• बार द्वारा आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम में दिल से बोले, कहा-हम जागेंगे तो लोग सोएंगे, कहा, उनका दिल बूढ़ा है पर गरीबों के लिए धड़कता है, गरीबों-जरूरतमंदों के मामलों में फैसला करते हुए कई बार दिमाग पर हावी रहता है उनका दिल
  • नये अधिवक्ताओं के लिए बार पुस्तकालय में नये प्रकाशन खरीदने के लिए की 10 हजार रुपए देने की पहल, बार अध्यक्ष व अन्य अधिवक्ताओं ने भी दी धनराशि
  • पेंशन-ग्रेच्युटी और पुराने मामलों का निपटारा सबसे पहले करेंगे, कहा ऐसे मामलों में दिल से करते हैं फैसले
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में नये कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश का स्वागत करते बार के अध्यक्ष एवं अन्य अधिवक्ता।

नैनीताल, 7 अगस्त 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के नये कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा का मंगलवार को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में भव्य स्वागत किया गया। नये-पुराने अधिवक्ताओं से खचाखच भरे बार सभागार में न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि उन्हें जितना प्यार यहां मिला है, इसके लिए उन्होंने कभी सोचा नहीं था। उनका दिल मजबूरों-गरीबों के लिये धड़कता है, और कई बार दिमाग पर भी हावी हो जाता है। उत्तराखंड राज्य में अपेक्षित समृद्धि नहीं है। यहां अधिकांश मामले गरीबों के आते हैं। वे सोचते हैं कि ऐसे मामलों में दिल से फैसले दिये जायें। कहा कि पिछले सप्ताह 1990 से लंबित एक याचिका का उन्होंने निस्तारण कियां आगे भी उनकी कोशिश रहेगी कि लोगों के दुःख, दर्द से जुड़े, वर्षों से लटके पेंशन, ग्रेच्युटी आदि के पुराने मामलों को निपटाएं। इस हेतु उन्होंने अधिवक्ताओं से भी सहयोग मांगा कि मामलों का त्वरित निस्तारण हो। बार अध्यक्ष ललित बेलवाल के यह कहने पर कि न्यायमूर्ति अधिवक्ताओं को सोने नहीं देंगे, न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा, ‘हम जागेंगे, तभी तो लोग चैन से सो पाएंगे’।
इस दौरान उन्होंने अधिवक्ताओं की वर्षों पुरानी अधिवक्ताओं के चैंबर निर्माण की डीपीआर को एक सप्ताह में देखने और जरूरी धन की व्यवस्था करने, हाउसिंग सोसायअी के लिए जल्द ही डीएम से बात करके भूमि हस्तांतरित कराने के आश्वासन दिये, और मौके पर भी नये अधिवक्ताओं के लिए वर्ष 2018 के नये प्रकाशनों को खरीदने को 10 हजार रुपए अपनी ओर से देने की पहल की, और उनकी देखा-देखी बार अध्यक्ष बेलवाल ने भी 10 हजार तथा पुष्पा जोशी, एमसी कांडपाल व हरीश भट्ट आदि वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भी अपनी ओर से इस हेतु धनराशि देने की घोषणाएं कीं। इस दौरान बार अध्यक्ष बेलवाल ने उन्हें ‘डार्लिंग ऑफ द बार’ संबोधित करते हुए पुष्पगुच्छ से उनका स्वागत किया तथा उनके ‘जज्बे को सलाम’ करते हुए कामना की कि वह यहीं मुख्य न्यायाधीश भी बनें। इस मौके पर सचिव नरेंद्र बाली, बीसी पांडे, एमसी पांडे, राजेश जोशी, गीता परिहार, बीएस रावत, आलोक मेहरा, दीपा आर्या, एके शर्मा, मंगल चौहान, संदीप तिवारी, भुवनेश जोशी, बीएस नेगी, संदीप तिवारी, योगेश पचौलिया, अकरम, राजेंद्र नेगी, पीसी तिवारी, डा. महेंद्र पाल, सैयद नदीम मून, लता नेगी, नीतू सिंह, आदित्य साह, गौरा देवी देव, ममता जोशी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में नये कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश का स्वागत करते बार के अध्यक्ष एवं अन्य अधिवक्ता।

पूर्व समाचार : उत्तराखंड उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बने न्यायमूर्ति राजीव शर्मा

  • 35 देशों की यात्रा भी कर चुके हैं उत्तराखंड हाईकोर्ट के नए कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शर्मा
  • 26 सितंबर 2016 से उत्तराखंड हाईकोर्ट में तैनात एवं वरिष्ठतम न्यायाधीश हैं न्यायमूर्ति शर्मा
उत्तराखंड उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा

नैनीताल, 6 अगस्त 2018। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा उत्तराखंड उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश होंगे। सोमवार 6 अगस्त को देश के राष्ट्रपति की ओर से उनकी नियुक्ति का पत्र भारत सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजिंदर कश्यप की ओर से जारी हो गया है। न्यायमूर्ति शर्मा उत्तराखंड उच्च न्यायालय में 26 सितंबर 2016 से कार्यरत एवं वरिष्ठतम न्यायाधीश हैं। खास बात यह भी है कि उनकी नियुक्ति अब तक इस पद की जिम्मेदारी संभाल रहे न्यायमूर्ति केएम जोसेफ के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के बाद कार्यभार त्यागने की तिथि से मानी जाएगी, जोकि रविवार को ही कार्यभार छोड़कर दिल्ली रवाना हो गए हैं।
उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति राजीव शर्मा (जन्म 8 अक्टूबर 1958) मूलतः हिमांचल प्रदेश के निवासी हैं। उन्होंने अपनी एलएलबी की डिग्री हिमांचल प्रदेश विश्वविद्यालय से हासिल की, और 1982 में अधिवक्ता के रूप में नामांकित हुए। आगे वे 2002 में वरिष्ठ अधिवक्ता बनेे उन्होंने अधिवक्ता के रूप में प्रारंभिक प्रेक्टिस संवैधानिक कानून, प्रशासनिक कानून, सेवा संबंधित मामलों एवं पर्यावरणीय कानूनों के मामलों में विशेषज्ञता के साथ हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय से शुरू की। इस दौरान वे अमेरिका, चीन, इजिप्ट, श्रीलंका, म्यामार, थाइलेंड, वियतनाम, दुबई, न्यूजीलेंड, यूनाइटेड किंगडम, इटली, स्विटजरलेंड, बेल्जियम, जर्मनी, फ्रांस, डेनमार्क, स्वीडन, नॉर्वे, फिनलेंड तथा रूस सहित 35 देशों की यात्रा भी कर चुके हैं। वे 3 अप्रैल 2007 को हिमांचल प्रदेश हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 31 मार्च 2013 को नियमित हुए। 26 सितंबर 2016 को वे उत्तराखंड उच्च न्यायालय को स्थानांतरित हुए और तब से यहां हैं। इस दौरान उनके द्वारा अनेक जनहित याचिकाओं की सुनवाई की गयी, तथा पहले गंगा नदी एवं बाद में अन्य जल राशियों को जीवित मानव का दर्जा देने के साथ ही जिम कार्बेट पार्क, देहरादून, भवाली आदि शहरों को अतिक्रमण मुक्त करने के फैसले महत्वपूर्ण रहे हैं।

पूर्व समाचार: सुप्रीम कोर्ट के जज बने जस्टिस केएम जोसफ, उत्तराखंड उच्च न्यायालय पहुंचा वारंट, ख़ुशी…

उत्तराखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ।

नैनीताल, 3 अगस्त 2018। केंद्र सरकार ने देश के शीर्ष न्यायालय के कॉलेजियम द्वारा दूसरी बार में भेजी गयी सिफारिशों को स्वीकार करते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के पद पर नियुक्ति दे दी है। न्यायमूर्ति जोजफ को सर्वाेच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने संबंधी राष्ट्रपति के हस्ताक्षरों से युक्त वारंट उत्तराखंड उच्च न्यायालय पहुंच गया है। इसके बाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं में खुशी का माहौल है। शाम चार बजे पदोन्नत मुख्य न्यायाधीश जोसफ को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में आमंत्रित किया गया है।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एके देसाई व जेएस खेहर तथा न्यायाधीश प्रफुल्ल चंद्र पंत भी सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने, और इनमें से न्यायमूर्ति खेहर देश के मुख्य न्यायाधीश भी बने।

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उल्लेखनीय है कि जस्टिस जोसेफ की नियुक्ति संबंधित सिफारिश सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम ने पहले इस वर्ष 10 जनवरी को की थी। तब केंद्र सरकार ने इस सिफारिश की फाइल 26 अप्रैल को वापस भेज दी थी। केंद्र ने तर्क रखा था कि यह प्रस्ताव शीर्ष अदालत के मानकों के तहत नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय में जोसफ के प्रांत केरल से पर्याप्त प्रतिनिधित्व है। साथ ही केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नति के लिए उनकी वरिष्ठता पर भी सवाल उठाए थे। इसके बाद देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाले सर्वोच्च न्यायालय के कलीजियम ने 11 मई को ‘सैद्धांतिक रूप से एकमत से सहमति जताई थी कि उत्तराखंड न्यायमूर्ति जोसेफ को सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश बनाने की सिफारिश दोहराई जानी चाहिए।’ इधर 20 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच वरिष्ठ न्यायाधीशों की कलीजियम ने एक बार फिर से केंद्र सरकार को न्यायमूर्ति जोसफ को शीर्ष अदालत का न्यायाधीश नियुक्त करने के लिए नाम भेजने का फैसला किया। इसके बाद से ही जोसफ का सुप्रीम कोर्ट का शीघ्र जज बनना तय हो गया था। कलीजियम ने यह भी कहा था कि दोहराई जाने वाली सिफारिश के साथ अन्य ‘उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने की सिफारिश भी भेजी जानी चाहिए।’

मार्च 2016 से सुर्खियों में रहे हैं न्यायमूर्ति जोसफ

नैनीताल। मार्च 2016 में उत्तराखंड विधानसभा में आयी अभूतपूर्व स्थितियों के बीच केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। उच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति केएम जोसेफ ने अपदस्थ मुख्यमंत्री हरीश रावत को फिर से सत्तानशीं और राष्ट्रपति शासन को हटा दिया था। साथ ही कथित तौर पर अपने नियुक्तिकर्ता राष्ट्रपति पर ‘राष्ट्रपति राजा नहीं होता’ जैसी टिप्पणी भी की थी। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय की कोलीजियम की उनके संबंध में की गयी सिफारिश को खारिज करने को इस के आलोक में भी देखा जा रहा था।

पूर्व समाचार : न्यायमूर्ति जोसेफ के नाम पर कॉलेजियम एकमत, पर प्रोन्नति पर अभी भी किंतु-परंतु !

सुप्रीम कोर्ट की कलीजियम उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ का नाम सुप्रीम कोर्ट जज के लिए सरकार के पास दोबारा भेजे जाने पर एकमत हो गई है। इसके बाद उनका नाम सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद के लिये भेजा जाना कमोबेश तय हो गया है। हालांकि इस पर औपचारिक प्रस्ताव 16 मई को होने वाली कॉलेजियम के बाद ही भेजा जाएगा। साथ ही ये भी फैसला लिया गया कि अन्य हाई कोर्ट के जजों के नाम के साथ जोसेफ का नाम दोबारा भेजा जाएगा।

कॉलेजियम की रिपोर्ट :

अलबत्ता बैठक के बाद जिस तरह जोसेफ का नाम का प्रस्ताव सीधे नहीं किया गया, और इसके साथ आगामी 16 मई की शाम को प्रस्तावित बैठक में अन्य नामों पर भी चर्चा करने की बात कही गई है, नए नामों पर चर्चा में 1 दिन से अधिक समय लग सकता है, इसके दो दिन बाद ही 18 मई से सर्वोच्च न्यायालय में ग्रीष्म कालीन लंबे अवकाश हैं, और आगे जोसेफ के नाम की खुले तौर पर आगे बढ़कर पैरवी कर चुके न्यायामूर्ति चेलमेश्वर इसी बीच सेवानिवृत्त हो रहे हैं, 16 की कॉलेजियम उनकी आखिरी और 18 को अंतिम न्यायालयी दिन होगा, ऐसे में ‘केंद्र के खिलाफ मुहिम के प्रतीक बने’ जोसेफ के लिये सही मायने में अच्छी-प्रोन्नति की खबर आने में अभी भी विलंब व किन्तु-परंतु बचे हैं।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने उनका नाम दोबारा विचार करने के लिए कॉलिजियम के पास भेज दिया था जिसके बाद इस मुद्दे पर काफी विवाद रहा है। कलीजियम की बैटक में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस जे. चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी लोकुर और कुरियन जोसेफ शामिल हुए।

दोबारा नाम जाने पर वापसी का विकल्प नहीं है सरकार के पास 
कलीजियम अगर दोबारा किसी नाम को सरकार के पास भेजती है तो सरकार उसे वापस नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट के ऐडवोकेट एमएल लाहौटी बताते हैं कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा नाम सरकार को भेजा हो और उसे मंजूर न किया गया हो। सरकार दोबारा नाम भेजे जाने के बाद वापस नहीं कर सकती।

कई अन्य जजों के लिए भी कलेजियम ने की अनुशंषा 
कलीजियम ने इसके अलावा कई और हाई कोर्ट के जजों को भी दूसरे हाई कोर्ट में नियुक्ति की अनुशंसा की है। कलीजियम ने दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यकारी चीफ जस्टिस गीता मित्तल को जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की अनुशंसा की है। कलकत्ता हाई कोर्ट के सीनियर जस्टिस अनिरूद्ध बोस को झारखंड हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की अनुशंसा की गई है। सुप्रीम कोर्ट के कलीजियम ने बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस वीके तहिलरमानी को मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त करने की अनुशंसा की है। कलीजियम ने गुजरात हाई कोर्ट के एमआर शाह को पटना हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की अनुशंसा की है।

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उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति को लंबित रखने के पीछे की एक वजह केरल से पहले से ही पर्याप्त प्रतिनिधित्व को बताया गया है। केंद्र सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही जस्टिस कुरियन जोसेफ हैं, जिन्हें केरल हाई कोर्ट से पदोन्नत किया गया है। सरकार का तर्क है कि ऐसे में केरल हाईकोर्ट से एक और पदोन्नति सुप्रीम कोर्ट में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की सरंचना के हिसाब से ठीक नहीं होगी।
लेकिन यह तर्क तथ्यों पर पूरी तरह से खरा नहीं उतर रहा है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के 25 जजों में से 3 दिल्ली हाईकोर्ट, 3 बॉम्बे हाईकोर्ट और दो-दो इलाहाबाद, एमपी, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट से हैं। हालांकि सरकार ने तर्क दिया कि केरल हाईकोर्ट छोटा है और इसके प्रतिनिधित्व को सुप्रीम कोर्ट के साथ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को ध्यान में रख कर देखना चाहिए। केरल, ओडिशा, गुवाहाटी, पंजाब और हरियाणा, मद्रास, पटना व हिमाचल हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में एक-एक जज हैं। वहीं 4 जजों को बार से चुना गया था, जिनमें नव नियुक्त इंदू मल्होत्रा भी शामिल हैं। ये 4 जहां प्रैक्टिस करते थे अगर उन राज्यों को ध्यान में रखा जाए तो सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली और बॉम्बे हाई कोर्ट का प्रतिनिधित्व और बढ़ने ही वाला है। जबकि कोलकाता, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, सिक्किम, मणिपुर और मेघालय, इन 10 हाईकोर्ट का वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।

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केंद्र ने मुख्य न्यायाधीश जोसफ को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाने का प्रस्ताव लौटाया,  जबकि इंदु मल्होत्रा को किया सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त 
नैनीताल। केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम यानी न्यायाधीशों की समिति की सिफारिशों को आधार स्वीकार करते हुए राष्ट्रपति के आदेशों पर इंदु मल्होत्रा को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त कर दिया है, जबकि उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसफ के नाम को वापस कॉलोजियम को लौटा दिया है। आगे यदि कॉलोजियम दुबारा उनके नाम की संस्तुति करती है, तब केंद्र सरकार उनकी संस्तुति को मानने के लिए बाध्य होगी। केंद्र सरकार ने हालांकि न्यायमूर्ति जोसफ के बाबत सिफारिश को लौटाने के विस्तार से 10 बिंदु गिनाये हैं, लेकिन इसे मार्च 2016 में जोसफ के द्वारा केंद्र द्वारा लगाये गए राष्ट्रपति शासन एवं अपदस्थ कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री हरीश रावत को वापस सत्तानशी करने तथा अपने नियुक्तिकर्ता पर की गयी ‘राष्ट्रपति राजा नहीं होता’ जैसी टिप्पणी के आलोक में भी देखा जा रहा है।
केंद्र सरकार की ओर से बृहस्पतिवार 26 अप्रैल को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा को कॉलेजियम की 19 जनवरी 2018 की संस्तुतियों के बाबत भेजे गए पत्र में कहा गया है कि न्यायमूर्ति जोसफ देश भर के उच्च न्यायालयों की वरिष्ठता सूची में 42वें नंबर पर हैं, और 11 प्रदेशों के मुख्य न्यायाधीश भी उनसे वरिष्ठ हैं। न्यायमूर्ति जोसफ चूंकि मूलतः केरल से आते हैं, और सर्वोच्च न्यायालय में पहले से ही इस छोटे से राज्य के निवासी न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ आठ मार्च 2013 से नियुक्त हैं, जबकि केरल के ही टीबी राधाकृष्णन छत्तीसगढ़ व एंथनी डॉर्निमिक केरल उच्च न्यायालय में नियुक्त हैं। वहीं कोलकाता, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड सहित सिक्किम, मणीपुर व मेघालय का सर्वोच्च न्यायालय में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। जोसफ को सर्वाच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाने से इस छोटे राज्य के दो न्यायाधीश हो जाएंगे। इधर उत्तराखंड उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति जोसफ के प्रस्ताव को लौटाए जाने पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है।

यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….।

मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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