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तीन वर्षों से लटकी फार्मेसिस्ट के 600 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पर हाई कोर्ट ने सरकार से किया जवाब तलब

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नवीन समाचार, नैनीताल 20 मार्च 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने प्रदेश में संविदा पर करीब 600 फार्मेसिस्टों की नियुक्ति में लेटलतीफी की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सरकार से 27 मार्च तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि पौड़ी गढ़वाल निवासी मनोज त्रिपाठी ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने वर्ष 2016 में संविदा पर फार्मेसिस्ट के 600 पद भरने की विज्ञप्ति जारी की थी। लेकिन तब से चयन प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, और इधर विज्ञप्ति निरस्त करने की बात कही जा रही है।

यह भी पढ़ें : महिला दिवस पर आशाओं, दाइयों व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को बड़े तोहफे का एलान

नवीन समाचार, देहरादून, 8 मार्च 2019। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शुक्रवार को आशा कार्यकत्रियों के वार्षिक पारिश्रमिक को पांच हजार रुपये से बढ़ाकर 17 हजार रुपये करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने दाई के मासिक पारिश्रमिक को भी 500 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये करने की घोषणा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को स्मार्ट फोन तथा वजन मशीन का वितरण भी किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सभी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को कार्य में तेजी लाने के उद्देश्य से स्मार्ट फोन दिये जा रहे हैं और उत्तराखण्ड उत्तर भारत का पहला राज्य है जहां सभी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को स्मार्ट फोन से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के सर्वांगीण विकास के लिए महिलाओं का सशक्त होना जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति में नारी के प्रति जो सम्मान का भाव है, उसका अनुसरण आज पश्चिमी देश भी कर रहे हैं। भारत विश्व का एकमात्र ऐसा देश है जिसे भारत माता के नाम से पुकारा जाता है।’’

यह भी पढ़ें : हाईकोर्ट के आदेश के बाद बड़े एक्शन में सरकार : सरकारी अस्पताल 24 घंटे खुलेंगे, प्राइवेट अस्पताल होंगे सील

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 फरवरी 2019। भारतीय चिकित्सा संघ यानी आईएमए के बैनर तले निजी चिकित्सालयों की हड़ताल के बाबत उत्तराखंड उच्च न्यायालय के बुधवार को आये आदेशों के बाद राज्य सरकार ने सरकारी अस्पतालों में तैनात चिकित्सकों व सहायक स्टाफ की छुट्टियों पर रोक लगा दी है। साथ ही सभी सरकारी चिकित्सालयों को 24 घंटे खोलने और वहीं दूसरी ओर एक्ट में पंजीकृत होने के बावजूद तालाबंदी में शामिल और एक्ट में पंजीकरण न कराने वाले अस्पतालों के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. ताराचंद पंत ने बताया कि सभी अस्पतालों के अधिकारियों को मरीजों को आवश्यक उपचार व सुविधाएं उपलब्ध कराने और अपरिहार्य स्थिति से निपटने के लिए 108 एंबुलेंस तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी के लिए विभाग के वरिष्ठ निदेशकों को गढ़वाल व कुमाऊं मंडल और देहरादून जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है।  उन्होंने बताया कि दून में अब तक दो अस्पतालों को सील किया जा चुका है, जबकि 66 पर नोटिस चस्पा किए गए हैं।

पूर्व समाचार : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने निजी अस्पतालों की हड़ताल पर सरकार को दिए निर्देश…

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 फरवरी 2019। निजी अस्पतालों के चिकित्सकों की पिछले छह दिनों से ‘क्लीनिक इस्टेब्लिशमेंट एक्ट’ के विरोध में चल रही हड़ताल के मामले में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से सरकारी चिकित्सालयों में बढ़ी रोगियों की संख्या पर बाहर से अतिरिक्त चिकित्सक लाने व संविदा पर चिकित्सकों की तैनाती करने जैसे आवश्यक कदम उठाने को कहा है, तथा एक संबंध में इस संबंध में उठाये जा रहे कदमों पर रिपोर्ट मांगी है। साथ ही राज्य के क्लिीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीकृत चिकित्सालयों की सूची भी तलब की है। सरकार से यह भी पूछा है कि नियमानुसार निजी निजी चिकित्सक हड़ताल कर सकते हैं अथवा।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में हल्द्वानी निवासी मानवाधिकार कार्यकर्ता गुरविंदर सिंह चड्डा की ओर से उच्च न्यायालय में मंगलवार को जनहित याचिका दायर की है, जिस पर बुधवार को सुनवाई हुई है। जनहित याचिका में कहा गया है कि गत शुक्रवार से निजी अस्पतालों के साथ ही प्राइवेट प्रेक्टिस करने वाले चिकित्सक हड़ताल पर चल रहे हैं। इससे आम मरीजों को इलाज मिलने में दिक्कत आ रही है और सरकारी चिकित्सालयों पर अतिरिक्त दबाव आ गया है। याचिका में हड़ताल को लेकर सरकार को शीघ्र कदम उठाने के लिए निर्देश जारी करने की मांग की गई है। साथ ही याचिका में हड़ताल को अवैध बताया गया है। अदालत ने इस पर सुनवाई के लिए बुधवार की तिथि तय कर दी है।

पूर्व समाचार : हल्द्वानी के निजी अस्पताल की अमानवीयता : इलाज में रुपये खर्च होने पर मरणासन्न को उपचार की जगह घर भेजा

मृत्यु पूर्व जिला अस्पताल में भर्ती घायल रोहित।

नवीन समाचार, नैनीताल, 11 जनवरी 2019। दो दिन पूर्व मंगलवार की रात्रि नगर में मल्लीताल मुख्य डाकघर के पास 32 वर्षीय युवक रोहित तिवारी पुत्र कृष्णचन्द्र तिवारी निवासी चार्टन लॉज पर गोली मारकर जानलेवा हमला किया गया था। इस मामले में निजी चिकित्सालयों की अमानवीयता की नयी कहानी सामने आई है। रोहित के परिजनों के अनुसार रोहित का हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। दो दिन में करीब दो लाख रुपये की जमापूंजी खर्च हो गयी, लेकिन रोहित की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और उसकी हालत नाजुक बनी रही। बावजूद अस्पताल प्रबंधन के द्वारा आखिर में संभवतया उनके सारे रुपये खर्च होते जान कर कह दिया गया कि बहुत रुपये खर्च होंगे, बेहतर है घर पर ही सेवा करें। ऐसे में परिजनों को अपने मरणासन्न पुत्र को घर वापस लाना पड़ा, इसके बाद पुनः उसे सुविधाएं न होने के बावजूद मुख्यालय स्थित बीडी पांडे जिला चिकित्सालय में भर्ती कराना पड़ा है। कोतवाली पुलिस में भी अस्पतालों के ऐसे रवैये को लेकर कड़ी नाराजगी देखी गयी है।
उल्लेखनीय है कि रोहित स्मैक का जहर बेचने का काम करता था। इस कारण दो बार पुलिस की गिरफ्त में भी आ चुका था, और उस पर गोली भी इसी कारण चलाई गयी। उसे गोली मारने वाले युवकों के पक्ष में भी नगर में सोशल मीडिया में समर्थन दिख रहा है। लेकिन तस्वीर का दूसरा पक्ष यह भी है कि उसके पिता कृष्ण चंद्र तिवारी सब्जी की दुकान चलाते हैं, और परिवार की आय कुछ खास नहीं है। संभवतया इसी कारण वह अधिक रुपये कमाने के लिए नशे की जानलेवा दुनिया में भी गया हो। इधर बताया गया है कि मंगलवार मध्य रात्रि निजी अस्पताल पहुंचने से बृहस्पतिवार शाम तक यह परिवार अपनी पूरी जमा-पूंजी भी लुटा बैठा है और बावजूद नशे की काली दुनिया में गया बेटा मरणासन्न है।

पुलिस के हस्तक्षेप से जिला अस्पताल में किया गया भर्ती
नैनीताल। नगर कोतवाल बिपिन चंद्र पंत ने बताया कि परिजनों के रोहित को नाजुक स्थिति में ही घर ले आने पर वे रात्रि 10 बजे भी उसके घर गये। परिजनों को घर पर इंजेक्शन लगाने के लिए भी कोई नहीं मिल पा रहा था, और बकौल परिजन जिला चिकित्सालय प्रबंधन ने भी उपचार की सुविधाएं न होने का हवाला देकर उपचार करने से मना कर दिया था। इस पर पुलिस के हस्तक्षेप पर रोहित को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

एसएसपी की भूमिका की हो रही प्रशंसा
नैनीताल। सामान्यतया पुलिस पर आरोप लगते हैं कि वह मामलों को दर्ज करने से अधिक टालने की जुगत में रहते हैं। पिछले दिनों तो मामलों के खुलने के स्तर पर उन्हें दर्ज करने का पुलिस का एक नया तरीका भी नजर आया था ताकि अपराध होते कम-खुलते अधिक नजर आएं। किंतु इधर इस मामले में जहां कोतवाली पुलिस रोहित को गोली ही नहीं लगने की बात कह रही थी, जनपद के नवागत एसएसपी सुनील कुमार मीणा ने स्वयं मौके पर जाकर खोखा बरामद करने एवं परिजनों से मिलकर उन्हें तहरीर देने के लिए प्रेरित किया और शीघ्र ही हमलावरों को भी गिरफ्तार कर लिया, इसकी प्रशंसा की जा रही है।

हमलावर युवक 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजे
नैनीताल। शुक्रवार को कोतवाली पुलिस ने रोहित पर 315 बोर के तमंचे से गोली मारने वाले आरोपित संदीप व अंकुर को ज्युडिशिल मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया। अदालत ने दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिये। इस पर दोनों को नैनीताल जिला कारागार में दाखिल कर दिया गया।

यह भी पढ़ें : अस्पताल ने गर्भवती को भर्ती नहीं किया, बिना सहायता हुआ प्रसव, फिर भी भेजा हायर सेंटर

नवीन समाचार, रुड़की, 1 जनवरी 2018। नये वर्ष के पहले दिन से राज्य में महंगी हो रही स्वास्थ्य सुविधाओं, सरकारी अस्पतालों में पर्चियों की कीमत 21 से बढ़कर 23 रुपये होने व साथ ही स्वास्थ्य जांचें भी महंगी होने के साथ झकझोरने वाली खबर आई है। रुड़की के एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रात के समय गर्भवती महिला को भर्ती कराने पहुंचे परिजनों को नर्स ने प्रसव कराने से इनकार कर दिया। तभी अचानक हुई प्रसव पीड़ा के चलते महिला से बिना चिकित्सकीय मदद के ही बच्चे को जन्म दे दिया। इसके बावजूद स्टाफ ने महिला को भर्ती नहीं किया। रात में किसी निजी चिकित्सालय में भर्ती कराने के बाद अगले दिन परिजनों द्वारा हंगामा करने पर महिला को सामुदायिक केंद्र में भर्ती तो करा दिया, किंतु इसके बाद भी महिला की हालत गंभीर देखकर डॉक्टरों ने जच्चा-बच्चा को हायर सेंटर रेफर कर दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार रात निजामपुर गांव निवासी गर्भवती अरुणा पत्नी सत्येंद्र को उसके परिजन क्षेत्र के आशा नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसव के लिए लाए। उस वक्त कोई स्टाफ नर्स ड्यूटी पर मौजूद नहीं थी। ऐसे में गर्भवती को बेड पर लेटाकर आशा स्वास्थ्य केंद्र परिसर में रहने वाली नर्स को बुलाने चली गई। आरोप है कि नर्स ने ड्यूटी पर नहीं होने का तर्क देकर प्रसव कराने से इनकार कर दिया। इस बीच अचानक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा हो गई। और महिला ने बिना किसी चिकित्सकीय सहायता के एक बच्चे को जन्म दे दिया। इसके बाद भी नर्स ने बच्चे का प्राथमिक उपचार करने से भी मना कर दिया। मजबूरन परिजन जच्चा-बच्चा को एक निजी चिकित्सालय में ले गए। जहां रात भर दोनों को रखा, और मंगलवार सुबह परिजन एक बार फिर महिला और बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर लेकर पहुंचे, और महिला को भर्ती करने पर हंगामा किया। इसके बाद उन्हें भर्ती कर लिया। बावजूद बाद में महिला का हीमोग्लोबिन स्तर 5 से नीचे बताकर उसे उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। प्रभारी चिकित्सक डा. पीके सिंह का कहना है कि महिला चिकित्सक के छुट्टी पर होने व नर्सिंग स्टाफ की कमी के कारण काफी समय से रात में प्रसव की सुविधा नहीं दी जा रही है। संबंधित आशा को इस संबंध में जानकारी थी। शायद इसलिये वह रात के समय गर्भवती को यहां ले कर आई।

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पीड़िता को बिना एम्बुलेंस के किया रेफर, बस ड्राइवर ने भी आधे रास्ते में छोड़ा, जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग में चल रहा है महिला का इलाज
स्वास्य सेवा का बदसूरत चेहरा सामने आया, इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना से लोग हैरत में
नवीन समाचार, रुद्रप्रयाग, 4 दिसंबर 2018 । घाट ब्लॉक के घूनी गांव की एक गर्भवती महिला ने एंबुलेंस न मिलने के कारण सड़क पर ही मृत बच्चे को जन्म दे दिया। इस घटना से स्वास्य सेवाओं का बदसूरत चेहरा एक बार फिर सामने आया है।दरअसल घाट ब्लॉक के दूरस्थ घूनी गांव की नंदी देवी (32) गर्भवती थी। इसके चलते वह जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में प्रसव के लिए भर्ती थी। बताया जा रहा है कि गर्भवती महिला का अल्ट्रासाउंड कराया गया। अल्ट्रासाउंड में रिपोर्ट में बच्चे की धड़कन तेज होने की बात सामने आई। इसके साथ ही डाक्टरों ने सर्जन न होने की बात कह कर प्रसव गोपेश्वर में ही करवाने से हाथ खड़े कर दिए।

महिला के पति मोहन सिंह ने बताया कि मंगलवार को शाम चार बजे उन्हें बताया गया कि प्रसव के लिए नंदा देवी को हायर सेंटर श्रीनगर बेस अस्पताल ले जाना होगा। इसके चलते उनकी पत्नी को श्रीनगर के लिए रेफर कर दिया। उनका कहना है कि गर्भवती महिला को हायर सेंटर रेफर तो कर दिया गया किंतु एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने एंबुलेंस उपलब्ध न होने की बात कह कर बहानेबाजी की। इसके चलते गर्भवती महिला को रात गोपेश्वर में ही रखा गया और बुधवार सुबह जीएमओयूलि की बस (यूके 15 टीए-0117) से पति पत्नी श्रीनगर बेस अस्पताल को रवाना हुए। इस बीच रुद्रप्रयाग के समीप तिलणी के निकट गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ने लगी। मोहन सिंह का कहना है कि उन्होंने बस चालक से पत्नी को शौच आदि की बात कह कर बस रूकवाई। इतने भर में पत्नी को भारी दर्द होने लगा।उन्होंने इस तरह की स्थिति के चलते बस ड्राइवर से कुछ इंतजार करने की गुहार लगाई किंतु ड्राइवर ने उनकी एक न सुनी और बस को लेकर रुद्रप्रयाग की ओर तेजी से चल दिया। इसी बीच दर्द से क राहती महिला ने तिलणी में ही सड़क पर बच्चे को जन्म दे दिया, दुर्भाग्य से बच्चा मृत पैदा हुआ। हालांकि इससे पूर्व बस चालक से रुद्रप्रयाग से श्रीनगर तक के किराए को वापस करने की भी मांग की गई, लेकिन उसकी एक न सुनी गई।मोहन सिंह के अनुसार फिर 108 को रिंग किया गया। 108 सेवा भी करीब 2 किमी दूर डेढ़ घंटे विलंब से पहुंची। इस कारण प्रसूता सड़क पर ही तड़पती रही। जब एंबुलेंस पहुंची तो प्रसूता को लेकर जिला अस्पताल रुद्रप्रयाग ले कर गई। प्रसूता को रुद्रप्रयाग जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, वहां उसकी हालत सामान्य बताई जा रही है। इस तरह की घटना से उत्तराखंड में एक बार फिर लचर स्वास्य सेवा जानलेवा साबित हुई है। इंसानियत को शर्मशार करने वाली इस घटना से सभी लोग दंग हैं, वैसे भी जिला चिकित्सालय गोपेश्वर से गर्भवती महिलाओं को हायर सेंटर रेफर करने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई प्रसव कालीन महिलाओं को अंतिम समय में रेफर किया जाता रहा है। इस कारण प्रसवकालीन महिलाओं के लिए जिला चिकित्सालय की यह कार्रवाई जानलेवा साबित होती रही है। इससे स्वास्य सेवा का बदसूरत चेहरा भी उभर कर सामने आ गया है। 

महिला को डंडी के सहारे पहुंचाया अस्पताल

अगस्त्यमुनि के पौड़ीखाल न्याय पंचायत के बंगोली ग्राम पंचायत का पणधारा गांव की शाकुंवरी देवी (80) को सुबह दिल का दौरा पड़ा। परिजनों की सूचना पर ग्रामीणों ने महिला को डंडी के सहारे सड़क मार्ग तक लाए, जहां से उसे श्रीनगर बेस अस्पताल पहुंचाया गया, जहां महिला का इलाज चल रहा है।जानकारी के अनुसार अगस्त्यमुनि के पौड़ीखाल न्याय पंचायत के बंगोली ग्राम पंचायत का पणधारा गांव सड़क से चार किमी दूर है। सुबह आठ बजे के करीब शाकुंवरी देवी को दिल का दौरा पड़ा। आनन-फानन में ग्रामीणों ने डंडी से उबड़-खाबड़ रास्ते से साढ़े तीन किमी पैदल चलते हुए महिला को फतेहपुर बैंड लाये, यहां से वाहन बुक कर उन्हें बेस अस्पताल श्रीनगर पहुंचाया गया। पीड़िता के पुत्र भरत सिंह रौथाण, ग्रामीण कृपाल सिंह रौथाण, पुष्कर सिंह बिष्ट आदि का कहना है कि यातायात सुविधा के अभाव में ग्रामीण आज भी मीलों पैदल नापने को मजबूर हैं। दैजीमांडा-पौड़ीखाल मोटर मार्ग निर्माण की मांग तीन दशक से की जा रही है, लेकिन 5 किमी स्वीकृत मार्ग आज तक नहीं बन पाया है। सड़क के अभाव में बीमार व गर्भवती को दंडी से अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं है।उन्होंने जनप्रतिनिधियों पर क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप भी लगाया। इधर, लोक निर्माण विभाग के ईई इंद्रजीत बोस ने बताया कि दैजीमांडा-पौड़ीखाल मोटर मार्ग का 1.65 किमी निर्माण होना है, जो प्रगति पर है। शेष के लिए दोबारा वित्तीय स्वीकृति को प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।

यह भी पढ़ें : गोरखपुर हादसा: सिर्फ राजनीति नहीं, कुछ करिये भी…

गोरखपुर में मासूमों की मौत अत्यंत पीड़ादायक है। खासकर ऑक्सीजन की कमी से एक भी मासूम बच्चे की मौत निर्मम हत्या से कम नहीं है। पीड़ित माता-पिता के दुःख को समझना भी आसान नहीं है। यह घटना हमारी स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ ही चिकित्सा विज्ञान की ‘औकात’ बताने के लिये भी पर्याप्त है, जहां हम वर्षों से हर वर्ष सैकड़ों मासूमों की मौत के लिये इन्सेफलाइटिस की जानलेवा महामारी से निपटने में कमोबेश पूरी तरह अक्षम साबित हुए है। इस दिशा में पूरी संजीदगी से सोचने, लोगों को इस बीमारी से रोकथाम के लिये साफ-सफाई व एहतियात बरतने व पहले पोंगा-पंथियों, झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाकर समय बरबाद करने की जगह आखिर में नहीं बल्कि पहले ही अच्छे चिकित्सा संस्थानों में जाने के लिये जागरूक करने जैसे कदम उठाने के साथ ही अस्पतालों में व्याप्त विभिन्न खरीदों के भ्रष्टाचार पर नकेल कसने, सरकार के स्तर पर कड़ी नजर रखने तथा सरकार के साथ ही न्यायालय के स्तर पर दोषियों को ‘नजीर’ पेश करने वाली सजा देने जैसे उपायों की जरूरत है। केवल राजनीति करने, दुःख जताने, कड़ी निंदा करने से काम चलने वाला नहीं है….।

यह है बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इन्सेफलाइटिस वार्ड की सच्चाई 

आरडी मेडिकल कॉलेज के इन्सेफलाइटिस वार्ड में लगातार हो रही मौतों को लेकर दावा किया जा रहा है कि कमीशन के लिए ऑक्सीजन की सप्लाई रोकी गई थी। इस जानकारी के सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज की सच्चाई जानने के लिए कुछ डॉक्टर्स, नर्स और हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन के अफसरों से बात की। बातचीत में पता चला कि कई इक्विपमेंट्स (उपकरण) की मेड‍िकल कॉलेज में कमी है, जिसकी वजह से नाॅर्मल ऑपरेशन भी एक-आध महीने लेट होते हैं। जरूरी दवाओं की भी कमी है, जबकि रिपेयर करने के लिए रखी हुई मशीनें कमीशन के चक्कर में बन नहीं पा रही हैं।
हड्डी और सर्जरी विभाग का ऐसा है हाल…
– डिपार्टमेंट से जुड़े एक डॉक्टर ने बताया, ”यहां ड्रायर स्टरलाइजेशन मशीन की कमी है। ये मशीन ऑपरेशन थिएटर को विसंक्रमित कर देती है।”
– ”रूटीन ओटी में एक मशीन है, लेकिन वो भी खराब पड़ी है। इसी तरह सी आर्म्स मशीन होती हैं, जिससे ऑपरेशन थिएटर में उस समय इमेजेस वगैरह देखी जाती हैं।”
– ”डिपार्टमेंट में सी आर्म्स की तीन मशीनें हैं। एक नई है, जबकि 2 थोड़ी पुरानी है। उनको रिपेयर करना है, लेकिन रिपेयर करने वाले ने हाथ खड़े कर दिए हैं। उसका पैसा बकाया है।
 मरीजों से बोलना पड़ता है झूठ
– हड्डी और सर्जरी विभाग के डॉक्टर ने बताया, ”कमीशन की वजह से मशीनों को रिपेयर नहीं कराया जाता है। इस वजह से आम आदमी को परेशानी उठानी पड़ रही है।”
– ”रूटीन ओटी में एक सी आर्म्स मशीन होने की वजह से डेढ़ महीने तक ऑपरेशन लेट होते हैं। यही नहीं, हमें मरीजों को झूठ तक बोलना पड़ता है कि मशीन सही होने में समय लगेगा, जबकि एक हफ्ते में मरीज घर जा सकता है।
ऑपरेशन थिएटर में एसी और पंखे भी खराब
– डॉक्टर के मुताबिक, ”ऑपरेशन थिएटर में लगी मशीनों को सही रखने के लिए एसी की जरूरत होती है। कुछ ओटी में एसी भी खराब पड़ी है।”
– ”यहां तक कि वार्ड में लगे पंखे भी खराब हैं। जरूरी ड्रेस और थिएटर में चप्पल की जरूरत होती है, यहां वो भी नहीं है।”
निलंबित प्रिंसिपल की चलती है पैथालॉजी
– हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े एक अफसर ने बताया, ”पूर्व प्रिंसिपल राजीव मिश्रा की निजी पैथालॉजी श्रीराम पैथालॉजी के नाम से चलती है।”
– ”शहर में 3 जगह पैथालॉजी हैं, जिसमें एक मेडिकल कॉलेज के सामने, गोलघर और बेतियाहाता में हैं। अगर जांच हो तो सब सामने आ जाएगा।”
छोटी-छोटी चीजों को बाहर नर्सिंग होम में भेज दिया जाता है…
– इन्सेफलाइटिस वार्ड में तैनात एक नर्स के मुताबिक, ”यहां जरूरी दवाओं की कमी है। कुछ दवाओं को छोड़कर सब बाहर से मंगाई जाती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ब्रांडेड दवाओं पर कमीशन कम मिलता है।”
– ”छोटे-छोटे सामान जैसे इंट्राकैप वगैरह खरीदे तो मेडिकल कॉलेज जाते थे, लेकिन कुछ सामान बाहर भी बेच दिए जाते थे।”
वार्ड ब्वॉय-नर्सों के ट्रांसफर में लिया जाता था पैसा
– एक नर्स ने बताया, ”अगर हमारा एक डिपार्टमेंट से दूसरे डिपार्टमेंट में ट्रांसफर भी हुआ है तो पैसा देना पड़ता था।”
– ”यहां तक कि वार्ड ब्वॉय को भी इसी प्रॉसेस से गुजरना पड़ता था। वार्ड ब्वॉय और नर्स की भर्ती में काफी पैसा चलता था।”
डॉक्टर्स की है कमी
– एक डॉक्टर की मानें तो, ”एनेस्थीसिया के डॉक्टर्स की यहां कमी है। ये हाल तब है, जब बीआरडी मेडिकल कॉलेज पर लखनऊ के केजीएमसी से ज्यादा मरीजों का दबाव रहता है।”
– ”एक वार्ड में 5 से 6 रेजिडेंट डॉक्टर हैं, जबकि होने 15 से 17 रेजिडेंट डॉक्टर्स चाहिए।”
ऐसा है इन्सेफलाइटिस वार्ड का हाल
– वार्ड से जुड़े एक डॉक्टर ने बताया, ”बच्चों की सिंकाई के काम आने वाले वार्मर की जरूरत है। कई बार लिखकर दिया जा चुका है, लेकिन कमीशन के लिए डील रुकी हुई है।”
– ”सीएम योगी ने खरीदने के आदेश भी दे दिए हैं, लेकिन अब तक कोई कारवाई नहीं हुई है। इन्सेफलाइटिस वार्ड में ऊपर 14 बेड हैं, जबकि जरूरत ज्यादा की है। सीएम ने अपने इंस्पेक्शन में पहले भी इसे बढ़ाने का आदेश दिया था, लेकिन वह भी ठंडे बस्ते में चला गया।”
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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….।मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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