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88 वर्षीया वृद्धा के पेट से डॉ. दुग्ताल ने निकाला 6 लीटर पानी..

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नवीन समाचार, नैनीताल, 09 अगस्त 2020। मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला पुरुष चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एमएस दुग्ताल ने रविवार को पुनः एक 88 वर्षीया वृद्ध महिला के पेट और छाती में भरा तीन लीटर पानी को निकाल कर जान बचाई। उल्ल्ेखनीय है कि इससे पूर्व गत बृहस्पतिवार 6 अगस्त को भी महिला के पेट से तीन लीटर से अधिक पानी निकाला था। डॉ दुग्ताल ने बताया कि जनपद के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र आडूखान निवासी 88 वर्षीय बुजुर्ग महिला धनुली देवी पेट दर्द व पानी भर जाने की शिकायत को लेकर चिकित्सालय में लाया गया था। उसकी जांच करने पर पता चला कि उसके रक्त में प्रोटीन व कैल्शियम कम था। साथ ही उसे खून की कमी और लीवर यानी यकृत संबंधी समस्या भी थी।
इन समस्याओं के कारण उसके शरीर में काफी सूजन भी और पेट में पानी भर गया है। इससे उसका शरीर फूला हुआ था और उसे सांस लेने में भी दिक्कत थी। उसने एक सप्ताह से भोजन नहीं किया था और उसे चार लोग उठाकर लाये थे। उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्होंने यहीं मरीज के पेट व छाती से सिरिंज के माध्यम से यानी बिना ऑपरेशन के पहले गत बृहस्पतिवार और आज पुनः 3 लीटर से अधिक पानी निकाला गया। महिला की हालत अब खतरे से बाहर है। उसकी कोरोना की जांच भी की गई थी, जिसमें वह निगेटिव निकली। अब उसकी स्थिति काफी बेहतर है। उसे भूख भी लगने लगी है। अभी उसका इलाज चलेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि अब वह अपने पैरों पर चलकर ही अपने घर जाएगी।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 4 जुलाई 2020। मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय को लंबे समय के बाद एक वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ मिलने जा रहे हैं। प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. केएस धामी ने बताया कि 1982 बैच के कानपुर से पास आउट सुप्रसिद्ध वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डा. केबी जोशी ने यहां कार्यभार ग्रहण कर लिया है। वे बुधवार से यहां बैठेंगे और सप्ताह में चार दिन मंगलवार, बुधवार, बृहस्पतिवार और शुक्रवार को हृदय रोगियों को देखेंगे। वे 15 वर्ष पूर्व वे यहां चार-पांच वर्ष रह चुके हैं। इधर वे देहरादून से यहां स्थानांतरित हुए हैं। पूर्व में उन्होंने वीआरएस यानी समय पूर्व सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया था, जो स्वीकार नहीं हुआ। इसके बाद वे वापस नैनीताल में अपनी सेवाएं जारी रखेंगे।

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नवीन समाचार, ऋषिकेश, 25 जून 2020। चिकित्सक धरती पर भगवान के दूसरे रूप कहे जाते हैं। इसे सही साबित किया है एम्स ऋषिकेश के चिकित्सकों ने, जिन्होंने ईश्वर की एक कृति में एक बड़ी कमी, अर्ध विकसित दिल के साथ ही पैदा ही हो चुकी 5 महीने की बच्ची की यह कमी दूर कर बड़ा काम किया है।
स्थानीय एम्स के हृदय रोग शिशु शल्य चिकित्सा विभाग के चिकित्सकों ने एक पांच महीने की बच्ची की सफलतापूर्वक जटिल सर्जरी को अंजाम देकर उसे नया जीवनदान दिया है। इस बच्ची का दिल अर्द्ध विकसित था। एम्सं के पीडियाट्रिक कॉर्डियोथोरेसिक सर्जन डा. अनीष गुप्ता ने बताया कि देहरादून निवासी 5 महीने की एक बच्ची का सफल ऑपरेशन करके उसे जीने की नई उम्मीद दी। महज 4.5 किलोग्राम की इस बच्ची का दिल सिर्फ आधा विकसित हुआ था। जिससे उसके खून में बार-बार ऑक्सीजन का स्तर गिर जाता था और बच्ची नीली पड़ जाती थी। चिकित्सकों के अनुसार यह बीमारी लाखों में से किसी एक बच्चे को होती है। बच्ची के अभिभावक दिल्ली के कई नामचीन सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों में भटकने के बाद एम्स ऋषिकेश पहुंचे।
उन्होंने बताया कि अक्सर इस तरह की बीमारी से ग्रसित बच्चे ऑपरेशन से पहले ही दम तोड़ देते हैं। मगर हमने 15 जून को इस बच्ची का ऑपरेशन किया। 4 घंटे की जटिल सर्जरी के बाद बच्ची को दो दिन तक आईसीयू में रखा गया और 18 जून को वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ है और दूध पी रही है। इस जटिल सर्जरी को अंजाम देने में विभाग के शल्य चिकित्सक डॉ. राजा लाहिरी ने उनका सहयोग किया। साथ ही निश्चेतना विभाग से डॉ. अजय मिश्रा व उनकी टीम ने ऑपरेशन के दौरान व आईसीयू में मुस्तैदी से मोर्चा संभाला, साथ ही वरिष्ठ अनुभवी नर्सिंग ऑफिसर केशव दास ने अपने सहयोगी धर्मचंद के साथ ऑपरेशन में नर्स की भूमिका निभाई।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में बच्ची की देखभाल शिशु हृदय रोग चिकित्सक डा. यश श्रीवास्तव की देखरेख में हो रही है। सीटीवीएस विभागाध्यक्ष डा. नम्रता गौर ने बताया कि बहुत जल्द विभाग का विस्तारीकरण किया जा रहा है और इससे शिशु एवं वयस्क दोनों तरह के दिल के रोगियों का दो ओटी में एकसाथ ऑपरेशन किया जा सकेगा और मरीजों को अपनी सर्जरी के लिए इंतजार नहीं करना होगा। इससे उत्तराखंड के साथ साथ समीपवर्ती राज्यों के मरीजों को भी सहूलियत मिलेगी। एम्स के निदेशक प्रोफेसर रविकांत ने बताया कि हमारी कोशिश है कि एम्स अस्पताल में आने वाला कोई भी मरीज पैसे अथवा संसाधनों की कमी से अपनी जान न गंवाए।

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-दिये प्रभावी क्रियान्वयक के निर्देश, सभी स्तरों के स्वास्थ्य केंद्रों के मानकों व उपलब्धता की रिपोर्ट तलब की
नवीन समाचार, नैनीताल, 23 जून 2020। कुमाऊं मंडल के आयुक्त एवं मुख्यमंत्री के सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी ने कोरोना के कई नमूनों को तकनीकी कारणों से बिना जांच के लौटाए जाने की स्थितियों पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पूरे मंडल के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक ली तथा स्वास्थ्य विभाग के मंडलीय निदेशक डॉ. संजय साह को प्राथमिक व सामुदायिक सहित सभी स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों पर संसाधनों एवं कार्मिकों के तय मानकों एवं उपलब्धता की विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के नमूनों के परीक्षणों में तेजी एवं डाटा में शुद्धता बनाये रखने के लिए सभी मुख्य चिकित्साधिकारी अपने-अपने जिलों के कोविड-19 के नमूने लेने के परीक्षण केन्द्रों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करें। सोमवार की देर सांय गहनता से समीक्षा करते हुए दिए।
उन्होंने कहा कि किसी नमूने की जांच निरस्त होने से संबंधित सदिग्ध व्यक्ति पर मानसिक दबाव बढ़ता है और कार्य में लगे व्यक्तियों की मेहनत भी बेकार हो जाती है। इस लए जॉच हेतु सैम्पल लेने, सैम्पल एकत्र करने व सैम्पल जॉच केन्द्रों तक पहुॅचाने में विशेष सावधानी बरती जाये और सैम्पल प्रक्रिया का शतप्रतिशत अनुपालन किया जाये ताकि एक भी सैम्पल रिजेक्ट न हो। उन्होंने सभी सीएमओं को निर्देश दिए कि कोविड-19 की जॉच हेतु ट्रू-नेट मशीन अतिशीघ्रता से स्थापित की जायें। उन्होंने निर्देश दिए कि सामाजिक, धार्मिक, भावनात्मक एवं मार्मिक लगाव को देखते हुए कोरोना संदिग्ध व्यक्ति की मृत्यु होने की दशा में उसके सैम्पल की जॉच प्राथमिकता से की जाये। यदि किसी मृतक का परिवार अन्त्येष्टि एवं दफीना करने में अधिक जल्दबाजी कर रहा हो तो उनकी सहमति के आधार पर मृतक को कोरोना पोजिटिव मानते हुए नियमानुसार मृतक की अंत्येष्टि अथवा दफीना कया जाए। उन्होंने केएमवीएन के एमडी रोहित मीणा के सुझाव पर सभी सीएमओ को जॉच केन्द्रों पर सैम्पल प्राप्ति शीट में रिजल्ट कॉलम बढ़ाते हुए एक्सल सीट की हार्ड एवं सॉफ्ट कॉपी उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए ताकि जॉच रिजल्ट सम्बन्धित जिलों को और अधिक शीघ्रता से प्राप्त हो सकें। वीसी में रोहित कुमार मीणा, अपर आयुक्त संजय कुमार खेतवाल, संयुक्त निदेशक एटीआई नवनीत पाण्डे, प्रधानाचार्य सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज डॉ.सीपी भैसोड़ा सहित सभी जनपदों के सीएमओं आदि मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : नैनीताल के डीएम की मांग पर पूरे प्रदेश की आशाओं-आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का होगा भला

-मुख्य सचिव ने नैनीताल डीएम के सुझाव पर आशाओं-आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को प्रोत्साहन राशि देने को कहा
-मंडलायुक्त ने आशाओं को रक्तचाप मापने के उपकरण देने की आवश्यकता जताई
नवीन समाचार, नैनीताल, 20 जून 2020। प्रदेश के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने शनिवार को सभी जनपदों द्वारा कोरोना संक्रमण के प्रभावी रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु किए जा रहे कार्यों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कोरोना संक्रमण को जन समुदाय में फैलने से रोकने के लिए संदिग्ध तथा क्वारंटाईन व्यक्तियों की गहनता से निगरानी एवं परीक्षण करने, कोरोना के लक्षण वाले व्यक्तियों की शत-प्रतिशत सैम्पलिंग कराने, सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन करने वाले तथा मास्क न पहनने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्ती से कार्यवाही करने व नियमानुसार मुकदमा पंजीकृत करने के निर्देश दिये। साथ ही 65 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धों व 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को अनावश्यक बाहर न निकलने व जन समुदाय के बीच न जाने की सलाह दी।
उन्होंने नैनीताल के डीएम सविन बंसल के सुझाव पर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों से कोविड-19 की ड्यूटी में लगी आशाओं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को प्रोत्साहन राशि देने के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए। वीडियो कांफ्रेंस में कुमाऊं मंडल के आयुक्त अरविंद सिंह ह्यांकी ने ग्रामीण क्वारंटीन सेंटरों विशेषकर स्कूलों एवं पंचायत घरों की बिजली, पानी एवं शौचालय की मूलभूति सुविधाऐं बेहतर करने, दूरस्थ क्षेत्रों के पीएचसी एवं डिस्पेंशनरी में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने, दूरस्थ क्षेत्रों के हर गॉव में कम से कम एक स्ट्रेचर एवं डोली की व्यवस्था करने तथा पहाड़ो में भी हाई ब्लड प्रेशर एवं हायपर टेंशन के मामले बढ़ने के दृष्टिगत आशाओं को रक्तचाप मापने के लिए उपकरण देने की आवश्यकता जताई। इस दौरान डीएम सविन बंसल ने आशाओं को प्रोत्साहन भत्ता देने के साथ ही जनपद मेंअतिरिक्त पुलिस बल के रूप में जनपद में मौजूद आईआरबी तथा पीएसी बटालियन को लगाने की मांग की।

यह भी पढ़ें : नैनीताल जिले के दो सहित राज्य के सभी जिलों में ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए पाइप लाइन निर्माण को मंजूरी

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 जून 2020। जनपद के दो चिकित्सालयों में ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए पाइप लाइन के निर्माण की योजना स्वीकृत हुई है। मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला (पुरूष) चिकित्सालय नैनीताल को इस हेतु 34 लाख 49 हजार व राजकीय बेस चिकित्सालय हल्द्वानी को 53 लाख 7 हजार रूपये की धनरािश स्वीकृत कर दी गयी है।
यह जानकारी देते हुए एनएचएम यानी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक युगल किशोर पंत ने बताया कि कोविड-19 इमर्जेन्सी रेस्पोंस एंड हेल्थ सिस्टम प्रीपेयर्डनेस फाइनेसियल पैकेज यानी कोविड-19 के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य प्रणाली हेतु वित्तीय पैकेज के अन्तर्गत यह योजना स्वीकृत की गई है। नैनीताल जनपद के इन दो चिकित्सालयों के अलावा जिला चिकित्सालय गोपेश्वर के लिए 30 लाख 29 हजार रुपये, जिला चिकित्सालय अल्मोड़ा के लिए 36 लाख 89 हजार, जिला चिकित्सालय रूद्रपुर के लिए 94 लाख 17 हजार, रुद्रप्रयाग के श्री जगद्गुरू शंकराचार्य माधवाश्रम राजकीय जिला चिकित्सालय के लिए 76 लाख 44 हजार, जिला चिकित्सालय बागेश्वर के लिए 22 लाख 83 हजार, जिला चिकित्सालय उत्तरकाशी के लिए 51 लाख 77 हजार, जिला चिकित्सालय हरिद्वार के लिए 15 लाख, बीडी पाण्डे जिला (पुरूष) चिकित्सालय पिथौरागढ़ के लिए 30 लाख 80 हजार, जिला चिकित्सालय चम्पावत के लिए 41 लाख 60 हजार, बेस चिकित्सालय कोटद्वार के लिए 58 लाख 73 हजार व जिला चिकित्सालय पौड़ी के लिए 32 लाख 26 हजार रूपये की धनराशि स्वीकृत कर दी गयी है। उन्होंने बताया कि स्वीकृत धनराशि प्राथमिकता से अवमुक्त की जा रही है।

यह भी पढ़ें : नैनीताल: जिला चिकित्सालय में आने वाले हर व्यक्ति कीे होगी थर्मल स्क्रीनिंग, फ्लू क्लीनिक भी हुआ स्थापित

नवीन समाचार, नैनीताल, 16 जून 2020। मंगलवार से मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में आने वाले हर व्यक्ति की थर्मल स्क्रीनिंग करने की सुविधा शुरू कर दी गई है। प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. केएस धामी ने बताया कि थर्मल स्क्रीनिंग में बुखार, खासी व जुकाम के लक्षण पाये जाने वाले रोगियों को देखने के लिए चिकित्सालय के बाहर अलग से फ्लू क्लीनिक की स्थापना कर दी गई है। इस फ्लू क्लीनिक में बुखार, खासी व जुकाम के लक्षण पाये जाने वाले रोगियों को ही देखा जाएगा। इन रोगियों को अन्य रोगियों से अलग रखा जाएगा। उनके पर्चे भी वहीं अलग से कटवाये जाएंगे और वहीं उन्हें दवाएं भी उपलब्ध कराये जाएंगे। साथ ही इनमें से कुद की रेंडम सैंपलिंग भी की जाएगी। उन्होंने बताया कि बाहरी लोगों की जांच के लिए पहले से ही बीएम शाह ओपन थियेटर में जांच की व्यवस्था की गयी है। इधर मंगलवार को जनपद की सीएमओ डा. भारती राणा ने भी इन व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

चिकित्सकों को किया सम्मानित
नैनीताल। मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकत्सालय के चिकित्सकों एवं चिकित्सा कर्मियों को मंगलवार को बिड़ला विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य अनिल शर्मा की धर्मपत्नी आशा शर्मा की संस्था आस्था फाउंडेशन के द्वारा कोरोना के खिलाफ जंग में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए सम्मानित किया गया है। सम्मानित होने वालों में चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. केएस धामी, डा. एमएस दुग्ताल, डा. अनिरुद्ध गंगोला, डा. मोनिका कांडपाल, डा. प्रियांशु श्रीवास्तव, डा. अक्षय गंगोला, मैट्रन शशिकला पांडे,एंबुलेंस चालक और वार्ड ब्वॉय महबूब, लोकेश, यूनुस, सफाई कर्मी जितेश आदि शामिल रहे। इन्हें पुष्पगुच्छ एवं ‘कोरोना वॉरियर’ प्रमाण पत्र भेंट किये गये। इस मौके पर पर्यावरणविद् डा. अजय रावत भी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज की कोरोना लैब सुचारू हुई, फिर से हो सकेंगी सैकड़ों लंबित जांचें

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 जून 2020। नैनीताल जनपद के कोविद समर्पित अस्पताल सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज में बीते तीन दिनों से कोरोना के नमूनों की जांच नहीं हो पा रही थी। इस कारण यहां अल्मोड़ा जिले के 177, बागेश्वर के 64, चंपावत के 78, नैनीताल के 464, पिथौरागढ के 137 व यूएस नगर के 422 नमूने जांच के लिए प्रतीक्षारत रह गये थे, जबकि पिछले दो-तीन दिनों के नैनीताल जनपद के 137, पिथौरागढ़ के 123, यूएस नगर के 155 व अल्मोड़ा के 22 नमूने लंबित हैं। इधर नैनीताल जनपद की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. भारती राणा ने बताया कि 23 नमूने जांच के लिए दिल्ली भेजे गये हैं। वहीं इधर सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डा. सीपी भैसोड़ा ने अपनी वायरोलॉजी लैब के ठीक होने की जानकारी दी है, इसके बाद यहां फिर से कोरोना की जांच शुरू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

यह भी पढ़ें : नैनीताल जिला चिकित्सालय को मिला आईसीयू का तोहफा, नहीं जाना पड़ेगा कहीं और

-मुख्यमंत्री ने किया नैनीताल जिला चिकित्सालय के आईसीयू का शुभारंभ

बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में सीएम द्वारा किये जा रहे ऑनलाइन शुभारंभ को देखते चिकित्साधिकारी।

नवीन समाचार, नैनीताल, 5 मई 2020। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मंगलवार शाम राजधानी देहरादून से जिला मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला पुरूष चिकित्सालय में नव स्थापित आईसीयू यूनिट का ऑन लाईन शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होने कहा कि प्रदेश सरकार आम गरीब आदमी को उत्तम एवं आधुनिकतम स्वास्थ्य सुविधाऐं उपलब्ध कराने के लिए तत्पर है। बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में आम गरीब लोगों के लिए डीएम सविन बंसल ने जो सुविधाएं एवं व्यवस्थाएं की है वह प्रशंसनीय है। डीएम के प्रयासों से यहां स्थापित की गई डिजीटल एक्सरे मशीन व जनरेटर का लाभ भी निश्चित ही दूरदराज के लोगो को मिलेगा। इससे पूर्व डीएम बंसल के प्रयासों से बेतालघाट में शुरू की गई टेली मेडीसन सेवा का लाभ भी दूरस्थ व दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र के लोगों को मिल रहा है।
उन्होने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ व पर्वतीय क्षेत्रों में निवास करने वाली जनता के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान बनाने के लिए सरकार द्वारा सभी अस्पतालो में सृजित 2735 पदों के सापेक्ष 2045 चिकित्सकों की तैनाती कर दी है। इसके अलावा 159 दंत चिकित्सक भी तैनात किये गये है। साथ ही अटल आयुष्मान योजना के अंतर्गत 5 लाख तक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा के लिए प्रदेश के 180 सरकारी एवं निजी चिकित्सालयों की सूचीबद्ध किया गया है। अब तक लगभग 1.57 लाख लोग लाभ इस योजना का उठा चुके है। जिले की सीएमओ डॉ. भारती राणा ने बताया कि जिला चिकित्सालय के आईसीयू कक्ष में चार बैड के अलावा चार मल्टी पैरा मॉनीटर तथा एक-एक डिप्रीलेटर, पोरेेटबल एक्सरे मशीन, फाइवेज मशीन, इन्फ्यूजन पम्प तथा वेंटीलेटर भी स्थापित कर दिए गए है। इस मौके पर एसडीएम विनोद कुमार, पीएमएस डॉ. केएस धामी, एसीएमओ डॉ. तरूण कुमार टम्टा, डॉ. रश्मि पंत, डा. एमएस दुग्ताल, डॉ. अनुरुद्ध गंगोला, हरेंद्र कठायत तथा मदन मेहरा आदि भी मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : हाईकोर्ट के निर्देशों पर जिला चिकित्सालय में स्थापित हुआ आईसीयू वार्ड

नवीन समाचार, नैनीताल, 3 मई 2020। बीडी पाण्डेय जिला चिकित्सालय उत्तराखंड उच्च न्यायालय के निर्देशों पर आईसीयू वार्ड की स्थापना हो गई है। पीएमएस डॉ. केएस धामी ने बताया कि आईसीयू वार्ड में 4 बेड, एक-एक मॉनीटर, डीफिब्रिलेटर, बायपैक मशीन, वेंटीलेटर, पोर्टेबल एक्स-रे मशीन व इन्फ्यूजन पंप तथा सेंटल ऑक्सीजन लाइन आदि स्थापित कर लिये गये हैं। अब व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है तथा चिकित्सकों व कर्मियों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही डीएम सविन बंसल की ओर से नई 300 एमएएच की पीआर सिस्टम युक्त एक्सरे मशीन व जेनरेटर भी स्थापित कर दिये गये हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि सोमवार को डीएम सविन बंसल आईसीयू का शुभारंभ कर सकते हैं। रविवार को एसडीएम विनोद कुमार ने भी जिला चिकित्सालय पहुंचकर आईसीयू व नई मशीनों की स्थापना की तैयारियां का जायजा लिया। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने चार अप्रैल तक जिला चिकित्सालय में आईसीयू वार्ड की स्थापना करने के निर्देश दिये थे।

यह भी पढ़ें : विधायक ने चिकित्सालय को भेंट किये 100 पीपीई किट

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2020। क्षेत्रीय विधायक संजीव आर्य ने सोमवार को मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय को 88 एवं ज्योलीकोट स्थित स्वास्थ्य केंद्र को 12 पीपीई किट भेंट की। जिला चिकित्सालय के प्रमख चिकित्सा अधीक्षक ने यह पीपीई किट प्राप्त करते हुए बताया कि यह काफी अच्छी गुणवत्ता की पीपीई यानी पर्सनल प्रोटेक्टिव किट हैं। इनका इस्तेमाल कोरोना संक्रमित व्यक्ति के जांच के नमूने लेने, नमूनों को हल्द्वानी ले जाने एवं उपचार करने के दौरान योगदान देने वाले सभी कर्मियों को पहननी होती है, और केवल एक बार ही प्रयोग की जाती है। वहीं विधायक आर्य ने कहा कि यदि आगे भी पीपीई किट की आवश्यकता होती तो वह उपलब्ध कराएंगे। विधायक ने इसके उपरांत लॉक डाउन के दौरान अखंड लंगर चलाकर जरूरतमंदों को भोजन करा रहे गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा को भी आटा, चावल व तेल आदि सामग्री उपलब्ध कराई।
इस मौके पर भाजपा नगर अध्यक्ष आनंद बिष्ट, वरिष्ठ उपाध्यक्ष भूपेंद्र बिष्ट, रुचिर साह, भुवन आर्य, गोपाल रावत, विवेक साह व हरीश बिष्ट आदि भाजपा कार्यकर्ता, एसडीएम विनोद कुमाा, सीओ विजय थापा, कोतवाल अशोक कुमार सिंह तथा डा. एमएस दुग्ताल व डा. आरके वर्मा सहित अन्य चिकित्साकर्मी एवं कमला कुंजवाल सहित आशा कार्यकत्रियां मौजूद रहीं। इस दौरान चिकित्सालय परिसर में काफी भीड़भाड़ रही एवं कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पहली शर्त बताये गये सामाजिक दूरी के सिद्धांत का पालन नहीं किया गया।

जिला चिकित्सालय में शीघ्र ही आईसीयू, वेंटीलेटर एवं रूट कैनालिंग आदि की सुविधाएं मिलेंगी
नैनीताल। इस अवसर पर विधायक संजीव आर्य ने कहा कि जिला चिकित्सालय में आईसीयू की स्थापना का कार्य अंतिम चरण में है। वेंटीलेटर आ गये हैं। नई अत्याधुनिक एक्सरे मशीन भी लगाई जा रही है, वहीं पहली बार जिला चिकित्सालय को दंत चिकित्सा के लिए भी आधुनिक बनाया जा रहा है। यहां रूट कैनालिंग जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

यह भी पढ़ें : आठ लोगों के कोरोना जांच के लिए नमूने लिये, एक को आइसोलेशन व दो को क्वारन्टाइन में भेजा

नवीन समाचार, नैनीताल, 24 अप्रैल 2020। मुख्यालय में आज आठ लोगों के कोरोना की जांच के लिए नमूने लिये गये हैं। इनमें बरेली से करीब 12-14 दिन पूर्व आया एक युवक शामिल है, जिसे पहले ही होम क्वारन्टाइन में रखा गया था। इधर शुक्रवार को उसे खांसी की शिकायत होने पर बीडी पांडे जिला चिकित्सालय लाया गया। यहां स्वास्थ्य जांच के बाद उसे अस्पताल में ही आइसोलेशन में भर्ती कर लिया गया है। जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. केएस धामी ने बताया कि उसका कोरोना जांच के लिए नमूना भी लिया गया है। इसके अलावा आज सूखाताल स्थित संस्थागत क्वारन्टाइन में ऐहतियात के तौर पर रखे गये लोगों में से सात लोगों के भी सादृच्छिक आधार पर नमूने कोरोना जांच के लिए लिये गये हैं। वहीं नोएडा से आये दो लोगों को सूखाताल स्थित संस्थागत क्वारन्टाइन में ऐहतियात के तौर पर रखा गया है। इस प्रकार सूखाताल में क्वारन्टाइन में रखे गये लोगों की संख्या 14 हो गयी है।
इसके अलावा आज कोतवाली पुलिस ने एक परिवार के चार सदस्यों का एक साथ घूमने व मॉस्क न पहनने के कारण चालान किया। साथ ही कोटा, राजस्थान से लौटे तीन छात्रों को नगर में पहुंचने पर उनका बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य प्रशिक्षण कराया। यहां से उन्हें होम क्वारंटीन में भेजा गया। इस प्रकार नगर में अब होम क्वारंटाइन में रखे गये लोगों की संख्या अब 310 हो गई है।

यह भी पढ़ें : बड़ी खुशखबरी: कुमाऊं में चार और कोरोना संक्रमित हुए स्वस्थ, अब बचे सिर्फ तीन

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 अप्रैल 2020। सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज से चार और कोरोना संक्रमितों को छुट्टी दे दी गई है। इसके बाद यहां केवल तीन कोरोना संक्रमित ही उपचार के लिए बच गये हैं। मेडिकल कॉलेज के कोरोना प्रभारी आईएएस अधिकारी रोहित मीणा ने बताया कि इनमें एक रोगी रामनगर से आया एवं दो रोगी आठ को भर्ती किये गये थे। रामनगर वाले रोगी को बीती 17 अप्रैल को भर्ती किया गया है। यानी उसे अभी 6 दिन ही हुए हैं। इस तरह नैनीताल जनपद के साथ ही पूरे कुमाऊं में अब केवल तीन कोरोना संक्रमित रोगी ही बच गये हैं और धीरे-धीरे कुमाऊं मंडल कोरोना मुक्त होने की ओर बढ़ रहा है।
श्री मीणा ने बताया कि तीन रोगी कल शाम, जबकि एक को आज दो रिपोर्ट नकारात्मक आने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। अब इन्हें मोतीनगर स्थित संस्थागत क्वारन्टाइन सेंटर में 14 दिन के लिए रखा जाएगा। इधर बताया गया है कि आज जिस रोगी को अस्पताल से छुट्टी दी गई है, वह जनपद के कालाढूंगी के वार्ड नंबर 3 का निवासी है। बताया जा रहा है कि उसके कालाढुंगी निवासी दो दोस्तों की रिपोर्ट भी रिपोर्ट भी नकारात्मक आ गई है। इसलिए कालाढुंगी कस्बे में भी इससे राहत महसूस की जा रही है।

उधर, देहरादून के मेडिकल कॉलेज में कोरोना की पुष्टि होने के बाद अपनी मां के साथ ही भर्ती 9 माह के बच्चे ने सिर्फ 6 दिन में ही कोरोना को मात दे दी है। उसे लगातार दो रिपोर्ट नकारात्मक आने के बाद उसके साथ उसकी देखभाल के रखी एवं कोरोना संक्रमित की तरह ही उपचार पा रही मां के साथ अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इसे उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग एवं चिकित्सकों की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इससे इससे पूर्व दिल्ली में एक बच्चे की कोरोना से मौत हो चुकी है।

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नवीन समाचार, हल्द्वानी, 21 अप्रैल 2020। जी हां, नैनीताल जनपद के एकमात्र हॉट स्पॉट व कर्फ्यूग्रस्त हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में पिछले 14 दिनों से कोरोना का कोई नया मामला नहीं आया है। यहां सबसे आखिर आठ अप्रैल की रात्रि आठ बजे की रिपोर्ट में बनभूलपुरा निवासी जमात में शामिल हुए एक युवक और उसके संपर्क में आये युवक में कोरोना की पुष्टि हुई थी। यह जमाती 6 अप्रैल को सरेंडर करने वाले 12 जमतियों में शामिल था। 6 अप्रैल को ही दोनों युवकों को बेस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, और 8 अप्रैल को कोरोना की पुष्टि होने के बाद सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। तब से यहां कोई मामला नहीं आया। हां, रामनगर में जरूर इसके बाद 17 अप्रैल को एक 30 वर्षीय अन्य जमाती में कोरोना की पुष्टि हुई थी। इस प्रकार आज 22 अप्रैल को हल्द्वानी में कोई नया कोरोना का मरीज प्रकाश में नहीं आया है। इसे कोरोना के खिलाफ चल रही जंग में शुभ संकेत माना जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि इसके अलावा भी कोरोना से संबंधित और भी खुशखबरियां आती जा रही हैं। मंगलवार को सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज से 6 कोरोना संक्रमित रोगियों को छुट्टी दे दिये जाने के बाद अब यहां भर्ती कुल 13 मरीजों में से 7 ही भर्ती रह गये हैं। इसके साथ राज्य में कुल 46 कोरोना संक्रमितों में से 19 लोग यानी 41 फीसद रोगी स्वस्थ होकर अस्पताल से छुट्टी पा चुके हैं। उल्लेखनीय है कि कुमाऊं मंडल में अब तक नौ कोरोना रोगी नैनीताल से, चार ऊधमसिंह नगर से तथा एक अल्मोड़ा जिले के रानीखेत में मिला था। अल्मोड़ा में मिले पॉजीटिव के सारी जांचें नेगेटिव होने के बाद दो दिन पूर्व उसे छुट्टी दे दी गई थी, जबकि अब नैनीताल व ऊधमसिंहनगर जिले में मिले तीन-तीन मरीजों को भी लगातार दो जांच रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है। खास बात यह भी है डिस्चार्ज किये ये सभी रोगी 17 से 32 की उम्र के युवा हैं। बेहतर चिकित्सा के साथ ही उनके शरीर की बेहतर इम्युनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी उनके जल्द स्वस्थ होने में सहायक रही है। इसमें रुद्रपुर से तीन अप्रैल को हल्द्वानी लाए गए तीन युवा शामिल हैं। उनकी उम्र 20 से 32 साल के बीच है। यह तीनों ही हल्द्वानी के वनभूलपुरा के रहने वाले हैं। चार अप्रैल को बागजाला में क्वारंटाइन किए गए 17 व 18 साल के तीन पॉजीटिव मरीज भी कोरोना से ठीक हो गए हैं। ये अमरोहा उत्तरप्रदेश के रहने वाले हैं। यह सभी जमात के कार्यक्रम या उनके संपर्क में आने के बाद कोरोना वायरस की चपेट में आए थे।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 21 अप्रैल 2020। उत्तराखंड हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया व न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की खंडपीठ ने राज्य में पर्वतीय जिलों में स्थित कोविद समर्पित अस्पताल के रूप में घोषित सभी अस्पतालों में आईसीयू औरवेंटीलेटर की सुविधा स्थापित करने के आदेश दिये हैं। इन अस्पतालों में नैनीताल मुख्यालय के बीडी पांडे जिला चिकित्सालय तथा प्रदेश के अल्मोड़ा बागेश्वर चमोली रुद्रप्रयाग सहित पर्वतीय क्षेत्र के सभी 15 कोविद अस्पताल शामिल हैं, जिनमें आईसीयू और वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
न्यायालय ने यह आदेश हाईकोर्ट के अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली द्वारा दायर जनहित याचिका व संलग्न मामलों में मंगलवार को सुनवाई करते हुए यह आदेश दिये हैं। साथ ही राज्य सरकार से कहा है कि अगर इसमें कोई दिक्कत आती है तो वह कोर्ट के संज्ञान में लाएं। कोर्ट ने कहा है कि वेंटिलेटर स्थापित करने में और देरी अब संभव नहीं है। क्योंकि भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के मुताबिक किसी भी कोविद समर्पित अस्पताल में आईसीयू और वेंटिलेटर अत्यंत आवश्यक है। मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल को होगी।

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नवीन समाचार, हल्द्वानी, 18 अप्रैल 2020। हल्द्वानी के सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज में उपचार कराने के लिए भर्ती कोरोना पॉजिटिव मरीजों की दोबारा जांच शुरू हो गई है। कॉलेज में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की सफलता है कि पांच कोरोना पॉजिटिव मरीजों के नमूनों की दूसरी जांच में वे कोरोना निगेटिव आए हैं। उधर अल्मोड़ा जिले के एकमात्र कोरोना पॉजिटिव की जांच रिपोर्ट भी निगेटिव आने की सूचना है। बताया गया है कि इन रोगियों की दो बार और नमूने लेकर जांच कराई जाएगी तथा लगातार तीन बार निगेटिव रिपोर्ट आने पर पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद ही उन्हें कोरोना मुक्त घोषित किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि कॉलेज प्रशासन ने दो दिन पूर्व यहां भर्ती 13 में से आठ मरीजों के नमूने लेकर जांच कराई थी। शनिवार को इनमें से तीन मरीजों की दूसरी बार की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई, जबकि पांच की रिपोर्ट निगेटिव आई। उल्लेखनीय है कि कुमाऊं में सबसे पहले दो अप्रैल को ऊधमसिंह नगर में तीन और तीन अप्रैल को एक जबकि नैनीताल जिले में चार अप्रैल को एक साथ पांच कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले थे।

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नवीन समाचार, देहरादून, 11 अप्रैल 2020। उत्तराखंड में कोरोना पर एक और सकारात्मक समाचार है। प्रदेश में संक्रमित हुए 35 लोगांें में से दो और मरीजों की ठीक होने का समाचार है। बताया गया है कि इनकी दो रिपोर्टें नकारात्मक आई हैं। हालांकि नियमानुसार उन्हें एक और रिपोर्ट नकारात्मक आने के बाद कोरोना मुक्त घोषित किया जाएगा। इसके साथ प्रदेश में स्वस्थ हुए कोरोना रोगियों की संख्या पांच से बढ़कर सात हो जाएगी। इसे उत्तराखंड की स्वास्थ्य सुविधाओं की बड़ी सफलता माना जा सकता है। उल्लेखनीय है कि अब तक राज्य में एक भी कोरोना संक्रमित की मृत्यु नहीं हुई है। वहीं जो 35 लोग कोरोना संक्रमित हुए हैं, उनमें से 28 तब्लीगी जमात के हैं। यदि उन्हें संक्रमण न आया होता तो प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या सात ही होती और सात लोग स्वस्थ भी हो चुके हैं।
आज स्वस्थ हुए दो लोगों में में दून मेडिकल अस्पताल में भर्ती एक अमेरिकी नागरिक और सेलाकुई निवासी एक युवक शामिल हैं। बताया गया है कि सेलाकुई निवासी युवक को जल्द डिस्चार्ज किया जा सकता है, जबकि अमेरिकी नागरिक के बारे में अस्पताल प्रशासन ने एलआईयू को सूचना दे दी है और उनके द्वारा अमेरिकी दूतावास को सूचित किया जा रहा है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 4 अप्रैल 2020। शनिवार को नगर की जामा मस्जिद के तीन एवं नगर में पूर्व में हरदोई यूपी से कालीन बेचने के लिए आए 11 लोगों को मल्लीताल कोतवाली पुलिस स्वास्थ्य जांच के लिए बीडी पांडे जिला चिकित्सालय ले गई। यहां चिकित्सकों ने उनकी प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच की और इनमें से जामा मस्जिद के तीन लोगों के नमूने लेकर उन्हें क्वारन्टीन के लिए सूखाताल स्थित क्वारन्टीन सेंटर भेज दिया है। जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. केएस धामी ने बताया कि सूखाताल क्वारन्टीन सेंटर में अब क्वारंटीन में रखे गए लोगों की संख्या 50 हो गई है। वहीं हरदोई के कालीन बेचने वाले 11 लोगों को घर पर ही एकांतवास में रहने को कहा गया है। वे यहां अपने रिश्तेदारों के पास रह रहे हैं। वहीं नगर कोतवाल अशोक कुमार सिंह ने बताया कि जामा मस्जिद में गत दिनों आए निजामुद्दीन मरकज के जमातियों के संपर्क में आने के संदेह में जामा मस्जिद के तीन लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया।

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-पहले ही केएमवीएन के दो पर्यटक आवास गृहों एवं नैनीताल क्लब का स्वास्थ्य विभाग कर चुका है अधिग्रहण
नवीन समाचार, नैनीताल, 30 मार्च 2020। जिला मुख्यालय से कोरोना विषाणु की जांच के लिए भेजे गए सभी सात नमूने नकारात्मक आ चुके हैं। अलबत्ता पांच लोगों को अभी भी केएमवीएन के सूखाताल स्थित टीआरएच यानी पर्यटक आवास गृह में बनाये गए क्वारन्टीन वार्ड में एहतियात के तौर पर रखा गया है। उल्लेखनीय है कि दो विदेशी युवक-युवती मोतीनगर भेजे गए हैं। इधर सोमवार को बाहर से आये सात लोग जिला चिकित्सालय में आए। जिला चिकित्सालय के पीएमएस डा. धामी ने बताया कि उनमें कोरोना के कोई लक्षण नहीं दिखे, फिर भी उन्हें घर पर 14 दिन एकांतवास में रहने की सलाह दी गई है। उन्होंने अन्य लोगांे से भी अपील की है कि अपनी एवं पूरे समाज की सुरक्षा के लिए किसी के सूचना देने से पहले खुद ही अस्पताल आकर जांच करा लें व संतुष्ट हो लें।
इधर स्वास्थ्य विभाग कोरोना का प्रकोप बढ़ने व जरूरत पड़ने पर होटलों का अधिगृहण कर सकता है। विभाग पहले ही पहले ही केएमवीएन यानी कुमाऊं मंडल विकास निगम के 40 कमरों वाले सूखाताल एवं 15 कक्षों वाले तल्लीताल स्थित दो पर्यटक आवास गृहों के साथ ही 40 कक्षों वाले राज्य अतिथि गृह नैनीताल क्लब का क्वारंटीन यानी एकांतवास वार्ड के रूप में इस्तेमाल करने के लिए अधिगृहण विभाग कर चुका है। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से नैनीताल क्लब में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में होटलों के कर्मचारियों को उनके होटलों का क्वारन्टीन वार्ड के रूप में प्रयोग किये जाने की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों का प्रशिक्षण दिया गया। नगर के तीन प्रमुख होटलों-मनु महारानी, विक्रम विंटेज इन एवं शेरवानी हिल टॉप के प्रतिनिधियों, कर्मचारियों व शेफ आदि ने इस प्रशिक्षण कार्यशाला में मौजूद रहकर प्रशिक्षण प्राप्त किया, तथा अपनी ओर से ऐसी दशा में योगदान देने की हामी भी भरी।
बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. केएस धामी ने बताया कि होटल कर्मियों को होटल के फर्श, बिस्तर आदि को सोडियम हाइड्रोक्लोराइड अथवा ब्लीचिंग पावडर से पोछा लगाकर विसंक्रमित करने के साथ ही भोजन तैयार करने एवं कोरोना के संभावित रोगियों के साथ ही आपस में सामाजिक दूरी बरतने आदि के बारे में प्रशिक्षण एवं दिशा-निर्देश दिये गए। इस मौके पर डा. अनिरुद्ध गंगोला, मनु महारानी के महाप्रबंधक नरेश गुप्ता, विक्रम विंटेज के महाप्रबंधक मनप्रीत सिंह व विजय पंत सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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नवीन समाचार, देहरादून, 25 मार्च 2020। कोरोना विषाणु के दृष्टिगत उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से सुबह अच्छा समाचार आया था, वहीं अपराह्न में दुगड्डा पौड़ी से आए समाचार ने खुशी में बट्टा लगा दिया। गत 20 फरवरी से 13 मार्च तक स्पेन की यात्रा पर रहे कोटद्वार निवासी युवक के कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। उसे गत 16 मार्च को कोटद्वार के बेस चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। 21 मार्च को उसका सैंपल जांच के लिए भेजा गया था। बुधवार को मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी से आई जांच रिपोर्ट में उसके कोरोना से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है।
उधर, गत दिनों स्पेन से लौटे तीन प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों एवं एक विदेशी नागरिक में कोरोना के संक्रमण की पुष्टि हुई थी। बुधवार को बेहतर चिकित्सा एवं खानपान के बाद तीन में से एक प्रशिक्षु अधिकारी की कोरोना रिपोर्ट नकारात्मक आई। यानी उसे अब कोरोना का संक्रमण नहीं है। हालांकि अभी कहा गया है कि उसे अभी भी एकांतवास में रखा गया है, और उसकी एक-दो बार और जांच कराने के बाद ही उसे कोरोना मुक्त होने की घोषणा की जाएगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने भी अपने वीडियो संदेश में इस बात का जिक्र किया है। अलबत्ता इस मामले से उत्तराखंड ने कोरोना से एक तरह से जीतने का अनुभव भी प्राप्त कर लिया है।

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-जिला चिकित्सालय में कोरोना संभावितों सहित सीमित मरीज पहुंचे, चिकित्सकों ने बताया सुखद
नवीन समाचार, नैनीताल, 24 मार्च 2020। नैनीताल। मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में मंगलवार को पूरे दिन करीब 100 मरीज ही ओपीडी में दिखाने पहुंचे। चिकित्सालय के वरिष्ठ फिजीशियन डा. महिमन सिंह दुग्ताल ने बताया कि अन्य दिनों में करीब 600 के आसपास रोगी पहुंचते हैं। इसलिए कम संख्या में रोगियों का पहुंचना सुखद है। इससे कम लोग एक-दूसरे के संपर्क में आएंगे और कोरोना संक्रमण की संभावना नहीं रहेगी।
साथ ही उन्होंने बताया कि इस दौरान नगर के खुर्पाताल व मंगोली क्षेत्र के करीब 10 ऐसे लोग भी चिकित्सालय पहुंचे जो बाहर नौकरी करते हैं, और इन दिनों देश में कोरोना विषाणु का संक्रमण होने के कारण घर आए हैं। इनमें दुबई से लौटा, वहां एक टायर कंपनी में काम करने वाले नगर के चार्टन लॉज निवासी एक युवक भी शामिल था। यह सभी उन्हें किसी तरह का संक्रमण होने की संभावना की जांच के लिए जिला चिकित्सालय आए। उनका चिकित्सकों ने स्वास्थ्य परीक्षण किया। उनमें कोरोना के कोई भी लक्षण नहीं मिले। फिर भी उन्हें घर पर 14 दिन एकांतवास में रहने की सलाह तथा अन्य दिशा-निर्देश दिये गये।

यह भी पढ़ें : नैनीताल : चिकित्सकों ने खास अंदाज में जताया ‘जनता कर्फ्यू’ पर जनता का शुक्रिया

नवीन समाचार, नैनीताल, 22 मार्च 2020। देश की जनता जब रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘जनता कर्फ्यू’ के आह्वान पर कोरोना की वैश्विक महामारी से बचने के लिए अपने घर पर है, वहीं धरती पर ईश्वर का दूसरा नाम कहे जाने वाले चिकित्सक एवं चिकित्सा कर्मी देश भर के चिकित्सालयों में मानवता के सबसे बड़े दुश्मन बन चुके कोरोना को हराने के लिए जी-जान से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जनता प्रधानमंत्री के आह्वान पर शाम को पांच बजे पांच मिनट के लिए ताली-ताली एवं घंटे-घड़ियाल बजाकर इस कठिन समय में भी कार्य कर रहे चिकित्साकर्मियों एवं अन्य के आभार ज्ञापन करेगी, किंतु इससे पहले ही विश्व प्रसिद्ध सरोवरनगरी नैनीताल के चिकित्सकों व चिकित्सा कर्मियों ने देश भर के चिकित्सकों की ओर से नैनीताल ही नहीं देश भर के लोगों को अपने खास अंदाज में शुक्रिया कहा है। 
बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में वरिष्ठ फिजीशिन एवं चिकित्सालय के कोरोना के नोडल अधिकारी डा. महिमन सिंह दुग्ताल ने ऋतु, श्यामा, विवेक आदि चिकित्सा कर्मियों के साथ एक पोस्टर जारी किया। जिसमें लिखा था, ‘हम काम पर आपके लिए-आप घर पर हमारे लिये’। ये शब्द आभार ज्ञापन के बड़े शब्द हैं जो चिकित्सा कर्मियों को अपने कार्य पर सजग रहने की तो बड़ी प्रेरणा देते ही हैं, देश के आम जन को भी अहसास कराते हैं कि उन्होंने एक दिन अपने घर पर रहकर देश की सेवा के लिए कितना बड़ा योगदान दिया है जिससे कोरोना की महामारी से लड़ने में बड़ी मदद मिल सकती है, और देशवासियों की सामूहिकता की यह पहल सफल रहती है तो दुनिया भर के लिए भी प्रेरणादायी भी हो सकती है। डा. दुग्ताल ने कहा जनता घर पर रहकर भी चिकित्साकर्मियों की तरह कोरोना का संक्रमण देश में रोकने में बड़ा योगदान दे रही है। प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान पर जनता 14 घंटें बाहर आवागमन नहीं करती है तो कोरोना का विषाणु स्वतः निष्क्रिय हो सकता है।

यह भी पढ़ें : दावा: अल्मोड़ा में बन रही दवा से कोरोना का इलाज संभव, मिला 35 लाख से अधिक का ऑर्डर

नवीन समाचार, रानीखेत, 8 मार्च 2020। भारत में भी कोरोनावायरस की दस्तक से मचे हड़कंप के बीच जहां जहां पूरा विश्व कोरोना वायरस से बचने का इलाज ढूंढ रहा है, वहीं उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के रामनगर से सटे अल्मोड़ा जिले के मोहान स्थित इंडियन मेडिसिन फार्मा सिटी कल कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी आईएमपीसीएल में कई वर्षों से बन रही तीन दवाओं से कोरोना वायरस का शुरुआत में ही उपचार किये जाने का दावा किया गया है। दावे के अनुसार आईएमपीसीएल में बनने वाली यूनानी दवा ‘त्रियाके नजला’, ‘शर्बते उन्नाब’ और ‘हब्बे बुखार’ के इस्तेमाल से कोरोनावायरस शुरुआती दौर में ही मर जाता है। मध्य प्रदेश सरकार ने आईएमपीसीएल कंपनी से इन दवाओं के लिए बकायदा 35.50 लाख रुपये से अधिक की राशि में तीनों दवाइयों की खेप मांगी है। मध्य प्रदेश सरकार के इस ऑर्डर को इन दवाओं से कोरोना वायरस का उपचार हो पाने की करिश्माई क्षमता से ही जोड़कर देखा जा रहा है।
आईएमपीसीएल के मुख्य प्रबंधक मनजीत सिन्हा ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार से उन्हें एक पत्र मिला है, जिसमें मध्य प्रदेश सरकार ने उनसे यूनानी दवा ‘त्रियाके नजला’, ‘शर्बते उन्नाब’ और ‘हब्बे बुखार’ मांगी हैं। इन तीनों दवाइयों को आईएमपीसीएल वर्षों से बना रहा है। उनका दावा है कि यह तीनों दवाएं कोरोना वायरस की रोकथाम में बेहद कारगर साबित हो सकती है। मध्य प्रदेश के संचालनालय आयुष की सहायक संचालक डॉ. वंदना बोराना के पत्र के अनुसार इन दवाइयों की मध्य प्रदेश के 28 जिलों की सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों आदि में आपूर्ति की जाएगी तथा कारोना के संदिग्ध पीड़ित व्यक्तियों को यह दवा दी जाएगी। वहीं आईएमपीसीएल फैक्टरी के जनरल मैनेजर पनी राम आर्य ने बताया कि उनके यहां दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं यदि अन्य सरकारें भी उनसे इन दवाइयों की मांग करती हैं तो वह देने को तैयार हैं।

यह भी पढ़ें : बड़ी सफलता : उत्तराखंड में विकृत जननांग की सफल कॉस्मेटिक सर्जरी से युवती को दिलाया पूर्ण स्त्रीत्व, देश का पहला अनूठा मामला…

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नवीन समाचार, ऋषिकेश, 18 फरवरी 2020। उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मंगलवार को हरिद्वार जनपद की निवासी एक 23 वर्षीया अविवाहित युवती के विकृत जननांग की नर्व स्पेयरिंग रिडक्शन क्लिटोरोप्लास्टी सर्जरी कर उसे पूर्ण स्त्रीत्व प्रदान किया गया। इसके साथ ही एक्स ऋषिकेश जननांग की विकृति का इलाज करने वाला उत्तर भारत का पहला संस्थान बन गया है। बताया गया है कि युवती को जननांग में जन्म से ही क्लिटोरल हाइपरट्रॉफी की शारीरिक विकृति थी। इसे एम्स ऋषिकेश के लिए मेडिकल साइंस के क्षेत्र में नई बुलंदी माना जा रहा है। इसके साथ ही यहां लाइफ ट्रांसफॉर्मिंग फीमेल कॉस्मेटिक जननांग सर्जरी की सुविधा शुरू हो गई है और एम्स ऋषिकेश देश का एकमात्र ऐसा चिकित्सा संस्थान बन गया है, जिसमें यह विशेष विभाग स्थापित किया गया है। उल्लेखनीय है कि एम्स ऋषिकेश पूरी दुनिया में पहला संस्थान है, जिसने रिकंस्ट्रक्टिव और कॉस्मेटिक-प्लास्टिक गायनोकोलॉजी विभाग की शुरुआत कर कॉस्मेटिक गायनोकोलॉजी में तीन साल का पोस्ट-डॉक्टोरल एमसीएच कोर्स शुरू किया है।

यह भी पढ़ें :क्लिटोरिस यानी भगांकुर : लड़कियों के ‘लव बटन’ से जुड़ी सारी महत्त्वपूर्ण जानकारी : भगांकुर (क्लिटोरिस) महिलाओं के शरीर में पाए जाने वाला एक ख़ास अंग है। क्लिटोरिस शब्द की उत्पत्ति एक ग्रीक शब्द से हुई है जिसका अर्थ चाभी (महिलाओं के यौन सुख के खजाने को खोलने की चाभी) इसका मुख्य काम महिलाओं को ऑर्गेज्म और यौन सुख देना है।

एम्स के निदेशक पद्मश्री प्रो. रविकांत ने मंगलवार को बताया कि युवती की परेशानी से उसका पूरा परिवार परेशान था। देश के सभी बड़े चिकित्सा संस्थानों ने जवाब दे दिया था। यहां विभिन्न जांचों के बाद उसे क्लिटोरोमेगॉली अर्थात क्लिरोटरल हाइपरट्रॉफी का पता चला। युवती की जांच पुनर्निर्माण और कॉस्मेटिक-प्लास्टिक स्त्री रोग विभाग के प्रमुख डॉ. नवनीत मैगन की देखरेख में की गई। यह दुर्लभ किस्म का मामला था। उन्होंने बताया कि संस्थान के चिकित्सक डा. नवनीत मैगन और उनकी टीम ने नर्व स्पेयरिंग रिडक्शन क्लिटोरोप्लास्टी तकनीक के माध्यम से युवती का सफल उपचार कर दिखाया। डॉ. नवनीत मैगन ने बताया है कि युवती का क्लिटोरिस पुरुष लिंग की तरह था।यह सर्जरी लगभग दो घंटे तक चली। चिकित्सीय टीम उसे एक सामान्य स्त्रैण रूप और अंजाम देने में सफल रही। यह पूरी तरह से उसके जीवन को बदलने वाली सर्जरी है। अब वह एक सामान्य यौन जीवन जी सकती है। अब वह दाम्पत्य जीवन के लिए भी पूरी तरह फिट है।

यह भी पढ़ें : नैनीताल में पढ़े-उत्तराखंड के बेटे, डीयू के प्रोफेसर ने खोज निकाली पूर्व पीएम बाजपेयी व रोनाल्ड रीगन को रहे लाइलाज पार्किंसन रोग की दवाई

-अमेरिका की कंपनी से वाणिज्यिक उपयोग के लिए हुआ करार
-पूर्व दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई और अमेरिका के राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन भी लाइलाज बीमारी पार्किंसन से रहे थे पीड़ित

डा. डीएस रावत।

नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 30 जनवरी 2020। नैनीताल में पढ़े व उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद के मूल निवासी दिल्ली यूनिवर्सिटी के ‘सबसे युवा प्रोफेसर’ डा. दीवान सिंह रावत ने अब तक लाइलाज पार्किंसन बीमारी की औषधि खोज निकाली है। उनकी अमेरिकन पेटेंट प्राप्त औषधि को अमेरिका की एक कंपनी बाजार में निकालेगी, इस हेतु डा. रावत का अमेरिकी कंपनी से करार हो गया है। औषधि विज्ञान के लिए यह बहुत बड़ी खोज बताई जा रही है। उल्लेखनीय है कि देश के पूर्व दिवंगत प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई और अमेरिका के राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन भी अपने अंतिम समय में, बर्षों तक इसी लाइलाज बीमारी पार्किंसन से पीड़ित रहे थे। उम्मीद की जा रही है कि अब जल्द ही दुनिया में लाइलाज पार्किंसन की डा. रावत की खोजी हुई औषधि बाजार में आ जाएगी, और भविष्य में बाजपेयी और रीगन सरीखे सभी खास व आम लोगों सहित पूरी मानव सभ्यता को इस जानलेवा व कष्टप्रद बीमारी से मुक्ति मिल पाएगी।
डा. रावत ने ‘राष्ट्रीय सहारा’ को बताया कि 1987 में विश्व के सुप्रसिद्ध शोध जर्नल नेचर में एक शोध आलेख प्रकाशित हुआ था, जिसमें मलेरिया की दवाई क्लोरोक्वीन से पार्किंसन का उपचार संभव होने की बात कही गई थी, लेकिन क्योंकि यह बेहद कठिन कार्य था, इसिलए तब से किसी ने भी इस पर आगे कार्य नहीं किया। इधर डा. रावत को वर्ष 2012 में एक बड़ा प्रोजेक्ट मिला था, जिसके तहत उन्होंने मलेरिया के उपचार में प्रयुक्त ‘सिंथेटिक मॉलीक्यूल्स’ पर कार्य करना प्रारंभ किया। इस बीच उनका संपर्क अमेरिका के बोस्टन स्थित मैक्लीन हॉस्पिटल के प्रो. किम से संपर्क हुआ, जिनके साथ मिलकर उन्होंने अपने नये खोजे गए सिंथेटिक मॉलीक्यूल्स का प्रो. किम की मदद से जानवरों पर परीक्षण प्रारंभ किया। इस दिशा में सफलता मिलने पर वर्ष 2014 में उन्हें पार्किंसन के उपचार के लिए धनराशि देने वाली अमेरिका की एमजी फॉक्स फाउंडेशन से दो वर्ष के लिए प्रोजेक्ट मिला। इस पर 2014 में ही उन्होंने अपने खोजे सिंथेटिक मॉलीक्यूल्स के लिए प्रो. किम के साथ अमेरिकी पेटेंट हासिल कर लिया। इसके बाद इन सिंथेटिक मॉलीक्यूल्स के पशुओं पर क्लीनिकल परीक्षण प्रारंभ हुए और आखिर पिछले वर्ष यानी 2019 में क्लीनिकल परीक्षण सफल घोषित हुए। इसके बाद इधर एक अमेरिकी कंपनी ने डा. रावत के खोजे सिंथेटिक मॉलीक्यूल्स के दवा बनाने के अधिकार डा. रावत से खरीद लिए हैं, इसके बाद उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही दुनिया में लाइलाज पार्किंसन की डा. रावत की खोजी हुई औषधि बाजार में आ जाएगी।

इस लिए भी महत्वपूर्ण है डा. रावत की खोज

नैनीताल। डा. रावत ने बताया कि वैज्ञानिक कंपाउंड बनाते रहते हैं, किंतु करीब 10 हजार कंपाउंड बनाने पर एक कंपाउंड ही बाजार में आ पाता है और इस प्रक्रिया में 16 से 18 वर्ष लग जाते हैं, तथा एक दवा बनाने में करीब 450 मिलियन डॉलर का खर्च आता है। ऐसे में अनेकों वैज्ञानिक अपने पूरे सेवा काल में अपनी खोजी दवाओं को बाजार में लाने से पहले ही सेवानिवृत्त हो जाते हैं। लेकिन डा. रावत की खोज करीब सात वर्ष में और काफी कम खर्च में ही बाजार में आने जा रही है।

गांव में हल जोतने से लेकर गोबर तक डाला और आज इस मुकाम पर

नैनीताल। पहाड़ की कठिन परिस्थितियां व्यक्ति को इतना मजबूत कर देती हैं कि यहंा के लोग कुछ भी ठान लें तो उसे पूरा करके ही मानते हैं। डा. रावत उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद के ताकुला से आगे कठपुड़ियाछीना के पास दुर्गम गांव रैखोली के निवासी हैं। किसी भी आम पहाड़ी की तरह उन्होंने गांव में खेतों में हल जोतने से लेकर गोबर डालने तक हर कष्ट झेला है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव में ही हुई। नौवीं कक्षा के बाद डा. रावत नैनीताल आ गए और यहां भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय से 10वीं व 12वीं तथा आगे यहीं डीएसबी परिसर से 1993 में टॉप करते हुए एमएससी की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने लखनऊ से प्रो. डीएस भाकुनी के निर्देशन में पीएचडी की डिग्री हासिल की। इसके बावजूद उन्हें दो वर्ष उद्योगों में प्राइवेट नौकरी भी करनी पड़ी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और 1999 में अमेरिका चले गए और तीन वर्ष वहां रहकर अध्ययन आगे बढ़ाया। वापस लौटकर 2002 में मोहाली और फिर 2003 में अपनी प्रतिभा से सीधे प्रवेश कर दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाने लगे। 2010 में वे दिल्ली यूनिवर्सिटी के ‘सबसे युवा प्रोफेसर’ के रूप में भी प्रतिष्ठित हुए।

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-चिकित्सालय में वृद्धजनों के लिए अलग से 7 बेड के जिरियाट्रिक वार्ड में हीटर-ब्लोवर तथा ईसीजी व कार्डियक मॉनीटर लगे

बीडी पांडे जिला चिकित्सालय के वृद्ध जनों के वार्ड में लगा ईसीजी व कार्डियक मॉनीटर।

नवीन समाचार, नैनीताल, 23 जनवरी 2020। मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला पुरुष चिकित्सालय में अब बुजुर्ग रोगियों की बेहतर देख रेख हो सकेगी। अस्पताल प्रशासन ने जनपद के डीएम के निर्देशों पर चिकित्सालय में वृद्धजनों के लिए अलग से 7 बेड के कक्ष को जिरियाट्रिक वार्ड के रूप में बनाकर वहां हीटर व ब्लोवर लगा दिये हैं। साथ ही वार्ड में मरीजों के रक्तचाप एवं हृदय गति पर लगातार नजर रखने के लिए आईसीयू की तरह ईसीजी व कार्डियक मॉनीटर लगा दिए हैं। इसके अलावा वार्ड में मरीजों के पास घंटी भी लगाई गई है, जिससे मरीज अस्पताल के कर्मियों को जरूरत पड़ने पर तत्काल बुला सकते हैं। साथ ही वार्ड में अच्छे पर्दे भी लगाए गए हैं और आगे वार्ड में मरीजों के मनोरंजन के लिए एक एलसीडी भी लगाने की योजना है, वृद्ध मरीजों को एकाकीपन महसूस न हो। उल्लेखनीय है कि इस बारे में 19 दिसंबर 2019 को डीएम सविन बंसल ने चिकित्सालय का निरीक्षण करते हुए निर्देश दिये थे।

जिला चिकित्सालय के नये प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. केएस धामी ने बताया कि जिरियाट्रिक वार्ड के साथ ही पूरे चिकित्सालय में यथासंभव वे सभी सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है, जो एक अच्छे चिकित्सालय में उपलब्ध होती हैं। चिकित्सालय में बाहर इमरजेंसी के पास के अंदर वार्ड एवं पैथोलॉजी लैब व अन्य स्थानों पर भी जहां खुला क्षेत्र है वहां छत लगाने की योजना है, जिससे रोगी व तीमारदार तथा चिकित्सक बरसात के दौरान भी चिकित्सालय में एक जगह से दूसरी जगह जा पाएंगे। इसी कड़ी में चिकित्सालय के शौचालय में इंग्लिश शीट व बाथरूम में गीजर भी लगाएं जा रहे हैं, इनकी छत भी दुरुस्त की जा रही है।

डा. धामी ने पीएमएस का कार्यभार ग्रहण कर लिया
नैनीताल। गत दिनों स्थानांतरण होने के बाद बीडी पांडे जिला पुरुष चिकित्सालय की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक-संयुक्त निदेशक स्तर डा. तारा आर्या बिना कार्यभार हस्तांतरित किये अवकाश पर चली गई थीं। इसके बाद चिकित्सालय में इस पद का कार्यभार संभाल रहे वरिष्ठ चिकित्सक डा. केएस धामी ने बुधवार को औपचारिक तौर पर इस पद का कार्यभार संभाल लिया है। बताया कि निदेशालय स्तर से अलग से आए आदेशों के बाद कार्यभार संभाल लिया गया है।

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नवीन समाचार, लक्सर (हरिद्वार), 27 दिसंबर 2019। हरिद्वार में प्रसव के कुछ ही देर बाद नवजात शिशु की मौत हो गई। परिजन नवजात का अंतिम संस्कार कर अस्पताल लौटे ही थे कि प्रसूता की भी हालत बिगड़ने लगी। हालत नाजुक होने पर चिकित्सकों ने देर रात उसे किसी दूसरे अस्पताल ले जाने को कहा, लेकिन हरिद्वार स्थित दूसरे अस्पताल में भर्ती कराने के कुछ देर बाद प्रसूता ने भी दम तोड़ दिया। इस पर घटना से नाराज महिला के परिजनों ने शव को अस्पताल में रखकर अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह परिजनों को शांत कराया। वहीं, एसडीएम के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर दिया है, वहीं पुलिस ने चिकित्सक को हिरासत में ले लिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार लक्सर कोतवाली क्षेत्र के दाबकी कलां निवासी मुकेश पत्नी जसवीर कश्यप को 25 दिसंबर को प्रसव पीड़ा होने पर एक निकटवर्ती निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बृहस्पतिवार को मुकेश ने बेटे को जन्म दिया। लेकिन जन्म के कुछ देर बाद ही नवजात की तबीयत बिगड़ गई और उसके मुंह से खून आना शुरू हो गया। इस पर डॉक्टरों ने बच्चे को हरिद्वार किसी अस्पताल में दिखाने के लिए कहा। परिजन उसे लेकर हरिद्वार रवाना हुए, लेकिन नवजात ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। परिजन शव लेकर गांव पहुंचे और अंतिम संस्कार कर दिया। इसके बाद रात में वे अस्पताल में पहुंचे तो डॉक्टरों ने मुकेश की तबीयत ठीक बताई और उसे अस्पताल में भर्ती रखने की बात कही।
इधर शुक्रवार तड़के डॉक्टरों ने मुकेश देवी का ब्लॅड प्रेशर लगातार कम होने की बात कहकर किसी दूसरे अस्पताल में ले जाने के लिए कहा। परिजन उन्हें लेकर हरिद्वार गए और एक अस्पताल में भर्ती करा दिया। यहां उपचार के दौरान मुकेश ने भी दम तोड़ दिया। जच्चा-बच्चा की मौत से गुस्साए परिजनों ने लक्सर अस्पताल में जमकर हंगामा किया। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर उपचार में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। सूचना पर एसडीएम पूरण सिंह राणा, सीओ अविनाश वर्मा, कोतवाल वीरेंद्र सिंह नेगी, सीएचसी अधीक्षक डॉ. अनिल वर्मा मौके पर पहुंचे। पुलिस ने परिजनों को समझाकर शांत कराया और महिला के शव का पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इसी बीच एसडीएम ने स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल सील करने के निर्देश दिए। साथ ही वहां भर्ती मरीजों को सीएचसी में शिफ्ट करवाया गया। उधर जच्चा बच्चा की मौत से गुस्साए ग्रामीणों ने डॉक्टर को उन्हें सौंपे जाने की मांग करते हुए जमकर हंगामा किया। ग्रामीणों का गुस्सा देखते हुए पुलिस ने डॉक्टर को पुलिस कस्टडी में ले लिया। सीओ अविनाश वर्मा ने बताया कि डॉक्टर को पुलिस ने अपनी कस्टडी में ले लिया है। तहरीर मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 23 दिसंबर 2019। नगर का एक परिवार आज दुःख के सागर में डूबा है। कारण घर का एक नवजात चिराग जन्म लेने के कुछ देर बाद ही डूब गया है। परिवार का कहना है जिला मुख्यालय के अस्पताल की व्यवस्थागत कमियों की वजह से उन्हें यह दिन देखना पड़ा है। वह इस मुद्दे को लेकर डीएम के पास भी जा रहे हैं। अलबत्ता, चिकित्सालय प्रबंधन की ओर से बताया गया है कि बच्चा अस्पताल में पूर्णतया स्वस्थ था और अपनी मां का दूध भी पी रहा था। बच्चे को घर ले जाने के बाद कोई समस्या आई है।

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नगर के निवासी राजा सागर ने बताया कि 20 दिसंबर की सुबह 11 बजे उनकी भाभी सीमा सागर (26) पत्नी शिव प्रसाद को बीडी पांडे जिला महिला चिकित्सालय में नॉर्मल डिलीवरी से पुत्र प्राप्त हुआ। तब के बाद 21 दिसंबर को बीडी पांडे जिला महिला चिकित्सालय के पुरुष चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ ने बच्चे की जीभ देखी और दूध पीने के बारे में जानकारी ली। 22 दिसंबर रविवार को दिन में 11-12 बच्चे अस्पताल से उन्हें घर भेजा गया। घर जाने पर बच्चे को सांस लेने में दिक्कत महसूस हुई तो वे उसे वापस जिला पुरुष अस्पताल की इमरजेंसी में दिखाने को लाये। यहां रविवार को बाल रोग विशेषज्ञ न होेन के बात बतायी गई। उन्हें बाहर यह भी बताया गया कि अस्पताल में ऑक्सीजन नहीं है। इस पर वह बच्चे को दिखाने के लिए हल्द्वानी ले गए, जहां चिकित्सकों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। मामले में अस्पताल प्रबंधन किसी भी स्तर पर कमी से इंकार कर रहा है। बताया जा रहा है कि जिला महिला अस्पताल में ही ऑक्सीजन होती है, पुरुष अस्पताल में नहीं। इसलिए संभवतया उन्हें ऑक्सीजन न होने की जानकारी दी गई हो। कुल मिलाकर किन्ही भी कारणों से एक नवजात की जान चली गई है।

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-रैमजे अस्पताल के विरासत महत्व के बरसाती (रेन शेल्टर) को काटे जाने पर सीएम व डीएम से की गई है शिकायत
-चिकित्सकों के करीब 100 मीटर दूर स्थित आवासों के लिए बन रही है सड़क

रैमजे अस्पताल की काटी गई बरसाती।

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 दिसंबर 2019। सरोवरनगरी के अंग्रेजी दौर में रैमजे अस्पताल के नाम से प्रसिद्ध, 1892 में 18 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में बने विरासत महत्व के गोविंद बल्लभ पंत चिकित्सालय की बरसाती (रेन शेल्टर) यानी बारिश के दौरान सुरक्षित गुजरने के लिए अंग्रेजी दौर से बने छत युक्त मार्ग में काट-छांट की जा रही है। बताया गया है कि यहां करीब 100 मीटर दूर स्थित जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं चिकित्सकों के आवासों के लिए वाहनों का मार्ग बनाया जा रहा है। इस हेतु बरसाती का एक हिस्सा काटकर हटा दिया गया है। इस पर स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि विरासत महत्व के इस चिकित्सालय का स्वास्थ्य महकमा जनता को अपेक्षित लाभ तो नहीं दिला पा रहा है, किंतु अपने करीब 100 मीटर की पैदल दूरी पर स्थित आवासों तक वाहन पहुंचाने के लिए विरासत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस बाबत वरिष्ठ पत्रकार राजीव लोचन साह ने जनपद की सीएमओ डा. भारतीय राणा एवं डीएम सविन बंसल से शिकायत की है। श्री साह का कहना है कि नगर के रैमजे अस्पताल के अलावा डीएसबी परिसर, शेरवुड कॉलेज आदि में अंग्रेजी दौर में बरसाती बनी हुई हैं। यह नगर के भवनों की एक अलग विशिष्टता है। इनके नीचे बरसात के दौरान भी मरीज व उनके तीमारदार बिना छाता के आराम से एक से दूसरे भवन में जा सकते हैं।
पूछे जाने पर सीएमओ डा. राणा ने बताया कि चिकित्सकों के आवासों के लिए लोनिवि के द्वारा सड़क मार्ग बनाने हेतु चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के आवासों के हिस्से को हटाया जा रहा है। इस हिस्से का उपयोग काफी समय से नहीं हो रहा था, तथा यह हिस्सा जीर्ण-शीर्ण भी था। आगे बरसाती को सड़क के बराबर चौड़ा किया जाएगा। वहीं विरासत महत्व की बरसाती को हटाये जाने की इजाजत के बाबत पूछे जाने पर उन्होंने उम्मीद जताई कि कार्यदायी संस्था के द्वारा सड़क निर्माण की अनुमति के साथ इस पक्ष को भी देखा गया होगा। इस बारे में लोनिवि के अधिकारियों से बात नहीं हो पाई।

कुछ ही वर्ष पूर्व अस्पताल में हुए हैं 2.25 करोड़ रुपए के कार्य, अब जिला अस्पताल में मर्ज करने की तैयारी

रैमजे अस्पतालनैनीताल। रैमजे अस्पताल अंग्रेजी दौर से लेकर अभी एक दशक पूर्व तक रैमजे अस्पताल की मुख्यालय में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए विशिष्ट पहचान थी। जब देश-प्रदेश में निजी अस्पताल नहीं होते थे, उस दौर में इस अस्पताल में लोग बीडी पांडे जिला चिकित्सालय (पूर्व नाम क्रॉस्थवेट अस्पताल) से कुछ अधिक शुल्क वाले इस अस्पताल में उपचार कराने के लिए पूर्ववर्ती उत्तर प्रदेश के विभिन्न नगरों से भी आते थे। कुछ ही वर्ष पूर्व लगभग सवा दो करोड़ रुपए से इस अस्पताल का विरासत महत्व को बरकरार रखते हुए यानी इसके स्वरूप को छेड़े बिना जीर्णोद्धार कार्य भी हुए हैं। बताया जाता है कि इस अस्पताल का निर्माण कुमाऊं के सर्वाधिक लोकप्रिय कमिश्नर रहे हेनरी रैमजे ने आम लोगों से चंदा एकत्र करके करवाया था। इसीलिए आजादी के बाद भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत के नाम हो जाने के बावजूद अब भी लोग इसे रैमजे अस्पताल के नाम से ही जानते व पुकारते हैं। 10-10 बेड के दो महिला एवं पुरुष जनरल वार्ड एवं तीन बेड के चार प्राइवेट वार्ड वाले इस अस्पताल में कुछ समय पूर्व ही हर रोज लगभग 50 ओपीडी और 8 से 10 ऑपरेशन होते थे।

Ramsey Hospital, Nainital

लेकिन इधर चिकित्सालय में चिकित्सकों व अन्य कर्मियों की कमी एवं चिकित्सालय के बड़े हिस्से में धीरे-धीरे जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी का कार्यालय स्थापित हो जाने के बाद यहां मरीजों की संख्या भी अत्यधिक घट गर्इ्र है। इधर 15 नवंबर 2019 को इस चिकित्सालय के भविष्य पर चल रही नगर के संतोष तिवारी की जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय में जवाब दे चुकी है कि यहां रोगियों की कम संख्या को देखते हुए इसे बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में मर्ज किया जा रहा है। और इसके स्थान पर यहां सीएमओ कार्यालय एवं एक डिस्पेंसरी ही कार्य करेगी। उल्लेखनीय है कि याचिका के अनुसार रैमजे अस्पताल में सर्जन, महिला चिकित्सक, एक्स-रे मशीन टेक्नीशियन के पद दो साल से रिक्त पड़े हैं।

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-आउटसोर्स के माध्यम से भरे जाएंगे पद, जिला व बेस अस्पताल में एक सितंबर से 24 घंटे लैब चलाने के लिए लैब तकनीशियन भी होंगे नियुक्त
-हल्द्वानी के महिला अस्पताल में संकटपूर्ण गर्भवती महिलाओ के उपचार के लिए होगा उच्च निर्भरता इकाई का निर्माण

डीएम सविन बंसल

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 अगस्त 2019। डीएम सविन बंसल की अध्यक्षता वाली जिला स्वास्थ्य समिति ने चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जनपद के चिकित्सालयों में रिक्त 62 पदों मे आउटसोर्स से नियुक्ति करने की स्वीकृति दे दी है। बुधवार को टीआएच सूखाताल में आयोजित बैठक मंे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत जैम पोर्टल के माध्यम से चिकित्सा उपकरण खरीदने की भी स्वीकृति दी गई। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत हल्द्वानी के महिला बेस अस्पताल में संकटपूर्ण गर्भवती महिलाओ को उचित चिकित्सकीय उपचार के लिए हाई डेफियंेसी यूनिट यानी उच्च निर्भरता इकाई के निर्माण को भी स्वीकृति मिल गई। यह कार्य दिसम्बर तक पूर्ण करने के निर्देश दिये गये हैं। वहीं मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय तथा बेस चिकित्सालय हल्द्वानी में अतिरिक्त पैथोलोजी लैब तकनीशियन की स्वीकृति भी दी गई ताकि आगामी 1 सितंबर से दोनों चिकित्सालयों मे 12 घंटे लैब में जाचें की जा सकें।
इसके अतिरिक्त जनपद मे चिकित्सा उप केंद्रों को ओर सुद्ढ करने के लिए एक स्टाफ नर्स की तैनाती कर उन्हें हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों से जोड़ने को भी स्वीकृति दे दी गयी। डीएम बंसल ने 108 वाहनों की वाहन व फोन नंबरों की सूची चिकित्सालयों व थानों तथा सार्वजनिक स्थानों पर लगाने तथा जनपद के दूरस्थ सड़क मार्गों पर 108 वाहन तैनात करने के भी निर्देश दिये ताकि वे निर्धारित समय 20 मिनट के भीतर घटना या जरूरत स्थान पर पहुच सकें। इसके अलावा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की समीक्षा करते हुये डीएम श्री बंसल ने कार्यक्रम के सभी 15 चिकित्सा दलों को सभी विद्यालयों मे जाकर बच्चों का स्वास्थ परीक्षण करने के निर्देश दिये। बैठक मे सीएमओ डा. भारती राणा, डिप्टी सीएमओ डा. रश्मि पंत, डा.टीके टम्टा, मुख्य कोषाधिकारी अनिता आर्या,सीएमएस डा. वीके पुनेरा, डा. भागीरथी जोशी, डा. एलएस मेहता, डा. अजय शर्मा, डा. पंचपाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी अनुलेखा बिष्ट, जिला शिक्षा अधिकारी एचएल गौतम, गोपाल स्वरूप, संतोष कुमार उपाध्याय के साथ ही एनएचएम के कर्मचारी मौजूद रहे।

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शुक्रवार सुबह बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में छापेमारी करते एडीएम।

नवीन समाचार, नैनीताल, 2 अगस्त 2019। नैनीताल जनपद के डीएम सविन बंसल ने जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के प्रयास के तहत शुक्रवार को जनपद भर में प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से सुबह आठ से साढ़े आठ बजे के दौरान औचक छापेमारी करवाई। इस दौरान जिले के अस्पतालों में भगवान कहे जाने वाले 80 फीसद तक चिकित्सक एवं स्वास्थ्य कर्मी रोगियों को भगवान भरोसे छोड़ कार्य से नदारद मिले हैं। इस पर डीएम ने जिले की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. भारती राणा से स्पष्टीकरण तलब कर लिया है, वहीं बिना छुट्टी स्वीकृत कराये कार्य से अनुपस्थित रहे कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने के आदेश दिये हैं।
सबसे पहले पदमपुरी की बात करें तो सीएचसी में एसडीएम विजयनाथ शुक्ल द्वारा की गयी छापेमारी में एमओआईसी सहित 14 में से 11 एवं 15 स्थाई कर्मियों में से 11 अनुपस्थित पाये गये। एमओआईसी सीएमओ की बैठक में गये बताये गए। वहीं एसडीएम कालाढुंगी व बीडीओ कोटाबाग द्वारा पीएचसी बेलपड़ाव में की गयी छापेमारी में 27 में से 22 यानी करीब 81 फीसद कर्मी अनुपस्थित पाये गये। इसी तरह रामनगर के संयुक्त चिकित्सालय में एसडीएम रामनगर द्वारा की गयी छापेमारी में 14 स्वास्थ्य कर्मी अनुपस्थित मिले। यहां सफाई भी संतोषजनक नहीं मिली और चिकित्सक बाहरी कंपनियों की दवाइयां लिखते मिले। दवाइयों का चार्ट भी ठीक नहीं मिला। यहां तक कि मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में एडीएम द्वारा की गयी छापेमारी में 2 संविदा चिकित्सक अनुपस्थित मिले। वहीं एसडीएम कोश्यां कुटौली द्वारा सीएचची खैरना में की गयी छापेमारी यहां 8 बजे केवल एक स्वच्छकार उपस्थित मिले। आठ बजकर चार मिनट पर पहला कर्मचारी आया, और बाद में फोन करके बुलाने के बावजूद 9 बजे तक भी 3 कर्मचारी नहीं पहुंचे। चिकित्सक भी प्रार्थना पत्र देकर, किंतु बिना छुट्टी स्वीकृत कराये अनुपस्थित मिले।

यह भी पढ़ें : सरकारी फीस पर एमबीबीएस कर पहाड़ चढ़ने से इंकार करने वाले डॉक्टरों को हाईकोर्ट से ‘हाई’ झटका…

नवीन समाचार, नैनीताल, 31 जुलाई 2019। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे उत्तराखंड के लिए एक राहत भरा आदेश पारित किया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खण्डपीठ ने सरकार की ओर से दायर विशेष अपील को स्वीकारते हुए सरकार को निर्देश दिए है कि पूर्व में बांड कर राज्य के मेडिकल कॉलेजों से सरकारी कोटे से कम फीस पर एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को छः सप्ताह में नियुक्ति पत्र जारी करें। अगर वे नियुक्ति नही स्वीकारते हैं तो उनसे पूरी फीस 18 प्रतिशत ब्याज के साथ वसूल करें।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में एकलपीठ ने डॉक्टरों द्वारा एमबीबीएस करने के दौरान भरे गये बांड को निरस्त कर दिया था। सरकार ने एकलपीठ के इस आदेश को चुनौती देकर कहा था कि प्रशिक्षित चिकित्सकों ने बांड भरकर सरकारी योजना का फायदा तो लिया, लेकिन उत्तराखण्ड के दुर्गम क्षेत्रों में सेवा नही दे रहे है। इधर सुनवाई के दौरान सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता परेश त्रिपाठी ने अदालत को बताया कि सरकार ने एमबीबीएस में प्रवेश के समय प्रोस्पेक्टस में स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया था कि जो छात्र सरकारी कोटे से दाखिला ले रहे है उनको उत्तराखंड में सेवा करने के लिए पांच साल का बांड भरना होगा और उनको फीस में छूट दी जायेगी, और जो बांड नही भरना चाहते हैं वे पूरी फीस वहन करेंगे। इस पर जिन्होंने ने स्वेच्छा से तब बांड भरा गया, अब वे न तो सेवा दे रहे है न ही पूरी फीस जमा कर रहे हैं। इसके साथ ही खंडपीठ ने एकलपीठ में आदेश को निरस्त कर सरकार की विशेष अपील को निस्तारित कर दिया है।

यह भी पढ़ें : राज्य के मेडिकल कॉलेजों में फीस वृद्धि व बॉन्ड व्यवस्था समाप्त करने के शासनादेश को हाईकोर्ट में मिली चुनौती

नवीन समाचार, नैनीताल, 9 जुलाई 2019। राज्य सरकार के दून मेडिकल कालेज व सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज में फीस व बॉन्ड व्यवस्था को समाप्त करने से सम्बंधित 21 जून 2019 के शासनादेश ,को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में चुनौती मिल गयी है। याचिका पर उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति शुधांशु धुलिया की एकलपीठ ने सुनवाई करते हुए सरकार से तीन सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है।
मामले के अनुसार देहरादून निवासी प्राची भट्ट व अन्य ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा है कि सरकार ने 21 जून 2019 को शासनादेश जारी कर दून मेडीकल कालेज व सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज में साढ़े चार लाख फीस निर्धारित की है और और बॉन्ड की व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। जबकि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली मेडिकल कालेज में ऐच्छिक बॉन्ड के साथ 50 हजार रुपए फीस निर्धारित है। याचिकाकर्ताओ का कहना है कि सरकार की यह नीति उत्तराखंड के मूल निवासियो के विरुद्ध है। जबकि अन्य राज्यो के मेडिकल कालेजों में फीस बहुत कम है। सरकार ने सरकारी मेडिकल कालेजो को अपना आय का साधन मान लिया है। उनका कहना है कि फीस निर्धारण व बॉण्ड के लिए उचित नियम बनाए जाने चाहिए। मामले को सुनने के बाद कोर्ट ने सरकार से तीन सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है।

यह भी पढ़ें : तीन वर्षों से लटकी फार्मेसिस्ट के 600 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पर हाई कोर्ट ने सरकार से किया जवाब तलब

नवीन समाचार, नैनीताल 20 मार्च 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने प्रदेश में संविदा पर करीब 600 फार्मेसिस्टों की नियुक्ति में लेटलतीफी की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सरकार से 27 मार्च तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि पौड़ी गढ़वाल निवासी मनोज त्रिपाठी ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने वर्ष 2016 में संविदा पर फार्मेसिस्ट के 600 पद भरने की विज्ञप्ति जारी की थी। लेकिन तब से चयन प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, और इधर विज्ञप्ति निरस्त करने की बात कही जा रही है।

यह भी पढ़ें : महिला दिवस पर आशाओं, दाइयों व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को बड़े तोहफे का एलान

नवीन समाचार, देहरादून, 8 मार्च 2019। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शुक्रवार को आशा कार्यकत्रियों के वार्षिक पारिश्रमिक को पांच हजार रुपये से बढ़ाकर 17 हजार रुपये करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने दाई के मासिक पारिश्रमिक को भी 500 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये करने की घोषणा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को स्मार्ट फोन तथा वजन मशीन का वितरण भी किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सभी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को कार्य में तेजी लाने के उद्देश्य से स्मार्ट फोन दिये जा रहे हैं और उत्तराखण्ड उत्तर भारत का पहला राज्य है जहां सभी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को स्मार्ट फोन से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के सर्वांगीण विकास के लिए महिलाओं का सशक्त होना जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति में नारी के प्रति जो सम्मान का भाव है, उसका अनुसरण आज पश्चिमी देश भी कर रहे हैं। भारत विश्व का एकमात्र ऐसा देश है जिसे भारत माता के नाम से पुकारा जाता है।’’

यह भी पढ़ें : हाईकोर्ट के आदेश के बाद बड़े एक्शन में सरकार : सरकारी अस्पताल 24 घंटे खुलेंगे, प्राइवेट अस्पताल होंगे सील

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 फरवरी 2019। भारतीय चिकित्सा संघ यानी आईएमए के बैनर तले निजी चिकित्सालयों की हड़ताल के बाबत उत्तराखंड उच्च न्यायालय के बुधवार को आये आदेशों के बाद राज्य सरकार ने सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सकों व सहायक स्टाफ की छुट्टियों पर रोक लगा दी है। साथ ही सभी सरकारी चिकित्सालयों को 24 घंटे खोलने और वहीं दूसरी ओर एक्ट में पंजीकृत होने के बावजूद तालाबंदी में शामिल और एक्ट में पंजीकरण न कराने वाले अस्पतालों के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. ताराचंद पंत ने बताया कि सभी अस्पतालों के अधिकारियों को मरीजों को आवश्यक उपचार व सुविधाएं उपलब्ध कराने और अपरिहार्य स्थिति से निपटने के लिए 108 एंबुलेंस तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी के लिए विभाग के वरिष्ठ निदेशकों को गढ़वाल व कुमाऊं मंडल और देहरादून जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है।  उन्होंने बताया कि दून में अब तक दो अस्पतालों को सील किया जा चुका है, जबकि 66 पर नोटिस चस्पा किए गए हैं।

पूर्व समाचार : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने निजी अस्पतालों की हड़ताल पर सरकार को दिए निर्देश…

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 फरवरी 2019। निजी अस्पतालों के चिकित्सकों की पिछले छह दिनों से ‘क्लीनिक इस्टेब्लिशमेंट एक्ट’ के विरोध में चल रही हड़ताल के मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से सरकारी चिकित्सालयों में बढ़ी रोगियों की संख्या पर बाहर से अतिरिक्त चिकित्सक लाने व संविदा पर चिकित्सकों की तैनाती करने जैसे आवश्यक कदम उठाने को कहा है, तथा एक संबंध में इस संबंध में उठाये जा रहे कदमों पर रिपोर्ट मांगी है। साथ ही राज्य के क्लिीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीकृत चिकित्सालयों की सूची भी तलब की है। सरकार से यह भी पूछा है कि नियमानुसार निजी निजी चिकित्सक हड़ताल कर सकते हैं अथवा।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में हल्द्वानी निवासी मानवाधिकार कार्यकर्ता गुरविंदर सिंह चड्डा की ओर से उच्च न्यायालय में मंगलवार को जनहित याचिका दायर की है, जिस पर बुधवार को सुनवाई हुई है। जनहित याचिका में कहा गया है कि गत शुक्रवार से निजी अस्पतालों के साथ ही प्राइवेट प्रेक्टिस करने वाले चिकित्सक हड़ताल पर चल रहे हैं। इससे आम मरीजों को इलाज मिलने में दिक्कत आ रही है और सरकारी चिकित्सालयों पर अतिरिक्त दबाव आ गया है। याचिका में हड़ताल को लेकर सरकार को शीघ्र कदम उठाने के लिए निर्देश जारी करने की मांग की गई है। साथ ही याचिका में हड़ताल को अवैध बताया गया है। अदालत ने इस पर सुनवाई के लिए बुधवार की तिथि तय कर दी है।

पूर्व समाचार : हल्द्वानी के निजी अस्पताल की अमानवीयता : इलाज में रुपये खर्च होने पर मरणासन्न को उपचार की जगह घर भेजा

मृत्यु पूर्व जिला अस्पताल में भर्ती घायल रोहित।

नवीन समाचार, नैनीताल, 11 जनवरी 2019। दो दिन पूर्व मंगलवार की रात्रि नगर में मल्लीताल मुख्य डाकघर के पास 32 वर्षीय युवक रोहित तिवारी पुत्र कृष्णचन्द्र तिवारी निवासी चार्टन लॉज पर गोली मारकर जानलेवा हमला किया गया था। इस मामले में निजी चिकित्सालयों की अमानवीयता की नयी कहानी सामने आई है। रोहित के परिजनों के अनुसार रोहित का हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। दो दिन में करीब दो लाख रुपये की जमापूंजी खर्च हो गयी, लेकिन रोहित की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और उसकी हालत नाजुक बनी रही। बावजूद अस्पताल प्रबंधन के द्वारा आखिर में संभवतया उनके सारे रुपये खर्च होते जान कर कह दिया गया कि बहुत रुपये खर्च होंगे, बेहतर है घर पर ही सेवा करें। ऐसे में परिजनों को अपने मरणासन्न पुत्र को घर वापस लाना पड़ा, इसके बाद पुनः उसे सुविधाएं न होने के बावजूद मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में भर्ती कराना पड़ा है। कोतवाली पुलिस में भी अस्पतालों के ऐसे रवैये को लेकर कड़ी नाराजगी देखी गयी है।
उल्लेखनीय है कि रोहित स्मैक का जहर बेचने का काम करता था। इस कारण दो बार पुलिस की गिरफ्त में भी आ चुका था, और उस पर गोली भी इसी कारण चलाई गयी। उसे गोली मारने वाले युवकों के पक्ष में भी नगर में सोशल मीडिया में समर्थन दिख रहा है। लेकिन तस्वीर का दूसरा पक्ष यह भी है कि उसके पिता कृष्ण चंद्र तिवारी सब्जी की दुकान चलाते हैं, और परिवार की आय कुछ खास नहीं है। संभवतया इसी कारण वह अधिक रुपये कमाने के लिए नशे की जानलेवा दुनिया में भी गया हो। इधर बताया गया है कि मंगलवार मध्य रात्रि निजी अस्पताल पहुंचने से बृहस्पतिवार शाम तक यह परिवार अपनी पूरी जमा-पूंजी भी लुटा बैठा है और बावजूद नशे की काली दुनिया में गया बेटा मरणासन्न है।

पुलिस के हस्तक्षेप से जिला अस्पताल में किया गया भर्ती
नैनीताल। नगर कोतवाल बिपिन चंद्र पंत ने बताया कि परिजनों के रोहित को नाजुक स्थिति में ही घर ले आने पर वे रात्रि 10 बजे भी उसके घर गये। परिजनों को घर पर इंजेक्शन लगाने के लिए भी कोई नहीं मिल पा रहा था, और बकौल परिजन जिला चिकित्सालय प्रबंधन ने भी उपचार की सुविधाएं न होने का हवाला देकर उपचार करने से मना कर दिया था। इस पर पुलिस के हस्तक्षेप पर रोहित को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

एसएसपी की भूमिका की हो रही प्रशंसा
नैनीताल। सामान्यतया पुलिस पर आरोप लगते हैं कि वह मामलों को दर्ज करने से अधिक टालने की जुगत में रहते हैं। पिछले दिनों तो मामलों के खुलने के स्तर पर उन्हें दर्ज करने का पुलिस का एक नया तरीका भी नजर आया था ताकि अपराध होते कम-खुलते अधिक नजर आएं। किंतु इधर इस मामले में जहां कोतवाली पुलिस रोहित को गोली ही नहीं लगने की बात कह रही थी, जनपद के नवागत एसएसपी सुनील कुमार मीणा ने स्वयं मौके पर जाकर खोखा बरामद करने एवं परिजनों से मिलकर उन्हें तहरीर देने के लिए प्रेरित किया और शीघ्र ही हमलावरों को भी गिरफ्तार कर लिया, इसकी प्रशंसा की जा रही है।

हमलावर युवक 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजे
नैनीताल। शुक्रवार को कोतवाली पुलिस ने रोहित पर 315 बोर के तमंचे से गोली मारने वाले आरोपित संदीप व अंकुर को ज्युडिशिल मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया। अदालत ने दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिये। इस पर दोनों को नैनीताल जिला कारागार में दाखिल कर दिया गया।

यह भी पढ़ें : अस्पताल ने गर्भवती को भर्ती नहीं किया, बिना सहायता हुआ प्रसव, फिर भी भेजा हायर सेंटर

नवीन समाचार, रुड़की, 1 जनवरी 2018। नये वर्ष के पहले दिन से राज्य में महंगी हो रही स्वास्थ्य सुविधाओं, सरकारी अस्पतालों में पर्चियों की कीमत 21 से बढ़कर 23 रुपये होने व साथ ही स्वास्थ्य जांचें भी महंगी होने के साथ झकझोरने वाली खबर आई है। रुड़की के एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रात के समय गर्भवती महिला को भर्ती कराने पहुंचे परिजनों को नर्स ने प्रसव कराने से इनकार कर दिया। तभी अचानक हुई प्रसव पीड़ा के चलते महिला से बिना चिकित्सकीय मदद के ही बच्चे को जन्म दे दिया। इसके बावजूद स्टाफ ने महिला को भर्ती नहीं किया। रात में किसी निजी चिकित्सालय में भर्ती कराने के बाद अगले दिन परिजनों द्वारा हंगामा करने पर महिला को सामुदायिक केंद्र में भर्ती तो करा दिया, किंतु इसके बाद भी महिला की हालत गंभीर देखकर डॉक्टरों ने जच्चा-बच्चा को हायर सेंटर रेफर कर दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार रात निजामपुर गांव निवासी गर्भवती अरुणा पत्नी सत्येंद्र को उसके परिजन क्षेत्र के आशा नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसव के लिए लाए। उस वक्त कोई स्टाफ नर्स ड्यूटी पर मौजूद नहीं थी। ऐसे में गर्भवती को बेड पर लेटाकर आशा स्वास्थ्य केंद्र परिसर में रहने वाली नर्स को बुलाने चली गई। आरोप है कि नर्स ने ड्यूटी पर नहीं होने का तर्क देकर प्रसव कराने से इनकार कर दिया। इस बीच अचानक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा हो गई। और महिला ने बिना किसी चिकित्सकीय सहायता के एक बच्चे को जन्म दे दिया। इसके बाद भी नर्स ने बच्चे का प्राथमिक उपचार करने से भी मना कर दिया। मजबूरन परिजन जच्चा-बच्चा को एक निजी चिकित्सालय में ले गए। जहां रात भर दोनों को रखा, और मंगलवार सुबह परिजन एक बार फिर महिला और बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर लेकर पहुंचे, और महिला को भर्ती करने पर हंगामा किया। इसके बाद उन्हें भर्ती कर लिया। बावजूद बाद में महिला का हीमोग्लोबिन स्तर 5 से नीचे बताकर उसे उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। प्रभारी चिकित्सक डा. पीके सिंह का कहना है कि महिला चिकित्सक के छुट्टी पर होने व नर्सिंग स्टाफ की कमी के कारण काफी समय से रात में प्रसव की सुविधा नहीं दी जा रही है। संबंधित आशा को इस संबंध में जानकारी थी। शायद इसलिये वह रात के समय गर्भवती को यहां ले कर आई।

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पीड़िता को बिना एम्बुलेंस के किया रेफर, बस ड्राइवर ने भी आधे रास्ते में छोड़ा, जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग में चल रहा है महिला का इलाज
स्वास्य सेवा का बदसूरत चेहरा सामने आया, इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना से लोग हैरत में
नवीन समाचार, रुद्रप्रयाग, 4 दिसंबर 2018 । घाट ब्लॉक के घूनी गांव की एक गर्भवती महिला ने एंबुलेंस न मिलने के कारण सड़क पर ही मृत बच्चे को जन्म दे दिया। इस घटना से स्वास्य सेवाओं का बदसूरत चेहरा एक बार फिर सामने आया है।दरअसल घाट ब्लॉक के दूरस्थ घूनी गांव की नंदी देवी (32) गर्भवती थी। इसके चलते वह जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में प्रसव के लिए भर्ती थी। बताया जा रहा है कि गर्भवती महिला का अल्ट्रासाउंड कराया गया। अल्ट्रासाउंड में रिपोर्ट में बच्चे की धड़कन तेज होने की बात सामने आई। इसके साथ ही डाक्टरों ने सर्जन न होने की बात कह कर प्रसव गोपेश्वर में ही करवाने से हाथ खड़े कर दिए।

महिला के पति मोहन सिंह ने बताया कि मंगलवार को शाम चार बजे उन्हें बताया गया कि प्रसव के लिए नंदा देवी को हायर सेंटर श्रीनगर बेस अस्पताल ले जाना होगा। इसके चलते उनकी पत्नी को श्रीनगर के लिए रेफर कर दिया। उनका कहना है कि गर्भवती महिला को हायर सेंटर रेफर तो कर दिया गया किंतु एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने एंबुलेंस उपलब्ध न होने की बात कह कर बहानेबाजी की। इसके चलते गर्भवती महिला को रात गोपेश्वर में ही रखा गया और बुधवार सुबह जीएमओयूलि की बस (यूके 15 टीए-0117) से पति पत्नी श्रीनगर बेस अस्पताल को रवाना हुए। इस बीच रुद्रप्रयाग के समीप तिलणी के निकट गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ने लगी। मोहन सिंह का कहना है कि उन्होंने बस चालक से पत्नी को शौच आदि की बात कह कर बस रूकवाई। इतने भर में पत्नी को भारी दर्द होने लगा।उन्होंने इस तरह की स्थिति के चलते बस ड्राइवर से कुछ इंतजार करने की गुहार लगाई किंतु ड्राइवर ने उनकी एक न सुनी और बस को लेकर रुद्रप्रयाग की ओर तेजी से चल दिया। इसी बीच दर्द से क राहती महिला ने तिलणी में ही सड़क पर बच्चे को जन्म दे दिया, दुर्भाग्य से बच्चा मृत पैदा हुआ। हालांकि इससे पूर्व बस चालक से रुद्रप्रयाग से श्रीनगर तक के किराए को वापस करने की भी मांग की गई, लेकिन उसकी एक न सुनी गई।मोहन सिंह के अनुसार फिर 108 को रिंग किया गया। 108 सेवा भी करीब 2 किमी दूर डेढ़ घंटे विलंब से पहुंची। इस कारण प्रसूता सड़क पर ही तड़पती रही। जब एंबुलेंस पहुंची तो प्रसूता को लेकर जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग ले कर गई। प्रसूता को रुद्रप्रयाग जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, वहां उसकी हालत सामान्य बताई जा रही है। इस तरह की घटना से उत्तराखंड में एक बार फिर लचर स्वास्य सेवा जानलेवा साबित हुई है। इंसानियत को शर्मशार करने वाली इस घटना से सभी लोग दंग हैं, वैसे भी जिला चिकित्सालय गोपेश्वर से गर्भवती महिलाओं को हायर सेंटर रेफर करने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई प्रसव कालीन महिलाओं को अंतिम समय में रेफर किया जाता रहा है। इस कारण प्रसवकालीन महिलाओं के लिए जिला चिकित्सालय की यह कार्रवाई जानलेवा साबित होती रही है। इससे स्वास्य सेवा का बदसूरत चेहरा भी उभर कर सामने आ गया है। 

महिला को डंडी के सहारे पहुंचाया अस्पताल

अगस्त्यमुनि के पौड़ीखाल न्याय पंचायत के बंगोली ग्राम पंचायत का पणधारा गांव की शाकुंवरी देवी (80) को सुबह दिल का दौरा पड़ा। परिजनों की सूचना पर ग्रामीणों ने महिला को डंडी के सहारे सड़क मार्ग तक लाए, जहां से उसे श्रीनगर बेस अस्पताल पहुंचाया गया, जहां महिला का इलाज चल रहा है।जानकारी के अनुसार अगस्त्यमुनि के पौड़ीखाल न्याय पंचायत के बंगोली ग्राम पंचायत का पणधारा गांव सड़क से चार किमी दूर है। सुबह आठ बजे के करीब शाकुंवरी देवी को दिल का दौरा पड़ा। आनन-फानन में ग्रामीणों ने डंडी से उबड़-खाबड़ रास्ते से साढ़े तीन किमी पैदल चलते हुए महिला को फतेहपुर बैंड लाये, यहां से वाहन बुक कर उन्हें बेस अस्पताल श्रीनगर पहुंचाया गया। पीड़िता के पुत्र भरत सिंह रौथाण, ग्रामीण कृपाल सिंह रौथाण, पुष्कर सिंह बिष्ट आदि का कहना है कि यातायात सुविधा के अभाव में ग्रामीण आज भी मीलों पैदल नापने को मजबूर हैं। दैजीमांडा-पौड़ीखाल मोटर मार्ग निर्माण की मांग तीन दशक से की जा रही है, लेकिन 5 किमी स्वीकृत मार्ग आज तक नहीं बन पाया है। सड़क के अभाव में बीमार व गर्भवती को दंडी से अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं है।उन्होंने जनप्रतिनिधियों पर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप भी लगाया। इधर, लोक निर्माण विभाग के ईई इंद्रजीत बोस ने बताया कि दैजीमांडा-पौड़ीखाल मोटर मार्ग का 1.65 किमी निर्माण होना है, जो प्रगति पर है। शेष के लिए दोबारा वित्तीय स्वीकृति को प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।

यह भी पढ़ें : गोरखपुर हादसा: सिर्फ राजनीति नहीं, कुछ करिये भी…

गोरखपुर में मासूमों की मौत अत्यंत पीड़ादायक है। खासकर ऑक्सीजन की कमी से एक भी मासूम बच्चे की मौत निर्मम हत्या से कम नहीं है। पीड़ित माता-पिता के दुःख को समझना भी आसान नहीं है। यह घटना हमारी स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ ही चिकित्सा विज्ञान की ‘औकात’ बताने के लिये भी पर्याप्त है, जहां हम वर्षों से हर वर्ष सैकड़ों मासूमों की मौत के लिये इन्सेफलाइटिस की जानलेवा महामारी से निपटने में कमोबेश पूरी तरह अक्षम साबित हुए है। इस दिशा में पूरी संजीदगी से सोचने, लोगों को इस बीमारी से रोकथाम के लिये साफ-सफाई व एहतियात बरतने व पहले पोंगा-पंथियों, झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाकर समय बरबाद करने की जगह आखिर में नहीं बल्कि पहले ही अच्छे चिकित्सा संस्थानों में जाने के लिये जागरूक करने जैसे कदम उठाने के साथ ही अस्पतालों में व्याप्त विभिन्न खरीदों के भ्रष्टाचार पर नकेल कसने, सरकार के स्तर पर कड़ी नजर रखने तथा सरकार के साथ ही न्यायालय के स्तर पर दोषियों को ‘नजीर’ पेश करने वाली सजा देने जैसे उपायों की जरूरत है। केवल राजनीति करने, दुःख जताने, कड़ी निंदा करने से काम चलने वाला नहीं है….।

यह है बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इन्सेफलाइटिस वार्ड की सच्चाई 

आरडी मेडिकल कॉलेज के इन्सेफलाइटिस वार्ड में लगातार हो रही मौतों को लेकर दावा किया जा रहा है कि कमीशन के लिए ऑक्सीजन की सप्लाई रोकी गई थी। इस जानकारी के सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज की सच्चाई जानने के लिए कुछ डॉक्टर्स, नर्स और हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन के अफसरों से बात की। बातचीत में पता चला कि कई इक्विपमेंट्स (उपकरण) की मेड‍िकल कॉलेज में कमी है, जिसकी वजह से नाॅर्मल ऑपरेशन भी एक-आध महीने लेट होते हैं। जरूरी दवाओं की भी कमी है, जबकि रिपेयर करने के लिए रखी हुई मशीनें कमीशन के चक्कर में बन नहीं पा रही हैं।
हड्डी और सर्जरी विभाग का ऐसा है हाल…
– डिपार्टमेंट से जुड़े एक डॉक्टर ने बताया, ”यहां ड्रायर स्टरलाइजेशन मशीन की कमी है। ये मशीन ऑपरेशन थिएटर को विसंक्रमित कर देती है।”
– ”रूटीन ओटी में एक मशीन है, लेकिन वो भी खराब पड़ी है। इसी तरह सी आर्म्स मशीन होती हैं, जिससे ऑपरेशन थिएटर में उस समय इमेजेस वगैरह देखी जाती हैं।”
– ”डिपार्टमेंट में सी आर्म्स की तीन मशीनें हैं। एक नई है, जबकि 2 थोड़ी पुरानी है। उनको रिपेयर करना है, लेकिन रिपेयर करने वाले ने हाथ खड़े कर दिए हैं। उसका पैसा बकाया है।
 मरीजों से बोलना पड़ता है झूठ
– हड्डी और सर्जरी विभाग के डॉक्टर ने बताया, ”कमीशन की वजह से मशीनों को रिपेयर नहीं कराया जाता है। इस वजह से आम आदमी को परेशानी उठानी पड़ रही है।”
– ”रूटीन ओटी में एक सी आर्म्स मशीन होने की वजह से डेढ़ महीने तक ऑपरेशन लेट होते हैं। यही नहीं, हमें मरीजों को झूठ तक बोलना पड़ता है कि मशीन सही होने में समय लगेगा, जबकि एक हफ्ते में मरीज घर जा सकता है।
ऑपरेशन थिएटर में एसी और पंखे भी खराब
– डॉक्टर के मुताबिक, ”ऑपरेशन थिएटर में लगी मशीनों को सही रखने के लिए एसी की जरूरत होती है। कुछ ओटी में एसी भी खराब पड़ी है।”
– ”यहां तक कि वार्ड में लगे पंखे भी खराब हैं। जरूरी ड्रेस और थिएटर में चप्पल की जरूरत होती है, यहां वो भी नहीं है।”
निलंबित प्रिंसिपल की चलती है पैथालॉजी
– हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े एक अफसर ने बताया, ”पूर्व प्रिंसिपल राजीव मिश्रा की निजी पैथालॉजी श्रीराम पैथालॉजी के नाम से चलती है।”
– ”शहर में 3 जगह पैथालॉजी हैं, जिसमें एक मेडिकल कॉलेज के सामने, गोलघर और बेतियाहाता में हैं। अगर जांच हो तो सब सामने आ जाएगा।”
छोटी-छोटी चीजों को बाहर नर्सिंग होम में भेज दिया जाता है…
– इन्सेफलाइटिस वार्ड में तैनात एक नर्स के मुताबिक, ”यहां जरूरी दवाओं की कमी है। कुछ दवाओं को छोड़कर सब बाहर से मंगाई जाती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ब्रांडेड दवाओं पर कमीशन कम मिलता है।”
– ”छोटे-छोटे सामान जैसे इंट्राकैप वगैरह खरीदे तो मेडिकल कॉलेज जाते थे, लेकिन कुछ सामान बाहर भी बेच दिए जाते थे।”
वार्ड ब्वॉय-नर्सों के ट्रांसफर में लिया जाता था पैसा
– एक नर्स ने बताया, ”अगर हमारा एक डिपार्टमेंट से दूसरे डिपार्टमेंट में ट्रांसफर भी हुआ है तो पैसा देना पड़ता था।”
– ”यहां तक कि वार्ड ब्वॉय को भी इसी प्रॉसेस से गुजरना पड़ता था। वार्ड ब्वॉय और नर्स की भर्ती में काफी पैसा चलता था।”
डॉक्टर्स की है कमी
– एक डॉक्टर की मानें तो, ”एनेस्थीसिया के डॉक्टर्स की यहां कमी है। ये हाल तब है, जब बीआरडी मेडिकल कॉलेज पर लखनऊ के केजीएमसी से ज्यादा मरीजों का दबाव रहता है।”
– ”एक वार्ड में 5 से 6 रेजिडेंट डॉक्टर हैं, जबकि होने 15 से 17 रेजिडेंट डॉक्टर्स चाहिए।”
ऐसा है इन्सेफलाइटिस वार्ड का हाल
– वार्ड से जुड़े एक डॉक्टर ने बताया, ”बच्चों की सिंकाई के काम आने वाले वार्मर की जरूरत है। कई बार लिखकर दिया जा चुका है, लेकिन कमीशन के लिए डील रुकी हुई है।”
– ”सीएम योगी ने खरीदने के आदेश भी दे दिए हैं, लेकिन अब तक कोई कारवाई नहीं हुई है। इन्सेफलाइटिस वार्ड में ऊपर 14 बेड हैं, जबकि जरूरत ज्यादा की है। सीएम ने अपने इंस्पेक्शन में पहले भी इसे बढ़ाने का आदेश दिया था, लेकिन वह भी ठंडे बस्ते में चला गया।”
नवीन समाचार
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