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बड़ी ख़बर : उत्तराखंड में अब तक की सबसे बड़ी ढाई करोड़ की अवैध शराब की बरामदगी, देखें लाइव वीडियो…

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  • आगामी निकाय चुनावों के लिए संभावित उपयोग माना जा रहा तय
  • अवैध शराब किसी ‘पन्त’ नाम के शराब कारोबारी की बताई जा रही 
  • आबकारी विभाग की कार्रवाई से नैनीताल पुलिस की सक्रियता पर भी स्वतः ही उठ गए हैं सवाल

नैनीताल, 2 अगस्त 2018। आबकारी विभाग के प्रवर्तन दल को बृहस्पतिवार को हल्द्वानी में अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिली है। टीम ने एक गोदाम से देशी-विदेशी मदिरा की शराब की बोतलों से भरी करीब 5500 पेटियां बरामद की हैं। बरामद की गयी शराब की कीमत 2.5 करोड़ के करीब बतायी गयी है। बरामद की गयी शराब की बोतलों पर ‘उत्तराखंड राज्य में बिक्री हेतु’ अंकित है। जवाहर नाम के एक व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया। आगे जांच के बाद ही पता चलेगा कि बरामद की गयी शराब वास्तव में किसकी है, और क्या यह वास्तव में उत्तराखंड की है, अथवा कहीं बाहर से लायी गयी है। शराब किसी ‘पन्त’ नाम के शराब कारोबारी की बताई जा रही है। आबकारी विभाग की कार्रवाई से नैनीताल पुलिस की सक्रियता पर भी स्वतः ही सवाल उठ गए हैं।

इस तरह हुई करोड़ों की अवैध शराब की बरामदगी- देखें लाइव (साभार न्यूज़ टुडे नेटवर्क) :

प्राप्त जानकारी के अनुसार आबकारी विभाग के प्रवर्तन दल को बृहस्पतिवार को मुखबिर से सूचना मिली थी, इस पर प्रवर्तन दल ने उप आबकारी आयुक्त प्रदीप सिंह के निर्देशन में जिला आबकारी अधिकारी पवन कुमार सिंह की अगुवाई में हल्द्वानी के गौजाजाली उत्तर स्थित जय सिंह के गोदाम में छापा मार कर 5,500 पेटी से अधिक देश-विदेशी शराब बरामद की। यह शराब गोदाम में टाइल्स व सेनेटरी के सामान के साथ तिरपाल के पर्दे से छिपा कर रखी गई थी। बरामद मदिरा की कीमत 2 करोड रुपए़ से भी अधिक बताई जा रही है। आबकारी विभाग के छापामार दल में प्रवर्तन दल प्रभारी निरीक्षक सोनू सिंह, महेंद्र बिष्ट व पूरन जोशी, सब इंस्पेक्टर पान सिंह जीना, पान सिंह तड़ागी, इन्द्र सिंह राणा, हीराबल्लभ भट्ट, मोहन सिंह कोरंगा व हेड कांस्टेबल विजेंद्र जीना आदि शामिल रहे।

केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो व स्वापक औषधि नियंत्रक हाईकोर्ट में हाजिर हों…हाईकोर्ट ने कहा-बड़े माफिया पर हाथ डालने से बचती है उत्तराखंड पुलिस

नैनीताल, 18 जुलाई 2018। उत्तराखंड के युवाओं में बढ़ रही नशाखोरी और उसकी रोकथाम के मामले में बुधवार को उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड पुलिस पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस छोटे-मोटे अपराधियों को तो पकड़ लेती है, लेकिन बड़े माफियाओं पर हाथ डालने में कतराती है। जानलेवा जहरीले के खिलाफ एक बार फिर से सख्ती दिखाते हुए उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो व स्वापक औषधि नियंत्रक को 20 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश भी दिये। साथ ही कुछ गंभीर टिप्पणियां करते हुए कहा कि राज्य की एक पीढ़ी नशाखोरी की गर्त में जा रही है। सरकार नशाखोरी पर लगाम लगाने में नाकाम हो रही है। क्या उत्तराखंड राज्य का निर्माण इसीलिये किया गया था ? सरकार बड़े माफियाओं को पकड़ने में नाकाम रही है। खंडपीठ ने सरकार से अभी तक माफियाओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों की पूरी जानकारी भी न्यायालय को उपलब्ध कराने तथा उनके खिलाफ अभी तक की गयी कार्यवाही की जानकारी भी देने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ व न्यायाधीश राजीव शर्मा की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई। याची श्वेता मासीवाल की ओर से याचिका में कहा गया कि सरकार व प्रशासन युवाओं में बढ़ रही नशाखोरी पर कोई प्रतिबंध तथा नशे के सौदागरों के खिलाफ अभी तक कोई कार्यवाही नहीं कर पाये हैं। न्यायालय ने यह टिप्पणी भी की कि
उल्लेखनीय है कि पूर्व में याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने प्रदेश के 27 विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षा निदेशक, विद्यालयी शिक्षा निदेशक व सभी जिलाधिकारियों व जिलों के पुलिस प्रमुखों को पक्षकार बनाने को कहा था। आज अधिकांश पक्षकारों की ओर से जवाब पेश किया गया। उनकी ओर से कहा गया कि वे नशे के खिलाफ प्रचार अभियान चला रहे हैं। लेकिन खंडपीठ ने उनके जवाब से असहमति जाहिर करते हुए केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो व स्वापक औषधि नियंत्रक को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से पेश होने को कहा। साथ ही सरकार को नशा माफियाओं के खिलाफ दर्ज मामलों की पूरी जानकारी देने को कहा है।

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कालाढूंगी पुलिस ने काशीपुर निवासी दो चरस तस्कर दबोचे, बरामद की 1 किलो चरस 

कालाढूंगी पुलिस की गिरफ्त में आये चरस तस्कर

नैनीताल, 5 जुलाई 2018। पूरे प्रदेश व खासकर नैनीताल जनपद में लंबे समय से नशे के सौदागरों के खिलाफ चल रहे अभियान पर कालाढुंगी पुलिस अब जाकर जागी है। लंबे समय से क्षेत्र में चरस व स्मैक के तस्करों के निर्बाध रूप से सक्रिय होने और युवाओं के जानलेवा नशे की गिरफ्त में फंसने की क्षेत्रीय जनता की अनेक शिकायतों के बढ़ते दबाव के बाद कालाढुंगी पुलिस ने बृहस्पतिवार को हल्द्वानी-कालाढूंगी मार्ग पर भाखड़ा पुल के समीप घेराबंदी कर दो चरस तस्करों को गिरफ्त में लिया है। उनके कब्जे से पूरे एक किलो चरस बरामद की गयी है। इस बरामदगी को भले कालाढुंगी पुलिस अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश करे, परंतु इतनी बड़ी मात्रा में हुई चरस की बरामदगी से एक तरह से उसकी अपनी अब तक की निष्क्रियता की भी पोल-पट्टी खुल रही है। साफ हो गया है कि छोटे से कालाढुंगी कस्बे में चरस की कितनी अधिक खपत है।
बताया गया है कि सीओ रामनगर लोकजीत सिंह तथा थाना प्रभारी नरेश चौहान के निर्देशन में कालाढूंगी पुलिस को यह सफलता बीती रात्रि भाखड़ा पुल के पास चेकिंग के दौरान मिली। इस दौरान थाना काशीपुर के अंतर्गत सुभाष नगर में नहर पुलिया के पास रहने वाले 22 वर्षीय अमन प्रताप पुत्र जयप्रकाश के कब्जे से 450 ग्राम व 23 वर्षीय तरुण कुमार पुत्र विरेंद्र चौहान के कब्जे से 550 ग्राम चरस बरामद की गयी। दोनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है। पुलिस टीम में उप निरीक्षक संजय बृजवाल तथा आरक्षी नवीन कुमार, किशन नाथ व दिनेश कार्की शामिल रहे।

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जनपद के पुलिस कप्तान द्वारा शेयर की गयी फेसबुक पोस्ट

देवभूमि के नाम से प्रसिद्ध उत्तराखंड और खासकर ‘दहाड़ने’ और जिले के साथ ही ‘प्रदेश’ के लिए ‘ताना-बाना बुन’ रहे पुलिस कप्तान के जनपद नैनीताल में यह क्या हो रहा है। एक ओर 80 लाख रुपए के 200 मोबाइल चोरी होने की घटना पर नैनीताल पुलिस ने ‘लाखों’ के मोबाइल लिखकर ‘गोल-मोल’ किया तो अब ‘केवल 20 लाख’ की चोरी बताकर और इसमें से भी केवल 3 मोबाइल ढूंढकर और इन्हें डेढ़ लाख का बताकर अंतरराज्यीय मोबाइल चोर गिरोह को पकड़ने का दावा कर खुद ही अपनी पीठ ठोंकी जा रही है।

दुकानदार जसप्रीत सिंह द्वारा किया जा रहा 80 लाख के 200 मोबाइल चोरी होने का दावा ⇓

उधर जिले के ही रामनगर क्षेत्र में एसएसपी के नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को मुंह चिढ़ाते हुए कुमाऊं एसटीएफ 145 पेटी महंगी अंग्रेजी शराब पकड़ी तो इसके अगले ही दिन शहर के बीचों-बीच डंगवाल टावर स्थित होटल में दिन-दहाड़े ‘सेक्स होता’ पकड़ा गया।

रामनगर के एमपी इंटर कॉलेज में शराब की बोतलें व भारी मात्रा में नशे के लिए प्रयुक्त सिरिंज पकड़ी जा रही हैं, जिसकी शिकायत रामनगर की जीवनधारा सोसायटी द्वारा पुलिस कप्तान से की गयी है।

इधर नैनीताल में स्वयं सेवी युवाओं द्वारा चलाए जा रहे सफाई अभियान में खुलासा हो रहा है कि नगर के सभी शांत स्थान शराब पीने का अड्डा बन गये हैं। इधर कुछ समय से नगर में धड़ल्ले से स्मैक जैसा जानलेवा नशा भी आने लगा है, और नगर के अच्छे घरों के युवा भी इनकी चपेट में आ रहे हैं। जबकि पुलिस अब तक मात्र 2-3 ग्राम स्मैक पकड़कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रही है। इन स्थितियों को भविष्य में जनपद में आपराधिक घटनाओं की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

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पीरूमदारा में कुमाऊँ एसटीएफ द्वारा 16 अप्रैल 2018 को पकड़ा गया अंग्रेजी शराब का जखीरा

पीरूमदारा में एसटीएफ कुमाऊ ने छापा मारकर “नशे के खिलाफ अभियान चलाने का दावा करने वाली” नैनीताल पुलिस की नाक के नीचे से लाखों की अवैध शराब बरामद की है। शराब एक कमरे में छुपा कर रखी गई थी। पकड़ी गई शराब को दो ट्रकों में लादकर पीरुमदारा चौकी लाया गया है। शराब ब्रांडेड और महंगी बताई जा रही है। इससे एक बार फिर पुष्टि हो गई है कि रामनगर में अवैध खनन और शराब का धंधा पुलिस की शह पर खूब फल-फूल रहा है।

बताया गया है कि शराब का यह जखीरा पीरूमद्वारा गांव के आवासीय क्षेत्र में राजपाल रावत के घर में अंग्रेजी शराब के एक सेल्समैन ने अवैध रूप से इकट्ठा किया था।सोमवार को शिकायत मिलने पर एसटीएफ कुमाऊं के इंस्पेक्टर एमपी सिंह ने पीरूमद्वारा पुलिस को साथ लेकर गोदाम में छापा मारा तो वहां अंग्रेजी शराब की 145 पेटियां बरामद हुुई।  सेल्समेन को भी पूछताछ के लिए एसटीएफ ने हिरासत में लिया गया है। बताया जा रहा है कि पुलिस माामले को सिर्फ अवैध भंडारण का मामला बताने की कोशिश कर रही है।

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पिछली सरकार को ‘डेनिस’ पर घेरने वाली ‘संस्कारी’ उत्तराखंड सरकार ! राज्य का खजाना भरने को इस हद तक चले ही गये कि घर-घर गाड़ियों पर शराब की सप्लाइ के बाद अब परचून की दुकानों पर भी शराब बेचोगे। पर शायद इससे भी राज्य की जरूरतें पूरी न हो पाएं। बेहतर उपाय यह है कि अपनी ‘जनोपयोगी शराब नीति’ में राज्य के दीर्घकालीन आर्थिक हित में स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों के मध्याह्न भोजन में भी शराब परोसने का प्राविधान कर दो। इससे तात्कालिक तौर पर आपका नून-तेल का खर्चा तो बचेगा ही, बच्चों को जो शराब की आदत बचपन से लगेगी तो बड़े होने पर भी उनकी तलब सरकार का खजाना भरती रहेगी। और ‘गुणवत्तायुक्त’ शराब तो आपकी है ही, तो चिंता किस बात की ?

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट बैठक में सरकार ने कुछ दिनों पहले जारी अपनी आबकारी नीति में कुछ बदलाव करते हुए 20 किमी के दायरे में एक व्यक्ति या फर्म को चार दुकानें आवंटित करने के पहले लिए गए निर्णय को वापस लिया, वहीं  मोहल्ले की परचून की दुकानों में अंग्रेजी शराब की उपलब्धता बनाने का प्राविधान कर दिया है। कैबिनेट की बैठक में बार लाइसेंस नीति में भी संशोधन किया गया है। बार लाइसेंस एक साल की बजाय तीन साल तक के लिए दिया जाएगा। साथ ही 20 कमरों तक के होटलों का बार लाइसेंस की फीस 5 लाख से घटाकर 3 लाख रुपये कर दी गई है। यह भी पीने वालों के लिए अच्छी खबर है।

अब पीने वालों को शराब के ठेकों तक जाकर अपना वक्त जाया नहीं करना पड़ेगा, अपने मोहल्ले की दुकान में ही बीड़ी, सिगरेट, पान, गुटखे की तरह उन्हें शराब भी मिलने लगेगी। यह बात अलग है कि महिलाओं के लिए अब मोहल्ले की दुकान तक जाना भी सुरक्षित नहीं रहेगा। उन्हें शराबियों की तन को भेदने वाली तीखी नजरों से गुजरना पड़ेगा, अश्लील फब्तियां सुनने को मजबूर होना पड़ेगा। हो सकता है शराबियों की छेड़खानी भी झेलनी पड़े। राज्य की आर्थिक सेहत सुधारने के लिए मातृशक्ति के लिए इतनी क़ुरबानी देनी तो बनती है।

गौरतलब है कि अब तक अंग्रेजी शराब अनुज्ञापित दुकान या फिर ठेके पर ही मिलती रही है। अब सरकार ने शराब की उपलब्धता को मोहल्ले की परचून की दुकान तक होगी। इसमें शर्त इतनी भर रखी गई है कि परचून की दुकान का साल भर का टर्नओवर कम से कम 5 लाख रुपये होना चाहिए और वह 5 लाख रुपये लाइसेंस फीस जमा कर सके।

मालूम हो कि गत वर्ष शराब को जनता से दूर रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णय दिया था, जिसमें शराब की दुकानों को हाईवे से दूर रखने का तर्क दिया गया था। इसकी काट के रूप में सरकार ने नगर निकायों की सीमा में हाईवे को नए सिरे से अधिसूचित कर जिला मार्ग घोषित कर दिये थे। उसके बाद प्रदेश की भाजपा सरकार ने दुकान खोलने की सीमा निर्धारित कर रात में शराब की दुकानें न खोलने का निर्णय लिया, इस निर्णय पर भी सरकार अधिक समय तक नहीं टिक पाई। वहीं इधर पिछले दिनों घोषित आबकारी नीति में 20 किमी के दायरे में एक व्यक्ति या फर्म को चार लाइसेंस देने को मंजूरी दी गई। इस बार की कैबिनेट बैठक में सरकार ने इस नीति को भी पलट दिया है।

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₹ 2900 करोड़ की “शराब पिलाने का बनाया लक्ष्य, राज्य बनने के 18 सालों में 38 गुने से अधिक बढ़ाई शराब की बिक्री

-प्रतिदिन लगभग ₹आठ लाख व हर नागरिक को ₹ आठ रुपये की शराब पिलाने का लक्ष्य 

हम-आप चाहे शराब पीते हों अथवा नहीं, पर सरकार हम सबको मानो ‘पीके’ बनाने पर तुली हुई है। सत्ता में आने से पूर्व शराब व शराब माफिया पर नाक-भौं सिकोड़ने वाली राज्य की भाजपा सरकार भी पिछली सरकारों के नक्शे-कदम पर चलते हुए अपनी जनता को शराब पिलाकर राज्य की आर्थिक सेहत सुधारने का अरमान बनाए बैठी है। वह भी कम-कम नहीं, राज्य के हर बच्चे-बड़़े, महिला-पुरुष-वृद्ध को औसतन ₹ आठ व हर रोज करीब ₹ आठ लाख की शराब पिलाकर राज्य की तिजोरी में ₹ 2900 करोड़ डालने का लक्ष्य बना डाला है। उस पर कुतर्क यह कि यदि सरकार शराब नहीं पिलाएगी तो जनता गुणवत्ताविहीन शराब पीकर मर सकती है। यह तर्क सही है, और जनता की इतनी ही चिंता है तो क्यों अधिक पिलाकर मारने पर तुली है सरकार। है कोई जवाब ?

दैनिक जागरण, 18 अप्रैल 2005

स्थिति यह है उत्तराखंड के लोगों को नये वित्त वर्ष में लगभग ₹ 2900 करोड़ की शराब पीनी होगी, वरना सरकार के लक्ष पूरे नहीं होंगे। राज्य के हर व्यक्ति की प्रतिदिन इसमें लगभग ₹ आठ की ‘‘हिस्सेदारी’ होगी। हैरत की बात है कि 18 साल पहले राज्य बनाने के दौरान जिस पहाड़ में मात्र ₹ 75 करोड रपए की शराब बिकती थी, अब वहां ₹ 2650 करोड़ की शराब अकेले ठेकों से बिकेगी जबकि  270 करोड़ अन्य करों से बटोरे जाने हैं। आबकारी विभाग एक साल की कुल शराब  2650 करोड़ में नीलाम करेगा। इसके बाद लगभग ₹ 270 करोड़ का मुनाफा शराब बेचने वाली दुकानें और बार कमाएंगे। राज्य में ₹ 2650 करोड़ की शराब को कैसे बेचा जाएगा, इसका पूरा खाका तैयार हो रहा है। यह शराब राज्य के 252 देसी और 260 विदेशी शराब की दुकानों में बेची जाएगी। पिछले वित्तीय वर्ष में आबकारी विभाग ने राज्य में ₹ 2400 करोड़ की शराब बेचने का लक्ष्य रखा था। आबकारी विभाग इस लक्ष्य को पाने के करीब है। विभाग अब तक ₹ 2180 करोड़ की शराब बेच चुका है और शेष लक्ष्य की प्राप्ति के लिए शराब के दाम बढ़ाकर अप्रैल तक एक माह का समय बढ़ा दिया गया है। अब प्रदेश में जो 2650 करोड़ की शराब बिकेगी। उसका आगाज एक मई 2018 से होगा। इस भारी भरकम लक्ष्य को पूरा करने के लिए आबकारी विभाग राज्य में नई शराब की दुकानें खोलने की योजना बना रहा है।

पिछले 18 सालों से राज्य की सरकारें भले ही इस पहाड़ी प्रदेश में मौजूद संसाधनों के माध्यम से राजस्व बढ़ाने में विफल साबित हुई हों लेकिन शराब के जरिए सरकारी खजाना भरने में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। उत्तराखंड में 10086292 लोग रहते हैं, जिनमें 51,37,773 पुरुष और 49,48,519 महिलाएं हैं। अगर जोड़-भाग करें तो उत्तराखंड में रहने वाला हर व्यक्ति के हिस्से लगभग लगभग आठ रुपये की शराब आती है।

ऐसे वसूले जाएंगे ₹ 2650 करोड़ 

आबकारी विभाग राज्य में ₹ 2650 करोड़ की शराब की नीलामी करेगा। इसके अलावा एक्ससाइज ड्यूटी से 500 करोड़, शीरा से 70 करोड़, आर्मी कैंटीन से ₹ 100 करोड़, बीयर शुल्क से ₹ 80 करोड़, फैक्टरी लाइसेंस से लगभग ₹ 500 करोड़ और बार लाइसेंस की फीस के मद में लगभग ₹ 25 करोड़ वसूलेगा।

चार दुकानों का ग्रुप बनेगा

आबकारी विभाग पहली बार शराब बेचने वाली चार दुकानों का ग्रुप बनाने जा रहा है। इसके तहत एक जगह आसपास की चार दुकानों का ग्रुप बनाया जाएगा। चारों दुकानें आपस में मिलकर शराब की बिक्री करेंगी।

सब कुछ होगा ऑनलाइन

आबकारी विभाग ने नए वित्तीय वर्ष के लिए शराब की बिक्री को ऑनलाइन कर दिया है। यानि शराब की दुकानों पर बिकने वाली हर बोतल मैनुअल की बजाय ऑनलाइन बिकेगी। इससे दुकानों में बिकने वाली तस्करी से लाई जाने वाली शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की बात कही जा रही है।

शराब कारोबार का काला पक्ष

शराब के कारोबार का एक ‘‘काला’ पक्ष भी है। यह हैं  राज्य में मौजूद शराब तस्कर। पुलिस रिकार्ड में उत्तराखंड पुलिस ने 2013-14 में लगभग 95 करोड़, 2014-15 में लगभग 100 करोड़, 2016-17 में लगभग 90 करोड़ की अवैध शराब पकड़ी। यह वह शराब है जो हिमाचल, पंजाब और हरियाणा से तस्करी करके उत्तराखंड लाई गई।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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