पुराना समाचार: पीएम मोदी ने सराही उत्तराखंड के किसानों की यह पहल, बताया देश के लिए अनुकरणीय

जहां पहाड़ के गांव पलायन का दंश झेल रहे हैं। वहीं कुछ गांव और उसमें रहने वाले लोग अपने प्रयासों से देशवासियों की प्रेरणा बन रहे हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद के सीमांत मुनार गांव के ग्रामीणों ने। इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में मुनार के काश्तकारों से प्रेरणा लेने की अपील की है।

प्रधानमंत्री ने क्या कहा, यहां सुनिए :

प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में कहा, “भाइयो, बहनो, उत्तराखंड के किसान देश भर के किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गए हैं। उन्होंने संगठित प्रयास से काम किया। खेत की पैदावार से बिस्कुट बनाया और इन्हें बेचना शुरु किया। उस इलाके में पक्की मान्यता है कि बिस्कुट आयरन रिच होते हैं। यह आयरन रिच गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। मुनार गांव में एक सहकारी संस्था बनाई है। बिस्कुट की फैक्ट्री खोल ली है। किसानों की हिम्मत देखते हुए सरकार ने भी इसे राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जोड़ दिया है। यह बिस्कुट अब न केवल जिले के 50 आंगनबाड़ी केंद्रों में बल्कि अल्मोड़ा कौसानी में भी पहुंचाए जा रहे हैं। किसानों की मेहनत से कंपनी का सालाना टर्न ओवर 10 से 15 लाख पहुंच गया है। 900 परिवारों को रोजगार भी मिला है। जिले से होने वाला पलायन भी रुकना शुरु हुआ है।”

देश भर को इस तरह प्रेरणा बने मुनार के ग्रामीण

वास्तव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में कपकोट ब्लाक के दूरस्थ, सरयू नदी के उद्गम स्थल सरमूल के आखिरी पड़ाव, मुनार के मडुवे के बिस्कुटों का जिक्र किया है। देश भर के लिए प्रेरणा बने मुनार के लोगों ने एक दशक पूर्व स्वयं सहायता समूह बनाया। उन्होंने एसएचजी के माध्यम से मडुवा, चौलाई, मक्का के बिस्कुट बनाने शुरु किए। पहले कुछ समय तक इन लोगों ने स्थानीय बाजार कपकोट, भराड़ी क्षेत्र के दुकानों में अपने मडुवे से बने उत्पादों को बेचा। किसानों की मेहनत रंग लाई। इसके बाद सरकार की नजर इन पर पड़ी और इसे व्यापक रुप दिया गया। 10 माह पूर्व इन लोगों ने एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना से मां चिल्टा आजीविका स्वायत्त सहकारिता, मुनार, लोहारखेत में बनाई। जहां हिलांस ब्रांड का मडुवा, चौलाई व मक्का से निर्मित बिस्कुट बनाए। जिसको व्यापक पैमाने में बाजार मिला। आज यह बागेश्वर, कौसानी, अल्मोड़ा आदि स्थानों पर आसानी से बिकने लगा है।

20 गांवों के 984 लोग जुड़े

स्यायत्त सहकारिता में 20 गांवों में 84 स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं। जिसमें सीधे तौर पर 984 सदस्य जुड़े हुए हैं। सरकार भी इनके काम को अब प्रोत्साहित करने लगी है। स्वायत्त सहकारिता की अध्यक्ष तारा टाकुली, कोषाध्यक्ष गंगा देवी ने कहा कि अब इस काम से लोग लगातार जुड़ रहे है। गत दिनों इस पर डीडी न्यूज में भी समाचार प्रसारित हुआ था। उसी समाचार को मोदी ने अपनी मन की बात में शामिल किया है।

(चंद्रशेखर द्विवेदी, बागेश्वर)

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