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उत्तराखंड उच्च न्यायालय को मिले तीन नये न्यायाधीश-धानिक, खुल्बे व मैठाणी

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-संख्या हुई नौ, केवल दो पद ही अब रिक्त

सोमवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के नये न्यायाधीश एनएस धानिक, आरसी खुल्बे एवं रवींद्र मैठाणी को शपथ दिलाते मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन।

नैनीताल, 3 दिसंबर 2018। सुप्रीम कोर्ट की कोलेजियम की संस्तुति एवं केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय एवं देश के राष्ट्रपति की ओर से जारी नियुक्त आदेश के बाद उत्तराखंड उच्च न्यायालय को तीन नये न्यायाधीश मिल गये हैं। सोमवार को मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन ने न्यायमूर्ति नारायण सिंह धानिक, न्यायमूर्ति आरसी खुल्वे व न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी उत्तराखंड उच्च न्यायालय के पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के 11 पदों के सापेक्ष न्यायाधीशों की संख्या 9 हो गयी है।
इससे पूर्व शपथ ग्रहण समारोह में रजिस्ट्रार जनरल प्रदीप पंत ने मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट में मौजूद न्यायिक अधिकारियों, हाई कोर्ट के अधिवक्ताओं एवं नव नियुक्त न्यायाधीशों के पारिवारिक सदस्यों की मौजूदगी में राष्ट्रपति की ओर से जारी अधिसूचना पढ़ी। इसके उपरांत मुख्य न्यायाधीश श्री रंगनाथन ने न्यायमूर्ति धानिक, खुल्बे एवं मैठाणी को वरिष्ठता के क्रम में शपथ दिलाई। बाद में तीनों नये न्यायाधीशगणों ने अपनी अदालतों में बैठकर न्यायिक कार्यों की सुनवाई भी प्रारंभ कर दी।
उल्लेखनीय है कि बीते माह 31 अक्तूबर को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई तथा न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर व न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ की कोलेजियम ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की 29 मई 2018 को की संस्तुति को स्वीकार करते हुए तीनों को उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाने की संस्तुति कर दी थी। गौरतलब है कि उच्च न्यायालय में नौ नियमित एवं दो तदर्थ न्यायाधीशों के पद हैं। यह तीनों नियुक्तियां होने के बाद उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या स्वीकृत 9 पदों के सापेक्ष पूरी हो गयी है। तथा न्यायिक सेवा एवं अधिवक्ताओं से प्रोन्नति के आधार पर भरे जाने वाले दो पद ही शेष रह गये हैं। शपथ ग्रहण समारोह में न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया, आलोक सिंह, लोकपाल सिंह व शरद शर्मा, सालसा के सदस्य सचिव प्रशान्त जोशी, जिला एवं सत्र न्यायाधीश नैनीताल नरेंद्र दत्त, सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश पीसी पंत, उत्तराखंड उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जेसीएस रावत, इरशाद हुसैन, बीएस वर्मा व यूसी ध्यानी, रजिस्ट्रार अनुज संगल, महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर, शासकीय अधिवक्ता जीएस संधु, हाई कोर्ट बार के अध्यक्ष ललित बेलवाल, सचिव नरेंद्र बाली, भुवनेश जोशी, चंद्रशेखर जोशी, वरिष्ठ अधिवक्ता डा. महेन्द्र पाल, अवतार सिंह रावत, एमसी पांडे, डीके शर्मा के अलावा आईजी पूरन सिंह रावत, डीएम विनोद कुमार सुमन, एसएसपी जन्मजेय खंडूरी, अधिवक्ता सुमित बजाज, पंकज कपिल, गौरव पांडे, सुहेल सिद्दीकी, कासिफ जाफरी सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

नवनियुक्त न्यायाधीशों के परिजन दिखे खुश

सोमवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में नये न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद नये न्यायाधीशों के परिजन।

नैनीताल। शपथ ग्रहण समारोह में नवनियुक्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति एनएस धानिक के पिता दौलत सिंह धानिक, पत्नी जानकी धानिक, विवाहित पुत्रियां रजनी, भावना व हेमा, पुत्र हर्षवर्धन के साथ ही तीन बहनें, न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की पत्नी शोभा खुल्बे, पुत्री निर्मला पुत्र नमन खुल्बे व भानजे नवीन पंत सहित अन्य परिजन तथा न्यायाधीश रवींद्र मैठाणी की पत्नी निर्मला मैठाणी, बड़े भाई कैलाश मैठाणी व भाभी सरोजनी मैठाणी आदि भी मौजूद रहे। सभी ने इस मौके पर अत्यंत खुशी भी जताई।

न्यायमूर्ति धानिक ने बताया गरीबों तक जल्द न्याय पहुंचाने को प्राथमिकता

नैनीताल। न्यायमूर्ति एनएस धानिक ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद कहा कि उनकी प्राथमिकता गरीब से गरीब व्यक्तियों को जल्दी न्याय पहुंचाने की है। इस संबंध में मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व में सब तक न्याय पहुंचाने के लिए कार्य हो भी रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि परिश्रम से कार्य करने पर निश्चित रूप से मंजिल मिलती है।

पूर्व समाचार : धानिक, खुल्बे और मैठाणी उत्तराखंड हाईकोर्ट के जज नियुक्त, जजों के भर जाएंगे पूरे पद

-सर्वोच्च न्यायालय की कोलेजियम की संस्तुति के बाद केंद्र सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय से अधिसूचना जारी

-कोलेजियम ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की संस्तुति को स्वीकार करते हुए तीनों को उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाने की की संस्तुति
नवीन जोशी, नैनीताल, 30 नवंबर 2018। नैनीताल के जिला एवं सत्र न्यायाधीय रहे नारायण सिंह धानिक सहित प्रदेश के दो अन्य न्यायिक अधिकारी सर्वोच्च न्यायालय के सेक्रेटरी जनरल रवींद्र मैठाणी और रमेश चंद्र खुल्बे शीघ्र उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के पद पर नियुक्त हो गये हैं। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंचालय की ओर से संयुक्त सचिव राजेंद्र कश्यप की ओर से शुक्रवार को देश के राष्ट्रपति की ओर से उनकी नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी गयी है। उनका कार्यकाल उनके द्वारा कार्यभार ग्रहण करने के दिन से मान्य होगा। इन तीन नियुक्तियों के बाद उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के सभी पद भर जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व बीते माह 31 अक्तूबर को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई तथा न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर व न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ की कोलेजियम ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की 29 मई 2018 को की संस्तुति को स्वीकार करते हुए तीनों को उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाने की संस्तुति कर दी थी। गौरतलब है कि उच्च न्यायालय में नौ नियमित एवं दो तदर्थ न्यायाधीशों के पद हैं। यह तीनों नियुक्तियां होने के बाद उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या स्वीकृत 9 पदों के सापेक्ष पूरी हो जाएगी, तथा दो तदर्थ पद ही शेष रह जाएंगे।

राष्ट्रीय सहारा, 4 नवंबर 2018, पेज-1

गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय की कोलेजियम द्वारा की गयी संस्तुति में बताया गया है कि उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की संस्तुति को देखने के साथ ही तीनों न्यायिक अधिकारियों को बुलाकर उनसे सभी संबंधित दृष्टिकोणों से संवाद भी किया गया। साथ ही यह भी कहा गया है कि उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश की संस्तुति के विरुद्ध एवं कुछ वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों द्वारा उनके नामों की संस्तुति नहीं किये जाने की शिकायतों पर भी कोलेजियम ने गौर किया, लेकिन उच्च न्यायालय द्वारा संस्तुत किये गये तीनों नामों में कोई कमी नहीं पायी गयी, और तीनों को उत्तराखंड उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाने की संस्तुति कर दी गयी है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व सर्वोच्च न्यायालय की कोलेजियम एक दिन पूर्व तक उत्तराखंड उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश रहे न्यायमूर्ति राजीव शर्मा का हरियाणा एवं पंजाब उच्च न्यायालय को स्थानांतरण किये जाने की संस्तुति भी कर चुकी है। गौरतलब है कि उच्च न्यायालय में नौ नियमित एवं दो तदर्थ न्यायाधीशों के पद हैं। यह तीनों नियुक्तियां होने एवं न्यायमूर्ति शर्मा के जाने के बाद भी उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या स्वीकृत 9 पदों के सापेक्ष पूरी हो जाएगी, तथा दो तदर्थ पद ही शेष रह जाएंगे।

न्यायमूर्ति राजीव शर्मा ने जाते हुए कहा, ‘नैनीताल वापस भी आ सकता हूं’, बढ़ा गये कुछ लोगों की धड़कनें ?

सोमवार को स्थानांतरण पर न्यायमूर्ति राजीव शर्मा को नैनीताल का स्मृति चिन्ह भेंट करते हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ललित बेलवाल।

नैनीताल, 12 नवंबर 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश रहे न्यायमूर्ति राजीव शर्मा को सोमवार को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में स्थानांतरण होने पर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में विदाई एवं उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अदालत में आदर के तौर पर ‘फुल कोर्ट रिफरेंस’ दिया गया। इस दौरान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में अपनी बात की शुरुआत करते हुए ही यह कहकर चौंका दिया कि वह नैनीताल वापस भी आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि हिमांचल प्रदेश के कसौली में पढ़ाई और नैनीताल उच्च न्यायालय में सेवा के दौरान के पल उनके जीवन के ‘स्वर्णिम पल’ हैं। आज विदाई के दिन रोज की तरह किलबरी रोड पर सैर का आनंद लेने से वंचित न रह जाएं, इसलिए वे कल रात भी सैर पर चले गये थे, और रात्रि साढ़े 10 बजे लौटे। उल्लेखनीय है सुबह की किलबरी रोड पर गत वर्ष नैनीताल मानसून मैराथन के दौरान एक साइकिलिस्ट के दुर्घटनाग्रस्त होने पर वे अपनी गाड़ी से उसे जिला अस्पताल ले कर आये थे। माना जा रहा है कि न्यायमूर्ति शर्मा के वापस आने की बात से उन लोगों की धड़कनें जरूर बढ़ेंगी जो उनके कड़े आदेशों से परेशान थे। अलबत्ता शर्मा को ‘डार्लिंग ऑफ द कोर्ट’ कहने वाले हाईकोर्ट बार सहित अधिकांश लोग इस गरीब-बेसहारों के मसीहा के जाने से दुःखी है। उल्लेखनीय है कि स्थानीय लोक सभा सांसद भगत सिंह कोश्यारी सहित कई लोग उनकी ‘अति सक्रियता’ से खासे परेशान भी थे, और केंद्रीय कानून मंत्री तक पहुंच गये थे।
उन्होंने कहा कि नैनीताल बेहद सुंदर नगर है। यहां वे जो भी कर पाये, उसमें अधिवक्ताओं की भी बड़ी भूमिका है, जिनसे उनसे इस हेतु विचार मिलते थे। उन्होंने इस दौरान अधिवक्ताओं के अपनी शैली में जवाब भी दिये, और पूछे जाने पर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को 10 में से 20 अंक देने की बात कही। नये अधिवक्ताओं को उन्होंने आगे बढ़ने के लिए अधिक से अधिक पढ़ने, मेहनत करने, अनुशासन एवं वरिष्ठों का आदर करने एवं नये विचार लाने का मंत्र दिया। कार्यक्रम के संयोजक हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ललित बेलवाल ने उन्हें अधिवक्ताओं की ओर से पुष्पगुच्छ एवं नैनीताल का चित्र भेंट किया, और शुभकामनाएं दीं। उधर फुल कोर्ट रिफरेंस में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन की उपस्थिति में उन्हें हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ललित बेलवाल एवं महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर सहित साथी न्यायाधीश रहे न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया, न्यायमूर्ति आलोक सिंह, न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह, न्यायमूर्ति मनोज तिवारी व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा आदि ने शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर बार एसोसिएशन के महासचिव नरेंद्र बाली, गौरा देवी देव, प्रेम सिंह सौन, भुवनेश जोशी, एमसी कांडपाल, देवेश, कौशल साह जगाती, विवेक शुक्ला, पुष्पा जोशी, राजेश जोशी व सुरेश दुम्का सहित अनेक अधिवक्ता उपस्थित रहे।

यह भी पढ़ें : पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के लिए स्थानांतरित हो सकते हैं न्यायमूर्ति शर्मा

-सर्वोच्च न्यायालय की कोलेजियम ने शुक्रवार को उनके प्रत्यावेदन के आधार पर की संस्तुति 

नैनीताल, 2 नवंबर 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के शुक्रवार पूर्वाह्न तक कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे न्यायमूर्ति राजीव शर्मा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के लिए स्थानांतरित किये जा सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर, न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ, न्यायमूर्ति एके सीकरी व न्यायमूर्ति एसए बोब्डे की कोलेजियम ने शुक्रवार को उनके एक नवंबर को दिये स्वयं को उनके पैतृक हिमांचल प्रदेश, पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय को स्थानांतरित किये जाने के प्रत्यावेदन के आधार पर पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किये जाने की संस्तुति कर दी है। बताया गया है कि गत 29 अक्तूबर को कोलेजियम ने बेहतर प्रशासन के लिए उनका स्थानांतरण उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद उच्च न्यायालय करने की संस्तुति की थी, जिसे न्यायमूर्ति शर्मा के प्रत्यावेदन के उपरांत आज परिवर्तित कर दिया गया है।

पूर्व समाचार : उत्तराखंड उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बने न्यायमूर्ति राजीव शर्मा

  • 35 देशों की यात्रा भी कर चुके हैं उत्तराखंड हाईकोर्ट के नए कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शर्मा
  • 26 सितंबर 2016 से उत्तराखंड हाईकोर्ट में तैनात एवं वरिष्ठतम न्यायाधीश हैं न्यायमूर्ति शर्मा

नैनीताल, 6 अगस्त 2018। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा उत्तराखंड उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश होंगे। सोमवार 6 अगस्त को देश के राष्ट्रपति की ओर से उनकी नियुक्ति का पत्र भारत सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजिंदर कश्यप की ओर से जारी हो गया है। न्यायमूर्ति शर्मा उत्तराखंड उच्च न्यायालय में 26 सितंबर 2016 से कार्यरत एवं वरिष्ठतम न्यायाधीश हैं। खास बात यह भी है कि उनकी नियुक्ति अब तक इस पद की जिम्मेदारी संभाल रहे न्यायमूर्ति केएम जोसेफ के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के बाद कार्यभार त्यागने की तिथि से मानी जाएगी, जोकि रविवार को ही कार्यभार छोड़कर दिल्ली रवाना हो गए हैं।
उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति राजीव शर्मा (जन्म 8 अक्टूबर 1958) मूलतः हिमांचल प्रदेश के निवासी हैं। उन्होंने अपनी एलएलबी की डिग्री हिमांचल प्रदेश विश्वविद्यालय से हासिल की, और 1982 में अधिवक्ता के रूप में नामांकित हुए। आगे वे 2002 में वरिष्ठ अधिवक्ता बनेे उन्होंने अधिवक्ता के रूप में प्रारंभिक प्रेक्टिस संवैधानिक कानून, प्रशासनिक कानून, सेवा संबंधित मामलों एवं पर्यावरणीय कानूनों के मामलों में विशेषज्ञता के साथ हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय से शुरू की। इस दौरान वे अमेरिका, चीन, इजिप्ट, श्रीलंका, म्यामार, थाइलेंड, वियतनाम, दुबई, न्यूजीलेंड, यूनाइटेड किंगडम, इटली, स्विटजरलेंड, बेल्जियम, जर्मनी, फ्रांस, डेनमार्क, स्वीडन, नॉर्वे, फिनलेंड तथा रूस सहित 35 देशों की यात्रा भी कर चुके हैं। वे 3 अप्रैल 2007 को हिमांचल प्रदेश हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 31 मार्च 2013 को नियमित हुए। 26 सितंबर 2016 को वे उत्तराखंड उच्च न्यायालय को स्थानांतरित हुए और तब से यहां हैं। इस दौरान उनके द्वारा अनेक जनहित याचिकाओं की सुनवाई की गयी, तथा पहले गंगा नदी एवं बाद में अन्य जल राशियों को जीवित मानव का दर्जा देने के साथ ही जिम कार्बेट पार्क, देहरादून, भवाली आदि शहरों को अतिक्रमण मुक्त करने के फैसले महत्वपूर्ण रहे हैं।

पूर्व समाचार : मुख्य न्यायाधीश का ऐसे हुआ उच्च न्यायालय में अभिनंदन

नैनीताल, 2 नवंबर 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के नये न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन ने शुक्रवार को पदभार ग्रहण कर लिया है। वे शुक्रवार को देहरादून राजभवन में प्रदेश की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य से पद की शपथ ग्रहण करने के उपरांत की हेलीकाप्टर से नैनीताल पहुंचे और कुछ ही देर बाद कोर्ट में बैठ गए, और कई मुकदमों की सुनवाई भी की। शाम को मुख्य न्यायाधीश की अदालत में ‘फुल कोर्ट रिफरेंस’ देते हुए उनका स्वागत-अभिनंदन किया गया। शुक्रवार को ही देहरादून न्यायमूर्ति रंगनाथन उच्च न्यायाय पहुंचे। यहां कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश रहे न्यायमूर्ति राजीव शर्मा, प्रदेश के महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर एवं हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ललित बेलवाल ने उनके स्वागत में अभिनंदन पत्र पढ़े एवं नये मुख्य न्यायाधीश से सहयोग की उम्मीद जताई। इस पर नये मुख्य न्यायाधीश ने भी हर तरह के सहयोग का आश्वासन दिया। इस मौके पर न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया, न्यायमूर्ति आलोक सिंह, न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह, न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा, रजिस्ट्रार जनरल प्रदीप पंत, सालसा के सदस्य सचिव प्रशांत जोशी व पूर्व न्यायधीश इरशाद हुसैन सहित सभी अधिवक्ता मौजूद रहे।

उल्लेखनीय है कि इस संबंध में 30 अक्टूबर को नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया था। तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन को उत्तराखंड हाईकोर्ट का मुख्य न्यायधीश बनाने के लिए 24 अक्टूबर को भारत सरकार के न्याय एवं कानून मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजिंदर कश्यप के हस्ताक्षरों से गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया था।

बड़ी ख़बर : न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन उत्तराखंड और बिष्ट बने सिक्किम के मुख्य न्यायाधीश

-न्यायमूर्ति प्रफुल्ल चंद्र पंत के बाद न्यायमूर्ति बिष्ट उत्तराखंड उच्च न्यायालय से किसी राज्य के मुख्य न्यायाधीश बनने वाले दूसरे व्यक्ति होंगे
-न्यायमूर्ति बिष्ट तीन बार उत्तराखंड उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश और 2016 में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन को अवैध ठहराने वाली बेंच में भी शामिल रहे हैं

सिक्किम उच्च न्यायालय के नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीके बिष्ट।

नवीन जोशी, नैनीताल, 24 अक्तूबर 2018। तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन को उत्तराखंड उच्च न्यायालय एवं उत्तराखंड उच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति विजय कुमार बिष्ट को सिक्किम उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया है। इस आशय के आदेश बुधवार को भारत सरकार के न्याय एवं कानून मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजिंदर कश्यप के हस्ताक्षरों से भारत के गजट में प्रकाशित होने के लिए हो गये हैं। उनकी नियुक्ति उनके कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी। दोनों मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय कोलेजियम की गत नौ अक्तूबर को की गयी संस्तुति के बाद किये गये हैं। न्यायमूर्ति बिष्ट तीन बार उत्तराखंड उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश भी रह चुके हैं। वे वर्ष 2016 में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन को अवैध ठहराने वाली बेंच में भी शामिल थे। न्यायमूर्ति प्रफुल्ल चंद्र पंत के बाद न्यायमूर्ति बिष्ट उत्तराखंड उच्च न्यायालय से किसी राज्य के मुख्य न्यायाधीश बनने वाले दूसरे व्यक्ति होंगे। उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति पंत बाद में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश भी बने थे, और इस पद पर पहुंचने वाले उत्तराखंड के अब तक इकलौते व्यक्ति हैं।

उल्लेखनीय है कि सिक्किम उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश का पद न्यायमूर्ति एसके अग्निहोत्री की सेवानिवृत्ति के बाद से रिक्त पड़ा है। वहीं उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विजय कुमार बिष्ट उत्तराखंड से वरिष्ठतम न्यायाधीश हैं, और उत्तराखंड उच्च न्यायालय में शुरू से कार्य कर रहे हैं। उनकी नियुक्ति पर इस बात को भी संज्ञान में रखा गया है कि अगस्त 2014 में न्यायमूर्ति प्रफुल्ल चंद्र पंत की सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति के बाद से उत्तराखंड से कोई भी न्यायाधीश किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नहीं बने हैं। इसी तरह उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पद न्यायमूर्ति केएम जोसफ के सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाये जाने के बाद से रिक्त पड़ा है। इस पद पर न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन की नियुक्ति करते समय इस बात को भी संज्ञान में रखा गया है कि तेलंगाना एवं आंध्र उच्च न्यायालय से वर्तमान में केवल एक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस रेड्डी ही हैं, और वे भी जनवरी 2019 में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं।

सुंदरकांड का प्रभाव हैं नियुक्तियांः बेलवाल
नैनीताल। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ललित बेलवाल ने न्यायमूर्ति वीके बिष्ट के सिक्किम उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनने और न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन के उत्तराखंड उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनने को शुक्रवार को बार के द्वारा आयोजित सुंदरकांड का प्रभाव बताया। ‘नवीन समाचार’ से विशेष बात करते हुए बेलवाल ने दोनों न्यायाधीशों को अपनी और बार की ओर से बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि आज न्यायमूर्ति बिष्ट भी सुंदरकांड के पाठ में शामिल हुए थे। इससे पूर्व उन्होंने बार सभागार में इसी वर्ष उत्तराखंड उच्च न्यायालय बनने के बाद पहली बार हरेला मनाया था, और इसके तत्काल बाद ही बरसों से अटके मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ का सर्वोच्च न्यायालय को स्थानांतरण हो गया था, और न्यायमूर्ति राजीव शर्मा उत्तराखंड उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बनाये गये थे।

न्यायमूर्ति शरद शर्मा ने ली उत्तराखंड हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीश पद की शपथ

नैनीताल, 30 अगस्त 2018। उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा ने न्यायमूर्ति शरद शर्मा को स्थायी न्यायाधीश की शपथ दिलायी। मुख्य न्यायाधीश के कोर्ट में आयोजित समारोह में शपथ ग्रहण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। राष्ट्रपति के अनुमोदन के उपरान्त भारत सरकार द्वारा श्री शर्मा को स्थायी न्यायधीश के रूप मे नियुक्ति प्रदान की गई है। बुधवार को केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने इस सम्बन्ध मे आदेश जारी किये थे। उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति शर्मा अब तक उत्तराखंड उच्च न्यायालय में ही अस्थायी न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे।
शपथ ग्रहण कार्यक्रम मे न्यायमूर्ति बीके विष्ट, सुधांशु धूलिया, आलोक सिह, मनोज कुमार तिवारी, वरिष्ठ न्यायायिक अधिकारी मीना तिवारी, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस पीसी पंत, रजिस्टार जनरल प्रदीप पंत, तथा जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन के अलावा हाईकोर्ट के अधिवक्तागण मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड उच्च न्यायालय के नये कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश शर्मा ने ‘दिल’ पर यह कहकर जीत लिया सबका दिल

  • बार के द्वारा आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम में दिल से बोले, कहा-हम जागेंगे तो लोग सोएंगे, कहा, उनका दिल बूढ़ा है पर गरीबों के लिए धड़कता है, गरीबों-जरूरतमंदों के मामलों में फैसला करते हुए कई बार दिमाग पर हावी रहता है उनका दिल
  • नये अधिवक्ताओं के लिए बार पुस्तकालय में नये प्रकाशन खरीदने के लिए की 10 हजार रुपए देने की पहल, बार अध्यक्ष व अन्य अधिवक्ताओं ने भी दी धनराशि
  • पेंशन-ग्रेच्युटी और पुराने मामलों का निपटारा सबसे पहले करेंगे, कहा ऐसे मामलों में दिल से करते हैं फैसले
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में नये कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश का स्वागत करते बार के अध्यक्ष एवं अन्य अधिवक्ता।

नैनीताल, 7 अगस्त 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के नये कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा का मंगलवार को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में भव्य स्वागत किया गया। नये-पुराने अधिवक्ताओं से खचाखच भरे बार सभागार में न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि उन्हें जितना प्यार यहां मिला है, इसके लिए उन्होंने कभी सोचा नहीं था। उनका दिल मजबूरों-गरीबों के लिये धड़कता है, और कई बार दिमाग पर भी हावी हो जाता है। उत्तराखंड राज्य में अपेक्षित समृद्धि नहीं है। यहां अधिकांश मामले गरीबों के आते हैं। वे सोचते हैं कि ऐसे मामलों में दिल से फैसले दिये जायें। कहा कि पिछले सप्ताह 1990 से लंबित एक याचिका का उन्होंने निस्तारण कियां आगे भी उनकी कोशिश रहेगी कि लोगों के दुःख, दर्द से जुड़े, वर्षों से लटके पेंशन, ग्रेच्युटी आदि के पुराने मामलों को निपटाएं। इस हेतु उन्होंने अधिवक्ताओं से भी सहयोग मांगा कि मामलों का त्वरित निस्तारण हो। बार अध्यक्ष ललित बेलवाल के यह कहने पर कि न्यायमूर्ति अधिवक्ताओं को सोने नहीं देंगे, न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा, ‘हम जागेंगे, तभी तो लोग चैन से सो पाएंगे’।
इस दौरान उन्होंने अधिवक्ताओं की वर्षों पुरानी अधिवक्ताओं के चैंबर निर्माण की डीपीआर को एक सप्ताह में देखने और जरूरी धन की व्यवस्था करने, हाउसिंग सोसायअी के लिए जल्द ही डीएम से बात करके भूमि हस्तांतरित कराने के आश्वासन दिये, और मौके पर भी नये अधिवक्ताओं के लिए वर्ष 2018 के नये प्रकाशनों को खरीदने को 10 हजार रुपए अपनी ओर से देने की पहल की, और उनकी देखा-देखी बार अध्यक्ष बेलवाल ने भी 10 हजार तथा पुष्पा जोशी, एमसी कांडपाल व हरीश भट्ट आदि वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भी अपनी ओर से इस हेतु धनराशि देने की घोषणाएं कीं। इस दौरान बार अध्यक्ष बेलवाल ने उन्हें ‘डार्लिंग ऑफ द बार’ संबोधित करते हुए पुष्पगुच्छ से उनका स्वागत किया तथा उनके ‘जज्बे को सलाम’ करते हुए कामना की कि वह यहीं मुख्य न्यायाधीश भी बनें। इस मौके पर सचिव नरेंद्र बाली, बीसी पांडे, एमसी पांडे, राजेश जोशी, गीता परिहार, बीएस रावत, आलोक मेहरा, दीपा आर्या, एके शर्मा, मंगल चौहान, संदीप तिवारी, भुवनेश जोशी, बीएस नेगी, संदीप तिवारी, योगेश पचौलिया, अकरम, राजेंद्र नेगी, पीसी तिवारी, डा. महेंद्र पाल, सैयद नदीम मून, लता नेगी, नीतू सिंह, आदित्य साह, गौरा देवी देव, ममता जोशी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में नये कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश का स्वागत करते बार के अध्यक्ष एवं अन्य अधिवक्ता।

 

पूर्व समाचार: सुप्रीम कोर्ट के जज बने जस्टिस केएम जोसफ, उत्तराखंड उच्च न्यायालय पहुंचा वारंट, ख़ुशी…

उत्तराखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ।

नैनीताल, 3 अगस्त 2018। केंद्र सरकार ने देश के शीर्ष न्यायालय के कॉलेजियम द्वारा दूसरी बार में भेजी गयी सिफारिशों को स्वीकार करते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के पद पर नियुक्ति दे दी है। न्यायमूर्ति जोजफ को सर्वाेच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने संबंधी राष्ट्रपति के हस्ताक्षरों से युक्त वारंट उत्तराखंड उच्च न्यायालय पहुंच गया है। इसके बाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं में खुशी का माहौल है। शाम चार बजे पदोन्नत मुख्य न्यायाधीश जोसफ को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में आमंत्रित किया गया है।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एके देसाई व जेएस खेहर तथा न्यायाधीश प्रफुल्ल चंद्र पंत भी सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने, और इनमें से न्यायमूर्ति खेहर देश के मुख्य न्यायाधीश भी बने।

उल्लेखनीय है कि जस्टिस जोसेफ की नियुक्ति संबंधित सिफारिश सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम ने पहले इस वर्ष 10 जनवरी को की थी। तब केंद्र सरकार ने इस सिफारिश की फाइल 26 अप्रैल को वापस भेज दी थी। केंद्र ने तर्क रखा था कि यह प्रस्ताव शीर्ष अदालत के मानकों के तहत नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय में जोसफ के प्रांत केरल से पर्याप्त प्रतिनिधित्व है। साथ ही केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नति के लिए उनकी वरिष्ठता पर भी सवाल उठाए थे। इसके बाद देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाले सर्वोच्च न्यायालय के कलीजियम ने 11 मई को ‘सैद्धांतिक रूप से एकमत से सहमति जताई थी कि उत्तराखंड न्यायमूर्ति जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश बनाने की सिफारिश दोहराई जानी चाहिए।’ इधर 20 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच वरिष्ठ न्यायाधीशों की कलीजियम ने एक बार फिर से केंद्र सरकार को न्यायमूर्ति जोसफ को शीर्ष अदालत का न्यायाधीश नियुक्त करने के लिए नाम भेजने का फैसला किया। इसके बाद से ही जोसफ का सुप्रीम कोर्ट का शीघ्र जज बनना तय हो गया था। कलीजियम ने यह भी कहा था कि दोहराई जाने वाली सिफारिश के साथ अन्य ‘उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने की सिफारिश भी भेजी जानी चाहिए।’

मार्च 2016 से सुर्खियों में रहे हैं न्यायमूर्ति जोसफ

नैनीताल। मार्च 2016 में उत्तराखंड विधानसभा में आयी अभूतपूर्व स्थितियों के बीच केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। उच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति केएम जोसेफ ने अपदस्थ मुख्यमंत्री हरीश रावत को फिर से सत्तानशीं और राष्ट्रपति शासन को हटा दिया था। साथ ही कथित तौर पर अपने नियुक्तिकर्ता राष्ट्रपति पर ‘राष्ट्रपति राजा नहीं होता’ जैसी टिप्पणी भी की थी। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय की कोलीजियम की उनके संबंध में की गयी सिफारिश को खारिज करने को इस के आलोक में भी देखा जा रहा था।

सुप्रीम कोर्ट की कलीजियम उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ का नाम सुप्रीम कोर्ट जज के लिए सरकार के पास दोबारा भेजे जाने पर एकमत हो गई है। इसके बाद उनका नाम सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद के लिये भेजा जाना कमोबेश तय हो गया है। हालांकि इस पर औपचारिक प्रस्ताव 16 मई को होने वाली कॉलेजियम के बाद ही भेजा जाएगा। साथ ही ये भी फैसला लिया गया कि अन्य हाई कोर्ट के जजों के नाम के साथ जोसेफ का नाम दोबारा भेजा जाएगा।

कॉलेजियम की रिपोर्ट :

अलबत्ता बैठक के बाद जिस तरह जोसेफ का नाम का प्रस्ताव सीधे नहीं किया गया, और इसके साथ आगामी 16 मई की शाम को प्रस्तावित बैठक में अन्य नामों पर भी चर्चा करने की बात कही गई है, नए नामों पर चर्चा में 1 दिन से अधिक समय लग सकता है, इसके दो दिन बाद ही 18 मई से सर्वोच्च न्यायालय में ग्रीष्म कालीन लंबे अवकाश हैं, और आगे जोसेफ के नाम की खुले तौर पर आगे बढ़कर पैरवी कर चुके न्यायामूर्ति चेलमेश्वर इसी बीच सेवानिवृत्त हो रहे हैं, 16 की कॉलेजियम उनकी आखिरी और 18 को अंतिम न्यायालयी दिन होगा, ऐसे में ‘केंद्र के खिलाफ मुहिम के प्रतीक बने’ जोसेफ के लिये सही मायने में अच्छी-प्रोन्नति की खबर आने में अभी भी विलंब व किन्तु-परंतु बचे हैं।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने उनका नाम दोबारा विचार करने के लिए कॉलिजियम के पास भेज दिया था जिसके बाद इस मुद्दे पर काफी विवाद रहा है। कलीजियम की बैटक में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस जे. चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और कुरियन जोसेफ शामिल हुए।

दोबारा नाम जाने पर वापसी का विकल्प नहीं है सरकार के पास 
कलीजियम अगर दोबारा किसी नाम को सरकार के पास भेजती है तो सरकार उसे वापस नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट के ऐडवोकेट एमएल लाहौटी बताते हैं कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा नाम सरकार को भेजा हो और उसे मंजूर न किया गया हो। सरकार दोबारा नाम भेजे जाने के बाद वापस नहीं कर सकती।

कई अन्य जजों के लिए भी कलेजियम ने की अनुशंषा 
कलीजियम ने इसके अलावा कई और हाई कोर्ट के जजों को भी दूसरे हाई कोर्ट में नियुक्ति की अनुशंसा की है। कलीजियम ने दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यकारी चीफ जस्टिस गीता मित्तल को जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की अनुशंसा की है। कलकत्ता हाई कोर्ट के सीनियर जस्टिस अनिरूद्ध बोस को झारखंड हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की अनुशंसा की गई है। सुप्रीम कोर्ट के कलीजियम ने बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस वीके तहिलरमानी को मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त करने की अनुशंसा की है। कलीजियम ने गुजरात हाई कोर्ट के एमआर शाह को पटना हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की अनुशंसा की है।

यह भी पढ़ें : केएम जोसेफ के मामले में कॉलिजियम का प्रस्ताव लौटाने के पीछे मोदी सरकार के तर्क में दम नहीं

उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति को लंबित रखने के पीछे की एक वजह केरल से पहले से ही पर्याप्त प्रतिनिधित्व को बताया गया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही जस्टिस कुरियन जोसेफ हैं, जिन्हें केरल हाई कोर्ट से पदोन्नत किया गया है। सरकार का तर्क है कि ऐसे में केरल हाईकोर्ट से एक और पदोन्नति सुप्रीम कोर्ट में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की सरंचना के हिसाब से ठीक नहीं होगी।
लेकिन यह तर्क तथ्यों पर पूरी तरह से खरा नहीं उतर रहा है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के 25 जजों में से 3 दिल्ली हाईकोर्ट, 3 बॉम्बे हाईकोर्ट और दो-दो इलाहाबाद, एमपी, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट से हैं। हालांकि सरकार ने तर्क दिया कि केरल हाईकोर्ट छोटा है और इसके प्रतिनिधित्व को सुप्रीम कोर्ट के साथ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को ध्यान में रख कर देखना चाहिए। केरल, ओडिशा, गुवाहाटी, पंजाब और हरियाणा, मद्रास, पटना व हिमाचल हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में एक-एक जज हैं। वहीं 4 जजों को बार से चुना गया था, जिनमें नव नियुक्त इंदू मल्होत्रा भी शामिल हैं। ये 4 जहां प्रैक्टिस करते थे अगर उन राज्यों को ध्यान में रखा जाए तो सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली और बॉम्बे हाई कोर्ट का प्रतिनिधित्व और बढ़ने ही वाला है। जबकि कोलकाता, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, सिक्किम, मणिपुर और मेघालय, इन 10 हाईकोर्ट का वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।

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केंद्र ने मुख्य न्यायाधीश जोसफ को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाने का प्रस्ताव लौटाया,  जबकि इंदु मल्होत्रा को किया सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त 
नैनीताल। केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम यानी न्यायाधीशों की समिति की सिफारिशों को आधार स्वीकार करते हुए राष्ट्रपति के आदेशों पर इंदु मल्होत्रा को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त कर दिया है, जबकि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ के नाम को वापस कॉलोजियम को लौटा दिया है। आगे यदि कॉलोजियम दुबारा उनके नाम की संस्तुति करती है, तब केंद्र सरकार उनकी संस्तुति को मानने के लिए बाध्य होगी। केंद्र सरकार ने हालांकि न्यायमूर्ति जोसफ के बाबत सिफारिश को लौटाने के विस्तार से 10 बिंदु गिनाये हैं, लेकिन इसे मार्च 2016 में जोसफ के द्वारा केंद्र द्वारा लगाये गए राष्ट्रपति शासन एवं अपदस्थ कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री हरीश रावत को वापस सत्तानशी करने तथा अपने नियुक्तिकर्ता पर की गयी ‘राष्ट्रपति राजा नहीं होता’ जैसी टिप्पणी के आलोक में भी देखा जा रहा है।
केंद्र सरकार की ओर से बृहस्पतिवार 26 अप्रैल को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा को कॉलेजियम की 19 जनवरी 2018 की संस्तुतियों के बाबत भेजे गए पत्र में कहा गया है कि न्यायमूर्ति जोसफ देश भर के उच्च न्यायालयों की वरिष्ठता सूची में 42वें नंबर पर हैं, और 11 प्रदेशों के मुख्य न्यायाधीश भी उनसे वरिष्ठ हैं। न्यायमूर्ति जोसफ चूंकि मूलतः केरल से आते हैं, और सर्वोच्च न्यायालय में पहले से ही इस छोटे से राज्य के निवासी न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ आठ मार्च 2013 से नियुक्त हैं, जबकि केरल के ही टीबी राधाकृष्णन छत्तीसगढ़ व एंथनी डॉर्निमिक केरल उच्च न्यायालय में नियुक्त हैं। वहीं कोलकाता, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड सहित सिक्किम, मणीपुर व मेघालय का सर्वोच्च न्यायालय में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। जोसफ को सर्वाच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाने से इस छोटे राज्य के दो न्यायाधीश हो जाएंगे। इधर उत्तराखंड उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति जोसफ के प्रस्ताव को लौटाए जाने पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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