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इस शोध रिपोर्ट को पढ़ने के बाद आप शहद खाने से पहले 10 बार सोचेंगे

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-शोध छात्रा नगमा परवीन ने बताया एंटीबायोटिक युक्त शहद खाकर मानव पर एंटीबायोटिकों का असर और जीवाणुओं से लड़ने की शक्ति खत्म हो रही

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यंग साइंटिस्ट अवार्ड प्राप्त करती डीएसबी की छात्रा नगमा परवीन।

नवीन समाचार, नैनीताल, 3 मार्च 2019। कुमाऊं विवि की शोध छात्रा नगमा परवीन को देहरादून के विज्ञान धाम में आयोजित ‘13वीं उत्तराखंड स्टेट साइंस एंड टेक्नोलॉजी कांग्रेस 2018-2019’ में ‘यंग साइंटिस्ट अवार्ड’ से नवाजा गया है। उन्हें यह पुरस्कार उनके द्वारा ‘स्टेटस ऑफ एंटीबायोटिक यूज्ड इन एपिकलचर बाय बीकीपर टू ट्रीट बैक्टीरियल पेथोजेनेसिस इन नैनीताल डिस्ट्रिक्ट’ विषय पर किये जा रहे शोध पर दिया गया है। उनके शोध के नतीजे बेहतर स्वास्थ्य के लिए शहद का सेवन करने वालों के लिए चेतावनीप्रद हो सकते हैं।
डीएसबी परिसर नैनीताल के जंतु विज्ञान विभाग में प्रो. सतपाल बिष्ट के निर्देशन में शोधरत नगमा ने बताया कि उन्होंने नैनीताल जिले के शहद के लिए प्रसिद्ध आठ गांवों-भल्यूटी, काठगोदाम, लोहरियासाल तल्ला, मदनपुर कुर्मि्म, नाथुपुर, नेरिपुरा छोई, बैलपड़ाव व शिवलालपुर पांडेय के 2 दर्जन से अधिक मधुमक्खी पालकों से साक्षात्कार लेकर यह निष्कर्ष निकाला है कि 75 प्रतिशत मधुमक्खी पालक मधुमक्खियों में जीवाणु जनित बीमारियों को खत्म करने के लिए टेरामायसिन नाम की एंटीबायोटिक दवाई का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो की एक ब्रॉड स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक है। जब यह एंटीबायोटिक मधुमक्खियों को दी जाती है तो यह उनसे शहद में पहुंच जाती है। इस एंटीबायोटिक मिश्रित शहद के सेवन से मानव शरीर मंे एंटीबायोटिकों का असर कम हो जाता है और जीवाणुओं से लड़ने की शक्ति खत्म हो जाती है जोकि मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। उन्होंने बताया कि वह अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने गुरु माता पिता और भाइयों को देना चाहती हूँ।

यह भी पढ़ें : निजी अस्पतालों की हड़ताल खत्म, सीएम से वार्ता के बाद लिया फैसला

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 फरवरी 2019। पिछले नौ दिन से चल रही इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) से जुड़े निजी चिकित्सकों की प्रदेशव्यापी हड़ताल शनिवार रात मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ वार्ता के बाद समाप्त कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों की मांगों का परीक्षण करने को वित्त मंत्री प्रकाश पंत की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री आवास में हुई वार्ता के बाद चिकित्सक भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के साथ उनके यमुना कालोनी आवास पहुंचे और हड़ताल खत्म करने की जानकारी दी। दूसरी ओर, स्वास्थ्य सचिव नितेश झा ने बताया कि कमेटी की रिपोर्ट आने तक चिकित्सकों के प्रतिष्ठानों के विरुद्ध चल रही सीलिंग की कार्रवाई पर रोक लगा दी गई है। रविवार से चिकित्सक पूर्व की तरह अस्पताल व क्लीनिक खोलेंगे व मरीजों को उपचार देंगे।  

उल्लेखनीय है कि निजी चिकित्सक गत 15 फरवरी से क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन करने या उत्तराखंड हेल्थकेयर एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू करने की मांग को लेकर हड़ताल पर थे। जिससे मरीजों को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा था। राज्य सरकार की ओर से सरकारी अस्पतालों में नाकाफी साबित हो रही वैकल्पिक व्यवस्थाएं की गई थीं। इसके बावजूद सरकार ने झुकने से इन्कार कर दिया और चिकित्सकों के प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई शुरू कर दी थी। इस दोतरफा कार्रवाई से दबाव में आए चिकित्सकों ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट से शुक्रवार को मुलाकात कर मुख्यमंत्री से वार्ता का समय मांगा था। जिस पर शनिवार रात मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के आवास पर हड़ताली चिकित्सकों को बुलाया गया। चिकित्सकों ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थिति व यहां के लोगों की आर्थिक स्थिति के लिहाज से एक्ट में संशोधन की सख्त जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का हर हाल में पालन कराया जाएगा। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद देखा जाएगा कि इसमें संशोधन किया जा सकता है या नहीं। 

पूर्व समाचार : हाईकोर्ट से मनमर्जी चाह रहे डॉक्टरों को बहुत जोर का झटका…

-अब मनमानी दवाइयां व जांचें नहीं लिख सकेंगे चिकित्सक
– चिकित्सकों के संगठन आईएमए को झटका, पुर्नविचार याचिका खारिज
नवीन समाचार, नैनीताल, 15 फरवरी 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने चिकित्सकों के संगठन आईएमए यानी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को बड़ा झटका देते हुए जेनरिक दवाएं लिखने तथा अनावश्यक टेस्ट नहीं लिखने के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। साथ ही साफ कर दिया कि इस मामले में अब न्यायालय किसी भी तरह की अन्य पुनर्विचार याचिका स्वीकार नहीं करेगा। न्यायालय के आदेश के बाद साफ है कि सरकारी चिकित्सकों को मरीज को जैनरिक दवाएं ही लिखनी होंगी। वहीं इसके बाद अब एसोसिएशन के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प ही बचा है।
उल्लेखनीय है कि पिछले सितंबर 2018 में उच्च न्यायालय ने अधिवक्ता अतुल बंसल की जनहित याचिका पर महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए कहा था कि सरकारी अस्पताल के चिकित्सक मरीजों को सिर्फ जैनरिक दवाएं ही लिखेंगे, और मरीजों को अनावश्यक जांच के लिए नहीं भेजेंगे। इस आदेश के खिलाफ हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा पुर्नविचार याचिका दायर की थी, जिसे न्यायालय पूर्व में खारिज कर चुकी है। वहीं हाल ही में आइएमए की ओर से पुनर्विचार याचिका दायर की गई, जिसमें कहा गया था कि मरीज को कौन सी दवा लिखनी है, और कौन सी मेडिकल जांचें करानी हैं, यह चिकित्सक के विवेक पर निर्भर करता है। वहीं मूल जनहित याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता अतुल बंसल ने इस पुनर्विचार याचिका का विरोध किया।

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-गर्भवती महिलाओं की संख्या भी लगातार बढ़ रही
-पिछले 16 वर्षों में 26 गुना बढ़ गयी है राज्य में एड्स पीड़ितों की संख्या
नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 18 फरवरी 2019। देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड राज्य में असुरक्षित यौन संबंधों के प्रमुख कारण से फैलने वाला जानलेवा एड्स का दानव लगातार सुरसा के मुंह की तरह बढ़ता जा रहा है। वर्ष दर वर्ष राज्य में एड्स पीड़ितों और इनमें भी गर्भवती माताओं के आंकड़े भी लगातार भयावह तरीके से बढ़ते जा रहे हैं।
जनपद के सूचना अधिकार कार्यकर्ता हेमंत गौनिया को सूचना के अधिकार के तहत स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2002-03 में राज्य में 292 पुरुषों व 178 महिलाओं यानी कुल 470 लोगों की एचआईवी संक्रमण की जांच हुई थी, जिनमें से 22 पुरुष व 15 महिलाएं यानी कुल 37 लोग एड्स से संक्रमित पाये गये। जबकि इधर 2017-18 में 60,325 पुरुषों एवं 51,318 महिलाओं को मिलाकर कुल एक लाख 11 हजार 649 लोगों की जांचें हुईं और इनमें से 607 पुरुष व 299 महिलाएं मिलाकर 908 महिलाओं के साथ ही 61 गर्भवती महिलाएं एड्स संक्रमित पायी गयी हैं। इस प्रकार यह संख्या 968 हो गयी है। इस प्रकार वर्ष दर वर्ष आने वाले एड्स पीड़ितों की संख्या में पिछले 16 वर्षों में 26 गुने से अधिक की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। वहीं पिछले 16 वर्षों के कुल एड्स पीड़ितों की संख्या की बात करें तो इस दौरान 5911 पुरुष व 3139 महिलाओं तथा 536 गर्भवती महिलाओं सहित कुल 9603 लोग एड्स के संक्रमित हुए हैं। संख्या के लगातार बढ़ने पर चिकित्सकों का तर्क है कि लगातार जागरूकता बढ़ना भी संख्या बढ़ने का एक कारण है। पहले लोग जांचें नहीं कराते थे, इसलिए पीड़ितों की संख्या भी नहीं आ पाती थी। अब हर गर्भवती महिला की एचआईवी एड्स की जांच होती है।

इस भयावह तेजी से बढ़ रहे हैं आंकड़े

नैनीताल। राज्य में एड्स पीड़ितों की संख्या किस भयावह तरीके से बढ़ रही है इसका अंदाजा इस बात से लग जाता है कि वर्ष 2002-03 के बाद से वर्ष दर वर्ष 37, 95, 142, 267, 330, 507, 562, 718, 713, 780, 835, 817, 807ख् 773, 777 व 907 होते हुए बढ़ती गयी है। यह भी चिंताजनक तथ्य है कि महिलाओं और खासकर गर्भवती माताओं की संख्या भी लगातार पुरुषों की तरह बढ़ती रही है। वर्ष 2002 से 2004 तक जहां एक भी गर्भवती माता को एड्स नहीं था, वहीं अगले तीन वर्षों तक भी यह संख्या 2, 3 व 2 तक सीमित रही और वर्ष 2007-08 से यह संख्या 14 के साथ दहाई में गयी और 2008-09 में सीधे 43 हो गयी, और इधर लगातार बढ़ते हुए इस वर्ष सर्वाधिक 61 गर्भवती माताओं को एड्स का संक्रमण होने की पुष्टि हुई है।

 

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सर्दियों का मौसम आते ही हमारी त्वचा के लिए मुश्किल घड़ी आ जाती है और इस दौरान सही देखभाल न होने पर त्वचा फटने लगती है। इस मौसम में त्वचा सूख जाती है और इसका सबसे अधिक प्रभाव कोहनी, घुटने और ऐड़ी पर दिखाई देता है, जिससे निजात पाने के लिए त्वचा रोग विशेषज्ञ ने कुछ सुझाव दिए हैं। वीएलसीसी के डर्मेटोलॉजी के हेड ऑफ डिपार्टमेंट व कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. डीजेएस तुला ने कहा, “त्वचा का सर्दियों में बचाव करने के लिए यह जरूरी है कि पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन किया जाए। इससे आपके शरीर में नमी बनी रहती और सूखेपन से बचाव होता है। ठंड के मौसम में कॉफी और चाय से परहेज करें, क्योंकि ये त्वचा की सुंदरता के लिए सहायक नहीं हैं।

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गर्म पानी से स्किन को होने वाले नुकसान से बचने का तरीका

  • ग्रीन टी एक बेहतर विकल्प है, क्योंकि इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट प्रभाव होते हैं जो त्वचा को निखारने में मदद करते हैं।”
  • उन्होंने कहा, “गर्मी हो या सर्दी त्वचा की सफाई अनिवार्य है। अगर त्वचा साफ करने के बाद थोड़ी कठोर हो जाती है, तो शायद इसका मतलब यह हो सकता है कि त्वचा पर इस्तेमाल किया गया क्लिंजर सही नहीं है। सर्दियों में तेल आधारित क्लिंजर का प्रयोग करें, क्योंकि यह त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद करता है।”
  • डॉ. डीजेएस तुला ने कहा, “गर्म पानी से स्नान करने से बचें और कम गर्म पानी का उपयोग करें। ठंडे पानी से स्नान करना त्वचा के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है। स्नान करने के बाद मॉइस्चराइजिंग आवश्यक है, अन्यथा त्वचा की सतह पर दरारें दिखाई दे सकती हैं।”
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हीटर से होने वाले नुकसान

सर्दियों में लोग शरीर को गर्म रखने के लिए हीटर का इस्तेमाल करते हैं, पर यह त्वचा के सूखेपन का कारण बन सकता है, इसलिए हीटर के पास ज्यादा देर तक न बैठें और छोटे अंतराल के बाद खुले में जाएं। महिलाएं खूबसूरत दिखने के लिए ब्लीच का उपयोग करती हैं। ब्लीच एक भयानक रसायन है जो त्वचा से प्राकृतिक तेल को सोखता है, जिससे त्वचा छिल और जल जाती है। इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।
डॉ. तुला ने कहा कि यह सोच गलत है कि सर्दियों में सूरज कि किरणों से त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचता है, ऐसा नहीं है और गर्मियों में सनस्क्रीन लगाना जितना आवश्यक है उतनी ही सर्दियों में भी है। बहुत से लोग मानते हैं कि सर्दियों के अंधेरे दिनों में सूर्य नहीं होता है, लेकिन वास्तव में सूर्य की हानिकारक यूवी किरणें बादलों को पार कर सकती हैं और नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए घर से बहार जाने से शरीर पर स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाना जरूरी है।

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उन्होंने कहा, “सर्दियों में फल, नट्स, हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें। यह आपके पाचन तंत्र को मजबूत करती है और साथ-साथ आपकी त्वचा को चमकने में भी मदद करती है। त्वचा की सुंदरता के लिए गाजर का सेवन करें। यह विटामिन-एका समृद्ध स्रोत है और यह आपके लिए सुंदरता के एजेंट जैसा है। मछली, अंगूर, एवोकैडो ब्रोकोली और बेरी त्वचा के लिए बहुत उपयोगी होते हैं।”

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नवीन समाचार, फीचर डेस्क, नैनीताल, 22 जनवरी 2019। 

हर किसी की चाहत होती है कि उसकी त्वचा पर दाग-धब्बे ना हों, गोरी हो और उस पर ग्लो रहे. इसके लिए बाजार में कई तरह की फेयरनेस क्रीम्स उपलब्ध हैं. लोग इन्हें लगाते भी हैं पर कई बार ये चेहरे पर रौनक लाने की बजाय उसे नुकसान पहुंचाती हैं.

इसलिए आज हम आपको बता रहे हैं ऐसे घरेलू नुस्खे, जो आपके चेहरे की रंगत निखार देंगे.

– आलू में मौजूद ब्लीचिंग एजेंट चेहरे के दाग-धब्बों को हल्का करते हैं और त्वचा को साफ करते हैं. एक उबले आलू को मसलें, फिर उसमें थोडा सा दूध मिलाकर उसका एक पेस्ट तैयार करें. इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं और 15 मिनटों तक लगा रहने दें. इसके बाद ठण्डे पानी से मुंह धो लें. कच्चे आलू को पतला-पतला काटकर 15 मिनट के लिए रोज अपने चेहरे पर रखेंगे तो इससे भी आपके चेहरे पर निखार आएगा.

– ब्लेंडर में एक खीरा, 1/4 कप नींबू का रस, 5 चम्मच शहद और 5 चम्मच दूध डालें और उसे अच्छे से ब्लेंड करें. इस मिक्चर में थोड़ा सा आटा या बेसन मिलाकर पेस्ट बना लें. इसे 6 घंटों के लिए फ्रिज में रखकर ठंडा करें. रोज इसे चहरे पर 15 से 20 मिनट के लिए लगा रहने दें और बाद में चेहरे को गुनगुने पानी से धोकर साफ तौलिये से पोंछ लें.

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– पपीता में पेपीन एन्जाइम पाया जाता है जो स्किन को निखारने में सहायक होता है. ये स्किन में नए सेल्स का निर्माण करता है. पाचन ठीक रहता है तो चहरे में ग्लो दिखाई देता है. पपीते को काटकर ब्लेंडर में ब्लेंड कर लें और इस पेस्ट को चेहरे पर 15 से 20 मिनट तक लगाए रखने के बाद चेहरा गर्म पानी से धो लें. फेसपैक बनाते समय कच्चे हरे पपीते का इस्तेमाल करें इसमें पके हुए पपीते से अधिक मात्रा में पेपीन होता है.

– नींबू में विटामिन सी होता है. विटामिन सी स्किन में मौजूद कोलेजन के स्तर को बनाए रखता है और त्वचा जवां बनी रहती है. यह शरीर से सारे टॉक्सिन्स को बाहर निकाल देता है जिससे खून साफ होता है. रोज सुबह एक गिलास पानी में एक नींबू निचोड़कर खाली पेट पीने से स्किन में रंगत आती है. नींबू एक अच्छा ब्लीचिंग एजेंट है इसके रस या छिलके को स्क्रब की तरह रगड़ने से त्वचा में निखार आता है.

– टैनिंग दूर करने का टमाटर सबसे अच्छा जरिया है. टमाटर में लाइकोपीन होता है जो स्किन की टैनिंग को तेजी से कम करता है. ब्लैंडर में 1 या 2 टमाटर ब्लेंड करें. इसमें दो चम्मच नींबू का रस और थोड़ा सा आटा या बेसन मिलाकर चिकना पेस्ट बना लें. चहरे पर 20 मिनट तक लगाए रखें फिर ठंडे पानी से धो लें. इससे स्किन में नए सेल्स का निर्माण होता है और डेड सेल्स बाहर खत्म हो जाते हैं.

यह भी पढ़ें : प्रेग्नेंसी में अपने सौन्दर्य के लिए भूलकर भी ना करें यह, वरना भुगतने पड़ेंगे गंभीर परिणाम

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 जनवरी 2019। मां बनना हर स्त्री के जीवन का सबसे सुखद एहसास होता है, पर इस सुख के लिए महिलाओं को कई सारे कष्ट-परेशानियों से भी गुजरना होता है। खानपान से लेकर उठने-बैठने के तौर-तरीकों का जहां खास ध्यान रखना होता है। इसके साथ ही प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को एक और चीज का खास ध्यान रखना होता है और वो है ब्यूटी प्रोडक्ट्स और कॉस्मेटिक का इस्तेमाल। दरअसल, कॉस्मेटिक में बहुत सारे ऐसे खतरनाक केमिकल्स का प्रयोग होता है जो कि होने वाले बच्चे के लिए हानिकारक हो सकते हैं। आज हम आपको ऐसे ही कुछ ब्यूटी प्रोडक्ट्स और कॉस्मेटिक के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके इस्तेमाल से प्रेग्नेंट महिलाओं को बचना चाहिए।
एंटी एजिंग क्रीम :
आजकल बाजार में बहुत सी ऐसी क्रीम मौजूद हैं जो चेहरे से उम्र के निशान मिटा देने का दावा करते हैं। ऐसी क्रीम में त्वचा में विटामिन ए की कमी को पूरा करने के लिए रेटिनोड्स नामक तत्व मिलाया जाता है, जो कि गर्भ में पल रहे भ्रूण के लिए खतरनाक हो सकता है। इसलिए ऐसी क्रीम के इस्तेमाल प्रेग्नेंट महिलाओं को खासतौर पर बचना चाहिए।
एंटी एक्ने क्रीम :
डिओडरेंट, परफ्यूम
प्रेग्नेंसी के दौरान डिओडरेंट, परफ्यूम या तेज खूशबू वाले बॉडी लोशन का इस्तेमाल भी बच्चे के लिए खतरनाक होता है। डिओडरेंट, परफ्यूम में इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल्स गर्भ में पल रहे बच्चे को गंभीर बीमारियों दे सकती हैं। यहां तक एक शोध में ये भी सामने आया है कि गर्भावस्था के में अधिक खुशबू वाले डिओडरेंट, परफ्यूम का इस्तेमाल करने से गर्भ में पल रहे लड़के को बड़े होने पर नपुंसकता का शिकार होना पड़ सकता है। ऐसे में चीजों का इस्तेमाल करने से बचें।
(Author: Yashodhara Virodai)

यह भी पढ़ें : ब्रेस्ट कैंसर से बचे रहना है तो आज से ही अपनी लाइफस्टाइल में कर लें ये बदलाव

नवीन समाचार, नैनीताल, 19 जनवरी 2019। ब्रेस्ट कैंसर से बचने के लिए महिलाओं को लाइफस्टाइल में कुछ सकारात्मक बदलाव करने होगें। महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, जिसकी वजह आज की तनाव और प्रदूषण भरी लाइफ स्टाइल है। ऐसे मे अगर महिलांए ब्रेस्ट कैंसर से बचे रहना चाहती है तो सबसे पहले उन्हें अपनी लाइफस्टाइल में कुछ सकारात्मक बदलाव करने होगें। आज हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं, किस तरह के बदलाव कर आप ब्रेस्ट कैंसर के खतरे से बच सकती हैं।

सूर्योदय से पहले उठें :
सूर्योदय से पहले उठने के फायदे तो आपने पहले भी सुन रखें होंगे, लेकिन क्या आपको पता है इससे ब्रेस्ट कैंसर से बचाव होता है। जी हां, हाल ही में हुए एक शोध में ये सामने आया है कि जो महिलाओं सूरज उगने से पहले उठती हैं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 40% कम हो जाता है। असल में सुबह के समय बाकि दिन की अपेक्षा वातावरण कहीं अधिक शुद्ध और साफ होता है, जिससे आपको ऑक्सीजन अधिक मिलती है और इससे शरीर में स्तन कैंसर के विकसित होने का खतरा काफी कम हो जाता है।
अल्कोहल से बनाए दूरी :
जी हां, अल्कोहल का सेवन तो सभी के लिए नुकसानदेह होता है, लेकिन महिलाओं के लिए ये खासकर हानिकारक है, क्य़ोंकि इससे कैंसर की सम्भावना कहीं अधिक बढ़ जाती है। इसलिए बेहतर यही है कि आप अल्कोहल और स्मोकिंग से दूरी बनाए रखें।
वजन नियंत्रित रखें :
बढ़ा हुआ वजन तो बहुत सारी बीमारियों को आमंत्रण देता है, जिसमें कैसंर भी शामिल है। ऐसे में अगर आपको अपने वजन पर खास नियंत्रण रखना चाहिए।
फास्ट फूड को कहे नां :
बर्गर, पिज्जा जैसे फास्ट फूड का सेवन भी कैंसर को बढ़ावा देता है, ऐसे में अगर आप इससे बचे रहना चाहती हैं तो आपको फास्ट फूड से भी तौबा करना होगा।

यह भी पढ़ें : उत्‍तराखंड में भी जानलेवा हुआ स्वाइन फ़्लू, 15 दिन के भीतर 8 मौत

नवीन समाचार, देहरादून, 14 जनवरी 2019। देश भर में सैकड़ों लोगों की जान लेने वाला शूकर इन्फ्लूएंजा, जिसे एच1एन1 या स्वाइन फ्लू  भी कहते हैं, उत्तराखंड जैसे सर्द प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों तक पहुँच गया है। राज्य की राजधानी देहरादून के श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में भर्ती तीन और मरीजों की मौत हो गई है। इस तरह शुरुआती चरण में ही स्वाइन फ्लू से मरने वाले मरीजों की संख्या बढ़कर अब छह हो गई है। 

अधिकांश मरीजों की मौत श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में हुई है। जानकारी के अनुसार, नेहरू कॉलोनी निवासी 71 वर्षीय महिला को कैलाश अस्पताल से बीती पांच जनवरी को श्री महंत इंदिरेश अस्पताल के लिए रेफर किया गया था। 13 जनवरी को तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। उपचार के दौरान  देर शाम उनकी मौत हो गई है। इसी तरह बीती नौ जनवरी से भर्ती सहारनपुर निवासी 49 साल के एक व्यक्ति तथा बीती छह जनवरी से भर्ती रुद्रप्रयाग निवासी 48 साल के एक अन्य व्यक्ति को भी श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में मौत हो गई है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व इसी अस्पताल में भर्ती विकासनगर के रहने वाले मरीज को शुक्रवार रात को इमरजेंसी में भर्ती किया गया था, जहा पर आइसीयू में उसका उपचार चल रहा था। मरीज को पिछले दो दिन से तेज बुखार, कफ व सास लेने में दिक्कत हो रही थी। उसने शनिवार को उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। स्वाइन फ्लू के कारण प्रदेश में दस दिन के भीतर यह तीसरी मौत है।

इससे पूर्व बीती तीन जनवरी को मैक्स अस्पताल में प्रेमनगर निवासी एक मरीज की मौत हुई थी और उसके बाद बीते शुक्रवार को हरिद्वार की 41 साल की एक महिला की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई थी, जो कि स्वाइन फ्लू से दूसरी मौत थी। जबकि राजधानी में अभी भी पांच स्वाइन फ्लू पीड़ित मरीजों का उपचार चल रहा है। फिलहाल श्री महंत इंदिरा अस्पताल में तीन, सिनर्जी और मैक्स अस्पताल में एक-एक स्वाइन फ्लू के मरीज भर्ती हैं। सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को स्वाइन फ्लू को लेकर अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। वहीं, लोगों से भी एडवाइजरी जारी कर एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य के सभी अस्पतालों को अलर्ट जारी किया  गया है।

यह भी पढ़ें : महिलाओं में बढ़ रहे हृदय रोग और स्ट्रोक के खतरे के बचाव व समाधान

महिलाओं में हृदय रोग का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में हर साल हर तीन में से एक महिला की मौत हृदय रोग और आघात के चलते होती है, यानी हर 80 सेकेंड में लगभग एक महिला की जान चली जाती है। इसके अतिरिक्त, लगभग 90 फीसदी महिलाओं में हृदय रोग या स्ट्रोक के लिए एक या इससे अधिक ‘रिस्क फैक्टर’ यानी जोखिम वाले कारक हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है।

श्रीराम मूर्ति स्मारक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में दवा विभाग के प्रमुख और सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. दीप चंद्र पंत ने कहा, हृदय रोग के लिए पारंपरिक जोखिम कारकों में उच्च कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप और मोटापा शामिल हैं। हालांकि, महिलाओं में हृदय रोग बढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कुछ विशेष जोखिम कारकों में मधुमेह, मानसिक तनाव और अवसाद, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, रजोनिवृत्ति, टूटे हुए दिल यानी ‘ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम’ और गर्भावस्था के दौरान की जटिलताएं शामिल हैं। महिलाओं में हृदय रोग में जीवनशैली के कारक भी प्रमुख भूमिका निभाते हैं। उच्च संतृप्त वसा, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थों की अधिक खपत, सब्जियों और साबूत अनाज का कम सेवन, गतिहीन जीवन शैली और बढ़ता तनाव स्तर कुछ ऐसे उदाहरण हैं जो महिलाओं के दिल की सेहत में गिरावट के लिए मुख्य भूमिका निभाते हैं।

डॉ. पंत ने आगे कहा, महिलाओं में दिल का दौरा पड़ने के कुछ संभावित चेतावनी लक्षणों में छाती के दर्द जैसे नियमित लक्षण होते हैं। हालांकि, बड़ी उम्र की महिलाओं में थकान, सांस धीमी होना, अपच, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द या मतली, जबड़े या गले में दर्द, हाथ में दर्द, बाएं, सीधे या छाती के बीच में दर्द जैसी समस्या सामने आ सकती है। ज्यादातर महिलाएं इन लक्षणों और दर्द की अनदेखी करती हैं, जो कि दिल के दौरे के संभावित संकेत हैं। विश्व हृदय दिवस पर, इन जोखिम कारकों और लक्षणों के बारे में महिलाओं के बीच जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है। उन्हें बताना होगा कि जैसे ही वे किसी असामान्य दर्द का अनुभव करें, उन्हें तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

महिलाओं में हृदय रोग को रोकने के लिए 5 टिप –
      1. धूम्रपान छोड़ें: सेहत के लिए हानिकारक इस आदत को छोड़ने में देर नहीं करनी चाहिए। धूूम्रपान छोड़ने से रक्तचाप को कम करने, रक्त परिसंचरण में सुधार और ऑक्सीजन की सप्लाई बढ़ाने में मदद मिलती है।
      1. स्वस्थ खाएं: वह भोजन खाएं जिसमें संतृप्त वसा, ट्रांस फैट, और सोडियम कम मात्रा में हो। बहुत सारे फल और सब्जियां, फाइबर युक्त अनाज, मछली, मूंगफली, फलियां और बीज खाएं। मांस के बिना भी भोजन खाने का प्रयास करें। कम वसा वाले डेयरी उत्पादों को तवज्जो दें। चीनी का सीमित सेवन करें। मीठे पेय और लाल मांस को सीमित करें।
      1. शारीरिक रूप से सक्रिय रहें: हर दिन लगभग 30 मिनट की सामान्य कसरत दिल के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। व्यायाम न केवल रक्त प्रवाह बढ़ाने में मदद करता है बल्कि तनाव को भी कम करता है।
      1. संबंधित स्थितियों का प्रबंधन: इन स्थितियों में मधुमेह और रक्तचाप शामिल हैं। इनके स्तर पर लगातार निगरानी रखें। अगर आप किसी भी उतार-चढ़ाव को देखते हैं, तो डॉक्टर से परामर्श करना उचित रहेगा।
    1. तनाव प्रबंधन: योग और ध्यान जैसी तकनीकों से तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है। यह याद रखें कि तनाव विभिन्न विकारों के बढ़ने की संभावना को बढ़ाएगा। इसलिए इस पर नियंत्रण रखें और पर्याप्त नींद लें।

डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई कोई भी जानकारी या संपूर्ण जानकारी बरेली के श्रीराम मूर्ति स्मारक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड साइंसेज में दवा विभाग के प्रमुख और सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. दीप चंद्र पंत के स्वतंत्र विचार हैं।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

2 thoughts on “इस शोध रिपोर्ट को पढ़ने के बाद आप शहद खाने से पहले 10 बार सोचेंगे

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