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चारधाम देवस्थानम बोर्ड में गंगोत्री धाम को भी शामिल करने पर सरकार से जवाब तलब

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नवीन समाचार, नैनीताल, 20 मार्च 2020। उत्तराखंड हाइकोर्ट ने चारधाम देवस्थानम बोर्ड में गंगोत्री धाम को भी शामिल करने के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई करते हुए बोर्ड के सीईओ को नोटिस जारी कर सरकार से चार सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है । मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल की तिथि नियत की है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमुर्ति आरसी खुल्बे की खण्डपीठ में हुई। 
खण्डपीठ ने इस मामले को चारधाम देवस्थानम से जुड़ी सुब्रह्मण्यम की जनहित याचिका के साथ जोड़ दिया है। मामले के अनुसार मंदिर समिति गंगोत्री धाम ने  हाइकोर्ट ने याचिका दायर कर कहा है कि सरकार ने चारधामो के साथ गोंगोत्री धाम को भी सामील कर दिया है जो न्यायबिरुद्ध है क्योंकि यहाँ के पुजारी लोगो वर्षो से पूजा करते आये है और यह स्थानीय लोगो की आस्था के विरुद्ध है। इसे चारधाम देवस्थामन बोर्ड में शामिल नही किया जाय।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 28 फरवरी 2020। उत्तराखंड हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने वीआईपी दौरे के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से समय से काफी पूर्व यातायात व्यवस्था रोकने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए एसएसपी नैनीताल को व्यवस्थाएं व्यवस्थित करने व कम समय के लिए यातायात व्यवस्था को बाधित करने के निर्देश दिए हैं, और जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया गया।

उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के अधिवक्ता डॉ. चंद्रशेखर जोशी ने कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि वीआईपी दौरे के दौरान पुलिस तथा प्रशासन की ओर से यातायात व्यवस्था को कई घंटे बाधित किया जाता है। इसके चलते कई जरूरी कार्य प्रभावित होते हैं। घंटों यातायात रोके जाने पर लोगों के जरूरी कामकाज बाधित होते हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अनुरोध किया गया है कि वीआईपी दौरे पर कम से कम समय के लिए यातायात व्यवस्था को बाधित किया जाए। वहीं सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि देश में वीआईपी सेवा प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री को दी जाती है। उनकी सुरक्षा को देखते हुए दौरे के दौरान कुछ समय के लिए यातायात व्यवस्था को बाधित किया जाता है। मामले को सुनने के बाद कोर्ट ने कम समय के लिए यातायात व्यवस्था को बाधित करने के निर्देश दिए। 

यह भी पढ़ें : न्याय देवता के मंदिर के पुजारी सहित अन्य को हाई कोर्ट से दस्ती नोटिस देने के निर्देश

नवीन समाचार, नैनीताल, 27 फरवरी 2020। हाईकोर्ट ने अल्मोड़ा के चितई के न्याय देवता-गोलू देवता के मंदिर में जागेश्वर की तर्ज पर प्रबंधन समिति या ट्रस्ट बनाए जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 मार्च की तिथि नियत करते हुए डीएम को से पूछा है कि वे ये बताएं कि इस संबंध में 2018 में जो जांच की गई है उस रिपोर्ट में क्या हुआ। पूर्व में कोर्ट ने पुजारियों को याचिका में पक्षकार बनाने के निर्देश दिए थे। जिसके क्रम में उन्हें पक्षकार बनाया गया। बृहस्पतिवार को सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को पुजारी संतोष पंत, हरि विनोद पंत, प्रकाश पंत व कमल पंत को दस्ती नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार नैनीताल निवासी अधिवक्ता दीपक रूबाली ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहाथा कि चितई गोलज्यू के मंदिर में हर वर्ष लाखों का चढ़ावा आता है। याचिका में कहा कि मंदिर के पुजारी और उनका परिवार ही इस चढ़ावे की धनराशि लेते है। याचिकाकर्ता की ओर से चितई गोलज्यू के मंदिर को ट्रस्ट बनाने की मांग की थी। इसी प्रकरण पर पूर्व में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में हस्तक्षेप प्रार्थना पत्र दायर कर कहा था कि वह गोलज्यू से संबंधित मामले में अपना पक्ष कोर्ट में रखेगें। उन्होंने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर कर अगल से खाता खुलवाने की मांग की है। दायर प्रार्थना पत्र में मंदिर में अनियमितताओं की जांच सहित चढ़ावे और दान की जांच कराने की मांग की थी। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 मार्च की तिथि नितय करते हुए याचिकाकर्ता को दस्ती नोटिस देने के निर्देश दिए।
हिन्दुस्थान समाचार/लता नेगी

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नवीन समाचार, नैनीताल, 24 फरवरी 2020। उत्तराखंड हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के क्रम में केंद्रीय अंडर सेक्रेटरी परिवहन सुदीप दत्ता सोमवार को कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उत्तराखंड परिवहन निगम के उत्तर प्रदेश पर बकाया करीब सात सौ करोड़ दिलाने के मामले में एक माह के भीतर दोनों राज्यों के सचिवों की बैठक बुलाएंगे। किंतु कोर्ट उनके इस जवाब पर पर संतुष्ट नहीं हुई और इस आशय का प्रार्थना पत्र पेश करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 मार्च की तिथि नियत कर दी। उल्लेखनीय है कि पूर्व में कोर्ट ने केंद्रीय अपर सचिव के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकार एक ओर कर्मचारियों को समय पर वेतन-भत्ते न देकर हड़ताल करने पर मजबूर करती रही है। दूसरी ओर उनके खिलाफ एस्मा लगाने जा रही है। सरकार व परिवहन निगम न तो अस्थायी कर्मचारियों को नियमित कर रहै हैं और न ही उनको नियमित वेतन ही दिया जा रहा है। यदि सरकार उत्तर प्रदेश पर बकाया अपनी धनराशि ही वापस ले ले तो उनकी समस्याओं का समाधान हो जाये।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 18 फरवरी 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी यूनियन की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई की। मामले में आज केंद्रीय परिवहन अंडर सेकेट्री को व्यक्तितगत रूप से पेश होना था परन्तु वे पेश नही हुए इस पर कोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया। कोर्ट ने उनसे 24 फरवरी को कोर्ट में सवा दस बजे पेश होने को कहा है साथ मे एसएसपी नैनीताल को कहा है कि कोर्ट के आदेश का पालन कराएं। साथ ही मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी की तिथि नियत की है।
मामले के अनुसार उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि सरकार उनके खिलाफ एस्मा लगाने जा रही है जो नियम विरुद्ध है। सरकार उन लोगों को हड़ताल करने पर मजबूर करती आई है। सरकार व परिवहन निगम न तो उनको नियमित कर रही है, न उनको नियमित वेतन दिया जा रहा है, न उनको पिछले चार साल से ओवर टाइम दिया जा रहा है। यूनियन की ओर से कहा गया है कि उनको समय पर वेतन नही दिया जा रहा है, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनके देयक नहीं दिए जा रहे है। पिछले चार वर्षों से कर्मचारियो को ओवर टाइम काम नही दिया जा रहा है न ही उनको रेगुलर किया जा रहा है। सरकार व निगम हमेशा बजट का रोना रोते हैं जबकि स्थिति यह है कि निगम का 2002 से उत्तर प्रदेश पर 700 करोड़ और निगम का आपदा के समय का 69 करोड़ रुपया सरकार के पास बकाया है। फिर भी सरकार व निगम के पास अपने कर्मचारीयो को वेतन नही देने के लिए बजट नही है। मामले में सुनवाई 2 जुलाई को हो सकती है।

यह भी पढ़ें : हाईकोर्ट ने नियुक्ति के लिए जारी विज्ञप्ति पर लगाई रोक..

नवीन समाचार, नैनीताल, 20 फरवरी 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ अल्मोड़ा के एडम्स गर्ल्स स्कूल के प्रधानाचार्य पद के लिए जारी विज्ञप्ति पर रोक लगाते हुए सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मामले के अनुसार अल्मोड़ा निवासी प्रीति लाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विद्यालय प्रबंधन द्वारा प्रधानाचार्य पद के लिए जारी की गई विज्ञप्ति को चुनौती देते हुए कहा कि एडम्स गर्ल्स स्कूल प्रबंधन की ओर से प्रधानाचार्य पद के लिए 30 मार्च 2019 को विज्ञापन जारी किया था। इसमें प्रधानाचार्य पद के लिए उम्मीदवारी करने के लिए ईसाई महिला होने के साथ ही मेथोडिस्ट होने की अर्हता भी निर्धारित की गई थी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता हरेंद्र बेलवाल ने कोर्ट को बताया कि इससे संबंधित नियमावली के अनुसार कहीं भी प्रधानाचार्य के लिए मेथोडिस्ट होने की अनिवार्यता नहीं है। इसलिए याचिकाकर्ता की ओर से जारी विज्ञप्ति को निरस्त करने की मांग की थी। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अल्मोड़ा के एडम्स गर्ल्स स्कूल के प्रधानाचार्य पद के लिए जारी विज्ञप्ति पर रोक लगाते हुए सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।

यह भी पढ़ें : केंद्र सरकार भी होगी उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी यूनियन की याचिका, परिसंपत्तियों के बंटवारे तक पहुंचा मामला..

नवीन समाचार, नैनीताल, 10 दिसंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने रोडवेज कर्मचारी यूनियन की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए याची से केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने को कहा है। ऐसा इसलिए कि याची की ओर से कोर्ट को बताया गया कि यूपी व उत्तराखंड के विभाजन के दौरान परिसम्पतियों के बंटवारे के लिए कुछ अधिकार केंद्र सरकार के पास होने के कारण परिवहन निगम का बकाया धनराशि अभी तक नही मिल पाई इसलिए केंद्र को पक्षकार बनान अति आवश्यक है। कोर्ट ने याचिकर्ता के तर्क को स्वीकारते हुए केंद्र सरकार को पक्षकार बनाया है और 2 जनवरी तक जवाब पेश करने को कहा है।

यह भी पढ़ें : सरकार के ‘एस्मा’ के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची यह कर्मचारी यूनियन…

नवीन समाचार, नैनीताल, 1 जुलाई 2019। उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने सरकार द्वारा एस्मा लगाए जाने के विरुद्ध उत्तराखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की है। यूनियन की ओर से कहा गया है कि उनको सरकार हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर करती आई है। साथ ही हड़ताल करने पर एस्मा लगाकर कार्यवाही करने को कहती है।

यह भी पढ़ें : काबीना मंत्री यशपाल आर्य पर कथित दुराचार संबंधी आरोपों के रिकॉर्ड हाईकोर्ट ने किये तलब..

नवीन समाचार, नैनीताल, 14 दिसंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ ने राज्य के काबीना मंत्री यशपाल आर्य पर 1970 के दशक में लगे तथाकथित दुराचार संबंधी मामले के रिकॉर्ड निचली अदालत से दो सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट में तलब कर लिए हैं। बताया गया है कि इन आरोपों से आर्य पूर्व में ही बरी हो गए हैं ।

मामले के अनुसार दुराचार के आरोप से बाइज्जत बरी होने के बाद भी 2010 में दिल्ली से प्रकाशित एक पत्रिका ‘बिल्ड इंडिया’ के मुख्य सम्पादक गोपाल कृष्ण गुप्ता ने ‘यशपाल आर्य का महिला व जेल से सम्बन्ध’ शीर्षक से लेख प्रकाशित किया था। इसके खिलाफ श्री आर्य के पुत्र संजीव आर्य ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नैनीताल के समक्ष मानहानि का मुकदमा दर्ज किया, किंतु न्यायालय ने यह मुकदमा खारिज कर कहा कि इस मामले में संजीव आर्य प्रभावित पार्टी नहीं हैं। इसके खिलाफ उन्होंने जिला जज के समक्ष अपील की। जिला जज के निर्देश पर गोपाल कृष्ण गुप्ता के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुए थे। गैर जमानती वारंट के खिलाफ गुप्ता ने 2014 में हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर ले लिया था। उनका यह मामला 2014 से 13 दिसम्बर 2019 को सुनवाई हेतु न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ में लिस्ट हुआ। एकलपीठ ने पूरे मामले को मैरिट के आधार पर सुनने के लिए निचली अदालत से मुकदमे से सम्बंधित समस्त रिकार्ड हाईकोर्ट में तलब किये हैं।

यह भी पढ़ें : एसआईटी पर 100 कमरों से अधिक के घर पर कब्जा करने के लिए गृह स्वामी का उत्पीड़न करने का आरोप..

-सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल को एसआईटी के द्वारा उत्पीड़न करने पर सरकार को नोटिस
नवीन समाचार, नैनीताल, 7 दिसंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट कर्नल को एसआईटी के द्वारा उत्पीड़न करने से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि एसआईटी किस आधार पर, किन नियमों व किसके इशारों पर उनका उत्पीड़न कर रही है, और उनको बार-बार सम्मन भेज रही है। सरकार से इस पर सुनवाई की अगली तिथि 11 दिसंबर को स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक सिंह व न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की खंडपीठ में हुई।
मामले के अनुसार देहरादून निवासी रिटायर्ड ले. कर्नल वाशुदेव ने याचिका दायर कर कहा है कि उनका पुश्तैनी सौ से अधिक कमरों का घर 7-पीडी टंडन मार्ग देहरादून में है। उनके भवन को अधिकारियों के द्वारा कुछ अराजक तत्वों के साथ मिलकर कब्जा कर तोड़ने की कोशिश की जा रही है। एसआइटी कार्यालय के द्वारा उनको बार-बार बुलाकर समझौता पत्र में हस्ताक्षर करने के लिए सम्मन जारी कर बाध्य किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें : बड़ा समाचार : हाईकोर्ट ने सीबीसीआईडी को दिये अल्मोड़ा नगर पालिका के दोषी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश

-वर्ष 2009 में बिना प्रक्रिया अपनाये दो धर्मशालाओं के अलावा एनटीडी में चिल्ड्रन पार्क व ट्रक स्टैंड के निर्माण का मामला
नवीन समाचार, नैनीताल, 6 दिसंबर 2019। उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन के न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने अल्मोड़ा नगरपालिका में 2007 में टेंडर प्रक्रिया में हुई धांधली के मामले में सीबीसीआईडी को दोषी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दे दिए हैं। साथ ही सीबीसीआईडी व सरकार को 1 जनवरी से पूर्व दोषियों के खिलाफ की गई कार्यवाही की रिपोर्ट न्यायालय में पेश करने को कहा है।
मामले के अनुसार अल्मोड़ा निवासी एलके पंत व संजय अग्रवाल ने उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायधीश बारिन घोष को 2013 में पत्र लिखकर कहा था कि अल्मोड़ा नगर पालिका ने वर्ष 2007 में करीब 4.8 करोड़ रुपये की लागत के कार्यों हेतु निविदा जारी की थी। लेकिन निर्धारित समय में कोई भी निविदा न आने पर निविदा प्रक्रिया नहीं हुई। लेकिन नगरपालिका ने वर्ष 2009 में समाचार पत्रों में बिना निविदा प्रकाशित किये ही दो धर्मशालाओं के अलावा एनटीडी में चिल्ड्रन पार्क व ट्रक स्टैंड के निर्माण की निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी। इस निविदा प्रक्रिया में दिल्ली की कम्पनी की दर कम थी लेकिन नगर पालिका ने निविदा देहरादून की कम्पनी का स्वीकृत करते हुए उसे करीब 50 लाख रुपए का अग्रिम भुगतान भी कर दिया। इस प्रक्रिया को निविदा नियमावली के खिलाफ मानते हुए मुख्य न्यायधीश ने प्राप्त पत्र को 2013 में जनहित याचिका के रूप में पंजीकृत किया था और मामले की जांच सीबीसीआईडी को सोंप दी थी। सीबीसीआईडी ने 2015 में जांच पूरी कर रिपोर्ट न्यायालय में दे दी थी, इस पर न्यायालय ने दोषियों के खिलाफ कार्यवाही के आदेश दिए थे। किंतु अभी तक कार्यवाही न होने पर 27 नवम्बर 2019 को उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 1 जनवरी को होगी।

यह भी पढ़ें : सरकार ने हाईकोर्ट से कहा-हल्द्वानी में डेंगू पर पा लिया नियंत्रण, कोर्ट कल भी करेगी सुनवाई

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 नवंबर 2019। उत्तराखंड हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खण्डपीठ ने राज्य में बढ़ते डेंगू के प्रकोप को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई के लिए एक दिन बाद ही यानी 19 नवम्बर की तिथि नियत कर दी है और इस तिथि पर सरकार से जवाब पेश करने को कहा है। आज सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि हल्द्वानी में डेंगू पर नियंत्रण पा लिया गया है।
मामले के अनुसार युथ बार एसोसिएशन ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है राज्य में डेंगू के कारण कई लोगों की असमय मौत हो चुकी है स्वास्थ्य विभाग व नगर निगम द्वारा इसकी रोकथाम के लिए अभी तक जो भी कदम उठाए गए है वे पर्याप्त नही है। याचिकर्ता का कहना है कि डेंगू रोकथाम के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाए इसमे अनुभवी डॉक्टर नियुक्त किए जाए ताकि सभी पीड़ितों की जांच हो सके और उन्हें इलाज मिल सके। याचिका में डेंगू से मौत हो चुके लोगों के लिए मुआवजा देने की भी मांग की है।

यह भी पढ़ें : पंचायत चुनाव का मामला फिर हाईकोर्ट में, कोर्ट ने 25 तक मांगा जवाब

नवीन समाचार, नैनीताल, 16 नवंबर 2019। उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने हाल ही में सम्पन्न हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कुछ ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, जिला पंचायत व व्लाक प्रमुखों के मतगणना व चुनाव प्रक्रिया के विवाद को लेकर दायर याचिकाओं की सुनवाई करते हुए विपक्षियो को 25 नवम्बर तक जवाब पेश करने को कहा है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया की एकलपीठ में हुई।
मामले के अनुसार हाई कोर्ट में पंचायत चुनाव में हारे हुए 18 प्रत्याशियों ने याचिकाएं दायर की है। जिनमें अधिकतर याचिकाएं पुर्नमतगणना को लेकर दायर की गई हैं जबकि कुछ याचिकाएं जीते हुए प्रत्याशियों द्वारा चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन न करने को लेकर दायर की गई है। उदाहरण के तौर पर सितारगंज ब्लाक प्रमुख पद पर पराजित प्रत्याशी उमा त्रिपाठी ने ब्लाक प्रमुख बनी कमलजीत कौर पर सरकारी नौकरी में होते हुए चुनाव लड़ने के आरोप लगाए है इसी तरह सितारगंज से ही चुनाव हारी सपना ने चुनाव जीती प्रत्याशी की कक्षा आठ की मार्कशीट फर्जी बताई है। ग्राम जुम्मा विकास खण्ड धारचूला से प्रधान का चुनाव हारे दिनेश राम व इंदर राम का आरोप है कि उनके पक्ष में दिए गए 195 मत अवैध घोषित कर दिए गए। टिहरी गढ़वाल के कटखेत वार्ड से वीडीसी का चुनाव हारी पार्वती देवी ने अपनी याचिका में कहा कि वह 37 वोट से चुनाव जीत गयी थी लेकिन बाद में 367 वोटों से पराजित दिखाया गया।

यह भी पढ़ें : विधानसभा चुनाव में ईवीएम में हुई गड़बड़ी की शिकायत पर एकलपीठ में सुनवाई पूरी, निर्णय सुरक्षित

नवीन समाचार, नैनीताल, 13 नवंबर 2019। उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ ने प्रदेश के 2017 में हुए विधान सभा चुनाव में ईवीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में हुई गड़बड़ी के मामले में सुनवाई पूरी कर अपना निर्णय सुनवाई के बाद सुुरक्षित रख लिया है।
मामले के अनुसार कांग्रेस के हारे हुए प्रत्याशी नवप्रभात, विक्रम सिंह, राजकुमार, अम्बरीष कुमार, प्रभुलाल बहुगुणा व गोदावरी थापली ने भाजपा के जीते हुए प्रत्याशी विजय सिंह, मुन्ना सिंह चौहान, खजान दास, आदेश चौहान, उमेश शर्मा काऊ और गणेश जोशी के निवार्चन को चुनाव याचिका दायर कर चुनौती दी थी। याचिका में चुनाव आयोग व सरकार पर आरोप लगाया गया था कि इन प्रत्यशियों ने जीतने के लिए ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी की थी। लिहाजा उनके निवार्चन को निरस्त किया जाये। बुधवार को सुनवाई के दौरान जीते हुए प्रत्याशियों की ओर से जिरह करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सत्यपाल जैन ने एकलपीठ को अवगत कराया कि सभी चुनाव याचिकाएं आधारहीन हैं और चुनाव याचिकाओं में किस पोलिंग बूथ पर ईवीएम में गड़बड़ी हुए है इसकी स्पष्ट जानकारी नही दी गई है।

यह भी पढ़ें : पूर्व जिपं अध्यक्ष द्वारा स्कूल की भूमि गाड़ियों की एजेंसी को देने की जांच मंडलायुक्त करेंगे: हाई कोर्ट

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 नवंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने हल्द्वानी के ग्राम किशनपुर घुरदौडा में स्कूल की 14 बीघा जमीन को जिला पंचायत नैनीताल के द्वारा गाड़ियों की एजेंसी-बजरंग मोटर्स के दलीप कुमार अग्रवाल को लीज पर व्यवसायिक कार्य करने हेतु देने के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कुमाऊं मंडलायुक्त को मौका मुआयना कर भूमि की नवीनतम फोटो सहित दस दिन के भीतर शपथपत्र के साथ रिपोर्ट पेश करने को कहा है। साथ ही कोर्ट ने अग्रिम आदेश तक इस भूमि पर किसी भी तरह के निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जिला पंचायत को स्कूल की भूमि को लीज पर देने का कोई अधिकार नही है।
मामले के अनुसार ललित मोहन सिंह नेगी निवासी मानस विहार हल्द्वानी ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि पूर्व के जिला पंचायत अध्यक्ष व सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से किशनपुर घुरदौडा स्कूल की 14 बीघा भूमि को मैसर्स बजरंग मोटर्स रामपुर रोड हल्द्वानी के दलीप कुमार को व्यवसायिक कार्य करने हेतु लीज पर दी गयी है। इस पर अग्रवाल ने बजरंग मोटर, आटोमोबाइल व वर्कशॉप खोला है। उनकी शिकायत पर पूर्व में एसडीएम द्वारा जांच की गई जिसमें यह 14 बीघा भूमि स्कूल के नाम में दर्ज थी, जिसको तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष कमलेश शर्मा, अपर मुख्य अधिकारी हिमाली जोशी, अपर मुख्य अधिकारी कमलेश बिष्ठ, कर निरीक्षक पंकज रावत व कर निरीक्षक कुंवर सिंह ने मिलकर सरकार को बिना बताए लीज पर दे दिया। इसकी शिकायत जब जिला अधिकारी से की गई तो जिला अधिकारी ने इन पर कार्यवाही के लिए सरकार से संस्तुति की परंतु आज तक दोषियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नही की गई।

यह भी पढ़ें : विद्यालय प्रबंधन ने संस्थापक के पौत्र अधिवक्ता को सदस्यता देने से कर दिया था इंकार, HC ने दिया अंतिम फैसला

-काण्डपाल को विद्यालय प्रबंधन समिति का सदस्य बनाने का आदेश, मिली ससम्मान जीत

नवीन समाचार, नैनीताल, 6 नवंबर 2019। अल्मोड़ा के द्वाराहाट स्थित अशासकीय विद्यालय-आदर्श इंटर कॉलेज सुरईखेत बिठोली प्रबंधन ने प्रबंधन के सदस्य बनने हेतु क्षेत्रीय निवासी व इसी विद्यालय के संस्थापक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व यूपी के पूर्व मंत्री स्व.हरी दत्त काण्डपाल के पौत्र व सामाजिक सरोकारों के प्रबल पैरोकार अधिवक्ता जेपी काण्डपाल को विधिवत विद्यालय में ड्राफ्ट जमा कराने व अन्य सभी औपचारिताएँ पूरी करने के बावजूद बिना कारण बताए ड्राफ्ट काण्डपाल को वापस कर दिया था। इसे काण्डपाल ने नैनीताल हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट की फटकार पर विद्यालय के प्रधानाचार्य ने काण्डपाल को सदस्य बनाये जाने के विषय मे पत्र लिखा, जिसे कोर्ट ने अवैधानिक माना। इधर बुधवार 6 नवंबर को मामले को सुनने के बाद कोर्ट ने काण्डपाल को तुरन्त प्रभाव से विद्यालय प्रबंधन समिति का सदस्य बनाये जाने का मैनेजमेंट को आदेश दिया है। याचिकाकर्ता जेपी काण्डपाल ने न्यायालय के फैसले को सच्चाई की जीत बताया है।

यह भी पढ़ें : पुलिस ने चोरों को ही सोंप दिये थे चोरी के वाहन, अब हाईकोर्ट ने सरकार से किया जवाब तलब

नवीन समाचार, नैनीताल, 31 अक्टूबर 2019। वर्ष 2018 में जसपुर ऊधमसिंह नगर पुलिस पर चोरी की गाड़ियों को चोरों को ही सोंपने के आरोप लगे थे। इस मामले में अब उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सरकार से सोमवार तक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
उल्लेखनीय है कि जसपुर निवासी सुरेंद्र सिंह ने इस मामले में उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि पुलिस ने 2018 में जसपुर में पजेरो, टाटा सफारी सहित अन्य मॉडल के कुछ महंगी गाड़ियों को पकड़ा था और इस मामले में स्वयं ही एफआईआर भी दर्ज कराई थी। जांच में यह बात प्रकाश में आई कि इन वाहनों के चेचिस नंबर खरोंचे हुए थे, यानी यह वाहन चोरी के थे। बावजूद पुलिस ने इन वाहनों को इन नंबरों को चेसिस बदलकर प्रयोग करने वाले, खुद को इन गाड़ियों का मालिक बताने वाले लोगों को भी सोंप दिये थे। याचिका में पूछा गया है कि जांच में चोरी के वाहन साबित होने के बावजूद इनकी वापसी किस आधार पर की गई, इसकी जांच की जाए। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की संयुक्त खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को मामले की सुनवाई करते हुए सरकार से इस मामले में स्पष्ट करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

यह भी पढ़ें : देहरादून नगर निगम को एक कंपनी पर उड़ेले प्रेम पर हाईकोर्ट ने दिया बड़ा झटका

-ट्रेफिक अम्ब्रेला का ठेका निरस्त करने व विज्ञापन हटाने के आदेश
नवीन समाचार, नैनीताल, 20 सितंबर 2019। देहरादून नगर निगम को एक विज्ञापन कंपनी पर नियमविरुद्ध उड़ेले गये प्रेम पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नगर निगम देहरादून द्वारा वेलअप एडवरटाईजिंग कंपनी को दिया गया ठेका निरस्त करते हुए उसके द्वारा लगाए गए ट्रेफिक अम्ब्रेला के विज्ञापन को हटाने के आदेश दिये हैं। न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार कैटालेएस्ट एडवरटाईजिंग मीडिया व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि नगर निगम देहरादून की ओर से नगर निगम अधिनियम व उसके अंतर्गत बनाए गए बाइलॉज का उल्लंघन करते हुए वेलअप एडवरटाईजिंग कंपनी को ट्रेफिक अम्ब्रेला पर पंद्रह वर्ष तक विज्ञापन लगाने को ठेका दे दिया गया है, जबकि नगर निगम द्वारा दो वर्ष से अधिक का ठेका नहीं दिया जा सकता है। लिहाजा याची की ओर से इस दिए गए ठेके को निरस्त करने की मांग की गई थी। दोनों पक्षों की सुनवाई करने के बाद हाई कोर्ट की एकलपीठ ने वेलअप एडवरटाईजिंग कंपनी को दिया गया ठेका निरस्त करते हुए नगर निगम देहरादून को आदेशित किया कि इनके द्वारा लगाए गए ट्रेफिक अम्ब्रेला के विज्ञापन को हटाया जाए।

यह भी पढ़ें : बड़ा समाचार: हाईकोर्ट ने उत्तराखंड के एक और, पुलिस उत्पीड़न के मामले में दिये CBI जांच कराने के आदेश..

नवीन समाचार, नैनीताल, 12 सितंबर 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति आलोक सिंह व न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी की खंडपीठ ने प्रदेश के एक और मामले में सीबीआई जांच कराने एवं सीबीआई को मामले की जांच शुरू करने के आदेश दे दिये हैं। साथ ही गंगनहर पुलिस को 15 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता के उत्पीड़न के प्रकरण के दस्तावेज सीबीआई को सौंपने के आदेश भी दिए हैं।
मामले के अनुसार गंग नहर हरिद्वार निवासी धीर सिंह चौहान ने याचिका दायर कर कहा कि वर्ष 2011 में थाना गंगनहर द्वारा उसको दहेज उत्पीड़न के मामले में 48 घंटे से अधिक समय के लिए पुलिस कस्टडी में रखा गया था, जिसमे याची के द्वारा कोतवाली गंगनहर के 1 निरीक्षक, 1 उपनिरीक्षक व 2 कांस्टेबलों के खिलाफ लोकायुक्त मंे मुकदमा दर्ज किया गया। लोकायुक्त ने इस मामले की जाँच करने के आदेश दिए थे। जिसमें पुलिस द्वारा उक्त पुलिस कर्मियों को बचाने की कोशिश करते हुए उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी गई। पुलिस अपने अधिकारियों को बचाने की कोशिश कर रही है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 11 सितंबर 2019। उत्तराखंड हाई कोर्ट की सुनवाई मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खण्डपीठ ने प्रदेश के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले के मामले पर सुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने एसआईटी द्वारा दाखिल शपथ पत्र से असंतुष्ट होकर दोनों जांच अधिकारियों को जल्द से जल्द हर बिंदु की विवेचना कर उसकी रिपोर्ट 30 सिंतबर को न्यायालय के समक्ष पेश करने को कहा है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि एसआईटी ने तेजी से जांच न की तो मामले की जांच सीबीआई से कराई जाएगी। मामले में एसआईटी के दोनों अधिकारी टीसी मंजूनाथ व आईजी संजय गुंज्याल न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए।
उल्लेखनीय है कि देहरादून निवासी राज्य आंदोलनकारी रविन्द्र जुगरान ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि समाज कल्याण विभाग द्वारा 2003 से अब तक अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों का छात्रवृत्ति का पैसा नहीं दिया गया जिससे स्पष्ट होता है कि 2003 से अब तक विभाग द्वारा करोड़ों रूपये का घोटाला किया गया है, जबकी 2017 में इसकी जांच के लिए पुर्व मुख्यमन्त्री द्वारा एसआईटी गठित की गयी थी और 3 माह के भीतर जांच पूरी करने को भी कहा था परन्तु इस पर आगे की कोई कार्यवाही नही हो पाई है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि इस मामले में सीबीआई जांच की जानी चाहिए।

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