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विधानसभा चुनाव में ईवीएम में हुई गड़बड़ी की शिकायत पर एकलपीठ में सुनवाई पूरी, निर्णय सुरक्षित

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नवीन समाचार, नैनीताल, 13 नवंबर 2019। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ ने प्रदेश के 2017 में हुए विधान सभा चुनाव में ईवीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में हुई गड़बड़ी के मामले में सुनवाई पूरी कर अपना निर्णय सुनवाई के बाद सुुरक्षित रख लिया है।
मामले के अनुसार कांग्रेस के हारे हुए प्रत्याशी नवप्रभात, विक्रम सिंह, राजकुमार, अम्बरीष कुमार, प्रभुलाल बहुगुणा व गोदावरी थापली ने भाजपा के जीते हुए प्रत्याशी विजय सिंह, मुन्ना सिंह चौहान, खजान दास, आदेश चौहान, उमेश शर्मा काऊ और गणेश जोशी के निवार्चन को चुनाव याचिका दायर कर चुनौती दी थी। याचिका में चुनाव आयोग व सरकार पर आरोप लगाया गया था कि इन प्रत्यशियों ने जीतने के लिए ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी की थी। लिहाजा उनके निवार्चन को निरस्त किया जाये। बुधवार को सुनवाई के दौरान जीते हुए प्रत्याशियों की ओर से जिरह करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सत्यपाल जैन ने एकलपीठ को अवगत कराया कि सभी चुनाव याचिकाएं आधारहीन हैं और चुनाव याचिकाओं में किस पोलिंग बूथ पर ईवीएम में गड़बड़ी हुए है इसकी स्पष्ट जानकारी नही दी गई है।

यह भी पढ़ें : पूर्व जिपं अध्यक्ष द्वारा स्कूल की भूमि गाड़ियों की एजेंसी को देने की जांच मंडलायुक्त करेंगे: हाई कोर्ट

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 नवंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने हल्द्वानी के ग्राम किशनपुर घुरदौडा में स्कूल की 14 बीघा जमीन को जिला पंचायत नैनीताल के द्वारा गाड़ियों की एजेंसी-बजरंग मोटर्स के दलीप कुमार अग्रवाल को लीज पर व्यवसायिक कार्य करने हेतु देने के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कुमाऊं मंडलायुक्त को मौका मुआयना कर भूमि की नवीनतम फोटो सहित दस दिन के भीतर शपथपत्र के साथ रिपोर्ट पेश करने को कहा है। साथ ही कोर्ट ने अग्रिम आदेश तक इस भूमि पर किसी भी तरह के निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जिला पंचायत को स्कूल की भूमि को लीज पर देने का कोई अधिकार नही है।
मामले के अनुसार ललित मोहन सिंह नेगी निवासी मानस विहार हल्द्वानी ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि पूर्व के जिला पंचायत अध्यक्ष व सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से किशनपुर घुरदौडा स्कूल की 14 बीघा भूमि को मैसर्स बजरंग मोटर्स रामपुर रोड हल्द्वानी के दलीप कुमार को व्यवसायिक कार्य करने हेतु लीज पर दी गयी है। इस पर अग्रवाल ने बजरंग मोटर, आटोमोबाइल व वर्कशॉप खोला है। उनकी शिकायत पर पूर्व में एसडीएम द्वारा जांच की गई जिसमें यह 14 बीघा भूमि स्कूल के नाम में दर्ज थी, जिसको तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष कमलेश शर्मा, अपर मुख्य अधिकारी हिमाली जोशी, अपर मुख्य अधिकारी कमलेश बिष्ठ, कर निरीक्षक पंकज रावत व कर निरीक्षक कुंवर सिंह ने मिलकर सरकार को बिना बताए लीज पर दे दिया। इसकी शिकायत जब जिला अधिकारी से की गई तो जिला अधिकारी ने इन पर कार्यवाही के लिए सरकार से संस्तुति की परंतु आज तक दोषियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नही की गई।

यह भी पढ़ें : विद्यालय प्रबंधन ने संस्थापक के पौत्र अधिवक्ता को सदस्यता देने से कर दिया था इंकार, HC ने दिया अंतिम फैसला

-काण्डपाल को विद्यालय प्रबंधन समिति का सदस्य बनाने का आदेश, मिली ससम्मान जीत

नवीन समाचार, नैनीताल, 6 नवंबर 2019। अल्मोड़ा के द्वाराहाट स्थित अशासकीय विद्यालय-आदर्श इंटर कॉलेज सुरईखेत बिठोली प्रबंधन ने प्रबंधन के सदस्य बनने हेतु क्षेत्रीय निवासी व इसी विद्यालय के संस्थापक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व यूपी के पूर्व मंत्री स्व.हरी दत्त काण्डपाल के पौत्र व सामाजिक सरोकारों के प्रबल पैरोकार अधिवक्ता जेपी काण्डपाल को विधिवत विद्यालय में ड्राफ्ट जमा कराने व अन्य सभी औपचारिताएँ पूरी करने के बावजूद बिना कारण बताए ड्राफ्ट काण्डपाल को वापस कर दिया था। इसे काण्डपाल ने नैनीताल हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट की फटकार पर विद्यालय के प्रधानाचार्य ने काण्डपाल को सदस्य बनाये जाने के विषय मे पत्र लिखा, जिसे कोर्ट ने अवैधानिक माना। इधर बुधवार 6 नवंबर को मामले को सुनने के बाद कोर्ट ने काण्डपाल को तुरन्त प्रभाव से विद्यालय प्रबंधन समिति का सदस्य बनाये जाने का मैनेजमेंट को आदेश दिया है। याचिकाकर्ता जेपी काण्डपाल ने न्यायालय के फैसले को सच्चाई की जीत बताया है।

यह भी पढ़ें : पुलिस ने चोरों को ही सोंप दिये थे चोरी के वाहन, अब हाईकोर्ट ने सरकार से किया जवाब तलब

नवीन समाचार, नैनीताल, 31 अक्टूबर 2019। वर्ष 2018 में जसपुर ऊधमसिंह नगर पुलिस पर चोरी की गाड़ियों को चोरों को ही सोंपने के आरोप लगे थे। इस मामले में अब उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सरकार से सोमवार तक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
उल्लेखनीय है कि जसपुर निवासी सुरेंद्र सिंह ने इस मामले में उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि पुलिस ने 2018 में जसपुर में पजेरो, टाटा सफारी सहित अन्य मॉडल के कुछ महंगी गाड़ियों को पकड़ा था और इस मामले में स्वयं ही एफआईआर भी दर्ज कराई थी। जांच में यह बात प्रकाश में आई कि इन वाहनों के चेचिस नंबर खरोंचे हुए थे, यानी यह वाहन चोरी के थे। बावजूद पुलिस ने इन वाहनों को इन नंबरों को चेसिस बदलकर प्रयोग करने वाले, खुद को इन गाड़ियों का मालिक बताने वाले लोगों को भी सोंप दिये थे। याचिका में पूछा गया है कि जांच में चोरी के वाहन साबित होने के बावजूद इनकी वापसी किस आधार पर की गई, इसकी जांच की जाए। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की संयुक्त खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को मामले की सुनवाई करते हुए सरकार से इस मामले में स्पष्ट करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

यह भी पढ़ें : देहरादून नगर निगम को एक कंपनी पर उड़ेले प्रेम पर हाईकोर्ट ने दिया बड़ा झटका

-ट्रेफिक अम्ब्रेला का ठेका निरस्त करने व विज्ञापन हटाने के आदेश
नवीन समाचार, नैनीताल, 20 सितंबर 2019। देहरादून नगर निगम को एक विज्ञापन कंपनी पर नियमविरुद्ध उड़ेले गये प्रेम पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नगर निगम देहरादून द्वारा वेलअप एडवरटाईजिंग कंपनी को दिया गया ठेका निरस्त करते हुए उसके द्वारा लगाए गए ट्रेफिक अम्ब्रेला के विज्ञापन को हटाने के आदेश दिये हैं। न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार कैटालेएस्ट एडवरटाईजिंग मीडिया व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि नगर निगम देहरादून की ओर से नगर निगम अधिनियम व उसके अंतर्गत बनाए गए बाइलॉज का उल्लंघन करते हुए वेलअप एडवरटाईजिंग कंपनी को ट्रेफिक अम्ब्रेला पर पंद्रह वर्ष तक विज्ञापन लगाने को ठेका दे दिया गया है, जबकि नगर निगम द्वारा दो वर्ष से अधिक का ठेका नहीं दिया जा सकता है। लिहाजा याची की ओर से इस दिए गए ठेके को निरस्त करने की मांग की गई थी। दोनों पक्षों की सुनवाई करने के बाद हाई कोर्ट की एकलपीठ ने वेलअप एडवरटाईजिंग कंपनी को दिया गया ठेका निरस्त करते हुए नगर निगम देहरादून को आदेशित किया कि इनके द्वारा लगाए गए ट्रेफिक अम्ब्रेला के विज्ञापन को हटाया जाए।

यह भी पढ़ें : बड़ा समाचार: हाईकोर्ट ने उत्तराखंड के एक और, पुलिस उत्पीड़न के मामले में दिये CBI जांच कराने के आदेश..

नवीन समाचार, नैनीताल, 12 सितंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति आलोक सिंह व न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी की खंडपीठ ने प्रदेश के एक और मामले में सीबीआई जांच कराने एवं सीबीआई को मामले की जांच शुरू करने के आदेश दे दिये हैं। साथ ही गंगनहर पुलिस को 15 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता के उत्पीड़न के प्रकरण के दस्तावेज सीबीआई को सौंपने के आदेश भी दिए हैं।
मामले के अनुसार गंग नहर हरिद्वार निवासी धीर सिंह चौहान ने याचिका दायर कर कहा कि वर्ष 2011 में थाना गंगनहर द्वारा उसको दहेज उत्पीड़न के मामले में 48 घंटे से अधिक समय के लिए पुलिस कस्टडी में रखा गया था, जिसमे याची के द्वारा कोतवाली गंगनहर के 1 निरीक्षक, 1 उपनिरीक्षक व 2 कांस्टेबलों के खिलाफ लोकायुक्त मंे मुकदमा दर्ज किया गया। लोकायुक्त ने इस मामले की जाँच करने के आदेश दिए थे। जिसमें पुलिस द्वारा उक्त पुलिस कर्मियों को बचाने की कोशिश करते हुए उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी गई। पुलिस अपने अधिकारियों को बचाने की कोशिश कर रही है।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एसआईटी से कहा-जांच में तेजी लाओ, वरना सीबीआई से कराएंगे इस घोटाले की जांच

नवीन समाचार, नैनीताल, 11 सितंबर 2019। उत्तराखंड हाई कोर्ट की सुनवाई मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खण्डपीठ ने प्रदेश के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले के मामले पर सुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने एसआईटी द्वारा दाखिल शपथ पत्र से असंतुष्ट होकर दोनों जांच अधिकारियों को जल्द से जल्द हर बिंदु की विवेचना कर उसकी रिपोर्ट 30 सिंतबर को न्यायालय के समक्ष पेश करने को कहा है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि एसआईटी ने तेजी से जांच न की तो मामले की जांच सीबीआई से कराई जाएगी। मामले में एसआईटी के दोनों अधिकारी टीसी मंजूनाथ व आईजी संजय गुंज्याल न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए।
उल्लेखनीय है कि देहरादून निवासी राज्य आंदोलनकारी रविन्द्र जुगरान ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा 2003 से अब तक अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों का छात्रवृत्ति का पैसा नहीं दिया गया जिससे स्पष्ट होता है कि 2003 से अब तक विभाग द्वारा करोड़ों रूपये का घोटाला किया गया है, जबकी 2017 में इसकी जांच के लिए पुर्व मुख्यमन्त्री द्वारा एसआईटी गठित की गयी थी और 3 माह के भीतर जांच पूरी करने को भी कहा था परन्तु इस पर आगे की कोई कार्यवाही नही हो पाई है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि इस मामले में सीबीआई जांच की जानी चाहिए।

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