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नैनीताल के पास 228 गैस सिलेंडरों से भरे ट्रक में विष्फोट, NH-109 बंद

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-इंजन में शॉर्ट सर्किट होने से हुआ भीषण हादसा, चालक-परिचालक व एक अन्य चालक काफी जले, बर्न वार्ड को हुए रेफर
-डेढ़ किमी के दायरे में बिखरे बम की तरह फटे गैस सिलेंडरों के हिस्से
नैनीताल। मुख्यालय से करीब 20 किमी दूर हल्द्वानी से अल्मोड़ा को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-109 (पुराना नाम NH-87) पर 1916 में बीरभट्टी के पास अंग्रजी दौर में बने पुल पर 228 गैस सिलेंडरों से भरे ट्रक में आग लगने से भयंकर विष्फोट हो गया। दुर्घटना में करीब 80 सिलेंडरों में जोरदार धमाके हुए। धमाके इतने भीषण थे कि सिलेंडरों के टुकड़े आसपास के करीब एक से डेढ़ किमी के दायरे में फैल गये। दुर्घटना का कारण ट्रक के इंजन में शॉर्ट सर्किट का होना बताया जा रहा है। आग बुझाने के शुरुआती प्रयासों में ही ट्रक के चालक, हेल्पर व ट्रक में सवार एक अन्य ट्रक चालक बुरी तरह झुलस गए। फायर ब्रिगेड की चार गाड़ियां मौके पर पहुंचने के बावजूद अग्निशमन कर्मी घंटों तक आग बुझाने की हिम्मत नहीं जुटा पाये। दुर्घटना के बाद पुल की स्थिति बेहद जर्जर हो गयी है, यहां तक कि इस पर पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं है। लोनिवि के राष्ट्रीय राजमार्ग खंड ने अगले आदेशों तक के लिये पुल पर आवागमन प्रतिबंधित कर दिया है। बताया गया है कि कम से कम एक सप्ताह बाद ही आईआईटी रुड़के की टीम द्वारा जांच किए जाने के बाद ही आवागमन पर आगे की स्थिति साफ होगी। इस दौरान हल्द्वानी से पहाड़ की ओर जाने वाले वाहनों को भीमताल के रास्ते से गुजरना होगा, जबकि गेठिया, भूमियाधार क्षेत्र के लोगों को सड़क बंद होने से लंबे समय तक परेशानी झेलनी होगी।

शाबास: लोगों को बचाने अपनी जान जोखिम में डाल भागे थे ट्रक लेकर

दुर्घटनाग्रस्त ट्रक के बुरी तरह जले हुए चालक व सहयोगी

-पुल से पहले भी होती घटना तो आधा दर्जन घर हो जाते ध्वस्त और गृहवासी हो सकते थे हताहत
नैनीताल। सोमवार को मुख्यालय से करीब 20 किमी दूर राष्ट्रीय राजमार्ग-109 पर 228 गैस सिलेंडरों से भरे ट्रक संख्या यूके04सीए-4374में आग लगने के बाद हुई भीषण दुर्घटना के परिणाम और भी अधिक भयावह हो सकती थी, यदि वाहन चालक और ट्रक में सवार हेल्पर व अन्य चालक ने अपनी जान जोखिम में न डाली होती। यदि घटना पुल से ठीक पहले भी हुई होती तो आधा दर्जन घर ध्वस्त और गृहवासी हताहत हो सकते थे। वहीं 100 मीटर पहले बीरभट्टी पड़ाव में घटना होने पर दुर्घटना और भी अधिक भीषण होती।
घटना के एक दिन बाद मंगलवार को जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में भर्ती ट्रक के चालक बसौली सोमेश्वर जिला अल्मोड़ा निवासी जगदीश बिष्ट पुत्र बहादुर बिष्ट, हेल्पर नन्हे पुत्र महिपाल निवासी गहबरा मीरगंज बरेली और अन्य चालक गोविंद सिंह पुत्र राजेंद्र सिंह निवासी ग्राम बघर जिला बागेश्वर ने बताया कि ट्रक के केबिन में आग बीरभट्टी पड़ाव के ठीक पहले पड़ने वाले छोटे पुल से गुजरते हुए ही यानी घटनास्थल से करीब 150 मीटर पहले ही लगनी शुरू हो गयी थी। चालक जगदीश ने बताया कि इस पर उसने सोचा कि बीरभट्टी के पड़ाव में ट्रक को रोकना ठीक नहीं है। कोई घटना हो सकती है। साथ ही सोचा कि पड़ाव से आगे पानी के नल पर जाकर रोकेंगे और पानी से आग बुझाएंगे। यह सोचकर ट्रक दौड़ाया। उधर हेल्पर नन्हे व गोविंद ने ट्रक में मौजूद दो फायर एक्सटिंग्युशर निकालकर उन्हें चलाने की कोशिश की। किंतु पानी के नल तक पहुंचने तक आग बढ़ गयी थी, और यहां आसपास घरों को खतरा होने का अंदेशा भांप जगदीश केबिन में धुंवा भरने के बावजूद ट्रक को आगे दौड़ाता चला गया। किंतु अंग्रेजी दौर में 1916 में बने लोहे के पुल के दूसरे छोर तक पहुंचने से चंद कदम पहले ही ट्रक के केबिन में आग बुरी तरह फैल गयी थी। इस पर उसने मेन स्विच बॉक्स का फ्यूज निकालने की कोशिश की। फ्यूज बॉक्स गर्म लाल हो चुका था, जिससे उसका हाथ बुरी तरह से जल गया। उधर नन्हे व गोविंद ने दोनों फायर एक्सटिंग्युशर को चलाने की कोशिश की, इस बीच फायर एक्सटिंग्युशर के चलने के साथ पीछे की ओर से आये आग का बड़े गुबार ने उल्टे उन्हें गिरफ्त में ले लिया। कोई उपाय न होने पर ही तीनों ट्रक से निकलकर भागे। मंगलवार को पूर्व विधायक सरिता आर्य ने भी तीनों से बात की, और चिकित्सकों से उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली, और डीएम से मिलकर उन्हें उनकी बहादुरी पर पुरस्कार दिलाने के लिये बात करने की बात कही। वहीं वरिष्ठ चिकित्सक कैप्टन राजेश साह ने बताया कि तीनों 30 फीसद से अधिक जले हैं। खासकर हेल्पर नन्हे 45 फीसद तक जला है।

घटनाक्रम के अनुसार ट्रक संख्या यूके04सीए-4374 सोमवार सुबह 10 बजे इंडेन के हल्दूचौड़ स्थित बॉटलिंग प्लांट से भराड़ी कपकोट जिला बागेश्वर के लिये 222 घरेलू और छह वाणिज्यिक गैस सिलेंडर लेकर चला था। अपराह्न साढ़े 11 बजे के करीब यह ज्योलीकोट से आगे बीरभट्टी (ब्रेवरी) के ठीक आगे अंग्रेजी दौर में 1916 में बने लोहे के पुल से गुजर रहा था कि पुल के दूसरे छोर पर पहुंचने से पहले ही इसके इंजन में शॉर्ट सर्किट हो गया। चालक बसौली सोमेश्वर जिला अल्मोड़ा निवासी जगदीश पुत्र बहादुर ने ट्रक के स्विच बॉक्स को ऑफ करने की कोशिश की, किंतु स्विच बॉक्स बेहद गर्म था, जिससे जगदीश का हाथ जल गया। उधर हेल्पर नन्हे पुत्र महिपाल निवासी गहबरा मीरगंज बरेली-यूपी ने ट्रक में मौजूद फायर एक्सटिंग्युशर का प्रयोग करने की कोशिश की, किंतु भयंकर आग ने उल्टे उसे ही घेर लिया। ट्रक में मौजूद एक अन्य चालक गोविंद सिंह पुत्र राजेंद्र सिंह निवासी ग्राम बघर जिला बागेश्वर भी जल गया। इसके बाद बमुश्किल तीनों किसी तरह जान बचाकर भागे। घटना की सूचना कमोबेश तत्काल ही मुख्यालय पहुंच गयी थी, और प्रशासनिक मशीनरी भी हरकत में आई। हल्द्वानी व नैनीताल से अग्निशमन विभाग की चार गाड़ियां भी मौके पर पहुंचीं, किंतु स्थिति यह रही कि अपराह्न एक बजे तक कोई हादसे के करीब तक जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया, क्योंकि ट्रक में एक के बाद एक भयानक धमाके हो रहे थे, और इससे पूरा क्षेत्र थर्रा रहा था। धमाकों की गूंज करीब चार किमी दूर पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती विहार तक सुनाई दे रही थी। आखिर में सभी सिलेंडरों में धमाके हो जाने के बाद करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। जबकि ट्रक के जले हुए ढांचे को करीब पांच बजे तक हटाया जा सका। इस दौरान एडीएम बीएल फिरमाल, ज्योलीकोट चौकी प्रभारी मनवर सिंह, डीएसओ, आरटीओ व लोनिवि एनएच खंड के अधिकारी मौके पर पहुंचे। घायल ट्रक सवारों को पहले गेठिया सेनीटोरियम, फिर बीडी पांडे जिला चिकित्सालय और यहां से बर्न वार्ड में रेफर किया गया।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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