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काशीपुर के गौविषाण किला परिसर को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने के आदेश

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-राज्य में स्थित प्राचीन स्मारकों व पुरातात्विक क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने व अनधिकृत निर्माणों पर रोक लगाने के निर्देश
-इंटेक’ की सलाह से उत्तराखंड के स्मारकों को संरक्षित करने कें लिये छः माह के भीतर नियमावली बनाने को भी कहा

Bhimeshwar Temple, Kashipur
Balsundari Mandir kashipur

नैनीताल, 7 सितंबर 2018। उत्तराखंड की कार्यवाहक मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने काशीपुर के पुरातात्विक महत्व के गौविषाण किले को दो माह के भीतर राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने तथा राज्य में स्थित प्राचीन स्मारकों व पुरातात्वि क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने व अनधिकृत निर्माणों पर रोक लगाने के निर्देश दिए है।
साथ ही खंडपीठ ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया के महानिदेशक को इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज यानी ‘इंटेक’ की सलाह से उत्तराखंड के स्मारकों को संरक्षित करने कें लिये छः माह के भीतर नियमावली बनाने को कहा है। खण्डपीठ ने यह भी निर्देश दिए है कि नियमावली को बनाने के बाद रास्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण के समुख पेश करें।
मामले के अनुसार काशीपुर निवासी अनिल कुमार माहेश्वरी ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि काशीपुर स्थित राष्ट्रीय स्मारकों के आसपास हुए अतिक्रमण को हटाने व इन स्मारकों को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया को निर्देश दिया है कि वे काशीपुर स्थित द्रोण सागर, चैती मंदिर व भगवान मोटेश्वर महादेव मंदिर को अपनी देख रेख व नियंत्रण में लें साथ ही केंद्र सरकार को निर्देश दिए है कि वे काशीपुर स्थित गौविषाण किला परिसर को राष्ट्रीय धरोहर दो माह के भीतर घोषित करें

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