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निर्मल पांडे का आठवीं पुण्यतिथि पर भावपूर्ण स्मरण : बड़े शौक से सुन रहा था ज़माना तुम्हें, तुम ही सो गए दास्तां कहते-कहते….

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र्सरी स्कूल से हॉलीवुड तक का कठिन सफर तय किया था निर्मल ने

नवीन जोशी, नैनीताल। कला की नगरी कहे जाने वाले नैनीताल के बहुत छोटे से मॉल रोड स्थित नगर पालिका द्वारा संचालित नर्सरी स्कूल से हिन्दी में ककहरा सीखने वाला बालक 47 वर्ष की अल्पायु में ही न केवल डेढ़ दर्जन से अधिक हिन्दी फिल्में और दर्जनों नाटक कर आया, वरन कालेज से निकलकर लन्दन में फर्राटेदार अंग्रेजी बोलता हुआ नाटक करने लगा, हॉलीवुड की फिल्मों में भी दिखाई दिया, और सात समुन्दर पार फ्रांस के केन्स फिल्मोत्सव में एक अभिनेता होते हुए भी ‘सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री’ का पुरस्कार प्राप्त करने वाला देश का एकमात्र अभिनेता बन गया। 47 वर्षों की इस छोटी सी कहानी को उसके नगर, प्रान्त और देश वासी और अधिक लंबा देखना-सुनना चाहते थे, लेकिन दुनियां के निर्मल और नैनीताल के नानू इस कहानी को आधा-अधूरा छोड़ कर हमेशा के लिए विदा हो गया। 

[निर्मल पांडे : जन्म- 10 अगस्त 1962, मृत्यु- 18 फ़रवरी 2010, मुम्बई, पत्नी- अर्चना शर्मा (विवाह 2005–2010) व  कौसर मुनीर (विवाह 1997–2000)]

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निर्मल की 47 वर्षों की छोटी जीवन यात्रा में उनके स्टार बनने के बाद की कहानी तो शायद सबको पता हो, लेकिन इससे पीछे की कहानी थोटे शहरों में बड़े सपने देखने वाले किसी भी युवक के लिऐ प्रेरणास्पद हो सकती है। अभिनय की प्रतिभा खैर उन्हें विरासत में मिली। उनके नाना जय दत्त पाण्डे मशहूर कथावाचक थे, जबकि योजना विभाग में बड़े बाबू पिता हरीश चन्द्र पाण्डे एवं माता रेवा पाण्डे की भी संगीत में गहरी रुचि थी। नर्सरी स्कूल से निकलकर नगर के सीआरएसटी इंटर कालेज में पहुंचते निर्मल के भीतर का कलाकार बाहर आ गया। सीआरएसटी से ही निर्मल ने 1978 में तारा दत्त सती के निर्देशन में स्कूल के रामलीला वैले से बड़े भाई मिथिलेश के साथ राम-लक्ष्मण की भूमिका अदा कर अभिनय की शुरूआत की थी। इसे देख स्कूल के सांस्कृतिक क्लब के अध्यक्ष मरहूम जाकिर हुसैन साहब निर्मल से इतने प्रभावित हुऐ कि इस नन्हे बालक को क्लब का सचिव बना दिया। इस दौरान उन्होंने सीआरएसटी के ‘गोल्डन जुबली’ समारोह में भष्मासुर व पंचवटी वैले नृत्य नाटिकाएं कीं। भष्मासुर में वे विष्णु तथा मिथिलेश शिव तो पंचवटी में वे ‘शूर्पनखा’ और मिथिलेश राम बने थे। आगे 1980 में डीएसबी कॉलेज में पढ़ने के दौरान ही निर्मल नगर की ‘युगमंच’ संस्था से जुड़े और डीएसबी से एमकॉम करने लगे। इस दौरान उन्होंने ‘राजा का बाजा’  और’ हैमलेट’ व कुमाऊँ की सुप्रसिद्ध लोक गाथा पर आधारित ‘अजुवा बफौल’ तथा एनएसडी के निदेशक रहे बृजमोहन साह लिखित ‘युद्धमन’ सहित कई नाटकों के जरिये अपने अभिनय के साथ निर्देशन को भी नऐ आयाम दिऐ।

युगमंच के लिए ‘अनारो’ उनका पहला नाटक था। पहले प्रयास में ही वह 1986 में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) दिल्ली चले गऐ, और एनएसडी के लिए भी उन्होंने ‘अजुवा बफौल’ सहित कई नाटक किऐ। 89 में एनएसडी ग्रेजुऐट होते ही वह लन्दन की ‘तारा आर्ट्स’ संस्था से जुडे़ और संस्था के लिए सैक्सपियर के कई अंग्रेजी नाटक किऐ। इस दौरान उन्होंने विश्व भ्रमण भी किया, और इसी दौरान के प्रदर्शन पर शेखर कपूर ने उन्हें `बैण्डिट क्वीन´ फिल्म में ब्रेक दिया। जिसके बाद ही वह रुपहले पर्दे पर अवतरित हुऐ। आगे ‘दायरा’ फिल्म में महिला के रोल के लिए उन्हें केन्स फिल्म समारोह में फ्रांस का सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला। उनसे प्रेरणा पाकर नगर के सुवर्ण रावत, योगेश पन्त, ज्ञान प्रकाश, सुमन वैद्य, सुनीता चन्द, ममता भट्ट, गोपाल तिवारी, हेमा बिष्ट आदि कई कलाकारों ने एनएसडी का रुख किया, इनमें से कई बॉलीवुड में स्थापित भी हुऐ हैं। शायद इसी लिए उनके साथी रहे वरिष्ठ रंगकर्मी जहूर आलम एवं उनके पूर्व शिक्षक एवं प्रधानाचार्य मोहन लाल साह कहते हैं, ऐसा लगता है मानो पहाड़ टूट गया हो। पहाड़ उन्हें बड़ी उम्मीदों से बहुत आगे जाता देख रहा था, अफसोस वह ही सो गऐ दास्तां कहते कहते….।

राष्ट्रीय सहारा, 18 फ़रवरी 2018

निर्मल की फ़िल्में व उनके द्वारा निभाए चरित्र :

  1. Mudrank : The Stamp (2015) –
  2. Lahore (2010) – Anwar Shaikh
  3. Kedi (Telugu film) (2010)
  4. Deshdrohi (2008) – Nagesh Kulkarni
  5. Raajkumar Aaryyan (TV series) (2008) – Senapati Bhujang
  6. Dacait TV series (2006)
  7. Princess Dollie Aur Uska Magic Bag (TV series) (2005) – a mysterious king
  8. Laila (2005) – Filmstar
  9. Kkavyanjali – Navin Nanda
  10. Patth (2003) – Bhullar
  11. Hatim (TV series) ( 2003) Dajjal
  12. Aanch (2003) – Kirti Thakur
  13. Deewangee (2002) – Abhijeet Mehta
  14. One 2 Ka 4 (2001) – Krishan Kant Virmani
  15. Shikari (2000)
  16. Dubai (2001 film) – Kishan Batta
  17. Hadh Kar Di Aapne (2000) – Sanjay
  18. Hum Tum Pe Marte Hain (1999) – Dhananjay
  19. Godmother (1999) – Jakhra
  20. Jahan Tum Le Chalo (1999)
  21. Pyaar Kiya To Darna Kya (1998) – Thakur Vijay Singh
  22. Train To Pakistan (1998)
  23. Auzaar (1997) – Baba
  24. Daayraa (1996) – The Transvestite
  25. Is Raat Ki Subah Nahin (1996) – Aditya/Adi
  26. Bandit Queen (1994) – Vikram Mallah
  27. Koi Bach Na Payega
  28. 8 pm
  29. Son Pari – Zarakh
  30. Lucky – Baltazaar
  31. Inspector Kiran – the lawyer

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रंगों के पर्व पर गए, सीएम की घोषणा के बावजूद नहीं बनी रंगशाला

नैनीताल। रंगकर्म व रंगीन परदे के कलाकार निर्मल पांडे का निधन 18 फ़रवरी 2010 को मुम्बई में रंगों के त्यौहार होली के दौरान हुआ था। उनके निधन से नगर व देश के रंगकर्म में आई रंगों की कमी को भरने के लिए नगर के रंगकर्मी 2010 से ही नगर में निर्मल पांडे के नाम से रंगशाला के निर्माण की मांग कर रहे हैं। इस बीच 2016 के शरदोत्सव में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसकी घोषणा भी की। बावजूद आज तक रंगशाला नहीं बन पाई है। युगमंच के जहूर आलम का इस पर कहना है कि कई वर्ष से रंगकर्मियों के आंदोलन के बावजूद शासन-प्रशासन व सरकार के कानों पर जूं भी नहीं रैंग रही है। कलाकारों की शक्ति नाटकों के लिये लाइट और साउंड की व्यवस्था करने में जाया हो रही है। लिहाजा अब ऐसे कानों पर चीखने की जरूरत आ पड़ी है। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में भी नैनीताल के रंगकर्मी नाटक करके साबित कर रहे हैं कि नाटक क्या होता है, और नाटक करने वाले कैसे होते हैं। वे ‘रंगकर्म को जीते हैं।’

इधर नगर के नैनीताल क्लब स्थित शैले हॉल के महँगा होने से उनकी आठवीं पुण्यतिथि पर होली गायन का कार्यक्रम यहाँ नहीं हो पा रहा है नैनीताल क्लब में ही कार्यरत उनके बड़े भाई मिथिलेश पांडे ने बताया की उनके आवास पर यह कार्यक्रम होगा।

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मेरा जन्म 26 नवंबर 1972 को हुआ था। मैं नैनीताल, भारत में मूलतः एक पत्रकार हूँ। वर्तमान में मार्च 2010 से राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक समाचार पत्र-राष्ट्रीय सहारा में ब्यूरो चीफ के रूप में कार्य कर रहा हूँ। इससे पहले मैं पांच साल के लिए दैनिक जागरण के लिए काम कर चुका हूँ। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ‘नए मीडिया’ विषय पर शोधरत हूँ। फोटोग्राफ़ी मेरा शौक है। मैं NIKON COOLPIX P530 और अडोब फोटोशॉप 7.0 के साथ फोटोग्राफी कर रहा हूँ। फोटोग्राफी मेरे लिए दुनियां की खूबसूरती को अपनी ओर से चिरस्थाई बनाने का बहुत छोटा सा प्रयास है। एक फोटो पत्रकार के रूप में मेरी तस्वीरों को नैनीताल राजभवन सहित विभिन्न प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया, तथा उत्तराखंड की राज्यपाल श्रीमती मार्गरेट अलवा द्वारा सम्मानित किया गया है। कुछ चित्रों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुके हैं। गूगल अर्थ पर चित्र उपलब्ध कराने वाली पैनोरामियो साइट पर मेरी प्रोफाइल को 18.85 Lacs से भी अधिक हिट्स प्राप्त हैं।पत्रकारिता और फोटोग्राफी के अलावा मुझे कवितायेँ लिखना पसंद है। काव्य क्षेत्र में मैंने नवीन जोशी “नवेन्दु” के रूप में अपनी पहचान बनाई है। मैंने बहुत सी कुमाउनी कवितायेँ लिखी हैं, कुमाउनी भाषा में मेरा काव्य संकलन उघड़ी आंखोंक स्वींड़ प्रकाशित हो चुका है, जो कि पुस्तक के के साथ ही डिजिटल (PDF) फार्मेट पर भी उपलब्ध होने वाली कुमाउनी की पहली पुस्तक है। मेरी यह पुस्तक गूगल एप्स पर भी उपलब्ध है। ’ यहां है एक पत्रकार, लेखक, कवि एवं छाया चित्रकार के रूप में मेरी रचनात्मकता, लेख, आलेख, छायाचित्र, कविताएं, हिंदी-कुमाउनी के ब्लॉग आदि कार्यों का पूरा समग्र। मेरी कोशिश है कि यहां नैनीताल, कुमाऊं, उत्तराखंड और वृहद संदर्भ में देश की विरासत, संस्कृति, इतिहास और वर्तमान को समग्र रूप में संग्रहीत करने की….। मेरे दिल में बसता है, मेरा नैनीताल, मेरा कुमाऊं और मेरा उत्तराखंड

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