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सनसनी : रामनगर में महिला की हत्या कर शव नाहर में फेंका, पहचान छुपाने को चेहरा भी जलाया…

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युवती की हत्या कर शव नहर में फेंका, शिनाख्त न हो इसलिए चेहरा भी जलायानवीन समाचार, रामनगर, 15 जून 2019। हत्यारों ने एक महिला की कहीं और हत्या कर शव चादर में ढककर सिंचाई नहर में फेंक दिया। पहचान छिपाने के लिए उसे जलाने का भी प्रयास किया गया। उसका चेहरा व हाथ आग से झुलस गया। जबकि सिर के बाल जल गए। उसके पैर भी बांधे गए थे। पुलिस ने मौके से साक्ष्य एकत्र कर शिनाख्त के लिए शव को पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया है। शनिवार को नंदपुर चिल्किया गांव स्थित नहर में लोगों ने एक महिला का शव पड़ा देखा। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। इसके बाद नहर से शव को बाहर निकाला गया।

शव देखकर प्रतीत हो रहा है कि मृतका को हत्यारों ने जलाने का प्रयास किया था, लेकिन वह अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए। आग से उसके चेहरे का कुछ हिस्सा झुलस गया है। उसके सिर के बाल भी जले हुए थे। मृतका की उम्र 21 से 25 वर्ष आंकी जा रही है। दिखने में वह मध्यम परिवार की प्रतीत हो रही है। पुलिस ने आसपास के लोगों को बुलाकर शव की शिनाख्त का प्रयास भी किया, लेकिन उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई। शव को पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हाउस भेजवा दिया। मृतका ने लाल रंग का कढ़ाई वाला सूट सलवार, लाल रंग का दुपट्टा व पंजाबी जूती पहनी हुई है। कोतवाल रवि सैनी ने बताया कि हत्या कहीं और की गई है। शव को नहर में लाकर फेंका गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

यह भी पढ़ें : कलयुगी पिता ने अपने चार बच्चों के कैंची से फाड़ डाले पेट, दो की मौत, दो गंभीर

नवीन समाचार, काशीपुर, 10 जून 2019। एक कलयुगी क्रूर पिता के द्वारा अपने ही बच्चों की नृशंश तरीके से हत्या करने का मानवता को झकझोरने वाला मामला सामने आया है। काशीपुर के ठाकुरद्वारा कोतवाली क्षेत्र के ग्राम निर्मलपुर में दर्जी का काम करने वाले क्रूर बाप ने देर रात अज्ञात कारण से अपने चार बच्चों पर कैंची से हमला कर उनके पेट फाड़ डाले। इससे दो बच्चों की मृत्यु हो गयी, जबकि अस्पताल में भर्ती दो बच्चों की हालत गम्भीर बनी हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम निर्मलपुर, ठाकुरद्वारा, यूपी निवासी रोहतास की ग्राम कालेवाला ठाकुरद्वारा में टेलर की दुकान है। रविवार की रात करीब साढ़े 10 बजे जब उसकी पत्नी और बेटी सलोनी (18), शिवानी (16) बेटा रवि (14) व आकाश (10) सो रहे थे, उसने अपने बच्चों पर कैंची से हमला कर दिया। चीख-पुकार सुनकर मां व बड़े भाई छत्रपाल के घरवाले भी उठ गए। लोगों को आता देख आरोपित दरवाजा खोलकर फरार हो गया। भाई के लड़के सुनील ने उसे पकड़ने की भी कोशिश की, लेकिन हाथ नहीं आया। आनन फानन परिजनों ने घायलों को ठाकुरद्वारा सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां पर चिकित्सकों ने रवि को मृत घोषित कर दिया। जबकी अन्य तीनों की हालत गम्भीर बताकर हायर सेंटर रेफर कर दिया। परिजनों ने तीनों को गिरिताल काशीपुर स्थित कृष्णा अस्पताल में भर्ती कराया। तीनों घायलों का आईसीयू में इलाज चल रहा है। चिकित्सक मयंक अग्रवाल ने बताया सभी बच्चों के पेट फटे हैं। सलोनी व आकाश का ऑपरेशन किया गया है। दोनों बच्चों की हालत गम्भीर बनी हुई है। जबकी शिवानी खतरे से बाहर है। फिलहाल आरोपित पुलिस गिरफ्त से बाहर है। उसकी पत्नी कलावती ने बताया की आए दिन रोहतास शराब के नशे में धुत होकर घर पहुंचता था। और मारपीट व गाली-गलौज करता था। बच्चों पर हमले के कारणों का पता नहीं है। शराब पीने को लेकर पारिवारिक कलह जरूर थी। पुलिस आरोपित की गिरफ्तारी में जुटी है।

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नवीन समाचार, हल्द्वानी, 22 मई 2019। नैनीताल पुलिस ने बीती 16 मई को रानीबाग-भीमताल रोड पर सलड़ी के पास कार में जलाकर की गयी हत्या का खुलासा कर दिया है। एसएसपी सुनील कुमार मीणा ने बुधवार को पत्रकार वार्ता कर बताया कि मृतक अवतार सिंह चौधरी पुत्र गुलजार सिंह निवासी सामिया लेक सिटी ऊधम सिंह नगर की हत्या उसकी पत्नी ने अपने अवैध संबंधों में आढ़े आने के कारण अपने प्रेमी व उसके एक आपराधिक प्रवृत्ति के साथी की मदद से की। साथ ही पुलिस को गुमराह करने का भी प्रयास किया। पुलिस आरोपितों को न्यायालय में पेश कर जेल भेजने की तैयारी कर रही है। 
एसएसपी ने घटना का ब्यौरा प्रस्तुत करते हुए बताया कि मृतक अवतार सिंह मूलतः अम्बाला हरियाणा का जबकि उसकी पत्नी नीलम मूलतः बागेश्वर की रहने वाली है। दोनों ने 2006 में लव मैरिज की थी। घटना के दिन 16 मई को नीलम अपने पति को स्वयं का चिकित्सक को दिखाने का बहाना लेकर हल्द्वानी ले कर आयी, जबकि उसका प्रेमी मनीष मिश्रा पुत्र सुरेश मिश्रा और उसका साथी अजय यादव निवासी जौनपुर यूपी मोटरसाइकिल से आये। हल्द्वानी में नीलम ने अवतार सिंह को ग्लूकॉन डी के साथ धोखे से नींद की गोलियां खिलाईं। इस दौरान नीलम दो चिकित्सकों को स्वयं को दिखाने भी गई और बाद में रुद्रपुर लौट गयी, जबकि मनीष व अजय बेहोश अवतार सिंह को उसकी कार में लेकर सलड़ी ले गये, और वहां गमछे से उसका गला दबाकर उसकी हत्या कर दी और उसकी सोने की चेन व अंगूठी उतार कर आपस में बांट ली और अपने साथ लाये पेट्रोल अवतार सिंह व कार के अंदर डालकर आग लगा दी। हल्द्वानी व सलड़ी की दोनों ने पूर्व में रेकी भी की थी। बाद में नीलम सहानुभूमि बटोरने व पुलिस को गुमराह करने अवतार सिंह की गुमशुदगी दर्ज करने भी गयी। घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल भी पुलिस ने बरामद की है।

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-पुलिस ने मृतक की पत्नी, उसके प्रेमी व एक अन्य को गिरफ्तार कर शुरू की पूछताछ, घटना का खुलासा किसी भी समय होने की उम्मीद
नवीन समाचार, नैनीताल, 21 मई 2019। बीती 16 मई को भीमताल-रानीबाग मोटर मार्ग पर सलड़ी के पास एक व्यक्ति की चालक की बगल की सीट पर जलने के मामले में अनौपचारिक तौर पर खुलासा कमोबेश हो गया है। बताया जा रहा है कि शव घटना के दिन से ही गायब कार मालिक अवतार सिंह पुत्र गुलजार सिंह निवासी सामिया लेक सिटी रुद्रपुर का था, और उसकी हत्या उसकी पत्नी नीलम ने अपने प्रेमी मनीष मिश्रा एवं एक अन्य व्यक्ति की मदद से हल्द्वानी-रुद्रपुर के बीच कहीं करके शव को कार के साथ जला दिया था। मामले में अवतार सिंह के पिता, मां व भाई आदि ने ऐसे आरोप लगाते हुए नीलम और उसके प्रेमी मनीष के खिलाफ भीमताल थाने में तहरीर दी, जिस पर पुलिस ने सोमवार 20 मई की रात्रि हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया और मंगलवार को तीनों को गिरफ्तार भी कर लिया। हालांकि अभी इस मामले में पुलिस ने औपचारिक खुलासा नहीं किया है, और पुलिस गिरफ्तार किये गये आरोपितों से अलग-अलग पूछताछ कर रही है, जिसके बाद ही घटना का पूरा खुलासा होगा। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व नीलम के भी सलड़ी के पास जाने की इलेक्ट्रानिक सर्विलांस से पुष्टि होने की बात भी कही जा रही है। एसएसपी सुनील कुमार मीणा ने बताया कि इस मामले में पुलिस पहले दिन से कार मालिक अवतार सिंह की किसी के द्वारा हत्या किये जाने, अवतार सिंह द्वारा किसी की हत्या कर फरार होने और एसी की वजह से दुर्घटनावश अग्निकांड होने के तीन कोणों से घटना की जांच कर रही थी। अब अवतार सिंह के परिजनों की ओर से नामजद मुकदमा दर्ज किये जाने के बाद साफ हो गया है कि पत्नी व उसका प्रेमी ही हत्यारे हैं। अलबत्ता, पूरी सच्चाई तीनों द्वारा किये जाने वाले खुलासे से ही साफ होगी। बताया जा रहा है कि पर पुरुष से विवाहेत्तर संबंधों के कारण अक्सर अवतार सिंह व नीलम में विवाद होता रहता था। नीलम पति की जायदाद तो चाहती थी, परंतु प्रेम मनीष से करती थी। इस बीच अवतार सिंह ने बड़ी धनराशि का बीमा भी रिन्यू कराया था। जो कि उसकी मौत के बाद उसकी पत्नी को मिलनी थी। यह भी हत्या का कारण हो सकता है।

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नवीन समाचार, हल्द्वानी, 20 मई 2019। एक व्यक्ति की कार की चालक की बगल वाली अगली सीट पर जल कर हुई मौत के मामले में जैसा कि पहले से आशंका व्यक्त की जा रही थी, महिला का कनेक्शन भी सामने आ रहा है। हालांकि अभी पूरी तौर पर नहीं कहा जा सकता है परंतु कार स्वामी रुद्रपुर के सामिया लेक सिटी निवासी व सिडकुल में श्रमिकों की आपूर्तिकर्ता अवतार सिंह के भाई द्वारा अपने भाई की कार के रूप में पहचानी गयी कार में एक महिला भी कार चालक के साथ दिखाई दे रही है, और कार अवतार सिंह द्वारा अपनी पत्नी को छोड़ने के बाद करीब 4 बजकर 20 मिनट पर मुखानी चौक के पास की पार्किंगमें तथा इसके बाद 5.45 बजे कालू सिद्ध मंदिर पर, और 6.05 बजे टेढ़ी पुलिया और काठगोदाम के नारीमन चौक पर भी सीसीटीवी में नजर आई है। हालांकि सीसीटीवी में कार के नंबर और कार में सवारों के चेहरे साफ नजर नहीं आ रहे हैं। वहीं सूत्रों की मानें तो घटना वाले दिन कार स्वामी की पत्नी की मोबाइल लोकेशन सलड़ी के आसपास होना बताई जा रही है।

उल्लेखनीय है कि अवतार सिंह घटना के दिन अपनी पत्नी के साथ हल्द्वानी आया था। रात आठ बजे भीमताल थाना क्षेत्र के सलड़ी में उसकी कार में एक पुरुष की लाश रखकर आग लगा दी गई थी। तब से अवतार सिंह भी लापता है। लाश अवतार सिंह की है या किसी और की, इसकी जांच के लिए पुलिस डीएनए टेस्ट कराने की बात कह रही है। अवतार सिंह की पत्नी ने नीलम ने पुलिस को बताया था कि बृहस्पतिवार को वह इलाज के लिए सबसे पहले मुखानी चौक पहुंचे थे। इसको ध्यान में रखकर पुलिस ने जज फार्म रोड से लेकर उसके आगे के सीसीटीवी की क्रमवार जांच की, जिसमें कार में एक महिला भी नजर आ रही है।

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p style=”text-align: justify;”>-पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके से जुटाए साक्ष्य
नवीन समाचार, भीमताल, 18 मई 2019। हल्द्वानी-भीमताल मार्ग पर सलड़ी में 16 मई को कार में आग एसी से नहीं लगी थी। सूत्रों के अनुसार पुलिस को प्रथम दृष्ट्या ऐसे साक्ष्य मिले हैं। ऐसे संकेत है कि हत्या कर लाश को कार में रखा गया और बाद में पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई। ऐसे संकेत भी मिले हैं कि मरने वाला व्यक्ति कार का मालिक अवतार सिंह हो सकता है। वहीं घटना में जींस की पैंट एवं 7 नंबर के जूते के कुछ हिस्से भी बरामद हुए हैं, उसके बाद माना जा रहा है की शव कार मालिक अवतार सिंह का हो सकता है। मिली जींस का हिस्सा अवतार सिंह की हीजीन्स का ही बताया जा रहा है, और अवतार सिंह 7 नंबर का जूता ही पहनता था। हालांकि अभी तक पुष्ट तौर पर पुलिस कुछ नहीं कह रही है। एसएसपी का कहना है कि हत्या और हादसा दोनों एंगल से मामले की जांच की जा रही है।
सलड़ी में बृहस्पतिवार की रात करीब आठ बजे एक सफेद रंग की कार में आग लग गई थी। भीमताल और काठगोदाम की पुलिस के साथ ही फॉरेंसिक लैब के संयुक्त निदेशक डॉ. दयाल शरण ने भी मौके पर पहुंच कर जांच की। सूत्रों की मानें तो घटनास्थल पर पुलिस को प्रथम दृष्टया जो साक्ष्य मिले हैं उनसे पता चल रहा है कि हत्या करने के बाद शव सीट पर रखकर पेट्रोल डालकर आग लगाई गई होगी। परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी हत्या की ओर इशारा कर रहे हैं। यह भी माना जा रहा है कि जानबूझ कर कार को स्टार्ट रखा गया और उसका हॉर्न भी बज रहा था। कार का हैंडब्रेक भी लगा हुआ था। पुलिस भी हत्या से इनकार नहीं कर रही है। साथ ही दुर्घटना का ध्यान रखकर भी जांच कर रही है। संयुक्त निदेशक फॉरेंसिक साइंस लैब कुमाऊं परिक्षेत्र दयाल शरण ने बताया कि जांच में प्रथमदृष्टया हत्या कर शव जलाने के ही संकेत मिले हैं। हत्या किसी दूसरे स्थान पर कर शव ड्राइवर सीट के बगल में रखकर सलड़ी तक लाया गया होगा। यहां अंधेरा होने पर शांत स्थान ढूंढकर शव को कार समेत पेट्रोल डालकर आग के हवाले कर दिया। ज्वलनशील पदार्थ के छिड़काव से कार चंद पलों में ही आग का गोला बन गई। 

सुलगते सवाल :

– इलाज के लिए पत्नी को लाने के लिए बाद अचानक अवतार उसे छोड़कर क्यों चला गया
– अगर किसी ने बुलाया था, तो वह कौन था?
– टेढ़ी पुलिया से रानीबाग के बीच 38 मिनट वह कहां रहा
– अगर पहाड़ की तरफ गया तो थोड़ी देर में ही कार हल्द्वानी के लिए क्यों मोड़ दी
– कार में जला शव महिला का है या पुरुष का
– अगर शव अवतार का नहीं है, तो लाश किसकी है। अवतार कहां गया।
– ड्राइविंग सीट छोड़कर बगल वाली सीट पर क्यों बैठा था
– परिजनों के मुताबिक अवतार नशे का आदी नहीं था तो कार के पास बीयर की बोतल कहां से आई
– लाश के साथ सबूत को ठिकाने लगाने के लिए तो नहीं लगाई कार में आग
– स्टार्ट कार में हार्न क्यों बज रहा था।
अब तक इन बिंदुओं पर पुलिस की जांच
– सीसीटीवी चेक किए गए हैं, इसमें कार नैनीताल की तरफ जाते हुए दिख रही है, तो सलड़ी कैसे पहुंची 

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नवीन समाचार, भीमताल, 17 मई 2019। बीती देर रात्रि हल्द्वानी-भीमताल हाईवे पर सलड़ी से दो सौ मीटर हल्द्वानी की ओर एक लक्जरी एसेंट कार संदिग्ध परिस्थितियों में एक इंसान की चिता बन गई। धू-धू कर जलती कार की आग जब तक फायर ब्रिगेड की मदद से बुझाई जाती, तब तक चालक की बगल वासी सीट पर सिर्फ जला हुआ एक कंकाल बचा था। यह कंकाल किसी पुरुष का था, अथवा स्त्री का यह बताना भी मुश्किल है।

इस मामलें में रुद्रपुर निवासी नीलम नाम की एक महिला सामने आई है। नीलम का दावा है कि बृहस्पतिवार को वह अपने पति अवतार सिंह के साथ अपनी कार संख्या यूके06एएफ-8111 से हल्द्वानी चिकित्सक को दिखाने आई थी। यहां उसके पति ने कार से पहाड़ की ओर जाने की बात कही। इस पर उसके पति उसे रोडवेज की बस में बैठाकर खुद पहाड़ की ओर चले गये। तब से उनका कुछ पता नहीं चल रहा है। उनका मोबाइल नंबर भी बंद आ रहा है। महिला के अनुसार अवतार सिंह रुद्रपुर के उद्योगों में कार्मिकों की आपूर्ति करने का कार्य करते हैं। कार उनकी ही है। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, और उसके मोबाइल नंबर को भी सर्विलांस पर लगाकर तलाश शुरू कर दी है।

आग लगाई गई है: सीओ फायर

कमांडिंग ऑफीसर-फायर संजीवा कुमार ने मौका मुआयना कर कहा है कि प्रथमदृष्टया आग किसी दुर्घटनावश नहीं, वरन लगाई गयी प्रतीत हो रही है। आग अगली सीट से शुरू हुई थी, जबकि अगली सीट पर आग दुर्घटनावश नहीं लग सकती है। दुर्घटनावश आग बोनट से तारों के शॉर्ट सर्किट की वजह से लगनी शुरू होती है।

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-बासुलीसेरा के युवक का शव मिला बिंता में

दीपक मेहता @ नवीन समाचार, बग्वालीपोखर (अल्मोड़ा), 18 अप्रैल 2019। बासुलीसेरा निवासी बचे सिंह बनेशी के छोटे सुपुत्र भीम सिंह बनेशी (31) का शव यहाँ बिंता के गधेरे में खूूून से सनी अवस्था में मिला। प्राप्त जानकारी के अनुसार भीम अपने माता-पिता के साथ अपनी मौसी के घर बसभीड़ा (बिंता) एक शादी समारोह में गया हुआ था। गरुवार सुबह उसका शव बिंता के गधेरे के पास मिला। सुबह ख़बर सुनते ही बासुलीसेरा के ग्रामीण बिंता पहुँचे और उन्होंने पुलिस से हत्यारों को पकड़ने के बाद ही शव उठाने को कहा। देखते ही देखते पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। गगास घाटी का यह शांत क्षेत्र एकाएक सुर्ख़ियों में आ गया है। इस प्रकार की आपराधिक घटनाएं गांवों में भी फैलने लगी हैं जोकि चिंता का विषय है। उधर घर में भीम की पत्नी हेमा एवं उसकी माँ का बुरा हाल है। पुलिस कार्यवाही चल रही है। उधर सोमेश्वर से भी पुलिस टीम बुलवा ली गई है। घटना से गांव वाले काफ़ी आहत हैं उनका कहना है कि यदि तुरन्त अपराधी नहीं पकड़े गए तो वह आक्रामक आंदोलन करने पर विवश होंगे और इस प्रकार की घटनाओं के लिए किसी को भी माफ़ नहीं किया जाएगा।

यह भी पढ़ें : पहाड़ पर हिमालय के पास ऑनर किलिंग, प्रेमिका के भाइयों ने युवक की हत्या कर शव को गड्ढे में दबा दिया

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p style=”text-align: justify;”>हिमांशु गड़िया @ नवीन समाचार, बागेश्वर, 19 मार्च 2019। उत्तराखंड की शांत वादियों में भी ‘ऑनर किलिंग’ जैसा शब्द सुनाई पड़ा है। यहां बागेश्वर जिले के दूरस्थ हिमालय के करीब अंतिम गांव कर्मी निवासी तीन दिन से गायब एक युवक का शव हत्यारों की निशानदेही पर पिंडारी ग्लेशियर मार्ग पर कुमाऊं मंडल विकास निगम के लोहारखेत स्थित पर्यटक आवास के निकट जंगल में गड्ढे से बरामद किया गया है। साथ ही यह बात भी स्थापित हुई है कि उसकी हत्या प्रेम प्रसंग के कारण उसकी प्रेमिका के भाइयों ने की है। पुलिस के अनुसार प्रेमिका के भाइयों ने उसे धोखे से अपने घर बुलाया और पीट-पीटकर तथा आखिर में गला रेतकर उसकी हत्या कर दी और शव को गड्ढे में दबा दिया।
बताया गया है कि कर्मी गांव निवासी 22 वर्षीय युवक खिलाफ सिंह पुत्र भवान सिंह रविवार की शाम घर से दोस्तों से मिलने की बात कहकर निकला था और तब से गायब हो गया था, तभी से उसकी तलाश की जा रही थी।
तीनों हत्यारोपितों चंदन सिंह, ललित सिंह व हरीश सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। साथ ही उनकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त तार, चाकू व एक अल्टो कार भी बरामद की गयी है। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 व 201 के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया है।

यह भी पढ़ें : पौड़ी में कलयुगी बेटे ने होली पर खेली अपनी माँ के खून से होली

नवीन समाचार, पौड़ी, 20 मार्च 2019। उत्तराखंड के पौड़ी जिले में घुड़दौड़स्यूं पट्टी के सिमखेत गांव में नशे में धुत एक युवक ने ठीक होली पर अपनी मां को पत्थर से मारने के बाद चाकू से गोद दिया। बुरी तरह घायल महिला ने एम्स ऋषिकेश में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। पुलिस ने छोटे बेटे की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर आरोपी को हिरासत में ले लिया है।

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p style=”text-align: justify;”>थाना क्षेत्र पौड़ी के सिमखेत गांव में 50 वर्षीय कमला देवी पत्नी स्व. यशपाल सिंह अपने तीन बेटों के साथ रहती थीं।
उनका सबसे बड़ा बेटा विकास (26) अक्सर नशे की हालत में रहता था। मंगलवार शाम को भी विकास नशे की हालत में घर पहुंचा। मां से उसकी किसी बात पर कहासुनी हो गई। विकास नशे में इतना धुत था कि उसने पहले अपनी मां के सिर पर पत्थर से वार किया और फिर चाकू से कई प्रहार कर दिए। विकास के दोनों छोटे भाई जब तक कुछ कर पाते, मां बुरी तरह घायल हो गई। दोनों भाइयों ने जैसे-तैसे मां को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाबौ में भर्ती कराया। हालत नाजुक होने से डाक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला चिकित्सालय पौड़ी रेफर कर दिया। जिला चिकित्सालय पौड़ी से उन्हें मेडिकल कालेज श्रीनगर और फिर एम्स ऋषिकेश को रेफर कर दिया गया। एम्स ऋषिकेश में उपचार के दौरान महिला ने दम तोड़ दिया। मृतका के छोटे बेटे अजय की तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का प्रयास व धारदार हथियार से हमला करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस उपनिरीक्षक अजय ने बताया कि मां की हत्या के आरोपी विकास को हिरासत में ले लिया गया है। मृतका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मुकदमे की धाराएं बदल जाएंगी।

यह भी पढ़ें : औद्योगिक नगरी में 20 वर्षीय युवक की धारदार हथियार से हत्या कर शव नहर में फेंका

नवीन समाचार, रुद्रपुर, 19 मार्च 2019। औद्योगिक नगरी रुद्रपुर में रामपुर रोड पर फाजलपुर महरोला क्षेत्र स्थित बारादरी मार्ग स्थित नाले में मंगलवार सुबह एक युवक का शव देखे जाने से सनसनी फैल गयी है। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने बुरी तरह से क्षत-विक्षत, सड़ी-गली सी अवस्था में शव को नाले से निकाला। शव करीब 20 वर्षीय युवक का था। मृतक के चेहरे, गले, पीठ व पेट आदि पर धारदार हथियार से चोट के 22 गहरे जख्म बने हुए हैं। जिसको देखते हुए प्रथम दृष्टया लगता है कि शव दो से तीन दिन पुराना हो सकता है। कहीं और बेरहमी से निर्मम हत्या कर शव को यहां ठिकाने लगाने के इरादे से डाला गया होगा। मृतक के बायीं बाजू पर मिथुन नाम गुदा हुआ है। पुलिस शव की पहचान चिन्हों की डीएनए जांच कराकर उसकी शिनाख्त कराने की कोशिश में है। ई जाएगी ताकि समय रहते उसकी शिनाख्त की जा सके। अलबत्ता पुलिस इस अज्ञात शव की शिनाख्त कराने में जुटी हुई है, ताकि इसके बाद उसके हत्यारों को कानून के शिकंजे में लाया जा सके।

यह भी पढ़ें : क्षेत्र पंचायत सदस्य की हत्या के मामले में ऐसे आरोपित को कोर्ट में पेश करने के आदेश, जिसका नाम पुलिस की चार्जशीट में ही नहीं….

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 8 मार्च 2019। गत वर्ष 1 सितंबर 2018 को हुई रामनगर के क्षेत्र पंचायत सदस्य वीरेंद्र मनराल की हत्या के मामले में अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी से एक ऐसे आरोपित को न्यायालय में पेश करने के आदेश पुलिस को दिये गये हैं, जिसका नाम पुलिस की चार्जशीट में ही नहीं है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की अदालत ने इस मामले में सोनू कांडपाल पुत्र राधे बल्लभ निवासी गैबुआ दौल कालाढुंगी को आगामी 29 मार्च को बतौर मुलजिम अदालत में पेश करने के आदेश पुलिस को दिये हैं।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में पुलिस की चार्जशीट में तीन आरोपितों- देवेंद्र उर्फ बाऊ निवासी बंदरज्यूड़ा बैलपड़ाव, कालाढूंगी निवासी गुरुप्रीत सिंह, अलीगंज बांसखेड़ा यूएस नगर निवासी दर्शन सिंह के नाम हैं। उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 व आर्म्स एक्ट के तहत चार्जशीट प्रस्तुत की गई है। इन्हें पुलिस ने चार सितंबर 2018 को गिरफ्तार किया था। किंतु इससे इतर अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता-फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने चौथे आरोपित सोनू कांडपाल के खिलाफ बीती एक मार्च 2019 को न्यायालय में दो गवाह, मृतक के भाई दीवान मनराल व कुलदीप मनराल को पेश किया। इन्होंने न्यायालय में गवाही देते हुए बताया कि घटना के दिन सोनू कांडपाल ने ही मुख्य आरोपित देवेंद्र उर्फ बाऊ को बताया था, ‘वीेरेंद्र मनराल आ गया है, उसे गोली मार दो’। इस पर न्यायालय ने सोनू कांडपाल के खिलाफ सम्मन जारी कर दिया है।

यह भी पढ़ें : रामनगर के क्षेत्र पंचायत सदस्य मनराल की हत्या में आरोपितों को न्यायालय से झटका

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, नैनीताल, 31 जनवरी 2019। जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की अदालत में बृहस्पतिवार को क्षेत्र पंचायत सदस्य वीरेंद्र मनराल उर्फ वीरू की हत्या के तीन आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
उल्लेखनीय है कि मदनपुरा रामनगर निवासी दीवान सिंह की दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक 1 सितंबर 2018 को वह वाहन (यूके19-2817) से रामनगर न्यायालय गए थे। उनके साथ भाई वीरेंद्र, कुलदीप भी थे। सरकार बनाम देवेंद्र उर्फ बाऊ मामले में भाई वीरेंद्र को कोर्ट में उपस्थित होना था। कोर्ट में सुनवाई के बाद तारीख मिलने पर वापस आ गए। इस दौरान उन्होंने वाहन शिक्षा विद्यालयी परिषद रामनगर के मैदान में पार्क किया। इसी दौरान देवेंद्र उर्फ बाऊ ने अपने दो साथियों के साथ मौके पर पहुंचकर वीरू को गोली मार दी। अस्पताल ले जाते वक्त वीरू की मौत हो गई। चार सितंबर 2018 को पुलिस ने मुख्य आरोपी देवेंद्र समेत बंदरज्यूड़ा बैलपड़ाव कालाढूंगी निवासी गुरुप्रीत सिंह, अलीगंज बांसखेड़ा यूएस नगर निवासी दर्शन सिंह को गिरफ्तार कर लिया। तीनों ने हत्या की बात कबूल ली। आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल तमंचा बरामद किया गया। आरोपियों की जमानत अर्जी का डीजीसी और वरिष्ठ अधिवक्ता बहादुर सिंह पाल ने विरोध किया। बहस के बाद कोर्ट ने तीनों आरोपितों की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

यह भी पढ़ें : गौलापार में ट्यूबवेल संचालक की गला दबाकर हुई हत्या से सनसनी, पर संघर्ष के निसान न मिलने से संशय में पुलिस…

मृतक

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, हल्द्वानी, 23 फरवरी 2019। हल्द्वानी के ग्रेटर हल्द्वानी गौलापार इलाके में ट्यूबबेल के पास ट्यूबवेल संचालक का शव मिला है। उसके गले में गला दबाने जैसे निशान पाए गए हैं जिससे साफ़ है कि उसकी ह्त्या गला दबा कर की गयी है। परन्तु मृतक के तंदुरुस्त होने के बावजूद संघर्ष के कोई निसान नहीं मिले हैं, इससे हत्यारों को लेकर संशय की स्थिति उत्पन्न हो गई है। पुलिस ने मृतक का पोस्टमार्टम करा दिया है। काठगोदाम थाना प्रभारी कमाल हसन ने हत्या होने की बात स्वीकारी है।
मिली जानकारी के अनुसार रविवार देर रात्रि थाना काठगोदाम पुलिस को सूचना मिली कि गौलापार के पश्चिमी खेड़ा गांव में रहने वाले 65 वर्षीय ट्यूबवेल संचालक चंदन सिंह बृजवाल घर से गायब है। बाद में रात्रि करीब 1 बजे उसका शव ट्यूबवेल के पास ही मिल गया। इस पर थाना प्रभारी कमाल हसन दल बल के साथ मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लिया। बृजवाल के गले में दवाब के निशान दिखाई पड़ रहे थे। मृतक के पैरों में पहनी चप्पल यथावत थी, जबकि गला दबाने पर गुप्तांग से खून निकल आया था। इससे साफ है कि हत्या गला दबाकर ही की होगी। पुलिस ने शव का पंचनामा करवा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस इस कोण से भी जांच कर रही है कि ट्यूबवेल से पानी देने को लेकर तो कोई विवाद नहीं हुआ था।

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नवीन समाचार, नैनीताल, 28 जनवरी 2019। हल्द्वानी के निकट गोरापड़ाव में 5 माह पूर्व 26 अगस्त 2018 की रात्रि हुए बहुचर्चित पूनम पांडे की जघन्य तरीके से हुई हत्याकांड की जांच अब सीबीआई करेगी। मामले की एकमात्र चश्मदीद मृतका की पुत्री सहित तीन लोगों के पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए सीबीआई के फॉरेंसिक लैब (सीएफसएल) की टीम रुद्रपुर फोरेंसिक लैब पहुंच गई है। यहां टीम के प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. एके सिंह मृतका पूनम की बेटी अर्शी के साथ ही दो अन्य लोगों के पॉलीग्राफ टेस्ट करेगी। लैब के निदेशक डॉ. दयाल शरण के अनुसार  टीम 31 जनवरी तक रुद्रपुर में रहकर पॉलीग्राफ टेस्ट लेगी। उल्लेखनीय है कि अर्शी लगातार अपने बयान बदलती रही है, इसलिए वह भी जाँच के दायरे में है। 

घटना में मृतका मां एवं घायल हुई बेटी की फाइल फोटो

पूर्व समाचार : पूनम पांडे हत्याकांड: जाँच में अब सीबीआई की होगी इंट्री, दो युवतियों समेत तीन लोगों के पॉलीग्राफ टेस्ट से सच का बाहर आना तय 

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p style=”text-align: justify;”>नवीन समाचार, हल्द्वानी, 24 दिसंबर 2018। हल्द्वानी के निकट गोरापड़ाव में 4 माह पूर्व 26 अगस्त 2018 की रात्रि हुए बहुचर्चित पूनम पांडे की जघन्य तरीके से हुई हत्या के सुराग तलाशने के लिए पुलिस अब पॉलीग्राफ तकनीक की मदद लेगी। सोमवार को पुलिस ने दो युवतियों सहित तीन लोगों को मुख्यालय स्थित सीजेएम कोर्ट में पेश कर अनुमति को लेकर बयान दर्ज करवाए। तीनों की इस टेस्ट के लिए औपचारिक सहमति लेने के बाद कोर्ट ने टेस्ट कराने को लेकर पुलिस को अनुमति दे दी। बताया जा रहा है कि जरूरत पडने पर पुलिस कुछ ओर संदिग्धों का भी पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के लिए आवेदन कर सकती है।
उल्लेखनीय है कि 26 अगस्त को बरेली रोड गोरापड़ाव निवासी ट्रांसपोर्टर लक्ष्मीदत्त पांडे के घर में निर्मम तरीके से पत्नी पूनम पांडे की हत्या कर दी गई थी। साथ ही नैनीताल के डीएसबी परिसर में पढ़ने वाली बेटी अर्शी को भी गंभीर रूप से घायल हो गई थी। इसके बाद पुलिस के अलावा एसटीएफ एवं डीआईजी स्तर के अधिकारी तथा उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर सितंबर में एएसपी अमित श्रीवास्तव के नेतृत्व में गठित एसआइटी भी मामले की जांच में जुट चुकी है। अब तक पुलिस इस मामले में पीड़ित परिवार से जुड़े एवं विभिन्न गैंगों के सदस्यों, चालकों, ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों, मजदूरों समेत 500 से अधिक लोगों से पूछताछ एवं करीब 600 लोगों के मोबाइल भी सर्विलांस पर लगा कर एवं सर्विलांस-सीसीटीवी सहित हर तकनीक का इस्तेमाल करने के साथ कई राज्यों में दबिश देकर पेशेवर गिरोह के जेल में बंद व बाहर सक्रिय बदमाशों तक की कुंडली खंगाल चुकी है, बावजूद कोई अहम सुराग हाथ नहीं लग पाया है। इसके बाद पुलिस मुख्यालय के स्तर से मामले में पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के निर्देश दिये गये हैं।

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p style=”text-align: justify;”>यह है झूठ पकड़ने की पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की प्रक्रिया
पालीग्राफ की तकनीक का सहारा झूठ पकडने के लिए लिया जाता है। इससे पता चल जाता है कि किसी प्रश्न के जवाब में व्यक्ति सच बोल रहा है या झूठ। पॉलीग्राफ टेस्ट की सुविधा सीबीआई के पास है। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद पुलिस को सीबीआई से पॉलीग्राफ टेस्ट का अनुरोध करना होगा। इसके बाद सीबीआई की दिल्ली स्थित सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री के वैज्ञानिक टेस्ट के लिए तारीख तय कर सकते हैं। जिस व्यक्ति की पॉलीग्राफ की जाती है। उसके शरीर में हाथ, अंगुली, हृदय व श्वसन जांच के लिए सेंसर जोड़े जाते हैं, जिससे मशीन व्यक्ति के हृदय गति, श्वसन गति, रक्तचाप में परिवर्तन, हाथ-पांव की हरकतों व शरीर से निकल रहे पसीने को रिकॉर्ड करती है। पुलिस जिन तीन लोगों का पॉलीग्राफ टेस्ट करवाने जा रही है। उनसे पूर्व में कई बार इस हत्याकांड से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए पूछताछ की गयी, और वे लगातार अपने बयान बदलते रहे हैं। पॉलीग्राफ टेस्ट से पहले सीबीआई के वैज्ञानिक मामले से जुड़े पुलिस के जांच अधिकारी से केस की पूरी ब्रीफ लेते हैं। इसके आधार पर 20 प्रश्न तैयार किए जाते हैं। पहले तीन सवाल सामान्य होते हैं। चौथा सवाल मामले से संबंधित होता है। इसमें पॉलीग्राफ टेस्ट देने वाले व्यक्ति को हां या ना में ही जवाब देना होता है। उल्लेखनीय है कि 13 नवंबर को ऊधमसिंह नगर में सीबीआई की टीम ने 17 लोगों का पॉलीग्राफ टेस्ट किया था। जसपुर थाना क्षेत्र में एक हत्या व एक अन्य मामले में पुलिस ने कोर्ट से जांच की अनुमति ली थी। सीबीआई की टीम ने इनका पॉलीग्राफ टेस्ट किया था।

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आईजी पूरन सिंह रावत

नवीन समाचार, नैनीताल, 31 दिसंबर 2018। बीत रहे वर्ष 2018 में जनपद एवं राज्य उत्तराखंड की सबसे बड़े ‘मर्डर मिस्ट्री’ में स्थानांतरण के बाद विदा हो रहे आईजी कुमाऊं पूरन सिंह रावत ने कई बड़े खुलासे किये हैं। हल्द्वानी के इस पूनम पांडे हत्याकांड का खुलासा न कर पाने की टीस के साथ ही आगे जल्द ही मामले में होने जा रहे पॉलीग्राफ टेस्ट से खुलाशा हो जाने का विश्वास जताते हुए आईजी रावत ने बताया कि पुलिस जल्द सीबीआई से अनुमति लेकर जिन चार लोगों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने जा रही है, उसमें मृतका की पीड़िता पुत्री अर्शी पांडे भी शामिल है, जो पुलिस की जांच में लगातार अपने बयान बदलकर पुलिस की जांच को उलझाती रही है। इसके अलावा हल्द्वानी व रुद्रपुर की दो अन्य युवतियां तथा हल्द्वानी की एक कपड़े की दुकान का मालिक भी शामिल है।

इसके अलावा उन्होंने बताया कि इस हत्याकांड के हत्यारों के चेहरे पुलिस साफ तौर पर जानती है। हत्यारे चेहरे से ही अपराधी हैं। उनके पीछे पुलिस रामपुर तक पहुंची भी, किंतु वहां से हत्यारों एवं पुलिस के बीच के लिंक टूट गये। वहीं मामले की एकमात्र गवाह, मृतका की पुत्री लगातार बयान बदलकर पुलिस की जांच को उलझाती रही। इसलिये पुलिस अब तक इस मामले का खुलासा नहीं कर पायी है। किंतु पॉलीग्राफ जांच से काफी चीजें साफ हो जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में जैसी कि चर्चाएं हैं, किसी बड़े सफेदपोश का हाथ होना अब तक पुलिस की जांच में प्रकाश में नहीं आया है, अलबत्ता हत्यारों के घर में प्रवेश करने को लेकर घर वालों की भूमिका संदेहास्पद है। किसी ने हत्यारों को घर में घुसने में मदद की है।

नशे के सौदागरों का नेटवर्क काफी हद तक तोड़ दिया: आईजी

नैनीताल। आईजी पूरन सिंह रावत ने दावा किया पुलिस ने कुमाऊं मंडल में नशे के सौदागरों का आपूर्ति नेटवर्क काफी हद तक तोड़ दिया है। इस संबंध में उन्होंने चंपावत व ऊधमसिंह नगर पुलिस तथा एसओजी के संयुक्त ऑपरेशन में पकड़े गये ‘निशान चंद्र’ की गिरफ्तारी को बड़ी कार्रवाई बताया। कहा कि हालांकि उसके पास गिरफ्तारी के दिन स्मैक की कम मात्रा पकड़ी गयी, लेकिन वही बरेली से चंपावत, पिथौरागढ़ आदि जिलों को स्मैक का सबसे बड़ा सप्लायर था। इसके अलावा बरेली से ऊधमसिंह नगर, नैनीताल आदि जिलों को स्मैक की आपूर्ति करने वाले एक अन्य बड़े सप्लायर से 400 ग्राम स्मैक पकड़ी गयी। दावा किया कि इसके बाद स्मैक के आपूर्ति नेटवर्क को काफी हद तक तोड़ दिया गया है। इसका दावा रुद्रपुर के बड़े मनोचिकित्सकों ने भी अपने यहां आने वाले रोगियों के हवाले से किया है। इसके अलावा उन्होंने थानावार लक्ष्य निर्धारित कर राज्य बनने के बाद पहली बार ऊधमसिंह नगर जिले सहित पूरे मंडल में यातायात दुर्घटनाओं के ग्राफ में गिरावट आने का दावा भी किया। साथ ही बताया कि पहली बार दो पहिया वाहनों के चालान तक ही सिमटी रहने वाली पुलिस को चार पहिया वाहनों पर भी एमवी एक्ट के तहत कार्रवाई करने को कहा गया था, और इस हेतु अलग से कॉलम बनाया गया था।

पूर्व समाचार : हल्द्वानी के चर्चित पूनम हत्याकांड मामले में एसआईटी ने हाई कोर्ट में हाथ किये खड़े !

नैनीताल, 29 अक्टूबर 2018। हल्द्वानी के गोरापड़ाव के चर्चित पूनम पांडे हत्याकांड में डीआईजी पुष्पक ज्योति की निगरानी में गठित एसआईटी ने अपनी प्रगति रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंप दी है। चूंकि हाईकोर्ट के आदेशों पर गठित एसआईटी दो माह बाद भी मामले में कुछ भी नहीं कर पायी है। ऐसे में माना जा रहा है की एसआईटी ने हाई कोर्ट में इस मामले के हत्यारों तक पहुँचने से हाथ तो खड़े नहीं कर दिए हैं। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए 15 नवंबर की तिथि निर्धारित की है।

उल्लेखनीय है कि गोरापड़ाव में 27 अगस्त को बदमाशों ने घर में घुसकर पूनम पांडे की हत्या कर दी थी और उसकी बेटी अर्शी को अधमरा कर दिया था। साथ ही बंदूक की बट से भौंक रहे कुत्ते को भी मार डाला था, और बंदूक व स्कूटी भी लूटकर ले गए थे। इस मामले में पुलिस एक लाख 20 हजार नंबरों को खंगाल चुकी है। रामपुर, बरेली रोड के सीसीटीवी चेक किए गए। फिर भी कोई सफलता के नाम पर सिर्फ स्कूटी हाथ लगी है लेकिन घटना में शामिल कातिलों का दो माह बाद भी पता नहीं चल सका है। हाईकोर्ट ने घटना का खुलासा करने के लिए एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए।

मामले में लाइ-डिटेक्टर टेस्ट की तैयारी में पुलिस

नैनीताल, 13  अक्टूबर 2018। हल्द्वानी के गोरापड़ाव के निकट बरेली रोड से सटे गांव हरिपुर पूर्णानंद में 28 अगस्त 2018 की रात हुए चर्चित पूनम पांडे हत्याकांड मामले में एडीजी डा.अशोक कुमार  के आते ही करीब डेढ़ माह बाद आखिर राज खुलते नज़र आ रहे हैं। एडीजी डा. कुमार ने शनिवार को मामले की एकमात्र चश्मदीद, मृतका की पुत्री अर्शी पांडे से पूछताछ की। बताया गया है की अब तक लगातार अपने बयान बदलकर पुलिस को भटका और दूर दौड़ा रही अर्शी टूट गयी है। इसके बाद पुलिस की जांच नजदीकी लोगों और भाड़े के हत्यारों तक सीमित होती बताई जा रही है। आगे माना जा रहा है कि पुलिस जल्द इस मामले का खुलासा कर सकती है। पुलिस इस मामले में लाइ-डिटेक्टर टेस्ट की तैयारी में भी है।

उल्लेखनीय है कि बीती  4 सितंबर को  उत्तराखंड उच्च न्यायालय की कार्यकारी मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने भी इस हत्याकांड के मामले में राज्य सरकार को एसआईटी गठित कर जांच करने और जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा है। खंडपीठ ने इस बाबत विभिन्न समाचार पत्रो में छपी खबरों से संज्ञान में लेते हुए ‘इन द मैटर ऑफ ब्रूटल मर्डर ऑफ वूमन ब्रूटली विद हर डॉटर एंड डिकोयटी इन हर हाउस’ के रूप में जनहित याचिका दर्ज के रूप में दर्ज कर लिया है।

तो इस बार कोई करीबी कर गया है छैमार जैसी वारदात ! हल्द्वानी में मां-बेटी पर हमला, मां की मौत, बेटी गंभीर

नैनीताल, 28 अगस्त 2018। हल्द्वानी के निकट गोरापड़ाव के निकट बरेली रोड से सटे गांव हरिपुर पूर्णानंद में बीते दिनों हल्द्वानी व रुद्रपुर में दो अलग-अलग घटनाओं में दो महिलाओं की छैमार गिरोह द्वारा हत्या किये जाने की बुरी यादें फिर ताजा हो उठीं। कमोबेश उसी तर्ज पर इस बार घर में अकेले मौजूद मां-बेटी पर गोली मारने सहित भारी वस्तुओं, लात-घूंसों आदि से हमला किया गया है। हमले में मां की मौके पर ही मृत्यु हो गयी है, जबकि बेटी सुशीला तिवारी अस्पताल में जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही है। निर्दयी हत्यारे घर के कुत्ते को भी मार गए। अलबत्ता पुलिस मामले में छैमार जैसे किसी पेशेवर गिरोह की बजाय किसी गैर पेशेवर द्वारा यह हमला-हत्या किये जाने की बात कर रही है। घटना का यह दुःखद पक्ष भी है घटना के समय मृतका का पति अस्पताल में भर्ती अपनी मां का उपचार करने के लिए घर से बाहर था। यानी परिवार पर एक साथ तीन ओर से आफत बरसी है। पुलिस और एसओजी मौके पर पहुंच गई है। फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड भी घटना की बारीकी से जांच कर रहे हैं। पुलिस और घटना की प्रकृति के आधार पर लग रहा है कि इस बार कोई करीबी, पिछली घटनाओं की ओर जांच को भटकाने के प्रयास करते हुए इस दिल दहला देने वाली घटना को अंजाम दे गया है।

घटना में मृतका मां एवं घायल हुई बेटी की फाइल फोटो

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p style=”text-align: justify;”>प्राप्त जानकारी के अनुसर मूल रूप से जवाहरनगर पंतनगर निवासी लक्ष्मी दत्त पांडे करीब 20 वर्षों से हल्दूचौड़ में बरेली रोड हाई वे से सटे हरिपुर पूर्णानंद गांव में रहते हैं। उनके दो डंपर गोला नदी में चलते हैं। पांच दिन से उनकी बूढ़ी मां देवकी देवी का हल्द्वानी के नीलकंठ अस्पताल में उपचार चल रहा है। बीती सोमवार की रात्रि करीब नौ बजे पांडे अपनी मां की तीमारदारी के लिए अस्पताल चले गए थे। घर पर उनकी पत्नी पूनम पांडेय और बेटी अर्शी पांडेय थे। इधर मंगलवार सुबह करीब सात बजे पांडे अस्पताल से घर लौटे तो बिस्तर पर पत्नी और बेटी को खून से लथपथ मिलीं। इनमें से पत्नी पूनम (45) की मौत हो चुकी थी, जबकि बेटी गंभीर थी। दोनों के सिर पर भारी हथियार से हमला करने के साथ ही गोली मारने की आशंका भी जताई जा रही है। घर का सामान बिखरा पड़ा था। आशंका है कि डकैत घर के सभी अलमारी बक्से आदि खंगालकर नगदी, जेवर तथा एक दोनाली बंदूक और स्कूटी भी साथ ले गए हैं।
आईजी कुमाऊँ पूरन सिंह रावत ने कहा कि सभी कोणों से घटना की जांच की जा रही है। हमलावर गैर पेशेवर लगते हैं। वे घर में दरवाजा-खिड़की तोड़कर नहीं घुसे हैं, इसलिए कोई करीबी भी लिप्त हो सकता है। फिलहाल सभी कोणों से घटना की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में भर्ती बेटी को देखने गये थे। उसे काफी चोटें हैं, लेकिन वह खतरे से बाहर है।

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी का पूनम हत्याकांड: जांच के दायरे में आयी 48 में से 32 लड़कियां नशे की आदी, पैसे के लिए कई उम्रदराजों से भी बना चुकी हैं अवैध संबंध

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p style=”text-align: justify;”>नैनीताल, 4 सितंबर 2018। हल्द्वानी के बहुचर्चित पूनम हत्याकांड में पुलिस ने हजारों मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाकर शक के दायरे में आयी शहर की जिन 48 लड़कियों 50 से अधिक युवकों से पूछताछ की, उनमें से 32 लड़कियों ने पुलिस के समक्ष स्वीकार किया है कि वे शराब और स्मैक की आदी हैं। और नशे के लिए पैसे जुटाने को उन्होंने उम्रदराज लोगों से अवैध संबंध भी बनाए हैं। वहीं 15 लड़कियों ने यहां तक खुलासा किया है कि वे अवैध संबंध बनाते हुए नेपाल, दिल्ली, हरियाणा आदि जगहों पर जाकर पार्टियों में शामिल हो चुकी हैं। संतोष की बात सिर्फ इतनी है कि इन 48 लड़कियों में से केवल 16 ही नशा नहीं करती हैं।
इंटर और डिग्री कॉलेज में पढ़ रही इन रईस घरों की बेटियों और बेटों ने हुक्का बार और बीयर बार में महफिल जमाने की बात भी कही है। इन लड़कियों के पास 20 से लेकर 50 हजार तक के कीमती मोबाइल सेट भी हैं। इनमें से इंटर की एक छात्रा तो स्मैक भी पीती है। वह कुछ दिन पहले अपनी एक सहेली को आवास विकास कॉलोनी से भगाकर दिल्ली ले गई थी। पुलिस की पूछताछ में यह भी सामने आया कि इंटर की यह छात्रा डिग्री कॉलेज की लड़कियों को पैसे का लालच देकर फंसा लेती हैं। पैसे के चक्कर में लड़कियां अन्य राज्यों में जाने के लिए तैयार हो जाती हैं। छात्राओं का व्हाट्सएप नंबर चेक करने पर पता चला कि ये कोड भाषा में एक दूसरे को गाली देती हैं। अपना ग्राहक तोड़ने पर दूसरी छात्राओं से भिड़ जाती हैं। 32 छात्राओं ने माना कि वे दो या चार युवकों से अवैध संबंध बना चुकी हैं। पुलिस अधिकारी भी छात्राओं की करतूत सुनकर दंग हैं।
उल्लेखनीय है कि पूनम हत्याकांड के तत्काल बाद एक वीडियो सामने आया था कि जिसमें मृतका की अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती बेटी अर्शी से मिलती-जुलती शक्ल की एक लड़की एक अन्य लड़की के साथ मिलकर तीसरी लड़की को लात-घूंसों से पीटते हुए मोबाइल मांग रही है। वीडियो में 3 हजार रुपए में सौदे की बात भी की जा रही है।

हाईकोर्ट ने दिये पूनम हत्याकांड की एसआईटी जांच के आदेश

नैनीताल, 4 सितंबर 2018। उत्तराखंड उच्च न्यायालय की कार्यकारी मुख्य न्यायधीश राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने बीती 28 अगस्त को हल्द्वानी में हुए पूनम पांडे हत्याकांड के मामले में राज्य सरकार को एसआईटी गठित कर जांच करने और जांच रिपोट कोर्ट में पेश करने को कहा है। खंडपीठ ने इस बाबत विभिन्न समाचार पत्रो में छपी खबरों से संज्ञान में लेते हुए ‘इन द मैटर ऑफ ब्रूटल मर्डर ऑफ वूमन ब्रूटली विद हर डॉटर एंड डिकोयटी इन हर हाउस’ के रूप में जनहित याचिका दर्ज के रूप में दर्ज कर लिया है। साथ ही खंडपीठ ने बढ़ती वारदातों को देखते हुए हल्द्वानी में पुलिस फोर्स बढ़ाने के लिए भी कहा है।

हल्द्वानी के चर्चित हत्याकांड कांड मामले में चश्मदीद से दुष्कर्म के आरोपित खोलने लगे राज !

हल्द्वानी, 6 अक्तू्बर 2018। हत्याकांड की एक मात्र चश्मदीद गवाह के साथ हत्याकांड से पहले किए गए गैंगरेप के आज दबोचे गए आरोपियों ने पुलिस के सामने कई राज खोले हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि किस तरह से यह घटनाक्रम हुआ था। इसके अलावा शहर के कई अन्य सफेद पोशों के नाम भी पुलिस के सामने आए हैं जिन्हें पुलिस हत्याकांड की जांच में अपने रडार पर लेने की सोच रही है।

हत्याकांड की एक मात्र चश्मदीद गवाह के साथ हत्याकांड से पहले किए गए गैंगरेप के आज दबोचे गए आरोपियों ने पुलिस के सामने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। उन्होंने पुलिस को बताया कि अमित रावत ने लड़की को पढ़ाई के बहाने घर पर बुलाया था। इसके बाद शीतल पेय में नशे की दवाई खिला कर उन्होंने उसके साथ न सिर्फ रेप किया बल्कि उसकी वीडियो भी बनाई थी। लड़की इस तरह का बयान पहले ही दे चुकी है। अब पुलिस ने दावा किया है कि पूछताछ में दोनों युवक टूट गए और उन्होंने अपना अपराध स्वीरकार कर लिया।

यह भी पढ़ें : हल्द्वानी के हाईप्रोफाइल हत्याकांड की गवाह के साथ गैंगरेप, मुख्य आरोपी गिरफ्तार, 2 और की तलाश

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p style=”text-align: justify;”>हल्द्वानी, 1 अक्टूबर। हल्द्वानी के बीते माह घटित एक बहुचर्चित हत्याकांड के मामले में एक नया मोड़ आता नजर आ रहा है। मामले की गवाह के साथ करीब साढ़े तीन महीने पहले हल्द्वानी में सामूहिक बलात्कार किये जाने की पीड़िता की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज करके तीन में से एक, फ़ौज में जाने की तैयारी कर रहे मुख्य आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया है, जबकि शेष दो आरोपियों की तलाश की जा रही है। मामले की जांच उप निरीक्षक प्रीति सिंह को सोंपी गयी है।
मामले में पीड़िता ने रविवार मध्य रात्रि हल्द्वानी कोतवाली पहुंच कर तहरीर दी है। तहरीर के अनुसार पीड़िता को जज फार्म निवासी अमित रावत नाम के युवक ने फोन करके घर पर दो अन्य लड़कियों के साथ ग्रुप डिस्कशन करने के बहाने बुलाया था। लेकिन जब वह अमित के घर पहुंची तो वहां लड़कियों की जगह दो अन्य लड़के भी अमित के साथ थे। बातचीत के बीच युवकों ने उसे कोल्डड्रिंक में संभवतया नशीला पदार्थ पिला दिया, और उसकी अर्द्धबेहोशी की हालत का लाभ उठाकर तीनों युवकों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। साथ ही इसकी वीडियो भी बनाई, और आगे इस बारे में किसी को बताने पर वीडियो को वायरल करने की धमकी भी दी। इस बीच पीड़िता के घर में हादसा हो गया और इसके तुरंत बाद ही यह वीडियो वायरल कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि यह वायरल वीडियो पिछले दिनों हत्याकांड के बाद काफी चर्चा में भी रहा था। इससे पीड़िता के चरित्र पर भी सवाल उठे थे। तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज करने के बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी अमित रावत को गिरफ्तार कर लिया। जबकि दो अन्य आरोपी मंगलम शर्मा उर्फ मान शर्मा और शिवांश चौहान की गिरफ्तारी के लिए दबिशें दी जा रही हैं। आगे देखने वाली बात यह भी है कि बलात्कार कांड का हत्याकांड से कोई सीधा संबंध है अथवा नहीं।

तब पुलिसकर्मी को गोली मारी थी, अब गांव के युवक की कर दी पीटकर हत्या

नैनीताल, 10 नवंबर 2018। शुक्रवार की देर रात्रि जिले के दूरस्थ, पूर्व सीएम एनडी तिवारी के मूल गांव पदमपुरी क्षेत्र एक 21 वर्षीय युवक पूरन चंद्र पुत्र रमेश राम निवासी ग्राम तल्ला लथुडा की हत्या से दहल उठा। युवक की हत्या के आरोप में निकट के ही ग्राम बुराशी निवासी लाखन सिंह पुत्र घनश्याम सिंह, लालू पुत्र राम सिंह एवं चार अन्य युवक मुकदमा दर्ज होने के बाद गिरफ्तार कर लिए गए हैं। उल्लेखनीय तथ्य यह भी है कि मुख्य आरोपी लाखन की मौजूदगी में उसके एक साथी ने बीते वर्ष 2017 में हल्द्वानी में अपने ही गांव के निवासी एक पुलिसकर्मी को गोली मार दी थी। हालांकि उसकी जान बच गई और अब मामला रफादफा हो चुका है। संभवतया इस घटना से ही हिम्मत बढ़ने के बाद उसने आज हत्या ही कर दी। हत्या का कारण शराब पीकर हुआ आपसी विवाद बताया जा रहा है।

खुलासा: फुफेरे भाई ने किया था हल्द्वानी में सोते हुए रस्सी से गला घोंटकर कत्ल

पुलिस की गिरफ्त में आरोपित।

हल्द्वानी, 12 सितंबर 2018। हल्द्वानी के नल बाजार क्षेत्र में  10 सितंबर को चाय की दुकान चलाने वाले 23 वर्षीय युवक मनोज कुमार उसके हीरा नगर स्थित आवास पर बिस्तर पर लाश बरामद हुई थी। बृहस्पतिवार को हल्द्वानी पुलिस ने दो दिन में ही मामले का खुलासा करते हुए दावा किया कि मृतक के बुआ के लड़के यानी फुफेरे भाई उमेश कश्यप ने ही सोते हुए सुतली से गला घोंटकर उसकी हत्या की थी। उसे हीरा नगर चौकी प्रभारी निर्मल लटवाल व त्रिभुवन जोशी, पंचानन मंडल, प्रमोद भट्ट, चंदर सिंह व चंदन नेगी आदि आरक्षियों ने सर्विलांस आदि की मदद से गिरफ्तार कर पुलिस ने प्रेस के समक्ष पेश किया। आरोपित ने मृतक का पर्स, आधार कार्ड व बिजली के बिल के अलग से रखे गये 2950 रुपए आदि भी बरामद किये गये हैं। पुलिस के अनुसार हत्या संपत्ति के विवाद में की गयी।

रक्षाबंधन पर ससुराल से गायब मिली विवाहिता, अब जंगल में मिलीं अस्थियां

मृतका

नैनीताल, 1 सितम्बर 2018। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के गदरपुर क्षेत्र में एक विवाहिता के साथ रक्षाबंधन के दिन अपने भाइयों व मायकेवालों की राह तक रही एक विवाहिता के साथ उसके पति व सास-ससुर ने जो किया, उसके बाद उन्हें ऊपरवाला भी कभी माफ नहीं करेगा। गदरपुर के ग्राम कुआखेड़ी निवासी नसीब कौर रक्षाबंधन के दिन अपनी पोती अमन कौर से मिलने उसकी प्रेमनगर स्थित ससुराल गयी। वहां अमन तो मिली नहीं, उल्टे उसके ससुरालियों ने कह दिया कि वह 4 तोले सोना और 12 हजार की नगदी लेकर घर से बिना बताए चली गई है। इस पर नसीब कौर को यकीन नहीं हुआ और उसने थाने में तहरीर देकर पुलिस से कार्रवाई की मांग की। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर वह परिजनों के साथ जिले के एसएसपी डा. सदानंद दाते से मिली। एसएसपी के निर्देशों पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की, और महिला के पति , सास, ससुर  को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की। थानाध्यक्ष ललित मोहन जोशी के अनुसार दो दिन की कड़ी पूछताछ के बाद परिजनों ने अमन की हत्या की बात स्वीकार करते हुए बताया कि उन्होंने उसका शव बन्ना खेड़ा के जंगल में जला दिया है। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने शनिवार की सुबह बन्ना खेड़ा के जंगल में मृतक की अस्थियां बरामद कर ली हैं। मृतका का 6 वर्ष पूर्व ही विवाह हुआ था। पति-पत्नी दोनों का नाम अमन है।

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    • पिछले 30 जून से लापता थी मृतका, लाश मिलने से पूरे  पूरे क्षेत्र में फैली सनसनी तहसीलदार सहित राजस्व कर्मी पहुंची मौके पर
      • शव को कब्जे में लेकर पीएम के लिए भेजा हल्द्वानी, पिता की नामजद रिपोर्ट पर एक युवक को किया गिरफ्तार
    • 8 दिन से थी लड़की गायब,  बीते दिवस उपजिलाधिकारी धारी के यहां दर्ज कराई गुमशुदगी की रिपोर्ट
मृतका उर्मिला की फाइल फोटो

दान सिंह लोधियाल, धानाचूली । धारी तहसील के सरना में एक युवती गांव के ही मंदिर में लटकी मिलने से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गयी है। सूचना मिलने पर तहसीलदार धारी राजस्व टीम के साथ घटना स्थल पर पहुँच कर पंचनामा भर कर शव को कब्जे में लेकर पीएम के लिए हलद्वानी भेज दिया गया। उधर मृतक के पिता ने राजस्व पुलिस में नामजद तहरीर दी, जिसमे गांव के ही एक युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। मामला प्रेम प्रसंग से जोड़ा जा रहा है। मामले की राजस्व पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

मन्दिर के पास जमा भीड़।

राजस्व पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार धारी तहसील के सरना ग्राम पंचायत के तोक कनर्खा के गुरु गोरखनाथ मंदिर में उर्मिला आर्या (24) पुत्री चन्दलाल निवासी सरना मन्दिर की बल्ली से लटकी मिली। उपनिरीक्षक ललित मोहन जैड़ा ने बताया मन्दिर के पास से गुजर रहे गांव के ही नवीन चन्द्र पुत्र प्रेमराम ने मंदिर से आ रही बदबू से खिड़की से झांक कर देखा तो वहां एक लाश लटकी दिखी। जिसकी सूचना गांववालों को दी। राजस्व पुलिस ने उर्मिला के शव को बाहर निकाला, लाश में कीड़े तक पड़ चुके थे और बदबू आ रही थी। लाश करीब एक हप्ता पुरानी बताई जा रही है। उर्मिला पिछले 30 जून से लापता थी। बीते शुक्रवार को उसके पिता चंद्र लाल ने उपजिलाधिकारी रेखा कोहली के यहाँ उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की थी। इधर मन्दिर का दरवाजा बाहर से बंद किया गया था। जिससे आत्महत्या है या हत्या यह मामला पेचीदा हो गया है। राजस्व पुलिस दोनों को मान जाँच में जुट गई है।

इस पुराने मंदिर के भीतर मिली लाश, बाहर से बंद था मंदिर

गांव में अलग अलग तरह के कयास लगाए जा रहे है। वही मंदिर की अशुद्धि का भी मामला बन गया है। जिसको लेकर की कई तरह की बाते होने लगी है। वही मृतका के पिता चंद्रलाल ने गांव के ही  विनोद कुमार 26 पुत्र स्व. प्रेमराम के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की। जिस पर राजस्व पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। उसकी गिरफ्तारी को प्रेमप्रसंग से जोड़ कर देखा जा रहा है। तहसीलदार नवाजिश खलीक ने बताया हत्या है या आत्महत्या इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा। इस मौके पर उपनिरीक्षक हेम पलडिया, ललित मोहन जैड़ा, चन्द्रा नाथ, अनुसेवक  गंगा दत्त उप्रेती आदि थे।

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राष्ट्रीय सहारा, 20 फ़रवरी 2018

मुख्य आरोपित पहले ही दोषमुक्त घोषित, अब कालाढुंगी कांड में सरकार के 56 लोगों से मुकदमे वापस लेने का शासनादेश हाईकोर्ट ने किया स्वीकार

आठ वर्षों बाद साफ हुआ मुकदमे वापस लेने का रास्ता
-2012 में खंडूड़ी सरकार ने जारी किया था मुकदमे वापस लेने का शासनादेश
नवीन जोशी, नैनीताल। 22 अगस्त 2009 को कालाढूंगी थाने में सत्तारूढ़ भाजपा के नेता, कोटाबाग के तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख व ब्लॉक प्रमुख संगठन के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष बलवंत कन्याल की पुलिस कोतवाली में थाना प्रभारी, इंस्पेक्टर और अन्य पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में गोली मार कर हत्या कर दी गयी। कन्याल के गांववालों ने अपनी आँखों से देखा, घटना के तत्काल बाद थाने के पुलिसकर्मी अपने हाथों से कोतवाली के बरामदे में मौजूद कन्याल के खून को धो रहे थे।  तब तक सीओ भी मौके पर पहुँच गए थे। हत्यारे को पुलिसकर्मियों ने दबोच लिया और हत्या में प्रयुक्त हत्यारे की लाइसेंसी रिवाल्वर को कोतवाली के मालखाने में जमा करा दिया। अगले दिन आक्रोशित ग्रामीणों ने थाने पर हमला बोल दिया था। इस दौरान एक पुलिस हेड कांस्टेबल पूरन राम सिलकोटी की भी मौत हो गई थी और 7 पुलिसकर्मी घायल हो गए। सीओ के हमराह पुलिसकर्मी की कार्बाइन छीनने का भी प्रयास हुआ।तत्कालीन डीएम-एसएसपी शुरू में कालाढूंगी जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए थे। मामले में कुल तीन मुकदमों में 15 लोगों की नामजद करते हुए कुल 500 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किये गये थे। इस बीच 24 अगस्त को हत्यारोपी नीरज तिवारी को नैनीताल में जीजीआईसी से कलक्ट्रेट के मार्ग से उसके ही मालखाने में जमा बतायी गयी लाइसेंसी रिवाल्वर के साथ गिरफ्तार किया गया। जबकि पुलिस की पूरी तरह झोलयुक्त झूठी कहानी निचली अदालत में टिक नहीं पाई, और हत्यारोपी सहित थाना प्रभारी बाइज्जत बरी हो गये। जबकि दूसरी ओर इधर मृतक ब्लॉक प्रमुख कन्याल की वृद्ध मां कलावती देवी, ताई खीमा देवी, बहन इंदिरा देवी, खुशाल सिंह व किशोर सिंह सहित 56 लोग दर्ज मुकदमों में गिरतार हुए, और उन्हें उच्च न्यायालय से बमुश्किल जमानत मिली। मुकदमे वापस करने की मांग पर ग्रामीणों का लंबा जनांदोलन चला। मामले में तत्कालीन एडीजी लॉ एंड ऑर्डर सत्यव्रत बंसल ने घटना में पुलिस की चूक स्वीकार की। 2012 में तत्कालीन खंडूड़ी सरकार ने जनहित में इन 56 लोगों से मुकदमे वापस लेने का शासनादेश जारी किया, किंतु निचली अदालत ने सरकार के इस आदेश को खारिज कर दिया। इसे पीड़ितों ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी। इधर उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की एकलपीठ ने मामले के विभिन्न पहलुओं को देखते हुए सरकार के शासनादेश को स्वीकार कर लिया है। इससे पूर्व इसी मामले में 14 गैंगस्टर के आरोपियों से भी मुकदमे वापस हो चुके हैं। इस प्रकार आरोपित सभी ग्रामीण भी निर्भय हो गए हैं। लेकिन इसके साथ ही कालाढूंगी काण्ड ऐसा उदाहरण भी बन गया है, जिसमें सत्तारूढ़ दल के ब्लॉक प्रमुख व ब्लॉक प्रमुख संगठन के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष की हत्या, प्रदेश में पहली बार एक थाने के फूंके जाने व एक पुलिस हेड कांस्टेबल की भी मौत और 7 पुलिसकर्मियों के घायल होने के बावजूद किसी को सजा नहीं मिली। 

इधर उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ब्लॉक प्रमुख बलवंत कन्याल की हत्या के बाद गुस्साये ग्रामीणों की भीड़ के द्वारा हमला, आगजनी व प्रमोटी हेड कांस्टेबल की हत्या करने के मामले में 56 लोगों से जनहित में मुकदमा वापस लेने के सरकार के फैसले को स्वीकार कर लिया है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में तत्कालीन खंडूड़ी सरकार ने जनहित में इन लोगों से मुकदमे वापस लेने का शासनादेश जारी किया था, किंतु निचली अदालत ने सरकार के इस आदेश को खारिज कर दिया था, जिसे पीड़ितों ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। इधर उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की एकलपीठ ने मामले के विभिन्न पहलुओं को देखते हुए सरकार के शासनादेश को स्वीकार कर लिया है।

उल्लेखनीय है कि 22 अगस्त 2009 को कालाढुंगी थाने के भीतर तत्कालीन कोटाबाग के ब्लॉक प्रमुख की हत्या कर दी गयी थी, जिसकी प्रतिक्रियास्वरूप अगले दिन यानी 23 अगस्त 2009 को ग्रामीणों ने कालाढूंगी थाने पर हमला बोल दिया था। इस दौरान एक पुलिस हेड कांस्टेबल पूरन राम सिलकोटी की भी मौत हो गई थी और 7 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। मामले में परिवहन निगम की ओर से सड़क को जाम कर परिवहन निगम की बस में आग लगाने व तोड़फोड़ के आरोप में धारा 143, 336 व 423 के तहत, दरोगा एसएस रावत की ओर से सड़क जाम करने और पुलिस टीम के साथ मारपीट करने, धारदार हथियार से हमला करने व सीओ की कार्बाइन छीनने तथा कालाढूंगी थाना पुलिस की ओर से थाने में आगजनी, लूटपाट व प्रमोटी हेड कांस्टेबल पूरन राम सिरकोटी की हत्या करने व दजर्नों वाहनों में आग लगाने के आरोप लगाते हुए कुल तीन मुकदमों में 15 लोगों की नामजद करते हुए कुल 500 लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किये गये थे। इस पर ग्रामीणों का लंबा जनांदोलन भी चला था। मामले में तत्कालीन एडीजी लॉ एंड ऑर्डर सत्यव्रत बंसल ने घटना में पुलिस की चूक स्वीकार की थी। आगे पुलिस की कमजोर पैरवी से कन्याल की हत्या के आरोपित नीरज तिवारी भी न्यायालय से बाइज्जत बरी हो गये। वहीं मृतक ब्लॉक प्रमुख की वृद्ध मां कलावती देवी व बहन इंदिरा देवी सहित 56 लोग मामले में गिरतार हुए थे, और उन्हें उच्च न्यायालय से बमुश्किल जमानत मिली थी। बहरहाल, आखिर उच्च न्यायालय के आदेशों से ग्रामीणों से मुकदमे वापस लिये जाने का रास्ता साफ होने को मामले की पैरवी कर रहे युवा भाजपा नेता रवि कन्याल ने स्थानीय सांसद भगत सिंह कोश्यारी के प्रयासों का परिणाम बताते हुए खुशी जताई, और कहा कि इससे क्षेत्र में बड़ी राहत के साथ हर्ष का माहौल है।

पूर्व आलेख : तिवारी ने नहीं तो फिर किसने मारा बलवन्त को ?

तिवारी व बलवन्त के बीच पुलिस ही थी मौजूद, तार-तार हुईं पुलिस की झोल युक्त कहानी

नवीन जोशी, नैनीताल। 22 अगस्त 2009 की रात्रि प्रदेश के इतिहास में काले शनवार की  रात्रि के रूप में दर्ज है, जब प्रदेश में पहली बार पुलिस थाने के भीतर सत्तारूढ़ दल के ब्लाक प्रमुख के साथ ही ब्लाक प्रमुख संगठन के प्रदे अध्यक्ष पद पर मौजूद बलवन्त कन्याल की हत्या हो गई। घटना के दौरान आरोपी व मक्तूल के अलावा कोई मौके पर था तो केवल पुलिस ही मौके पर थी। पुलिस ने इस अति महत्वपूर्ण मामले में हत्याकाण्ड के चश्मदीद गवाह व वादी के धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान कराने जैसी सामान्य सावधानी भी नहीं बरती, जिसके परिणामस्वरूप गवाहों के मुकरने व पुलिस की कहानी के झोल से हत्याकाण्ड का मुख्य आरोपी न्यायालय से दोषमुक्त करार दे दिया गया, जबकि इसी मामले में ऊपरी अदालत ने उसे जमानत देने लायक भी नहीं समझा था। ऐसे में सवाल फिर उठ खड़ा हुआ कि तिवारी ने नहीं तो फिर किसने ब्लाक प्रमुख की हत्या की। क्या हत्यारों को कभी सजा मिल पाऐगी ? ऐसे जघन्य हत्याकाण्ड के बाद भी हमारी व्यवस्था में कालाढुंगी थाने की सुरक्षा दीवार काण्टेदार तार से घेरने के अलावा कोई बदलाव नहीं दिखता। घटनाकाण्ड के समय मौजूद अधिकारी पुन: व्यवस्था में लौट आऐ हैं। उनका बाल-बांका भी नहीं हुआ

बलवन्त कन्याल की हत्या से प्रदेश की कानून व्यवस्था की कई तरह से कलई खुलती चली गई है। शुरू से आरोपों को याद करें, तो पता चलता है कि घटना के तुरंत बाद कालाढूंगी के स्थानीय लोगों के सामने पुलिस कर्मी थाने के बरामदे को धो रहे थे, जबकि कन्याल की लाश वहीं पडी थी, यानी पुलिस पर साक्ष्य छुपाने का मुकदमा दर्ज होना चाहिए था, पर हुआ नहीं प्रदे की एसटीएफ द्वारा 22 अगस्त की रात्रि ही देहरादून जेल में बन्द एक अपराधी द्वारा इस घटना की प्रतिक्रिया में कालाढुंगी थाने को फूंकने के निर्देश स्थानीय नेताओं को दिये गऐ, बावजूद पुलिस थाना फूंकने की घटना को नहीं रोक पाई। अब कन्याल हत्याकाण्ड की तफ्तीश व विवेचना में पुलिस कर्मियों की ‘कहानी बनाने की कला’ न्यायालय में तार-तार हो गई है। मामले की विवेचना में कालाढुंगी थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी राम कुमार सकलानी का कहना है कि 22 अगस्त की रात्रि करीब साढ़े दस-पौने ग्यारह बजे जब थाने के बरामदे में नीरज ने बलवन्त को अपने लाइसेंसी रिवाल्वर से गोली मारी, उसने (सकलानी ने) नीरज को दबोच लिया व उसका रिवाल्वर जब्त कर माल खाने में जमा करा दिया। वहीं थाने के दरोगा अनिल शाह के अनुसार उसने मुखबीर की सूचना पर नीरज को 24 अगस्त को नैनीताल में जीजीआईसी से कलक्ट्रेट के मार्ग से लाइसेंसी रिवाल्वर के साथ गिरफ्तार किया। यदि यह मान भी लें कि नीरज थाने से पुलिस गिरफ्त से भाग गया था तो भी पुलिस के पास इस विरोधाभास का कोई जवाब नहीं है कि जब एक रिवाल्वर माल खाने में जब्त करा लिया गया था तो फिर वही रिवाल्वर कैसे नीरज के पास से नैनीताल में बरामद किया गया। 

उल्लेखनीय है, मामले में 16 लोगों की गवाही हुई। इस दौरान हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराने वाले दिवंगत बलवन्त कन्याल के जीजा वादी शेर सिंह कनवाल सहित पांच गवाह पुलिस की केस डायरी में दर्ज बयानों से पूरी तरह मुकर गऐ। कनवाल ने कमोबे घटना से ही इंकार कर दिया। इस प्रकार गवाहों के ‘होस्टाइल (पक्षद्रोही)’ यानी बयानों से मुकरने व आरोपी की गिरफ्तारी पर विरोधाभास के मद्देनज़र न्यायालय ने तिवारी को उस पर बलवन्त कन्याल की हत्या के आरोप में आईपीसी की धारा 147, 148, 504 व 302 के तहत लगाऐ गऐ आरोपों से मुक्त कर दिया। (हांलांकि यह भी गौरतलब है कि शेष 11 गवाह अपने बयानों से नहीं मुकरे थे, पर न्यायालय ने उनके बयानों पर संज्ञान ……… लिया, यह अदालत ही बेहतर जानती होगी) मामले की विवेचना पुलिस निरीक्षक गंगा सिंह  व महेन्द्र सिंह नेगी द्वारा की गई थी। 

उल्लेखनीय है मामले में थाना प्रभारी सकलानी भी गिरफ्तार किऐ गऐ थे, जमानत मिलने के दौरान उसने तत्कालीन सीओ (वर्तमान एएसपी, नैनीताल) हरीश चन्द्र सती को वास्तविक दोषी ठहराया था, लेकिन सकलानी और सती दोनों वर्तमान में पूर्व की तरह पुलिस की ड्यूटी कर रहे हैं। अन्य अधिकारियों पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा। जबकि  घटना की प्रतिक्रिया में उत्तेजित भीड़ ने एक पुलिस कर्मी सहित थाने को फूंक डाला। यानी जब थाने में सत्तारूढ़ दल के बड़े नेता की हत्या हो रही थी, पुलिस कर्मी मर रहा था व थाना फुंक रहा था, अफसर स्वयं को बचाने की जुगत में लगे हुऐ थे, और उनका बाल-बांका हुआ भी नहीं। कन्याल की हत्या में ही सहआरोपी बताया गया नीरज तिवारी का दोस्त नीरज हर्बिल अभी जमानत पर है, आरोप मुक्त नहीं हुआ है। 

यह भी गौरतलब है कि बलवन्त की हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराने वाला व नीरज के दोषमुक्त होने में ‘होस्टाइल’ होकर प्रमुख भूमिका निभाने वाला उसका जीजा शेर सिंह कनवाल घटना के अगले दिन हुई थाना फूंकने की घटना में स्वयं भी आरोपित था। वह नीरज के साथ ही नैनीताल जेल में रहा, और कमोबेश बलवे के अन्य पांच दर्जन आरोपितों, जिनमें एक दर्जन से अधिक बच्चे भी शामिल थे, से पहले जमानत पर रिहा हुआ। जबकि कई अब भी जेल में हैं, और आरोपों से मुक्ति किसी को नहीं मिल पाई है। चर्चाएँ आम हैं कि जेल में कनवाल का “खर्चा” नीरज ने ही उठाया, उसे जमानत दिलाने में भी सहयोग दिया। नीरज के परिवार द्वारा अभी हाल में करीब एक करोड़ रुपये में जमीन बेचे जाने की चर्चाएँ भी आम हैं। इस प्रकार पूरी कहानी साफ़ हो जाती है। न्यायिक हलकों के लोग तो न्यायपालिका को भी “बेदाग़” नहीं बता रहे।  इस बाबत पुलिस की भूमिका पर पूछे जाने पर एसएसपी मोहन सिंह बनंग्याल का कहना था कि न्यायालय का आदेश पढ़ने के बाद ही वह कोई प्रतिक्रिया करेंगे।

यहाँ यह सवाल भी उठता है कि जब सत्ताधारी दल के एक जनप्रतिनिधि की पुलिस थाने में हत्या होने के बावजूद हत्यारों को सजा दूर, उनकी पहचान भी नहीं हो पाती, ऐसे में आम राज्यवासी का जीवन कितना सुरक्षित है

पुलिस सहित सबके सहयोग से मिली सफलता: नंदिता

नीरज तिवारी को न्यायालय से दोषमुक्ति का आदे मिलने के दौरान उसकी बहन नंदिता भट्ट, बड़े भाई दीपक तिवारी के साथ ही भाई नरे व मयंक, जीजा गणे भट्ट व गोपाल र्मा न्यायालय परिसर में ही मौजूद थे। नंदिता ने भाई की रिहाई को देर से मिली न्याय की जीत करार दिया। उसका कहना था कि पुलिस सहित सभी ओर से मिले सहयोग के कारण यह सम्भव हो पाया। नंदिता पुलिश को सहयोग के लिए आभार ज्ञापित कर रही हैं तो यह गलत भी नहीं है, आखिर पुलिस ने कहानी में कमजोरी छोड़ने सहित कई मोर्चों पर उनकी मदद जो की है ।

यानी कालाढुंगी से विधायकी की फिराक में है नीरज !

ब्लाक प्रमुख बलवन्त कन्याल की हत्या के आरोपों से न्यायालय द्वारा बेदाग करार दे दिऐ गऐ नीरज तिवारी ने आगे गैर राजनीतिक संगठन बनाने तथा कालाढुंगी काण्ड की चपेट में आऐ लोगों की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है। हत्याकाण्ड के आरोपों से पूर्व बसपा के युवा जिलाध्यक्ष रहे (वर्तमान में कांग्रेस नेता) नीरज ने घर पहुँचते ही पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर शुरू से पूरा विश्वास था, जो आज न्याय की जीत के साथ और पुख्ता हो गया है। कहा कि कालाढुंगी थाना फूंकने के आरोपों में दर्जनों लोग परेशानी झेल रहे हैं। वह गैर राजनीतिक संगठन का गठन कर सरकार पर ऐसे लोगों पर लगे मामले वापस लेने के लिए दबाव बनाएंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार नीरज कालाढूंगी से विधायकी की फिराक में है, और कोई आश्चर्य नहीं वह इसमें सफल भी हो जाए।

फिर खुलेगी कन्याल हत्याकांड की फाइलें, रिकार्ड हाईकोर्ट में तलब

 नैनीताल, 28 अप्रैल। बहुचर्चित बलवंत कन्याल हत्याकांड को लेकर दायर याचिका के आधार पर उच्च न्यायालय ने निचली अदालत से रिकार्ड तलब किए हैं। यह याचिका जिला एवं सत्र न्यायाधीश नैनीताल के फैसले के खिलाफ बलवंत की पत्नी दीपाली ने दाखिल की है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पीसी पंत और न्यायमूर्ति सर्वेश कुमार गुप्ता की पीठ में हो रही है। उल्लेखनीय है कि कालाढूंगी पुलिस थाने में बलवंत कन्याल की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस हत्या के लिए बसपा नेता नीरज तिवारी को जिम्मेदार ठहराया था। पुलिस ने नीरज तिवारी के खिलाफ पुख्ता सबूत होने का दावा किया था। गत 11 मार्च को जिला एवं सत्र न्यायालय नैनीताल ने मुख्य आरोपी नीरज तिवारी को बाइज्जत बरी कर दिया था। निचली अदालत के इस फैसले को कन्याल की पत्नी दीपाली ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

कन्याल हत्याकांड में थानेदार भी दोषमुक्त

 नैनीताल। ब्लाक प्रमुख संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बलवंत सिंह कन्याल की हत्या के मामले में थानेदार राम कुमार सकलानी को जिला न्यायालय ने दोषमुक्त करार दे दिया है। मुख्य आरोपित नीरज तिवारी पहले ही दोषमुक्त करार दिया जा चुका है। 22 अगस्त 2009 की रात को घटित हुए प्रदेश के इस बहुचर्चित हत्याकांड में भाजपा नेता व ब्लाक प्रमुख संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बलवंत कन्याल की कालाढूंगी थाने में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के प्रत्युत्तर में अगले दिन कालाढूंगी थाना उत्तेजित लोगों ने फूंक दिया गया था। इस मामले में थानेदार सकलानी पर आरोप था कि उसने कन्याल की हत्या की रिपोर्ट नहीं लिखी। उसने घटनास्थल थाने की बजाय अन्यत्र दिखाने का प्रयास किया व थाने में कन्याल के रक्त को धोकर साक्ष्य छिपाने का प्रयास किया। सकलानी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ था। मामले में थानेदार पूर्व से ही जमानत पर चल रहा था।
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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….।मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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