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नया साल आया तो उत्तराखंड के 8 आईएएस व 5 पीसीएस अधिकारियों के लिए

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नवीन समाचार, देहरादून, 01 जनवरी 2020। जी हां, नया साल तो वाकई पहले दिन ही राज्य के 8 आईएएस व 5 पीसीएस अधिकारियों के लिए सबसे पहले शुभ हुआ है। उत्तराखंड शासन ने 2005 बैच के 5 आईएएस अधिकारियों को ‘सुपर टाइम स्केल’ में पदोन्नत कर दिया है। आईएएस रंजीत कुमार सिन्हा, एसए मुरुगेशन, विनोद प्रसाद रतूड़ी, सुशील कुमार और हरि चंद्र सेमवाल को साल के पहले दिन पदोन्नति मिली है। माना जा रहा है कि जल्द ही पदोन्नतियों के बाद उन्हें नई बड़ी जिम्मेदारियां भी मिल जाएंगे। वहीं 3 आईएएस अधिकारियों को केंद्र में संयुक्त सचिव के पद पर भेजा जा रहा है। इनमें आईएएस अधिकारी सौजन्या, उनके पति आईएएस अधिकारी दिलीप जावलकर और आईएएस अधिकारी सचिन कुर्वे शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि सचिन कुर्वे पर किस्मत और व्यवस्था कुछ अधिक ही मेहरबान है। वह अभी महाराष्ट्र में प्रतिनियुक्ति काट कर आये हैं। महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू रहने के दौरान वे राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के सचिव भी रहे।
इनके अलावा आईपीएस अधिकारी अभिनव कुमार एडीजी एवं विम्मी सचदेवा आईजी पर पर पदोन्नत हुई हैं। वहीं आईपीएस निवेदिता कुकरेती, पी रेणुका देवी व बरिंदरजीत सिंह को पे बेंड मैट्रिक्स मिल गया है।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 01 दिसम्बर 2020। प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने मंगलवार को लोक सभा महासचिव का कार्यभार ग्रहण किया। उल्लेखनीय है कि 1986 बैच के आईएएस अधिकारी सिंह कुमाऊं से दूसरे जिलाधिकारी हैं जो इस पद पर पहुंचे हैं। वह 2001-2002 में नैनीताल के डीएम रह चुके हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि श्री सिंह ने कुमाऊं के अल्मोड़ा जिले के रानीखेत के संयुक्त मजिस्ट्रेट पाली पद से अपनी प्रशासनिक सेवा की शुरूआत की थी।

लोक सभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह, पूर्व महासचिव अनूप मिश्रा व राज्य सभा के महासचिव देशदीपक वर्मा।

उनसे पहले उत्तर प्रदेश कैडर के 1978 बैच के आईएएस अधिकारी अनूप मिश्रा कुमाऊं के अल्मोड़ा जिले के 28 जनवरी 1985 से 21 अगस्त 1986 तक डीएम रहे, पहले अधिकारी थे जो लोक सभा महासचिव का यह पद पूर्व में एक दिसंबर 2014 से 30 नवंबर 2017 संभाल चुके हैं। तत्कालीन लोक सभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने उनकी तैनाती की थी। यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य सभा के वर्तमान महासचिव देश दीपक वर्मा भी अल्मोड़ा के डीएम रह चुके हैं। उप्र संवर्ग के 1978 बैच के आईएएस वर्मा ने एक सितंबर 2017 में राज्य सभा के महासचिव का कार्यभार संभाला था। इस संयोग पर कुमाऊं मंडल के प्रशासनिक हल्कों में खुशी महसूस की जा रही है।

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Imageनवीन समाचार, देहरादून, 20 नवम्बर 2020। उत्तराखंड के अगले पुलिस महानिदेशक पद के लिए शुक्रवार को तस्वीर साफ हो गई है। 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी अशोक कुमार उत्तराखंड के अगले पुलिस महानिदेशक होंगे। वह 30 नवंबर को रिटायर हो रहे वर्तमान पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी की जगह लेंगे। राज्यपाल की मंजूरी के बाद शुक्रवार को उनकी नियुक्ति के आदेश जारी हो गए हैं। उन्हें उनसे वरिष्ठ 1986 बैच के आईपीएस एमए गणपति पर तरजीह मिली है, जो 1990 बैच के एक अन्य वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वी विनय कुमार के साथ उस तीन सदस्यीय पैनल में शामिल थे, जिसमें से ही प्रदेश के नए पुलिस महानिदेशक पद पर आईपीएस अशोक कुमार को प्रदेश के पुलिस मुखिया पद का दायित्व मिला है। उ अशोक कुमार वर्तमान में महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

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नवीन समाचार, देहरादून, 18 नवम्बर 2020। उत्तराखंड सरकार ने बुधवार को पुनः 3 आईएएस एवं 2 पीसीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। आज की तबादला सूची में एक बार पुनः आईएएस अधिकारी वंदना सिंह का तीसरी बार तबादला कर दिया गया है। उनसे पिछले दिनों कुमाऊं मंडल विकास निगम के एमडी एवं नैनीताल जिला विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पद का दायित्व वापस ले लिया गया है। जबकि इस पद से स्थानांतरित किए गए आईएएस रोहित मीणा को उनके पूर्व पद पर ही वापस स्थानांतरित कर दिया गया है। श्री मीणा को अल्मोड़ा का मुख्य विकास अधिकारी बनाया गया था। अब उनकी जगह उत्तराखंड प्रशासनिक अकादमी में संयुक्त निदेशक के पद पर कार्यरत नवनीत पांडेय को अल्मोड़ा का नया मुख्य विकास अधिकारी बनाया गया है। जबकि वंदना सिंह से ग्राम्य विकास विभाग में सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं इस पद की अब तक जिम्मेदारी निभाने रामविलास से जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। जबकि अकादमी में संयुक्त निदेशक पद की जिम्मेदारी कुमाऊं मंडल के अपर आयुक्त संजय कुमार खेतवाल को दी गई है। उल्लेखनीय है कि कुमाऊँ मंडल विकास निगम के अध्यक्ष केदार जोशी एवं कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष दिनेश गुरुरानी आदि श्री मीणा के तबादले का विरोध कर रहे थे, और उन्होंने उन्हें इसी पद पर बनाए रखने की मांग की उनका तबादला निरस्त होने को इसी का परिणाम माना जा रहा है।

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नवीन समाचार, देहरादून, 12 नवम्बर 2020। उत्तराखंड सरकार ने बृहस्पतिवार को प्रदेश में चार आईएएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। सप्ताह भर खाली रहने के बाद रुद्रप्रयाग जिले में डीएम की तैनाती कर दी गई है। अल्मोड़ा जिले के सीडीओ मनुज गोयल को रुद्रप्रयाग का नया डीएम बनाया गया है।

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वहीं उनकी जगह नैनीताल मुख्यालय में तैनात कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक तथा जनपद के जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाल रहे रोहित मीणा को अल्मोड़ा जिले का नया सीडीओ बनाया गया है। और उनकी जगह गत दिनों रुद्रप्रयाग जिले के डीएम के पद से हटाई गईं वंदना सिंह को निगम का नया प्रबंध निदेशक तथा जिला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी सोंपी गई है। वहीं आईएएस अधिकारी हरि चंद्र सेमवाल को आबकारी सचिव का पदभार वापस लेकर उन्हें इन दिनों चर्चा में चल रहे महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के सचिव पद की जिम्मेदारी दी गई है। उनके पास पूर्व से मौजूद पंचायती राज के सचिव तथा निदेशक पद की जिम्मेदारियां बनी रहेंगी।
वंदना भारतीय सिविल सेवा परीक्षा 2012 में आठवां स्थान हासिल किया.इधर वंदना सिंह जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण की पहली महिला उपाध्यक्ष होने के साथ ही कुमाऊं मंडल विकास निगम की भी उत्तराखंड बनने के बाद पहली महिला प्रबंध निदेशक होंगी। वह पूर्व में नैनीताल की एसडीएम भी रह चुकी हैं। उनसे पहले आराधना जौहरी निगम की पहली व एकमात्र महिला प्रबंध निदेशक रह चुकी हैं।
वहीं, कुमाऊं मंडल विकास निगम कर्मचारी महासंघ रोहित मीणा को प्रबंध निदेशक पद से हटाए जाने से खुश नहीं है। महासंघ के अध्यक्ष दिनेश गुरुरानी ने ‘नवीन समाचार’ को बताया कि वह महासंघ की ओर से प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर श्री मीणा को निगम में बनाए रखने व उनका स्थानांतरण निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मीणा निगम में अच्छा कार्य कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कोरोना की विपरीत परिस्थतियों के बावजूद कर्मचारियों को लगातार वेतन के साथ ही दीपावली पर बोनस दिया गया। 37 कर्मचारियों को पदोन्नति दी गई। इसके अलावा नियमितीकरण पर भी सहमति बन गई थी।

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नवीन समाचार, देहरादून, 6 नवम्बर 2020। उत्तराखंड शासन ने दो आईएएस अधिकारियों के दायित्वों में बदलाव कर दिया है। संयोग से दोनों आईएएस अधिकारी महिला हैं। इनमें एक रुद्रप्रयाग की डीएम वंदना सिंह हैं, जिन्हें डीएम के पद से हटाकर शासन में अपर मुख्य सचिव कार्मिक के कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। जबकि अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार से औद्योगिक विकास, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग विभाग, राजकीय मुद्रणालय रुड़की एवं मुख्य कार्यकारी निदेशक खादी ग्रामोद्योग विभाग के दायित्व छीन लिए गए हैं। इस घटनाक्रम को उत्तराखंड में अफसरशाही व सत्ता के बीच हालिया दिनों में तनातनी बढ़ने की कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि दोनों महिला आईएएस अधिकारियों को आदेशों की अवहेलना के कारण उनके पदों से हटाया गया हैं भारी पड़ गया है।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गत दिवस सचिवालय में जल जीवन मिशन की समीक्षा बैठक बुलाई थी। जिसमे सभी संबंधित अधिकारियों व जिलों के डीएम को प्रत्यक्ष व वीडियो कांफ्रेंस के जरिये शामिल होने की सूचना दे दी गई थी। बैठक में रुद्रप्रयाग की डीएम वंदना सिंह तय समय पर उपस्थित नहीं हुईं। वहीं अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार से कुछ समय पहले एक विभागीय अधिकारी का तबादला करने को कहा गया था। लेकिन उन्होंने इसमें हीलाहवाली की। माना जा रहा है कि अधिकारियों को कड़ा संदेश देने के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर शासन ने इन दो महिला आईएएस अधिकारियों को हटाने का कदम उठाया है।

यह भी पढ़ें : गौरव की बात : उत्तराखंड के एक पहाड़ी भुला’ आईएएस टीम मोदी में हुए शामिल, आईएएस मंगेश पीएम कार्यालय में अंडर सेक्रेटरी नियुक्त

नवीन समाचार, नई दिल्ली, 13 सितंबर 2020। प्रधानमंत्री कार्यालय में तीन आईएएस अधिकारियों को बड़ी जिम्मेदारी मिली है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने तीनों की नियुक्ति पर मुहर लगाई है। इसमें उत्तराखंड के टिहरी के डीएम मंगेश घिल्डियाल भी शामिल हैं। उन्हें पीएमओ में अंडर सेक्रेटरी पद पर नियुक्त किया गया है। इस मामले में पर्सनल ऐंड ट्रेनिंग विभाग ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव को 12 सितंबर को पत्र भेजा था।
इनके अलावा मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी रघुराज राजेंद्रन को पीएमओ में डायरेक्टर और आंध्र प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी आम्रपाली काटा को डेप्युटी सेक्रेटरी की जिम्मेदारी मिली है।
2011 में IAS की परीक्षा में मंगेश ने देशभर में चौथा स्थान प्राप्त किया था। जिला अधिकारी के तौर पर बागेश्वर जिले में उनकी पहली नियुक्ति हुई थी। इसके बाद
घिल्डियाल रुद्रप्रयाग जिले के डीएम रहे, जहां वे केदारनाथ के पुनर्निमाण और चार धाम रोड के निर्माण से जुड़ी काम को देख रहे थे। ये दोनों प्रॉजेक्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉन्च किए थे।
कौन हैं मंगेश घिल्डियाल
– मंगेश 16 मई 2017 को रुद्रप्रयाग के 23वें जिलाधिकारी बने थे। गढ़वाल के पौड़ी के टांडिया गांव में उनका जन्म हुआ था।
– उनके पिता प्राइमरी स्कूल में हेडमास्टर थे। आठवीं तक की पढ़ाई गांव में करने के बाद वे देहरादून चले आए।
– यहां उन्होंने नौवीं से लेकर ग्रैजुएशन तक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने कुमाऊं यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रैजुएशन और फिर इंदौर के देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी से एमटेक किया।
– इसी दौरान ‘लेजर टेक्नीक’ पर रिसर्च के लिए उन्हें साइंटिस्ट के रूप में नियुक्ति मिली। उन्होंने 2010 में पहली बार सिविल सेवा परीक्षा बिना कोचिंग के ही दी।
– एग्जाम में मंगेश को 131वीं रैंक मिली जिसके बाद उनका सिलेक्शन पुलिस प्रशिक्षण अकादमी, हैदराबाद के लिए हो गया।
– इसके बाद भी वे सिविल परीक्षा की तैयारी में जुटे रहे। 2011 में उन्होंने दोबारा सिविल सेवा एग्जाम दिया और चौथा स्थान प्राप्त किया।
– इसके बाद उन्होंने अपना कैडर उत्तराखंड चुना। पहली पोस्टिंग चमोली में मुख्य विकास अधिकारी के रूप में मिली।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड के एक आईएएस के नाम पर होगा स्पेन के एक अनछुए पर्वत व मार्ग का नाम

नवीन समाचार, देहरादून, 16 अगस्त 2020। उत्तराखंड के एक आईएएस अधिकारी, अभी हाल में तक उत्तरकाशी के डीएम रहे आशीष चौहान के द्वारा किया गया एक सराहनीय कार्य, उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने आया है। सुदूर स्पेन देश के एक अनछुए शिखर का नाम वहां की सरकार के द्वारा डीएम आशीष के नाम पर magistrate point/tip तथा मार्ग का नाम via Ashish रखा गया है। डीएम आशीष चौहान ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक magistrate के रूप में उन्हें मिले इस सम्मान के लिए स्पेन सरकार व उनके पर्वतारोही दल का आजीवन आभारी व कृतज्ञ रहने की बात कही है। उन्होंने बताया कि उत्तरकाशी जनपद के कार्यकाल के दौरान उन्होंने एक स्पेनिश पर्वतारोही की सहायता की थी। इसी स्पेनिश पर्वतारोही नेआज उन्होंने यह सूचना दी है कि उनके द्वारा स्पेन के एक Virgin यानी अनछुए शिखर पर सफल आरोहण के पश्चात उसका नाम magistrate point/tip तथा मार्ग का नाम via ashish रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें गौरव की अनुभूति हो रही है ।

यह भी पढ़ें : बड़ा समाचार : आईपीएस अधिकारी को जान का खतरा, लगाई सुरक्षा की गुहार

नवीन समाचार, हल्द्वानी, 3 अगस्त 2020। ऊधमसिंह नगर के एसएसपी के पद से हटाकर आईआरबी रामनगर के सेनानायक बनाये जाने के बाद प्रदेश के डीजीपी सहित उच्चाधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए उच्च न्यायालय की शरण लेने वाले आईपीएस अधिकारी बरिंदरजीत सिंह ने अब नैनीताल के डीएम एवं एसएसपी को पत्र लिखकर जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है।
आईपीएस अधिकारी बरिंदरजीत सिंह ने पत्र में ऊधमसिंहनगर जनपद में तैनाती के दौरान कई मामलों का खुलासा करने के चलते अपराधी किस्म के लोगो से जान का खतरा बताते हुए नैनीताल के डीएम और एसएसपी को पत्र लिख कर सुरक्षा की मांग की है। इससे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचना तय है।

यह भी पढ़ें : पूर्व एसएसपी ने खोला डीजीपी सहित तीन उच्चाधिकारियों के खिलाफ मोर्चा

नवीन समाचार, नैनीताल, 31 जुलाई 2020। उत्तराखंड उच्च न्यायालय में एक आईपीएस अधिकारी ने अपने असमय और अकारण ट्रांसफर को चुनौती दी है, इस पर उच्च न्यायालय ने तीन हफ्ते में पुलिस और सरकार से जवाब देने को कहा है। मामले में अब 21 अगस्त को सुनवाई होगी। आईपीएस बरिंदरजीत सिंह ने उन्होंने डीजीपी अनिल कुमार रतूड़ी, डीजी कानून व्यवस्था अशोक कुमार और जगतराम जोशी को पार्टी बनाकर आरोप लगाया कि ऊधमसिंह नगर में तैनाती के दौरान डीजीपी अनिल रतूड़ी द्वारा उन्हें महत्वपूर्ण मामलों में निष्पक्ष जांच करने से रोका गया। इसके बावजूद निष्पक्ष जांच जारी रखने के लिए उन्हें चेतावनी तक दी गई। जब उन्होंने पत्राचार किया तब चेतावनी वापस ले ली गई लेकिन उत्पीडन जारी रहा। उन्होंने कहा कि 12 साल की सेवा में ईमानदारी व कर्तव्यनिष्ठ होने का इनाम आठ तबादले करके दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड पुलिस विभाग में पिछले दिनों एसएसपी स्तर के ट्रांसफर हुए थे। इस पर असमय और अकारण हुए तबादले के विरोध में आईपीएस बरिंदर जीत सिंह ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें पिछले दिनों उधमसिंह नगर जिले के एसएसपी के पद से बेवजह हटाया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें अकारण कोरोना काल में बेहतर कार्य करने के बावजूद हटाया गया जबकि वो योजना के तहत काम कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें हटाकर नैनीताल जिले में इंडियन रिजर्व बटालियन (आईआरबी) प्रथम के सेनानायक पद पर ट्रांसफर कर दिया गया जो सरासर गलत है।

शासन की बड़ी कार्रवाई, एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को पद से हटाया, विजिलेंस जांच भी होगी

यह भी पढ़ें : एक दर्जन आईएएस, पीसीएस व आईपीएस अधिकारियों के विभाग बदले

नवीन समाचार, देहरादून, 14 जुलाई 2020। उत्तराखंड शासन ने मंगलवार को एक दर्जन से अधिक आईएएस और आईपीएस अधिकारी के विभागों में फेरबदल कर दिया है। आदेश के अनुसार आईएएस सौजन्या से महानिरीक्षक निबंधन व आयुक्त कर कर पदभार हटा लिया गया है, वहीं आईएएस विजय कुमार यादव को अपर सचिव वन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जबकि आईएएस दीपेंद्र कुमार चौधरी को अपर सचिव उच्च शिक्षा, आईएएस अहमद इकबाल को महानिरीक्षक निबंधन व आयुक्त कर, आईएएस सोनिका को अपर सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण और आईएएस गौरव कुमार को नगर आयुक्त काशीपुर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
वहीं पीसीएस अधिकारियों की बात करें तो झरना कमठान को अपर सचिव तकनीकी शिक्षा की जिम्मेदारी, अभिषेक त्रिपाठी को एडिशनल मिशन डायरेक्टर एनएचएम का अतिरिक्त प्रभार, गिरीश चंद्र गुणवंत को अपर जिलाधिकारी प्रोटोकॉल और नागरिक आपूर्ति का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है जबकि प्रकाश चंद्र से नगर आयुक्त काशीपुर का पदभार हटाया गया है। वहीं पीसीएस प्यारे लाल शाह को नगर आयुक्त कोटद्वार के पद पर तैनाती दी गई है। जबकि आईपीएस अधिकारी कृष्ण कुमार वीके को अपर पुलिस महानिरीक्षक कारागार की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं अतर सिंह से अपर पुलिस महानिदेशक कारागार के पद से हटाया गया है।

यह भी पढ़ें : पूर्व आईएएस राजीव रौतेला को सेवानिवृत्ति के बाद दोबारा मिला सेवा विस्तार

-उत्तराखंड प्रशासन अकादमी के निदेशक पद पर मिला फरवरी 21 तक सेवा विस्तार
नवीन समाचार, नैनीताल, 29 जून 2020। कुमाऊं मंडल के आयुक्त रहे सेवानिवृत्त आईएएस राजीव रौतेला को उत्तराखंड प्रशासन अकादमी के निदेशक पद पर दूसरा सेवा विस्तार मिल गया है। पहले उन्हें उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि 31 मार्च के बाद तीन माह की अवधि के लिए 30 जून तक सेवा विस्तार दिया गया था। अब अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी के हस्ताक्षरों से उन्हें पुनः शासन ने 28 फरवरी तक उन्हें सेवा विस्तार दे दिया है।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं मंडल के आयुक्त सहित 16 आईएएस एवं पांच पीसीएस के तबादले, दो जिलों के डीएम भी बदले

नवीन समाचार, देहरादून, 21 मई 2020। उत्तराखंड शासन ने बृहस्पतिवार को आईएएस एवं पीसीएस अधिकारियों के बड़े पैमाने पर स्थानांतरण कर दिये हैं। खासकर ऊधमसिंह नगर के डीएम डा. नीरज खैरवाल से कुमाऊं मंडल के आयुक्त पद का अतिरिक्त प्रभार हटा लिया गया है, और उनकी जगह पूर्व में नैनीताल के डीएम रहे व वर्तमान में शासन में कई विभागों के सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी को कुमाऊं मंडल के आयुक्त बना दिया है। वहीं टिहरी के जिलाधिकारी व टिहरी बांध परियोजना के पुर्नवास निदेशक वी षणमुगम को हटाकर शासन में भेज दिया गया हैै। जबकि उनके स्थान पर रुद्रप्रयाग के डीएम मंगेश घिल्डियाल को टिहरी का डीएम बनाया गया है। पिथौरागढ़ की सीडीओ आईएएस वंदना को रुद्रप्रयाग का जिलाधिकारी बनाया गया है। इनके अलावा आईएएस ओम प्रकाश से कई विभाग हटा लिये गये हैं, जबकि बाध्य प्रतीक्षा में खाली चल रहे दीपेंद्र चौधरी को दायित्व मिल गये हैं। आरके सुधांशु व आर मीनाक्षी सुंदरम का वजन भी बढ़ा है। वहीं अमित नेगी के विभागों में कटौती की गई है। शैलेश बगौली को परिवहन आयुक्त की जगह आपदा प्रबंधन में सचिव, नितेझ झा को चिकित्सा व चिकित्सा शिक्षा की जगह सिंचाई व पेयजल, हदबंश सिंह चुघ को पंचायती राज से वन एवं पर्यावरण का दायित्व मिला है। बृजेश संत को पंचायती राज सचिव भी हो गये हैं।
वहीं पीसीएस अधिकारियों की बात करें तो डा. अभिषेक त्रिपाठी से एनएचएम तथा प्रदीप रावत से राज्य संपत्ति अधिकारी के दायित्व वापस ले लिये गये हैं। अरविंद पांडे को रुद्रप्रयाग के एडीम अरविंद पांडे को यहां से हटाकर देहरादून का एडीएम प्रशासन व रामजी शरण शर्मा को देहरादून में इसी पद से रुद्रप्रयाग भेजा गया है। झरना कमठान को महिला सशक्तीकरण हटाकर एनएचएम का अतिरिक्त मिशन डायरेक्टर बनाया गया है।

यह भी पढ़ें : मुंबई की गायिका ने उत्तराखंड के पूर्व आईएएस अधिकारी के खिलाफ पुलिस मुख्यालय में की शिकायत

नवीन समाचार, देहरादून, 7 मई 2020। मुंबई में रहने वाली उत्तराखंड मूल की एक महिला गायिका ने नैनीताल जनपद के रहने वाले एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ई-मेल के जरिए महिला गायिका ने पुलिस मुख्यालय में शिकायत की है। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने बताया कि महिला ने बुधवार को ईमेल के जरिये शिकायत की थी। शिकायत फेसबुक के जरिये भेजे गये संदेशों को लेकर है। आज बृहस्पतिवार को उन्होंने मामले की जांच नैनीताल के एसएसपी को भेज दी है। उनसे महिला पुलिस अधिकारी से आरोपों की जांच करने को कहा गया है। भवाली की सीओ अनुषा बडोला जांच कर सकती हैं।

यह भी पढ़ें : डा. नीरज खैरवाल को कुमाऊं मंडलायुक्त पद का अतिरिक्त प्रभार

नवीन समाचार, नैनीताल, 31 मार्च 2020। ऊधमसिंह नगर जनपद के जिलाधिकारी डा. नीरज खैरवाल एक अप्रैल से कुमाऊं मंडल के आयुक्त पद का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। कुमाऊं मंडल के आयुक्त राजीव रौतेला के मंगलवार 31 मार्च को अधिवर्षता आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त होने पर शासन ने डा. खैरवाल को यह अतिरिक्त दायित्व देतेे हुए उनसे अविलंब पदभार ग्रहण करने को कहाा है। उल्लेखनीय है कि डा. खैरवाल तराई बीज विकास निगम के प्रबंध निदेशक पद का दायित्व भी संभाल रहे हैं।

यह भी पढ़ें : डेढ़ वर्ष से काबिज वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी को 31 मार्च तक सरकारी आवास खाली करने का अल्टीमेटम

नवीन समाचार, नैनीताल, 18 मार्च 2020। डीएम सविन बंसल ने नैनीताल जनपद में करीब डेढ़ वर्ष पूर्व बड़े जिम्मेदार पद पर रहे एक वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी को भीमताल स्थित सरकारी आवास को 31 मार्च तक खाली करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारी से आवास किराये के 1.40 लाख रुपये वसूलने को भी कहा गया है तथा 31 मार्च तक आवास खाली नहीं करने पर सार्वजनिक भू-गृहादि अधिनियम के तहत कार्यवाही की चेतावनी भी दी है। जिला प्रशासन से हुई पुष्टि के अनुसार वर्तमान में जनपद के सीमावर्ती जनपद में जनपद के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत इन अधिकारी को भीमताल में टाइप-4 का आवास आवंटित था। लेकिन करीब डेढ़ वर्ष पूर्व स्थानांतरण होने के बावजूद उन्होंने आवास खाली नहीं किया है।

यह भी पढ़ें : 4 आईएएस-पीसीएस अधिकारियों के बदले दायित्व, 2 आईएएस अब भी बे’काम

नवीन समाचार, देहरादून, 24 फरवरी 2020। सोमवार को सरकार ने देवस्थानम बोर्ड के गठन के बाद से ही पहले सीईओ को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए गढ़वाल मंडल के आयुक्त को सीईओ को प्रभार दे दिया है। अब जल्द ही बोर्ड में उपाध्यक्ष सहित अन्य सदस्यों की नियुक्त होगी। बोर्ड का उपाध्यक्ष कैबिनेट स्तर का हिंदू मंत्री ही हो सकता है। इसके अलावा शासन ने सोमवार को दो आईएएस समेत एक पीसीएस अफसर का तबादला आदेश भी जारी किया। प्रभारी सचिव खेल एवं युवा कल्याण ब्रजेश संत से निदेशक युवा कल्याण का प्रभार हटा दिया गया है। अब संत के पास सचिव खेल एवं युवा कल्याण के अलावा निदेशक खेल का ही प्रभार रहेगा। वहीं मुख्य विकास अधिकारी देहरादून गिरधारी सिंह रावत का तबादला निदेशक युवा कल्याण के पद पर किया है। वहीं आईएएस नितिका खंडेलवाल से अपर निदेशक प्रशिक्षण निदेशालय हल्द्वानी का प्रभार हटा दिया है। उनका तबादला मुख्य विकास अधिकारी देहरादून के पद पर किया है। वहीं दो आईएएस सचिन कुर्वे और दीपेंद्र चौधरी को अभी तक काम नहीं सौंपा। सचिव स्तर के सचिन को डेपुटेशन से लौटे तीन सप्ताह से अधिक का समय हो गया है। वहीं जिलाधिकारी हरिद्वार के पद से हटाए गए दीपेंद्र चौधरी को भी बाध्य प्रतीक्षा में रखा गया है।

यह भी पढ़ें : नैनीताल के डीएम रहे उत्तराखंड के एक वरिष्ठ आईएएस बने मुख्यमंत्री के और दूसरे प्रधानमंत्री के सलाहकार

डा. राकेश कुमार

नवीन समाचार, नई दिल्ली/देहरादून, 22 फरवरी 2020। उच्च प्रशासनिक हलकों से आ रही खबरों के अनुसार उत्तराखंड के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मुख्यमंत्री जबकि दूसरे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रधानमंत्री के सलाहकार बन गए हैं। यह संयोग है कि दोनों आईएएस अधिकारियों का संबंध नैनीताल और उत्तराखंड से है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 30 अगस्त 2004 से 30 सितंबर 2006 तक नैनीताल के जिलाधिकारी रहे भारत सरकार के यूएनडीपी में वरिष्ठ सलाहकार के पद पर भी तैनात 1992 बैच के आईएएस अधिकारी डा. राकेश कुमार ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली है। उन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की मंजूरी भी मिल गई है। इसके साथ ही डा. कुमार को मुख्यमंत्री के मानद सलाहकार के पद की नई जिम्मेदारी भी मिल गई है। यह भी बताया जा रहा है कि वह मुख्यमंत्री के मानद सलाहकार के साथ ही यूएनडीपी में मुख्य सलाहकार की भूमिका भी साथ में निभाएंगे।

आईएएस अधिकारी भास्कर खुल्बे

वहीं मूलरूप से अल्मोड़ा जनपद के भिकियासैंण के निवासी एवं 1979 में नैनीताल के डीएसबी परिसर से उच्च शिक्षा लेने वाले 1983 बैच के आईएएस अधिकारी भास्कर खुल्बे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सलाहकार बनाया गया है। इतने महत्वपूर्ण पद पर पहुंचने वाले वे प्रदेश के पहले आईएएस अधिकारी बताए जा रहे हैं। खुल्बे पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु के करीबी अधिकारी भी रहे हैं। श्री खुल्बे के पिता ठेकेदार स्वर्गीय ख्यालीराम खुल्बे तल्लीताल रिक्शा स्टैंड के ऊपर रहते थे।

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नवीन समाचार, देहरादून, 16 फरवरी 2020। उत्तराखंड के सीधी भर्ती के 18 पीसीएस अधिकारी अपनी वरिष्ठता की जंग जीत गए हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने नैनीताल उच्च न्यायालय के वर्ष 2011 के आदेश को निरस्त करते हुए तदर्थ नियुक्ति पाकर एसडीएम बने 48 अधिकारियों को जूनियर माना है। इसके साथ ही सीधी भर्ती के अधिकारियों के आइएएस बनने की राह भी खुल गई है। वरिष्ठता विवाद के चलते ही पिछले कई सालों से यह मामला लटका था।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश से अलग होकर वर्ष 2000 में जब उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ, तब पूर्ववर्ती प्रदेश से पीसीएस अधिकारी बहुत कम संख्या में उत्तराखंड आए थे। अधिकारियों की कमी को देखते हुए सरकार ने तहसीलदार व कार्यवाहक तहसीलदारों को तदर्थ पदोन्नति देकर उपजिलाधिकारी (एसडीएम) बना दिया था। यह सिलसिला वर्ष 2003 से 2005 तक चला। उसी दौरान वर्ष 2005 में सीधी भर्ती से 20 पीसीएस अधिकारियों का चयन हुआ। इनमें से दो का अखिल भारतीय सेवा में चयन होने के चलते संख्या 18 रह गई। विवाद की स्थिति तब पैदा हुई, जब उत्तराखंड शासन ने अधिकारियों की पदोन्नति के लिए वर्ष 2010 में एक सीधी भर्ती व एक तदर्थ पदोन्नति का फॉर्मूला तैयार कर आपत्तियां मांगीं। सीधी भर्ती के अधिकारियों ने यह कहते हुए इसका विरोध किया कि तदर्थ पदोन्नति वाले अधिकारियों को वर्ष 2007 में कन्फर्म किया गया है और वे 2005 बैच के अधिकारी हैं। शासन ने भी इसी के अनुरूप पदोन्नति निर्धारित कर दी। इस आदेश के खिलाफ तदर्थ पदोन्नति वाले अधिकारी नैनीताल हाईकोर्ट चले गए और कोर्ट ने वर्ष 2011 में आदेश जारी कर यह माना कि वरिष्ठता क्रम तदर्थ पदोन्नति से ही गिना जाएगा। हालांकि, इस आदेश से नाखुश सीधी भर्ती के अधिकारियों ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर दी। आठ साल से अधिक समय तक चले इस मामले में अंतिम सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एल नागेश्वर राव व दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि तदर्थ पदोन्नति के समय को वरिष्ठता के लिए शामिल नहीं किया जा सकता। लिहाजा, वर्ष 2007 में कन्फर्म किए जाने के समय से ही 48 अधिकारियों की वरिष्ठता तय की जाएगी। तदर्थ पदोन्नति पाकर एसडीएम बने 48 अधिकारियों और सीधी भर्ती के 18 पीसीएस अधिकारियों के बीच विवाद का कारण कट-पेस्ट कर तैयार की गई सेवा नियमावली बनी। हिंदी की नियमावली में तदर्थ पदोन्नति को स्पष्ट करने वाले शब्द छूट गए थे और अंग्रेजी की नियमावली को कोर्ट ने नहीं माना। हुआ यह कि उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद उत्तराखंड में नियमावलियों को अंगीकार कर लिया गया। वहीं, कुछ में कट-पेस्ट कर उसे लागू कर दिया गया। पीसीएस अधिकारियों की सेवा नियमावली को लेकर यही कट-पेस्ट भारी पड़ गया। जब सेवा नियमावली अंग्रेजी व हिंदी में तैयार की गई थी। हिंदी वाली नियमावली में तदर्थ संबंधी शब्द छूट गए थे, जबकि अंग्रेजी में तैयार की गई नियमावली में तदर्थ पदोन्नति पर स्थिति साफ की गई थी। हालांकि, जब यह मामला कोर्ट में पहुंचा तो कोर्ट ने कहा कि हिंदी राजभाषा है, लिहाजा इसी को अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। इस बीच राज्य सरकार ने हिंदी की नियमावली की खामी को दूर कर दिया। यही कारण है कि सीधी भर्ती वाले पीसीएस अधिकारी अब सुप्रीम कोर्ट से न्याय प्राप्त करने में सफल हो गए।

कभी आईसीएस अधिकारी होते थे नैनीताल में तैनात

नवीन जोशी, नैनीताल। नवोदित राज्य उत्तराखण्ड के राजनेताओं पर राज्य को नौकरशाहों के हाथों में सोंपने और उनके हाथों में खेलने के आरोप लगते रहते हैं। लेकिन लगता है राज्य के राजनेताओं ने इस समस्या का निदान ढूंढ लिया है। परेशानी सीधे आऐ `कमीशंड´ आईएएस अधिकारियों के सामने कम ज्ञान के राजनेताओं की `न चलने´ से थी, सो राज्य को देश का `भाल´बनाने में जुटी राज्य की निशंक सरकार ने इसके तोड़ में प्रशासनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण राज्य के `फील्ड´ के पद पहले से `उपकृत´ प्रमोटेड आईएएस अधिकारियों को सोंप दिऐ हैं। इसे  जनता से सीधे जुड़े प्रशासन व पुलिस के कार्य अनुभवी हाथों को देने की नयी पहल बताया जा रहा है। प्रदेश के 13 जिलों व दो मण्डलों के 30 सर्वोच्च पदों में से केवल नौ पद सीधे कमीशन से चुने गऐ नौकरशाहों के हाथ में हैं, जबकि शेष 20 पद अनुभवी पदोन्नत अधिकारियों के हाथ में दिऐ गऐ हैं। कुमाऊं मण्डल में तो हालात यह हैं कि यहाँ पुलिस व प्रशाशन के 14 पदों में से 12 पर पदोन्नत अधिकारी तैनात किये गए हैं. 
कुमाऊं के मण्डल मुख्यालय से ही बात शुरू करें तो आजादी से पूर्व तक यहां जिले की जिम्मेदारी भी `डिप्टी कमिश्नर´ यानी उपायुक्त को सोंपी जाती थी, जो आइसीएस (भारतीय सिविल सेवा) अधिकारी होते थे। नैनीताल जिले आईसीएस अधिकारी डब्लू ई बाब्स 1927 में पहले डिप्टी कमिश्नर थे। देश की आजादी यानी 1947 तक यहां आईसीएस अधिकारी ही कार्यरत रहे। एमए कुरैशी जिले के 15वें डिप्टी कमिश्नर के रूप में आखिरी आईसीएस अधिकारी थे। 1948 में आरिफ अली शाह से यहां आईएएस (भारतीय प्रशासनिक सेवा के)अधिकारियों के आने का सिलसिला शुरू हुआ जो वर्तमान में 58 जिलाधिकारियों तक चल रहा है। इसी तरह मण्डलायुक्त पद की बात करें तो 1952 तक आईसीएस अधिकारी ही यहां आयुक्त के पद पर कार्यरत रहे। केएल मेहता आजादी के बाद मण्डल के पहले आयुक्त थे, जो 1948 तक रहे, उनके बाद 1952 तक रहने वाले आरटी शिवदासानी दूसरे आईसीएस आयुक्त थे। तीसरे आयुक्त राम रूप सिंह से यहां आईएएस अधिकारियों के आने का सिलसिला शुरू हुआ जो मण्डल के 35वें आयुक्त एस राजू तक जारी रहा। इधर 1994 बैच के प्रोन्नत आईएएस अधिकारी कुणाल शर्मा को मण्डल के 36वें आयुक्त की जिम्मेदारी मिली है। श्री शर्मा 1976 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं। मंडल के ही दूसरे पुलिस के सर्वोच्च पद I.G. कुमाऊं जीवन चन्द्र पाण्डेय भी प्रमोटेड I.A.S. अधिकारी ही हैं.  अब बात जिलों की। मण्डल में नैनीताल डीएम शैलेश बगौली एवं अल्मोड़ा के एसपी वीके कृष्णकुमार के अतिरिक्त सभी जिलों में डीएम एवं एसपी, एसएसपी पदोन्नत आईएएस अथवा आईपीएस अधिकारी हैं। उधर ढ़वाल मण्डल के आयुक्त की जिम्मेदारी भी कुमाऊं आयुक्त 1994 बैच के आईएएस अधिकारी अजय नबियाल को मिली है, जबकि मण्डल के देहरादून, उत्तरकाशी, चमोली व टिहरी जिलों के डीएम तथा रुद्रप्रयाग, पौड़ी एवं हरिद्वार जिलों के पुलिस अधीक्षक भी पदोन्नत पुलिस अधिकारी ही हैं। 

इस सब के पीछे यह माना जा रहा है कि एक तो पदोन्नत आईएएस अधिकारी सरकार की कृपा पर ही पदोन्नत होते हैं, इसलिए वह सीधे आऐ आईएएस अधिकारियों की तरह सरकार से अलग नहीं जा पाते। उनके तेवरों में भी काफी अन्तर होता है। सत्ता पक्ष के राजनेता उनसे वह काम करा सकते हैं, जिन्हें आईएएस अधिकारियों से कराना अक्सर `टेढ़ी खीर´ साबित होता है। परंपरा रही है कि सीधे आऐ तेजतर्रार आईएएस अधिकारियों को ही `फील्ड´ के डीएम व आयुक्त जैसे पद दिऐ जाऐं, जबकि सचिवालय में अधिक गम्भीरता से निर्णय लेने के लिए `दीर्घकालीन योजनाकारों´ के रूप में पदोन्नत आईएएस अधिकारियों को सचिवालय में रखा जाता है। लेकिन इधर सीधे आऐ आईएएस अधिकारियों को परंपरा से उलट सचिवालय के कम महत्वपूर्ण विभागों के `आइसोलेशन´ में डाल दिया गया है। इस नई कवायद को राज्य में ताकतवर मानी जाने वाली `आईएएस लॉबी´ के `पेट में लात’ माना जा रहा सो जल्द उनके ‘पेट में दर्द´ शुरू हो सकता है। इस बाबत सत्तारुड़ दल के नेताओं की सुनें तो उनका कहना है कि पदोन्नत अधिकारी अपने राज्य के हैं, सो वह जनता के दुःख-दर्द अधिक दूर कर सकते हैं, जबकि विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह सत्तारुड़ों के लिए वसूली अच्छी करते हैं, साथ ही जैसे चाहो हंक जाते हैं, I.A.S. अधिकारियों की तरह ‘दुलत्ती’ नहीं मारते।  बहरहाल, आगे राजनेताओं व नौकरशाहों के इस `द्वन्द्व´ को खुलकर मैदान में आते देखना रोचक हो सकता है। इस बाबत राज्य के एक वरिष्ठ I.A.S. का कहना था कि राज्य सरकार की यह कवायद भाजपा सरकार के ‘मिशन 2012’ का हिस्सा है। सरकार को लगता है कि पदोन्नत अधिकारियों को अपने तरीके से हांक कर मां मांफिक कार्य करवा लिए जाएँ. अधिकारी भाजपाईयों की सुनें. लेकिन इसी अधिकारी का कहना था कि सरकार का यह दांव शर्तिया उलटा पड़ने वाला है। जिलों व मंडलों के  I.A.S. अधिकारी अपने प्रभाव से शासन में बैठे अपने से कमोबेश कम वरिष्ठ इन मूलतः पीसीएस  अधिकारियों से करा लिया करते थे, किन्तु अब स्थिति उल्टी होने से जिले व मंडल बेहद कमजोर हो जायेंगे, और उनके कार्य शासन में अटके रहेंगे। अपनी उपेक्षा से क्षुब्ध होने के कारण भी वे ‘बिशन’ (सिंह चुफाल-भाजपा अध्यक्ष) के  ‘मिशन 2012’ को कभी सफल न होने देने की कसमें खा रहे हैं।

नवीन समाचार
‘नवीन समाचार’ विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी नैनीताल से ‘मन कही’ के रूप में जनवरी 2010 से इंटरननेट-वेब मीडिया पर सक्रिय, उत्तराखंड का सबसे पुराना ऑनलाइन पत्रकारिता में सक्रिय समूह है। यह उत्तराखंड शासन से मान्यता प्राप्त, अलेक्सा रैंकिंग के अनुसार उत्तराखंड के समाचार पोर्टलों में अग्रणी, गूगल सर्च पर उत्तराखंड के सर्वश्रेष्ठ, भरोसेमंद समाचार पोर्टल के रूप में अग्रणी, समाचारों को नवीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला ऑनलाइन समाचार पोर्टल भी है।
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