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कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रो. साहू को उप राष्ट्रपति के हाथों मिला राष्ट्रीय पुरस्कार, विश्वविद्यालय में हर्ष

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डीएसबी के नैनो साइंस सेंटर के निदेशक प्रो. नंद गोपाल साहू को चेन्नई में आठवें राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजते उप राष्ट्रपति एम वेंकया नायडू।

नवीन समाचार, नैनीताल, 24 जनवरी 2019। कुमाऊं  के डीएसबी परिसर के रसायन विज्ञान विभाग के अंतर्गत संचालित नैनो विज्ञान केंद्र के प्रभारी प्रो. नंद गोपाल साहू को बृहस्पतिवार को देश के उप राष्ट्रपति एम वेंकया नायडू ने चेन्नई स्थित मद्रास विश्वविद्यालय में आयोजित केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के स्वर्ण जयंती समारोह में राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया। उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग की ओर से उनकी व्यर्थ प्लास्टिक से बहुमूल्य नैनो पदार्थ-ग्रेफीन, पेट्रोलियम ईधन एवं सीमेंट-कंक्रीट में मिलाने वाला एड्हीसिव बनाने की खोज पर दिया गया है। उनकी खोज ‘स्मार्ट सिन्थेसिस ऑफ कार्बन नैनो मैटीरियल अलॉंग विद द प्रोडक्शन ऑफ हाई वैल्यू एडेड फ्यूल एंड एड्हीटिव्स फॉर द कंक्रीट मिक्सचर फ्रॉम वेस्ट प्लास्टिक’ को ‘इन्नोवेशन इन पॉलीमर वेस्ट मैनेजमेंट एंड रिसाइकिलिंग’ श्रेणी में तकनीकी नवाचार के आठवें राष्ट्रीय पुरस्कार में विजेता के रूप में पुरस्कृत की गयी। उनके इस प्रोजेक्ट में सुनील पांडे, चेतना तिवारी, सुनील ढाली, मनोज कालाकोटी आदि शोध विद्यार्थी भी शामिल हैं।
उनकी इस उपलब्धि पर विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल, कुलसचिव डा. महेश कुमार, परिसर निदेशक प्रो एलएम जोशी तथा संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष सहित विवि के प्रोफेसरों, छात्र-छात्राओं में इस उपलब्धि पर विवि में हर्ष का माहौल है। कुविवि शिक्षक संघ-कूटा के अध्यक्ष प्रो. ललित तिवाड़ी, महासचिव डा. सुचेतन साह, उपाध्यक्ष डा. दीपक कुमार सहित डा. शिवांगी चन्याल, डा. विजय कुमार, डा. सोहेल जावेद, डा. एचएस पनेरू, डा. मनोज घुनी, डा. गगन होती, डा. दीपिका पंत व डा. ललित मोहन ने भी खुशी व्यक्त की है।

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-नैनीताल की कंपनी हैक्स ऑर्प इंडस्ट्रीज के साथ होगा करार

नैनी झील सहित पूरे देश में पानी को शुद्ध करने के प्रोजेक्ट में शामिल नैनो साइंस सेंटर के निदेशक प्रो. नंद गोपाल साहू एवं देश के अन्य वैज्ञानिक, इनसेट में हैक्स ऑर्प इंडस्ट्रीज के निदेशक अक्षत साह।

नवीन जोशी @ नवीन समाचार, नैनीताल, 23 जनवरी 2019। कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर के रसायन विज्ञान विभाग के अंतर्गत संचालित नैनो विज्ञान केंद्र की राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने जा रही ‘बेकार प्लास्टिक से बहुमूल्य नैनो पदार्थ ग्रेफीन’ प्राप्त करने की खोज का औद्योगिक उपयोग हो सकेगा। यह कार्य करने के लिए नगर की कंपनी हैक्स ऑर्प इंडस्ट्रीज आगे आई है। कंपनी के साथ जल्द करार होने की कंपनी एवं नैनो विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं खोजकर्ता वैज्ञानिक प्रो. नंद गोपाल साहू ने पुष्टि की है। इसके बाद इस अत्याधुनिक तकनीक का लाभ देश के आम लोगों को भी मिल सकेगा।
उल्लेखनीय है कि नैनो विज्ञान केंद्र द्वारा बनाई गयी स्वयंभू-20121 नाम की वेस्ट रिसाइक्लिंग मशीन से कूड़े में मिलने वाली प्लास्टिक की बोतलों जैसे व्यर्थ प्लास्टिक को ग्राफिन (वैज्ञानिक नाम एसपी-2) कच्चा पेट्रोलियम ईधन व सड़क निर्माण में प्रयोग होने योग्य एड्हीटिव में परिवर्तित किया जा रहा है। इससे प्राप्त ग्राफिन का उपयोग ऊर्जा, पॉलीमर कम्पोजिट, वाटर प्यूरिफिकेशन और ड्रग डिलीवरी सिस्टम आदि में उपयोग किया जाता है। साथ ही इससे प्राप्त पेट्रोलियम को ईधन के रूप में प्रयोग किया जाता है। लेकिन ग्रेफीन के औद्योगिक व व्यवसायिक उपयोग में बाधा इसकी कीमत है। यहां तैयार हो रही ग्रेफीन की मौजूदा कीमत करीब 10 हजार रुपए प्रति किग्रा बताई गयी है। जबकि सेंटर के प्रभारी डा. नंद गोपाल साहू ने बताया कि इसे आगे करीब एक लाख रुपए प्रति किग्रा के भाव तक बिकने वाले अधिक शुद्ध ग्रेफीन तैयार करने की भी योजना है। लेकिन इतने महंगी ग्रेफीन का मजबूत सीमेंट, सरिया आदि में उपयोग होना संभव नहीं लगता है। इस समस्या को हैक्स ऑर्प कंपनी भी समझ रही है। कंपनी के निदेशक अक्षत साह ने कहा कि इस समस्या के निदान के लिए उनकी देश के बड़े उद्योग समूहों से बात चल रही है कि कैसे इसका उपयोग किया जा सकता है। वहीं प्रो. साहू ने कहा कि हैक्स ऑर्प के साथ तकनीकी हस्तांरण का करार किया जाएगा, इसके लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति प्राप्त की जा रही है।

पूरे देश को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में भी होगा उपयोग, नैनी झील से होगी शुरुआत

नैनीताल। ग्रेफीन के एक मिमी के एक अरबवें हिस्से के बराबर महीन कणों से गंदे से गंदे पानी को छानकर सूक्ष्मतम गंदगी व जीवाणु-विषाणु रहित किया जा सकताा है, जोकि अब तक उपलब्ध नहीं है। अब तक आरओ व अन्य सिस्टम अधिकतम पानी से खनिजों एवं जीवाणुओं को ही हटाने का दावा कर पाते हैं। लेकिन नैनो विज्ञान केंद्र की ग्रेफीन खोजने की सफलता के बाद केंद्र सरकार ने आईआईटी मद्रास में सेंटर फॉर सस्टेनेबल ट्रीटमेंट रियूज एंड मैनेजमेंट फॉर एफीसिएट एंड सिनेजिस्टिक सॉल्यूशन फॉर वाटर का गठन प्रो. डीजी फिलिप व प्रो. पी प्रदीप के नेतृत्व में गठित किया है। आगामी 25 जनवरी को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डा. हर्षवर्धन इसका शुभारंभ कर सकते हैं। इस केंद्र में देश भर के आठ प्रोफेसरों को अलग-अलग जिम्मेदारी देकर देश को अगले पांच वर्षों के भीतर शुद्ध पानी उपलब्ध कराने का कार्य दिया गया है। इस केंद्र में व्यर्थ प्लास्टिक से ग्रेफीन के एवं इसकी मदद से पानी को साफ करने का फिल्टर भी बना चुके प्रो. नंद गोपाल साहू भी है। साहू ने बताया कि उन्हें इस राष्ट्रीय प्रोजेक्ट में ग्रेफीन फिल्टर बनाने की जिम्मेदारी मिली है। नैनीताल की हैक्स ऑर्प इंडस्ट्रीज की मदद से वे सर्वप्रथम नैनी झील और फिर जनपद की सभी झीलों में ग्रेफीन फिल्टर तैयार कर स्थापित किए जाएंगे । आगे यह प्रयोग पूरे देश में भी लागू हो सकता है। कुमाऊं विवि से इस प्रोजेक्ट में संदीप पांडे, चेतना तिवारी, सुनील ढाली, मनोज कालाकोटी आदि शोध विद्यार्थी भी शामिल हैं।

स्टील से 300 गुना अधिक मजबूत होता है ग्रेफीन

Grefeen

नैनीताल। प्राप्त ग्रेफीन की बहुत महीन परत स्टील से 300 गुना अधिक मजबूत है। साथ ही ग्रेफीन में दुनिया की सर्वाधिक चालकता, तनन क्षमता, संकुचित करने और न टूटने की क्षमता युक्त परत भविष्य में कभी मैले न होने वाले व सामान्य वस्त्रों को भी बुलेट-प्रूफ जैकेट जैसी क्षमता प्रदान करने का गुण रखती है। इसलिए इसे स्टील पर चढ़ाकर अत्यधिक मजबूत पुल व ढांचे, हवाई जहाजों, मिसाइलों में प्रयोग किया जा सकता है। साथ ही इसके पॉलीमर कंपोजिट व कंपोजिट से सोलर सेल, ईधन सेल, बैटरी, वाटर फिल्टर, सुपर कैपेसिटर आदि तैयार करने के साथ ही मनुष्य के शरीर के भीतर जाकर नियत स्थान का ही उपचार करने की ‘टारगेटेड ड्रग डिलीवरी’ सिस्टम भी विकसित किया जा सकता है। साथ ही इसके बने पेंट दीवारों पर एक बार लगाने पर मौसम और धूल व अन्य गंदगी से मुक्त होंगे। इसकी बनी नैनो चिप से इलेक्ट्रानिक उपकरणों की दुनिया और अधिक संकुचित होने जा रही है। 

एक मिमी के एक अरबवें हिस्से के आकार के होते हैं ग्रेफीन के कण

भविष्य को नैनो तकनीकी का युग कहा जा रहा है। यह नैनो तकनीकी पदार्थों को बहुत छोटा-पतला, विज्ञान की भाषा में एक मिमी के 10 की घात ऋण नौ यानी एक अरबवें हिस्से के आकार के कणों की है। इसे इस तरह भी समझ सकते हैं ग्रेफाइट से बनी पेंसिल की भीतरी या खराब बैटरी की काली छड़ों के एक परमाणु में 10 हजार परतें होती हैं, जबकि इधर केवल पांच वर्ष पूर्व ही नोबल पुरस्कार प्राप्तकर्ता खोज नैनो पदार्थ ग्रेफीन के एक परमाणु में केवल एक ही परत होती है। यह परत इतनी महीन है कि इसकी दुनिया की किसी भी अन्य त्रि-ज्यामितीय वस्तु से इतर द्वि-ज्यामितीय कहा जाता है।

यह भी पढ़ें : कुमाऊं विवि की इस खोज को मिलेगा राष्ट्रीय पुरस्कार, केंद्र प्रभारी उप राष्ट्रपति से कल ग्रहण करेंगे पुरस्कार

नवीन समाचार, नैनीताल, 21 जनवरी 2019। कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर के रसायन विज्ञान विभाग के अंतर्गत संचालित नैनो विज्ञान केंद्र की एक खोज को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने की घोषणा हो गयी है। आगामी 24 जनवरी को देश के उप राष्ट्रपति एम वेंकया नायडू चेन्नई स्थित मद्रास विश्वविद्यालय में आयोजित केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के स्वर्ण जयंती समारोह में नैनो विज्ञान केंद्र के प्रभारी प्रो. नंद गोपाल साहू को केंद्र की खोज ‘स्मार्ट सिन्थेसिस ऑफ कार्बन नैनो मैटीरियल अलॉंग विद द प्रोडक्शन ऑफ हाई वैल्यू एडेड फ्यूल एंड एड्हीटिव्स फॉर द कंक्रीट मिक्सचर फ्रॉम वेस्ट प्लास्टिक’ को ‘इन्नोवेशन इन पॉलीमर वेस्ट मैनेजमेंट एंड रिसाइकिलिंग’ श्रेणी में तकनीकी नवाचार के आठवें राष्ट्रीय पुरस्कार में विजेता के रूप में पुरस्कृत करेंगे। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग की ओर से प्रो. साहू को इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रण प्राप्त हो गया है। विवि के कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल, कुलसचिव डा. महेश कुमार, परिसर निदेशक प्रो एलएम जोशी तथा संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष सहित विवि के प्रोफेसरों, छात्र-छात्राओं में इस उपलब्धि पर विवि में हर्ष का माहौल है।

इस खोज पर मिल रहा है पुरस्कार : जिसके लिए नैनीताल का प्लास्टिक कूड़ा पहुंचेगा कुमाऊं विवि की लैब में

-कुमाऊं आयुक्त रौतेला ने दिये निर्देश, नगर पालिका के ईओ को सोंपी जिम्मेदारी
नैनीताल। नैनीताल नगर पालिका के अंतर्गत आने वाला समस्त प्लास्टिक का कूड़ा कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर स्थित नैनो साइंस एंड नैनो टेक्नोलॉजी सेंटर की प्रयोगशाला में पहुंचाया जाएगा। इस बारे में कुमाऊं आयुक्त राजीव रौतेला ने बुधवार को सेंटर में अधिकारियों, नगर के व्यापार मंडल पदाधिकारियों एवं डीएसबी व सेंटर के प्राध्यापकों की बैठक लेते हुए निर्देश दिये, साथ ही नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा को प्लास्टिक के कूड़े को केंद्र में पहुंचाने के लिए समन्वय बनाने आदि की जिम्मेदारी सोंपी। इस दौरान सेंटर के प्रभारी प्रो. नंद गोपाल साहू ने मशीन की विस्तृत जानकारी देते हुये बताया कि स्वंयमभू-वेस्ट रिसाइक्लिंग मशीन द्वारा व्यर्थ प्लास्टिक को ग्राफिन और पेट्रोलियम ईधन में परिवर्तित किया जा रहा है। इससे प्राप्त ग्राफिन का उपयोग उर्जा,पाॅलीमर कम्पोजिट, वाटर प्यूरिफिकेशन और ड्रग डिलीवरी सिस्टम आदि में उपयोग किया जाता है। साथ ही इससे प्राप्त पेट्रोलियम को ईधन के रूप में प्रयोग किया जाता है।  आयुक्त ने नैनो साइंस एवं नैनो टैक्नोलाॅजी सेंटर के शोध का प्रस्ताव बनाकर उन्हें देने को कहा ताकि वे शासन से स्वीकृत कराते हुये शोध हेतु धनराशि आवंटित करा सकें।
बुधवार को डीएम विनोद कुमार सुमन के साथ नैनो साइंस एंड नैनो टेक्नोलॉजी सेंटर पहुंचे आयुक्त रौतेला ने सबसे पहले सेंटर में प्लास्टिक के कूड़े से लाखों रुपए मूल्य के नैनो कार्बन पदार्थ ग्रैफीन व अन्य उत्पाद बनाए जाने की जानकारी ली, और इसकी प्लास्टिक के निस्तारण एवं स्वच्छ भारत अभियान के लिए बड़ी उपयोगिता को स्वीकारते हुए सेंटर के प्रभारी प्रो. नंद गोपाल साहू व उनकी टीम की मुक्त कंठ से सराहना की। साथ ही सेंटर के प्राध्यापकों व शोध छात्रों को प्रशासन की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया। साथ ही उन्होंने सेंटर के शोध छात्र-छात्राओं की एक प्राध्यापक के रूप में कक्षा भी ली, और उन्हें स्वयं के साथ ही देश-प्रदेश के लिए उपयोगी व बेहतर शोध करने के लिए प्रोत्साहित भी किया। इस अवसर पर प्रो. साहू, पालिका ईओ रोहिताश शर्मा, डीएसबी के परिसर निदेशक प्रो. एलएम जोशी, डा. गीता तिवाड़ी, डा. पैनी जोशी व डा. ललित मोहन सहित ग्रैफीन प्रोजेक्ट से जुड़े शोध छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

अपनी सफलता, स्वयंभू उपकरण के साथ नैनो साइंस एंड नैनो टेक्नोलॉजी सेंटर के प्रभारी एवं शोध छात्र-छात्राएं।

कुमाऊं विवि के नैनो साइंस एंड नैनो टेक्नोलॉजी सेंटर ने अपने पेटेंट होने जा रहे उपकरण ‘स्वयंभू’ उपकरण से प्रयोग किये गये प्लास्टिक से ग्रेफीन, कच्चा पेट्रोलियम तेल व सड़क निर्माण में प्रयोग होने योग्य एड्हीटिव किया तैयार
नैनीताल। जी हां, प्लास्टिक के कचरे के निस्तारण के लिए अब परेशान होने की जरूरत नहीं। अब प्लास्टिक का कचरा फेंकने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। कुमाऊं विश्वविद्यालय के नैनो साइंस एंड नैनो टेक्नोलॉजी सेंटर प्लास्टिक के कचरे को 25 रुपए से अधिक की कीमत पर खरीद रहा है। कोई भी व्यक्ति प्लास्टिक का कचरा ले जाकर यहां बेच सकता है। सेंटर ने इस प्लास्टिक के कचरे से अपने पेटेंट होने जा रहे उपकरण ‘स्वयंभू-2021’ के जरिये अभी 2010 में ही खोजे गये बहुमूल्य कार्बन नैनो पदार्थ-ग्रेफीन (वैज्ञानिक नाम SP-2), कच्चा पेट्रोलियम तेल व सड़क निर्माण में प्रयोग होने योग्य एड्हीटिव तैयार करने का सफल प्रयोग कर लिया है, और प्लास्टिक खरीदना भी प्रारंभ कर दिया है। सेंटर को हर रोज 100 किग्रा प्लास्टिक की जरूरत है, इसलिए न केवल आम लोग वरन नगर निकाय भी अपना बड़ी मात्रा में कूड़े के साथ एकत्र होने वाला प्लास्टिक का कचरा भी सेंटर को देखकर अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं। वहीं सेंटर भी इससे हजारों की आय प्राप्त कर रहा है। यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘क्लीन इंडिया मिशन’ परियोजना से भी जुड़ी है। इससे शहरी अजैविक व प्लास्टिक के कूड़े-कचरे से न केवल निजात मिल सकती है, वरन मोटी आय भी प्राप्त की जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि कुविवि में पूर्व राज्य सभा सांसद तरुण विजय के द्वारा अपनी पूरी सांसद निधि 50 लाख रुपए एकमुस्त देने से स्थापित नैनो साइंस एंड नैनो टेक्नोलॉजी सेंटर ने स्वयं डिजाइन किये गये उपकरण ‘स्वयंभू’ को नेशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीज प्रोजेक्ट से प्राप्त 1.98 करोड़ रुपए से करीब दो वर्ष की मेहनत के बाद बेंगलौर की एक कंपनी से तैयार करवाया है। इस उपकरण में प्लास्टिक के कचरे को कटिंग यूनिट, वॉशिंग यूनिट, ड्रॉइंग यूनिट, कैटेलिस्ट मिक्सर के बाद पायरोलिसिस यानी मुख्य स्वयंभू उपकरण से गुजारकर द्वि-ज्यामितीय ग्रेफीन, कच्चा पेट्रोलियम तेल व सड़क निर्माण में प्रयोग होने योग्य एड्हीटिव तैयार किया जाता है। इस प्रकार प्राप्त आय विश्वविद्यालय का खजाना भरने वाली है। इस प्रोजेक्ट में रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो0 एबी मेलकानी, प्रभारी डा. नंद गोपाल साहू के साथ ही विनयदीप पुनेठा, संदीप पांडे, मनोज कड़ाकोटी, सुनील ढाली, नेहा कार्की, हिमानी तिवारी, चेतना तिवाड़ी, सीमा, नीमा, गौरव व भाष्कर बोरा आदि शोधार्थी योगदान दे रहे हैं।

प्लास्टिक से ही तैयार होने वाले ईधन से चलता है स्वयंभू

नैनीताल। कुविवि के स्वयंभू उपकरण को पेटेंट कराने के लिए सेंटर पहले ही आवेदन कर चुका है, और इसके पेटेंट होने की प्रक्रिया चल रही है। इस उपकरण की खास बात यह भी है कि इसे चलाने के लिए केवल शुरू में ही थोड़े से ईधन की जरूरत पड़ती है, और इसके बाद यह स्वयं के लिए प्लास्टिक से ही पेट्रोलियम क्रूड यानी कच्चा तेल तैयार कर उसी से चलता है। इस कारण भी यह अपने नाम स्वयंभू को साकार करता है।

नैनो साइंस सेंटर में सेंटर के प्रभारी प्रो. नंद गोपाल साहू ने बताया कि उनके केंद्र में केवल आठ हजार रुपए की लागत से तैयार भट्टी में पुरानी बोतलों, टूटी प्लास्टिक की बाल्टी या दूध की खाली थैलियों आदि की करीब 20 किग्रा प्लास्टिक से कार्य शुरू किया गया। इसमें खास नई तकनीकों से बोतलों को जलाकर सर्वप्रथम भट्टी में इकट्ठा होने वाले कार्बन से ग्रेफीन, फिर बचे पदार्थ से पेट्रोलियम उत्पाद और आखिर में सीमेंट-कंक्रीट के साथ मिलाकर निर्माण कार्यों में प्रयुक्त किये जाने वाले पदार्थ को तैयार किया जा रहा है, और इस प्रकार औसतन एक बोतल से करीब 90 रुपए की आय प्राप्त की जा रही है।

जर्मानेन बनाने के लिए प्रो. साहू को मिला है प्रथम गर्वर्नर्स अवार्ड

उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. केके पॉल ने बेहतर शोध कार्य के लिए कुमाऊं विवि के तीन प्रोफेसरों को सम्मानित किया है। वर्ष 2013 से कुविवि के नैनो साइंस सेंटर के प्रभारी डॉ. नंद गोपाल शाहू को द्वि-ज्यामितीय नैनो पदार्थ-जर्मानेन को प्लास्टिक से प्राप्त करने के लिये प्रथम पुरस्कार मिला है। मूल रूप से पश्चिम बंगाल के निवासी प्रो. साहू का दावा है कि भारत में पहली बार जर्मानेन को प्रयोगशाला में तैयार करने में सफलता मिली है। इसका प्रयोग अत्यंत छोटे की-डायोड बनाने में किया जाएगा, और इससे भविष्य में सौर बैटरियां बनाने में मदद मिलेगी। ऊर्जा के क्षेत्र में यह बड़ी उपलब्धि है। उनके अलावा वर्ष 2000 से कुविवि के भीमताल स्थित जैव तकनीका विभाग की प्रभारी के रूप में कार्यरत डा. वीना पांडे को पहाड़ी झाड़ी किलमोड़ा के औषधि गुणों को निकालने की बेहतर प्रक्रिया तैयार करने के लिये द्वितीय पुरस्कार और शोध छात्र अनूप कुमार को हिमालय की गुफाओं में प्राकृतिक तरीके से बनने वाली शिवलिंग जैसी आकृतियों पर लंबी अवधि के प्राकृतिक बदलावों व मौसम से जुड़ी घटनाओं पर आधारित शोध कार्य के लिए तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

नैनो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में इस वर्ष दुनिया में 891 अरब डॉलर तक अनुमानित बाजार होने और 1.2 करोड़ नए रोजगार उपलब्ध होने का है अनुमान

Nano Technology

नवीन जोशी, नैनीताल। नैनो टेक्नोलॉजी को भविश्य की तमाम समस्याओं का समाधान बताया जा रहा है। नेसकॉम की हालिया रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में नेनो टेक्नोलॉजी का अनुमानित बाजार 2015 तक 2014 के 180 अरब डॉलर से सीधे बढ़ कर 891 अरब डॉलर हो जाएगा, तथा दुनिया भर में 1.2 करोड़ नए रोजगार पैदा होंगे, जिसमें एक बड़ा हिस्सा भारत का बताया जा रहा है। अमेरिका, जापान और चीन के बाद भारत इस क्षेत्र में शोध पर सबसे अधिक निवेश करने वाला देश है। देश में फिलहाल 400 से अधिक कंपनियां इस प्रौद्योगिकी पर आधारित 1000 से अधिक वस्तुएं बाजार में उतार चुकी हैं, और 21वीं सदी के बारे में कहा जा रहा है कि वह नैनो सदी बनने जा रही है। इस प्रकार इस तकनीकी का केंद्र खोलकर एक तरह से कुमाऊं विवि ने भविष्य के साथ कदमताल शुरू कर दी है।
नैनो का अर्थ ऐसे पदार्थों से है जो एक मीटर के एक अरबवें हिस्से यानी अति सूक्ष्म आकार वाले तत्वों से बने होते हैं। इस प्रकार नैनो टेक्नोलॉजी अणुओं व परमाणुओं की इंजीनियरिंग है, जो भौतिकी, रसायन, बायो इन्फर्मेटिक्स व बायो टेक्नोलॉजी जैसे विषयों को आपस में जोड़ती है।

इस प्रौद्योगिकी से विनिर्माण, बायो साइंस, मेडिकल साइंस, इलेक्ट्रनिक्स व रक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है, क्योंकि इससे किसी वस्तु को एक हजार गुणा तक मजबूत, हल्का और भरोसेमंद बनाया जा सकता है। छोटे आकार, बेहतर क्षमता और टिकाऊपन के कारण मेडिकल और बायो इंजीनियरिंग में नैनो टेक्नोलॉजी तेजी से बढ़ रही है। अत्यधित सूक्ष्म कणों की वजह से इस तकनीकी के प्रयोग से इंजन में कम घर्षण होता है, जिससे मशीनों का जीवन बढ़ जाता है। साथ ही ईंधन की खपत भी कम होती है। दूसरे संदर्भों में नैनो विज्ञान अति सूक्ष्म मशीनें बनाने का विज्ञान है। ऐसी मशीनें इंसान के जिस्म में उतर कर, उसकी धमनियों में चल-फिर कर वहीं रोग का ऑपरेशन कर सकती हैं। इनकी मदद से मोबाइल फोन को मनुष्य के नाखून से भी छोटे आकार में बनाया जा सकता है। इस तकनीक से ऐसी धातु बन सकती है जो भार में तो स्टील से दस गुना हल्की हो, किंतु मजबूती में सौ गुना अधिक मजबूत हो। यानी ऐसी धातु के सिर्फ कुछ इंच के खंभों से पुल का बोझ सहा जा सकता है। इसकी मदद से धागे जैसे छोटे किंतु केमिकल या जैवीय हमलों को झेलने में सक्षम कपड़े व हथियार बनाने की परिकल्पना की जा रही है। इसके अलावा खाद पदार्थों को डिब्बा बंद करेने, कपडों, कीटाणुनाशकों और घरेलू यंत्रों, सौंदर्य प्रसाधन, पेंट, चिकित्सा व जैव तकनीक के क्षेत्र में भी नैनो तकनीकी के अनेक उपयोगों की संभावना हैै। अपनी इसी अति सूक्ष्म आकार के साथ बेजोड़ मजबूती और टिकाऊपन के कारण नैनो तकनीक के प्रयोग से इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिसिन, ऑटो, बायोसाइंस, पेट्रोलियम, फारेंसिक साइंस और रक्षा जैसे तमाम क्षेत्रों में असीम संभावनाएं बन रही हैं। कुमाऊं विवि में नैनो टेक्नोलॉजी साइंस सेंटर की स्थापना से खासकर नैनो इनर्जी, नैनो हर्बल और नैनो मेडिसिन के क्षेत्र में कार्य कर करोड़ों रुपए की आय पैदा करने की उम्मीद भी की जा रही है।

यह पुराना आलेख भी पढ़ें : कुमाऊं विवि में विकसित हो रही ‘नैनो दुनियां’, सोलर सेल बनाने को बढ़े कदम

राष्ट्रीय सहारा, 1 अक्टूबर 2016, पेज-1

राष्ट्रीय सहारा, 1 अक्टूबर 2016, पेज-1

-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘क्लीन इंडिया मिशन’ परियोजना से भी जुड़ी है यह सफलता
-कुमाऊं विवि के डीएसबी कॉलेज स्थित नैनो साइंस एवं नैनो तकनीकी केंद्र ने प्लास्टिक के कूड़े, बोतलों आदि से बहुमूल्य नैनो कार्बन पदार्थ ग्रेफीन, पेट्रोलियम ईधन और सीमेंट कंक्रीट के साथ उपयोग होने वाले पदार्थ बनाने की अपने उपकरण-‘स्वयंभू-2021’ को कराया पेटेंट
-साथ ही एक्पायरी हो चुकी दवाइयों को फिर से उपयोग करने का ‘बायो मेडिकल ड्रग डिलीवरी सिस्टम’ भी कराया पेटेंट
नवीन जोशी, नैनीताल। 1972 में स्थापित कुमाऊं विवि ने अपने 44 वर्ष के इतिहास में पहली बार एक साथ अपने दो अनुसंधानों को पेटेंट कराकर इतिहास रच डाला है। कुमाऊं विवि के डीएसबी कॉलेज स्थित नैनो साइंस एवं नैनो तकनीकी केंद्र ने प्लास्टिक के कूड़े, बोतलों आदि से बहुमूल्य नैनो कार्बन पदार्थ ग्रेफीन के साथ ही पेट्रोलियम ईधन और सीमेंट कंक्रीट के साथ उपयोग होने वाले पदार्थ बनाने की अपनी स्वयं बनाये गये प्रबंध-‘स्वयंभू-2021’ के साथ ही कालातीत यानी एक्पायरी हो चुकी दवाइयों को फिर से उपयोग करने के ‘बायो मेडिकल ड्रग डिलीवरी सिस्टम” का पेटेंट फाइल कर दिया है। प्रयोग का धरातल पर लाभ मिलने लगे तो शहरी अजैविक व प्लास्टिक के कूड़े-कचरे से न केवल निजात मिल सकती है, वरन मोटी आय भी प्राप्त की जा सकती है।

कुमाऊं विवि में कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी के प्रयासों एवं पूर्व राज्य सभा सांसद तरुण विजय द्वारा अपनी सांसद निधि के पूरे 50 लाख रुपयों से स्थापित इस केंद्र में स्थापित मुख्य उपकरण भट्टी को ही ‘स्वयंभू-2021’ नाम दिया गया है, और इसे ही पेटेंट कराया गया है। इसके अलावा कालातीत हो चुकी खांसी की पीने वाली दवाई को फिर से उपयोगी बनाने का ‘बायो मेडिकल ड्रग डिलीवरी सिस्टम’ भी पेटेंट कराया गया है। दोनों पेटेंट कराने वाली टीम में सुनील ढाली, विनयदीप पुनेठा, संदीप पांडे, मनोज काराकोटी व पवन आदि शोध छात्र भी शामिल हैं। विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी ने इस उपलब्धि के लिये केंद्र के प्रभारी डा. नंद गोपाल साहू व उनकी टीम को बधाई दी है।

नैनो साइंस सेंटर में सेंटर के प्रभारी प्रो. नंद गोपाल साहू ने बताया कि कुमाऊं विवि के नैनो साइंस सेंटर में केवल आठ हजार रुपए की लागत से तैयार भट्टी में पुरानी बोतलों, टूटी प्लास्टिक की बाल्टी या दूध की खाली थैलियों आदि की करीब 20 किग्रा प्लास्टिक से कार्य शुरू किया गया है। इसमें खास नई तकनीकों से बोतलों को जलाकर सर्वप्रथम भट्टी में इकट्ठा होने वाले कार्बन से ग्रेफीन, फिर बचे पदार्थ से पेट्रोलियम उत्पाद और आखिर में सीमेंट-कंक्रीट के साथ मिलाकर निर्माण कार्यों में प्रयुक्त किये जाने वाले पदार्थ को तैयार किया जा रहा है, और इस प्रकार औसतन एक बोतल से करीब 90 रुपए की आय प्राप्त की जा रही है।

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प्लास्टिक की खाली बोतलों से बिजली बनाने का प्रोजेक्ट मंजूर

कुमाऊं विवि के नैनो साइंस सेंटर को हिमालयन पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल से मिला दो करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट

केंद्र में पहले ही प्लास्टिक की खाली बोतलों से बन रहे हैं नैनो कार्बन पदार्थ ग्रेफीन, पेट्रोलियम ईधन और सीमेंट कंक्रीट के साथ उपयोग होने वाले पदार्थ
नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां, यह सच है। बोतल बंद पानी की प्लास्टिक की जिस खाली बोतल को हमें कबाड़ में बेचने पर 10-15 पैंसे भी नहीं मिल पाते हैं, उससे 90 रुपए यानी 500-600 गुना तक अधिक कीमत कमाई जा सकती है। ऐसा होना बहुत दूर भी नहीं है, वरन कुमाऊं विवि के इसी सत्र में स्थापित नैनो साइंस सेंटर में ऐसा सफलता पूर्वक किया जा रहा है। यहां एक प्लास्टिक की बोतल से करीब 80 हजार रुपए प्रति किग्रा के भाव मिलने वाले अभी 2010 में ही खोजे गये कार्बन नैनो पदार्थ-ग्रेफीन (वैज्ञानिक नाम SP-2) में बदला जा रहा है, साथ ही वैकल्पिक पेट्रोलियम ईधन एवं सीमेंट-कंक्रीट के साथ प्रयुक्त हो सकने वाले दो अन्य पदार्थ भी सफलता पूर्वक तैयार किए जा रहे हैं। अभी यह प्रायोगिक स्तर पर है, और जल्द ही इसके व्यवसायिक व बड़े स्तर पर होने की राह खुली हुई है। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘क्लीन इंडिया” परियोजना से जोड़कर भी देखा जा रहा है। प्रयोग का धरातल पर लाभ मिलने लगे तो शहरी अजैविक व प्लास्टिक के कूड़े-कचरे से भी निजात मिल सकती है।

कुमाऊं विविद्यालय का नैनो साइंस सेंटर प्लास्टिक की खाली बोतलों से बिजली उत्पादन के प्रोजेक्ट पर कार्य करने जा रहा है। इस अति महत्वाकांक्षी योजना के लिए कुमाऊँ विवि के नैनो साइंस सेंटर को भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के ‘नेशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीज’ कार्यक्रम के तहत अल्मोड़ा जिले के कोसी कटारमल स्थित हिमालयन पर्यावरण संस्थान से करीब दो करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं।उल्लेखनीय है कि इस केंद्र में पूर्व से ही प्लास्टिक की एक खाली बोतल से करीब 80 हजार रुपये प्रति किग्राके भाव मिलने वाले और अभी 2010 में ही खोजे गये कार्बन नैनो पदार्थ-ग्रेफीन (वैज्ञानिक नाम एसपी-2) के साथ ही वैकल्पिक ‘‘हाई वैल्यूड’ पेट्रोलियम ईधन एवं सीमेंट-कंक्रीट के साथ प्रयुक्त हो सकने वाले दो अन्य पदार्थ (एड्हीसिव्स) भी सफलतापूर्वक तैयार किये जा रहे हैं। इस प्रकार एक खाली बोतल से करीब 90 रुपये यानी 500-600 गुना तक अधिक कीमत के उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कुमाऊं विवि का नैनो साइंस सेंटर की स्थापना में राज्यसभा सांसद तरुण विजय का बड़ा योगदान है, जिन्होंने सांसद निधि के 50 लाख रुपये इस केंद्र को दिये थे।इस केंद्र ने शुरू में केवल आठ हजार रुपये की लागत से तैयार भट्टी में पुरानी बोतलों, टूटी प्लास्टिक की बाल्टी या दूध की खाली थैलियों आदि की करीब 20 किग्राप्लास्टिक से कार्य शुरू किया और खास नई तकनीकों से बोतलों को जलाकर सर्वप्रथम भट्टी में इकट्ठा होने वाले कार्बन से ग्रेफीन, फिर बचे पदार्थ से पेट्रोलियम उत्पाद और आखिर में सीमेंट-कंक्रीट के साथ मिलाकर निर्माण कायरे में प्रयुक्त हो सकने वाला पदार्थ तैयार किया। इस प्रकार केंद्र में औसतन एक बोतल से करीब 90 रुपये की आय प्राप्त की जा रही है।कुमाऊं विवि में कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी ने बताया कि नैनो साइंस सेंटर के एक करोड़ 97 लाख 88 हजार 800 रुपये के एक प्रोजेक्ट को हिमालय पर्यावरण संस्थान ने स्वीकृत कर दिया है। नैनो साइंस सेंटर के प्रभारी प्रो. नंद गोपाल साहू ने बताया कि इस प्रोजेक्ट से पुराने कामचलाऊ उपकरण की जगह बेहतर अत्याधुनिक उपकरण स्थापित किया जाएगा तथा यहां कार्य करने वाले युवा वैज्ञानिक बेहतर सुविधाओं के साथ कार्य कर सकेंगे। प्रोजेक्ट में बेकार प्लास्टिक की बोतलों से बिजली का उत्पादन होगा, जिसका उपयोग ईधन के रूप में किया जा सकेगा। प्रयोग का धरातल पर लाभ मिलने लगे तो शहरी अजैविक व प्लास्टिक के कूड़े-कचरे से न केवल निजात मिल सकती है, वरन मोटी आय भी प्राप्त की जा सकती है।

तरुण विजय ने पूरा किया कुमाऊं विवि में नैनो साइंस एवं नैनो तकनीकी केंद्र का सपना, कुमाऊं विवि में स्थापित हुआ नैनो टेक्नोलॉजी साइंस सेंटर

Nano Science Technology Centre

-सांसद निधि के 38 लाख रुपए से हुई है स्थापना 
-जंतु, रसायन, जैव प्रोद्योगिकी विभाग करेंगे संचालित
-सूचना प्रोद्योगिकी, नैनो हर्बल एवं दवाइयों के क्षेत्र में होंगे नैनो तकनीकी पर शोध
नैनीताल। कुमाऊं विवि से जुड़े लोगों का रविवार (22.02.2015)  को जैसे एक सपना सच हो गया। विवि के कुलपति प्रो.एचएस धामी ने इसे अपना सपना सच होना ही बताया। विवि में आज नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर (एनएसएनटी) का शुभारंभ राज्य सभा सांसद तरुण विजय के हाथों किया गया। श्री विजय ने ही इस केंद्र की पहल के लिए अपनी सांसद निधि से 50 लाख रुपए की धनराशि जारी की है। केंद्र की स्थापना कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर के रसायन विभाग में की गई है। इस प्रस्तावित केंद्र में कुमाऊं विवि के जंतु विज्ञान व जैव प्रोद्योगिकी सहित विज्ञान संकाय से संबंधित अन्य विभागों के साथ ही अमेरिका, आस्ट्रेलिया, जापान, सिंगापुर आदि के सहयोग से कार्बनिक तत्व ग्रेफाइट से ग्रेफीन को अलग कर सस्ती सौर ऊर्जा प्राप्त करने के लिए नैनो चिप प्रकार के इलेक्ट्रोड तैयार करने तथा दवाओं के लिए जर्मनीन नामक तत्व तैयार करने के कार्य किए जाएंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि इस केंद्र से नैनो इनर्जी, नैनो हर्बल और नैनो मेडिसिन के क्षेत्र में कार्य कर करोड़ों रुपए की आय भी पैदा की जाएगी, तथा युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी दिलाए जाएंगे।
रविवार को डीएसबी परिसर में राज्य सभा सांसद तरुण विजय ने कुलपति प्रो. एचएस धामी, केंद्र के समन्वयक डा. नंद गोपाल साहू, परिसर निदेशक प्रो. एसपीएस मेहता एवं पूर्व छात्र महासंघ अध्यक्ष दीपक मेलकानी आदि के साथ दीप प्रज्वलित नैनो टेक्नोलॉजी सांइस संेटर का विधिवत शुभारंभ किया। कहा कि उत्तराखंड विश्व का सबसे बड़ा शिक्षा केंद्र बनने की क्षमता रखता है, लेकिन इसके उलट, राजनीतिक इच्छा शक्ति के अभाव में यहां शिक्षा का निरंतर ह्रास हो रहा है। सरकार का ध्यान शिक्षा का व्यवसायीकरण करने पर अधिक है, जबकि उसे रोजगारपरक शिक्षा देने पर कार्य करना चाहिए था। उन्होंने स्वामी विवेकानंद को अणु में ब्रह्मांड के दर्शन कराकर सर्वप्रथम ज्ञान प्राप्त कराने वाले जनपद के काकड़ीघाट से आगे अल्मोड़ में भगिनी निवेदिता और मायावती आश्रम सहित प्रदेश के विवेकानंद से जुड़े 11 स्थानों को जोड़कर विवेकानंद साधना पथ बनाए जाने की मांग भी रखी। बताया कि इंदिरा गांधी और राजीव गांधी विवेकानंद के भक्त थे। राजीव ने ही विवेकानंद के जन्म दिवस 12 जनवरी को युवा दिवस घोषित किया था, लेकिन मौजूदा कांग्रेस सरकार इस बारे में राजनीतिक नफा-नुकसान देख रही है।

इस अवसर पर केंद्र के समन्वयक डा. नंद गोपाल साहू ने बताया कि यह उत्तराखंड का अपनी तरह का पहला केंद्र है, जिसमें नैनो तकनीकी से संबंधित अत्याधुनिक उपकरण व मशीनें उपलब्ध होंगी। कुलपति प्रो. एचएस धामी एवं पूर्व छात्र महासंघ अध्यक्ष दीपक मेलकानी के प्रयासों से राज्य सभा सांसद तरुण विजय ने इसके लिए 50 लाख की धनराशि उपलब्ध करवाई है। सेंटर को पूरी तरह से तैयार होने में करीब एक वर्ष का समय लगेगा। इसके बाद यहां एमएससी एवं शोध उपाधि के पाठ्यक्रम प्रारंभ हो सकेंगे, तथा विद्यार्थियों को अब तक विदेशों में ही उपलब्ध इस तरह की शिक्षा को प्राप्त करने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उच्च गुणवत्ता की दवाएें तथा नैनो ऊर्जा के उत्पादन की राहें भी खुल सकेंगी। इस अवसर पर कुलपति प्रो. धामी ने विवि में कैंसर संस्थान की स्थापना किए जाने की इच्छा भी जताई। कार्यक्रम में प्रो. आशीष तिवारी, प्रो. गंगा बिष्ट एवं बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं भी उपस्थित रहे।

पहली बार किसी सांसद ने किसी कार्य को एकमुश्त दिए सांसद निधि के 50 लाख

नैनीताल। प्रदेश के राज्य सभा सांसद तरुण विजय ने गत 13 दिसंबर 2014 को कुमाऊं विवि के स्थापना दिवस कार्यक्रम के मौके पर कुलपति प्रो. एचएस धामी की मांग पर कुमाऊं विवि को अपनी वर्ष भर की पूरी सांसद निधि के 50 लाख रुपए देकर यहां नैनो टेक्नोलॉजी साइंस सेंटर बनाने की घोषणा की थी। तब किसी को इस पर सहसा विश्वास नहीं हुआ था। लेकिन केवल दो माह के बाद ही जिस तरह सांसद की यह घोषणा धरातल पर उतरने जा रही है, उससे हर कोई सांसद तरुण विजय की कार्यशैली का कायल हो गया है। बताया गया कि इस हेतु सांसद ने खास तौर पर अनुमति भी मांगी है, जिसके बाद ही पूरी धनराशि देना संभव हुआ। कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. धामी ने केंद्र की स्थापना पर कहा कि यह उनके लिए अपना स्वप्न सच होने जैसा है।

अभाविप ने मांगे थे 15 लाख, मिले 60 लाख

नैनीताल। ऐसा कम ही होता है कि देने वाला मांगने वाले की सोच से कहीं अधिक दे जाता है। ऐसा ही सांसद तरुण विजय ने भी किया। अभाविप की सोच रास सांसद से केवल विवेकानंद स्मारक, शौचालय और पुस्तकों के लिए पांच-पांच लाख रुपए मांगने तक सीमित थी, लेकिन सांसद ने नैनो टेक्नोलॉजी साइंस सेंटर के लिए 50 लाख और विवेकानंद स्मारक व शौचालय के लिए पांच-पांच मिलाकर कुल 60 लाख देने की घोषणा कर दी। इस पर भी उन्होंने यह कहने का बड़प्पन दिखाया कि अभाविप की मांग पर ही यह सब दे रहे हैं।

नैनो साइंस सेंटर को धन की दरकार
नैनीताल। वर्तमान में कुमाऊं विवि का नैनो साइंस सेंटर राज्य सभा सांसद तरुण विजय द्वारा अपने कोटे के पूरे 50 लाख रुपए देने से चल रहा है। लेकिन इस धनराशि के खर्च होने के बाद क्या होगा, इसकी चिंता अभी से शुरू हो गई है। केंद्र में वर्तमान में स्नातकोत्तर स्तर के 11 छात्र भी जुड़कर अतिमहत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। विवि के कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी ने कहा कि नैनो साइंस सेंटर को आगे जरूरी धन उपलब्ध कराने की चिंता उन्हें है, और उन्होंने इस दिशा में प्रयास शुरू कर दिए हैं।

कुमाऊं विवि के पूर्व छात्र ने बना डाला रमन युनिवर्सल फोटो स्पेक्टोमीटर

Raman Photo Spectometer

-अब कुमाऊं विवि के साथ इसके बड़े स्तर पर निर्माण के लिए किया करार
-यह यंत्र नैनो कणों का कर सकता है अध्ययन
नैनीताल। कुमाऊं विवि के ही एक पूर्व छात्र डा. आरपी जोशी ने अपने सिगरौली मध्य प्रदेश निवासी साथी कुलदीप पटेल के साथ मिलकर देश में पहली बार स्वयं खोज कर पूरी तरह भारतीय तकनीकी से नैनो कणों को देखना और उनके गुणों की पहचान करने वाले ‘रमण प्रभाव’ पर आधारित यंत्र ‘रमण स्पैक्टो फोटो मीटर” का निर्माण कर लिया है। खास बात यह भी है कि डा. जोशी का यंत्र अब तक दुनिया में मौजूद अलग तकनीक के ऐसे यंत्रों (कीमत करीब डेढ़ करोड़) के मुकाबले करीब छठे-सातवें हिस्से यानी करीब 20-25 लाख रुपए की कीमत पर उपलब्ध है, और उनके बनाए यंत्र पिछले करीब सात माह में ही हार्वर्ड विवि, एनयूएस सिंगापुर सहित देश के कमोबेश सभी आईआईटी और कुमाऊं विवि में लग चुके हैं। आगे डा. जोशी इस यंत्र के बड़े स्तर पर निर्माण व पेटेंट आदि औपचारिकताओं के लिए कुमाऊं विवि से करार करने जा रहे है।
सोमवार (30.11.15) को कुमाऊं विवि में कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी की उपस्थिति में उनके पूर्व छात्र रहे डा. जोशी की कंपनी आरआई इंस्ट्रूमेंट्स एंड इन्नोवेसन इंडिया एवं कुमाऊं विवि के नैनो साइंस सेंटर के प्रभारी डा. नंद गोपाल साहू के बीच प्रारंभिक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए। कुलपति प्रो. धामी ने उनके प्रयास को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया” की पहल का अनुकरणीय उदाहरण बताया तथा अपने विवि से जुड़ने के ‘घर वापसी” जैसे प्रयास की भी मुक्त कंठ से प्रशंशा की। डा. जोशी ने बताया कि उन्होंने एक यंत्र अमेरिका की मशहूर अंतरिक्ष संस्था नासा को भी भेंट किया है। आगे उनकी योजना एक वर्ष में ट्रांसमिशन इंलेक्ट्रान माइक्रोस्कोप बनाने की भी है। उन्होंने यह भी कहा, अभी का दौर जो दिखता है-वह बिकता का है, किन्तु भविष्य जो नहीं दिखता (यानी न दिखने वाली नैनो तकनीकी का)-उसके बिकने का है।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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