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भाजपा विधायक कर्णवाल को जाति प्रमाण पत्र का मामला पूरी तरह से निस्तारित..

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नवीन समाचार, नैनीताल, 12 सितंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल के जाति प्रमाण पत्र के मामले में प्रस्तुत उनके सभी प्रमाण पत्रों में किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं होने की बात स्वीकार कर ली है और कह दिया है कि उनके सभी प्रमाण पत्र वैध हैं। यानी ही उनके जाति प्रमाण पत्र को चुनौती देने वाली याचिका को निस्तारित कर दिया है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में न्यायालय ने उनके जाति प्रमाण पत्रों की जांच कराने के लिए एक कमेटी गठित कर उसकी जाँच कराने के आदेश राज्य सरकार को दिए थे। जिस पर आज सरकार ने जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 11 सितंबर 2019। उत्तराखंड हाई कोर्ट की मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल के जाति प्रमाण पत्रों को चुनौती देने वाली हरिद्वार के विपिन तोमर की जनहित याचिका में सुनवाई हुई और सुनवाई गुरुवार को भी जारी रखी है। पूर्व में कोर्ट ने उनके जाति प्रमाण पत्रों की जांच के लिए एक कमेटी गठित कर जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा था। सरकार द्वारा कोर्ट को अवगत कराया गया कि उनके जाति से सम्बंधित प्रमाण पत्रों की जाँच पूरी हो चुकी है। इस सम्बन्ध में आज देशराज कर्णवाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि शासन द्वारा इस संबंध में अपने आदेश दिनांकित 22 अगस्त 2019 के जरिए शासन स्तर पर अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में जाति प्रमाण पत्र स्क्रुटनी कमेटी का गठन किया गया जिसने इस प्रकरण में गहनता से जांच की और सभी आरोपों पर दोनों पक्षों को विस्तार पूर्वक सुना गया।
शासन स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी की 7 सितंबर 2019 को हुई बैठक में इस प्रकरण में धैर्य पूर्वक दोनों पक्षों को विस्तार से सुना। शिकायतकर्ताओं द्वारा मुख्यतः यह आरोप लगाया गया कि कर्णवाल उत्तराखंड के मूल निवासी नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के मूल निवासी हैं। वर्ष 2005 में उनको जारी जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने की मांग की गई। इन आरोपों के प्रत्युत्तर में श्री देशराज कर्णवाल के अधिवक्ता द्वारा स्क्रूटनी कमेटी को अवगत कराया गया कि श्री देशराज कर्णवाल वर्ष 1984 से ही अपनी माता व भाई के साथ वर्तमान हरिद्वार जिले में निवास करने लगे थे तथा तब से ही वह लगातार हरिद्वार जिले में रह रहे हैं, और अनेक वर्षों से सामाजिक व राजनीतिक रूप से हरिद्वार जिले में ही सक्रिय हैं। अपने तर्कों के समर्थन में उनके द्वारा वर्ष 1984 में कर्णवाल की माता के द्वारा किया गया किरायानामा प्रस्तुत किया गया तथा अन्य साक्ष्य इस संबंध में प्रस्तुत किए गए जिनमें मुख्यतः वर्ष 1997 में जिला सेवायोजन कार्यालय हरिद्वार में कराए गए पंजीकरण के साक्ष्य सम्मिलित हैं जिसमें स्पष्ट रूप से कर्णवाल का नाम अनुसूचित जाति के अभ्यर्थी के रूप में दर्ज है। जिला सेवायोजन कार्यालय द्वारा यह भी अवगत कराया गया है कि उनके कार्यालय में केवल उसी अभ्यार्थी का नाम पंजीकृत किया जा सकता है जो हरिद्वार जिले का स्थाई निवासी हो जिससे यह स्पष्ट होता है कि वर्ष 1997 में भी कर्णवाल हरिद्वार जिले के स्थाई निवासी थे। इसके साथ ही कर्णवाल के अधिवक्ता द्वारा कमेटी को बताया गया कि प्रस्तुत प्रकरण पहले भी राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्णित किया जा चुका है जिसमें राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा कर्णवाल के जाति प्रमाण पत्र के संबंध में की गई शिकायतों को निराधार बलहीन पाया था । इन तथ्यों के साथ-साथ अन्य अनेक तथ्य भी कमेटी के सामने रखे गए जिनसे यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि यह शिकायतें पूरी तरह निराधार हैं।
दिनांक 7 सितंबर 2019 को दोनों पक्षों को विस्तार पूर्वक सुनने के बाद स्कूटनी कमेटी द्वारा अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया गया था और कल दिनांक 9 सितंबर 2019 को शासन स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी द्वारा अपना निर्णय घोषित किया गया जिसमें कमेटी इस निष्कर्ष पर पहुंची कि श्री देशराज कर्णवाल को वर्ष 2005 में जारी किया गया जाति प्रमाण पत्र पूरी तरह वैध है, तथा उनके द्वारा इस जाति प्रमाण पत्र को प्राप्त करने में किसी तरह का कोई आपराधिक कृत्य नहीं किया गया है।

नवीन समाचार

मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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