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डीएम ने की ब्लॉक प्रमुख को निलंबित करने की सिफारिश, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

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-अपने चहेतों को कम कीमत पर दुकानें आवंटित करने और बिना निविदा व वन विभाग की अनुमति बिना पेड़ काटने के हैं आरोप
नवीन समाचार, नैनीताल, 7 अगस्त 2019। उत्तराखंड हाई की वरिष्ठ न्यायमूर्ति सुुधांशु धूलिया की एकलपीठ ने काशीपुर के ब्लॉक प्रमुख गुरमुख सिंह को निलंबित किए जाने के सम्बन्ध में जिला अधिकारी ऊधम सिंह नगर द्वारा शासन को की गयी संस्तुति को निरस्त करने के सम्बन्ध में उनके द्वारा दायर याचिका की सुनवाई करते हुए सरकार से तीन सप्ताह में जवाब पेश करने को कहा है।
मामले के अनुसार विकास खंड काशीपुर परिसर में सरकारी निधि से 17 दुकानों के शॉपिंग कॉप्लेक्स का निर्माण किया गया था। इनमें छोटी दुकानों के लिए पाँच लाख और बड़ी दुकानों के लिए पाँच लाख से अधिक की धनराशि निर्धारित की गयी थी परन्तु जिन लोगो ने इन दुकानों के लिए आवेदन किया था, दुकानें उन्हें न देकर उससे कम धनराशि में अपने चहेतों को को दे दी गयीं। इसके साथ ही खंड विकास अधिकारी द्वारा परिसर में स्थित 75 पेड़ों की नीलामी हेतु निविदा आमंत्रित किये बिना और वन विभाग की अनुमति लिये बिना पेड़ काट दिए गए। इस मामले में याचिकाकर्ता ने अपने करीबियों को कम दामांे पर दुकानें आवंटित करने वालों और बिना वन विभाग के अनुमति के पेड़ काटने वालों पर कार्यवाही की मांग की थी। इस पर जिला अधिकारी ऊधम सिंह नगर द्वारा कराई गयी जाँच में ब्लॉक प्रमुख गुरमुख सिंह, खण्ड विकास अधिकारी व अन्य लोग दोषी पाये गए। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में ब्लॉक प्रमुखो का का कार्यकाल 8 अगस्त को समाप्त हो रहा है।

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यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में 6 माह से बंद पड़े स्लॉटर हाउसों को खोलने के लिए हाईकोर्ट के आशाजनक आदेश

-राज्य में तीन माह के भीतर स्लॉटर हाउसों को अस्तित्व में लाने के आदेश

नवीन समाचार, नैनीताल, 7 मार्च 2019। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अपने आदेश पर सितम्बर 2018 से राज्य में बंद पड़े स्लॉटर हाउसों यानी पशुवधशालाओं के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए नगर आयुक्त हल्द्वानी नगर निगम को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने तथा नगर पालिका नैनीताल के अधिशासी अधिकारी 1 सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने एवं नगर पालिका रामनगर को डीपीआर तथा स्लॉटर हाउस को चालू करने के समय की जानकारी प्रस्तुत करने के आदेश दिये हैं। साथ ही राज्य सरकार से 3 माह के भीतर स्लॉटर हाउसों को अस्तित्व में लाने के आदेश जारी किये है राज्य सरकार से सुप्रीम कोर्ट में फाइल एसएलपी जानकारी कोर्ट में पेश करने को भी कहा है। आगे मामले की अगली सुनवाई के एक सप्ताह बाद की तिथि नियत की गई है।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में नैनीताल हाईकोर्ट की एकलपीठ ने प्रदेश के सभी अवैध स्लॉटर हाउसों को बंद करने के आदेश दिए थे और कहा था कि खुले में किसी भी प्रकार से जानवरों को ना काटा जाए। इसके बाद से पूरे प्रदेश भर में सरकार ने स्लॉटर हाउसों को बंद कर दिया हैं, और राज्य में बाहरी राज्यों खासकर पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से लाकर मांश बेचा जा रहा है। सरकार के आदेश को प्रदेश के मीट कारोबारियों-रामनगर के मोहम्मद यूनूस और नैनीताल के जाकिर हसन ने नैनीताल हाईकोर्ट में चुनौती देकर कहा था पूर्व में हाईकोर्ट ने 9 दिसंबर 2011 को एक आदेश जारी कर प्रदेश में मानकों के अनुसार स्लॉटर हाउस बनाने के निर्देश दिये थे, लेकिन आठ साल बीत जाने के बाद भी कोर्ट के आदेशो का पालन नही किया गया है। इस वजह से स्लॉटर हाउस बंद पड़े हैं। लिहाजा कोर्ट के आदेश का पालन ना करने वाले अधिकारियो के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की जाए।
वहीं स्लॉटर हाउस बंद किये जाने के उच्च न्यायालय आदेश के खिलाफ सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अपील-एसएलपी भी दायर की है ताकि मीट कारोबारियो को राहत मिल सके।

नवीन जोशी

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