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बड़ी गौरवपूर्ण उपलब्धि : 11 किलोमीटर पैदल चलकर आये उत्तराखंड के 17 बच्चों ने अंतरिक्षयात्री से की ‘सीधी बात’

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अंतरिक्षयात्री रिकी आर्नोल्ड से बात करके प्रसन्न मुद्रा में उत्तराखंड के बच्चे

नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले की डबरालस्यूं पट्टी में पड़ने वाले तिमली स्थित श्री तिमली विद्यापीठ में निकटवर्ती पांच स्कूलों-राजकीय इन्टर कॉलेज देवीखेत, राजकीय इन्टर कॉलेज चेलुसैंण, सरस्वती शिशु मंदिर, विद्या मन्दिर, आदर्श बाल भारती चेलुसैंण तथा श्री तिमली विद्यापीठ के छात्र-छात्राओं  को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (ISS) में मौजूद रिकी अर्नाल्ड से करीब 10 मिनट तक लाइव बातचीत करने का अभूतपूर्व मौक़ा मिला। ख़ास बात यह भी रही कि अंतरिक्षयात्री से सीधे बात करने का सौभाग्य हासिल करने वाले उत्तराखंड के सुदूर गांवों के इनमें से कई बच्चे 11 किलोमीटर पैदल चलकर भी विद्यालय पहुंचे थे। उनमें अंतरिक्ष को लेकर अपने हर सवाल का जवाब पाने की बेचैनी व खासा कौतूहल था। बच्चों ने अंतरिक्ष केंद्र में मौजूद आर्नाल्ड से करीब 10 मिनट तक लाइव बातचीत की, और हर वह सवाल पूछा, जिसका उन्हें जवाब चाहिए था। मसलन बच्चों ने पहले से अंग्रेजी में तैयार प्रश्नों के जरिये अंतरिक्ष के अनुभव, स्पेसवॉक, ब्लैकहोल, एलियन को देखने जैसे सवाल पूछे।

उदाहरण के लिए देवीखेत गांव के प्रियांशु ने पूछा, ‘क्या आप अपने परिवार से बात कर पाते हैं ?’, वहीं  अनुज बलूनी ने स्पेस जंक व अमित ने ब्लैकहोल के बारे में सवाल किया। देवीखेत की ही अमृता ने पूछा- do we use all 5 sense in space ? जबकि चेलुसेंण गांव की सृष्टि ने पूछा, क्या ISS से धरती पर होने वाली आतिशबाजी दिखाई देती है ?
अंतरिक्ष यात्री रिकी आर्नोल्ड

इन सवालों के जवाब देते हुए अर्नाल्ड ने बच्चों को बताया कि अंतरिक्ष में जीवन रफ्तार भरा है, काम के बीच यहां पर समय बहुत जल्दी बीत जाता है। अंतरिक्ष का कूड़ा कहां जाता है ? इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में कूड़ा न फैले, इस बात का खास ख्याल रखा जाता है। बच्चों को दूसरे ग्रह पर मौजूद एलियन को लेकर भी उत्सुकता थी और उन्होंने अंतरिक्ष में मौजूद अर्नाल्ड से पूछा कि क्या उन्हें वहां एलियन या उनका यान नजर आया। इस पर अर्नाल्ड ने कहा कि अभी तक उन्होंने किसी भी एलियन या उनके यान को नहीं देखा है, अगर वह देखते हैं तो उन्हें जरूर बताएंगे। स्पेस में हम अपनी पांचों ज्ञानेंद्रियों का प्रयोग करते हैं और अपने परिवार से बातचीत भी कर सकते हैं। अर्नाल्ड ने बताया कि अंतरिक्ष से पूरी दुनिया बहुत खूबसूरत दिखती है। श्री तिमली विद्यापीठ के आशीष डबराल के अनुसार, यह बच्चों के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष संचार को जानने समझने के लिए दुर्लभ अवसर था। बच्चे अपने सवालों से जवाब सीधे अंतरिक्षयात्री से पाकर काफी खुश थे।

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कई मायनों में ख़ास है श्री तिमली विद्यापीठ

अंतरिक्ष यात्री रिकी आर्नोल्ड से बात करने के दौरान उत्तराखंड के बच्चे

गौरतलब है कि गांव के बच्चों का अंतरिक्षयात्रियों से संवाद करना कई मायने में खास है। यह उस दौर में हो रहा है जब उत्तराखंड के गांव लगातार वीरान हो रहे हैं। बच्चों को अच्छी शिक्षा, जीवनयापन के लिए लोग पहाड़ों से पलायन कर रहे हैं। ऐसे में तिमली विद्यापीठ सफलता की नई कहानियां लिख रहा है। वैदिक पद्धति से पढ़ाई होने के बावजूद यहां के बच्चे न केवल अंग्रेजी में अच्छा संवाद करते हैं, बल्कि उनके रुचि के विषय अंतरिक्ष और रोबोटिक्स हैं। तिमली विद्यापीठ रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और माइंडफुलनेस प्रोग्राम शुरू करने वाला ग्रामीण उत्तराखंड का पहला विद्यालय है। यही नहीं यहां के बच्चे वर्ल्ड रोबोटिक्स ओलंपियाड में भी हिस्सा ले चुके है

यूरोप में लाइव सुना गया कार्यक्रम

इस गौरवपूर्ण कार्यक्रम के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले विज्ञान वीथिका संस्था के विवेक गौड़ ने ‘नवीन समाचार’ को बताया कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के पब्लिक आउटरीचिंग प्रोग्राम के अंतर्गत ‘एमैच्योर रेडियो ऑन द इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन’ (एरिस) के स्कूलों से संपर्क कार्यक्रम के तहत बच्चों को अंतरिक्षयात्रियों से बात करने का अवसर देने के लिए गत दिनों आवेदन आमंत्रित किये गये थे। फलस्वरूप दुनियाभर के कुल 40 विद्यालयों में भारत से उत्तराखंड के श्री तिमली विद्यापीठ को यह गौरवपूर्व अवसर मिला। इस आयोजन में एरिस संस्था और नासा के  साथ ही, उत्तराखंड टेक्नोलॉजी क्लब, विज्ञान वीथिका, ट्रेकबग संस्था व एचएएल स्काउट्स ग्रुप एमेच्योर रेडियो क्लब लखनऊ आदि संस्थाओं का भी सहयोग रहा। कार्यक्रम को बेल्जियम स्थित स्टेशन ओएन4आईएसएस के टेलीब्रिज की ओर से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से वरिष्ठ वैज्ञानिक डा.संदीप बरुआ ने किया।  यूरोप के कई हिस्सों में (आईएसएस की अंतरिक्ष मे स्थिति अनुसार) इस वार्तालाप को एफएम में 145.800 मेगाहर्ट्ज पर सुना गया।

उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रही महाशक्ति है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 2022 तक भारत अपने दम पर अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेज देगा। न जाने कितनी बच्चों की आंखों में अंतरिक्ष में उड़ने, उसे जानने-समझने का सपना होता है। कुछ ऐसे ही बच्चों के सपनों को इस कार्यक्रम के जरिये पंख फैलाने का मौका मिला।

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के बारे में यह रोचक बातें भी जानें :

  • अमेरिका के कैनेडी स्पेस सेंटर से 20 नवंबर 1998 को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) लांच किया गया।
  • 239 फीट लंबा और 365 फीट चौड़ा आईएसएस 28 हजार किमी प्रति घंटे यानी आठ किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से पृथ्वी का चक्कर लगा रहा है।
  • पृथ्वी के 24 घंटे अंतरिक्ष के 92.49 मिनट के बराबर होते हैं। यानी आइएसएस दिन-रात के समय को 92.49 मिनट में ही तय कर लेता है।
  • 66 फीट ऊंचे आईएसएस के अंतरिक्ष यात्री हर दिन 16 सूर्योदय और सूर्यास्त देखते हैं।
  • इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को मुख्य तौर पर अमेरिका और रूस की स्पेस एजेंसियां मिलकर चलाती हैं। हालांकि इसमें जापान, ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा जैसे देश भी साझीदार हैं। यहां रहने वाले अंतरिक्ष यात्री अक्सर अंतरिक्ष में बाहर निकलकर स्पेसवॉक करते हैं। वो कई बार दूरबीनों, सोलर पैनल या अंतरिक्ष की दूसरी मशीनों में आई गड़बड़ी को ठीक करते है।
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