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हो गयी ‘कुर्रा अंदाजी’, 70 साल से अधिक के बुजुर्गों व बिना मेहरम महिलाओं सहित इतने जाएंगे उत्तराखंड से इस बार हज पर

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हज कमेटी उत्तराखंड के सदस्य रईस भाई

नवीन समाचार, नैनीताल, 12 जनवरी 2019।उत्तराखंड से इस वर्ष 70 वर्ष से अधिक उम्र के 243 बुजुर्गों एवं 5 बिना किसी पुरुष साथी के यानी मेहरम से जाने वाली महिलाओं सहित कुल 1232 लोग हज के लिए जा पाएंगे। उत्तराखंड हज कमेटी के सदस्य रईश भाई ने शनिवार को हज जाने के इच्छुक लोगों की ‘कुरा अंदाजी’ यानी लॉटरी की प्रक्रिया के बाद यह जानकारी दी। बताया कि हज जाने के लिए इस वर्ष कुल 3019 लोगों ने आवेदन किया था। उन्होंने बताया कि जिन 1232 लोगों को हज जाने के लिये चयन हुआ है उनमें सर्वाधिक 582 हरिद्वार जिले से, उधमसिंह नगर जिले से 314, नैनीताल जिले से 91, टिहरी, पौड़ी से 18, अल्मोड़ा से 9, चंपावत से 6 तथा टिहरी से 4 लोग शामिल हैं। उन्होंने सभी हाजियों को चयन पर मुबारकबाद देने हुए उनसे अपील की है कि हज पर अपने सूबे व मुल्क की खुशहाली के लिए दुवा करें।

पूर्व समाचार : हज जाने के इच्छुक 17 नवंबर तक कर सकते हैं आवेदन

नैनीताल, 12 नवंबर 2018। आगामी वर्ष 2019 में हज जाने के इच्छुक लोगों के लिए फॉर्म भरने की आखिरी तिथि 17 नवंबर है। हज कमेटी के सदस्य रईश भाई ने यह जानकारी देते हुए बताया कि फार्म मुख्यालय में मल्लीताल व तल्लीताल मस्जिद से फॉर्म लिये जा सकते हैं, एवं ऑनलाइन भी भरे जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि फॉर्म भरने के लिए 17 नवंबर 2018 से पहले का बना पासपोर्ट एवं आवेदक की उम्र 70 वर्ष से कम यानी उसकी जन्मतिथि 18 नवंबर 1948 से पहले की नहीं होनी चाहिए। महरम में यानी बिना पुरुष के जाने वाली महिलाओं की जन्मतिथि 17 नवंबर 1973 से पूर्व ही होनी चाहिए। बच्चों की उम्र 20 नवंबर 2019 को दो की होनी चाहिए। एक कवर नंबर यानी एक फॉर्म में छह बड़े अथवा पांच बड़ों व दो बच्चों के लिए ही आवेदन किया जा सकता है। फॉर्म के साथ आधार कार्ड की कॉपी लगानी भी अनिवार्य है। राज्य के लिए पिछली बार का कोटा ही बरकरार रह सकता है।

यहाँ क्लिक करके भी हज जाने के लिए आवेदन कर सकते हैं 

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नैनीताल। प्रदेश से इस वर्ष हज यात्रा के लिये 4,100 आवेदन प्राप्त हुए हैं, इनमें से 1220 के नामों का यात्रा के लिए लाटरी के माध्यम से चयन किया जायेगा। इसमें 269 यात्री 70 वर्ष से अधिक वाले होंगे। हज कमेटी उत्तराखंड के सदस्य रईस भाई ने बताया कि इस वर्ष उत्तराखण्ड से पहली बार 45 वर्ष से अधिक उम्र की चार महिला यात्रियों ने भी आवेदन किया है, जो कि बिना मेहरम के यानी बिना किसी पुरुष सहयोगी के अकेले ही इस यात्रा में प्रतिभाग करेंगी। इनमें रफीन पत्नी नसीर, फातमा, जमीला पत्नी मो. रफीक व रमजाने पत्नी जमील शामिल हैं। उन्होंने बताया कि हज यात्रियों के चयन की लाटरी प्रक्रिया आगामी 23 जनवरी को उत्तराखंड राज्य हज हाउस कलियर सरीफ रुड़की में सम्पन्न होगी।

यह भी पढ़ें : उत्तराखण्ड में 10 वर्ष में दोगुने हो गये मुस्लिम, इसलिए दोगुने जा पाएंगे हज पर (2016 की खबर)

-हज यात्रा के लिए आवेदन के साथ ही मेडिकल कराने, आल इंडिया हज कमेटी के सूटकेस ले जाने और कुर्बानी के लिए पहले इस्लामिया बैंक से कूपन लेने संबंधी नियमों में मिली छूट

नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड से इस वर्ष 1406 यात्री हज के लिए जा सकेंगे। यह संख्या पिछले वर्ष के 772 की करीब दो गुनी होगी। ऐसा प्रदेश में वर्ष 2011 की जनसंख्या में मुस्लिमों की संख्या के वर्ष 2001 की जनगणना के मुकाबले करीब दो गुना हो जाने की वजह से संभव हुआ है। इसके अलावा ऑल इंडिया हज कमेटी के साथ गत माह हुई बैठक के फलस्वरूप तीन महत्वपूर्ण निर्णयों में छूट मिल गयी है। अब हज के लिए आवेदन करने वाले सभी को मेडिकल नहीं कराना होगा, बल्कि केवल चयनित होने वाले यात्रियों की ही मेडिकल जांच करायी जायेगी। कुर्बानी के लिए इस्लामिया बैंक से कूपन लेने और ऑल इंडिया हज कमेटी से 5100-5100 रुपये में दो सूटकेस लेने के नियम में भी छूट मिल गयी है। अब यात्री अपनी मर्जी से तय आकार के सूटकेस ले पायेंगे तथा कुर्बानी भी अपनी मर्जी से कर पायेंगे।

उत्तराखंड हज कमेटी के सदर राव शेर मोहम्मद ने शनिवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि जनगणना के 0.1 फीसद मुस्लिमों को हज पर जाने की इजाजत होती है। ऑल इंडिया हज कमेटी पिछले वर्ष तक वर्ष 2001 की जनगणना में मुस्लिमों की संख्या के आधार पर प्रदेश का हज कोटा निर्धारित कर रही थी। इस वर्ष गत 19 दिसम्बर को मुंबई में हुई हज कमेटी की बैठक में उत्तराखंड ने 2011 की जनगणना को स्वीकारने का आग्रह किया। इस पर वर्ष 2011 की जनगणना में प्रदेश में मुस्लिमों की संख्या 14 लाख छह हजार के आधार पर 1406 लोगों का हज कोटा निर्धारित हो गया है। इसमें चार वर्ष से लगातार आवेदन करने वालों व 70 वर्ष से अधिक आयु वालों को स्वत: तथा शेष बची सीटों पर लॉटरी की पद्धति से हज पर जाने की अनुमति मिल सकती है। इसके अलावा 300 यात्रियों पर एक के कोटे के अनुसार पहले के तीन के सापेक्ष इस बार पांच सरकारी अधिकारी-कर्मचारी खादिम-उल-हुज्जाम के बतौर हज यात्रियों की सहायता के लिये हज जा पायेंगे।उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के प्रयासों से यह संभव हो पाया है। पहली बार रावत सरकार के कार्यकाल में केंद्र सरकार की एमएसडीपी योजना का पूरा सदुपयोग हो पाया है। अल्पसंख्यक वर्ग को बेहतर शिक्षा व रोजगार के अवसर देना सरकार की प्राथमिकता में है।

हल्द्वानी, रुद्रपुर और देहरादून भी कर सकेंगे हज के लिये आवेदन

नैनीताल। उत्तराखंड हज कमेटी के सदर राव शेर मोहम्मद ने बताया कि कलियर शरीफ में हज के लिये आवेदन करने की सुविधा लगातार उपलब्ध रहेगी, और इसके साथ ही हल्द्वानी, रुद्रपुर और देहरादून भी शिविर लगाये जायेंगे, जहां हज पर जाने के इच्छुक लोग आवेदन कर सकेंगे। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी मुस्लिम आबादी के शहरों में पहले ही आवेदन फार्म भिजवा दिये गये हैं।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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