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कुमाऊं मंडल के आयुक्त सहित 16 आईएएस एवं पांच पीसीएस के तबादले, दो जिलों के डीएम भी बदले

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नवीन समाचार, देहरादून, 21 मई 2020। उत्तराखंड शासन ने बृहस्पतिवार को आईएएस एवं पीसीएस अधिकारियों के बड़े पैमाने पर स्थानांतरण कर दिये हैं। खासकर ऊधमसिंह नगर के डीएम डा. नीरज खैरवाल से कुमाऊं मंडल के आयुक्त पद का अतिरिक्त प्रभार हटा लिया गया है, और उनकी जगह पूर्व में नैनीताल के डीएम रहे व वर्तमान में शासन में कई विभागों के सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी को कुमाऊं मंडल के आयुक्त बना दिया है। वहीं टिहरी के जिलाधिकारी व टिहरी बांध परियोजना के पुर्नवास निदेशक वी षणमुगम को हटाकर शासन में भेज दिया गया हैै। जबकि उनके स्थान पर रुद्रप्रयाग के डीएम मंगेश घिल्डियाल को टिहरी का डीएम बनाया गया है। पिथौरागढ़ की सीडीओ आईएएस वंदना को रुद्रप्रयाग का जिलाधिकारी बनाया गया है। इनके अलावा आईएएस ओम प्रकाश से कई विभाग हटा लिये गये हैं, जबकि बाध्य प्रतीक्षा में खाली चल रहे दीपेंद्र चौधरी को दायित्व मिल गये हैं। आरके सुधांशु व आर मीनाक्षी सुंदरम का वजन भी बढ़ा है। वहीं अमित नेगी के विभागों में कटौती की गई है। शैलेश बगौली को परिवहन आयुक्त की जगह आपदा प्रबंधन में सचिव, नितेझ झा को चिकित्सा व चिकित्सा शिक्षा की जगह सिंचाई व पेयजल, हदबंश सिंह चुघ को पंचायती राज से वन एवं पर्यावरण का दायित्व मिला है। बृजेश संत को पंचायती राज सचिव भी हो गये हैं।
वहीं पीसीएस अधिकारियों की बात करें तो डा. अभिषेक त्रिपाठी से एनएचएम तथा प्रदीप रावत से राज्य संपत्ति अधिकारी के दायित्व वापस ले लिये गये हैं। अरविंद पांडे को रुद्रप्रयाग के एडीम अरविंद पांडे को यहां से हटाकर देहरादून का एडीएम प्रशासन व रामजी शरण शर्मा को देहरादून में इसी पद से रुद्रप्रयाग भेजा गया है। झरना कमठान को महिला सशक्तीकरण हटाकर एनएचएम का अतिरिक्त मिशन डायरेक्टर बनाया गया है।

यह भी पढ़ें : मुंबई की गायिका ने उत्तराखंड के पूर्व आईएएस अधिकारी के खिलाफ पुलिस मुख्यालय में की शिकायत

नवीन समाचार, देहरादून, 7 मई 2020। मुंबई में रहने वाली उत्तराखंड मूल की एक महिला गायिका ने नैनीताल जनपद के रहने वाले एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ई-मेल के जरिए महिला गायिका ने पुलिस मुख्यालय में शिकायत की है। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने बताया कि महिला ने बुधवार को ईमेल के जरिये शिकायत की थी। शिकायत फेसबुक के जरिये भेजे गये संदेशों को लेकर है। आज बृहस्पतिवार को उन्होंने मामले की जांच नैनीताल के एसएसपी को भेज दी है। उनसे महिला पुलिस अधिकारी से आरोपों की जांच करने को कहा गया है। भवाली की सीओ अनुषा बडोला जांच कर सकती हैं।

यह भी पढ़ें : डा. नीरज खैरवाल को कुमाऊं मंडलायुक्त पद का अतिरिक्त प्रभार

नवीन समाचार, नैनीताल, 31 मार्च 2020। ऊधमसिंह नगर जनपद के जिलाधिकारी डा. नीरज खैरवाल एक अप्रैल से कुमाऊं मंडल के आयुक्त पद का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। कुमाऊं मंडल के आयुक्त राजीव रौतेला के मंगलवार 31 मार्च को अधिवर्षता आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त होने पर शासन ने डा. खैरवाल को यह अतिरिक्त दायित्व देतेे हुए उनसे अविलंब पदभार ग्रहण करने को कहाा है। उल्लेखनीय है कि डा. खैरवाल तराई बीज विकास निगम के प्रबंध निदेशक पद का दायित्व भी संभाल रहे हैं।

यह भी पढ़ें : डेढ़ वर्ष से काबिज वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी को 31 मार्च तक सरकारी आवास खाली करने का अल्टीमेटम

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 मार्च 2020। डीएम सविन बंसल ने नैनीताल जनपद में करीब डेढ़ वर्ष पूर्व बड़े जिम्मेदार पद पर रहे एक वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी को भीमताल स्थित सरकारी आवास को 31 मार्च तक खाली करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारी से आवास किराये के 1.40 लाख रुपये वसूलने को भी कहा गया है तथा 31 मार्च तक आवास खाली नहीं करने पर सार्वजनिक भू-गृहादि अधिनियम के तहत कार्यवाही की चेतावनी भी दी है। जिला प्रशासन से हुई पुष्टि के अनुसार वर्तमान में जनपद के सीमावर्ती जनपद में जनपद के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत इन अधिकारी को भीमताल में टाइप-4 का आवास आवंटित था। लेकिन करीब डेढ़ वर्ष पूर्व स्थानांतरण होने के बावजूद उन्होंने आवास खाली नहीं किया है।

यह भी पढ़ें : 4 आईएएस-पीसीएस अधिकारियों के बदले दायित्व, 2 आईएएस अब भी बे’काम

नवीन समाचार, देहरादून, 24 फरवरी 2020। सोमवार को सरकार ने देवस्थानम बोर्ड के गठन के बाद से ही पहले सीईओ को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए गढ़वाल मंडल के आयुक्त को सीईओ को प्रभार दे दिया है। अब जल्द ही बोर्ड में उपाध्यक्ष सहित अन्य सदस्यों की नियुक्त होगी। बोर्ड का उपाध्यक्ष कैबिनेट स्तर का हिंदू मंत्री ही हो सकता है। इसके अलावा शासन ने सोमवार को दो आईएएस समेत एक पीसीएस अफसर का तबादला आदेश भी जारी किया। प्रभारी सचिव खेल एवं युवा कल्याण ब्रजेश संत से निदेशक युवा कल्याण का प्रभार हटा दिया गया है। अब संत के पास सचिव खेल एवं युवा कल्याण के अलावा निदेशक खेल का ही प्रभार रहेगा। वहीं मुख्य विकास अधिकारी देहरादून गिरधारी सिंह रावत का तबादला निदेशक युवा कल्याण के पद पर किया है। वहीं आईएएस नितिका खंडेलवाल से अपर निदेशक प्रशिक्षण निदेशालय हल्द्वानी का प्रभार हटा दिया है। उनका तबादला मुख्य विकास अधिकारी देहरादून के पद पर किया है। वहीं दो आईएएस सचिन कुर्वे और दीपेंद्र चौधरी को अभी तक काम नहीं सौंपा। सचिव स्तर के सचिन को डेपुटेशन से लौटे तीन सप्ताह से अधिक का समय हो गया है। वहीं जिलाधिकारी हरिद्वार के पद से हटाए गए दीपेंद्र चौधरी को भी बाध्य प्रतीक्षा में रखा गया है।

यह भी पढ़ें : नैनीताल के डीएम रहे उत्तराखंड के एक वरिष्ठ आईएएस बने मुख्यमंत्री के और दूसरे प्रधानमंत्री के सलाहकार

डा. राकेश कुमार

नवीन समाचार, नई दिल्ली/देहरादून, 22 फरवरी 2020। उच्च प्रशासनिक हलकों से आ रही खबरों के अनुसार उत्तराखंड के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मुख्यमंत्री जबकि दूसरे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रधानमंत्री के सलाहकार बन गए हैं। यह संयोग है कि दोनों आईएएस अधिकारियों का संबंध नैनीताल और उत्तराखंड से है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 30 अगस्त 2004 से 30 सितंबर 2006 तक नैनीताल के जिलाधिकारी रहे भारत सरकार के यूएनडीपी में वरिष्ठ सलाहकार के पद पर भी तैनात 1992 बैच के आईएएस अधिकारी डा. राकेश कुमार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली है। उन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की मंजूरी भी मिल गई है। इसके साथ ही डा. कुमार को मुख्यमंत्री के मानद सलाहकार के पद की नई जिम्मेदारी भी मिल गई है। यह भी बताया जा रहा है कि वह मुख्यमंत्री के मानद सलाहकार के साथ ही यूएनडीपी में मुख्य सलाहकार की भूमिका भी साथ में निभाएंगे।

आईएएस अधिकारी भास्कर खुल्बे

वहीं मूलरूप से अल्मोड़ा जनपद के भिकियासैंण के निवासी एवं 1979 में नैनीताल के डीएसबी परिसर से उच्च शिक्षा लेने वाले 1983 बैच के आईएएस अधिकारी भास्कर खुल्बे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सलाहकार बनाया गया है। इतने महत्वपूर्ण पद पर पहुंचने वाले वे प्रदेश के पहले आईएएस अधिकारी बताए जा रहे हैं। खुल्बे पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु के करीबी अधिकारी भी रहे हैं। श्री खुल्बे के पिता ठेकेदार स्वर्गीय ख्यालीराम खुल्बे तल्लीताल रिक्शा स्टैंड के ऊपर रहते थे।

यह भी पढ़ें : 18 पीसीएस अधिकारी बनेंगे आईएएस, 48 को झटका…

नवीन समाचार, देहरादून, 16 फरवरी 2020। उत्तराखंड के सीधी भर्ती के 18 पीसीएस अधिकारी अपनी वरिष्ठता की जंग जीत गए हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने नैनीताल उच्च न्यायालय के वर्ष 2011 के आदेश को निरस्त करते हुए तदर्थ नियुक्ति पाकर एसडीएम बने 48 अधिकारियों को जूनियर माना है। इसके साथ ही सीधी भर्ती के अधिकारियों के आइएएस बनने की राह भी खुल गई है। वरिष्ठता विवाद के चलते ही पिछले कई सालों से यह मामला लटका था।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश से अलग होकर वर्ष 2000 में जब उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ, तब पूर्ववर्ती प्रदेश से पीसीएस अधिकारी बहुत कम संख्या में उत्तराखंड आए थे। अधिकारियों की कमी को देखते हुए सरकार ने तहसीलदार व कार्यवाहक तहसीलदारों को तदर्थ पदोन्नति देकर उपजिलाधिकारी (एसडीएम) बना दिया था। यह सिलसिला वर्ष 2003 से 2005 तक चला। उसी दौरान वर्ष 2005 में सीधी भर्ती से 20 पीसीएस अधिकारियों का चयन हुआ। इनमें से दो का अखिल भारतीय सेवा में चयन होने के चलते संख्या 18 रह गई। विवाद की स्थिति तब पैदा हुई, जब उत्तराखंड शासन ने अधिकारियों की पदोन्नति के लिए वर्ष 2010 में एक सीधी भर्ती व एक तदर्थ पदोन्नति का फॉर्मूला तैयार कर आपत्तियां मांगीं। सीधी भर्ती के अधिकारियों ने यह कहते हुए इसका विरोध किया कि तदर्थ पदोन्नति वाले अधिकारियों को वर्ष 2007 में कन्फर्म किया गया है और वे 2005 बैच के अधिकारी हैं। शासन ने भी इसी के अनुरूप पदोन्नति निर्धारित कर दी। इस आदेश के खिलाफ तदर्थ पदोन्नति वाले अधिकारी नैनीताल हाईकोर्ट चले गए और कोर्ट ने वर्ष 2011 में आदेश जारी कर यह माना कि वरिष्ठता क्रम तदर्थ पदोन्नति से ही गिना जाएगा। हालांकि, इस आदेश से नाखुश सीधी भर्ती के अधिकारियों ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर दी। आठ साल से अधिक समय तक चले इस मामले में अंतिम सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एल नागेश्वर राव व दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि तदर्थ पदोन्नति के समय को वरिष्ठता के लिए शामिल नहीं किया जा सकता। लिहाजा, वर्ष 2007 में कन्फर्म किए जाने के समय से ही 48 अधिकारियों की वरिष्ठता तय की जाएगी। तदर्थ पदोन्नति पाकर एसडीएम बने 48 अधिकारियों और सीधी भर्ती के 18 पीसीएस अधिकारियों के बीच विवाद का कारण कट-पेस्ट कर तैयार की गई सेवा नियमावली बनी। हिंदी की नियमावली में तदर्थ पदोन्नति को स्पष्ट करने वाले शब्द छूट गए थे और अंग्रेजी की नियमावली को कोर्ट ने नहीं माना। हुआ यह कि उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद उत्तराखंड में नियमावलियों को अंगीकार कर लिया गया। वहीं, कुछ में कट-पेस्ट कर उसे लागू कर दिया गया। पीसीएस अधिकारियों की सेवा नियमावली को लेकर यही कट-पेस्ट भारी पड़ गया। जब सेवा नियमावली अंग्रेजी व हिंदी में तैयार की गई थी। हिंदी वाली नियमावली में तदर्थ संबंधी शब्द छूट गए थे, जबकि अंग्रेजी में तैयार की गई नियमावली में तदर्थ पदोन्नति पर स्थिति साफ की गई थी। हालांकि, जब यह मामला कोर्ट में पहुंचा तो कोर्ट ने कहा कि हिंदी राजभाषा है, लिहाजा इसी को अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। इस बीच राज्य सरकार ने हिंदी की नियमावली की खामी को दूर कर दिया। यही कारण है कि सीधी भर्ती वाले पीसीएस अधिकारी अब सुप्रीम कोर्ट से न्याय प्राप्त करने में सफल हो गए।

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