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नैनीताल के युवाओं को गीत ‘बोल दो’ हो रहा हिट

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-प्रारम्भ प्रोडक्शन्स ने किया है रिलीज

नवीन समाचार, नैनीताल, 28 अगस्त 2019। नैनीताल नगर के युवाओं की जुबान पर इन दिनों एक नया गीत ‘बोल दो’ छाने लगा है। हर ओर इस गीत के बोलों और इसके पिक्चराइजेशन की चर्चा है। युवा अक्सर इस गीत को गुनगुनाते नजर आ रहे हैं। दरअसल यह नया गीत ‘बोल दो’ नगर के प्रतिभाशील कलाकार प्रभात सिंह के इसी वर्ष स्थापित ‘प्रारम्भ प्रोडक्शंस’ की प्रस्तुति है। रोहित वर्मा के निर्देशन में फिल्माए गये इस गीत को नगर के मल्लीताल पंत पार्क एवं कैपिटॉल सिनेमा के सामने व बास्केट बॉल कोर्ट के सीमित दायरे और डीएसबी परिसर की एक कक्षा में फिल्माया गया है, बावजूद गीत का फिल्मांकन इतना दिलकश है कि बार-बार देखने को मजबूर करता है। गत 21 अगस्त 2019 को रिलीज हुए इस गीत को एक सप्ताह से भी कम समय में हजारों व्यूज और सैकड़ों लाइक्स मिल चुके हैं। गीत में डीएसबी परिसर के कई छात्र-छात्रा भी नजर आ रहे हैं। प्रभात ने बताया कि उनके ‘प्रारम्भ प्रोडक्शंस’ का मकसद नैनीताल व नैनीताल से जुड़े क्षेत्रों में रहने वाले प्रतिभाशील कलाकारों को एक नई पहचान देना और उत्तराखंड की संस्कृति को पूरी दुनिया के सामने लाना है। आगे ‘प्रारम्भ प्रोडक्शन्स’ द्वारा उत्तराखंड में युवाओं में बढ़ते स्मैक के जानलेवा नशे के दुष्प्रभावों पर एक नई प्रेरणादायक लघु फिल्म पर भी काम किया जा रहा है। गीत में आवाज व संगीत प्रिंस परसाल का है, जबकि स्क्रीन पर काजल बोरा, सम्राट सिंह और प्रिंस परसाल के साथ ही हिमानी बोरा, अलोना बिष्ट, शिवानी बोरा, सोनी अनीश, शिवानी पवार, सिमरन सिंह, अलफजा नदीम, दीप्ति बोरा, धैर्य बिष्ट, कार्तिक पंत, दक्ष्य कश्यप, शाहरुख अंसारी, अंकित चंद्रा, अतुल बेदी, गौरव सिलोरियाल, नवीन जोशी व मुकुल आनंद नजर आ रहे हैं।

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वीडियो में सरहद गीत गाते युवा।

नवीन समाचार, नैनीताल, 25 अगस्त 2019। देश के शहीद जवानों को याद करते हुए उन्हें सम्मान व उनकी सेवाओं के लिए देश की ओर से धन्यवाद देने के लिए नगर के युवाओं की ‘टीम बेनी’ के सदस्यों ने एक ऑडियो-वीडियो गीत तैयार किया है। यूट्यूब पर ‘सरहद’ नाम से मौजूद यह गीत खासा पसंद किया जा रहा है।

देखें गीत :

‘सरहद पे जो लड़ाई है भारत माता पे जो आंच आई है’ शब्दों युक्त गीत में देश की सीमा पर देश की सुरक्षा में तैनात जवानों और उनके परिवारों की कुर्बानी का गुणगान किया गया है। टीम के सदस्यों का कहना है कि यह गीत सीमा पर खड़े होकर देश की रक्षा करने वाले जवानों को देश की ओर से धन्यवाद देना है। वे आगे भी देश के जवानों के लिए ऐसे ही प्रोत्साहित करने वाले गीत बनाएंगे। गीत बनाने वाली टीम बेनी में नगर के नारायण नगर वार्ड के सामान्य घरों से ताल्लुक रखने वाले करन कुमार, नगर के सेंट जेवियर के 12वीं कक्षा के छात्र अभय कुमार, 10वीं के छात्र ध्रुवांश यशवर्धन, कमलेश कुमार, प्रियांशु कुमार, मोहित पंत, वैभव सिंह, रोहित बरसीला, अंकित कुमार व शुभम कुमार शामिल हैं।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 19 अगस्त 2019। एक बड़ी प्रसिद्ध कहावत व यथार्थ है-‘एक मॉ अपने चार बच्चों को अकेले, अपने मुंह का निवाला भी बराबर मात्रा में देकर, बड़े आराम से पाल-पोश कर बड़ा करती है। वहीं, दूसरी ओर यही चार चार बच्चे बड़े होकर, एक अकेली मां को उसके बुढ़ापे मे पालने में असमर्थ रहते है।’

देखें विडियो :

2004 में उत्तराखंडी सुपर हिट फिल्म ‘तीन ऑखर’ से अपना कैरियर शुरू करने वाले जगदीश तिवारी द्वारा अभिनित नया कुमाउनी गीत ‘भागै लेख’ ऐसे बुजुर्ग माता-पिताओं को समर्पित है, जो बुढ़ापे में पहाड़ में अकेले अपने घरों की देहली में अपने बच्चों का इन्तजार करने को अभिशप्त हैं। वे नाती-पोतों सहित अपने दर्जनों पारिवारिक सदस्य होने के बाबजूद भी एक गिलास पानी के लिये पड़ोस के बच्चों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। वे सोचते हैं ‘काश, हमें भी कोई पानी देने वाला होता। हमारे लिये भी उम्र के इस पड़ाव में कोई दो रोटी बनाकर कहता-लीजिये पिताजी, लीजिये माताजी, खाना खा लीजिये।’
इंसान अपना जीवन अपनी आशाओं, आकांक्षाओं के लिये परिवार रूपी महाजाल के पालन-पोषण में बिताता हुआ कब बुढ़ापे तक पहुंच जाता है। और देखते-देखते कब उसके बच्चे पंछियों की तरह बड़े होते जाते है, और घोंसले से फुर्र-फुर्र उड़ते चले जाते हैं उसे स्वयं भी पता नहीं चल पाता। और उसके पास बचती हैं तो सिर्फ उनकी यादें, आसुओं में डूबती आंखें और अकेलापन।
इन्हीं तानों-बानों पर बुना उत्तराखण्ड स्टूडियो के वरिष्ठ सम्पादक जगदीश तिवारी द्वारा अभिनित व निर्देशित गीत ‘भागै-लेख’ अपील करता है कि अपने बच्चों के भविष्य की चिन्ता के साथ शहरों में रह रहे प्रवासी एक बार उन माता-पिता की भी सुध लें, जो उनके उज्जवल भविष्य के लिए अपना वर्तमान चैन से नहीं जी सके।
वहीं दूसरी ओर, गीत में कुमाऊं की समृद्ध परम्पराओं व रीति-रिवाजों को भी खूबसूरती से दर्शाया गया है। खासकर बच्चे के नामकरण व इस दौरान सूर्य पूजन का दृश्य काफी अच्छा, स्वाभाविक व अपने मूल-वास्तविक स्वरूप में ही लिया गया लगता है। गीत की शूटिंग, पहाड़ की हसीन वादियों में हल्द्वानी, जागेश्वर, रामनगर व दिल्ली स्टूडियों में की गई है। संुदर कुमाउनी शब्दों के साथ व अच्छी आवाज में रचित व गाया गया ‘भागै-लेख’ गीत पहाड़ के आम व्यक्ति की पीड़ा को दर्शाता हुआ यूट्यूब पर काफल डिजिटल प्रोडक्शन चैनल में उपलब्ध है, एवं दर्शकों को काफी पसंद आ रहा है।

काफल डिजिटल प्रोडक्शंस प्रस्तुति :
अभिनय : जगदीश तिवारी, गीता न्योलिया, बीना कांडपाल, गिरीश भट्ट, बबिता देवी, नवीन पाठक, भुवन भट्ट
बाल कलाकार : नम्रता, मानवी व दिव्यांश, स्वर : गिरीश भट्ट , गीतकार : हरीश वर्मा, संगीत : जयराज, रिकार्डिस्ट : संजीव महंतो, कैमरा : ध्रुव त्यागी व सुभाष मंडल, एडिटिंग व निर्देशन : जगदीश तिवारी, सहयोग : हरीश वर्मा, नवीन पाठक, सुनील, भुवन भट्ट, अल्मोड़ा स्वीट, निर्माता : गिरीश भट्ट, काफल डिजिटल प्रोडक्शंस
अपील : आस्था हो, विश्वास हो, अंधविश्वास ना हो।

यह भी पढ़ें : दिवंगत लोकगायक पप्पू कार्की के बेटे ने एक माह में हासिल कर लिया पिता से भी बड़ा मुकाम, दर्ज की यूट्यूब पर यह उपलब्धि

नैनीताल, 5 नवंबर 2018। हर पिता का यह स्वप्न होता है कि उसका बेटा उससे भी बड़ा नाम बनाये। प्रसिद्ध दिवंगत लोकगायक पप्पू कार्की के बेटे दक्ष कार्की ने अपनी गायकी के बल पर केवल एक माह में वह मुकाम हासिल कर लिया है, जिसके लोग अरमान पालते हैं, और सालों तरसते हैं। दक्ष का गाया अपने पिता का गीत ‘सुन ले दगडिया’ केवल 1 माह में यूट्यूब पर 3 मिलियन व्यूज का आंकड़ा पार कर चुका है। साथ ही दक्ष का गाना रिलीज होने के बाद करीब 1 लाख लोग उनके पिता के ‘पप्पू कार्की’ चैनल को सब्सक्राइब कर चुके हैं। इस मुकाम को हासिल करने पर पप्पू कार्की चैनल को यूट्यूब की और से ‘सिल्वर बटन’ भी दे दिया गया है। जो कि एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है। मालूम हो कि सिल्वर बटन एक ‘यूट्यूब रिवार्ड’ है जो चैनल पर एक लाख सब्सक्राइब होने पर एवं हर वीडियो ओरिजनल होने पर ही मिलता है।

दक्ष कार्की के इस गीत के बाद पप्पू कार्की चैनल पर सब्सक्राइबर्स उमड़ पड़े हैं। एक बेटे ने जिस तरह पिता कि मौत के बाद एक तरह से पिता के सपने को पूरा किया, वह वाकई लाजवाब है। अब यूट्यूब चैनल पर इस बटन के मिलने के बाद पीके एंटरटेंटमेंट ग्रुप के सभी सदस्य खुश हैं। आखिर उनकी मेहनत रंग लाई है। विशेषकर उनकी पत्नी इस सफलता से काफी खुश हैं। देखिये दक्ष का गीत : (साभार)

यह भी पढ़ें : आया पहले उत्तराखंडी रैपर राज सिंह का पहला कुमाउनी गीत-चम्पावत की बाना, मिले 1 लाख से अधिक व्यूज

उत्तराखंडी रैपर राज सिंह

नवीन जोशी, नैनीताल। यदि आप गायकी की नयी विधा रैप के शौकीन हैं तो उत्तराखंड के रैपर राज सिंह-हनी सिंह के बेहतर विकल्प हो सकते हैं। हो सकता है आप रैपर राज सिंह को सुनेंगे तो हनी सिंह को भूल जाएंगे। रैपर राज सिंह पहाड़ों की अपनी अलग ठसक व मखमली अंदाज युक्त गायकी के लिए पहचाने जाने वाले उत्तराखंड के चंपावत जिले के दूरस्थ पाटी विकास खंड के ग्राम चौड़ाकोट डूंगरा के रहने वाले हैं। इधर इस पहले उत्तराखंडी रैपर राज सिंह का पहला कुमाउनी गीत-चम्पावत की बाना आ गया है, और इसे 1 लाख से अधिक व्यूज भी मिल गए हैं।

देखें राज का पहला कुमाउनी गीत-चम्पावत की बाना :

राज ने ‘नवीन समाचार’ को बताया कि वे लगातार उत्तराखंड और कुमाउनी लोक गीत-संगीत के लिए कुछ नया करना चाहते हैं। हिंदी व पंजाबी रैप में अपना नाम बना चुके राज शीघ्र कुमाउनी रैप गीत भी लाने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह पहला कुमाउनी रैप आगामी 1 अक्टूबर को सुबह नौ बजे उनके यूट्यूब चैनल आरएस प्रोडक्शन पर लॉंच किया जाएगा।

इस उत्तराखंडी रैपर को सुनेंगे तो हनी सिंह को भूल जाएंगे ! रैप गायन में नाम बना रहे उत्तराखंडी रैपर हनी (राज) सिंह

राष्ट्रीय सहारा 13 मई 2018

अब तक उनके हिंदी व पंजाबी में चार म्यूजिक एल्बम-हिंदी गीतों की ‘स्पेशल पार्टी’, ‘शाम की पार्टी’ व ‘हॉट गर्ल तथा पंजाबी गीतों की ‘मेरे नाल’ से धूम मचा रहे हैं, साथ ही वह अपने ‘आरएस प्रोडक्शन’ नाम के यूट्यूब चैनल के माध्यम से इंटरनेट की दुनिया में भी छा मचा रहे हैं।

रैपर राज के कुछ रैप वीडियो यहाँ देखें :

रैपर राज की पढ़ाई चंपावत के जीआईसी पाटी से हुई है और वह वर्तमान में अपने व्यवसायी पिता के साथ दिल्ली में रहकर ही गायकी कर रहे हैं। बावजूद वह अपनी जड़ों से भी जुड़े हैं। हाल ही में उन्होंने चंपावत के डिग्री कॉलेज में भी एक लाइव शो किया, वहीं अपने राज्य उत्तराखंड, चंपावत जिले तथा अपने विकास खंड पाटी व गांव के नाम को शामिल करते हुए भी ‘मेरी शुरुआत’ नाम से एक रैप तैयार कर गाया है। साथ ही आगे उनकी कुमाउनी लोक गायिका जानकी कोरंगा के साथ कुमाउनी रैप गीतों की एक श्रृंखला शुरू करने की भी योजना है।

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ईजा प्रोडक्शन के तहत हुआ है ‘जाना कहाँ’ म्यूजिक वीडियो का निर्माण

मनीष मेहता

नैनीताल। पहाड़ के बेटे हर हुनर में माहिर हैं। ऐसे ही एक बेटे हैं उत्तराखंड के गरुड़ बागेश्वर निवासी  निवासी नारायण सिंह मेहता व पुष्पा मेहता के पुत्र,  2013 में ‘मिस्टर इंडिया’ के उप विजेता रहे तथा कई पंजाबी और हिंदी म्यूजिक वीडियो में अभिनय कर चुके फैशन मॉडल, अभिनेता एवं निर्देशक के साथ ही दिल्ली में  प्रवास में रहने के बावजूद पहाड़ से गहरे जुड़े संस्कृतिकर्मी मनीष मेहता। उनके द्वारा ‘ईजा प्रोडक्शन’ के तहत निर्देशित म्यूजिक वीडियो ‘जाना कहाँ’ ने बीती 9 जुलाई को टी सीरीज के जरिये विश्व भर में रिलीज होने के बाद मात्र चार दिन में ही 15.76 लाख से अधिक ‘व्यूज’ एवं 5.3 हजार ‘लाइक्स’ हासिल कर प्रसिद्धि की ऐसी ऊंचाइयां छू ली हैं, जिसके लिए बड़े कलाकार भी तरसते हैं।

मनीष के इस म्यूजिक वीडियो की सह निर्देशक भी उत्तराखंड की ही एक बेटी नेहा सामंत हैं, जो कि पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट की हैं, और इंडिया टुडे मीडिया इंस्टिट्यूट से पत्रकारिता की छात्रा रही हैं। जबकि गीत में आवाज जय तनेजा एवं यूक्रेनिया की गायिका एलेना लिमान की हैं, एवं इसमें इन दोनों ने ही अभिनय भी किया है।

ईजा यानी मां के आशीर्वाद से छुवी हैं उपलब्धियां

नैनीताल। मनीष की उपलब्धियों के पीछे उनका पहाड़ से जुड़ाव बड़ी भूमिका अदा करता रहा है। आधुनिक अंग्रेजी-पंजाबी दौर में मनीश हमेशा पहाड़ को अपने साथ ले कर चलते हैं। इसीलिये 2016 में उन्होंने अपने होम प्रॉडक्शन का नाम रखा ‘ईजा प्रॉडक्शन’ (कुमाउनी में ईजा मतलब मां)। इसके अलावा ईजा वेडिंग स्टूडियो, ईजा मीडिया, ईजा डिजिटल आदि नामों से अलग-अलग वेंचर भी उन्होंने स्थापना किये हैं। वे पहाड़ में गप्पबाजी के लिये प्रसिद्ध ‘फसक’ नाम के कार्यक्रमों की श्रृंखला के जरिये भी उत्तराखंड की बात पूरी दुनिया में फैला रहे हैं।

मनीष की ‘द बेंच’ ने जीते हैं तीन पुरस्कार

नैनीताल। मनीष मेहता के लेखन व निर्देशन में बनी पारिवारिक पृष्ठभूमि व आधुनिक समय में रिश्तों की अहमियत खोते समाज को आईना दिखाती हुई लघु फिल्म ‘द बेंच’ को भी दर्शकों ने खूब सराहना मिल चुकी है। यह फिल्म नैनीताल फिल्म फेस्टिवल में भी सर्वश्रेष्ठ फिल्म सहित तीन पुरस्कार जीत चुकी है।

‘फूलदेई’ फैशन ब्रांड करने वाले हैं शुरू, पहाड़ के बच्चों को देते हैं निःशुल्क प्रशिक्षण

नैनीताल। मनीष मेहता कहते हैं कि उनका प्रयास पहाड़ और पहाड़ से जुड़ी चीजों के लिए कुछ न कुछ करने का रहता है। वे पहाड़ के बच्चों को निःशुल्क प्रशिक्षण तथा युवा प्रतिभाओं को अपने यहां प्राथमिकता से मौका देते हैं। जल्दी ही वे उत्तराखंड की प्रकृति से जुड़े एक नए फैशन एन्ड लाइफस्टाइल ब्रांड ‘फूलदेई’ को लॉन्च करने वाले हैं। साथ ही वे अपने निर्देशन में एक फीचर फिल्म शुरू करने जा रहे हैं।

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