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नैनीताल जिले के रेड जोन में जाने पर लोग हतप्रभ, होटल-टैक्सी यूनियन ने भी भेजे ज्ञापन, कुमाऊं कमिश्नर ने शासन को भेजा प्रस्ताव

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नैनीताल जिले के रेड जोन में जाने पर 
-कहा-केंद्रीय गृह मंत्रालय के कंटेनमेंट, बफर व नॉन कंटेनमेंट जोन बनाने व अनलॉक 1.0 के उलट है राज्य को जोन में विभक्त करने का फैसला
नवीन समाचार, नैनीताल, 02 जून 2020। केंद्र सरकार द्वारा लॉक डाउन के पांचवे चरण की जगह अनलॉक 1.0 की घोषणा करने के उलट राज्य सरकार के द्वारा जोनों की घोषणा पर मुख्यालय में सभी वर्गों से कड़ी नाराजगी प्रकट हो रही है। मंगलवार को नैनीताल होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश साह के साथ ही नैनीताल टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष नीरज जोशी ने अलग-अलग ज्ञापन भिजवाये हैं और राज्य में एकमात्र नैनीताल जनपद को रेड जोन मंे डालने को केंद्रीय गृह मंत्रालय के 30 को जारी ताजा दिशा-निर्देशों के विरुद्ध बताया है। में केवल तीन तरह के जोन-कंटेनमेंट जोन, बफर जोन और नॉन कंटेनमेंट जोन बनाने को कहा है। कंटेनमेंट जोन भी पूरे जिले में नहीं बल्कि जहां कोरोना पॉजिटिव मिले उस छोटे क्षेत्र में और इसके बाहरी क्षेत्र में बफर जोन तथा शेष क्षेत्र में नॉन कंटेनमेंट जोन बनाने के निर्देश दिये हैं। कहा है कि रेड जोन घोषित होने से पहले ही आर्थिक संकट से जूझ रहे नगर की आर्थिक गतिविधियां ध्वस्त हो जाएंगी। इसलिये मुख्यमंत्री से इस निर्णय पर पुर्नविचार करने एवं नैनीताल को रेड जोन से हटाने की मांग की गई है। टैक्सी यूनियन की ओर से एसडीएम को ज्ञापन सोंपने में अध्यक्ष नीरज जोशी के साथ ही कोषाध्यक्ष ओमवीर सिंह भी शामिल रहे।
नए कुमाऊं कमिश्नर अरविन्द सिंह ह्यांकी ने प्रवासियों को मूल जिले में जोड़ने और नैनीताल को रेड जोन से बाहर लाने का एक प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। उन्होंने स्वीकार किया है कि प्रवासी जिस जिले के हैं, कोरोना पॉजिटिव या निगेटिव में उसी जिले का नाम दर्ज होना चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि नैनीताल के साथ कुछ ज्यादती तो हो गई है। उन्होंने कहा कि इस भूल को सुधारने के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है। स्थानीय स्तर पर कोरोना का फैलाव न होने पर जिले को रेड जोन से बाहर लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह काम जल्दी हो जाएगा।

यह भी पढ़ें : नियमविरुद्ध बता सीएम को भेजा ज्ञापन, सीएस ने कहा-करेंगे पुर्नविचार

-व्यापार मंडल ने कहा-केंद्रीय गृह मंत्रालय के कंटेनमेंट, बफर व नॉन कंटेनमेंट जोन बनाने व अनलॉक 1.0 के उलट है राज्य को जोन में विभक्त करने का फैसला
-नैनीताल जनपद में दूसरे जनपदों के प्रवासियों के जांच में कोरोना पॉजिटिव निकलने व उनका उपचार करने का खामियाजा जनपदवासियों को देने पर भी उठाये सवाल
-कारोबार के साथ ही आठ जून से जनपद के होटलों के साथ पर्यटन के खुलने की संभावनाओं को बताया झटका
नवीन समाचार, नैनीताल, 01 जून 2020। केंद्र सरकार द्वारा लॉक डाउन के पांचवे चरण की जगह अनलॉक 1.0 की घोषणा करने के उलट राज्य सरकार के द्वारा जोनों की घोषणा की गई है, और राज्य में एकमात्र नैनीताल जनपद को रेड जोन मंे डाल दिया गया हैं इससे मुख्यालय में सरकार के निर्णय के प्रति कड़ी नाराजगी देखी जा रही है। यहां तक कि सत्तारूढ़ दल के करीबी रखने वाले लोग भी सरकार के इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस पर बड़े पैमाने पर चर्चा हो रही है। इससे फिर से पटरी पर लौट रहे कारोबार और खासकर पर्यटन नगरी व जनपद में पर्यटन के शुरू होने की संभावनाओं को झटका लगा है।
इधर नगर के मल्लीताल व्यापार मंडल अध्यक्ष किसन नेगी व तल्लीताल व्यापार मंडल अध्यक्ष भुवन लाल साह की ओर से इस बारे में प्रदेश के मुख्यमंत्री को प्रभारी मंत्री यशपाल आर्य के माध्यम से ज्ञापन भेजा गया है, जिसमें कहा गया है कि राज्य सरकार का जोन निर्धारण का निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय के नियमों के विरुद्ध है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 30 को जारी अपने ताजा दिशा-निर्देशों में केवल तीन तरह के जोन-कंटेनमेंट जोन, बफर जोन और नॉन कंटेनमेंट जोन बनाने को कहा है। कंटेनमेंट जोन भी पूरे जिले में नहीं बल्कि जहां कोरोना पॉजिटिव मिले उस छोटे क्षेत्र में और इसके बाहरी क्षेत्र में बफर जोन तथा शेष क्षेत्र में नॉन कंटेनमेंट जोन बनाने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने बताया कि श्री आर्य ने इस संबंध में प्रदेश के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह से वार्ता की एवं तथ्यों से अवगत कराते हुए निर्णय पर पुर्नविचार करने की बात कही। क्षेत्रीय विधायक संजीव आर्य ने बताया कि मुख्य सचिव ने स्थितियों का समग्र अध्ययन कर निर्णय पर पुर्नविचार करने की बात कही है।
व्यापार मंडल से जुड़े युवा उद्यमी रुचिर साह ने बताया कि उत्तराखंड को छोड़कर देश के किसी भी राज्य में इस तरह रेड, ऑरेंज व ग्रीन जोन नहीं बनाये गये हैं। वहीं नैनीताल जनपद में जो अधिक मामले आये हैं, उनमें बड़ा हिस्सा अन्य पर्वतीय जिलों के जनपद में जांच किये गये प्रवासियों की है। नैनीताल को रेड जोन घोषित करने से यहां छोटे व्यापारी भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे वहीं आठ जून से होटलों के साथ पर्यटन खुलने की संभावनाओं को भी बड़ा झटका लगा है। इसलिये मुख्यमंत्री से इस निर्णय पर पुर्नविचार करने एवं नैनीताल जिले से रेड जोन हटाने की मांग की है।

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