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बागेश्वर में फिर सुबह तड़के दिखा गुलदार, दहशत, बीते माह दो बच्चों की ले चुका है बलि

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बागेश्वर, 23 नवंबर 2018। बागेश्वर जिला मुख्यालय एवं इससे सटे ग्रामीण क्षेत्रों में गुलदार का आतंक मिटने का नाम नहीं ले रहा है। इसी माह दो बच्चों की मौत के बाद वन विभाग ने पास के ही ग्राम दयांगण में एक गुलदार को मार गिराया था, तो लगा था कि गुलदार के आतंक से निजात मिल गयी, किंतु सामाजिक कार्यकर्ता आन्दन बल्लभ तिवारी, खड़क राम, कैलाश गढ़िया, हुकम सिंह ने शुक्रवार तड़के करीब 5 बजे नगर से सटे मजियाखेत गांव में गुलदार को देखने का दावा किया। गुलदार की गुर्राहट से लोग फिर दहशत में आ गए। बताया गया कि लोगों के शोर मचाने पर गुलदार जगंल की ओर भाग गया। इसके बाद से निकट के नदीगांव, जौलकांडे व सैल खन्यारी के साथ ही गरुड़ के थकला, कॉनली, भीतारकोट, शीशाखानी, लेटी, जौलकांडे व छानापानी समेत अनेक गांवों में भी गुलदार ने लोगों की रातों की नींद उड़ा रखी है। गांव गरीब महिला उत्थान मंच के संस्थापक विशन सिंह टंगड़िया ने वन विभाग से गुलदार प्रभावित क्षेत्रों में पिंजरा लगाने की मांग की है।

यह भी पढ़ें : तेंदुवे के हमले से बागेश्वर के दयागंड गांव में दिवाली पर 3 दिन के भीतर फिर बुझा एक घर का चिराग

बागेश्वर, 9 नवंबर 2018। बागेश्वर के नजदीकी दयागंड गांव में दीपावली पर 3 दिन के भीतर गुलदार की वजह से एक और घर का चिराग बुझ गया है । बताया गया है कि शहर से करीब 1 किमी दूर दयागंड गांव में शाम करीब 5 बजे कई बच्चे खेल रहे थे, तभी वहां तेंदुवे के आने से बच्चे डरके घर की ओर दौड़ने लगे, जिससे हेमन्त टँगड़िया (15 वर्ष) पुत्र कमल सिंह सर के बल गधेरे (नाले) में गिर गया, और सर में लगी चोट की वजह से उसकी मौत हो गयी। मृतक हाई स्कूल का छात्र है। वह बोर गांव का मूल निवासी  था और दयागंड गांव में अपने ननिहाल में रहता था। बताया गया है कि इससे पहले गुलदार को शाम को भी गांव में देखा गया था, जिस कारन बच्चे डर के भागे।

मारने की इज़ाज़त मांगी

इस घटना के बाद वन महकमा हरकत में आया है। डीएफओ आरके सिंह ने मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक को पत्र लिखकर ताजा घटना और वस्तुस्थिति की जानकारी दी है, और आदमखोर गुलदार को ट्रैकुलाइज कर पकड़ने या फिर मारने की अनुमति मांगी है। दूसरी ओर ताजा हमले के बाद वन कर्मियों ने नगर भर में तेंदुए को पकड़ने के लिए पांच पिंजड़े लगा दिए हैं। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में गश्त भी तेज कर दी है। सिंह का कहना है कि हमले के पीछे किसी नए आदमखोर तेंदुए के होने की आशंका है। इस हमले के बाद आदमखोर के लक्षणों समेत तेंदुआ ट्रैस हुआ है। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में गश्त तेज कर दी गई है। विभाग ने क्षेत्रवासियों को सावधानी के लिए एहतियात भी जारी की है। इधर, रेंजर एमएस नयाल और वन दरोगा पीडी भट्ट के नेतृत्व में वन कर्मियों ने द्यांगण, झुलकिया, पालनीकोट, नुमाईशखेत आदि क्षेत्र में गश्त कर पिंजड़े लगाए। हालांकि दिनभर की कसरत के बावजूद कुछ हाथ नहीं आया।

यह भी पढ़ें : दीवाली पर गुलदार ने बुझा दिया घर के आंगन पर जगमगाता ‘चिराग’

बागेश्वर, 6 नवंबर 2018। बागेश्वर में गुलदार का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। जिला मुख्यालय से लगे दयागंड गांव में गुलदार ने सात साल के बच्चे को मार डाला। इस घटना से क्षेत्र के ग्रामीण भयभीत हैं। घटना शाम 5.30 बजे की है। इस घटना से क्षेत्र और आसपास के गांवों में दहशत है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से नरभक्षी गुलदार को मारने की मांग की।

दयागंड गांव के निवासी सुरेंद्र सिंह कठायत का सात साल का बेटा करन घर के आंगन में खेल रहा था। तभी घात लगाए बैठे गुलदार ने उस पर हमला कर दिया। गुलदार बच्चे को जबड़े में दबोच कर जंगल की तरफ भागा। परिजनों और ग्रामीणों ने शोर मचाते हुए गुलदार का पीछा किया। इस पर गुलदार घर से 100 मीटर दूर गधेरे में करन को छोड़कर जंगल में ओझल हो गया। गुलदार के हमले में करन की गर्दन में गहरी चोट आई। आनन-फानन में परिजन उसे जिला अस्पताल लाये, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

ग्रामीणों ने पहले ही की थी पिंजरा लगाने की मांग

बागेश्वर। दयागंड गांव के निवासी दर्शन कठायत ने बताया कि वन विभाग से पूर्व में पिंजरा लगाने की मांग की गई थी। परन्तु विभाग ने नदीगांव वाले गुलदार को मारने के बाद लापरवाही के चलते इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। इस कारण छोटी दिवाली के दिन एक मां का चिराग हमेशा के लिए बुझ गया। घटना के बाद से मृत बालक करन की मां रेखा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है। कृष्णा बड़ा और करन घर का छोटा बेटा है, इसलिए मां के ज्यादा करीब था। करन के पिता सुरेंद्र सिंह कठायत मजदूरी कर परिवार चलते हैं। करन बागेश्वर में सैनिक हाईस्कूल विद्यालय का कक्षा तीन का छात्र था। करन का भाई कृष्णा भी इसी विद्यालय में पढ़ता है।

जिला पंचायत अध्यक्ष और विधायक पहुंचे अस्पताल

बागेश्वर के जिला पंचायत अध्यक्ष हरीश ऐठानी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष देवेंद्र परिहार, विधायक चन्दन राम दास, पूर्व विधायक कपकोट ललित फस्र्वाण, एसडीएम राकेश चंद्र तिवारी, कोतवाल टीएल वर्मा, राजेंद्र टंगड़िया, रणजीत दास, गोविन्द कठायत, दर्शन कठायत, राजेंद्र परिहार, गौरव कठायत, कमलेश, गौरव दास, बालकृष्ण आदि घटना की सूचना मिलते ही जिला अस्पताल पहुंचे।

दुर्गा महोत्सव देखते ‘दुर्गा’ बन गयी एक मां, गुलदार के जबड़े से खींच लायी अपने बच्चे को

बागेश्वर, 11 अक्टूबर 2018। बुधवार की रात्रि बागेश्वर के मुख्यालय स्थित नुमाईशखेत क्षेत्र में एक मां ने गुलदार के समक्ष अद्भुत वीरता का परिचय देकर अपने बच्चे को बचा लिया। बृहस्पतिवार को यह मामला नगर में चर्चा का विषय बना रहा। सभी लोग बहादुर मां की बहादुरी के चर्चे बयां कर रहे हैं। दरअसल हुआ यह कि तेंदुए ने बुधवार देर रात करीब 10 बजे आंगन में मां के साथ खड़े छह साल के मासूम दक्ष पुत्र प्रदीप सिंह पर हमला कर दिया। तेंदुए ने बच्चे को मां की गोद से खींचकर ले जाने की कोशिश की। लेकिन बहादुर मां करीब पांच मिनट तक तेंदुए से अकेले संघर्ष करते हुए बच्चे को उसके मुंह से खींच लाई। महिला के साहस और मौके पर भीड़ जुटती देख तेंदुआ भाग निकला। 

बताया गया है कि मां-बेटा पास ही नुमाईशखेत में चल रहे रामलीला और दुर्गा महोत्सव का नजारा देख रहे थे। तभी एक तेंदुआ दक्ष पर झपट पड़ा और उसे मां के हाथ से खींचकर ले जाने की कोशिश करने लगा। महिला ने साहस दिखाते हुए बच्चे को कसकर पकड़ लिया। साथ ही तेंदुए से करीब पांच मिनट तक संघर्ष किया। इस बीच महिला की चीख पुकार सुन मौके पर लोगों के आने से तेंदुआ भाग गया। घायल मासूम को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उसकी हालत खतरे से बाहर है। इसके बाद देर रात से ही शिकारी लखपत सिंह ने वन कर्मियों के साथ नुमाईशखेत में मोर्चा संभाल लिया है।

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यह लाइव वीडियो भी देखें, जब रेस्क्यू किये जा रहे गुलदार ने बचाने वाले पर ही किया हमला

(नोट : कृपया कभी भी आप ऐसी गलती न करें। वीडियो को आखिर के 15 सेकेण्ड जरूर देखें)

बागेश्वर, 3  अक्टूबर 2018। उत्तराखंड के बागेश्वर धरमघर वन क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम चौंरा में घायल तेंदुए को पकड़ने गए एक ग्रामीण पर तेंदुए ने हमला कर घायल कर दिया। घायल ग्रामीण को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। वहीँ बाद में घायल तेंदुए को वन विभाग की टीम ने बेहोश कर पकड़ लिया है।
बताया गया कि ग्राम चौंरा के ग्रामीणों को बुधवार सुबह पुंगर नदी के किनारे घायल पड़ा तेंदुआ दिखा। ग्रामीणों ने तेंदुए को पहले शोर मचाकर भगाने की कोशिश की तो वह भाग नहीं सका। इस पर ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी। मौके पर पहुंची पहुंची वन विभाग की टीम ने घायल तेंदुए को पिंजरे में डालने का प्रयास किया, मगर सफलता नहीं मिली। इस पर चौंरा गांव के ही ग्रामीण जगदीश सिंह धपोला (45) पुत्र लक्ष्मण सिंह ने रस्सी से तेंदुए को बांधने का प्रयास किया तो घायल तेंदुुए ने जगदीश पर हमला कर बुरी तरह घायल कर दिया। घायल जगदीश को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां उनके हाथ व पैर में 80 टांके लगे। तेंदुए को पकड़ने के लिए डीएफओ आरके सिंह, एसडीओ बीएस शाही, रेंजर नारायण दत्त पांडे व प्रयाग दत्त भट्ट ट्रेंकुलाइज टीम के साथ मौके पर पहुंचे । डीएफओ के अनुसार शिकार को लेकर दो तेंदुओं में आपसी संघर्ष में वह घायल हुआ होगा।

यह भी पढ़ें : फंदे में फंसी मादा गुलदार को बचाने जान पर खेल गया यह वन कर्मी

नैनीताल,  25 जून 2018। दुनिया में कम होती मानवता, सड़क पर पड़े घायलों को देखकर भी न रुकने जैसी खबरों के बीच नैनीताल जनपद के ज्योलीकोट से दुनिया में मानवता के हमेशा बने रहने के प्रति आश्वस्त करने वाली खबर आयी है। यहां एक संविदा वन कर्मी विक्की लाल साह से फंदे में फंस कर बुरी तरह से कराह रही मादा गुलदार का दर्द देखा नहीं गया, और वह अपनी जान की परवाह किये बिना गुलदार को बचाने के लिए उस पर जाल डालने के लिए उसके बिल्कुल करीब चला गया। इतना करीब कि फंदे में फंसी होने के बावजूद गुलदार ने स्वयं पर कोई खतरा समझकर खुद को बचाने वाले विक्की पर ही हमला बोल दिया। इस हमले में खुद विक्की घायल हो गया। गुलदार ने उसकी कलाई पर गहरा जख्म दे दिया। बावजूद विक्की ने हिम्मत नहीं हारी और अन्य वन कर्मियों की मदद से घायल गुलदार पर जाल डाल ही दिया, यही नहीं उसे बेहोश करने के लिए नैनीताल से वन कर्मियों के पहुंचने से पूर्व ही घायल गुलदार के गले से फंदे का तार भी हटा लिया गया। अलबत्ता बाद में घायल गुलदार को बेहोश करके ही सड़क तक और वहां से उपचार के लिए रेसक्यू सेंटर रानीबाग ले जाया गया।

ज्योलीकोट के नलैना नाले में घायल वन कर्मी एवं तार में फंसी मादा गुलदार।

घटनाक्रम के अनुसार जिला मुख्यालय से 18 किमी दूर हल्द्वानी रोड पर मनोरा रेंज के नलैना कम्पार्टमेंट स्थित नलैना नाले में एक करीब 5 वर्षीया मादा गुलदार तार में फंसी पाई गयी। इस दौरान उसे बचाने के लिए नजदीक से जाल डालने की कोशिश कर रहे रानीबाग रेस्क्यू सेंटर के एक साहसी संविदा वन कर्मी डीएल साह को गुलदार ने झपट्टा मार कर जख्मी भी कर दिया। अलबत्ता बाद में नैनीताल चिड़ियाघर से गये रेंजर प्रकाश जोशी व पशुचिकित्सक डा. योगेश भारद्वाज तथा उप रेंजर आनंद लाल तथा रेस्क्यू सेंटर रानीबाग और नैनीताल चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने गुलदार को बेहोश कर तार में फंसने से घायल हुई गुलदार को सकुशल बचाकर रेस्क्यू सेंटर रानीबाग भेजा। वहीं जख्मी वन कर्मी का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योलीकोट में प्राथमिक उपचार कराया गया।
मादा गुलदार जिस तार में फंसी थी, उसके शिकार के लिये लगाया गया फंदा होने और गुलदार के नरभक्षी होने की पुष्टि नहीं हुई है। वरन रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल रहे नैनीताल चिड़ियाघर के रेंज अधिकारी प्रकाश जोशी ने बताया कि मादा गुलदार के सभी दांत और पंजे सुरक्षित हैं, और प्रथम दृष्टया उसके नरभक्षी होने की संभावना कम ही है। वहीं क्षेत्रीय लोगों का भी कहना है कि जहां मादा गुलदार फंसी मिली वह क्षेत्र उसी बेलुवाखान ग्राम सभा में है, जहां कुछ माह पूर्व गुलदार ने 7 वर्षीय बच्ची को शिकार बनाया था किंतु उस स्थान से काफी दूर है। जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह क्षेत्र के युवक नदी में नहाने गये थे, तभी उन्हें तार में फंसी गुलदार नजर आयी।

यह भी देखें – नैनीताल में घर में घुसा गुलदार और….

नैनीताल, 2 सितंबर 2018। रविवार को मुख्यालय में एक वायरल हुआ वीडियो चर्चा का विषय बना रहा। इस वीडियो में एक गुलदार पहले घात लगाते ओर फिर बेहद सधे हुए कदमों से शिकार की ओर करीब जाते व फिर बेहद चपल कदमों से एक घर के अहाते में सफेद कुत्ते पर झपट्टा मारते हुए देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो बीती रात्रि ही नगर के अयारपाटा क्षेत्र में किन्हीं युवकों ने बनाया है। बताया जा रहा है कि नगर के अयारपाटा क्षेत्र में बीती रात्रि आवासीय क्षेत्र में एक गुलदार घुस आया, और उसने एक घर के अहाते से सफेद रंग के कुत्ते पर झपट्टा मार दिया। वीडियो में यह साफ नहीं हो रहा है कि उसने कुत्ते को मार दिया, अथवा नहीं। कुछ साहसी युवकों ने बकायदा गुलदार पर भी टॉर्च लगाकर मोबाइल फोन के कैमरे में इस पूरी घटना को रिकार्ड कर लिया। इसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
इस वीडियो के वायरल होने के साथ ही नगरवासियों में जंगली जानवरों के घुस आने को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है। गौरतलब है कि नगर का अयारपाटा क्षेत्र सर्वाधिक पॉश-महंगे क्षेत्रों में शुमार है। हालांकि इससे पूर्व भी नगर के रिहायशी इलाकों में वन्य जीवों, भालू, गुलदार आदि के घुसने की खबरें आती रहती हैं।

यह भी पढ़ें : गरुड़ बागेश्वर में 4 वर्ष की मासूम को खा गया आदमखोर, इस साल की तीसरी घटना

गरुड़, 3 सितंबर 2018। बागेश्वर जिले के सैलखानीयारी गांव में एक गुलदार ने चार साल की बच्ची को अपना निवाला बना लिया। आंगन में खेल रही बच्ची को गुलदार जंगल में ले गया। बाद में वन विभाग की टीम को उसका क्षत-विक्षत शव मिला।

दरअसल, ब्लॉक के सेल खलियारी गांव में चार साल की ज्योति पुत्री चतुर सिंह परिहार आंगन में खेल रही थी। देर शाम करीब साढे सात बजे गुलदार उसे आंगन से उठा ले गया। घटना की जानकारी परिजनों को मिलते ही उनके होश फाख्ता हो गए। उन्होंने शोर मचाया तो गांव वाले इकट्ठा हो गए।

सभी उस दिशा की ओर दौड़े जहां गुलदार बच्ची को लेकर भागा था। काफी देर ढूंढने के बाद भी कोई पता नहीं लगा। इसके बाद परिजनों ने इसकी सूचना वन विभाग और पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और उन्होंने तलाश शुरू कर दी।

घटना के करीब डेढ़ घंटे बाद गांव से कुछ दूरी पर बच्ची का क्षत विक्षत सब दिखाई दिया। ग्रामीण ने इसकी सूचना वन विभाग के कर्मियों को दी। घटना के बाद से ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने कहा कि यह पिछले एक साल में ब्लॉक में तीसरी घटना है जब बच्चे गुलदार का शिकार हुए है। घटना के बाद भी वन विभाग लगातार लापरवाही बरत रहा है। उन्होंने कहा कि अगर जल्द गुलदार को पकड़कर आदमखोर घोषित नहीं किया जाता तो आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। प्रभागीय वनाधिकारी आरके सिंह ने बताया कि जानकारी मिलने के बाद टीम रवाना कर दी गई है। जल्द ही गुलदार को पकड़ लिया जाएगा।

यह भी पढ़ें : यहाँ गुलदार की गुर्राहट से स्कूल जाते लौट भागे बच्चे, तो वहां 32 बकरियां खा गया गुलदार

गुलदार देखने के बाद डरे-सहमे ज्योली व कौसानी गांवों के स्कूली बच्चे।

नैनीताल, 10 अगस्त 2018। वन्य जीवों के द्वारा मानव बस्तियों में घुसपैठ कर दहशत फैलाने की दो डरावनी खबरें एक साथ आई हैं। नैनीताल जनपद के ज्योलीकोट में जहां ज्योली व कौसानी गांवों के बच्चों के स्कूल जाते हुए रास्ते में गुलदार सामने से ऐसे गुर्राया कि बच्चे बस्ते वहीं छोड़ उल्टे पैर घर को भागने को मजबूर हुए। वहीं पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी तहसील के तल्ला जोहार क्षेत्र के गांव शैणराथी में भालुओं के झुंड ने ग्रामीणों की 32 बकरियों को एक साथ मौत के घाट उतार दिया। दोनों घटनाओं से संबंधित क्षेत्रों में दहशत का माहौल है।

शैणराथी गांव में भालुओं द्वारा मारी गयी बकरियां

प्राप्त जानकारी के अनुसार ज्योलीकोट के निकट स्थित ग्राम ज्योली और कौसानी से आठ से 14 वर्ष तक के 10 से अधिक छात्र-छात्राएं रोज की तरह सुबह करीब आठ बजे जंगली जानवरों के डर से स्वयं भी झुंड बनाकर स्कूल जाने को घर से निकले थे। लेकिन गांव से एक किमी आगे ही उन्हें तेंदुए की डरावनी गुर्राहट सुनाई दी। वहीं थोड़ा आगे जाने पर बच्चों को पास ही पहाड़ी पर गुलदार दिखाई भी दे गया। इससे बच्चों में भय का माहौल व्याप्त हो गया और वे हड़बड़ाहट में वहीं स्कूल के बस्ते फेंक कर पास के गांव भल्यूटी की ओर दौड़ लगा कर भाग आये। बाद में सहमे हुए बच्चों को ग्रामीणों तथा समता आश्रम के ज्योतिर्मयानंद, गणेश साह, दीपू नेगी, नवीन तिवारी, अनूप आर्य, बसंत पाड़े आदि ने सुरक्षित होने का भरोसा दिलाया, और उन्हें सुरक्षित उनके घर पहुंचाने में सहयोग किया। इस घटना में एक चिंताजनक तथ्य यह भी है कि मुख्यालय के निकटवर्ती होने के बावजूद इन गांवों के बच्चों को आज भी जंगल के बीच स्थित गांवों से 3-4 किमी दूर पैदल ज्योलीकोट के स्कूलों में पढ़ने को आना पड़ता है। वहीं ग्राम प्रधान चंद्रशेखर भट्ट ने बताया कि क्षेत्र में गुलदारों का आतंक लगातार बना हुआ है, उनके आतंक से निजात दिलाने में वन विभाग रुचि नहीं दिखा रहा है। बताया कि बीते फरवरी माह में गुलदार ने एक बालिका को निवाला बना लिया था और एक युवक को घायल कर दिया। वहीं बीते माह चोपड़ा गांव में दिन में 12 बकरियों को भी गुलदार ने मार डाला था। इधर बीते सोमवार को गांजा मस्जिद के पास भी दिन में ही तेंदुआ दिखाई दिया था। वहीं दोनों घटनाओं में वन विभाग के कर्मियों ने मौका मुकायना कर रस्म अदायगी भर करने की सूचना है।

यह भी पढ़ें : चोपड़ा में ग्रामीण की 10 बकरियां खा गया गुलदार

चोपड़ा गांव में मरी बकरियों के साथ ग्रामीण।

नैनीताल, 28 जुलाई 2018। मुख्यालय से करीब 22 किमी दूर ज्योलीकोट के निकट ग्राम सभा चोपड़ा में गुलदार ने एक किसान की एक दर्जन बकरियां मार दी गयी हैं। इनमें से 10 बकरियों के शव प्राप्त हो गये हैं, जबकि दो बकरियां गायब हैं। उनका कुछ पता नहीं चला है। इस आधार पर माना जा रहा है कि बकरियों को मारने वाले गुलदारों की संख्या दो हो सकती है। उन्होंने मारी गयी बकरियों का खून पिया है और शव छोड़ गये हैं, जबकि दो बकरियों को साथ ले गये हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ज्योलीकोट के ग्राम चोपड़ा निवासी चंदन जीना पुत्र हुकुम सिंह जीना खेती-किसानी के साथ 40-50 बकरियां भी पालते हैं। शनिवार सुबह 10 बजे उनकी बकरियां पास ही स्थित खेत में स्वयं ही चर रही थीं। उनके साथ कोई व्यक्ति नहीं था। दोपहर 12 बजे के करीब एक दर्जन बकरियां गायब मिलने पर उनकी तलाश की गयी तो 10 बकरियांे के शव पास ही में मिल गये थे। उनकी गरदन पर घाव थे व खून पिया गया था। जबकि दो बकरियां गायब थीं। वन विभाग के अधिकारियों को मामले की सूचना दी गयी है।

अब बेलुवाखान में मजदूर पर झपटा गुलदार, आदमखोर होगा घोषित

-रात्रि 11 बजे हुई घटना, क्षेत्र के दर्जन भर ग्राम प्रधानों व जनप्रतिनिधियों ने किया जोरदार विरोध, बढ़ाए जाएंगे पिंजरे
-इसी ग्राम सभा के तोक सिमलखेत में बीती 25 फरवरी को सात वर्षीय बच्ची को मार चुका है गुलदार
नैनीताल, 21 मई 2018। बीती 25 फरवरी को मुख्यालय के निकटवर्ती बेलुवाखान ग्राम सभा के तोक सिमलखेत में सात वर्षीय बच्ची को मारने की घटना का दर्द अभी भुलाया भी नहीं जा सका कि रविवार रात इसी गांव के तोक देवलढूंगा में रविवार रात्रि संभवतया वही गुलदार एक 30-32 वर्षीय मजदूर मुकेश सिंह पुत्र पूरन सिंह पर झपट गया। गुलदार ने मुकेश के सीधे गले पर हमला किया, जिससे उसके गले पर बांयी ओर गहरा जख्म हुआ। गनीमत रही कि मजबूत कदकाठी के मुकेश ने गुलदार के साथ संघर्ष कर किसी तरह खुद की जान बचा ली, अन्यथा उसकी जान जानी कमोबेश तय थी। अलबत्ता, उसे गंभीर अवस्था में हल्द्वानी के एक निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद क्षेत्र के विभिन्न गांवांे के करीब एक दर्जन ग्राम प्रधान व अन्य जनप्रतिनिधियों ने वन विभाग के संबंधित मनोरा रेंज के बल्दियाखान स्थित कार्यालय में जोरदार प्रदर्शन किया। इस पर वहां पहुंचे प्रभागीय वनाधिकारी बीजू लाल टीआर एवं अन्य वनाधिकारियों ने घायल मुकेश का विभाग की ओर से उपचार कराने, गांव में पहले से लगे एक पिंजड़े को बढ़ाकर 4 करने और हमला करने वाले व पहले ही एक बच्ची की हत्या कर चुके गुलदार को आदमखोर घोषित कर इसे मारने की अनुमति लेेने का आश्वासन दिया।

बल्दियाखान स्थित मनोरा रेंज कार्यालय में जमीन पर बैठे आक्रोशित क्षेत्रीय ग्राम प्रधानों की खुद भी जमीन पर बैठकर बातें सुनते डीएफओ बीजू लाल टीआर।

घटनाक्रम के अनुसार ज्योलीकोट-बागेश्वर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बीरभट्टी में मजदूरी कर एरीज जाने वाले पैदल रास्ते से अपने गांव देवलढूंगा लौट रहे मुकेश पर रात्रि 11 बजे के करीब घर से लगभग 100 मीटर पहले अचानक गुलदार ने हमला बोला। मुकेश ने संघर्ष करते हुए बमुश्किल अपनी जान बचाई, जिसके बाद गुलदार जंगल में भाग गया, जबकि घायल मुकेश को स्थानीय लोग 108 एंबुलेंस के माध्यम से हल्द्वानी ले गए। इधर सोमवार को स्थानीय ग्राम प्रधानों, ज्योलीकोट के राम दत्त चनियाल, ज्योली के शेखर भट्ट, चोपड़ा के जीवन चंद्र, गेठिया की मुन्नी चौहान, सड़ियाताल की नंदी देवी, देवीधूरा के धर्मेंद्र सिंह, पूर्व प्रधान हरीश भट्ट व हरगोविंद रावत आदि ने बेलुवाखान के प्रधान व प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष हिमांशु पांडे की अगुवाई में मनोरा रेंज कार्यालय में जमीन पर बैठकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस पर डीएफओ बीजू लाल, रेंज अधिकारी एनके जोशी, उप रेंज अधिकारी आनंद लाल व एसडीओ दिनकर तिवारी आदि ने भी जमीन पर बैठकर बमुश्किल आश्वासन देकर जनप्रतिनिधियों को मनाया।

बड़े बेटे के आयोजन में खुश थे परिजन, घर के पास ही छोटे को खा गया गुलदार

नैनीताल, 18 अप्रैल 2018। जनपद के बेलुवाखान में सात वर्षीय बच्ची को घर के आंगन से गुलदार द्वारा ले जाकर खाने की घटना अभी पुरानी भी नहीं हुई कि जिले के रामगढ़ ब्लॉक में सूपी गांव के काफली करखोली धार-लमिधार तोक में 11 वर्षीय बच्चे को गुलदार ने घर के पास ही निवाला बना दिया। खास बात यह भी है कि मृतक बच्चे हिमांशु बिष्ट पुत्र लाल सिंह के बड़े भाई के जनेऊ (उपनयन) संस्कार का कार्यक्रम चल रहा था, सो परिजन आयोजन की तैयारियों में व्यस्त रहे। जब तक उनका ध्यान बच्चे की ओर जाता, गुलदार उसे अपना शिकार बना चुका था।
घटना बुधवार की है। लाल सिंह के परिवार में बड़े बेटे गौरव के जनेऊ संस्कार की तैयारी चल रही थी। इस बीच रात्रि करीब आठ बजे छठी कक्षा में पढ़ने वाला छोटा बेटा हिमांशु करीब 40 मीटर की यानी चंद कदमों की दूरी पर स्थित अपने दादा दीवान सिंह के घर के लिए निकला। उसकी चाची उसे कुछ दूर तक छोड़ने भी गई, लेकिन उसने कहा कि वह अकेले चला जाएगा। संभवतया इसी दौरान उसे घर के पास ही घात लगाये गुलदार ने अपना शिकार बना लिया। इस बीच आयोजन की तैयारियों में व्यस्त परिजन उसे दादा के घर में मौजूद सोचते रहे। करीब एक घंटे बाद उन्होंने हिमांशु के दादा के घर न पहुंचने तक तलाश शुरू की तो रात्रि करीब 11 बजे उसका अधखाया शव जंगल में बरामद किया गया। इससे आयोजन की खुशी पर पल भर में ही मातम पसर गया। उसकी मां मंजू सहित सभी का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। सूचना मिलने पर राजस्व पुलिस और वन विभाग के कर्मी भी गांव पहुंच गए। परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम करने से इंकार कर दिया गया, जिसके बाद राजस्व पुलिस ने पंचनामा भरकर शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। जिसके बाद गमहीन माहौल में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। घटना से पूरे सूपी गांव के साथ ही आसपास के क्षेत्र में नरभक्षी गुलदार से दहशत का माहौल है। ग्रामीणों की मांग पर वन विभाग के एसडीओ दिनकर तिवारी ने पिंजड़ा लगाने व मुआवजा देने की बात कही है।

गुलदार के हमले से घायल महिला

दिन-दहाड़े घर के आंगन से बच्ची को उठा-खा गया गुलदार

गुलदार का ग्रास बनी बच्ची

-ग्रामीणों ने जाम किया हल्द्वानी-नैनीताल राष्ट्रीय राजमार्ग, डीएफओ द्वारा मुआवजा दिलाने के आश्वासन पर माने 
नैनीताल, 25 फ़रवरी 2018। जिला व मंडल मुख्यालय से करीब 18 किमी दूर हल्द्वानी-नैनीताल राष्ट्रीय राजमार्ग पर ज्योलीकोट के नंबर-एक बैंड के निकट स्थित ग्राम बेलुवाखान के तोक सिमलखेत में रविवार दोपहर करीब दो से ढाई बजे के बीच एक गुलदार घर के बाहर खेलती सात वर्षीया बच्ची को उठा कर ले गया। बाद में बच्ची का शव घर से करीब एक किमी दूर गदेरे में बेहद बुरी क्षत-विक्षत अवस्था में मिला। इस पर गुस्साए ग्रामीणों ने हल्द्वानी-नैनीताल राष्ट्रीय राजमार्ग पर शव के साथ जाम लगा दिया। बाद में डीएफओ डा. धर्म सिंह मीणा द्वारा तत्काल ही 50 हजार रुपये नगद एवं शेष मुआवजा यथाशीघ्र दिलाने के आश्वासन पर ग्रामीण मान गए। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार को अवकाश का दिन होने की वजह से निकटवर्ती प्राथमिक विद्यालय गांजा ज्योलीकोट में तीसरीे कक्षा में पढ़ने वाली 7 वर्षीया छात्रा जया पुत्री राजेश कुमार अपने नैनीहाल सिमलखेत में घर के बाहर खेल रही थी, तभी एक वयस्क गुलदार आया और उसे उठा ले गया। उसकी दो बड़ी बहनों व अन्य बच्चों ने शोर मचाया, बावजूद गुलदार उसे साथ ले जाता चला गया। आखिर ग्रामीणों की खोजबीन के दौरान करीब डेढ़ घंटे बाद एक किमी दूर गुलदार द्वारा नोंचा गया बच्ची का शव बमुश्किल मिल पाया। इस पर आक्रोशित ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान हिमांशु पांडे व उप प्रधान मनोज चनियाल आदि की अगुवाई में डीएफओ को मौके पर बुलाने की मांग करते हुए बच्ची के शव के साथ राजमार्ग पर जाम लगा दिया। लेकिन जल्दी ही डीएफओ डा. मीणा के पहुंचने व मौके पर ही 50 हजार रुपए का नगद मुआवजा देने तथा आगे पोस्टमार्टम रिपोर्ट व अन्य औपचारिकताओं के बाद शेष ढाई लाख मुआवजा और मृतका की मां को वन विभाग के अंतर्गत जंगलों की आग बुझाने जैसे अस्थाई कार्यों के जरिये रोजगार देने की घोषणा की। इसके बाद जाम खोलकर पोस्टमार्टम की औपचारिकता पूरी की गयी। मौके पर सीओ विजय थापा, तल्लीताल थाना प्रभारी प्रमोद पाठक व ज्योलीकोट चौकी प्रभारी मनवर सिंह आदि भी मौजूद रहे।

काला सच : 70 साल की आजादी के बाद भी जंगल में बेटियों का घर और घर में हत्यारा गुलदार…

नवीन जोशी/मुनीब रहमान, नैनीताल। जिला व मंडल मुख्यालय से केवल करीब 18 किमी दूर तोक सिमलखेत में सात वर्षीया बालिका को घर के आंगन से गुलदार द्वारा उठाकर ले जाने की घटना विकास तथा चन्द्रमा व मंगल ग्रह के पथ पर बताये जाने वाले देश की 70 साल की हो चली आजादी का एक अलग ही आदिम युग सरीखा कुरूप चेहरा दिखाने वाली है। घटना की पृष्ठभूमि पर जाएं तो मृतक बालिका की मां रेखा देवी एक बेहद गरीब परिवार से है। उसका विवाह यूपी के राजेश कुमार नाम के युवक से हुआ, जो अपने आप में पहाड़ की गरीब बेटियों पर बाहरी युवकों की शादी के नाम पर किये जाने वाले छलावे की अलग कहानी है। शादी के बाद रेखा की तीन बेटियां ही हुईं। इस पर पुरुष प्रधान समाज के प्रतीक राजेश ने नवजात जया के जन्म लेते ही उसकी मां को तीनों बेटियों के साथ घर से निकाल दिया। इस पर रेखा अपने मायके आ गयी और भाई के पास ही जंगल के बीच स्थित गांव में रहने लगी, और मेहनत-मजदूरी कर देश में चल रही ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ की मुहिम से जुड़ते हुए वह भी तीनों बच्चियों को निकट के प्राथमिक विद्यालय गांजा में पढ़ाने भी लगी। किंतु इधर घर में पहले से मौजूद भय, भूख, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, गरीबी व अशिक्षा के अलावा पुरुष प्रधान समाज की वहशी-कातिल निगाहों के साथ जंगलों में मानव के बढ़ते दखल के साथ शहरों को भी अपना पारंपरिक प्राकृतिक आवास मान रहे बाघों-गुलदारों और अन्य वन्य जीवों के गांवों-शहरों की ओर बढ़ते रुख के बीच एक हत्यारा गुलदार भी आ गया था, और देश की एक और बेटी उसका शिकार बन गयी। इस तरह यह घटना विकास की ओर दौडते देश के आजादी के 70 वर्ष वाद भी आदिम युग में जीने को अभिशप्त मानवों की एक दूसरी ही दुनिया, और उसमें आज भी बेटियों को मिल रहे तिरस्कार की वास्तविक कहानी भी दिखाने वाली है।

2014 में इसी गांव के एक बालक पर भी मारा था गुलदार ने झपट्टा
नैनीताल। बताया गया है कि वर्ष 2014 में भी इसी गांव में एक करीब 10 वर्षीय बालक पर भी इसी तरह घर के आंगन में खेलते एक बालक पर गुलदार ने झपट्टा मारा था। तब ग्रामीणों के शोर मचाने पर गुलदार भाग गया था। इसके बाद भी गुलदार का इसी गांव में नहीं बल्कि बल्दियाखान से दोगांव तक के क्षेत्र में आतंक लगातार बना रहता है। कई गांवों से गुलदार बकरियों, कुत्तों व बछड़ों आदि को ले जाता रहा है। उप प्रधान मनोज चनियाल के अनुसार करीब दो माह पूर्व भी उन्होंने वन विभाग के स्थानीय रेंजर को गुलदार के आतंक की शिकायत की थी। उल्लेखनीय है कि इसी तरह की एक घटना करीब 3 वर्ष पूर्व मुख्यालय के कैंट क्षेत्र में और पिछले वर्ष रातीघाट क्षेत्र में भी हुई थी।

पिंजड़ा लगाएंगे, रात्रि गस्त भी बढ़ाएंगे: डीएफओ
नैनीताल। डीएफओ डा. मीणा ने कहा कि घटना को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक से गांव में गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजड़ा लगाने की अनुमति ली जा रही है। साथ ही क्षेत्र में वन्य कर्मियों की दिन व रात्रि में गस्त बढ़ाई जाएगी।

यह भी पढ़ें : नैनीताल में फिल्म थिएटर के अन्दर और बाहर ‘मिशन टाइगर’

-कैपिटॉल सिनेमा के स्वामी के होटल में सुबह हनीमून मनाने आए नवविवाहित जोड़े के कक्ष में घुसा सवा वर्ष की उम्र का शावक
-बेहद बलिष्ठ था शावक, तीन घंटे बाद पकड़ने की कोशिश में थाना प्रभारी व वन दरोगा को धक्का दे रोशनदान से बाहर निकलकर भागा
-तीन सप्ताह में नगर में वन्य जीवों के आने की दूसरी घटना, इससे पूर्व बीती 10 जुलाई को वयस्क भालू आ घुसा था प्रशांत होटल में
नैनीताल। इधर नैनीताल नगर के कैपिटॉल सिनेमा में सुबह नौ बजे से उत्तराखंड के बाघों के संरक्षण पर बनी फिल्म ‘मिशन टाइगर’ चल रही थी, और उधर सुबह करीब साढ़े चार बजे कैपिटॉल सिनेमा के स्वामी अमित साह के ही तल्लीताल स्थित होटल में वाकई में बाघ प्रजाति के गुलदार का एक शावक घुस गया, और सुबह के करीब तीन घंटे उसकी दहशत के बीच पकड़ने की असफल कोशिशों के साथ ‘मिशन टाइगर’ ही चला। शावक होटल में हनीमून मनाने के लिए आये मेरठ के नवविवाहित युगल के कक्ष में शीशा तोड़कर घुसा। गनीमत रही कि कक्ष में मौजूद अभी मई माह में ही विवाह के उपरांत अपने परिवार के साथ बीती रात्रि ही यहां घूमने पहुंचे मेरठ के पल्लवपुर फेस एक निवासी 24 वर्षीय युवक सुमित ने बेहद हिम्मत का परिचय देते हुए पहले कक्ष में शावक के होते हुए स्वयं व अपनी पत्नी शिवानी (21) को कंबल में छुपाकर बचाया, और दैवयोग से जैसे ही गुलदार वॉशरूम के खुले दरवाजे से अंदर गया, उसने धीरे से जाकर वॉशरूम का कुंडा बाहर से बंद कर दिया। उल्लेखनीय है कि तीन सप्ताह में नगर में वन्य जीवों के आने की यह दूसरी घटना है। इससे पूर्व बीती 10 जुलाई 2015 को वयस्क भालू जू रोड स्थित प्रशांत होटल में आ घुसा था। पर्यावरणप्रेमियों के अनुसार इसे मानव के वन्य क्षेत्र में अतिक्रमण का परिणाम बताया जा रहा है।

घटना की जानकारी मिलने पर वन और पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौके पर जुटे, लेकिन शावक को बेहोश कर पकड़ने के बाड़े इत्यादि के साथ नैनीताल चिड़ियाघर की टीम करीब सवा सात बजे मौके पर पहुंच पाई। तल्लीताल थाना प्रभारी कैलाश जोशी और वन दारोगा हीरा सिंह शाही ने पीछे गैलरी की ओर से वॉशरूम के रोशनदान से शावक को देखने की कोशिश की। इससे रोशनदान पर लगी शीशे की झिर्रियां टूट गर्इं। और शावक बाहर आने की कोशिश करने लगा। इस पर दोनों ने स्टूल को अढ़ाकर गुलदार को अंदर ही रोककर बेहोश करने का मन बनाया, किंतु तब तक वॉश बेसिन के ऊपर चढ़कर बैठा शावक दोनों पर भारी पड़ते हुए बाहर निकल आया। वन कर्मियों ने एक बार पुन: बिना बेहोश किए जाल डालकर उसे गैलरी में ही दबोचने की कोशिश की, किंतु इसी बीच वह मौका देखकर गैलरी के पीछे की ओर से बूचड़खाना, हरिनगर की ओर से जंगल में भाग गया। चिड़ियाघर के पशु चिकित्साधिकारी डा. योगेश भारद्वाज और रेंजर प्रमोद तिवारी ने उसे करीब सवा वर्ष का बताया। होटल के बाहर लगे सीसी टीवी की फुटेज के अनुसार शावक के पीछे आवारा कुत्तों का झुंड पड़ा था, और जान बचाने की कोशिश में वह खिड़की का नाजुक शीशा तोड़कर कक्ष में जा घुसा होगा।
होटल में सैलानियों की सुरक्षा सूत भर के शीशों के भरोसे
नैनीताल। नगर में तीन सप्ताह के भीतर नगर में वन्य जीवों के आने की दूसरी घटना प्रकाश में आई है, लेकिन इन दोनों घटनाओं ने नगर के होटलों में यात्रियों की सुरक्षा पर होटलों के द्वारा बरती जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। दोनों घटनाओं में वन्य जीवों ने खिड़कियों के शीशे तोड़ डाले। आज जिस होटल में घटना हुई वहां भी खिड़की के साथ ही रोशनदान में भी लोहे की रेलिंग जैसा प्रबंध नहीं था। होटल स्वामी अमित साह ने कहा कि आगे रेलिंग लगाएंगे।
पास में वैष्णो देवी मंदिर को लेकर लोगों ने आस्था से भी जोड़ा
नैनीताल। रविवार को जिस होटल में गुलदार का शावक घुसा वह हल्द्वानी रोड स्थित वैष्णो देवी मंदिर के बिलकुल करीब और सामने है। ऐसे में खासकर धार्मिक आस्था से जुड़े लोग बाघ को माता की सवारी मानते हुए आज की घटना को भी धार्मिक आस्था से जोड़कर देखते देखे गए।

राज्य बनने के बाद कुल 1200 वन्य जीवों ने गंवाए हैं प्राण

नैनीताल। अलग राज्य बनने के बाद उत्तराखंड में पिछले 14 वर्षो में 94 बाघ, 829 गुलदार और 275 हाथियों ने अपनी जान गंवाई है। प्रदेश के वन्य जीव प्रतिपालक कार्यालय के अनुसार 275 मृत हाथियों में से 108 की मौत दुर्घटनाओं में, 15 की अवैध शिकार के लिए, एक हाथी की मौत आपसी संघर्ष में और शेष 151 की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है। इस अवधि में 94 बाघों में से आठ बाघों को राज्य ने पिछले वर्ष 2014 में खोया है। अगर यहां समुचित चिकित्सा प्रबंध होते तो इनमें से कई वन्य जीवों को बचाया जा सकता था।

वन्य जीव संघर्ष में 600 से अधिक लोगों ने गंवाई जान

नैनीताल। राज्य बनने के बाद से उत्तराखंड राज्य में अब तक 600 से अधिक लोग वन्य जीवों से हुए संघर्ष में अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि 1200 से अधिक जख्मी हो चुके हैं। इनमें से 2014 तक के आंकड़ो के अनुसार सर्वाधिक 241 लोगों की मौत गुलदारों के द्वारा, 107 लोगों की मौत हाथियों के द्वारा, 19 की भालुओं के द्वारा, तीन की जंगली सुअरों व 16 की बाघ के द्वारा की गई है। वहीं गुलदार का शिकार हुए लोगों की वर्षवार बात करें तो 2001 में 32, 2002 में 19, 03 में 30, 04 में 117, 05 में 13, 06 में 29, 07 में 29, 08 में 13, 09 में दो, 10 में नौ, 11 व 12 में पांच-पांच, 13 में तीन तथा 14 में दो लोग गुलदार का शिकार बने। वहीं राज्य गठन के बाद से 2016 तक इस संघर्ष  में 405 लोगों ने जान गंवाई, जबकि नौ सौ से ज्यादा जख्मी हुए। दूसरी ओर अब हादसों और अन्य वजह से मारे गए बाघों की संख्या 91, गुलदार की 863 और हाथियों की तादाद 273 रही। ऐसी स्थितियों में आक्रोशित जनता खुद भी जानवर बनने से गुरेज नहीं करते। कोटद्वार के घामधार क्षेत्र में पिंजरे में फंसे गुलदार को लोगों ने जिंदा जला दिया तो जौनसार क्षेत्र में एक अन्य गुलदार को लोगों ने कुल्हाड़ी से काट डाला। इसके अलावा रुद्रप्रयाग में खेत में काम रही एक महिला पर गुलदार ने हमला किया तो इस वीर नारी ने आत्मरक्षा में गुलदार को मौत की नींद सुला दिया।

कमेट-मिट्टी खाने को मजबूर हैं बाघ

नैनीताल। जिम कार्बेट की तरह ही आदमखोर वन्य जीवों के शिकारी के साथ ही एक पर्यावरण व वन्य जीव प्रेमी की पहचान वाले ‘मिनी कॉर्बेट’ कहे जाने वाले स्वर्गीय ठाकुर दत्त जोशी ने खुलासा किया था कि हिंसक वन्य जीव तथा वन संपदा भी मनुष्य और मनुष्य के लिए उपयोगी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। पूर्व में वन संपदा एवं हिंसक वन्य जीवों के लिए भोजन प्रचुर मात्रा में था, लेकिन इधर जिम कार्बेट पार्क क्षेत्र बाघों के मुख्य भोजन चीतल व सांभर की संख्या में काफी कमी आई है। पूर्व की तरह मनुष्य भी बकरी आदि पालतू जानवरों को जंगल भेजते थे, इनमें से कुछ का शिकार कर बाघों को भोजन मिल जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। ऐसे में कई बाघ नदी किनारे खास स्थानों पर मिलनी वाली सफेद मिट्टी-कमेट (जिसे पूर्व में लोग चूने की तरह घर को पोतने के लिए प्रयोग करते थे) को भी खाते देखे गए हैं।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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