ जिला चिकित्सालय के लिए रेफर कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ डा. आरपी खंडूरी ने 108 भी बुलवा ली। लेकिन महिला का पति उसे लेकर चिकित्सालय के पीछे की ओर चला गया। इधर पूर्वाह्न 11.40 बजे किसी ने डॉक्टरों को सूचना दी कि महिला ने चिकित्सालय के पीछे की ओर एक बच्चे को जन्म दिया है। जिससे अस्पताल में हलचल मच गई। चिकित्सक व अन्य कर्मी तुरंत वहां पहुंचे। प्रसव के उपकरण मंगाकर बच्चे की नाल काटी गई और प्रसव कक्ष में ले जाया गया। चिकित्सकों ने बताया इस दौरान महिला का पति पूरी घटना की मोबाइल पर रिकार्डिंग कर रहा था, और प्रसव के बाद से महिला का पति चिकित्सालय से गायब हो गया।

यह भी पढ़ें : उफ़, ऐसी मुफलिसी : डिलीवरी के खर्च के लिये मां ने सिर्फ 50 हज़ार में बेच दिया नवजात कलेजे का टुकड़ा

नवीन समाचार, विकासनगर, जनवरी 2019। मुफलिसी-गरीबी इंसान से जो न करे दे वही कम है।डिलीवरी कराने के लिए लिया कर्ज न चुका पाने पर एक दंपती ने अपने इकलौते दुंधम़ुंहे बेटे को 50 हजार रुपये में बेच दिया। एक सेवानिवृत फौजी की अविवाहित बेटी ने दो रुपये के टिकट लगे सादे कागज पर दंपती की सहमति लेकर यह सौदा किया। हालांकि, इसमें रकम को कोई उल्लेख नहीं है।

रविवार को पुलिस के एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल ने मौके पर पहुंचकर सौदे को बेपर्दा कर दिया। पुलिस ने बेचा गया बच्चा अपने कब्जे में लेकर उसके मां-पिता के साथ ही खरीददार युवती और सौदा कराने वाली निजी अस्पताल की एक नर्स को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। देर रात इन सभी को छोड़ दिया गया। इस सिलसिले में फिलहाल मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। पुलिस के अनुसार एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल मामले की जांच कर रहा है।

घटना विकासनगर कोतवाली के बाबूगढ़ क्षेत्र की है। कोतवाल महेश जोशी के अनुसार यहां परविंदर उर्फ रॉकी अपनी पत्‍‌नी सिमरन के साथ रहता है। वह मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता है। डेढ़ साल पहले उसकी पत्‍‌नी की ऑपरेशन से डिलीवरी हुई थी, इसके लिए उसने परिचित से 20 हजार रुपये कर्ज लिया था, लेकिन वह उसे चुका नहीं पा रहा था। यह उनका पहला बच्चा था। इस बीच, सिमरन ने वहां के एक निजी अस्पताल में कार्यरत एक नर्स कांता राणा से अपनी परेशानी का जिक्र किया और अपने दुधमुंहे बेटे अर्जुन को बेचने की इच्छा जताई।

इस पर नर्स ने देहरादून निवासी अपनी सहेली पूजा गुरुंग से संपर्क कर पचास हजार रुपये में बच्चे का सौदा करवाया। कोतवाल के अनुसार पूजा ने उसे पहले कभी बताया था कि वह आजीवन शादी नहीं करना चाहती, उसकी इच्छा किसी बच्चे को गोद लेकर उसे पालने की है।

तीन दिसंबर को हुआ था सौदा 

कोतवाल महेश जोशी के अनुसार 3 दिसंबर, 2018 को यह सौदा किया गया। बच्चा खरीदने वाली युवती पूजा गुरुंग ने सादे कागज पर दो रुपये का टिकट लगाकर बच्चे के मां-पिता की सहमति ली। साथ ही दंपती को बच्चे की एवज में 50 हजार रुपये का चेक दिया। दंपती ने बीते रोज यानि शनिवार को यह चेक कैश करवाया। रविवार को पूजा गुरंग बच्चे को लेने के लिए आई थी। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल और कोतवाली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बच्चे को अपने कब्जे में ले लिया। साथ ही बच्चे के मां-पिता, बिचोलिया नर्स और बच्चा खरीदने वाले युवती पूजा गुरुंग को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में उन्होंने पूरा किस्सा बताया। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल के दरोगा की तरफ से मामले में तहरीर दी गई है, लेकिन मुकदमे को लेकर देर रात पुलिस पसोपेश में थी। कोतवाल महेश जोशी के अनुसार मामले की जांच पड़ताल की जा रही। दूसरी तरफ चर्चा है कि मामले को दबाने के लिए पुलिस पर सियासी दबाव भी डाला जा रहा है।

ऑनलाइन भी किया था आवेदन 

कोतवाल अनुसार हिरासत में पूछताछ के दौरान पूजा गुरुंग ने बताया कि कुछ दिन पहले बच्चा गोद लेने के लिए ऑनलाइन भी आवेदन किया था। तब उसने अपने वकील से भी बात की थी, लेकिन आवेदकों की संख्या अधिक होने की वजह से उसने इरादा टाल दिया।

नर्स को दस हजार कमीशन

पुलिस सूत्रों के अनुसार बिचौलिये की भूमिका निभाने वाली नर्स को बतौर कमीशन दस हजार रुपये मिले। यह रकम दंपती को दी गई पचास हजार की रकम से अलग थी। हालांकि, नर्स कमीशन लेने से साफ इन्कार कर रही है।

गोद लेने की ये है प्रक्रिया 

सुरेंद्र मित्तल (पूर्व अध्यक्ष उत्तराखंड बार कौंसिल) ने बताया कि किसी भी बच्चे को गोद लेने की एक प्रक्रिया नियत है। इसके लिए बाकायदा आवेदन करना होता है। जिला प्रशासन के स्तर पर इसके लिए तमाम औपचारिकताएं पूरी कराई जाती हैं। यहां तक कि बच्चा गोद लेने वाले शख्स की हैसियत का भी आकलन किया जाता है। दंपती की सहमति के साथ ही अन्य औपचारिकताएं पूरी करने के बाद गोद दिए जाने वाले बच्चे को बाकायदा रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकरण कराना होता है। इससे इत्तर किसी प्रक्रिया को गोद लेने का वैधानिक माध्यम नहीं माना जा सकता है।

बोले अधिकारी  

निवेदिता कुकरेती (एसएसपी देहरादून) का कहना है कि मामले में कुछ तकनीकी दिक्कत आ रही है। वह इसलिए कि बच्चे को गोद लेने जैसी प्रक्रिया अपनाने की बात भी सामने आ रही है। इसलिए बच्चे को सोमवार को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सामने पेश किया जाएगा। कमेटी के सुझाव लेकर इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

महेश जोशी (कोतवाल विकासनगर) का कहना है कि‍ बच्चे को बेचने वाले दंपती, बिचौलिया की भूमिका निभाने वाली नर्स, बच्चे को खरीदने वाली युवती को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। युवती ने बच्चा गोद लेने की बात कही, इसकी भी जांच की जा रही है। कानूनी राय लेने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। (साभार दैनिक जागरण)

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