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मुनस्यारी के लिये NDRF अलर्ट पर, सीएम ने ट्वीट किया, कैलाश यात्री तीसरे दिन भी फंसे

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पिथौरागढ़-मुनस्यारी क्षेत्र में रविवार रात्रि व सोमवार सुबह बादल फटने जैसी घटना के बाद एसडीआरएफ जहां मौके पर बचाव व राहत कार्यों में जुटी है, वहीं एनडीआरएफ को भी अलर्ट पर रखा गया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ट्वीट करके यह जानकारी दी है। वहीं कैलाश मानसरोवर यात्रा के पांचवे दल के 31सदस्य तीसरे दिन भी पिथौरागढ़ में फंसे हुए है, जबकि 29 सदस्य 2 दिन पहले ही सेना के हेलीकॉप्टर से गुंजी पहुँच गए हैं।

1500 भारतीय कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्री भारी बारिश से नेपाल में भी फंसे

नेपाल में भारी बारिश की वजह से कैलाश मानसरोवर जा रहे 1575 भारतीय तीर्थयात्री फंसे हुए हैं। इनमें से 525 तीर्थयात्री नेपाल के सिमीकोट, 550 लोग हिलसा और 500 लोग तिब्बत की तरफ रुके हुए हैं। नेपाल स्थित भारतीय दूतावास ने फंसे तीर्थयात्रियों कोमेडिकल सुविधाएं मुहैया कराने के लिए कहा है। भारतीय अफसरों ने सभी टूर ऑपरेटरों से कहा  कि तिब्बत की तरफ फंसे हुए लोगों तक भी जरूरी सेवाएं पहुंचाई जाएं। विदेश मंत्रालय ने हॉटलाइन नंबर भी जारी किए: +977-9851107006, +977-9851155007, +977-9851107021, +977-9818832398। कन्नड़भाषियों के लिए +977-9823672371, तेलुगु के लिए +977-9808082292, तमिल के लिए +977-9808500642 और मलयालम के लिए +977-9808500644।

इस वर्ष सामान्य से अधिक हो सकती है मानसूनी वर्षा

जी हां, इस वर्ष उत्तराखंड में मानसूनी वर्षा सामान्य से अधिक हो सकती है। मौसम विभाग केंद्र देहरादून ने ऐसी संभावना जताई है। यह खबर कृषि, बागवानी, मौसम, पर्यावरण, जैव विविधता व जल विद्युत परियोजनाओं सहित अनेकानेक आयामों के लिये तो अच्छी है, पर प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रवासियों को जान-माल के नुकसान के साथ इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसलिए खासकर जान बचाने के मामले में सतर्क रहने की जरूरत है।

यह भी पढ़ें : भारी पड़ी पहली मानसूनी बारिश, पिथौरागढ़ में 3 को छुट्टी घोषित, एक महिला की मौत की मलबे में दबकर मौत

मुनस्यारी में बादल फटा, संपर्क कटा, नैनीताल बाईपास सहित 15 सड़कें बंद

नैनीताल। उत्तराखंड में मानसूनी बारिश कड़े झटके के साथ आई है। यहां पहली मानसूनी बारिश ही पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी, बंगापानी और धारचूला तहसीलों में बादल फटने की घटना के साथ नमूदार हुई है। भारी बारिश की वजह से मुन्स्यारी में सोमवार को कुमाऊं विवि की परीक्षाएं कम परीक्षार्थियों के पहुंच पाने के बाद रद्द करनी पड़ी, वहीं डीएम सी रविशंकर ने मौसम विभाग की अगले 24 घंटों में तेज बारिश की चेतावनी पर इन तीन तहसीलों में स्कूल बंद करने के आदेश दिए है। भारी बारिश से मुन्स्यारी के गैला में एक महिला की भी मौत हो गई है। मुनस्यारी बाजार एसडीएम कार्यालय सहित पूरी तरह से पत्थरों से पट गया है, तथा मुन्स्यारी के दानी बगड़-सेराघाट में हिमालया हाइड्रो का बांध भी टूट गया है। बारिश की वजह से कैलाश मानसरोवर यात्रा के पांचवे दल के सदस्य भी अलग हो गए हैं। 59 में से 28 यात्री हेलीकाप्टर से गुंजी पहुँच गए हैं, जबकि शेष 31 पिथौरागढ़ में ही अटक गए हैं। अब वे मौसम साफ़ होने के बाद ही आगे जा सकते हैं। बारिश कुमाऊँ मंडल के मुख्यालय सहित सभी क्षेत्रों में लगातार जारी है। थल-मुनस्यारी रोड पर नाचनी से आगे 30 मीटर सड़क रामगंगा नदी में समा गई है।

मुनस्यारी में बादल फटने के दौरान का नजारा

भारी बारिश से कई सड़कों के पूरी तरह से क्षतिग्रस्त होने के साथ ही भारी तबाही हुई है। दानी बगड़ में हिमालया हाइड्रो का बांध टूटने से सड़क सहित तीन से चार वाहन बह गए हैं। मुन्स्यारी मेू दो मकानों की दीवार भी ढह गई है। कई लोगों ने रविवार की पूरी रात जागकर काटी। वही बंगापानी तहसील क्षेत्र में हुई तेज बारिश से गोरी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इससे आस-पास के इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। क्षेत्र की मंदाकिनी, सेरा और गोरी आदि नदियों का जलस्तर भी खतरे के निशाने के करीब आ गया है। बारिश के चलते यमुनोत्री हाईवे डाबरकोट के बाद भूस्खलन से अवरुद्ध है। वहीं, बद्रीनाथ हाईवे भी लामबगड़ के पास अवरुद्ध हो गया।
इधर नैनीताल जिले में मानसून के आगमन साथ रविवार रात्रि मुख्यालय सहित आसपास के पहाड़ों पर अच्छी बारिश हुई, जिसे जिले की 15 सड़कें नहीं झेल पायीं, और बंद हो गयीं। खासकर मुख्यालय का अभी हाल ही में बना रूसी बाइपास भी बंद हो गया, तथा बेतालघाट के भुजान से एक मार्ग को छोड़कर दोनों ओर के चार में से तीन मार्ग बंद हो गये।
जिला आपदा कक्ष के अनुसार सोमवार सुबह 9 बजे तक जनपद में सर्वाधिक 114 मिमी वर्षा मुख्यालय में स्नोव्यू स्थित केंद्र पर रिकार्ड की गयी। जबकि हल्द्वानी-काठगोदाम में 112 मिमी, कोश्यां कुटौली में 30, धारी में 27.5, बेतालघाट में 40, रामनगर में 40.6, कालाढुंगी में 97 व मुक्तेश्वर में 16.4 मिमी बारिश रिकार्ड की गयी। बारिश की वजह से जनपद के प्रमुख जिला मार्ग भुजान बेतालघाट व गर्जिया-बेतालघाट के साथ ही बेतालघाट को जोड़ने वाले शहीद बलवंत सिंह मार्ग, रिखौली मोटर मार्ग, ओखलढूंगा तल्ली सेठी, छड़ा अमिया, रूसी बाईपास, सिमलिया बैंड साननी, हैड़ाखान पहुंच मार्ग, भौर्सा पिनरौ, देवीपुरा सौड़, बानना, अमेल खाला, नौकुचियाताल जंगलियागाव तथा हरिनगर चंदादेवी ग्रामीण मार्ग भी बंद हो गये। मुख्यालय के ओक लॉज में भगवती निवास के समीप पैदल मार्ग के नीचे की दीवार बारिश के दौरान ढह गयी। इससे मार्ग के गिरने का खतरा पैदा हो गया। साथ ही एडीबी द्वारा बीते वर्ष डाली गयी पेयजल लाइन भी खतरे में आ गयी।

पूर्व समाचार : उत्तराखंड में कैलास मानसरोवर मार्ग पर फिर मालपा हादसा, 17 की मौत, 30 लापता ! रोकनी पड़ी कैलास यात्रा

नैनीताल, 14 अगस्त 2017। उत्तराखंड में एक बार फिर 1998 और 2006 के मालपा के दुःखद हादसों की यादें ताजा हो गयी हैं। फिर बने आपदा जैसे हालतों में पिथौरागढ़ जिले के कैलास मानसरोवर मार्ग पर तवाघाट के मांगती नाले और मालपा में सोमवार सुबह तड़के दो बजे के करीब बादल फटने की घटना हुई। अपुष्ट सूत्रों के अनुसार घटना में अब तक 17 लोगों के शव बरामद किये जा चुके हैं, जबकि पिथौरागढ़ के जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार मांगती नाले में एक की मृत्यु हुई है, जबकि पांच सैनिकों, एक जेसीओ व दो स्थानीय लोगों के लापता होने, तीन सैनिकों व एक जेसीओ के घायल होने, सेना के दो वाहनों व तीन सेना के टैंटों के क्षतिग्रस्त होने के साथ ही 24 खच्चरों व 16 बकरियों की मौत होने की पुष्टि की गयी है, जबकि मालपा में चार लोगों की मौत, दो के लापता व एक महिला के घायल होने के साथ चार होटल बताये जा रही दुकानों के क्षतिग्रस्त होने की पुष्टि की गयी है। हादसे में पूर्व में सेना के सात जवान लापता बताये गये थे जिसमे से चार को सकुशल बचाया गया है। वहीं एक महिला काली नदी में बहते हुए नेपाल की तरफ सुरक्षित पहुंची है। इनके अलावा भी मांगती में दो और सिमखोला में एक पुल क्षतिग्रस्त हुआ है, और ऐलगाड़ में मुख्य मार्ग अवरुद्ध है। इसके अलावा दर्जनों की संख्या में लोग घायल तथा लगभग 30 लोग अब भी लापता बताये जा रहे हैं। सेना के 3 ट्रक भी नाले में बह गए हैं। बताये जा रहे हैं। मौके पर आपदा प्रबंधन और पुलिस की टीमें मौजूद है। सेना भी मौके पर सहायता करने के लिए पहुची है। वहीं शासन के अगले आदेशों तक के लिये मानसरोवर यात्रा रोक दी गयी है। वहीं अपुष्ट सूत्रों के अनुसार अब तक कुछ 16 शव बरामद हुए है जिनकी शिनाख्त की जा रही है। शवों की खोज के लिये सर्च ऑपरेशन जारी है।

आपदा का मंजर :

इससे पूर्व सुबह सेना के सात जवान एक जेसीओ और तीन अन्य सहिज 11 लोगों के लापता होने की खबर आई थी। इनमें से बीती रात लापता हुए सेना के चार जवान व एक जेसीओ सुरक्षित मिल गए हैं। प्रशासन ने आपदा में मालपा में चार व मांगती में एक की मौत की पुष्टि की है। जबकि मालपा में जमींदोज 6 लोगों के शव निकाल लिए गए हैं। जिसमें गर्ब्यांग गांव के पांच पुरुष व बूंदी निवासीएक महिला बताई जा रही है। आफत की बारिश में मालपा में तीन मकान ध्वस्त हो गए हैं। वहीं मांगती नाले व सिमखोला में पैदल पुल भी बह गए हैं। मांगती नाले समीप 3 कुमांऊ का एक जवान अभी लापता चल रहा है। बादल फटने की घटना को देखते हुए शासन स्तर से रेस्क्यू के लिए हेलीकॉप्टर भेजे गए हैं। आपदा को देखते हुए यह हेलीकाप्टर धारचूला में ही तैनात रहेंगे। जहां से रेस्क्यू कर आपदा में फंसे लोगों को निकाला जाएगा। हादसे के बाद से ही आईटीबीपी, एसएसबी, सेना, एनडीआरएफ की टीम बचाव राहत कार्य में जुट गई है। मालपा हादसे में सेना के घायल चार जवानों को एसएसबी के जवान धारचूला ला रहे हैं। खराब मौसम के कारण हेलीकाप्टर उड़ान नहीं भर पा रहा है।

1998 का मालपा हादसाः तब प्रख्यात नृत्यांगना प्रोतिमा बेदी सहित 200 लोगों ने गंवाई थी जान

नवीन जोशी, नैनीताल। बेहद जोखिम भरी मानी जाने वाली कैलास मानसरोवर यात्रा के मालपा पड़ाव से पहले भी बेहद डरावनी दुःस्वप्न सरीखी यादें जुड़ी हुई हैं। लेकिन शिव भक्तों का यहां से आगे बढ़ने का सिलसिला नहीं रुका है। 1998 में यात्रा के मालपा पड़ाव में जबरदस्त भूस्खलन हुआ। इस हादसे में हादसे में 60 कैलास यात्रियों सहित 200 से अधिक लोग जिंदा दफ्न हो गये थे। इस हादसे के बाद मालपा में यात्री यात्री रात्रि में नहीं रुकते, और दिन का भोजन कर आगे निकल जाते हैं।
वह 17 अगस्त 1998 का दिन था। आज से ठीक चार दिन बाद इस हादसे को 19 वर्ष पूरे होने थे। लेकिन इससे चार दिन पहले ही वह बुरी यादें एक बार फिर याद आने को मजबूर हो गयी हैं। उस रात कैलास मानसरोवर यात्रियों का 18वां यानी आखिरी दल यात्रा पर जाने के दौरान मालपा पड़ाव में रूका हुआ था। यात्री दल में बॉलीवुड स्टार कबीर बेदी की पत्नी और अभिनेत्री पूजा बेदी की मां प्रख्यात नृत्यांगना प्रोतिमा बेदी भी शामिल थीं। उन्होंने रात्रि में शिव नृत्य का प्रदर्शन किया। जिसे देखने के लिए 60 यात्रियों सहित बड़ी संख्या में खच्चर वाले व कुली यानी पोनी-पोटर्स, आइटीबीपी जवानों के साथ ही स्थानीय ग्रामीण भी मालपा पड़ाव में मौजूद थे। किंतु रात्रि में विशाल चट्टान टूटकर मालपा पड़ाव आ गिरी, जिससे पूरा पड़ाव नष्ट हो गया। मलबे में करीब 200 लोग जिंदा दफन हो गए। राहत एवं बचाव कार्य के लिए सेना और वायु सेना को बुलाया। लगभग दो महीने तक यहां आपदा कार्य चला। बावजूद कुछ शव ही निकाले जा सके। अधिकांश शव मलबे के ढेर में ही दफन हो गए। मानसरोवर यात्रा में यह आज तक का सबसे बड़ा हादसा था। कुछ ही लाशें मिल पाई। तब से मालपा पड़ाव में रात्रि विश्राम बंद कर दिया गया। निगम के महाप्रबंधक पर्यटन डीके शर्मा के मुताबिक अब मालपा में रात्रि पड़ाव नहीं डाला जाता है। यहां फिर नये सिरे से आबादी बस चुकी है। यहां यात्रियों को दिन का भोजन कराने के बाद आगे रवाना कर दिया जाता है।

घटनास्थल नहीं पहुंच पाये सीएम, दिये निर्देश

नैनीताल। प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जनपद के धारचूला व बंगापानी में आपदा ग्रस्त क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया। मौसम खराब होने के कारण मांगती वाला व मालपा हेलीकॉप्टर नहीं पहुंच पाया। हवाई सर्वेक्षण के बाद मुख्यमंत्री पिथौरागढ़ की नैनीसैनी हवाई पट्टी पर हेलीकाप्टर से उतरे। इस दौरान उन्होंने जिलाधिकारी एमसी रविशंकर से आपदा प्रभावित क्षेत्र के बारे में जानकारी हासिल की, और अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने आपदा राहत कार्यों के संबंध में अधिकारियों से जानकारी ली, तथा उन्हें प्रभावी कार्रवाई के आदेश दिए। उन्होंने प्रभावितों को तत्काल सहायता देने व घायलों के बेहतर उपचार के लिए भी डीएम को भी निर्देश दिए। सीएम रावत ने कहा कि सरकार आपदा प्रभावित क्षेत्र को हर संभव सहायता मुहैया कराएगी। आपदा प्रभावितों की मदद के लिए सरकार की ओर से धारचूला में हेलीकाप्टर तैनात कर दिए गए हैं। इससे पूर्व सीएम 12.10 बजे हेलीकाप्टर से हल्द्वानी के गौलापार हैलीपैड पहुंचे। और यहां कार्यकर्ताओं से उन्होंने क्षेत्र में हो रही आपदा की घटनाओं के बारे में जानकारी हासिल की। इस मौके पर भाजपा नेता मनोज साह, प्रदीप बिष्ट, संजय रावत आदि मौजूद रहे। जिसके बाद वह वित्त मंत्री प्रकाश पंत के साथ पिथौरागढ़ के लिए रवाना हो गए।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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